Chal Kahin Door Nikal Jaye : Paryatan : Patrika.
©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
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Pratham Media.
Times Media.
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Chal Kahin Door Nikal Jaye : Paryatan.
2026. Volume : 6. Series : 1.
a Social Media.Web Blog Magazine Philosophical Page.
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आवरण पृष्ठ : पत्रिका.
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* चल कहीं दूर निकल जाए : पर्यटन : विशेषांक : शक्ति.डॉ.सुनीता प्रिया मधुप अनुभूति. * आवरण पृष्ठ :दैनिक. * |
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* चल कहीं दूर निकल जाए : पर्यटन : विशेषांक : शक्ति.डॉ.सुनीता प्रिया मधुप अनुभूति. * दैनिक अनुभाग में जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं |
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फोर स्क्वायर होटल : रांची :समर्थित :आवरण पृष्ठ. पत्रिका / दैनिक अनुभाग मार्स मिडिया ऐड:नई दिल्ली
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चल कहीं दूर निकल जाए हम : आवरण पृष्ठ : महाशक्ति मीडिया. फरवरी अंक.
*
पत्रिका / दैनिक अनुभाग..
तिथि : २५ .४.२०२६.
विक्रम संवत : २०८२.शक संवत : १९४७.
विक्रम संवत : २०८२.शक संवत : १९४७.
दिन : शनिवार.
महाशक्ति.दिवस.मूलांक :७ .
बैशाख : शुक्लपक्ष : नवमी
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विषय सूची :पृष्ठ :०.

सम्पादित. डॉ.सुनीता सीमा शक्ति प्रिया.
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राधिका कृष्ण रुक्मिणी मीरा : दर्शन : पृष्ठ :०.
आवरण पृष्ठ :०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १.
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५.
*
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
चल कहीं दूर निकल जाए हम : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
चल कहीं दूर निकल जाए हम : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
समाचार : चित्र : दिन विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : १०.
चल कहीं दूर निकल जाए हम : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ११.
: शुभकामनाएं : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०
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हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०
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संयोजन.
शिमला.डेस्क.
नैनीताल डेस्क.
इन्द्रप्रस्थ डेस्क.
पाटलिपुत्र डेस्क.
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शक्ति. शालिनी.डॉ रजनी.स्मिता.रेनू.
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संयोजिका / मीडिया हाउस ,हम मीडिया परिवार
की तरफ़ से
आपके लिए धन्यवाद ज्ञापन
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पत्रिका के निर्माण / संरक्षण के लिए
हार्दिक आभार.
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*
शक्ति.तनु रजत
निदेशिका स्वर्णिका ज्वेलर्स
सोह सराय बिहार शरीफ
समर्थित
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*
महाशक्ति.नैना देवी डेस्क.
नैनीताल.प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई.दिवस :४.
*
सम्पादित.
शक्ति.नैना डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
*
*
जीवन संगीत
*
जिंदगी का सफ़र ये है कैसा सफ़र
*
जो साथ देना चाहते है वो किसी हालात में भी रास्तें
निकाल लेते हैं और जो दूर जाना चाहते है
वो कोई न कोई वज़ह निकाल ही लेते है
*
जिंदगी में किताबें और इंसान दोनों को पढ़ना सीखिए क्योंकि
किताबों से ज्ञान और इंसानों से हमें व्यवहारिक अनुभव मिलता है…
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु : इंद्रप्रस्थ : छाया.
*
रिश्ते हमारे जीवन की वो फ़सलें हैं जिनमें ग़म केओले और खुशी की बूंदें पड़ती ही रहती है
लेकिन ज़रूरी ये है कि बावजूद इसके उसकी हिफ़ाजत की जाए।
विचार शक्ति @ रेनू रंजिता रितु सीमा
यकीन कर लो
*
एक उम्र वो थी, कि जब हमें जादू पर भी यक़ीन था
एक उम्र ये है, कि अब हमें हक़ीक़त पर भी शक होता है
*
उनको ये शिकायत है कि
हम कुछ नहीं कहते
उनको शिकायत है कि हम कुछ नहीं कहते
अपनी तो आदत है कि हम
उनके सिवाय कुछ भी नहीं कहते
*
विचार शक्ति : @ रितु सीमा मधुप अनुभूति
हम होंगे कामयाब
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : ईशा : छाया.
*
जो दरवाज़ा ईश्वर खोलते हैं
उसे कोई बंद नहीं कर सकता है ,प्रिय
*
जो हम सोचते है उससे भी कहीं
अधिक सुन्दर होती है ईश्वर की योजनाएं
*
तन भी सुन्दर मन भी सुन्दर
तुम सुंदरता की प्रतिमा हो
लोग कहते हैं सुंदर से ज्यादा
सही शख्स का होना जरूरी है..
हम कहते है तन मन धन से आप सत्यम शिवम सुंदरम हो जाए
तो क्या बुरा
*
विचार शक्ति @ प्रिया डॉ.सुनीता रंजिता अनुभूति
©️®️M.S.Media.
