Khelenge Hum Holi : 25 : Tumhare Liye.

 ©️®️ M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Presentation.
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Khelenge Hum Holi : Rang Barse.  
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A Live / Archive  Blog Magzine Page.
Yaad Rahegi Holi Re : Rang Barse : Festival Page.
Volume 1.Series 4. 
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खेलेंगे हम होली. 
रंग बरसे. 
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आवरण पृष्ठ :०. 

खेलेंगे हम होली : तुम्हारे लिए : रंग बरसे : आवरण : शक्ति. विदिशा.  
ओ बसंती पवन पागल : आवरण पृष्ठ : कोलाज : विदिशा.

फोर स्क्वायर होटल : रांची : समर्थित : आवरण पृष्ठ : विषय सूची : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली.

आवरण पृष्ठ : ०.





*
एकीकृत ' हम ' मीडिया देवशक्ति परिवार.
की तरफ़ से आप समस्त को
होलीदहन की अनंत बधाई

*

होलिका * दहन  शक्ति शपथ.
*
हम सभी मीडिया देवशक्ति परिवार
की होलिका शक्ति शपथ हैं कि इस होलिका दहन में, 
हम अपनों के लिए अपने भीतर के क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिकार
 की आहुति देंगे 
और उनकी सफलता ,स्वास्थ्य, सुख,समृद्धि, सम्पति की मंगल कामना 
करते हुए निःस्वार्थ प्रयास भी करते रहेंगे    


*


एम. एस. मीडिया.महाशक्ति.प्रस्तुति.

पत्रिका / अनुभाग.
ब्लॉग मैगज़ीन पेज के निर्माण सहयोग के लिए.
' तुम्हारे लिए. '
-------------
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०
---------------
शिमला.डेस्क.
नैनीताल डेस्क.
इन्द्रप्रस्थ डेस्क

संपादन

शक्ति.शालिनी.स्मिता.वनिता.शबनम



संयोजिका / मीडिया हाउस ,हम मीडिया परिवार
की तरफ़ से
आपके लिए धन्यवाद ज्ञापन.

पत्रिका के निर्माण / संरक्षण के लिए

*
हार्दिक आभार.
*
*
माननीय
डॉ. दीना नाथ वर्मा . फिजिसियन.
दृष्टि क्लिनिक. बिहार शरीफ़.
*
विषय सूची : पृष्ठ : ०.

कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे.प्रारब्ध : विषय सूची : पृष्ठ : ०. 
सम्पादित. डॉ. सुनीता सीमा शक्ति प्रिया.
*
आवरण पृष्ठ : ०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.  
विषय सूची : पृष्ठ : ०.
कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे : प्रारब्ध : पृष्ठ : ०.
कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे : प्रारब्ध : शक्ति लिंक : पृष्ठ : ०. राधिकाकृष्ण : महाशक्ति : इस्कॉन डेस्क : नैनीताल. पृष्ठ : ० / १. रुक्मिणीकृष्ण : महाशक्ति : दर्शन दृश्यम : विचार डेस्क : नैनीताल. पृष्ठ : ० / २ . मीराकृष्ण : महाशक्ति डेस्क : मुक्तेश्वर : नैनीताल. पृष्ठ : ० / ३.
त्रिशक्ति जीवन दर्शन विचार धारा : पृष्ठ : १.
त्रिशक्ति जीवन दर्शन विचार धारा लिंक : पृष्ठ : १. 
त्रि - शक्ति : दर्शन. पृष्ठ : १ / ०. त्रिशक्ति : विचार : दृश्यम : पृष्ठ : १ / ० . त्रिशक्ति : लक्ष्मी डेस्क : सम्यक दृष्टि : कोलकोता : पृष्ठ : १ / १. त्रिशक्ति : शक्ति डेस्क : सम्यक वाणी : नैनीताल : पृष्ठ : १ / २. त्रिशक्ति : सरस्वती डेस्क :सम्यक कर्म : जब्बलपुर : पृष्ठ : १ / ३.
महाशक्ति : जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १ / ४. 
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ : ४.
मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७ 
खेलेंगे हम होली : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
खेलेंगे हम होली : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १२.
चलते चलते : शुभकामनाएं : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
आपने कहा : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १४.

*

समाज सेवी रवि रंजन : संयुक्त शक्ति मनीषा रंजन : शिशु उद्यान : बिहार शरीफ : समर्थित * ------------ कृष्णराधिका दर्शन. संभवामि युगे युगे : प्रारब्ध : पृष्ठ : ०.
------------ कृष्णराधिका दर्शन. धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे : लिंक

*
पूर्व विचार देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
*
अद्यतन *
----------
कृष्णराधिका  : जीवन शक्ति चित्र विचार धारा : आज : पृष्ठ : ० / १ 
-----------
कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे. 
अंक : १. प्रारब्ध :  पृष्ठ : ०. 
*
इश्क़ : तकलीफ़ और खुदा 
*
वो इश्क़ ही क्या जो तकलीफ़ न दे 
और उस रंजो गम से आदमी को आम से ख़ुदा न बना दें 

*
कृष्णराधिका : जीवन शक्ति विचार धारा : दृश्यम : आज :
दृश्यम : अद्वितीय : साभार 
*
कर्म योग 
कृष्ण : कर्म योग ही जीवन का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है पार्थ 
*
 
*
माधव का देह त्याग : दृश्यम 


* 

*
----------
राधिकाकृष्ण : जीवन शक्ति विचार धारा. पृष्ठ : ० / १.
-------------
इस्कॉन डेस्क : नैनीताल. पृष्ठ : ० / १.



*
संपादन.
राधिकाकृष्ण : जीवन शक्ति विचार धारा : नमामि यमुने : पृष्ठ : ० : 
राधिकाकृष्ण डॉ.सुनीता शक्ति प्रिया.

 

राधिकाकृष्ण डॉ.सुनीता शक्ति प्रिया. 

*
-------------
राधिकाकृष्ण : जीवन शक्ति विचार धारा : लिंक.पृष्ठ : ० :
-------------
राधिकाकृष्ण : जीवन शक्ति विचार धारा : लिंक

*
पूर्व विचार देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं

*
अद्यतन.
*
----------
कृष्णराधिका : रुक्मिणी : मीरा महाशक्ति डेस्क : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ३
--------- 
डॉ. सुनीता मीना शक्ति शालिनी प्रिया. 
मुक्तेश्वर : नैनीताल.
मेरे तो गिरधर गोपाल दुसरो न कोय : राधा : रुक्मिणी : मीरा : फोटो कोलाज : डॉ. सुनीता शक्ति शालिनी प्रिया. 
*
--------
कृष्ण शक्ति : राधिका  रुक्मिणी : मीरा : विचार मंजूषा : पृष्ठ : ४ 
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दिल के रिश्ते
   कम रिश्ते बनाइये और....उन्हें दिल से निभाइए....!

*
जीवन के प्रश्न 

जीवन बहुत जटिल है । उत्तर खोजने की कोशिश न करें 
------------
*
  सम्पादन.डेस्क.
 वृन्दावन. बरसाने.नई दिल्ली. 


अध्यात्मिक सम्पादन. 
राधा कृष्ण मंदिर मुक्तेश्वर.
इस्कॉन डेस्क.नैनीताल.
शक्ति. 
अनुराधा. मीना.

*
-------------- 
त्रिशक्ति जीवन दर्शन : विचार धारा : पृष्ठ : १ 
------------


त्रिशक्तियाँ : लक्ष्मी, शक्ति और सरस्वती. 


*
तीन पिण्डियों के एकीकृत शक्ति रूप में : वैष्णो देवी के दर्शन.
मेरी जीवनशक्ति  : त्रिशक्ति : एकता की शक्ति : लक्ष्मी : शक्ति : सरस्वती  
------------
त्रिशक्ति : जीवन दर्शन : विचार धारा : पृष्ठ : १. 
------------
संपादन.


*
शक्ति सीमा शक्ति * अनीता.

*
त्रिशक्ति विचार धारा लिंक. ०१. 
पूर्व विचार देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं

टाइम्स मिडिया लाइव प्रस्तुति. 


*
अद्यतन *
महालक्ष्मी डेस्क : कोलकोता : शब्द  चित्र विचार : शक्ति सीमा.पृष्ठ : ०
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्...
*
महालक्ष्मी डेस्क : कोलकोता : दृश्यम  : शक्ति सीमा.पृष्ठ : ० 
श्री लक्ष्मीनारायण के दस* अवतार
मत्स्य, कुर्म, बराह, वामन, नरसिंह, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि   

*
 एम. एस. मीडिया. प्रस्तुति. 
त्रिशक्ति : शक्ति : नैनीताल डेस्क : शब्द चित्र विचार शक्ति : शक्ति *पृष्ठ : ०  
*
त्रिशक्तियों की होलिका मैत्री.

*
प्रथम मीडिया प्रस्तुति.
त्रिशक्ति : सरस्वती : नर्मदा डेस्क : दृश्यम : शक्ति अनीता : पृष्ठ : 
जया किशोरी : कृष्ण ने मर्यादा तोड़ी,क्यों ?  
*

-----------
 महाशक्ति : जीवन दर्शन : विचार धारा : पृष्ठ : १ / ४ 
-------------
*

महाशक्ति : जीवन दर्शन : विचार धारा.  


संपादन.


शक्ति. डॉ सुनीता शक्ति* प्रिया.

*
महाशक्ति विचार धारा लिंक : पृष्ठ : १ / ४. 
*

*
अद्यतन
महाशक्ति : जीवन दर्शन : शब्द चित्र : आज : पृष्ठ : १ / ४. 
' मौन ' उत्तम है लेकिन ' निर्णय ' के समय यदि आप मौन हैं,
*

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नवशक्ति : जीवन दर्शन : विचार धारा : पृष्ठ : १ / ५ 
--------------
ए एंड एम मीडिया शक्ति प्रस्तुति 



*
शक्ति दर्शन : नव शक्ति


*
संपादन.
शक्ति. रेनू अनुभूति नीलम.


*
पूर्व नवशक्ति : जीवन दर्शन : विचार धारा. देखने व पढ़ने के 
लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं 
*
नवशक्ति विचार धारा लिंक.
https://msmedia4you.blogspot.com/2025/03/navshakti-jeevan-darshan-vichar-dhara.html
*
अद्यतन*
नवशक्ति विचार धारा लिंक. के अंदर पढ़ें
सम्पादकीय : पृष्ठ : १ 
चैत्र नवरात्रि : शक्ति पूजा. 
प्रकृति में व्याप्त वास्तविक शिव शक्तियों को सम उचित सम्मान दें

*
शक्ति आलेख. 
डॉ. सुनीता मधुप शक्ति * प्रिया अनुभूति.
*

सम्पादकीय : पृष्ठ : २.

-----------
संपादन डेस्क.
शक्ति नैना देवी . 
नैनीताल. प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६. 
संस्थापना वर्ष : १९९८. महीना : जुलाई. दिवस :४.

एम. एस. मीडिया. महाशक्ति प्रस्तुति. 
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.



शक्ति डॉ. रश्मि नारायण. नालन्दा हड्डी एवं रीढ़ सेंटर . बिहार शरीफ. समर्थित 

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संपादकीय शक्ति समूह. जीवन दर्शन : दिव्य विचार : दृश्यम लिंक समूह : पृष्ठ : २/०.
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*

©️®️Shakti's Project.   
संपादन शक्ति समूह. 
@M.S.Media.
प्रथम मिडिया. संपादन : शक्ति.डॉ.नूतन.माधवी.सुष्मिता.वाणी. अनीता.
एम. एस. मीडिया. संपादन : शक्ति.डॉ.सुनीता.मंजिता. शक्ति * प्रिया
ए. एंड. एम. मीडिया. संपादन : शक्ति. रेनू अनुभूति नीलम अंजू.
टाइम्स मिडिया. संपादन : शक्ति.डॉ.अनुपम.मीना.सीमा.रीता    
नवीन समाचार : संपादन : शक्ति : बीना नवीन जोशी 
केदार दर्शन : संपादन : शक्ति : दया जोशी.
ख़बर सच है : शक्ति : स्मृति. 
समर सलिल : शक्ति : नीरजा चौहान. 
शालिनी मीडिया : शक्ति : शालिनी.तनु. 
*

महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति.
मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक :

------------
सम्पादकीय आलेख गद्य पद् संग्रह : मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक : आज : पृष्ठ : २ / १.
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सम्पादित.
शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया अनीता अनुभूति.
Shakti's Project.
प्रधान सम्पादिका. शक्ति.नीलम :
वाराणसी.
सम्पादकीय शक्ति नीलम आलेख लिंक : २ / १.
press the shakti link : 2/1
*
*
अद्यतन*
आकाश दीप : नीलोउद्गार : पद्य संग्रह : पृष्ठ : ३. लघु कविता : छूने लगी है आसमान.
 तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ : ४ .अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस २०२५.

        
------------
सम्पादकीय आलेख गद्य पद् संग्रह : मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक : आज : पृष्ठ : २ / २
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सम्पादित.
शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया मीना अनुभूति
Shakti's Project.
प्रधान सम्पादिका.शक्ति रेनू शब्द मुखर.जयपुर.
सम्पादकीय पृष्ठ : में उपलब्ध. सम्पादकीय शक्ति आलेख लिंक : २ /२.
मुझे भी कुछ कहना है.
press the shakti link : 2/2.
अद्यतन*
*

शक्ति. रेनू शब्द मुखर.जयपुर. 
स्वयं निर्मित : शॉर्ट रील : पृष्ठ  : ५  
*
हर कदम पर इम्तेहां मिलेगा 
*
------------
आप ने कहा  : प्रस्तुति : पृष्ठ : ७   .
-----------
संपादन. 
ख़ुशी : शॉर्ट रील : वो है जरा ; ख़फ़ा ख़फ़ा 

-----------
संपादन 
संपादन : डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया.
दार्जलिंग डेस्क   
पृष्ठ सज्जा : शक्ति. अनुभूति मंजिता 
शिमला डेस्क.
साभार : शक्ति पारुल* : लख़नऊ : शॉर्ट रील. 
*
यही पर कहीं है मेरे मन का चोर 
*
दिल में कब तक करोगे बसेरा साथ कब तक न छोड़ोगे मेरा  
धरती  छोड़ें न सूरज का फेरा साथ छोड़ेंगे यूँ न हम तेरा 

------------
सम्पादकीय आलेख गद्य पद्य संग्रह : मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक : आज : पृष्ठ : २ / ३.
----------------
सम्पादित.
शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया अनीता अनुभूति
 ©️®️ M.S.Media.Shakti Project.
संयोजिका. शक्ति शालिनी.उत्तर प्रदेश.
खेलेंगे हम होली : सम्पादकीय पृष्ठ : २/ ३ में उपलब्ध.
सम्पादकीय शक्ति आलेख लिंक : मुझे भी कुछ कहना है
में आगे पढ़ने के लिए सिर्फ दिए गए उपलब्ध लिंक को दबाएं और पढ़ें.
press the shakti link : 2/3.
अद्यतन*
सम्पादकीय : शक्ति : लघु फ़िल्में : दिल क्या करें : कृति संग्रह.आजकल : झरोखा : पृष्ठ :०
*
टाइम्स मीडिया शक्ति प्रस्तुति 
शक्ति.खुशी : देहरादून : शॉर्ट रील. साभार. 
जानू न मैं तो जानू न रूठे रूठे पिया को मनाना 
*
एम. एस. मीडिया. शक्ति * प्रस्तुति साभार .
शक्ति.खुशी : देहरादून : शॉर्ट रील. साभार. 
 मोहब्बत जो करते है वो मोहब्बत जताते नहीं 
*
  प्रथम मीडिया. शक्ति * प्रस्तुति : साभार.
साभार : उत्तराखंड : ख़ुशी : शॉर्ट रील : देहरादून 
वो हैं जरा ख़फ़ा ख़फ़ा तो नैन यूँ चुराए हैं 
*
राधिकाकृष्ण : शक्ति : फोटो दीर्घा  : आज और कल : पृष्ठ : ५ .
फोटो : कोलाज : शक्ति. शालिनी डॉ. सुनीता शक्ति प्रिया . 
मोहे पनघट पर नन्दलाल छेड़ गयो रे : फोटो कोलाज : शक्ति : महाशक्ति मीडिया. 
*  
------------
सम्पादकीय आलेख गद्य पद् संग्रह : मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक : आज : पृष्ठ : २ / ४
----------------
सम्पादित.
शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया अनीता अनुभूति.
Shakti's Project.
कार्य कारी सम्पादिका. शक्ति.डॉ. सुनीता मधुप शक्ति* प्रिया.
दार्जलिंग.
सम्पादकीय शक्ति आलेख : राधिका कृष्ण : ढ़ाई अक्षर प्रेम का.
पढ़ने के लिए उपलब्ध नीचे दिए गए शक्ति लिंक को दबाएं और पढ़ें.
press the shakti link : 2/4
अद्यतन*
*
मुझे भी कुछ कहना है : ढ़ाई अक्षर प्रेम का : लघु फिल्में : : विचार : पृष्ठ : ५ / १ .
साभार : ख़ुशी ; उत्तराखंड : शॉर्ट रील :
*
कल रहे न रहें मौसम ये प्यार का
कल रुके या न रुके डोला बहार का
चार पल मिले जो आज प्यार में गुजार दे
खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
*

-----------
सम्पादकीय आलेख गद्य पद् संग्रह : मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक :पृष्ठ : २ / ५.
----------------
सम्पादित.
शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया अनीता अनुभूति
Shakti's Project.
डॉ. आर के दुबे..
सम्पादकीय आलेख शक्ति लिंक में पढ़ने के लिए उपलब्ध नीचे दिए गए लिंक को दबाएं और पढ़ें.
*press the shakti link : 2/5.
डॉ. आर के दुबे : सम्पादकीय : पद्य संग्रह. आलेख .पृष्ठ : २ 
कान्हा छोड़ वृन्दावन में कहा भागे जाय : २/३ .
लाइव काव्य पाठ तीसरा आयोजन सम्मान-पत्र.शुभकामनायें : आपने कहा : पृष्ठ :५. 
*  
------------
सम्पादकीय आलेख गद्य पद् संग्रह : मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक: पृष्ठ : २/६. ----------------
सम्पादित. शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया अनीता अनुभूति ©️®️Shakti's Project. अरुण कुमार सिन्हा. लेखक कवि विचारक दिग्दर्शक. खेलेंगे हम होली : सम्पादकीय पृष्ठ : २/६ में उपलब्ध. सम्पादकीय आलेख शक्ति लिंक में : २/६ : अरुण : मुझे भी कुछ कहना है
सम्पादकीय आलेख शक्ति लिंक में पढ़ने के लिए उपलब्ध नीचे दिए गए लिंक को दबाएं और पढ़ें. press the given shakti link : 2/6.
अद्यतन*.
आन्तरिक चेतना का जाग जाना : मौन‌ : सम्पादकीय आलेख : ३२. 
*मन की आन्तरिक चेतना का जाग जाना :
*कुरु सभा : भीष्म पितामह, विदूर और धृतराष्ट्र का मौन  :
*परमेश्वर की वाणी सच को सच और झूठ को झूठ  :
*

------------ सम्पादकीय आलेख गद्य पद् संग्रह : मुझे भी कुछ कहना है : शक्ति लिंक : पृष्ठ : २/८. ---------------- सम्पादित. शक्ति.डॉ.सुनीता सीमा शक्ति* शालिनी प्रिया अनीता अनुभूति. ©️®️Shakti's Project.. शक्ति. दया जोशी.

