नालंदा : आज तक : समाचार.
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सम्पादिका
त्रिशक्ति
डॉ. भावना. माधवी. शाहिना.
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समाचार.
नालंदा : आज तक.
दैनिक. पत्रिका.
विषय सूची.
आवरण कथा
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दैनिक.अनुभाग : पृष्ठ :
सम्पादकीय : पृष्ठ :
पत्रिका.अनुभाग.पृष्ठ :
पत्रिका.अनुभाग.पृष्ठ :
फोटो दीर्घा : आज तक़ : पृष्ठ :
आपने कहा.पृष्ठ :
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वायरलेस प्राइवेट लिमिटेड : मार्केट रिसर्च : शक्ति ज्योति.आर्य नरेंद्र : मुंबई : समर्थित.
वायरलेस प्राइवेट लिमिटेड : मार्केट रिसर्च : शक्ति ज्योति.आर्य नरेंद्र : मुंबई : समर्थित.
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नालंदा : आज तक : दैनिक अनुभाग.
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संपादन
शक्ति. डॉ. रजनी रंजिता सीमा
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टाइम्स मीडिया समर्थित
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बिहार संस्कृति : समाचार : ००.
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नालंदा / बिहार संस्कृति : समाचार : ००.
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डी.ए.वी. पीजी कैम्पस. एवं एस.पी.आर्य.
डी.ए.वी. विद्यालय में १२ वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस संपन्न.
शक्ति.शालिनी अंशिमा रंजिता.
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संवाद सूत्र : नालंदा : आज १२ वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बिहारशरीफ शहर के हृदय स्थल में अवस्थित डी ए वी पी जी कैम्पस में प्राचार्य मनोज कुमार दुबे , तथा एस.पी.आर्य डी. ए.वी. पब्लिक स्कूल के पवित्र प्रांगण में प्रधानाचार्या श्रीमती अंशिमा सिंह सहित अन्य सभी शिक्षकों ने प्राणायाम एवं योगाभ्यास किया।
एस.पी.आर्य डी. ए.वी. पब्लिक स्कूल विद्यालय के खेल शिक्षक राजीव पाठक के कुशल मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने कई कठिन योग मुद्राओं को सहज रूप से प्रदर्शित किया।
विदित हो कि इस बार योग दिवस के अवसर पर ' स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग ' का विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इस अवसर पर एस.पी.आर्य विद्यालय की प्रधानाचार्या ने विद्यालय के सभी सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी व्यक्तियों को स्वस्थ एवं सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए प्रतिदिन योगाभ्यास करना चाहिए ताकि सभी शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। नियमित योगाभ्यास से हमारी कार्य क्षमता विकसित होती है।
आज के कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रोच्चारण ' सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया' की ध्वनि के उपरांत शांति पाठ मंत्र से हुआ। आज का यह भव्य आयोजन अविस्मरणीय रहेगा।
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समाचार संकलन : शक्ति.नीलिमा नीतीश प्रियांशी.
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योग दृश्यम : एस पी आर्य डी ए वी. बच्चें व योग प्रशिक्षक
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विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक : राजगीर मलमास मेला.का आयोजन.
अवधि : १७ मई से शुरू होकर १५ जून
शक्ति.सीमा डॉ.सुनीता रंजिता.