*
किस्मत सिर्फ उनकी बदलती है
जो बड़ी समझदारी से अपने फैसले खुद लेते हैं..
और उस पर अमल करते हैं
*
जीवन संगीत : तार : मध्यम : सुर
*
क्या ऐसा नहीं लगता
किसी सूत्र पकड़कर चलने की जीवन में तीव्र जरूरत नहीं है
क्योंकि परिस्थितियां पल में बदल जाती है..इसलिए तो श्री कृष्ण
ने कभी कभी मर्यादाएं तोड़ने की भी बातें की
*
विचार शक्ति.नैना डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
*
अक्षय
*
सदैव स्मृत रहें प्रिय ! क्षय जो नहीं होता वह व्यक्ति का
सम्यक शब्द, व्यवहार और संस्कार ही है
*
विचार शक्ति @ नैना डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
*
मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना
*
किसी से असहमत होते हुए भी उसके प्रति
आदर पूर्ण, संयमित बने रहना परिपक़्व व संतुलित
श्रेष्ठ मानव के लक्षण है
*
जिंदगी का सफऱ कोई समझा नहीं
*
जन्म मरण तो प्रकृति का शाश्वत नियम है
हम मुसाफ़िर है इस जगत के
यदि इस धरा पर स्थायी और शाश्वत रहना है तो
ईश्वरीय कार्य करना होगा
*
*
सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु : छाया.
*
ज्योति कलश छलके
*
जो आपका प्रिय है
*
जिससे कभी आपसे कोई भूल हुई है उससे जरूर माफ़ी मांगें
उसे कभी मत छोड़ें जो आपके साथ सदैव है
*
जिंदगी जी लीजिए साहब, दिन लौटने वाले नहीं है
किसे मालूम कल जलसे भी हों उसमें हम और आप दोनों नहीं हों
*
टाइम्स मीडिया समर्थित.
*
शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
*
*
महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
©️®️
M.S.Media.
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शक्ति : महालक्ष्मी : दृश्यम : पृष्ठ : १ / २.
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विषय विकार मिटाओ : पाप हरो देवा
दिल एक मंदिर है
*
*
विचार सन्दर्भ : माया :
शक्ति सोनी : इंद्रप्रस्थ : छाया
*
ईश्वर दोनों घरों पर अपनी कृपा बरसाते रहें
हम उनके घर में रहते हैं और वो हमारे ह्रदय में
*
विचार शक्ति @ सोनी प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
जिंदगी का सफ़र
*
जीवन का खूबसूरत पल
जब हम गलत माहौल ,गलत इंसान और
ग़लत सोच से बिना आहट के दूर हो जाते हैं
*
इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमज़ोर हो ना
जीवन के सफ़र के वो पल अनमोल है
परम सौभाग्य है...
जब चलते चलते जब हमें सम्यक सोच वाले
सज्जन, साध्वी और
शक्ति शिव मिल जाए
*
विचार शक्ति.
@ ईशा प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
अपने जीवन दीपक में आध्यात्मिकता की लौ इस तरह है,
जिसमें प्रतिदिन ज्ञान,साधना और व्यवहारिकता मिश्रित तेल भरने से
स्वयं का प्रकाश युक्त होना सुनिश्चित है
*
समझौता गमों से कर लो
*
*
विचार सन्दर्भ माया :
फोटो : शक्ति डॉ सुनीता मधुप : छाया
*
इंसान तो कल भी वही था आज भी वही है
परिस्थितियां स्वतः स्वभाव बदल देतीं हैं,
हँसते हुये चेहरों का अर्थ ये नही कि इनके जीवन में दुखों की गैर हाजरी है,
बल्कि इनके अन्दर परिस्थितियों को सँभालने की क्षमता बढ़ गयी है
*
शक्ति नैना प्रिया मधुप अनुभूति
*
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शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ /३
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*
*
नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना:सितम्बर. दिवस : ९.
*
संपादन
शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा
*
विचार सन्दर्भ माया :
फोटो : शक्ति रितु सिंह : छाया
*
सच कहें तो ' इन्सान ' को ' अलार्म ' नहीं
' जिम्मेदारियां ' ही ' जीवन ' में जगाती हैं
*
*
ये मेरा गीत ' जीवन ' संगीत
*
उसने कहा था
*
वाणी की अज़ब ही अपनी कहानी
मीठी तो झूठी सच्ची मगर कड़वी बढ़े परेशानी
*
विचार शक्ति @ डॉ सुनीता रंजिता आस्था
*
मेरे जीवन संगीत का मैं शब्द हूँ तो तुम अर्थ
न कोई सार तुम्हारे बिना मैं हूँ व्यर्थ
न कोई सार तुम्हारे बिना मैं हूँ व्यर्थ
*
ज्योति कलश छलके
*
जिंदगी जी लीजिए साहब, दिन लौटने वाले नहीं है
किसे मालूम कल जलसे भी हों उसमें हम और आप दोनों नहीं हों
*
*
साथ, शोध, और सच.