* एम. एस. मीडिया समर्थित सहयोगी. शक्ति मीडिया. केदार दर्शन. नैनीताल.शक्ति दया. प्रस्तुति. आज का पचांग / राशि फल / सम्यक वाणी : अन्य के शक्ति विचार:
सम्पादकीय / शक्ति लिंक :पृष्ठ : २ /८.
३१ .मार्च.ग्रेगोरीयन २०२५ / विक्रम संवत. २०८१ / शक संवत १९४६ .आज का' पचांग :
देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दबाएं.

*
press the below given shakti link : 2/8.
*
अद्यतन*
*
 २३ .मार्च : आज का पचांग / राशि फल : केदार दर्शन / नैनीताल / लिंक : पृष्ठ : ० 
*

*
ए.एंड एम. प्रस्तुति.


शक्ति .डॉ. ममता. सुनील.ममता हॉस्पिटल : बिहार शरीफ समर्थित.
------------
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : रंग भरे जीवन में : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
--------------
शिमला डेस्क.
संपादन.
प्रधान सम्पादिका.


शक्ति. रेनू शब्द मुखर.जयपुर.
*
भाविकाएँ
*
शिकायत है हज़ार उनसे याद है हमें 
*

फोटो : शक्ति. स्मिता. 


  शिकायत है हज़ार उनसे याद है हमें 
अश्कों में उन शिकवों का बह जाना याद है हमें  
गले लगाकर सारे दर्द भूल जाना याद है हमें 
उनके इंतेज़ार में ख़ुद को सजाना याद है हमें 
उनकी ख़ुशबू में मदहोश हो जाना याद है हमें 
किसे कहूँ हाल-ऐ-दिल
उनकी ना होकर भी ख़ुद को 
उनकी कहलाना याद है हमें 
उन्हें पाकर ख़ुद को भूल जाना याद  है हमें 
शिकायत हैं हज़ार उनसे याद है हमें 
 उस वक़्त का यूँ रेत सा फिसल जाना याद है हमें 


कवयित्री. शक्ति. स्मिता
एंकर.  पटना दूरदर्शन.
पृष्ठ सज्जा :  शक्ति अनुभूति प्रिया 
---------
श्री राधिका कृष्ण सदा सहायते 
*
भाविकाएँ : भक्ति 
*

फोटो : श्री कृष्ण : राधा : मीरा 

 अगर  जीवन भर साथ निभाने  की बात की है 
तो सम्यक ' वाणी ' , ' आस्था ', ' प्रेम ' , ' सहिष्णुता ' 
की कभी भी आस नहीं छोड़ते, 
श्री हरि : राम : कृष्ण ही शिव है
मेरी जीवन अनंत ' शक्ति ' हैं 
थामा है अगर हाथ तो कभी साथ नहीं छोड़ते 
त्रि - शक्ति मय हैं हम 
मत भूलिए  संकट की वेला में ही होते 
त्रि - शक्ति पूर्ण 
श्री राधिकाकृष्ण सदा सहायते.

@ डॉ सुनीता मधुप शक्ति* प्रिया 
 
---------
' होली के रंग '


होली आई, होली आई,
आई और आकर चली गई.
पिचकारी की बौछारो से,
छोड़ गई है सबके बीच.
प्यार दुलार के लाल रंग,
उमंग भरी बसंती बयार के संग.
हंसी खुशी के जाने कितने रंग?
किसी ने तन भिगोया होगा,
लगाए होंगे, किसी ने गुलाल.
लाल, गुलाबी, हरा, बसंती,
पीले ,नीले हो गए होंगे गाल.
इन रंगों से सराबोर मेरा मन,
सोच रही हूं , शिद्दत से अब,
होली के रंग उतर जाते हैं जैसे !
प्रीत का रंग भी, वैसे ही क्या?
छोड़ के रंग, अपना दिलों पर,
उतर जाते हैं, आहिस्ता-आहिस्ता.


नीलम पांडेय. 
वाराणसी.
--------
तुम्हारे लिए.


रोते तब भी थे 
रोते अब भी हैं
तब तुम्हारे कंधे पे 
सर रखकर रोते थे 
अब अकेले  रोते हैं.
लड़ते तब भी थे, 
लड़ते अब भी हैं,
अब ख़ुद से लड़ते हैं.


फोटो : स्मिता. 

मरते तब भी थे,
मरते अब भी है 
कल तुमपे मरते थे, 
अब तुम्हारे लिए, 
तुम्हारे बिना मरते हैं.
हासिल करना है, 
तो कुछ गंवाना होगा , न ? 
*
 कवयित्री.शक्ति. स्मिता.
पाटलिपुत्र डेस्क. 
----------
मानसी पंत. 
नैनीताल.
 

फ़ोटो : मानसी 

माना काँटे हैं, चुभने हैं तो चुभेंगे ही
फूंक फूंक के कदम रखना छोड़ दे

पंख हैं,नहीं भी गर तो ज़िगर है ना
उड़ना है अब तो दायरों को छोड़ दे

हासिल करना है कुछ गंवाना होगा
खुदा को पा लेगा खुद को छोड़ दे

जो जंजीर बनी है रब ने बनाई है
उसे कैद समझना अब तो छोड़ दे

जो तपिश आ रही है उसे सेक, मग़र
मेहनत कर, बाकी "उसपे" छोड़ दे 
*
पृष्ठ सज्जा : संपादन 
शक्ति. कंचन पंत. 
नैनीताल. 
-----------
खुशियों के रंग.
भाविकाएँ

*

जीवन के संग . 
-------
लोगों का काम है कहना.


फोटो : साभार.
लोगों का काम है कहना
कुछ तो लोग कहेंगे
सुनो अग्निस्वरूपा,
यह समाज अनगिनत कसौटियां रखेगा,
हर उत्तर नया प्रश्न ही जनेगा.
पर तुमको उत्तर नहीं देना,
बस अपनी अग्नि से राहें गढ़नी हैं.

रेनू शब्दमुखर.जयपुर.
*
---------------
*
लघु कविता.

प्रेम

फगुआ गीत.

  नैन से नैन मिलाके सावंरिया
रंग डारी मोरी कोरी चुनरिया



बहुरंगी बलमुआ मन भायो रे,
सतरंगी सजनवा मन भायो

नैन से नैन मिलाके सावंरिया
रंग डारी मोरी कोरी चुनरिया
मोहे इंद्रधनुष सी बनायो रे,
सतरंगी सजनवा मन भायो
बहुरंगी बलमुआ मन भायो रे
सतरंगी सजनवा मन भायो.

गोरे-गोरे गालों पे रंग लगाया
छोड़ा न कहीं अंग-अंग लगाया
मोहे पोर-पोर ही भिगायो रे,
सतरंगी सजनवा मन भायो
बहुरंगी बलमुआ मन भायो रे,
सतरंगी सजनवा मन भायो.

मोहे पिया इतना ना सताओ
मैंने कहा रंग धीरे लगाओ
पिया तनिक तरस नही खायो रे,
सतरंगी सजनवा मन भायो
बहुरंगी बलमुआ मन भायो रे
सतरंगी सजनवा मन भायो.

पिय को मेरे रंग लाल पसन्द है
खूब खेले होली गुलाल पसन्द है
होली में रास रचायो रे,
सतरंगी सजनवा मन भायो
बहुरंगी बलमुआ मन भायो रे
सतरंगी सजनवा मन भायो.

पकड़े पिया मोहे भर अकवारी
फाड़ी चुनर और भिगाई मोरी साड़ी
होली में धूम मचायो रे,
सतरंगी सजनवा मन भायो
बहुरंगी बलमुआ मन भायो रे
सतरंगी सजनवा मन भायो.



शक्ति. शालिनी. कवयित्री
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परिभाषा प्रेम की.
*
शक्ति.रीतारानी.
जमशेदपुर.
*

प्रेम की परिभाषा गढ़ने के लिए ,
आवश्यक नहीं ,
कि आपकी हथेलियों में ,
आबद्ध हों प्रिय की हथेलियाँ.
जब धेनु शिशु के ,
कजरारे बोलते नयन ,
जब खग कलरव ,
जब नभविस्तृत अरुणिम डोरियाँ ,
जब चटख रंग प्रसून के ,
जब उड़ती तितली के पांखों का सौंदर्य ,
जब थिरकते लहलहाते फसल ,
जब बेतरतीब फैली हरियाली ,
की भाषा को ,
पढ़ने के लिए ,
तैयार  हो उठें  ,
तो आप तैयार हैं ,
गढ़ने को ,
प्रेम की परिभाषा.


फोटो : अनुभूति.


जब किसी अनजान रमणी ,
की गोद में भी ,
बालक की मासूम उपस्थिति,
बिखेर दे आपके होठों पर, 
स्वत: स्फूर्त मुस्कान.
जब झंकृत तार ,
किसी वाद्य यंत्र के ,
झंकार उत्पन्न कर दे ,
आपके हृदय में भी.
जब समानुभूति से भर दे ,
किसी जीवन बटोही की ,
अवसाद , थकान ,
आपको भी.
जब ईश्वर की मनोहारी छवि की ,
आनंदमयता की भाषा को ,
अपने  अंतः स्थल में ,
पढ़ने को तैयार हो उठें ,
तो आप तैयार हैं ,
गढ़ने को ,
प्रेम की परिभाषा.

जब फड़कने लगे ,
राष्ट्र गौरव की बातें ,
आपकी नसों में भी.
जब आपके रोम - रोम को ,
स्पंदित कर दे ,
लहराता राष्ट्रध्वज.
जब कृशकाय , लुप्त होती नदियाँ ,
जब बंजर जमीन ,
जब प्रदूषित होता पर्यावरण ,
आने वाली संततियों के लिए ,
व्यथित - बेचैन कर दे आपको ,
जब भविष्य के बढ़ते तमस की भाषा को ,
पढ़ने को तैयार हो उठें ,
तो आप तैयार हैं ,
गढ़ने को ,
प्रेम की परिभाषा.



शक्ति.रीतारानी.
जमशेदपुर.
*
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*
.आकाश दीप : पद्य संग्रह : सज्जा. संपादन.
डॉ.सुनीता शक्ति* अनुभूति प्रिया  

*


ए. एंड. एम. प्रस्तुति.
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तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ : ४.
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संपादन.

शक्ति. नीलम पांडेय.
वाराणसी.
प्रधान सम्पादिका.
*
आप सबों के लिए होली की अनंत मंगल शुभकामनाओं के साथ

रीसेंट डायग्नोस्टिकस पैथ लैब : बिहार शरीफ : डॉ. अखिलेश कुमार : समर्थित.

*
नववर्ष विक्रम संवत शक्ति आलेख : अनंत मंगल शुभकामनाओं के साथ


माननीय. सत्य प्रकाश मिश्रा.
सत्यमेव ज्यते :
भा. पु. से.

संरक्षित.
*
नववर्ष विक्रम संवत  २०८२. 
शक्ति दिवस ,नव रात्रि प्रथम दिवस शैलपुत्री. 
के दिन सम्यक सोच ,वाणी ,कर्म के लिए नूतन शक्ति संकल्प भी लें.
नववर्ष विक्रम संवत शक्ति आलेख : ४ / ७
शक्ति.डॉ. सुनीता मधुप शक्ति* प्रिया.
*

नववर्ष विक्रम संवत. 
शक्ति : कोलाज : शक्ति समूह : नैना देवी डेस्क. नैनीताल. 

विदा ले रहे हिन्दू वर्ष के अंतिम दिन मेरा मन वंदन स्वीकार करें ..क्षमा करें  अगर आपके सम्मान,प्यारदेख रेख लगाव  में मुझसे हमसे कोई भूल हुई हो तो। कल  विक्रम संवत २०८१ का अंतिम दिन था । किंचित आप हमारे जीवन में सकारात्मक भावों की साझेदारी को स्मृत करना चाहता हूँ। 
आज से नववर्ष विक्रम संवत २०८२ प्रारंभ होने जा रहा है।  मैंने यह महसूस किया कि मुझे, हमारी सम्पादिका शक्ति समूह को  उन सभी लोगों का हार्दिक आभार और धन्यवाद करना चाहिए जिन्होंने मुझे,आपको ,हमसबों को  संवत् २०८१  में मुस्कराने की वजह दी है। और आगे आने वाले नववर्ष २०८२ में भी ऐसे अवसर प्रदान करेंगे। सम्यक साथ निभाने के लिए सम्यकसोच ,वाणी ,कर्म के लिए नूतन शक्ति संकल्प भी लेंगे।  
आज अंग्रेजी साल के अनुसार मार्च का दिवस ३० है। हिंदी महीना,तिथि ,दिन  के अनुसार चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस। नवरात्र, शक्ति का स्वरूप शैलपुत्री।  शक्ति का रंग लाल है। 
पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। प्रथम दिन की उपासना में साधक जन अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं।
नव वर्ष की पहली सुबह शक्ति शैलपुत्री आपकी जिंदगी में नई खुशियां लेकर आए आपके सारे सपने पूरे हो आप हमेशा खुश रहे आप जो चाहे वह आपको मिले। इसी आशा के साथ हम सभी शक्ति समूह की तरफ़ से आपको हिन्दू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। 
आप मेरे सर्वाधिक प्रिय जनों में से एक हैं।  उन्हीं में से एक आप हैं , इसलिए आपका हार्दिक आभार है । मैं कैसे भूल सकता हूँ ?
संभव है कि जाने -अनजाने में मेरे कर्म, वचन,स्वभाव से आप को दुख हुआ हो, इसलिए मैं आपसे क्षमा प्रार्थी हूं ।
विश्वास है कि आगामी विक्रम सम्वत २०८२  में भी आप सबका मार्गदर्शन , स्नेह , सहयोग, प्यार , पूर्व की भांति मिलता रहेगा । सनातन हिन्दू नववर्ष  की आपको एवं आपके परिजनों को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ।
संदर्भित शक्ति लघु फिल्म.साभार 
*
ऐ गिरि नंदनी विश्व की स्वामिनी : नव शक्ति दर्शन 
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शक्ति. शबनम वनिता जया सोलंकी. 
 

स्तंभ संपादन : शक्ति. शालिनी रेनू नीलम स्मिता.  
पृष्ठ सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा अनीता सुष्मिता अनुभूति.  
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पढ़े हिंदी अनुभाग..यादें. पृष्ठ : ४. ६ .
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शक्ति अनुभूति सिन्हा .
शिमला. 
जाने कहाँ गए वो दिन : याद आती है समरहिल, शिमला की होली.

समरहिल की होली की यादें : फोटो साभार.

शिमला / अनुभूति सिन्हा मुझे आज भी याद है, हम उन दिनों शिमला रेलवे स्टेशन के आस पास बिलासपुर हाउस में रहते थे।  पिता जी एडवांस हायर स्टडीज जिसे हम वाइसराय लॉज भी कहते है , वहां कार्यरत थे। बड़ी शिद्दत से हमें होली का इंतज़ार होता था। मेरी माने तो मेरी सांसों में शिमला रचा बसा है। मेरी बचपन की सुनहरी यादों का शहर है शिमला। 
वाइसराय लॉज
होली के दिन सुबह की शुरुआत होती थी भगवान जी, माता-पिता के चरणों  में होली का लाल रंग लगाने से। विवाह से पहले ज़िम्मेदरियों का बोझ ना होने के कारण उन्मुक्त पंछी के जैसा आज़ादी का एहसास होता था। 
कहाँ खो गयी आप सोनू डी : होली की  पिछली रात से ही सबसे प्यारी सखी सुनीता दीदी, जिन्हे मैं प्यार से सोनू डी कहती थी, के घर जाने और रंग खेलने की उत्सुक्ता अन्यास ही बढ़ने लगती थी। और होली की सुबह तो जैसे पैर घर में टिकते ही नहीं थे।
उनका घर शिव मंदिर के पास पहाड़ों के बीच बसा था, जहां चिड़ियों  के मधुर गीत हमें सुनाई देते थे। सफेद कपड़ों में, रंग बिरंगा दुपट्टा ओढ़ कर जैसै ही मैं वहाँ पहुंचती थी मानो रंग बरसे होली की शुरुआत हो जाती थी । मुझे देखते ही मेरी प्यारी सोनु डी का चेहरा फूलों के जैसा खिल जाता था। और अंकल आंटी के लिए तो मानो मैं दूसरी बेटी ही थी ऐसा वे समझते  थे।
दोस्तों के साथ की मस्ती : फिर शुरू होता था घर घर जा कर सब दोस्तों को इकट्ठा करना। उनमें थी मधु आन्टी जो भले ही उम्र में बड़ी थी परन्तु जोश किसी नन्हे बच्चे जैसा ही था और हम सब से ज्यादा उत्साही और काफ़ी अग्रसर थी। सच कहें तो वह और हमारी नेत्री ही हुआ करती थी । कैसे भुला जाए वे  दिन ,जाने कहाँ गए वो दिन। उस दिन तो स्वादिष्ट गुजियाँ से ही मुकम्मल पेट भर जाता था।
सब कुछ याद है शिमला की गलियों में उतर कर हम सभी युवक - युवतियाँ, बड़े, बूढ़े  और बच्चें रंगों से सराबोर एकत्रित होकर,नाचते गाते मैदान की ओर बढ़ते थे। इसके पश्चात् शुरू होता था डीजे की धुन पर पैरों का थिरकना। युवाओं के बीच छेड़ छाड़ भी संगीत के माध्यम से चलता रहता था।रंग भरे पानी की बरसात रोके नहीं रुकती थी। सारा वातावरण इतना मनभावन ,सुखद तथा रोमांचक हो जाता था कि घर लौटने को मन ही नहीं करता था। आवारा हो जाते थे हम सभी। सच कहें तो हमारी होली का नशा तो होली के दो तीन दिनों तक सोनु डी के साथ गप्पें लड़ाने के बाद ही हल्का होता था।आज भी हमारे लिए रंग बिरंगी यादों का पिटारा खोल जाती हैं। 
सब के सुख की अनंत कामना : शाम तीन बजे तक जब हम सब थक कर चूर हो जाते थे ,तो हमारी टोली चलती थी शिव मन्दिर की ओर। अंत में ईश्वर के आगे हाथ जोड़कर सब इस सुखद त्योहार के समापन की कामना सब बंधू बांधव के लिए करते थे। और फिर शुरू होता था अगले बरस होली आने का इन्तजार। वो मनमोहक यादें जब कभी भी मेरे मन को गुदगुदाने लगती  हैं, तो वापस दिल्ली से शिमला लौट जाने की  इच्छा पुनः एकबारगी होने लगती है। मन करता है आ अब लौट चलें। आशा करती हूं कि इस बार भी पहाड़ों की होली कुछ ऐसी ही यादें या हवाएं बहती हुई दिल्ली तक चली आए। और मैं फिर से अपने जीने के शहर की यादों में खो जाऊं। हमारी तरफ़ से आप सभी को होली की बहुत बहुत अनंत हार्दिक शुभकामनाएं। मैं तो चाहूंगी कि एकाध बार आप पर्यटन के तहत पहाड़ी होली का भी आनंद लें।
अनुभूति सिन्हा.
समर हिल,शिमला. 
स्तंभ संपादन. डॉ.सुनीता शक्ति शालिनी प्रिया .  
पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता श्वेता सीमा
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होली जलियांवालान बाग मची…’, ‘ कैसे हो इरविन ऐतवार तुम्हार….’ : पृष्ठ : ४. ५ .
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शक्ति. बीना नवीन जोशी नैनीताल.