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नालंदा / संवाद सूत्र : सूबे बिहार के माननीय मुख्य मंत्री श्री सम्राट चौधरी के कर कमलों से उद्घटित राजगीर मलमास मेला बिहार के नालंदा जिले में लगने वाला एक विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक धार्मिक मेला है। इस विशाल मेले से जुड़ी मुख्य जानकारी आपको बता दें।
आयोजन की इसकी तारीखें : यह मेला १७ मई से शुरू होकर १५ जून तक चलेगा। नौटंकी, थिऐटर, झूला ,दूकान आदि से सजा यह मेला पुरे एक महीने तक आकर्षण का केंद्र होगा। इस बार मेले में अयोध्या के निर्मित राम मंदिर की आकृति को सजीव करने वाला अनुकृति पंडाल विशेष चर्चा में है।
मलमास ' : पुरुषोत्तम मास : प्रचलित धार्मिक मान्यता यह है कि तीन साल में एक बार आने वाले ' मलमास ' : पुरुषोत्तम मास के दौरान ऐसा माना जाता है कि ३३ करोड़ देवी - देवता राजगीर में निवास करते हैं।हिन्दू पंचांग में प्रत्येक ३ वर्षों में सूर्य वर्ष एवं चंद्र वर्ष में १ माह का अंतर हो जाता है, जिसे समायोजित करने के लिए पुरुषोत्तम मास होता है। इसे अधिकमास या मलमास भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता : ऐसी मान्यता है कि मलमास के दौरान ३३ कोटि देवी - देवता राजगीर में वास करते हैं, जिस कारण मलमास या अधिमास में राजगीर नगरी को बहुत की पवित्र माना जाता है।
वायु पुराण के अनुसार सरस्वती नदी में मलमास के दौरान एक दिन का स्नान गंगा नदी में वर्ष भर के स्नान के पूण्य के बराबर होता है।
ऐसी स्थिति में देश एवं राज्य के कोने-कोने से श्रद्धालु मलमास में राजगीर आते हैं एवं पूजा-पाठ तथा यहाँ के कुंडों एवं जलधराओं में स्नान करते हैं। मलमास मेला के दौरान साधु-संतो द्वारा शाही स्नान भी किया जाता है।
पवित्र स्न्नान : ब्रह्मकुंड स्नान : यहाँ के पवित्र ब्रह्मकुंड और वैतरणी नदी में स्नान करने तथा पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व हैl
मुख्य आकर्षण : ब्रह्मकुंड में सप्तधारा स्नान, भव्य महाआरती, और एक महीने तक चलने वाली सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल हैं जिसमें देश विदेश से आने वाले श्रद्धालू पर्यटक पहुंचते हैं ।
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संपादन : शक्ति. शालिनी रेनू डॉ.रजनी अनीता
बचपन है अनमोल. विधिक जागरूकता : बिहार समाचार
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हमसब ने ठाना है : बाल विवाह मिटाना है.
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बाल विवाह और बालश्रम से मुक्त बच्चों के लिए सर्वाइवल कार्यक्रम का आयोजन : आइडिया संस्थान. |
संवाद सूत्र : बिहार शरीफ / नालन्दा : रविवार को संयुक्त श्रम विभाग बिहार शरीफ नालन्दा में समाज में बाल अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से जस्ट राइट फ़ॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी आइडिया स्वयंसेवी संस्था द्वारा बाल विवाह से बचाई गई बच्चियों एवं बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के लिए एक विशेष सर्वाइवल एवं पुनर्वास कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना, उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में विभागों के विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग सत्र, जीवन कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा के महत्व पर जागरूकता, जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं ।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना, उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में विभागों के विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग सत्र, जीवन कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा के महत्व पर जागरूकता, जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं ।
आइडिया के प्रतिनिधियों ने बताया कि बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियाँ बच्चों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। ऐसे में बचाए गए बच्चों को केवल मुक्त कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका पुनर्वास और समुचित विकास सुनिश्चित करना भी अत्यंत आवश्यक है।
बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों से बचने और बचाने की सलाह के लिए कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय और अभिभावकों को भी इस अवसर पर जागरूक किया गया कि वे बच्चों के अधिकारों का सम्मान करें और उन्हें शिक्षा से वंचित न करें। इस कार्यक्रम में श्रम अधीक्षक नालन्दा अश्वनी कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार,नालन्दा, बिहार शरीफ़ की अधिवक्ता सीमा कुमारी, बाल कल्याण समिति नालन्दा पुष्पा पाण्डेय, आइडिया के निर्देशक रागिनी कुमारी ने अपने विचार की साझेदारी करते हुए उपस्थित सभी अभिभावकों को बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों से बचने और बचाने के लिए जागरूक किया।
ज्ञात हो इस कार्यक्रम में काफी संख्या में महिला व पुरूष एवं किशोर व किशोरियों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।
अंत में आइडिया संस्था के कार्यकर्ताओं के द्वारा बाल विवाह और बाल श्रम से जुड़ी शपथ भी दिलाई गई संकल्प दिया गया वेलोग बाल विवाह और बाल श्रम का विरोध करते रहेंगे। साथ ही वे भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों की सहयोग करते रहेंगे और समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य भी जारी रखेंगे।
इस कार्यक्रम में उपस्थित प्रखंडों के श्रम पदाधिकारी बाल कल्याण समिति सदस्यों आइडिया के जिला समन्वयक उज्ज्वल कुमार,मंटू कुमार,अश्विनी, विवेक, गंगोत्री, तथा सुशीला देवी आदि अन्य लोग उपस्थित थे।
संपादन : शक्ति शालिनी सीमा डॉ. रजनी अनुभूति
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शपथ लेते उपस्थित जन : समाचार : लघु दृश्यम.