*
व्यक्ति, समाज, हवा, भ्रान्ति पंच और परमेश्वर
स्वयं, साथ, सुकर्म ,सोच , शोध, सच,और संकल्प
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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शक्ति संरक्षण
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की प्रेरणा
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मातृ शक्ति.
*
शब्द : कर्म : संस्कार
*
प्रधान आचार्या
निर्मला सिन्हा.
*
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
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*
प्रधान शक्ति संपादिका.
नव शक्ति.
श्यामली : डेस्क : शिमला.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९.
संस्थापना वर्ष : २०००. महीना : जनवरी. दिवस :५.
*
शक्ति.शालिनी रेनू.
नीलम 'अनुभूति '.
⭐
शक्ति.
कार्यकारी सम्पादिका.
*
शक्ति. डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
नैना देवी.नैनीताल डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७०.
संस्थापना वर्ष : १९९६. महीना : जनवरी : दिवस : ६.
*
दृश्यम :फोटो.
शक्ति सम्पादिका
*
डॉ.श्याम किशोर मॉडर्न एक्सरे : अल्ट्रा साउंड : सी टी स्कैन : बिहारशरीफ समर्थित.
*
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
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शक्ति
शालिनी
कवयित्री. लेखिका. सम्पादिका.
*
बेसबब उदासी
*
कभी - कभी यह दिल, यूँ ही भर आता है
*
भाविकाएँ : संदर्भित : फोटो
स्वयं : शक्ति : शालिनी
*
कभी - कभी यह दिल, यूँ ही भर आता है,
न कोई याद होती है, न कोई तड़प...!
हवा का एक झोंका भी, ज़ख्म कर जाता है,
न कोई शिकवा होता है, न कोई झड़प..!!
हवाओं में जैसे घुली हो, कोई खामोशी,
कि बिना बात के ही मुस्कुराहटें, रूठ जाती हैं..!
आईने में अक़्स अपना ही, अज़नबी सा लगे,
जब ख़्वाबों की कच्ची डोरियाँ, टूट जाती हैं..!!
ये जो नमकीन पानी, पलकों पर आ ठहरा है,
इसका न कोई पता है, न कोई किनारा..!
शायद रूह ने सुना है, कोई सन्नाटा गहरा,
जिसे ढूँढ नहीं पाया, ये ज़माना सारा..!!
न किसी ने दिल दुखाया, न कोई बिछड़ गया,
बस इक खालीपन है, जो दरिया सा बहता है..!
यूँ ही छलक पड़ती हैं, ये भीगी हुई आँखें,
अंदर कोई चुपचाप, बिना कहे 'कुछ कहता है'..!!
*
शालिनी
कवयित्री लेखिका सम्पादिका
संपादन : शक्ति डॉ.रजनी रेनू
सज्जा : शक्ति मंजिता मधुप
*
शक्ति
रेनू शब्दमुखर
*
क्षणिकाएं.
*
भीतर कहीं कोई अधूरापन
*
जीवन का कटु सत्य
कभी-कभी मन के घाव दिखाई नहीं देते,
पर उनकी टीस शब्दों और व्यवहार में उतर आती है…
हम सोचते हैं कि हम ठीक हैं,
पर भीतर कहीं कोई अधूरापन
अपनी छाया फैलाता रहता है.
जो दर्द हमने सहा,
*
*
अगर उसे समय देकर भरने न दिया,
तो वही दर्द अनजाने में उन रिश्तों को भी चोट पहुँचा देता है
जो हमारे लिए सच्चे होते हैं.
इसलिए जरूरी है
खुद को समय देना,
खुद को समझना,
और अपने भीतर की टूटन को धीरे-धीरे प्रेम से भरना…
क्योंकि हर रिश्ता मरहम का हकदार है,
ना कि हमारे अधूरे जख्मों का.
*
शक्ति.रेनू ‘ शब्द मुखर '
*
संपादन : सज्जा
शक्ति प्रिया मधुप सुनीता सीमा
शक्ति अनुभाग
नीलम
*
'अंजनी लाला '
*
*
हे अंजनी लाला,दीनदयाला,
महिमा अपरंपार तुम्हारी,महिमा अपरंपार।
सुन लो मेरी पुकार हनुमत,सुन लो मेरी पुकार।
राम नाम की जपते हो माला,राम नाम ही प्राणाधार है।
केसरी लाला परम कृपाला,सदा रहत संतन प्रतिपाला ।
कर दो बेड़ा पार हनुमत,सुन लो मेरी पुकार।
अवतरण दिवस पर आज तुम्हारे,आन पड़े हम तेरे द्वारे।
कर दो मेरा उद्धार हनुमत,सुन लो मेरी पुकार।
नमन,वंदन,अभिनंदन तुमको,निशि- वासर तेरा ध्यान है।
सृष्टि के तुम आधार हनुमत,कर दो बेड़ा पार।
कर दो बेड़ा पार हनुमत,सुन लो मेरी पुकार।
बीच भंवर में मेरी नैया,तुम बिन कौन बने खेवैया।
नैया लगा दो पार हनुमत सुन लो मेरी पुकार।
विनती है बारंबार हनुमत,विनती है बारंबार।
*
सह : शक्ति. शालिनी रेनू अनुभूति
*
शक्ति अनुभाग
जब कभी मन में
घनीभूत पीड़ा ने घर किया,
मैंने कर दिया स्वयं को
प्रकृति के हवाले,
हवाओं में उड़ा डाली
सारी अपेक्षाएं ,
नदियों में धो डाले
अपने आंसू,
सौंप दी सूरज को
अपनी सारी तपिश
और कर दिया स्वयं को
उस अदृश्य सत्ता के हवाले,
जो स्वामी है
संपूर्ण चर-अचर अस्तित्व का !