होली जलियांवालान बाग मची…’, ‘ कैसे हो इरविन ऐतवार तुम्हार….’ फोटो : शक्ति. बीना जोशी

होली जलियांवालान बाग मची…’, ‘ कैसे हो इरविन ऐतवार तुम्हार….’
से ‘ डॉन्ट टच माइ अंचलिया मोहन रसिया, आई एम ए लेडी श्रीवृंदावन की, यू आर द लॉर्ड ऑफ गोकुल रसिया ’ तक बदलती भी रही है कुमाउनी होली-कुमाउनी होली में होते रहे हैं नये प्रयोग भी, तत्कालीन परिस्थितियों पर कड़े तंज भी कसती रही है होली डॉ.नवीन जोशी नैनीताल।
अपने शास्त्रीय गायन के लिए ब्रज एवं मथुरा की होली के साथ देश - दुनियां में विख्यात कुमाउनी होली के एक विशेषता यह भी है कि यह स्वयं को वर्तमान के साथ जोड़ती हुई चलती रही है। साथ ही इसमें समय-समय पर नये - नये प्रयोग भी होते रहे हैं। यहां की पारंपरिक चांचरी व गीतों में ‘जोड़’ डालने की परंपरा भी हर वर्ष और वर्ष दर वर्ष समृद्ध करती रही है, और यहां के लोककवि भी होली पर नए प्रासंगिक रचनाएँ देते रहे हैं।
कुमाउनी होली के पुराने जानकार बताते हैं कि १९१९ में जलियावालां बाग में हुऐ नरसंहार पर कुमाऊं में गौर्दा ने १९२० की होलियों में ‘होली जलियांवालान बाग मची…’ के रूप में नऐ होली गीत से अभिव्यक्ति दी।
इसी प्रकार गुलामी के दौर में ‘ होली खेलनू कसी यास हालन में, छन भारत लाल बेहालन में….’ तथा ‘ कैसे हो इरविन ऐतवार तुम्हार….’ तथा आजादी के आन्दोलन के दौर में तत्कालीन शासन व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुये ‘ अपना गुलामी से नाम कटा दो बलम, स्वदेशी में नाम लिखा दो बलम, मैं भी स्वदेशी प्रचार करूंगी, मोहे परदे से अब तो हटा दो बलम, देश की अपनी बैरागन बनूंगी, सब चीर विदेशी जला दो बलम, अपना गुलामी से नाम कटा दो बलम’ और विदेशी फैशन के खिलाफ ‘छोड़ो कुबाण नवल रसिया’ जैसी होलियों का सृजन हुआ तो आजाद भारत में आजादी के नाम पर उत्श्रृंखलता और गरीबी की स्थितियों पर भी कुमाउनी होली इन बोलों के साथ कटाक्ष किये बिना नहीं रही ‘ कां हरला यां चीर कन्हैया, स्यैंणिन अंग उघड़िये छू, खीर भद्याली चाटणा हूं नैं, भूखैल पेट चिमड़ियै छू, गूड़ चांणा लै हमू थैं न्हैंतन, आङन लागी भिदड़ियै छू’ यानी कन्हैया यहां किसकी चीर हरोगे, यहां तो स्त्रियों के पहले से ही अंग खुले हुये हैं। इधर उत्तराखंड राज्य बनने के बाद गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ ने इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए २००१ की होलियों में ‘अली बेर की होली उनरै नाम, करि लिया उनरि लै फाम, खटीमा मंसूरी रंगै ग्येईं जो हंसी हंसी दी गयीं ज्यान, होली की बधै छू सबू कैं…’ जैसी अभिव्यक्ति दी। इसी कड़ी में आगे चुनावों के दौर में भी गिर्दा ‘ये रंग चुनावी रंग ठहरा…’ जैसी होलियों का सृजन किया।
लेकिन इधर कुमाउनी होली पर नये दौर में अंग्रेजी और सूफियान कलाम के रंग भी चढ़ते नजर आये हैं। जहां एक ओर ‘डॉन्ट टच माइ अंचलिया मोहन रसिया, आई एम ए लेडी श्रीवृंदावन की, यू आर द लॉर्ड ऑफ गोकुल रसिया’ के साथ अंग्रेजी के शब्द भी कुमाउनी होली में प्रयोग किए गए हैं तो वहीं ‘आज रंग है मेरे ख्वाजा के घर में, मेरे महबूब के घर में, मोहे रंग दे ख्वाजा अपने ही रंग में, तुम्हारे हाथ हैं सुहाग मेरा, मैं तो जोबन तुम पै लुटा बैठी’ और‘ छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके, मोहे सुहागन कीन्ही रे मोसे नैना मिलाइके’ जैसे सूफियाना कलाम भी होली के रूप में पेश किये जा रहे हैं।

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सम्पादकीय : उत्तराखंड का प्रसिद्ध ऋतु पर्व ' फूल देई ' : पृष्ठ : ४. ४ .
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उत्तराखंड का प्रसिद्ध ऋतु पर्व ' फूल देई ' जानें इस लोक पर्व के बारे में सब कुछ

बीना नवीन जोशी नैनीताल.

फूल संक्रांति और फूल देई : लोक पर्व : बीना नवीन जोशी नैनीताल। हिन्दू नव वर्ष यानी चैत्र महीने की ०१ पैट ( गते ) को उत्तराखंड के कुमाऊं में मेष संक्रांति, फूल संक्रांति और फूल देई के नाम से मनाया जाता है। इस वर्ष बसन्त ऋतु के स्वागत का यह त्यौहार फूल देई १४ मार्च २०२५ को समूचे उत्तराखंड में बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है।
फूल संक्रांति यानी फूल देई का सीधा संबंध भी प्रकृति से है। इस समय चारों ओर छाई हरियाली और नाना प्रकार के खिले फूल प्रकृति के यौवन में चार चांद लगाते हैं। वैसे भी उत्तराखंड की धरती पर अलग-अलग ऋतुओं के अनुसार पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं। ये पर्व एक ओर हमारी संस्कृति को उजागर करते हैं, तो दूसरी ओर प्रकृति के प्रति पहाड़ के लोगों के सम्मान और प्यार को भी दर्शाते हैं। इसके अलावा पहाड़ की परंपराओं को कायम रखने के लिए भी ये पर्व-त्योहार खास हैं।
प्रकृति : पहाड़ का श्रृंगार : बुरांस की लालिमा : हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने से ही नव वर्ष शुरू होता है। इस नव वर्ष के स्वागत के लिए बसन्त के आगमन से ही पूरा पहाड़ बुरांस की लालिमा और गांव आडू, खुबानी के गुलाबी-सफेद रंगो से भर जाता है। खेतों में सरसों खिल जाती है तो पेड़ों में फूल भी आने लगते हैं।
ऐसे मनाई जाती है फूलदेई इस दिन छोटे बच्चे सुबह ही उठकर जंगलों की ओर चले जाते हैं और वहां से प्याेंलीं कहीं इसे फ्यूंली प्राइम रोज भी कहा जाता है, बुरांस, बासिंग आदि जंगली फूलो के अलावा आडू, खुबानी, पुलम के फूलों को चुनकर लाते हैं और एक थाली या रिंगाल की टोकरी में चावल, हरे पत्ते, नारियल और इन फूलों को सजाकर हर घर की देहरी पर लोकगीतों को गाते हुये जाते हैं और देहरी का पूजन करते हुये पास-पड़ोस के घरों में जाकर उनकी दहलीज पर फूल चढ़ाते हैं और सुख-शांति की कामना करते हुए गाते हैं, और प्रकृति को इस अप्रतिम उपहार सौंपने के लिये धन्यवाद भी अदा करते हैं।

" फूलदेई, छम्मा देई.…जतुकै देला, उतुकै सही।
देंणी द्वार, भर भकार,सास ब्वारी, एक लकार,
यो देलि सौ नमस्कार । फूलदेई, छम्मा देई.…
जतुकै देला, उतुकै सही। "

इसके बदले में उन्हें परिवार के लोग गुड़, चावल व रुपये देते हैं। इस चावल व गुड़ आदि से शाम को चावल पीसकर इसके आटे का हलवा-'सई भी बनाया जाता है, और विशेष रुप से प्रसाद स्वरुप ग्रहण किया जाता है। इस दिन से लोकगीतों के गायन का अंदाज भी बदल जाता है, होली के फाग की खुमारी में डूबे लोग इस दिन से ऋतुरैंण और चैती गायन में डूबने लगते हैं। ढोल-दमाऊ बजाने वाले लोग जिन्हें बाजगी, औली या ढोली कहा जाता है। वे भी इस दिन गांव के हर घर के आंगन में आकर इन गीतों को गाते हैं। जिसके फलस्वरुप घर के मुखिया द्वारा उनको चावल, आटा या अन्य कोई अनाज और दक्षिणा देकर विदा किया जाता है।
नैनीताल में प्रकृति स्वयं मना रही है फूलदेई :
शॉर्ट रील : बीना नवीन जोशी



नैनीताल में प्रकृति स्वयं मना रही है फूलदेई : पहाड़ों के साथ प्रकृति का स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल में ऋतुराज बसंत का आगमन हो गया है। प्रकृति जैसे स्वयं आज फूलदेई मना रही है। फूल तो फूल कलियां भी जैसे घूंघट खोल मुस्कुराती, तितलियों-भंवरों को रिझाती नजर आ रही हैं। पतझड़ में रीते हुए चिनार-पॉपुलर के पेड़ों पर जैसे मंद-मंद मुस्कान लिये हर ओर हरियाली छा गयी है। कफुवा यानी बुरांश के साथ प्योंली ओर पयां यानी पद्म प्रजाति के पेड़ों के साथ आड़ू, पुलम, खुबानी व आलूबुखारा पर भी गुलाबी वासंती बयार छायी हुई है। इन फूलों की खुशबू से सारा चमन महका हुआ है। और यह सब जल्द शुरू होने जा रहे भारतीय नव वर्ष के स्वागत को जैसे तत्पर हैं। ऐसे मौसम-प्राकृतिक सुंदरता को अपनी आंखों से निहारना चाहते हैं तो पहाड़ पर आइए, नैनीताल आइये।

पृष्ठ सज्जा : शक्ति सीमा स्वाति मंजीत अनुभूति
स्तंभ संपादन : शक्ति डॉ. नूतन रेनू तनुश्री रीता
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम : संरक्षण.
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सम्पादकीय : अनंत शिव शक्ति : जीवन गीता सार : पृष्ठ : ४. ३.
 
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माननीय. सत्य प्रकाश मिश्रा.
सत्यमेव ज्यते :
भा. पु. से.

इस वर्ष मसाने की होली में होलिका अग्नि में
चिर ईर्ष्या, पीड़ा ,द्वेष ,स्वार्थ और बुराई भस्मित कर
धरा पर सकारात्मक, त्रुटि रहित ,नूतन, शिव शक्ति अनंत विश्व का निर्माण फिर :
@ डॉ. सुनीता मधुप शक्ति* प्रिया.


धरा पर सकारात्मक, त्रुटि रहित ,नूतन, शिव शक्ति अनंत विश्व का निर्माण फिर : फोटो कोलाज : काशी : डॉ. सुनीता मधुप शक्ति* प्रिया
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मुझको कहाँ ढूंढे रे बन्दे मैं तो तेरे पास में : पूरी दुनियाँ से ही वैराग्य हो गया, काशी जो घूम ली। एकाकी पन घर कर गया। संकीर्ण मानसिकता, निम्न व्यक्तिवादी सोच ,परदोष छिद्रान्वेषण ,मतान्तर , स्वयं के स्वार्थ के संघर्ष ने मुझे वीतरागी बनने के मार्ग की तरफ़ खींचा।
जिसने अपने राग-द्वेष और मोह का नाश कर दिया हो, उसे वीतरागी कहते हैं. वीतरागी व्यक्ति अपने और पराए में किसी तरह का भेदभाव नहीं करता। वीतरागी व्यक्ति अकंप होता है और उसे रूप-रिझाता नहीं, कुरूपता डराती नहीं। पूरी तरह से मैं वीतरागी नहीं हुआ हूँ।
परिस्थिति वश, अपमान , त्रिष्कृत, तत्क्षण ,असत्यापित ,मिथ्या आरोपों वाली कड़वी, असमझ, वाणी का दंश झेलते सुनते,सहते ,पीते, नीलकंठ शिव स्वाभाविक स्मृत हो गए। अंतर्मुखी होने की वजह से भीड़ तंत्र में विश्वास रखने वाले समुदाय को उत्तर नहीं दे सका। लांछनाओं के गरल गले तक ही रह गए।
किसी दिन फिर यायावर की तरह पर्यटन करते हुए काशी विश्वनाथ पहुँच गए। मंदिर से सटे मणिकर्णिका मसाने में शिव के दर्शन हो गए। उधर चिताएं जल रही थी। इधर मन में प्रतिकार की होली जल रही थी। लेकिन इसका भी स्वजनों के लिए क्या औचित्य ? मनुष्य को उसके कर्मों की सज़ा इस जीवन में ही भोगना पड़ता है, ना । अपने हिस्से की स्वर्ग नरक भी यहीं देखनी हैं ।
किंचित प्रयाग से महाकुंभ स्नान से लौटे प्रवासी नागा ,साधु काशी में डेरा जमाए हुए थे। यत्र तत्र धूनी रमाए दिख रहें थे ,घाटों पर श्मशानों में।
बुझी चिताओं से निकली भस्म को अपने तन में लपेटे नागा साधु सन्यासी संत कबीर के सत्यापित निहित सन्देश ही दे रहें थे : मुझको कहाँ ढूंढे रे बन्दे मैं तो तेरे पास में। सुना है तुलसी कबीर की नगरी है यह काशी।

रहना नहिं देस बिराना है.
यह संसार कागद की पुड़िया, बूँद पड़े घुल जाना है.
यह संसार काँट की बाड़ी, उलझ-पुलझ मरि जाना है.
यह संसार झाड़ औ झाँखर, आग लगे बरि जाना है.
मणिकर्णिका : काशी : चिता :भस्म : अंतर्मन की चिर ईर्ष्या, पीड़ा की होलिका : अपने मन की होलिका की अग्नि में मेरे अंतर्मन की चिर ईर्ष्या, पीड़ा ,द्वेष ,और बुराई जलकर भस्म हो.....
हे : परमेश्वर : आदि शक्ति : जीवन के इस अंतहीन सफ़र में तू मुझे मात्र ' सम्यक साथ ' प्रदान कर जिससे मेरी दृष्टि ,सोच ,वाणी, और कर्म परमार्जित हो सके...मैं और मेरे अपने और मेरे मन में स्थित समस्त शक्तियां जीवन के परम सत्कर्म ' कृण्वन्तो विश्वमार्यम ' के लिए प्रेरित व प्रयास रत रह सकें  हे माधव ! यदि आप मेरे जीवन के सारथी हो जाए तो मैं किसी ऐसे सकारात्मक, त्रुटि रहित ,नूतन विश्व का निर्माण कर ही लूंगा। जिसमें मात्र अनंत ( श्री लक्ष्मीनारायण ) शिव ( कल्याणकारी ) शक्तियाँ ही होगी।
दीपक की अखंड ज्योति शक्ति की तरह जलते हुए स्वयं किंचित दुःख की छाया में रहते हुए अन्य के मार्ग को निरंतर आलोकित करता रहूं इसलिये वंदनीय हो जाऊं की क्योकि दूसरों के लिए जलूं न कि दूसरों की प्रगति ,उन्नति समृद्धि से जलूं ....

महाश्मशान : हरिश्चंद्र घाट : काशी
साभार : शॉर्ट रील : खोल दिया है नयन तीसरा *




पृष्ठ सज्जा : शक्ति सीमा स्वाति मंजीत अनुभूति
स्तंभ संपादन : शक्ति डॉ. नूतन रेनू तनुश्री रीता

क्रमशः जारी
डॉ. सुनीता मधुप शक्ति* प्रिया
प्रकृति, प्रेम , पहाड़ , अध्यात्म और सन्यास
©️®️ M.S.Media.
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शक्ति : सम्पादकीय : आलेख : शिव की तरह होली : प्रस्तुति. पृष्ठ : ४. २.
आलेख : शिव की तरह होली : कोलाज :

डॉ.सुनीता मधुप शक्ति * प्रिया
सह लेखिका रेनू शब्द मुखर
*
शिव * की तरह जीवन के दुःख पीड़ा के श्मशान की राख से ही आनंद के क्षणों को ढूंढे :
सिद्दार्थ * की तरह महाभिनिष्क्रमण * कर महापरिनिर्वाण * की तरफ बढ़ें
: डॉ. सुनीता मधुप शक्ति * प्रिया

प्रयास * अपने भीतर की बुराई की होलिका जलाने की : शक्ति रेनू शब्दमुखर.
*
प्रयास अपने भीतर की बुराई की होलिका जलाने की : फोटो शक्ति : रेनू शब्दमुखर
  
दिल में होली जलती रही : काशी : कई दिनों से काशी में थी। अस्सी घाट , हरिश्चंद्र घाट से मणिकर्णिका घाट घूमती रही। एकाकी भटकती रही। बुराई की होलिका का वैष्णव भक्त प्रतीक प्रह्लाद की अच्छाई को भस्मित करने की अनर्गल चेष्टा को भी युगों युगों से अनुभूत करती रही हूँ ।
यही सोचती हूँ स्वयं के भीतर का आत्म संघर्ष जीवन की अंतिम साँस तक़ जारी ही रहेगा। दिल में होली जलती ही रहेगी।
ग़ुलाल से खेल कर मनाए प्रेम,सौहार्द और एकता का प्रतीक रंगोत्सव, सदैव से सुनी । निश्चित है इस वर्ष होली का त्‍योहार इस बार फाल्‍गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाते हुए होलिका दहन इस साल १३ मार्च की रात को होगा और अगले दिन १४ मार्च को होली खेली जाएगी।
हमने भी संगी साथियों के साथ खूब होली खेली। ठुमके लगाई। गुलाल उड़ाइ। होली खेले रघुवीरा गीत भी गायी । फिर भी कसक बनी रही दिल में होली जलती रही।
दुःख व दुःख का कारण ढूंढ़ती रही। कोई अपना सही पथ प्रदर्शक नहीं मिल सका जो अपने भीतर की बुराई की होलिका जलाना सीखा सके। सन्मार्ग दिखला सके।
इधर कई दिनों से काशी में थी। गंगा द्वार ; काशी मंदिर परिसर से गुजरती हुई मणिकर्णिका घाट तक़ गयी। जीवन के आख़री सच से वाक़िफ़ होने। जलती चितायें भी देखी।
शिव बैरागी क्यों हो गए , सोचती हूँ ? कदाचित आम जीवन में वर्तमान छल , प्रपंच को देख कर ही दूर रहकर कैलाशधारी हो गए, एकाकी भी। भोले जो थे। काशी उनकी ही नगरी है।
सदैव समझने का प्रयास : कृष्ण 
शिव की तरह जीवन के दुःख ,पीड़ा के श्मशान की राख से ही आनंद के क्षणों को ढूंढे : आइये शिव की तरह पौराणिक कहानियों के अनुसार सबसे पहले जीवन के दुःख पीड़ा के श्मशान की राख से ही आनंद के क्षणों को ढूंढते हुए ही अपने भक्तों नंदी , बेताल , भूत या पिचास के साथ होली खेली जाए । आइए, जानते हैं मसान होली की परंपरा। रंग होली से पहले काशी यानी वाराणसी में श्मशान की राख से होली खेली जाती है। काशी में फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी के अगले दिन हर साल मसान होली मनाई जाती है। जीवन का राग है विपत्ति में हल ढूंढा जाए। दुःख,मोह के मसाने में ही बैरागी होते हर बुद्ध की तरह जीवन का सत्य ढूंढा जाए।
दुःख है तो दुःख का कारण भी। जबतक जीवन है गीता वर्णित कर्म योग का मार्ग ही अनुकरणीय है।
अगर हल ढूंढ नहीं सकें तो सिद्दार्थ की तरह महाभिनिष्क्रमण कर महापरिनिर्वाण की तरफ बढ़ चलो। इस वर्ष होली का उत्सव कुछ खास रहा। आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे ने पहली बार खुलकर अपनी खुशी जाहिर की और रंगों की मस्ती में सराबोर हो गए। याद रहेगी होली रे ।
याद करती हूँ : कार्यक्रम की शुरुआत होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और खुशियों को साझा करने का अवसर है। यह उत्सव हमें नकारात्मकता को पीछे छोड़कर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। प्रश्न है क्या हम इस लक्ष्य की तरफ़ बढ़ रहें हैं ? मैं मानती हूँ कि आज का दिन सिर्फ रंगों का ही नहीं बल्कि आपसी प्रेम सौहार्द और एकता बढ़ाने का प्रतीक है। अपनी व्यस्त जीवन शैली से कुछ समय निकालकर रंगों की दुनिया में गोता लगा होली के रंगों के साथ अपनी यादों में कुछ नए रंग भरते हैं। इसके बाद कार्यक्रम में हास्य और संगीत की महफिल सज गई। राहुल भालिया ने अपनी मधुर आवाज़ में होली के गीत प्रस्तुत कर समां बाँध दिया,तो राकेश सर की चुटीली पंक्तियाँ सुनकर सभी ठहाके लगाने पर मजबूर हो गए।
इसी कड़ी में हमने अपनी हास्य कविता टीचर की होली—रंग, कॉपी और टेंशन भारी ! से सभी को हंसी के रंग में रंग दिया। अमित सर, श्वेता और रंजना मैम ने भी अपनी हास्य प्रस्तुतियों से सभी की खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक - दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी और गुजिया व मिठाई का आनंद लिया। रंगों और खुशियों से भरा यह होली उत्सव सभी के दिलों में यादगार बन गया। ज्ञान विहार परिवार के लिए यह आयोजन न सिर्फ रंगों की मस्ती, बल्कि आपसी संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने का प्रतीक बन गया।

पृष्ठ स्तंभ संपादन : शक्ति. शालिनी माधवी तनुश्री
पृष्ठ सज्जा : शक्ति अनुभूति मंजिता सीमा
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शक्ति : सम्पादकीय : आलेख : प्रस्तुति. पृष्ठ : ४. १
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खेले मसाने में होली दिगंबर, भूत पिशाच बटोरी दिगंबर.