फोर स्क्वायर होटल : रांची : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली. समर्थित :
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नालंदा : आज तक : पत्रिका : अनुभाग :
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नालंदा : आज तक : पत्रिका : अनुभाग :
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दिवंगत पिता.श्रद्धांजलि साल : २०२६.
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वो जब याद आए बहुत याद आए
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पितरों के सदगुणों को अपने भीतर समाहित करना,
अपने कर्मों में उतारना ही सही श्रद्धांजलि हैं।
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दुख भंजन प्रसाद.
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डॉ.मधुप रमण.
व्यंग्य चित्रकार.ब्लॉगर.लेखक.
बिहारशरीफ / संवाद सूत्र : डॉ. मधुप रमण. साल २०२६ आ गया। उनकी फोटो मेरी आँखों के सामने टंगी है। उनके गुजरे हुए भी ७ साल भी हो गए । ऐसा लगता है कि किसी विशेष दिन अपने पिता को नहीं हर दिन याद कर लेना चाहिए। उनके द्वारा बताए गए सन्मार्ग का आवलंबन करने के लिए। कहीं न कहीं कोई अच्छी बातें परम पिता में होती ही है जिसे हमें स्मृत रखना है।
बड़ी हैरत होती है एक बार मन से परम पिता को याद कर लेने मात्र से ही आम जीवन में आती हुई कठिनाईयां दूर होती रहीं हैं । मानों या न मानों मगर यह सच है।
श्रद्धांजलि मोहल्ला धनेश्वर घाट निवासी अधिवक्ता रवि रमन एवं व्यंग्य चित्रकार,यूट्यूबर, ब्लॉगर लेखक डॉ. मधुप रमण ने आज संयुक्त रूप से अपने निवास स्थान में दिनांक ५ मई २०२६ को अपने दिवंगत पिता, दुख भंजन प्रसाद को श्रद्धांजलि सभा में याद किया। ५ मई २०१९ का वो वर्ष था जब उन्होंने इस क्षणभंगुर संसार को अलविदा कह दिया था।
मोहल्ले के उल्लेखनीय विकास कार्यों में कभी तत्पर रहने वाले श्री दुख भंजन प्रसाद की स्मृति में अधिवक्ता रवि रमन ने अपने निवास में सांकेतिक प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि सभा रखी जिसमें अपने परिवार जनों के अलावा अपने परायें,जाने अनजाने ,जान पहचान के वाले व्यक्ति शामिल हुए। जिनके लिए समस्त परिवार आभार रखता है । श्रद्धांजलि सभा में अपने भीतर के तिमिर हटाने मात्र के लिए मोमबत्तियां जलाई गयी और उन्हें अनायास ही याद किया किया
सीधे साधे सरल ,साधु स्वभाव वाले श्री दुख भंजन प्रसाद गाँधी वादी प्रवृति के रहें। धनेश्वर घाट मोहल्लें के रहने वाले निवासी उनकी सदाशयता, सहयोगात्मक रवैये को अभी भी नहीं भूला पाए है यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि हैं।
सच कहें तो पितरों के सदगुणों को अपने भीतर समाहित करना, अपने कर्मों में उतारना ही सही श्रद्धांजलि हैं। शिव हो ,सत्य हो यही मैंने अपने पिता से सीखा है।
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संपादन : सज्जा : डॉ रजनी नीलम सीमा अनुभूति
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It is a nice piece of news
ReplyDeleteIt will create legal awareness amongst us
ReplyDeleteAdv.Seema Kumari
Awareness for each of us..
ReplyDeleteSantosh Patna : Nice. Good information.
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