*
*
भाविकाएँ संदर्भित फोटो
शक्ति रितु
*
तारों ने की रौशन राहें
*
फिर संतप्त मन मैंने
बनकर मौन साधक
फूलों से मांग लिए रंग उधार,
चांद से ली शीतलता
और बहारों से
लिये ढेर सारे प्यार,
लोहे से सीखी मैंने
असीम दृढ़ता और
सीखा झरनों से
निरंतर पथ-विस्तार.....
और फिर
तारों ने की रौशन राहें,
जुगनुओं ने दी
आशाओं की किरणें,
और मैं बनती गई पर्वत सी
अडिग और मजबूत...
लौटाने उसका वो सब
क्योंकि गुरु के रूप में
मिले मुझे आराध्य
सिखाई जिसने
मुझे शब्द साधना,
फिर जागा मेरा
आत्मज्ञान,
निश्चित किया मैंने
अपना मार्ग,
लिया मैंने दृढ़ संकल्प,
बेपरवाह होकर जमाने से
लगाई नाकामयाबियों से
अपनी होड़....
और आखिर
साध लिया मैंने
अपना लक्ष्य,
एकाकार कर लिया
प्रकृति के रूप- रंग को,
विलीन होने लगी
उस अदृश्य सत्ता में,
लौटाने उसका वो सब
जो उसने मुझे सौंपा है...!
*
संपादन सज्जा : शक्ति रेनू सीमा रंजिता
*
-----------
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
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संपादन
*
लघु कथा : वक़्त
शक्ति डॉ.सुनीता मधुप रितु अनुभूति
*
सब दिन नहीं होते एक समाना। सब कुछ ठीक चल रहा था। परिस्थितियाँ बदली। दिन बदले। समय की वक्र दृष्टि हो गयी । लोग बदले।
हालांकि वह यथावत ही था,अपरिवर्तनशील ।
तरह तरह की बातें होने लगी। लांछन लगने लगे। वह मौन हुआ । अलग थलग भी। वह हतप्रभ,भययुक्त और निःशब्द भी रहने लगा ...आत्म संघर्ष के दिन थे।
चेहरा ,चाल चलन, चरित्र , कार्य प्रणाली प्रश्न चिन्हित हो गए। सब चाहे अनचाहे पंच परमेश्वर बन गए।
कुछ अपने साथ रहें तो कुछ अलग हो गए। वह अचंभित था। वह तो जैसा था वैसा ही रहा था न ?
उसने कहा था, लोगों ने कुछ समझा सुना और कहा। भेड़ चाल में अर्थ का अनर्थ हुआ। अफवाहों की बड़ी तेज़ आंधियां चली। चिराग बुझने ही वाले थे। ग्रहण लगने वाला ही था ...बड़ी क़यामत की घड़ी थी।
आत्म संघर्ष के दिनों में अंतर्मन में बैठे ईश्वर ने उससे कहा , 'धैर्य रखना ,....सहिष्णु बनना.., जो सत्य है वही परिलक्षित व परीक्षित भी होगा।
....सिर्फ़ विचलित नहीं होना ....विवेकशील और मानवीय बने रहना ...और सत्कर्म करते रहना .....बिना किसी प्रतिकार के ....मैं हूँ ना... '
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो ना । समय बदला। सब दिन एक समान नहीं होते है। शनैः शनैः सब सही होने लगा था । व्यवस्थाएं बदली। लोग भी बदलने लगे । वही सब कुछ अब बेहतर और सार्थक लगने लगा।
बड़े दिनों बाद मित्र ने पूछा, ' .....बताये कैसे हैं ?..... अब ठीक है ना ? .....ऐसी विषम परिस्थिति में ....किसने साथ दिया किसने नहीं ....कौन ..आपके साथ रहा....कौन विरुद्ध ... ? '
पुनः किसी ने पूछा , ' इस दुनियां में आपका कौन है ....? '
मैंने हंसकर कहा, ' वक़्त ....अगर वो सही है तो सब अपने हैं ....वर्ना कोई नहीं.....'
©️®️M.S.Media.
*
लेखन.
दिनांक : २०.४.२६.
बैशाख : शुक्लपक्ष.तृतीया.
*
संपादन : शक्ति.शालिनी अनीता प्रीति.
सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा रंजीता.