 
गंगा की लहरों जैसी सीधी साधी चाल हमारी 
 : काशी : फोटो कोलाज : डॉ सुनीता शक्ति* प्रिया. 

जोगीरा......सारा ....रा ........जोगीरा......सारा ....रा : तेज़ रफ़्तार जिंदगी के बीच से जीवन की मधुर तान लिए ढ़ोलक की थाप...., झाल- मंजीरे की आवाज़ के बीच 'फगुआ' या 'होली गीत' गायन की परंपरा आज भी भारतीय जन-मानस में कुछ इस तरह से घुली-मिली हुई है कि मन खींचा चला जाता है,गांवों की उस मंडली की ओर जिन्होंने आज भी उन सभी परंपराओं को जीवन का हिस्सा बनाए रखा है। बसंत पंचमी से ही इस पर्व का आग़ाज़ हो जाता है। होलिका दहन की तैयारी शुरू हो जाती है। लकड़ियों का जुगाड़ करने वाले
' जीय यजमान तोहार सोने के किवाड़, पांच गो गोयठा द '

कहते, लोगों का भला मनाते द्वार-द्वार पर पहुंच जाते हैं। चोरी - छुपे चौकी,खटिया तक खींच लाते हैं। बच्चे, बड़े-बूढ़े सभी इस कार्य में हाथ बंटाते हैं।घरों से नए अनाज से बने पकवान, जौ-गेहूं की बालियों से अग्नि का पूजन करते हैं जम के होली के धूम-धड़ाके के बीच होलिका जलाई जाती है। नए सरसों के बने उबटन से त्वचा को साफ करते हैं।यह रंग खेलने के पहले की तैयारी है ताकि वह रंग के दुष्प्रभाव से महफूज़ रहे। अगले दिन रंगों की बौछार से कोई बच नहीं पाता। पिचकारी, गुब्बारे में भरकर खूब मस्ती की जाती है। सारे गिले-शिकवे भूला कर रंग-गुलाल लगा कर दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं। पुए-पकवान, गुझियों, दही बड़े की खुशबू घर-घर से निकल रही होती है। खाने - खिलाने, अबीर - गुलाल लगाने का दौर आधी रात तक चलता रहता है।
मणिकर्णिका घाट और मसाने की होली ! होली की बात हो और काशी का नाम न आए, हो नहीं सकता। भूत नाथ विश्वनाथ! उनकी नगरी काशी ! मणिकर्णिका घाट और मसाने की होली !


बनारस : होली खेले मसाने में  दिग्मबर !  भईया : कोलाज फोटो : 
शक्ति. रेनू नीलम अनुभूति. 

खेले मसाने में होली दिगंबर, भूत पिशाच बटोरी दिगंबर.

' श्मशान ' जीवनयात्रा की थकान के बाद की अंतिम विश्रामस्थली है। अंतिम यात्रा के दौरान रंग,रोली तो शव को लगाया जाता है लेकिन नीलकंठ महादेव के चरित्र में रंग गुलाल नहीं है, जली हुई चिताओं की राख है, जिससे वो होली खेलते हैं।एक तरफ बृज में कृष्ण और राधा की होली है जो प्रेम का प्रतीक है, लेकिन भगवान शिव की होली उनसे अलग है, उनकी जगह श्मशान है। शंकर जी के होली को देखकर गोपिकाओं का मन भी प्रसन्न हो जाता है।
भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाए बिरिज की गोरी,
धन-धन नाथ अघोरी दिगंबर, खेलैं मसाने में होरी ।

देश और विदेश से लोग इस अजब होली का आनंद लेने के लिए बाबा विश्वनाथ की नगरी में एकत्रित होते हैं। यहां मणिकर्णिका घाट और हरिश्चन्द्र घाट पर रंगभरी एकादशी के ठीक अगले दिन जलती हुई चिताओं के बीच जमकर होली खेली जाती है। मसाने की होली की पौराणिक कथा :- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भोलेनाथ माता पार्वती को गौना करा कर वापस ले जा रहे थे। तब भगवान शिव के गण और देवता फूल और रंगों से होली खेल रहे थे। लेकिन शमशान में बाबा के परम भक्त अर्थात भूत-प्रेत और अघोरी इस खुशी से वंचित रह गए।
जब इस बात की भनक भगवान शिव को पड़ी तो अगले दिन गाजे-बाजे के साथ शव उनका दुख दूर करने के लिए शमशान पहुंच गए और जलती चिताओं के बीच राख से होली खेली। आज भी ये परंपरा हर्षोल्लास के साथ पूरी की जाती है।
मणिकर्णिका घाट पर लोग आमतौर परअपने परिजन को अंतिम विदाई देते हुए नजर आते हैं। लेकिन आज के दिन इस घाट का अलग ही नजारा देखने को मिलता है। यहां भगवान शिव के भक्त चिताओं के बीच झूमते हुए और नाचते-गाते चिता की भस्म से होली खेलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां चिता की राख से खेली गई होली से मृत्यु का भय दूर हो जाता है। साथ ही मसाने की होली खेलने से बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद अपने भक्तों पर सदैव बना रहता है और सभी प्रकार की तांत्रिक बाधाएं दूर हो जाती है। धन्य है काशी विश्वनाथ की नगरी! काशी का हर रूप और अंदाज़ अनोखा और अद्वितीय है। हर काशीवासी के जीवन का हर लम्हा जीने के जज़्बा से भरा हुआ है।जो यहां पहुंच गया वह सत्य से रूबरू हो जाएगा, जिसका आभास करने के लिए गौतम बुद्ध ने गृह का परित्याग किया मनीषियों ने लाखों वर्षों तक घोर तपस्या की।

खेले मसाने में होली दिगंबर, भूत पिशाच बटोरी दिगंबर.
शॉर्ट रील : साभार


स्तंभ संपादन : डॉ. सुनीता तनुश्री शक्ति* प्रिया
स्तंभ सज्जा : शक्ति अनुभूति मंजिता स्वाति

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शक्ति : सम्पादकीय : आलेख : प्रस्तुति. पृष्ठ : ४. ०

थीम के साथ मनाया जा रहा है इस वर्ष महिला दिवस. :
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस २०२५.

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कम नहीं किसी से ये,साबित कर दिखलाएगी, खोल दो इसके बंधन सारे,हर मंज़िल पा जाएगी '
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस २०२५ की थीम : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस २०२५ की थीम ' एक्सीलरेट एक्शन ' है,जिसका मतलब “ तेजी से कार्य करना ” है। यह थीम हमें बताती है कि हमें अपने ऊपर बहुत मेहनत और तेजी से काम करने की जरूरत हैं। हर साल ८ मार्च को विश्व महिला दिवस मनाया जाता है।
इस वर्ष यह दिन हम सब अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को एक राष्ट्रीय समारोह के रूप में मना रहे हैं।माननीया राष्ट्रपति जी के सान्निध्य में ' नारी शक्ति से विकसित भारत ' के आगाज के साथ यह दिन यादगार साबित होने वाला है।समाज में महिलाओं की भूमिका,संघर्ष और सफलता को दर्शाने वाला यह दिन महिला दिवस के रूप में महिलाओं की समानता, अधिकारों और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। कई देशों में इसे अवकाश के रूप में मनाया जाता है।
समानता : अधिकारों में एकता : महिला दिवस का उद्देश्य लैंगिक भेदभाव समाप्त कर एक समान और सशक्त समाज का निर्माण करना है।एक महिला के रूप में तमाम आयोजनों के बीच से उभर कर जो प्रश्न मेरे सामने अकसर आ खड़ा होता है वह है- " मैं कौन हूं ? " इस प्रश्न का सटीक उतर नहीं है मेरे पास।और जो उत्तर मेरे पास है ,वह काफ़ी नहीं है।
मैं कौन हूँ ? जन्म के साथ बने हर रिश्ते जैसे,किसी की पुत्री, बहन, पत्नी ,मां , चाची, दादी ,शिक्षिका, दोस्त हूं मैं, जैसे उत्तर संतुष्ट नहीं कर पाते मुझे। यदि मैं कहूं कि मैं सनातन धर्म में विश्वास रखने वाली जागरूक हिंदू महिला हूं तो भी यह उत्तर भी मेरे अस्तित्व को परिभाषित नहीं करता। सनातन हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले मेरे जैसे बहुत सारे लोग हैं ।
जब दयानंद सरस्वती के मन में इस प्रश्न का जन्म हुआ तो उत्तर की तलाश में वे बरसों भटकते रहे । फिर एक दिन वह रात्रि आई,जब उस दरवाज़े पर उन्होंने दस्तक दी, जिसके अंदर से स्वामी विरजानंद जी की आवाज आई , " कौन है ? " दयानंद ने जवाब दिया," मैं कौन हूं? यही जानने के लिए तो यहां आया हूं। " स्वामी विरजानंद ने दरवाजा खोल दिया। उस रात्रि में एक वीतराग योगी और एक जिज्ञासु शिष्य का जो मिलन हुआ वह एक अभूतपूर्व घटना थी, जिसने स्वामी दयानंद जी को एक नया जीवन दर्शन दे दिया।और यह जानने के बाद कि," मैं कौन हूं? और यहां किस लिए आया हूं? " उन्होंने सबसे अलग हटकर अपनी पहचान बनाई। फिर ' सत्यार्थ प्रकाश ' के रुप में एक नया जीवन दर्शन संसार को मिला। अर्जुन ने जब कृष्ण से यह जानने की कोशिश की ' भगवतगीता ' के रुप में इक नया जीवन दर्शन सामने आया। मैं कौन हूं ? की पहचान में भटकते हुए, उत्तर तब तक नहीं मिलता जब तक सच्चे आत्म साक्षात्कार नहीं हो जाता।
महात्मा बुद्ध ने भी यूं ही तो घर नहीं छोड़ा। लौकिक चीजों के बीच उलझा मन कभी ख़ुद को जान नहीं पाता। आधी आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा आज भी जहां तक पहुंच पाया है वह उसके सम्पूर्ण वजूद को परिभाषित करने में सक्षम नहीं है।
नया हौसला : हमारी नयी उड़ान : उम्मीद करती हूं हमारी आगे की यात्रा हमें उस मुकाम तक पहुंचायेगी। परिदृष्य बदल चुका है, उमंग और नई ऊर्जा से भरी टीम नई कहानी लिखने को, उड़ान भरने को पंख फैला चुकी है। तमाम जिम्मेदारियों,रिश्तों को सफलता पूर्वक निभाने वाली सभी महिलाओं को महिला दिवस की बधाई और शुभकामनाएं।व्यतिगत रूप से भारत के संवैधानिक सर्वोच्च पद पर महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी,सक्रियता,सोच,दूरदर्शिता,शुचिता, उनकी सादगी से मैं आशान्वित और ऊर्जान्वित हूं। यह महिला दिवस निःसंदेह हमारे लिए गर्व का क्षण है।आगे का मार्ग उम्मीदों से भरा हुआ है। इस यात्रा में शामिल सभी महिलाओं के लिए चंद पंक्तियाँ निवेदित हैं -

तोड़ के वो बंधन सारे, ख़ुद की पहचान बना लो,
हर रिश्तों की हो जान तुम, रब करे छू लो आसमान तुम.

स्तंभ संपादन : डॉ.सुनीता शक्ति शालिनी प्रिया.
पृष्ठ सज्जा : शक्ति सीमा मंजीत अनुभूति


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एम. एस. मिडिया प्रस्तुति.
श्रीधि क्रिएशन : बुटीक : पटना : समर्थित
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ये पर्वतों के दायरे : यात्रा संस्मरण : धारावाहिक विशेषांक : पृष्ठ : ५.
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संपादन



शक्ति : मानसी शालिनी कंचन.
नैनीताल.
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खेलेंगे हम होली रंग बरसे : यात्रा संस्मरण. नैनीताल. 

बसंत के समय नैनीताल और अपर मॉल रोड का प्राकृतिक सौंदर्य : फोटो : शक्ति. डॉ. नूतन.   

नैनीताल की होली : न जाने कब मैं तेरे साथ हो ली
ये पर्वतों के दायरे : यात्रा संस्मरण से साभार.   
 

डॉ. मधुप रमण.
©️®️ M.S.Media.

यही कोई दो तीन दिन होली की छुट्टी होने वाली थी। वैसे भी दिल्ली की होली कोई खास नहीं होती है जैसे यू पी बिहार में होती है। 
यही कोई साल २००० पहले की बात है न..अनु..? तब बिहार यू पी का विभाजन नहीं हुआ था। न उत्तराखंड बना था न झारखण्ड का निर्माण हुआ था। यही कोई १९९८ के आस-पास का समय रहा होगा । 
तब दिल्ली में पत्रकारिता के सिलसिले में अपनी पढ़ाई कर रहा था और आप दिल्ली में ही रह कर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थीं । 
हमें मिले हुए चार-पांच महीने हो भी चुके थे। अपने आपसी रिश्ते को लेकर काफ़ी संजीदा भी हो चुके थे। पी.जी. में मेस वाले ने कह दिया था ,साब दो - तीन दिन मेस बंद ही रहेगा ...खुद का इंतजाम कर लेना।
मुझे याद है तब तुमने भी कुछ ऐसा ही कहा था अनु, " मेरे हॉस्टल में भी छुट्टी हो गयी है..मैं छतरपुर वाली आंटी के यहाँ जाना नहीं चाहती हूँ ..."
फिर तनिक रुक कर तुमने कहा था, " होली में अपने घर नैनीताल जाना चाहती हूँ ..अकेले जाने में थोड़ी घबराहट हो रही है ...यदि आप मेरे साथ चलें  तो वहां से हो आऊं...आप चलेंगे मेरे साथ !
कह कर तुम अपलक मेरी तरफ़ देखने लगी थी। 
लगा जैसे पलाश के अनगिनत लाल फूल यकायक खिल गये हों मेरे मन में । अचानक साथ जाने के निर्णय तक भी पहुँच गया ! फिर दूसरी तरफ सोचने लगा अम्मा - बाबूजी को कैसे बताएंगे, क्या कहेंगे..?
शायद पहले पहले प्यार के जन्में अहसास में अर्ध्य सत्य बोलने की भी तैयारी मन ही मन कर चुका था। सोच लिया कि अम्मा - बाबूजी को कह देंगे कि वाराणसी जा रहे हैं अपनी बहन के यहाँ।  
निश्चित कर लिया था कि तुम्हें नैनीताल छोड़ने के बाद वाराणसी भी चले जायेंगे...तब शायद ज़िंदगी में पहली बार झूठ बोलने की भी तैयारी हो चुकी थी। मन में लगा नैनीताल की सभ्यता - संस्कृति को लेकर पत्रकारिता का एक प्रोजेक्ट भी पूरा हो जाएगा और आपका साथ भी दो - तीन दिनों के लिए मिल जाएगा जो किसी की प्रेम कहानी से कम नहीं होगी ...
पूछने पर पता चला तब दिल्ली अंतर राज्यीय बस अड्डे से सुबह पांच बजे एक दो बस ही नैनीताल ,अल्मोड़ा के लिए जाती थी। निश्चित कर लिया था कि सुबह की बस पकड़ेंगे शायद चलते हुए हम सभी शाम पांच- छ बजे तक नैनीताल पहुंच भी जायेंगे। 
दूसरे दिन बस अड्डे से हमने सुबह की बस के लिए नैनीताल की दो टिकटें ले ली थी। मुझे याद है यात्रा के मध्य में पढ़ने मात्र के लिए हमने तब बगल वाले स्टॉल से साप्ताहिक हिंदुस्तान की होली विशेषांक वाली पत्रिका खरीद ली थी। खाने के लिए कुछ संतरें,सेव,पानी का बॉटल भी खरीद लिए थे। इसकी जरुरत हो सकती थी। 
मुझे याद है ड्राइवर की सीट की तरफ़ से पीछे एक दो छोड़ कर तीसरी वाली सीट पर हम दोनों साथ बैठ गए थे। उपर लाल से लिखा था महिला के लिए आरक्षित सीट। 
तुम्हारी वजह से मैं इत्मीनान में था कोई हमें इस सीट से नहीं उठा पाएगा। बस नियमित समय से खुल गयी थी। 
तुम बहुत ही प्रसन्न दिख रही थी , अनु ..  है ना ...?...घर जाने की खुशी थी या कहें  ...मेरे साथ बिताए जाने वाले  पल दो पल के साथ का अहसास ...ठीक से बता नहीं सकता था। 
तुम एकदम से मुझसे सिमट कर बैठी हुई थी, मेरी बायी बाजू को अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए। तुम्हारा सर मेरे कंधे पर टिका हुआ था ..तुम  अर्धनिद्रा में भी थी...
बगल वाली सीट पर बैठा बुजुर्ग हमदोनों को किस तरह घूर रहा था अनु ..? तुम्हें याद भी होगा शायद मैंने तुम्हें इस बाबत यात्रा के बीच में बतलाया भी था। ..शायद वो हमारे अनाम रिश्ते को जानने समझने की कोशिश मात्र कर रहा था।  हैं ना...? कुछेक घंटे उपरांत बस गाजियाबाद से गुजर रही थी .. मेरी आखें बाहर की भीड़ - भाड़ और बाजार पर टिकी हुई थी ...