स्मृति विशेष :
जयंती शक्ति आलेख :
राहुल सांकृत्यायन
बहुआयामी साहित्यकार, शोधकर्ता और विद्वान
९ अप्रैल १८९३ - १४ अप्रैल १९६३
शक्ति आलेख : शालिनी
सह शक्ति रेनू मधुप अनुभूति
*
घुमक्कड़ी लेखकीय जीवन : वे एक यायावर घुमक्कड़ थे और उन्होंने लंका, तिब्बत, चीन, रूस और यूरोप की यात्राएं कीं। वर्ष १९३० में लंका में बौद्ध धर्म अपनाकर वे ' राहुल सांकृत्यायन ' बने। उन्हें हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। मैंने भी उनके कई यात्रा वृतांत पढ़े है। काफ़ी दिलचस्प है। वे साम्यवादी चिंतक और तत्त्वान्वेषी खोजकर्ता थे, जिन्होंने यात्राओं के दौरान दुर्लभ पांडुलिपियों को एकत्रित किया।
मेरी तिब्बत यात्रा १९३७ : यह राहुल जी की सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक है, जिसमें उन्होंने तिब्बत की अपनी यात्राओं के अनुभवों को साझा किया है।
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| पहाड़ : प्रेम : प्रकृति : यायावरी : फोटो : शक्ति मंजु |
तिब्बत में सवा वर्ष : इस वृत्तांत में उन्होंने तिब्बत में अपने लंबे प्रवास के दौरान वहां के जीवन, संस्कृति और बौद्ध पांडुलिपियों की खोज का वर्णन किया है।
किन्नर देश में १९४८ : इसमें हिमालय की दुर्गम घाटियों, विशेष रूप से किन्नौर क्षेत्र और तिब्बती संस्कृति का सजीव चित्रण है।
लद्दाख यात्रा १९३९ : लद्दाख के दुर्गम रास्तों और वहां के बौद्ध मठों का विवरण।
अद्वितीय अनुभव के लेखक थे राहुल। वे दुर्गम रास्तों को पार करते थे और आम तौर पर उन जगहों पर जाते थे जहां आम पर्यटक नहीं जाते थे।
पहाड़ प्रेम : प्रकृति : यात्रा : और विराम : उनका निधन १४ अप्रैल १९६३ को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हुआ था । सच कहें पहाड़ में घुमन्तु जीवन व्यतीत करने वाले इस यायावर ने अपने सफ़र का पूर्ण विराम पहाड़ में ही लिया उनकी जयंती पर मैं सादर नमन करता हूँ ।
बहुआयामी साहित्यकार, शोधकर्ता और विद्वान राहुल सांकृत्यायनइनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में हुआ था। बचपन का नाम केदारनाथ पाण्डे था।
इन्हें आधुनिक हिन्दी यात्रा-साहित्य का 'जनक' माना जाता है, जिन्होंने 'अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा' का मंत्र दिया।
ये बहुभाषाविद् थे और उन्हें पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, तिब्बती, चीनी, रूसी और फ़ारसी सहित लगभग ३६ भाषाओं का गहरा ज्ञान था।
बौद्ध धर्म पर उनके गहन शोध के कारण उन्हें काशी के विद्वानों ने 'महापण्डित' की उपाधि से विभूषित किया।इतिहास ग्रंथ 'मध्य एशिया का इतिहास' के लिए उन्हें वर्ष १९५८ में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष १९६३ में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
वे एक क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी भी थे, जिन्होंने किसान आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और जेल भी गए।
प्रसिद्ध कृतियाँ : वोल्गा से गंगा (कहानी संग्रह), दर्शन-दिग्दर्शन, मध्य एशिया का इतिहास, घुमक्कड़ शास्त्र, मेरी लद्दाख यात्रा, तिब्बत में सवा वर्ष, सिंह सेनापति, जय यौधेय, और उनकी आत्मकथा 'मेरी जीवन यात्रा........
*
स्तंभ संपादन : सज्जा : शक्ति. डॉ.रजनी माधवी मंजिता रंजीता.
*
स्मृति विशेष : शक्ति आलेख
शालिनी
*
राष्ट्रकवि : पुण्यतिथि : श्रद्धांजलि : २४.४.२६.
रामधारी सिंह दिनकर. राष्ट्रकवि.
*
*
जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।
हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप विस्तार किया।
डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान कुपित होकर बोले-
'जंजीर बढ़ाकर साध मुझे, हां, हां दुर्योधन! बांध मुझे
अहंकार में डूबे व्यक्ति की बुद्धि नष्ट हो जाती है। कल स्मृति विशेष : शक्ति आलेख में शक्ति सम्पादिका शालिनी ने दिनकर को याद किया। महाभारत प्रसंग में कुरु राजसभा में जब अहंकारी दुर्योधन ने न केवल कृष्ण के शांति प्रस्ताव को ठुकराया वल्कि
कृष्ण को बंदी बनाने का असफल प्रयास भी किया। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित महाकाव्य ' रश्मिरथी ' के तृतीय सर्ग से यह पंक्तियाँ ली गई हैं। रचित महाकाव्य 'रश्मिरथी' के तृतीय सर्ग ' कृष्ण की चेतावनी ' से हैं। यह कविता तब की है जब कृष्ण दुर्योधन को समझाने जाते हैं, लेकिन दुर्योधन उन्हें बंदी बनाने का प्रयास करता है। दूत बनकर आए कृष्ण पांडवों की ओर से शांतिदूत बनकर कौरवों की सभा में गए थे। दुर्योधन का अहंकार देखिए कि दुर्योधन ने संधि के बजाय कृष्ण को बंदी बनाने का दुस्साहस किया।
इस पर भगवान कृष्ण ने अपना विराट और रौद्र रूप दिखाया, अनुसार "कृष्ण की चेतावनी" के रूप में जाना जाता है। तब माधव ने समस्त कुरु राज सभा में अपना विराट रूप दिखलाया यह पंक्तियाँ हिंदी साहित्य की सबसे प्रसिद्ध और ओजस्वी पंक्तियों में से एक हैं, जो यह दर्शाती हैं कि अहंकार में डूबे व्यक्ति की बुद्धि नष्ट हो जाती है।
रे, रोक युधिष्ठिर को न यहाँ, जाने दे उनको स्वर्ग धीर,
पर, फिरा हमें गाण्डीव-गदा, लौटा दे अर्जुन-भीम वीर।
वैराग्य का विरोध : कवि काव्यांश के माध्यम से यह कह रहा है कि युधिष्ठिर को अब वैराग्य लेने या स्वर्ग जाने से रोकना नहीं चाहिए। वे धर्म और धैर्य के प्रतिमूर्ति हैं, इसलिए उन्हें उनकी आत्मिक शांति स्वर्ग की ओर जाने देना चाहिए।
अर्जुन -भीम की वापसी : इसके साथ ही, कवि अर्जुन और भीम जैसे वीर योद्धाओं को फिर से युद्ध के लिए प्रेरित करने की बात करता है। वे चाहते हैं कि युद्ध में गिरे गांडीव अर्जुन का धनुष और गदा भीम का अस्त्र को वे फिर से उठा लें और युद्ध की विभीषिका को समाप्त कर शांति की स्थापना करें।
ऐतिहासिक-तात्कालिक संदर्भ : जब दिनकर जी ने यह लिखा, तब वे युधिष्ठिर के ' पलायनवाद ' समस्या से भागना के बजाय अर्जुन के ' कर्मठता ' और वीरता के मार्ग को चुनना चाहते थे।
मुख्य संदेश: यह पंक्तियाँ कायरता या वैराग्य के बजाय, संकट के समय में कर्म और वीरता के मार्ग को अपनाने का आह्वान करती हैं।
जब तक मनुज-मनुज का यह,सुख-भाग नहीं सम होगा,
शमित न होगा कोलाहल, संघर्ष नहीं कम होगा।
अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस : हिंदी साहित्य के आकाश में अपनी लेखनी से अंगारे भरने वाले, 'राष्ट्रकवि' रामधारी सिंह 'दिनकर' जी की पुण्यतिथि पर ' शालिनी साहित्य सृजन संस्था ' उन्हें सादर नमन और विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है..कुछेक और कालजयी पंक्तियों को स्मृत करती है।
दिनकर जी केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय चेतना के स्वर थे। उनकी कविताओं में जहाँ एक ओर ' रश्मिरथी ' जैसा ओज और पुरुषार्थ है, वहीं दूसरी ओर ' उर्वशी ' जैसी कोमलता और अध्यात्म भी..! उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सदैव समाज को जगाने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस दिया..!
क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो,
उसका क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।
शौर्य और क्षमा शीलता : आज के दौर में भी दिनकर जी के शब्द हमें यह सीख देते हैं कि शांति और शक्ति का संतुलन ही मानवता का सच्चा पथ है। उनकी स्मृतियाँ हमारी लेखनी और विचारों में सदैव जीवित रहेंगी। हम सभी की तरफ़ से भावभीनी श्रद्धांजलि..
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स्तंभ संपादन : सज्जा :
शक्ति. सीमा रंजीता अनुभूति
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अक्षय तृतीया की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाओं के साथ
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शक्ति.नेहा.आर्य.अतुल.मुन्ना लाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स.बिहारशरीफ.बरबीघा.समर्थित
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पर्यटन विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५
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नैनीताल डेस्क.
संपादन.
शक्ति. शालिनी मानसी कंचन प्रीति.
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| दी लिटिल नेस्ट : सांगला : चितकुल : किन्नौर : हिमाचल : पर्यटन समर्थित * किन्नौर : सांगला हिमाचल : यात्रा संस्मरण |
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चल कहीं दूर निकल जाए हम : किन्नौर : सांगला हिमाचल : यात्रा संस्मरण : ५ /० .
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यात्रा संस्मरण : शक्ति डॉ.भावना स्मिता वनिता
सह शक्ति डॉ.सुनीता मधुप प्रिया.