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गतांक से आगे : १.

तितलियों के शहर ज्योलिकोट से उपर नैनीताल के आस पास. 
डॉ. मधुप रमण.

तितलियों के शहर ज्योलिकोट से उपर नैनीताल के आस पास : फोटो. 

मुरादाबाद बस स्टैंड में गाड़ी तक़रीबन १५ से २० मिनट के लिए रुकी थी। थोड़ी देर के लिए मैं 
स्टैंड में बस से यही कोई बिस्किट - केक लेने के लिए उतरा था तब कहीं दूरदर्शन पर नेशनल न्यूज़ में  बिहार के जहानाबाद में हुए नरसंहार की बुरी खबरें प्रसारित हो रही थी। सुनना अच्छा नहीं लगा।   
शाम होने जा रही थी। हमलोग पंत नगर ,लाल कुआँ के बाद हल्द्वानी नैनीताल पहुँचने वाले ही थे। यही कोई चार बजने जा रहा था। हमलोग हल्द्वानी बस स्टैंड पहुंच चुके थे। अब थोड़ी सिहरन भी बढ़ने लगी थी। ठण्ड का अहसास भी होने लगा था।  
आपने मुझसे कहा था, " अब आगे नैनीताल की पहाड़ियां शुरू होने वाली हैं...ठण्ड बढ़ जाएगी ..आपको सर्दी लग जाएगी। ....विंड चीटर निकाल कर पहन लीजिए .."
मैंने आपकी तरफ देखा, जैसे पूछना चाह रहा था , " ..आप क्या पहनेगी ...शॉल लाई  है ना...? "
कैसे तुमने मेरे अनकहे भाव पढ़ लिए थे ,अनु ! मैंने तो तुमसे कुछ कहा भी नहीं था..
तुम कह रही थी, ".. हम पहाड़ी लोग है .. ठण्ड सह सकते है। हमलोगों के जीवन की रोजमर्रा की बातें है ..मुझे आपकी चिंता है ...आप लोग तो मैदानी इलाक़े से आते है ना ...?
इसके पहले मैं कुछ कहता आपने मेरे बैग से कसौली में ख़रीदा हुआ हरे रंग का विंड चीटर निकाल कर दे भी दिया। मैंने आज्ञाकारी अनुयायी होने के नाते शीघ्र ही उस  विंड चीटर को पहन लिया। 
मैं आपके ख़्याल जो मेरी चिंता ध्यान के लिए थी को सोच कर काफी अभिभूत हो गया था..आँखें जो देख रही थी... ..अंतर मन.. जो आपके प्यार के अहसास को महसूस कर रहा था।  
बाहर हिमाचली टोपी पहने बहुत सारे पहाड़ी लोग दिखने लगे थे। कोई कुमाऊं पहाड़ी होली गाना बजा रहा था।
बस थोड़े समय के बाद काठ गोदाम पार कर रही थी। अब चढ़ाई प्रारम्भ होने वाली थी। 
कुमाऊं की होली के बारे में तुम बतला रही थी , " ..जानते है सम्पूर्ण उतराखंड में होली की दो रीत है। एक कुमाऊं की होली है तो दूसरी तरफ होली की गढ़वाली परम्पराएं सम्पूर्ण उतराखंड में विशेषतः प्रचलित है। ...कुमाऊं की होली नैनीताल के आस पास मनाई जाती है तो दूसरी तरफ गढ़वाली परम्पराएं  देहरादून,मसूरी तथा गढ़वाल इलाके में प्रचलित है....। '
मैं ध्यान से आपकी बातें सुन रहा था, आगे आप कह रही थी ... "  यूं कुमाऊं में भी होली के दो प्रमुख रूप मिलते हैं, बैठकी व खड़ी होली, परन्तु अब दोनों के मिश्रण के रूप में तीसरा रूप भी उभर कर आ रहा है। इसे धूम की होली कहा जाता है।  इनके साथ ही महिला होलियां भी अपना अलग स्वरूप बनाऐ हुऐ हैं। 
देवभूमि उत्तराखंड प्रदेश के कुमाऊं अंचल में रामलीलाओं की तरह राग व फाग का त्योहार होली भी अलग वैशिष्ट्य के साथ मनाई जाती हैं...। "
काठगोदाम के बाद जोली कोट आने वाला था।  वही तितलियों का पहाड़ी शहर ..क्षितिज में डूबता हुआ सूरज अब धीरे धीरे शीतल होने लगा था।

यात्रा विशेष संगीत.
सम्पादित :  शक्ति डॉ. सुनीता मधुप शक्ति प्रिया  
फिल्म : यादों की बारात. १९७३.
गाना : मेरी सोनी मेरी तमन्ना झूठ नहीं हैं मेरा प्यार 
सितारे : विजय अरोड़ा. जीनत अमान.


गीत :  मजरूह सुल्तानपुरी. संगीत : आर डी वर्मन. गायक : किशोर कुमार आशा भोसले.
   गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. 

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गतांक से आगे : २.

प्रेम केवल अधिकार नहीं सेवा,लगाव और परित्याग के धर्म का नाम भी है. 

अयारपाटा नैनीताल की पहाड़ियां और लगातार पसरती धुंद : फोटो डॉ.मधुप.   

अब चीड़ और देवदारों के पेड़ दिखने लगे थे। ऊंचाई पर चढ़ते ही उनके घने साए धीरे धीरे बढ़ने लगे थे। बस रह रह कर एकदम से तीखे मोड़ पर घुम जाती थी जिससे मुझे तीव्र घुमाव पर चक्कर भी आने लगा था। लगा था उलटी हो जाएगी। 
मैंने कहा भी था , "...मन ठीक नहीं लग रहा है..चक्कर सा आ रहा है ..." 
आपने तुरंत अपनी चिंता जाहिर की थी ...बड़े परवाह के साथ कहा था, ...आप इन पहाड़ी रास्तों के आदि नहीं है ..ना ..इसलिए ऐसा हो रहा है ? ... ऐसा करें ...थोड़ा लेट जाए.." 
यह कह कर आप खिड़की वाली सीट से एकदम सिमट कर बैठ गयी थी...जगह देने के लिए... 
मैंने लेटने की कोशिश भी की लेकिन जगह बहुत कम थी ..इसलिए ठीक से सो नहीं पा रहा था। दिक्कत हो रही थी... 
यह देखते हुए आपने कितने अधिकार वश प्यार से मेरे सर को अपने दोनों पैरों के ऊपर रख लिया था अपनी गोद में , ".. इत्मीनान से अब आप अपनी आँखें बंद कर ले...कुछ ही देर में हम नैनीताल पहुंचने ही वाले है... शायद आपको बेहतर लगेगा ...  
सच में ही आपकी गोद में सर रखने .. ...पल भर के लिए आँखें बंद कर लेने ...आपके स्पर्श मात्र से ही जन्म जन्मांतर की पीड़ा से मुक्ति मिल चुकी थी। 
कब,कैसे और कितना अमर प्रेम पनप गया था हमारे तुम्हारे बीच अनु ?..यह तो हमदोनों को भी अहसास था ही ..धीरे धीरे और ही प्रगाढ़ होता चला गया था ..है ना ..! ...सोचता हूं तो तेरे - मेरे सपने जैसा ही लगता है। 
तब प्रेम की परिभाषा भी मैंने आप से ही तो सीखी था ना ,अनु ..? जाना था ...प्रेम केवल अधिकार सिद्ध नहीं सेवा और परित्याग के धर्म का नाम है ... 
तब से ही लेकर यह संकल्प मेरे जीवन के फलसफे के साथ ही है कि आपसी प्रेम के बंधन में दूसरे की ख़ुशी ही मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसे शायद मैं पूरी शिद्दत और ख़ामोशी के साथ अभी तक निभाता भी आ रहा हूँ...
यही कोई आधे घंटे के बाद जब आपने मेरे सर पर हाथ रखते हुए कहा था, " ..उठिए ..नैनीताल आ गया है .." तो मेरी तन्द्रा टूटी। 
बस की खिड़की से देखा तब यही कोई नैनीताल की दक्षिणी पश्चिमी पहाड़ी के पीछे सूरज डूबने ही वाला था। थोड़ी ही देर में रात होने वाली थी । 

तल्ली ताल से दिखती चाइना पीक की पहाड़ियां : फोटो : डॉ. मधुप. 

नीचे तल्ली ताल बस स्टैंड में उतरते ही ..झील की तरफ से आती हुई ठंढी सर्द हवा मुझे छूने लगी थी ..सर दर्द कब का गायब हो चुका था। ताजगी का अहसास पल प्रति पल हो रहा था।  
नैनीताल में ठहरने मात्र को लेकर मुझमें काफी झिझक थी कि कहाँ रहूँगा, कहाँ ठहरूंगा ? लेकिन आपने पहले ही निर्भीकता से कह दिया था कि हमें अयारपाटा वाली सोनल जिज्जी के बंगले में ही रहना है...एक दो दिन की ही तो बात है। 
सोनल जिज्जी आपके नजदीक के रिश्ते में ही बहन लगती थी। और आप उसी बंगले की उपरी मंजिल में  माँ बाबूजी के साथ रहती थी। जिज्जी ने हमें लाने के लिए बस स्टैंड गाड़ी भिजवा दी थी।   
रात में तुम्हारे उनके द्वारा दिए गए सम्मान,लगाव,सादगी और प्यार को देखते हुए बस यही सोचता रहा था  ,अनु...कि  हे भगवान ! इनलोगों को हमारी नज़र न लग जाए ...क्या कोई मैदानी इलाक़े में किसी अनजाने व्यक्ति पर इतनी सरलता से विश्वास कर सकता है ,..नहीं ना ?
हमारी मित्रता से जन्मे प्रेम के आखिर कितने दिन ही हुए थे ..यही कोई चार पांच महीना ही ना ...?
न जाने कब सोचते सोचते दीवान पर आंखें लग गयी थी पता ही नहीं चला...
अगली सुबह नींद तब खुली जब आपने चाय पीने के लिए मीठी आवाज़ लगाई ..,.." उठिए ...चाय ठंढी हो जाएगी..
आप आगे कुछ और भी कह रही थी , "...पता है आपको...रात दस बजे मैं आपको देखने आयी थी कि..आपकी तबीयत ठीक तो है ना ...? ..आप तो गहरी निद्रा में सो गए थे ...बहुत थक गए थे ना ?..शायद इसलिए नींद जल्दी आ गयी ..ठीक से सोए ना.. ठंढी तो नहीं लगी ना ..?
मैंने सर नहीं में हिलाया। टेबल पर रखी केतली की चाय से धुआं बाहर निकल रहा था ...और आप मेरा विस्तर की चादर,कंबल  ठीक करने में लग गयी थी ... और मैं अपने भीतर ही खो गया था ...  

यात्रा विशेष संगीत.
सम्पादित :शक्ति.डॉ. सुनीता सीमा शक्ति प्रिया. 
फ़िल्म : आप तो ऐसे न थे.१९८०. 
सितारे : राज बब्बर. रंजीता कौर.दीपक पराशर. 
गाना : तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है 
गीत : निंदा फ़ाजिल. संगीत : उषा खन्ना. गायिका : हेमलता. 


गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.

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गतांक से आगे : ३.

नैनीताल की होली और तेरे - मेरे प्यार का पहला पहला रंग. 

मल्ली ताल अपर मॉल रोड : झील में उतरते बादल : फोटो : डॉ. मधुप. 

चाय की प्याली बढ़ाते हुए आपने धीरे से खिड़की से पर्दा हटा दिया था...सामने हल्की रौशनी दिख रही थी। 
सुबह हो गयी थी। उस तरफ कोने में लाली दिखने भी लगी थी। 
आपके हाथों की बनी दार्जलिंग की लीफ से बनी चाय मेरी पसंदीदा पेय रही है। इसकी खुशबू मन को बहुत ही  भाती है। और सच कहें, आप बेहतर,स्वादिष्ट ,थोड़ी अधिक शक्कर वाली चाय बनाती है जो मुझे पीना पसंद है । 
आज होलिका दहन का दिन था। नवीन दा ने ही बतलाया था कि मल्ली ताल बड़ा बाज़ार, तल्ली ताल के एकाध दो जगहों पर होलिका दहन जैसे कार्यक्रम होते हैं जहां से हम भी फोटो तथा समाचार संकलन कर सकते हैं। डॉ.नवीन जोशी से बातें हो गयी थी उनके आमंत्रण पर ही आज हमें मल्ली ताल होली मिलन समारोह में भाग लेने जाना था। 
मुझे याद है उन दिनों भी दिल्ली तथा आस पास के सैलानी कुमाउनी होली का लुफ़्त उठाने के लिए नैनीतालअल्मोड़ा और रानीखेत के पर्यटन के लिए निकल पड़ते थे। उन दिनों भी कुछेक पर्यटकों की होली फेस्टिवल का डिस्टिनेशन नैनीताल हुआ करता था। लोग मौज मस्ती के लिए पहाड़ी सैरगाहों के लिए निकल पड़ते थे। आज कल तो इनकी संख्या अधिकाधिक ही हो गयी है। 
...जानते है ....' , आप कुछ उत्तराखंड की लोक संस्कृति के बारे में ही बतला रही थी , "...उत्तराखंड की सामाजिक, सांस्कृतिक लोक विरासत शोध के लायक है, जिसे मैं आपको बतलाना चाह रही हूँ, जिससे आप भी उत्तराखंड के कुमाऊँ की संस्कृति के बारे में जान सकेंगे और इस सन्दर्भ में सही लिख सकेंगे ।  यहाँ की  लोक संस्कृति  बेहतर ढ़ंग से समझने के लिए ,यहाँ के स्थानीय लोग किस तरह से  होली का पर्व मनाते हैं  हम इसके बारे में जानकारी रख  सकेंगे ? 
"....आज शहरीकरण के कारण लोग असामाजिक तथा आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं। लेकिन त्योहारों का सही अर्थ यह है, सामाजिक हो कर  हम समाज को उन्नत व प्रगतिशील बनाए। कुमाऊँ की होली की सामाजिक विशेषता यह है कि यहां के लोग अभी भी अपनी लोक संस्कृति को  जिंदा रखे हुए हैं ...। "
" ...कुमाऊँ की होली की उत्पत्ति कब हुई ...यदि आपको मैं बतलाऊँ तो मालूम हो ... यहाँ  की होली की चर्चा भी मथुरा  ब्रज की होली के साथ बराबर की जाती है। 
विशेषकर बैठकी होली संगीत की शुरुआत १५ वी शताब्दी में चंपावत के चंद राजाओं के महल में तथा  आसपास स्थित काली कुमाऊँ के क्षेत्र में हुई। आगे यह गुरुदेव क्षेत्र में ऐसे ही मनाई जाती थी। बाद में चंद राजवंश के प्रयत्न और निरंतर किए गए प्रचार के साथ यह संपूर्ण कुमाऊँ क्षेत्र तक फैल गई। 
सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा में तो इस पर्व पर होली गाने के लिए दूर दूर से गायक आते थे । देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में रामलीला की तरह राग और फाग का त्योहार होली भी विशेष स्थान रखता है....। "
मैं सम्मोहन की अवस्था में आपको बड़े ध्यान से सुन रहा था ... निरंतर घूरता हुआ। आपके  चेहरे की नैसर्गिक खूबसूरती, दिलकश, सलीके वाली मधुर आवाज़ में बला का जादू था। कोई भी आपकी धीमी, मीठी आवाज़ का चाहने वाला हो सकता था, तथा मात्र सुन लेने से ही आपकी तरफ़ खींचा चला आता। 
आप आगे कह रही थी , " ...कुमाऊँ क्षेत्र के अल्मोड़ा ,नैनीतालपिथौरागढ़चंपावत और बागेश्वर के  पहाड़ी जिले आते हैं, जिनमें  यह त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है । 
इसकी शुरुआत बैठकी होली से की जाती है, जिसमें प्रथमतः गणेश ,कृष्ण ,राम ,शिव इत्यादि देवी देवताओं के आराधना ,गीत से की जाती है । यह त्यौहार शरद ऋतु के अंत और फसल बोने के मौसम के आगमन की सही व जरुरी सूचना देता  है ....। "
मेरे हिस्से की चाय कब की ख़त्म हो गयी थी। आपने थोड़ी और दे दी थी। 

नैनीताल की होली और तेरे - मेरे प्यार का पहला रंग.कोलाज :डॉ. मधुप. 

...केतली , प्याली समेटते हुए आपने धीरे से कहा, "... आप नहा धो कर तैयार हो जाए ...दस बजे हम नाश्ता कर लेंगे ..आपकी पसंदीदा चीजें ऑमलेट, पराठें, चने आलू की फ्राइड सब्जी बना लेती हूँ ...मैं जानती हूँ आपको सन्डे हो या मंडे... अण्डे बहुत पसंद हैं.... 
"....हम बारह बजे होली मिलन समारोह में भाग लेने मल्ली ताल जाएंगे ... सुन रहें हैं ना ...? '
आप की ही तो मैं सुन रहा था। भला आपके सामने होते ही ...आपकी आँखों में अपना बजूद क्यों खो देता हूँ , अनु ! मैं स्वयं नहीं जानता हूँ। 
... १२ बजने वाला ही था। मैं नहा धो कर तैयार ही बैठा हुआ था। मैंने ब्लू डेनिम की शर्ट और बादामी रंग की पैंट पहन रखी थी। 
१२ बजने से ठीक  पन्दरह बीस मिनट पहले आप एक तस्तरी में कुछ ग़ुलाल ले कर कमरे में दाखिल हुई थी । कोने में रखी राउंड टेबल पर तस्तरी रखते हुए आपने बड़े प्यार से मेरी तरफ देखते हुए कहा , "... दूसरे  अन्य जगह के  होली मिलन समारोह में भाग लेने  से पहले .. मैं आप से ही होली मिलन समारोह कर लेती हूँ.....मुझसे रंग लगायेंगे न ...? 
मेरे भीतर का अनुत्तरित जवाब था ...क्यों नहीं..हम तो कब से आपके प्रेम के रंग में रंग गए हैं ? ....आप एक बार नहीं मुझे हजार बार रंग लगाए.... । 
"....आपको मैं अपने जीवन के सात रंग और ढ़ेर सारे गुलाल समर्पित करती हूँ ...भेंट कबूल करें...। " ..यह कहते हुए  आपने थोड़ा सा गुलाबी रंग का गुलाल मेरे गालों पर ..लगा दिया था...याद हैं न आपको .........? "
फिर भाल पर टीका लगाते हुए क्षत्राणियों की तरह कहा था, "..यशस्वी भवः ..! " आज भी मैं नहीं भूला हूँ।आपकी उँगलियों के हल्के स्पर्श ..मेरे गालों पर ... वो न भूलने वाले अहसास ही तो .. मेरी अनमोल यादों की विरासत है,अनु । "
मेरी याद में शायद यह पहली या दूसरी दफ़ा होली का प्रसंग था जब किसी मेरे अपने ने इतने प्यार और अधिकार के साथ रंग लगाया था... अभी भी ग़ुलाल वही लगे हुए प्रतीत होते है, जैसे । 
आपको उम्मीद थी मैं भी शायद आपको गुलाल लगाता ...लेकिन संकोच वश मैंने आपको रंग नहीं लगाया।
मैं समझता था आप जन्म जन्मांतर के लिए मेरी सोच ,भावनाओं के अमिट रंग में  रंग जाए....जब मन ही सदा के लिए लाल रंग में रंग गया है तो इस भौतिक रंग की क्या आवश्यकता है ? 
और शायद अब तो यही हो रहा है न ,अनु ! ...मैं जो बोलूं न तो ना  मैं जो बोलूं हाँ तो हाँ वाली बातें ही तो  अब तेरे मेरे जीवन के बीच में चरितार्थ हो रही है।  ....हो रही है , ना ,अनु ! 
मैं तो तब से ही आपके प्रेम के कभी न फीके होने वाले रंग में डूब गया हूँ ...ना ...! 
कैसे भूल सकता हूँ ,अनु ? वो रंग ही तो मेरे जीने आस की  प्रेरणा मात्र है .. वह अनमोल घड़ी मेरी-तुम्हारी यादों की  ही सुनहरी कड़ी है ....जिससे हम-तुम आजतक  जुड़ें हैं।   
आपके माँ बाबूजी के चरणों में गुलाल रख कर उनसे आशीर्वाद लेते हुए हमने १२ बजने में ठीक पांच छ  मिनट पहले नाश्ता खत्म कर लिया था। 
अब चलने की बारी थी। सुबह के नाश्ते में ही दिखा था कि आप एक कुशल गृहिणी भी है एक अच्छी कुक भी । खाने में स्वाद जो इतना अच्छा था ..और फिर कितने प्यार से आपने नाश्ता करवाया था...कैसे भुला जाऊं ..क्या यह हो सकता है..? ...नहीं ना ! 
हम दोनों तल्ली ताल रिक्शा स्टैंड से रिक्शा लेते हुए करीब १२ बजे मल्ली ताल स्थित बजरी वाले मैदान पहुंच चुके थे। नवीन दा पहले से ही हमारा इंतजार कर रहे थे.....। 
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 मेरी पसंद : यात्रा का गीत : जीवन संगीत 
शक्ति रेनू शबनम शालिनी तनु शक्ति * प्रिया  
 


फिल्म : हसीना मान जाएगी.१९६८.  
सितारें : शशि कपूर. बबीता. 
गाना : चले थे साथ मिल के. 