अनुभाग : १
धारावाहिक : चल कहीं दूर निकल जाए
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किन्नौर : रिकांग पिओ :२६७० मीटर : किन्नौर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय रिकांग पिओ २६७० में स्थित है। यह हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती और सबसे सुंदर जिलों में से एक है, जो समुद्र तल से २६७० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह स्थान मुख्य रूप से अपने सेव के बागीचों और किन्नौरी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है।
मुख्यालय: रिकांग पिओ। दूरी: शिमला से लगभग २३५ - २४० किलोमीटर दूर। निकटतम स्थान: कालपा, जो अपनी प्राचीन सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान NH-२२ पर स्थित है और यहां से किन्नर कैलाश पर्वत श्रृंखला के दृश्य दिखाई देते हैं। कल्पा : ऊँचाई : २७५९ मीटर : पूर्व जिला मुख्यालय : एक छोटा सा गाँव : सतलुज नदी : किन्नौर का पूर्व जिला मुख्यालय था। भावना कहती है यदि आपने एक दिन नहीं बिताया तो किन्नौर यात्रा व्यर्थ है। बर्फ से घिरे किन्नर कैलाश हिमाचल प्रदेश के स्पष्ट दर्शन होते हैं।
किन्नर कैलाश : ६०५० मीटर : किन्नर कैलाश हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित एक पवित्र पर्वत है, जो लगभग ६०५० मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और यहां की मुख्य विशेषता ७९ फीट ऊँचा प्राकृतिक शिवलिंग है जो दिन में कई बार रंग बदलता है। यह स्थान हिंदुओं और बौद्धों के लिए तीर्थस्थल के साथ-साथ एक चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग डेस्टिनेशन भी है।
किन्नर कैलाश पर्वत के मुख्य आकर्षण और विवरण प्राप्त रहस्यमयी शिवलिंग है : पर्वत चोटी पर स्थित शिवलिंग रंग बदलने सफेद से पीला और लाल के लिए प्रसिद्ध है।
पौराणिक महत्व : इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है और इसे पुराणों में 'इंद्रकील' पर्वत भी कहा गया है। यह पंच कैलाशों में से एक है।
तांगलिंग - किन्नर कैलाश ट्रेक : यह यात्रा तांगलिंग गाँव से शुरू होती है। ट्रेक चुनौतीपूर्ण है और आमतौर पर इसमें २ -३ दिन लगते हैं परिक्रमा में अधिक समय लग सकता है । सर्वोत्तम समय जुलाई से सितंबर के बीच यात्रा करना सबसे अच्छा माना जाता है।
पहुँच : तांगलिंग तक पहुँचने के लिए रिकांगपिओ या कल्पा से जाना होता है, जो शिमला से करीब २५० किमी दूर है।
महत्वपूर्ण जानकारी : यह एक कठिन यात्रा है, इसलिए शारीरिक रूप से फिट होना आवश्यक है।
स्थानीय संस्कृति में इसे बहुत पवित्र माना जाता है, और यहाँ पार्वती कुंड भी स्थित है
सांगला घाटी : ऊंचाई २६२१ मीटर : बसपा घाटी : किन्नौर के स्थानीय इसे तुक्पा घाटी भी बोलते है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में बसपा नदीके किनारे स्थित सांगला घाटी, ८९०० फीट की ऊंचाई पर स्थित एक मनमोहक हिमालयी स्थल है, जो अपने सेब के बागों, रमणीय गांवोंऔर बर्फ से ढकी चोटियों के लिए प्रसिद्ध है। इसे अक्सर बसपा घाटी या तुक्पा घाटी भी कहा जाता है और यह अपने शांत परिदृश्य, समृद्ध संस्कृति और ट्राउट मछली पकड़नेके लिए जानी जाती है । प्रमुख आकर्षणों में चितकुल भारत का अंतिम गांव ,कामरू किला और रकचम गांव शामिल हैं।
भारत का स्विट्जरलैंड : ३००० मीटर : रक्छम गाँव : शिमला से लगभग २२७ किमी, सांगला से लगभग १४ किमी चितकुल से १० किलोमीटर पीछे ३००० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में सांगला और चितकुल के मध्य स्थित एक बेहद खूबसूरत और शांत गाँव है। यह गाँव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और १२ महीने बर्फ से ढकी पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। यह सांगला घाटी बस्पा घाटी में बस्पा नदी के किनारे स्थित है। यह सांगला और छितकुल के बीच में पड़ता है। यह गाँव चारों तरफ ऊंचे पहाड़ों, हरे-भरे खेतों और नदी के किनारों से घिरा हुआ है।
इसे अक्सर ' भारत का स्विट्जरलैंड ' जैसी जगह माना जाता है, जहाँ का नज़ारा बचपन में बनाई गई किसी पेंटिंग जैसा लगता है।स्वच्छता वश इस गाँव को स्वच्छता के लिए राष्ट्रपति से सम्मानित किया जा चुका है।
बसपा नदी : गाँव के किनारे बहती हुई क्रिस्टल साफ़ बसपा नदी का नज़ारा बेहद शांत और लुभावना है।
हिमालयी दृश्य : रल्डंग पीक यहाँ से विशाल रल्डंग चोटियों और बर्फ से ढके पहाड़ों का अद्भुत नज़ारा दिखता है।
पारंपरिक हिमाचली वास्तुकला : गाँव में पारंपरिक लकड़ी और पत्थर के बने घर और यहाँ की समृद्ध संस्कृति को देखा जा सकता है।
सेब और खुबानी के बागीचे : गाँव के आसपास सेब और चेरी के बागीचे हैं, जो बहुत खूबसूरत लगते हैं।
शिव और काली मंदिर : गाँव में भगवान शिव और देवी काली को समर्पित दो स्थानीय मंदिर हैं, जो यहाँ की आस्था के केंद्र हैं।
ट्रैकिंग और प्रकृति की सैर: यहाँ के घने देवदार के जंगलों और छोटे-छोटे झरनों के बीच ट्रैकिंग (Hiking) की जा सकती है।
बकव्हीट के खेत: अगस्त-सितंबर के दौरान, यहाँ बकव्हीट के खेत गुलाबी फूलों से भर जाते हैं, जिससे पूरी घाटी रंगीन हो जाती है।
हिमाचल : यात्रा संस्मरण : ५ /० .