गीत : अख़्तर रोमानी.  संगीत : कल्याण जी आनंद जी. गायक : रफ़ी. 
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.

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गतांक से आगे : ४.
उत्तराखंड में होली की विभिन्न दिलचस्प परम्पराएं... और सिर्फ तुम.
 

उतराखंड होली के विभिन्न रूप : फोटो डॉ.नवीन जोशी. 

हम सभी उस स्थल तक पहुंच चुके थे जहाँ  एन. यू. जे. की तरफ़ से होली मिलन कार्यक्रम का शुभारम्भ होना था। मुख्य अतिथि बतौर कुमांऊ के वरिष्ठ अधिकारी के साथ साथ स्थानीय विधायक, पूर्व विधायक, महापौर, नगर आयुक्त नगर निगम, प्रधान संपादक, अखवारों से जुड़े कई कलम नवीस उस होली मिलन समारोह में उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि जो शायद नगर आयुक्त थे जैसा नवीन दा ने बतलाया उनके कर कमलों के द्वारा उद्घाटन की प्रक्रिया दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समारोह के थोड़े बाद जब गायन वादन का कार्यक्रम भी प्रारम्भ हुआ। सर्वप्रथम किसी शीर्षस्थ अधिकारी द्वारा मधुर पहाड़ी गीत सुनाया गया तो वहां उपस्थित तमाम जन झूमने पर मजबूर हो गए थे।
आप उन तमाम पहाड़ी स्थानीय शब्दों को हमें समझा रही थी जो मेरे लिए नए थे, और मैं इसका अर्थ कदापि नहीं समझ पा रहा था । वहीं कोई विधायक मंच से  कह रहे थे  कि एन.यू.जे.-आई का यह पहला मंच है जहां मैं  गीत गुनगुनाने को मजबूर हो गया हूँ । मैं अपनी समझ के हिसाब से फोटो ले रहा था। 
".....आप बतला रही थी बैठकी  होली के बाद यहां पर दूसरे चरण में खड़ी होली का आगमन होता है ,जिसका अभ्यास मुखिया के आंगन में होता है,लोग गोल घेरा बनाकर अर्ध शास्त्रीय संगीत का मुखड़ा गाते हैं,और लोग उसे दोहराते हैं, ढोल ,नगाड़े,नरसिंह उसमें संगत देते हैं,और सभी पुरुष मिलकर घेरों में कदम मिलाकर नृत्य करते हैं....." 

कुमाऊँनी होली : बैठकी होलीकी परंपरा.फोटो : डॉ. नवीन जोशी. 

".....आंवला एकादशी के दिन प्रधान के आंगन से होते हुए द्वादशी और त्रयोदशी को होली के दिन गांव के बड़े बुजुर्ग घर आंगन में जाकर लोगों को आशीष देते हैं। लोगों का स्वागत गुड, आलू और मिष्ठान से किया जाता है। चतुर्दशी के दिन क्षेत्र के मंदिरों में होली पहुंचती है, अगले दिन छलडी यानी गीले रंगों और पानी की होली खेली जाती है ....।"
इस बीच मंच पर  शास्त्रीय होली गायन के लिए  स्थानीय पुरुष कलाकारों के साथ महिला कलाकारों के द्वारा  होली की खूबसूरत रंगारंग प्रस्तुति की जा रही थी जो अति मनभावन थी । इसके साथ ही बाद में अतिथि कलाकार के द्वारा पर्वतीय एवं तराई से जुड़ी होली गायन किया गया जो लोगों को बहुत अच्छा लगा । मंच का संचालन कोई प्रदेश संगठन मंत्री एवं नगर अध्यक्ष कर रहे थे ।
" आप को बतला दें .. उत्तराखंड के कुमाऊँ में महिला होली का देवभूमि में  अलग ही महत्व है। यह  महिलाएं अपनी संस्कृति को जिंदा रखने तथा अपने मनोरंजन के लिए घर-घर जाकर वाद्य यंत्रों के साथ होली गीत का गायन करते हुए नाचती हैं ...। "
मैं यही सोच रहा था कि अनु... आप कितनी जहीन है...? तभी तो एक दो प्रयास में ही आपने सिविल सर्विसेज परीक्षा निकाल ली थी। आप आगे बतला रही थी ...
" ...यहाँ की स्वांग और ठहर होली कुमाऊँ की एक जागृत होली है, जिसके बिना होली अधूरी है । यह खासकर महिलाओं की बैठकी में ज्यादा प्रचलित है जिसे  समाज के अलग-अलग किरदारों के रूप में दर्शाया जाता है। 
मुख्य रूप से अल्मोड़ा,द्वारहाट,बागेश्वर,गंगोलीहाट,पिथौरागढ़,चंपावत,नैनीताल,कुमाऊँ की संस्कृति के केंद्र हैं। आज मैंने आप  के सामने  कुमाऊँ की होली के प्रकारों  का व्योरा दिया .. ।"
यहाँ
चीरहरण की परम्परा 
भी  होली के  मुख्य रूप में वर्तमान है। वह है ,चीर को चुराना,आप लोग समझेंगे कि यह चीर को चुराना क्या है ? लेकिन यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाग है। होली का फाल्गुन पूर्णिमा से पहले एकादशी से कपड़े में रंग डाल कर इसकी शुरुआत होती है,और इसमें चीर जलाने की भी प्रथा है, जिसे भगवती का रूप माना जाता है । 
लोग चीर को कपड़े में बांध कर रखते हैं, और उसकी सुरक्षा करते हैं ,ताकि लोग चीर चुरा ना सके। क्योंकि चीर के चुराने के बाद लोग उस गांव में फिर चीर जला नहीं सकते है , जिसे  होलिका दहन का रूप माना जाता है । इस तरह से हम देखते हैं कि हर जगह की अपनी एक सांस्कृतिक धरोहर होती है...।"
आपकी मधुर आवाज़ मेरे कानों में गूंज रही थी। मैं बस तुम्हारे लिए इतना ही सोच रहा था, " ...इतना ज्ञान ..! कहाँ से अर्जित किया अनु ? ...आप तो ज्ञान की अथाह सागर निकली। शायद आपके ज्ञान आपकी बुद्धि का भी मैं कायल रहा हूँ। है ना ...?" 

यात्रा का गीत :  मेरी पसंद :  जीवन संगीत
डॉ. सुनीता स्मिता तनु शक्ति * प्रिया अनुभूति  
नैनीताल के परिदृश्य में 
फिल्म : शगुन.१९६४  
गाना : पर्वतों के डेरों पर शाम का बसेरा है 
सितारे : वहीदा रहमान. कमल जीत. 


गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
 गीत : संगीत : ख़ैयाम. गायक : मोहम्मद रफ़ी. सुमन कल्याणपुरी. 

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गतांक से आगे : ५ .

बजरी वाला मैदान, ठंढी सड़क और ढ़लती शाम .

सामने की ठंढी सड़क,बजरी वाला मैदान, स्नो व्यू के लिए रोप वे .

"....बहुत गर्व है मुझे आप पर ..इतना कि आप मेरी जीवन गाथा की एक महत्वपूर्ण अध्याय सिद्ध होंगी। आपके बिना मैं अधूरा ही रहूँगा ..शायद निरर्थक। सच कहें तो हमें आप से इस ज्ञान, विशेष ज्ञान ,आपके शांत,संयमित व्यवहार से ही तो असीम प्यार है ..। शायद जन्म जन्मांतर के लिए ..कई सदियों तक रहेगा .. यह सच है ना ...?
हमदोनों की ऑंखें ही तो बहुत कुछ बोलती है । ...आपने मेरे लिखने लायक बहुत कुछ बतला दिया था ...
अच्छा खासा हम लोगों ने वहां समय व्यतीत कर लिया था। नवीन दा वही से आगे कुछ लिखने के लिए हल्द्वानी निकल चुके थे। 
और हम कुछ खाने के लिए मल्ली ताल में बजरी वाले मैदान की तरफ बढ़ गए थे। शाम होने वाली ही थी। सैलानियों की आवा जाही अधिक होने लगी थी। स्नो व्यू वाली पहाड़ी के शीर्ष पर एक दो झोपड़ियों में  मरियल बल्ब जलने लगे थे। 
शाम के वक़्त नैना देवी मंदिर के आस पास ढ़ेर सारे ठेलें और खोमचें वाले अपनी दूकानें लगा लेते हैं और उनकी बिक्री भी अच्छी खासी हो ही जाती है। हम पानी पूरी वाले ठेले के पास जैसे ही पहुंचे यह जानते हुए कि आपको पानी पूरी बहुत ही पसंद है मैंने अपने हाथों से ठेले वाले की तरफ़ इशारा करते हुए कहा , "....कुछ खा ले। "
आपने हंसते हुए धीरे से कहा, " ...यदि आप अनुमति  दे  तो ..."
"...जरूर ..लेकिन दस से ज्यादा नहीं ...नहीं तो एसिडिटी बढ़ जाएगी ..सुन रही हैं ,ना ...?"
बड़ी प्यारी मोहनी सूरत पर आपकी सहमति की हंसी बिखर गयी ..थी 
हम दोनों तो एक दूसरे के मन की भाषा, पसंदगी ,नापसंदगी का तो ख्याल रखते है, ना ...? ..और फिर प्रेम क्या है अनु ..एक दूसरे की चाहत के अनुसार ही अपने आप को ढाल लेना, अपनी जीवन शैली  को बदल लेना ही तो शाश्वत प्रेम की परिभाषा है। 
पानी पूरी खाने के बाद आपने खोमचे वाले को आलू टिक्की की चाट बनाने के लिए कह दिया जो मेरी पसंद थी। चाट खा लेने के बाद आपने मेरे पर्स से पैसे निकाल कर ठेले वाले को दे दिए.. फिर आगे हम एकांत में बैठने के लिए ठंढ़ी सड़क की तरफ बढ़ गए थे।  
मुझे याद है मैं तब से ही आप पर पूरी तरह से आश्रित होने लगा था। कभी भी किसी सफ़र में आपके साथ होने से मैं निश्चिन्त हो जाता था ...
...सारा दायित्व आपके हवाले कर देता हूँ ...आप ही सब संभालती है ..और मेरा सिर्फ एक ही काम होता है ..फोटो ग्राफी करना, इंटरव्यू लेना  और लिखना ..यह तो आप ही है ...जिसकी बजह से मैं लिख रहा हूँ ...
याद है ,अनु मैं अक्सर तुमसे ये बातें करता हूँ , " ..तुम ही मेरे जीवन की रेखा हो ..मेरे कर्मों की लेखा जोखा हो ..तुम नहीं तो हम नहीं .. पहले सिर्फ तुम हो उसके बाद ही मेरा अस्तित्व कहीं शुरू होता है... 

ठंढी सड़क से दिखती बादलों में ढकी नैनीताल की पहाड़ियां : मैं और सिर्फ तुम. 

सामने से कोई वोट वाला पहाड़ी लोक गीत गाते अपनी मस्ती में नाव को खेते हुए तल्ली ताल की ओर जा रहा था। आपने अर्थ बतलाया कि परदेश कमाने गए पति को पत्नी इस बसंत रितु की  विरह वेदना में याद कर रही है ...
बोलते हुए आपने मेरी तरफ देखते हुए जैसे कहा था , " ...आप तो मुझे नहीं छोड़ेगे ना...? "
जवाब क्या हो सकता हैं ,अनु ?..अर्ध नारीश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करने वालों  के लिए पार्वती के बिना शिव  का कहाँ कल्याण हो सकता है ...? नहीं ना। शिव वही है जहाँ शक्ति है। 
कुछ शाम अधिक हो गयी थी ..लौटते समय हम मल्ली ताल के बड़ा बाजार के आस पास होलिका दहन को भी देखने चले गए ..नियमित निर्धारित समय में वहां इकट्ठी की गयी घास पतवार ,लकड़ी,कागज़ रद्दी में आग लगाई गयी ..स्थानीय उस निकलती अग्नि की ज्वाला के फेरे लेने लगे थे...शायद कुछ लोग मस्ती में होली का ही कोई पहाड़ी लोक गीत गाने लगे थे ...हम अपने  भीतर  की बुराई की होलिका जला रहें थे 
घर लौटे तो रात का यही कोई दस बजने वाला था ....

मेरी पसंद : यात्रा संगीत 
डॉ सुनीता मधुप शक्ति प्रिया अनुभूति 
फिल्म : अभिलाषा.१९६८ 
गाना : वादियां मेरा दामन रास्तें मेरी बाहें 
जाओगे तुम कहाँ 
सितारे : संजय खान. नंदा



गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
 गीत : मजरूह सुल्तानपुरी. संगीत : आर डी वर्मन . गायिका  : लता 
 
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गतांक से आगे : ६. अंतिम क़िस्त. 

वो ठंडी सुबह और गुलालों रंगों वाली सूखी होली.

अपनी परंपरा को न छोड़ने का दर्शन कराती है कुमाउनी होली : कोलाज : विदिशा. 

दूसरे दिन होली थी। वैसे तो होली की तैयारी आपने होलिका दहन वाले दिन ही कर ली थी। बाजार से जो खाने पीने की चीजें , रंग गुलाल आदि लाना था आपने बड़ा बाज़ार से उस दिन ही खरीद लिया था। 
शाम होते ही बादल आसमान में घिर आए थे। रात में थोड़ी बूंदा बांदी भी हो गयी थी जिससे हवा में थोड़ी नमी आ गयी थी। पहाड़ की चोटियों पर हल्की हल्की  बर्फ जमी रहती है इसलिए ठंड के कारण लोग ज्यादा गीली या यूं कहें रंगों वाली होली नहीं खेल पाते हैं। परंतु उनका उल्लास किसी से भी कम नहीं होता है । सच कहें तो अपनी परंपरा को कभी न छोड़ने का दर्शन कराती है कुमाउनी होली। 
आप कह रही थी चाइना पीकडोर्थी सीट में कहीं न कहीं कल की रात बर्फ़ के फाहे जरूर पड़े होंगे। चाइना पीक की पहाड़ी तो नैनीताल की सबसे ऊँची पहाड़ी है ना ?
थोड़ी सर्दी भी अधिक बढ़ गयी थी। दिन चढ़ते ही नीचे ढ़लानों में बच्चें शोर गुल मचाने लगे थे। रंग लगाने के लिए आपस में आपाधापी शुरू हो चुकी थी। होली के उत्साह में बच्चों को ठंडी की भला कहाँ फ़िक्र होती है ..? वे कहाँ मानने वाले होते हैं ? 
कुमाऊंनी होली में चीर बांधने के साथ ही होल्यारों के द्वारा घर-घर जाकर खड़ी होली गीत  गायन शुरू हो गया था। नीचे पहाड़ी ढ़लानों से होली के गीतों की स्वर लहरी तिरती हुई हमारे कानों तक पहुंचने लगी थी। शायद कोई होल्यारों की टोली नीचे की तराई वाले गांव में गा रही थी। और हवाओं में उड़ते लाल ,पीले ,हरे ,गुलाबी शोख रंगों से पहाड़ का वातावरण होलीमय बना हुआ था। लोग मस्ती में थे।  
मुझे याद आ गया अपना बचपन। जब हम बड़े हुए थे तो हम भी अपने साथियों के साथ खूब उधम मचाया करते थे। लेकिन बाद में न जाने क्यों धीरे -धीरे रंगों के प्रति मेरा उत्साह कमता गया। चेहरे पर कई रंगों की परत लगाने, फिर उसे मशक्कत से साबुन घिस घिस कर छुड़ाने में जो वक़्त जाया होता था उससे मैं परहेज करने लगा था । 
ले दे के अपनी होली गुलालों की सूखी होली तक ही सिमट गयी थी। रस्म निभाने मात्र के लिए थोड़ा बहुत लगा देता था या थोड़ा सी लगवा लेता था। अपने लिए बस इतनी ही तो होली की रस्म रह गयी थी न, अनु। 
याद करता हूँ आपके यहाँ भी माँ बाबूजी ने होली का पहला रंग भगवान जी को चढ़ाया था।  आपके कहे अनुसार ही फिर मैंने भी उनके चरणों पर गुलाल रख कर ढ़ेर सारा आशीर्वाद लिया था । 
होली के व्यंजनों में अभी तक आपके हाथों की बनी गुझिया, नारियल की बर्फी, और मैदे आटे की पतली निमकी के स्वाद को अभी तक नहीं भुला हूँ। आपने ज़िक्र किया था , ' गुझिया उत्तर भारत की एक  पारंपरिक मिठाई है जिसे  मैदे के खोल में खोए की भरावन भर कर फिर उसे शुद्ध देशी घी में तल कर बनाया जाता  है। '
कभी कभी मैं यह सोचता हूँ, अनु , कि आप न जाने कितनी कलाओं में माहिर है ? एक कुशल गृहिणी .. कुशल प्रशासिका ....या सब कुछ। समस्त कार्य  को अच्छे ढंग से करना ही आपकी खूबी है।  
मैं तो हमेशा ही सोचता रहा हूँ  कि कितना सौभाग्यशाली हूँ मैं ..? .जो आप जैसे संतुलित व्यक्तित्व का साथ मिला है । यूँ  कहें तो हमने एक दूसरे से ही तो जीने की कलाएं सीखी हैं न ? सच माने तो एक दूसरे के बिना अधूरे ही हैं।
दोपहर नीचे के घरों से कुछ लोग  होली खेलने आ गए थे। मैं उपर की बालकनी से ही देख रहा था। आपने सबका दिल खोल कर स्वागत किया था। सबकी असली होली यहीं दिखी थी ,जहां सब ने एक दूसरे को पूरी तरह से रंग डाला था । उनलोगों ने जम कर सूखे गीले रंगों का भी प्रयोग किया था। चेहरे रंग डाले थे। सबके चेहरे देखने लायक थे। आपका सुर्ख़  गुलाबी चेहरा भी कितना भा रहा था ..? 
जब आप गुसलखाने जा रही थी तो अपने चेहरे पर लगे ढ़ेर सारे रंगों में से  कुछ रंग आपने मेरे गालों पर भी लगा दिया था, यह कहते हुए ,' ...बुरा नहीं मानेंगे  न ...प्रीत का रंग लगा रही हूँ ... लगाए रखिएगा ..'
अब मैं क्या कहूं ,अनु।  यही तो वो जीवन के सात रंग थे जो आज तक मेरे अंतर मन के पटल में बिखरे तो हटे ही नहीं। फीके भी नहीं हुए। भला कैसे छूट भी सकते  हैं  ? नहीं न , ....अनु !
रात को हम सब लोग डाइनिंग हाल में इकट्ठा हुए तो माँ बाबूजी के साथ बैठकर  रात का भोजन किया।  जिसमें  आपके द्वारा बनाए हुए पकवान एक साथ परोसे गए थे। अगली सुबह हमें दिल्ली भी लौटना था। 
उस दिन की होली की लाली जो आपके चेहरे पर बिखरी पड़ी थी और कुछ रंग जो आपने मुझे लगा दिया था उसकी रंगत कभी भी फ़ीकी न पड़ी। कब की वो होली की रंगत मेरे जीवन में सुबह की लाली बन कर छिटक चुकी थी। वैसी सुबह की लाली जिसकी आज तक कोई शाम ही न हुई। समय के अंतराल में वो रंग पक्के ही होते चले गए। 
आज भी जब  होली आती है और आप साथ नहीं होती हैं  तो खुली आँखों में ही वो होली की खूबसूरत यादें  मन के पिटारे में स्मृत हो जाती हैं । उसके बाद तेरे मेरे सपनों के रंग एक ही हो जाते हैं ...। 
और सच माने तो इसके बिना  हमदोनों  की जिंदगी कैनबास पर बनी एक श्वेत श्याम तस्वीर की भांति हो जाती है जिसमें चटख रंगों की जरुरत सदैव रहेगी।  उन रंगों के बिना जीवन आकर्षण हीन हो जायेगा   ...एकदम से बेमतलब ...और बेमानी ...। 

इति शुभ 
यात्रा का गीत :   मेरी पसंद :  जीवन संगीत.
डॉ. मधुप. और फिर सिर्फ़ उनके लिए जो 
प्रकृति,  प्रेम , पहाड़ , अध्यात्म ,सन्यास , नव संसार और पुनर्जन्म में विश्वास रखते हैं 
*
फिल्म : उस्तादों के उस्ताद १९६३ 
गाना : सौ बार जन्म लेंगे सौ बार फ़ना होंगे 
ऐ जाने वफ़ा फ़िर भी हम तुम न जुदा होंगे 
सितारे : प्रदीप कुमार. शकीला. अशोक कुमार. 
 


गीत : असद भोपाली संगीत : रवि गायक : मोहम्मद रफ़ी 

पृष्ठ संपादन : शक्ति.डॉ.सुनीता शक्ति * प्रिया. 
पृष्ठ सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा अनुभूति. 

आगे क्रमशः जारी 

ए एंड एम मीडिया प्रस्तुति.
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शक्ति. डॉ. ममता कौशाम्बी : ममता हॉस्पिटल : बिहार शरीफ. समर्थित. 
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मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७ 
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शिमला डेस्क. 
संपादन.


शक्ति : वनिता अनुभूति स्मिता.
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सूना है पहाड़ों का आँगन : आ जा के अधूरा हैं अपना मिलन : डॉ.सुनीता शक्ति* प्रिया अनुभूति.  

तन मन धन सब है तेरा बिन तेरे क्या है मेरा डॉ.सुनीता शक्ति* प्रिया अनुभूति. 
हे नीले गगन के तले धरती का प्यार पले : फोटो कोलाज : डॉ.सुनीता शक्ति* प्रिया अनुभूति. 
तेरे बिन जिया न लगे आ जा रे आ जा रे : फोटो कोलाज : डॉ.सुनीता शक्ति* प्रिया अनुभूति. 
जाने कैसा है मेरा दीवाना कभी अपना सा लगे कभी बेगाना :डॉ.सुनीता शक्ति* प्रिया अनुभूति. 
दिल ने फ़िर याद किया बर्फ़ सी लहर आयी हैं : डॉ.सुनीता शक्ति* प्रिया अनुभूति . 
रेत के नीचे जल की धारा हर सागर का यही किनारा : डॉ.सुनीता शक्ति* प्रिया अनुभूति . 
इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना है : डॉ.सुनीता शक्ति* प्रियाअनुभूति . 
वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे : डॉ.सुनीता शक्ति प्रिया. 
चले थे साथ मिल के चलेंगे साथ मिल के :कोलाज : डॉ.सुनीता शक्ति प्रिया. 
तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है : रंग भरे जीवन में : कोलाज : डॉ.सुनीता शक्ति प्रिया. 
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*
महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति. 
*
स्वर्णिका ज्वेलर्स, सोह सराय बिहार शरीफ समर्थित. 
*
-------
खेलेंगे हम होली : ये कौन चित्रकार है : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
-------------
शिमला डेस्क.
संपादन.


शक्ति. स्वाति मंजिता अनुभूति.
*
कितनी खूबसूरत ये कश्मीर है : प्रकृति कलाकृति : कर्नल सतीश कुमार सिन्हा. (सेवा निवृत )
कृष्ण  है विस्तार यदि तो सार है राधा : कलाकृति : शक्ति मंजिता : चंडीगढ़. 
सुबह ए  बनारस :  काशी के घाट : कला के रंग : कृति : रंजीत : वाराणसी.
बनारस के घाट , कलाकृति : शक्ति. अनुभूति सिन्हा . शिमला.
सबको रोज़ बुलाए काशी : रांड ,सीढ़ी ,सांड और सन्यासी : कला : श्रीराम गुप्ता : अस्सी : वाराणसी.
 घाट घाट का पानी पी कर हमने सारी उमर गुजारी : अस्सी : श्री राम गुप्ता वाराणसी 
  शक्ति के रंग : शक्ति की कलाकृति : शक्ति. स्वाति : वाराणसी. *
टाइम्स मीडिया प्रस्तुति. कोलकोता डेस्क.
-------- खेलेंगे हम होली : वर्ष : २०२५ : फोटो दीर्घा : रंग बरसे :
विशेष : पृष्ठ : १२. ------------ संपादन.


शक्ति. डॉ.सुनीता शक्ति* सीमा प्रिया. * शक्ति लिंक : फोटो दीर्घा : रंग बरसे. * https://msmedia4you.blogspot.com/2025/03/rang-barse-holi-photo-blog.html अद्यतन *
---------
अतुलनीय : भारत : उत्तर प्रदेश : होली : फोटो दीर्घा : २०२५ : पृष्ठ :  ० / १ 
-----------
 वाराणसी : अवध : डेस्क 
संपादन.
शक्ति.डॉ. रतनिका नीलम स्वाति नीरजा.
   रंग लो जी आज तन रंग लो खेलो जी आज मन भर के होली : फोटो कोलाज : शक्ति. शालिनी.  

* वर्ष : २०२५ : फोटो दीर्घा : रंग बरसे : विशेष : मुख्य : पृष्ठ : १२.
नैनों से ये नैन मिला के : होली आज मनाना : होली मस्ती : शक्ति : मीना ऐंजल सिंह : मुक्तेश्वर. 
सरयू घाट : अयोध्या : संध्या आरती का दृश्य : फोटो : शक्ति. संगीता.अयोध्या. 
आमी जे तोमार : रामनगर किला : फिल्म भूल भुलैया शूटिंग लोकेशन : कोलाज : शक्ति 
गंगा में डूबा कि यमुना में डूबा डूब गया मेरा मन : फोटो : शक्ति स्निग्धा : प्रयाग राज. 
 कागज़ पर बिखेरती कला संस्कृति के सजीव रंग : शक्ति. स्वाति : अस्सी घाट : वाराणसी. 
*

अपने ही रंग में रंग ले मुझको याद रहेगी होली रे : फोटो दीर्घा : वर्ष : २०२४ : पृष्ठ : १२. 
संपादन 
शक्ति डॉ. भावना गरिमा रेनू जया सोलंकी 
पदमावत डेस्क. जयपुर.
*
 
जयपुर में साहित्यकारों की होली : फोटो : शक्ति रेनू शब्दमुखर. 
कलाकारों के संग दिल्ली में होली के रंग : फोटो : शक्ति. मंजीत कौर.  

होली के विभिन्न रंगों की सेल्फी नालंदा में : फोटो. डॉ.सुनीता भावना शक्ति प्रिया . 
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न्यूज़ रील : मुझे भी कुछ कहना है :शुभकामनाएं : पृष्ठ : १३.
------------
देव भूमि डेस्क. हिमाचल.
नैनीताल शिमला.
सम्पादित.
 


शक्ति. डॉ. सुनीता शक्ति * अनुभूति प्रिया.
©️®️ M.S.Media.

रानी खेत : नैसर्गिक सौंदर्य : शॉर्ट रील : डॉ. मधुप 


यात्रा फिल्म : ये वादियां ये फिजायें बुला रही हैं तुम्हें 


*
पद्मावत डेस्क :जयपुर 
अपनों के लिए जो कभी न बदले विषम परिस्थितियों में 
सदैव साथ,विश्वास  प्यार, धैर्य का स्थायी छत्र प्रदान करने का पुरुषार्थ करे 
यथार्थ में वही  छत्रिय परम्परा का पोषक है 

@ शक्ति. डॉ. सुनीता मधुप शक्ति * प्रिया अनुभूति.

*
२६ मार्च 
हिंदी की मीरा  के जन्म दिवस पर भावभीनी यादें  : 
लघु फिल्म :   छायावादी कवयित्री : महादेवी वर्मा : 


*
शहीद दिवस : २३ मार्च
अमर सहीद : भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव.

लगेंगे शहीदों की चिताओं पर हर वर्ष मेले
वतन पर मरने वालों का नामों निशान होगा

*
झील के उस पार : नैना देवी मंदिर : लघु फिल्में 


*
२२ मार्च : बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.

डॉ. मधुप. यात्रा विडियो क्लिप : राजगीर ग्लास ब्रिज :

शॉर्ट रील : गर्व से कहें कि हम बिहारी हैं 
बिहार है : चन्द्रगुप्त का अहंकार है 

*
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मुझे भी कुछ कहना है : शॉर्ट रील : शुभ रात्रि : पृष्ठ : १३.
--------
साभार :  ब्लॉगर : ख़ुशी : उत्तराखण्ड.
 
*
मोहब्बत जो करते है वो
मुहब्बत जताते नहीं धड़कनें अपने दिल की कभी
किसी को सुनाते नहीं
*
साभार : ब्लॉगर पारुल :  लखनऊ 


 शॉर्ट रील : साठ बरस में इश्क लड़ाये 
*
गर्दिश में हूँ आसमा का तारा हूँ आवारा हूँ :
शक्तियों द्वारा : बजाया गया माउथ ऑर्गन : संगीत
*

*
प्रेम गीत : जीवन संगीत : मेरी पसंद
फ़िल्म : अभी तो जी ले. १९७७.
लोकेशन्स : नैनीताल
सितारे : डैनी. जया भादुड़ी. किरण कुमार. सिम्मी ग्रेवाल.

गीत : नक़्स लायल पूरी. संगीत : सपन जगनमोहन. गायक : किशोर कुमार. आशा भोसले.
गाना सुनने देखने के लिए दिए गए लिंक को दवाएं


मेरे जीने का शहर नैनीताल :
तुम्हारे लिए :
अनु : तुम : हम और हमारी : तुम्हारी यादें
*

प्रथम मीडिया प्रस्तुति.
*
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आपने कहा : मुझे भी कुछ कहना है : चलते चलते : पृष्ठ : १४.
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संपादन.


शक्ति. बैशाखी.विश्वा.
बड़ोदा. गुजरात.
*
भाविकाएँ 
दवा उन्हीं के पास था

जिसने दर्द दिया
दवा उन्हीं के पास था
जिसने चैन लिया
सुकून उन्हीं के पास था
मुझे नहीं जाना उस गली
जहां उनका घर था
लेकिन मेरे दवाखाना का पता
उसी गली का था


फोटो : शक्ति स्मिता
समाचार वाचिका : दूर दर्शन : पटना 

*

तेरे साथ हो ली थी. 

*
शब्द चित्र. 
प्रकृति हमेशा आत्मा के रंग पहनती है 
शक्ति डॉ सुनीता शक्ति प्रिया 
*


----------
चलते चलते : दिल ने फिर याद किया : आपने कहा :पृष्ठ : १४.
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शक्ति ही सत्य है, शक्ति ही शिव है, शक्ति ही सुन्दर है, शक्ति ही अनंत ( श्री हरि ) है
*
प्रकृति, प्रेम,पहाड़,उत्तम पुरुष, पुनःनव निर्माण,अध्यात्म ,सन्यास ,और पुनर्जन्म.
*
डॉ. सुनीता शक्ति प्रिया अनुभूति
देव - शक्ति. भूमि डेस्क
नैनीताल शिमला
*
जीवन बहुत जटिल है

जीवन बहुत जटिल है। उत्तर खोजने की कोशिश न करें
क्योंकि जब आप उत्तर पाते हैं तो जीवन प्रश्न बदल देता है

*
साथी हाथ बढ़ाना

बहुत आसान होता है किसी पर उँगली उठाना, लेकिन बहुत मुश्किल होता है किसी को उठाने के लिए उस की उँगली को पकड़ना.
*
अपनों के लिए समझदारी

किसी भी वर्ग में नहीं पढ़ाया जाता है की कैसे बोलना चाहिए ?, लेकिन जिस प्रकार से हम बोलते है वह तय कर देता है की हम किस वर्ग के है,
इसलिए सदैव अपनों के लिए तो कम से कम सबके सामने तो सोच समझ कर बोलो ,मीठा बोलो.

*
परवाह

एक परवाह ही तो बताती है कि कौन किसका कितना ख्याल रखता है, वरना रिश्तों की गहराइयों को मापने की कोई तराजू नहीं होता है.

*
भरोसा
 भक्ति और भरोसा भगवान पर  इतना करो की संकट हम पे हो और चिंता भगवान को हो
*
जीवन में  कड़वाहट

किसी की भूल से आपके जीवन में  कड़वाहट हो सकती है 
लेकिन इस छोटी सी भूल के लिए उसका सम्यक साथ छोड़ना कदाचित उचित नहीं है 
वशर्तें फिर वो भूल फ़िर से न की जाए...संवाद जारी रहें 
कम रिश्ते बनाइये और....उन्हें दिल से निभाइए....!
*
डॉ.सुनीता शक्ति  प्रिया राधिका.शबनम. नई दिल्ली. 
*


*
' सुख दुःख ' को समझ कर आत्मसात कर लेना  ही जीवन को ' समझना ' है.

संसार सम्यक् गति से चलता रहता है जिसमें नदी की तरह दो किनारे साथ साथ चलते रहते हैं, 
इसे समझ कर आत्मसात करना ही जीवन को समझना है। 
इस भाव पर आधारित इस होली विशेष पत्रिका के संपादन कर पाठकों तक पहुंचाने के लिए साधुवाद.
संपादकीय शक्ति समूह का हृदय से आभार और अभिनन्दन.
अरुण सिन्हा, दुमका, झारखण्ड.
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राधिका कृष्ण दर्शन 



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Contents Page : English.
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Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Editorial Page : 2.
Shakti Editorial Link : 2.
Shakti Vibes Link.2/0 : English Page 2/1.
Shakti Writeups  Link : English  : 2/2.
  Shakti :Kriti Art  Link :  English :  Page : 2/3.
Short Reel : News : Special : English : Page : 4.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 5.
You Said It : Days Special : English : Page : 6.

---------
Editorial Page : 2
------------
Chief Editor.
Indraprastha* Desk.


*
Shakti : Prof. Dr. Roop Kala Prasad..
Shakti : Prof. Dr. Bhwana
Shakti : Tanushree.
Shakti : Radhika Krishna*
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Executive Editor. English
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Dr.Sunita ' Shakti ' Priya.
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Press the given below Shakti Vibes Link.02
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*
Times Midea Shakti. English Page.
Mahalaxmi.Kolkotta Desk Shakti. Seema
Updates.
Holes in our boats but  blaming the sea.
*
There are holes in our boats but we blame the sea.
All the time we say ; 
“Something’s wrong with the world, 
but nothing’s wrong with me.

Mahalaxmi.Kolkotta Desk Shakti. Seema Thought * : Page : 2/1 /1
Kolkotta Desk.Shakti's Positive : Photo Thoughts : Page : 3/1 /1.
Editor : Shakti Seema.

*
M.S.Media.Shakti : English Thought Page 
 
Updates.
*
the best ' cure ' for the ' body ' is a quiet ' mind '.
*
 Naina Devi.Nainital Desk.Shakti Shakti Thought * Page : 2/1 /2
Tomorrow's wings  : 
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Todays struggles are tomorrow 's wings 
*
Updates.
Narmada Desk. Jabbalpur. Shakti. Anita.Thought * Page : 2/1/3
*
Talent : Looks : Attitude : Ego.
Talent and Looks are God given....Be thankful 
 Attitude and Ego are Self Created.....Be Careful
*

Times Media Presenting 


My Passion :
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Editor.
Dr.Sunita Madhup Shakti* Priya.
*
Press the Shakti  Writeups link : Dr.Sunita Madhup Shakti* Priya.
My Sonnets and Poems.
My Travelling : My Passions.
*
Latest Updates.

Day 5 .
Final Day to Say Good By.
Roaming a little anywhere in Hanoi. 
*
Vietnam : The Country for
Independence – Freedom – Happiness.
My Passion : Travelling : Blogs : Hanoi, Vietnam.
Writer Shakti Vidisha. Photos : Shashank Shekhar.
*
Editor.
Dr.Sunita Madhup Shakti* Priya. Darjeeling Desk.
Co - editor : Er.Snigdha Prakhar Bangalore.
*
Photo : Travelling Blog :
Shakti Vidisha. Shashank.
a cycle walk on the island  : Cat Ba Island : Photo Er. Shashank.

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Kriti Art Link : Shakti: English : Page : 2/3
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Editor.

Shakti. Anubhuti Swati Sushmita.
*Shakti Manjeet Kaur.Chandigarh.Kala Kriti Link : 2/3
*
*
Updates*. 
Kala Kirti : Kala Women enrich our lives in countless ways. Shakti*Manjeet 
Kala Kirti : Khub Ladi Mardani Wo To Jhansi Wali Rani Thi :  Shakti.Manjeet 
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Short Reel : News : Special : English : Page : 4.
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Editor.


Shakti. Dr.Bhwana Shabnam Tanu Priya
Darjeeling  Desk.
*

Latth mar Holi 
Shakti Yogoia Jaipoor 


you tube channel : Link : Subscribe.


Short Reel : Scenic Beauty of  Pahalgam : Today : 
Saju : Kashmir

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News : Special : Holi : English : Page : 4 / 1
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Editor.
Shakti. Dr.Bhwana Shabnam Tanu Priya
Darjeeling  Desk.
*
Exploring Rajgir : Bihar Darshan.
*
Bihar's first glass bridge in Rajgir second in India,somewhat. 
Write Up : Dr.Madhup Sunita. 

Bihar's first glass bridge in Rajgir. Country's wide attraction for the tourists.  
photo S.K. Mondal.
Rajgir /CR. Come to Rajgir spend a few days here, Bihar's first glass bridge in Rajgir has been built in Rajgir. Zoo Safari an another  dream project of CM Nitish Kumar.
As per the reliable sources both the tourist attraction places interlinked  tour plan can be booked on line for 550/ rupees. There may be some technical problems in booking these places.
However the tourists can schedule their programme of visiting these areas in a day. 
It is indeed a one day plane when you comfortably  cover visiting the mostly visited the Zoo Safari, and Nature Safari combinedly.     
A walk over the Glass Bridge : As he has his keen observations over the all Rajgir projects to draw the attention of national and international tourists from each nook and corner. And soon it remained open for all tourists by.
It is completely made of glass and steel.This bridge is 85 feet long and feet wide. Walking on this bridge will be a thrilling experience. While walking on it people will felt themselves  somewhat floating in the air. This is the first bridge in Bihar and the second in the country.
The country's first glass bridge is in Poling in Sikkim while parallel glass bridge of Laxman Jhula is being constructed in Rishikesh, Uttarakhand.
Soon the  nature zoo safari Rajgir will draw many of the tourist’s more attraction from the different parts of world in coming days. Tourists will start coming from India and other countries to visit this international tourist spot Rajgir especially to enjoy the sky walk over the world’s second, county’s second and Bihar's first Glass Sky Bridge.It is for us with a walking over the wide Glass made Sky Bridge based on German technique.

Bihar's first a newly built glass floor bridge at Rajgir,Bihar.

a tree hut . courtesy photo Danik Jagran
Zoo Safari Park : It is under our knowledge the work of encompassing Zoo Safari Park is under progress for worth coasting 177 crore and at the verge of completion shaping alike Jim Corbet Nainital. Inside the zoo safari tourist, will enjoy moving wild animals.  
Nature  Safari Park : They will enjoy the nature safari. Indeed this walk will be a thrilling one and will give a wide angle of Zoo Safari. In Zoo Safari many natural huts like bamboos huts, tree houses are made for the visitors would be attractions in the coming years where tourist can stay.
Nature Safari it is an another interlinked  place in Zoo Safari Park from the specific points people would enjoy the beauty of nature and valley. Its coasting is about 19 crore.

have a walk over the glass bridge in Rajgir. : photo Dheeraj

An Unforgettable  walk over the Glass Bridge : The same glass bridge is almost ready in Bihar's international tourism city of Rajgir and 20-25 persons can have a walk at a time. This bridge is built in the dense forests of Rajgir which is part of the Rajgir Nature Safari and this safari is likely to be operational by March 2021. 
At the coast of present 19 crore it will be hanging at the height of 200 feet joining the two peaks of 
Panch Hills in Rajgir. Baibhar Giri, and Swarn Giri. 
Seeing the depth from the glass floor, we will feel too much thrilled in ourselves in being in a fix walk or not to walk.

Column Editing : Shakti Dr.Sunita Tanu Priya. Darjeeling.
Decoratives : Shakti Anubhuti Manjita Seema. 

.

A bird's eye over an aviary : A visit of Rajgir Zoo Safari,
Dr. Sunita. Er. Jyoti Siddhant.
.


Save birds and birds will save you : photo Dr.Sunita Jyoti.

It was 23 rd of March we were exploring Rajgir.Just yesterday we were celebrating the Bihar Divas Celebration. I decided to explore the most scenic tourist place of Rajgir.
We have heard a lot about the Rajgir Zoo Safari, which was inaugurated by Bihar CM Nitish Kumar, on 16th February 2022. It is a nice and worth seeing place near by Biharsharif Gaya highway.
Recently we come to know about an opening of aviary for the common on 8th of March 2025. It was developed in area of few acres.The minimum recommended space for an aviary depends on the bird species and number of birds, but generally, each bird needs enough space to fly and move comfortably, with a minimum
By Mar 8 on Saturday Chief Minister Nitish Kumar inaugurated bird aquary developed in premises of zoo safari in Rajgir of Nalanda district in Bihar. Bihar CM Nitish Kumar,  after inaugurating the bird aquary, said it has been developed in one acre area having all required facilities for birds
An aviary the interlinked area of the Rajgir Wildlife Safari, located in Rajgir, Nalanda, Bihar, features a bird aviary and is known for its diverse wildlife, including herbivores, carnivores, and various bird species like Budgerigar ,Scarlet Macaw, Cockatiel.


a short reel of an Aviary : Dr. Madhup.Rajgir Zoo Safari Park.

Budgerigar : The budgerigar, also known as the common parakeet, shell parakeet or budgie, is a small, long-tailed, seed-eating parrot native to Australia. Naturally the species is green and yellow with black, scalloped markings on the nape, back, and wings.
Scarlet Macaw : the scarlet macaw also called the red-and-yellow macaw, red-and-blue macaw or red-breasted macaw, is a large yellow, red and blue Neotropical parrot native to humid evergreen forests of the Americas.
Cockatiel : The cockatiel, also known as the weero/weiro or quarrion, is a medium-sized parrot that is a member of its own branch of the cockatoo family endemic to Australia. They are prized as exotic household pets and companion parrots throughout the world and are relatively easy to breed compared to other parrots

Column Editor : Shakti : Priya Seema Tanushree
Column Page Decorative : Shakti Manjita Anubhuti Shweta.

*

exploring Bihar has been always my past present passion :  
Bihar Divas celebration day
Chhoti Si Mulaqat :  Maithili Thakur
Dr.Sunita Madhup

*
Maithili Thakur,a Bihar based playback singer, is known for her diverse musical style : photo Shakti.

On the occasion of Bihar Divas celebration I simply dialed Ramesh Thakur, parent of Maithili Thakur for having an interview regarding her performance . Earlier I was too trying to hold an online interview for my column Chhoti Si Mulaqat .
If we never forget that the Bihar Day : Bihar Diwas is being observed every year on March 22 marking the formation of the state of Bihar.
As history dates itself during the British period on 22 March 1912, the Bihar and Orissa divisions of the Bengal Province were separated to form the Province of Bihar and Orissa in British India.The day is a public holiday in Bihar for its wide celebration. So I was looking for a shakti star that roots herself in Bihar.
Today it has been a high time for publishing an interview of a singing star, namely Maithili Thakur,the pride of Bihar.
They were outstationed from New Delhi.Probably they were at Bagdogra Airport
in West Bengal. They were returning after the completion of their scheduled programme.
Maithili Thakur, born 25 July 2000 is a Bihar based Indian playback singer trained in Indian classical music and Folk Music. She has sung original songs, covers, and traditional folk music prominently in Hindi, Bengali, Maithili, Urdu, Marathi, Bhojpuri, Punjabi, Tamil, English and more Indic languages.She was born in Benipatti, Madhubani district, Bihar to a Maithil musician and music teacher working in Delhi Ramesh Thakur and Bharti Thakur.
As our photo editor Ashok Karan had many clicks of her performance however I am publishing the photo shared by her father Ramesh Thakur .

exploring Bihar has been always my past present passion : Photo Dr.Sunita Madhup

Bihar Day was started and celebrated on large scale by Bihar Government in the tenure of Nitish Kumar. Apart from India, it is celebrated in countries including the United States, Germany, Britain (Scotland), Australia, Canada, Bahrain, Qatar, United Arab Emirates, Trinidad and Tobago and Mauritius.

Column Editor : Shakti : Priya Seema Tanushree
Column Page Decorative : Shakti Anubhuti Manjita Shweta.

*
Historical and Archaeological Evidence of Colorful Holi
' Dol Yatra,' 'Dol Purnima,' ' Basant Utsav, 


Dr. Santosh Anand Mishra.
Writer.Blogger.
.
Holi, the vibrant Hindu spring festival, is a celebration of colour, joy, and the triumph of good over evil. Celebrated in the month of Phalgun (March) on the full moon day, it marks the arrival of spring and is known by various names such as " Dol Yatra," " Dol Purnima," "Basant Utsav," and " Festival of Colors." This document explores the historical and archaeological evidence that attests to the ancient origins and cultural significance of Holi.
Ancient Origins * and Textual References:
Holi's roots are deeply entrenched in ancient Indian customs and agricultural practices, predating the Christian era. It is mentioned in early religious works such as:
 a. Jaimini's Purva Mimamsa Sutras: This ancient text provides early references to the festival.
 b. Kathak Grihya Sutras: Another early source that mentions Holi.
 c. Vedas and Puranas: Detailed descriptions of Holi are found in texts like the Narada Purana and Bhavishya Purana.
 d. Jaimini Mimamsa: This text also documents the celebration of Holi.
 e. King Harsha's Ratnavali (7th century) : King Harsha mentions " Holikotsav " in his literary work, providing historical validation.
Furthermore, it is noteworthy that Holi was not confined to the Hindu population. Muslim writers of the period also documented the celebration of Holi, indicating its widespread cultural acceptance.
Legends and Symbolism : Two prominent legends are associated with Holi: Holika and Prahlad: This story symbolizes the victory of good over evil. Holika, the demoness, was defeated by Prahlad's unwavering devotion to Lord Vishnu.
Krishna and Radha: This legend represents the playful love and romance between Krishna and Radha, symbolizing love, friendship, and the arrival of spring.
Holi's Colours in Harmony with Nature: Traditionally, the colours used during Holi were derived from natural sources, including:* Vegetables and plant extracts* Flower petals
However, the use of artificial, chemical-based colours has become prevalent in modern times.
Archaeological * and Artistic Evidence:
The presence of Holi is evident in ancient Indian art and records:
 a.Chennakeshava Temple, Belur, Karnataka (12th century): Carvings on the temple walls depict Madanika Devi playing Holi, including an engraved statue with a "pichkari" (water gun).
 b.Mahanavami Dibba, Hampi, Karnataka (1513 AD): Built by King Krishnadevaraya, this temple features carvings of women playing Holi with pichkaris and carved tubs.
 c.Ramgarh, Vindhya Pradesh (300 BC inscription): An inscription found here mentions "Holikotsav," providing early epigraphic evidence.
 d.Ahmednagar Painting (16th century): This painting depicts the essence of Vasanta Ragini, showcasing a royal couple enjoying music amidst playful women and vibrant colors.
 e.Medieval Indian Temples: Numerous temples contain visual depictions of Holi.
 f.Mewar Painting (c. 1755): This painting shows Maharana and his courtiers celebrating Holi with colored powder.
 g.Bundi Miniature Painting: This painting depicts a king on an elephant being showered with colored powder from a balcony.
Symbol of Love and Unity :
Holi is often regarded as the festival of love, where people come together to express affection and admiration.
Couples celebrate by drenching each other in colors, symbolizing joy and happiness.
The playful atmosphere strengthens bonds of love and creates opportunities for intimate moments.
Philosophically, Holi represents the victory of spiritual goodness over material desires. 
It encourages forgiveness, reconciliation, and the letting go of grievances. 
The festival emphasizes the interconnectedness of all beings, promoting unity and harmony.
Holi serves as a reminder of acceptance, understanding, and the shared journey of love.
Conclusion : The historical and archaeological evidence presented in this document demonstrates that Holi is an ancient festival with deep cultural and symbolic significance. From textual references in ancient scriptures to artistic depictions in temples and paintings, the celebration of Holi has been an integral part of Indian heritage for centuries. Its enduring popularity and universal appeal testify to its power to unite people in joy and celebration.


Column Editor. 
Shakti : Madhvee.Seema.Bhagwanti 
Page Decoratives : Shakti Manjit.Sushmita.

*

*
celebrating colours, celebrating our lives
Holi Celebration among the  Davians.
*
Dr. Sunita Shakti* Priya.
*

*
the triumph of good over evil : photo : shakti Anshima.
*
Shakti * Anshima : Always stand for Holy fighting
against the Evil forces by this Holi
*
Shakti * Manisha Ranjana : Holi teaches us
to embrace the beauty of diversity & love..

*
All fraternity in our community greatly enjoy playing holi with their friends and beloved ones. The community vastly meant for entire community including all. We indeed celebrate Colours, celebrate our lives .
Davians in the schools throughout Holi , come out with a passionate message, that the almighty may bring the triumph of good over evil bring prosperity and happiness to everyone's life.
the Hindu festival of colors, is celebrated with great joy, especially in North India and specially in the schools before it close for the great unity festival Holi.
Shakti Anshima Singh with her staff member shares her colourful memories with us that we Davians always stand fighting against the evil forces throughout our last breathe.we enjoyed a lot pouring colours over one another. In addition to that she told that let's embrace every moment and fill our hearts with laughter.

children playing holi with their friends : photo : Shakti : Manisha Ranjan.

Another Shakti Principal / MD Manisha Ranjan , Shishu Udyan shared that children were very happy playing holi with their friends.
In fact Holi teaches us to embrace the beauty of diversity and the power of unity. Let this festival inspire us to live with love, peace, and joy.
Davians Sanjay Kumar, Manoj Kumar Dubey Govind Jee Tiwari feel altogether that let the colours of Holi inspire you to shine brightly, to forgive freely, and to embrace the love around you
it is a vibrant event that brings students together to embrace the spirit of the festival through colorful activities, traditional rituals, and a sense of community. Holi is a time to use vivid colors to convey happiness, love, and joy. Let's extinguish all negativity in Holika Dahan and greet a vibrant new era. Holi is about more than just colors; it's about love, harmony, and sharing joy.


Honorary Column Editor
Shakti. Anshima Tanushree Seema Anita.
Page Decoratives : Shakti * Anubhuti Sweta Manjita Sushmita.
*
City News Holi Headlines powered by.
S.P.Arya DAV Public School.
for better future join our Dav Movement.
&
Shishu Udyaan.Biharsharif
*
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Shakti Photo Gallery : English : Page : 5.
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Editor.
Darjleeng Desk. 
Shakti Dr. Nutan Priya Seema Anubhuti.
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a sky walk over the glass bridge : photo collage : Shakti : Er.Jyoti Siddhant.Jaipur.
an art of Mandala spiritual : traditions for focusing attention Shakti Er.Jyoti Jaipur.
let the colours of Holi inspire you to, to forgive freely : Shakti Manisha.
 From stone to sanctum,a divine abode rises. at Saryu :  photo Shakti Sangeeta .

Ayodhya.

Shirdhi Creation : Patna .A Bouteaque of your Own Choice Supporting 

 
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You Said It : Days Special : Wishes : English : Page : 6
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Days Special : English : Page : 6
Shimla Desk. 
Editor.
Dr. Sunita Seema Shakti Priya Anita Renu Neelam Anubhuti. 
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Day Special 8 th of March. 

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You Said It :  English : Page : 6
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Editor.
Shakti. Yogita Vaishakhi Vishwa.
Jaipur.
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I Just read your travel based love story, Holi. It's amazing and too touching. I start imagining myself being at Nainital. And I click many pictures of each and every place like jheel, pahadi, devdar, mandir and everything posted by you in this travel blog . You express your emotion, imagination and feeling in such a nice way as your ' aapbiti ' and you just come out in one frame of love only. Really, it is just amazing and has been passionate to me. Keep writing...
@ Shakti Smita. News Anchor. Media Coordinator MS Media.

*
Where the mind is free from fear and narrow-mindedness
O God ! Let me live in such a world .....
W here not even an ' evil ' person and idea existing...
@ Dr. Sunita Madhup Shakti* Priya

We entire Media Team : United Hum* Family 
Shakti Editors wishing you all the Creator 
Nari ' Shaktis of the Universe on the day Special : 
International Women's Day : 8th of March 2025
a very lovable, worshipable  and caring day 🌹  for all of you. 
*

Media Shakti Coordinator.

*
Editor.
Shakti Legal Cell. 
Editor.
Shakti Shushma Seema Vidisha 
powered by IPS Patrons 
*
Article* 19 (1) (a) 
Article 19 (1) (a) of the Constitution of India guarantees citizens the Right to Freedom of Speech and Expression. This includes the right to express oneself through speech, writing, pictures, and other means.

*


A good governance day
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Our Passionate words for a team of Doctors : Dr. Anu & Dr.Viswajeet.
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This transformation mirrors the spirit of Good Governance in all sectors , being observed by each of us,while a common man visiting the government public health center .
It was the high time and the day while visiting the Government Hospital in district headquarter reminds us that governance is not just about administration, but about making life better for every citizen
Shakti* Dr. Sunita Madhup.  
*
Legal : Shakti 
Section 354D Indian Penal Code (IPC : BNS)
Right to Privacy (IPC : BNS)
Under Discussion : Observation Going On. 
Shakti Legal Cell.

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It is well known to all of us that 
 Phone tracking, or the use of mobile phone data to locate individuals, plays a significant role in crime investigations, aiding in locating suspects, victims, and gathering evidence.

In India, phone tracking or stalking, including online stalking, falls under Section 354D of the Indian Penal Code (IPC), which defines stalking as following, contacting, or attempting to contact someone repeatedly despite their clear indication of disinterest.
*
 which defines stalking and carries a punishment of up to three years imprisonment for the first offense and up to five years for subsequent offenses, along with a fine.
*
होलिका की अग्नि में  ईर्ष्या , द्वेष , बुराई जलकर भस्म हो
 

Comments

  1. Om Namo Shivay... Nice Beginning

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  2. It is very nice page ,sir

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  3. संसार सम्यक् गति से चलता रहता है जिसमें नदी की तरह दो किनारे साथ साथ चलते रहते हैं, इसे समझ कर आत्मसात करना ही जीवन को समझना है। इस भाव पर आधारित ' इस होली विशेष पत्रिका के संपादन कर पाठकों तक पहुंचाने के लिए साधुवाद।
    संपादकीय शक्ति समूह का हृदय से आभार और अभिनन्दन।
    अरुण सिन्हा, दुमका, झारखण्ड।

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  4. It is a very nice Web Magazine Page...I liked it very much when I was visiting this page.. Shriram Gupta.Varanasi...

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  5. It is an amazing and wonderful post of our colourful festival Holi ! Dr.Renu, Ranchi.

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  6. I Just read your travel based love story, Holi. It's amazing and too touching. I start imagining myself being at Nainital. And I click many pictures of each and every place like jheel, pahadi, devdar, mandir and everything posted by you in this travel blog . You express your emotion, imagination and feeling in such a nice way as your ' aapbiti ' and you just come out in one frame of love only. Really, it is just amazing and has been passionate to me. Keep writing.... Smita. News Anchor.

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  7. Nice video clip 🙏

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  8. Visiting this page is always an amazing experience for everyone.
    Really it stood for the women's empowerment providing much strength for each and every women
    Dr.Bhawna.Patronm Shakti Editor

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  9. Such a beautiful representation of our culture it's just amazing✨

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  10. It is a very nice page. I liked it very much. Shakti Anjali Amit.

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