चितकुल : खाब संगम ब्रिज : नाको :
चितकुल : ऊँचाई : ३४५० मीटर : आखिरी गांव : यह पूर्व हिमाचल में भारत तिब्बत सीमा के पास बसा हुआ आखिरी गांव है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
अप्रैल के महीने में अभी दिन में तापमान २ डिग्री से ४ डिग्री और रात के तापमान में शून्य से नीचे की गिरावट हो सकती है यह बात ध्यान देने योग्य है।
छितकुल में देखने लायक मुख्य स्थान : सेब के बागान यहाँ के प्रसिद्ध किन्नौरी सेब के बागान देखने लायक होते हैं।
बसपा नदी : गांव के पास बहती हुई ठंडी और साफ पानी की नदी, जहाँ आप सुकून के पल बिता सकते हैं।
मठी देवी मंदिर : यह ५०० साल से अधिक पुराना मंदिर है, जो देवी मठी को समर्पित है। यह काष्ठ कला लकड़ी की नक्काशी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
हिंदुस्तान का आखिरी ढाबा : भारत के इस अंतिम गांव में इस मशहूर ढाबे पर राजमा-चावल का आनंद लेना एक खास अनुभव है।
नागस्ती आईटीबीपी चेक पोस्ट: छितकुल गांव से लगभग ४ किमी दूर, यह भारत की अंतिम चेक पोस्ट है, जहाँ पैदल या टैक्सी से जाया जा सकता है।
खाव संगम : ऊँचाई : २४३८ संगम हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत जगह है, जहाँ स्पीति और सतलुज नदियाँ आपस में मिलती हैं। यह स्थान समुद्र तल से लगभग २४३८ मीटर की ऊंचाई पर है और भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित। नदियों का मिलन: यहाँ गहरे रंग की स्पीति नदी और मटमैले रंग की सतलुज नदी का अद्भुत संगम होता है।
खाब संगम ब्रिज : ऊँचाई : २४३८ : यहां एक पुल बना है जहां से पर्यटक और फोटोग्राफर दोनों नदियों के संगम और शानदार वादियों का नजारा लेते हैं। यहाँ नदियों का रंग बदलते हुए देखा जा सकता है, जो पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है।
खाब संगम के बारे में मुख्य बातें जो आप याद रखें : स्थानवश किन्नौर जिले का पुह उप-मंडल, जो हिंदुस्तान तिब्बत राजमार्ग संख्या ५ पर स्थित है।
आस-पास के आकर्षण : यह जगह ऊंचे, बंजर पहाड़ों और गहरी खाइयों से घिरी हुई है, जो बहुत ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करती है।
दूरी : यह शिमला से लगभग ३३० किमी, रिकांग पियो से ७५ किमी और काजा से १३५ किमी की दूरी पर स्थित है । यह जगह स्पीति घाटी की यात्रा के दौरान रुकने के लिए एक प्रमुख और सुंदर स्थान है ।
नाको : ३६६२ मीटर चितकुल से २११ किलोमीटर दूर भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के किन्नौर जिले के पूह उपमंडल में स्थित एक शांत और प्रसिद्ध गाँव है। यह समुद्र तल से लगभग ३६६२ मीटर की ऊँचाई पर हैंगरांग घाटी में स्थित है,जो अपनी सुंदर झील नाको झील और प्राचीन बौद्ध मठों के लिए जाना जाता है।
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खाब संगम ब्रिज : दृश्यम : साभार
स्पीति : सतलुज का संगम
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लघु दृश्यम : बसपा नदी : विजय : चितकुल
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नदियाँ का पानी दरिया से मिलके
नदियाँ का पानी दरिया से मिलके
सागर की ओर चले : नीले गगन के तले
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जरुरी बातें : ध्यान देने योग्य
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यात्रा का समय : मई से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
जरुरी बातें : २०००० रुपया तक कैश रखें। यू पी आई पेमेंट भी होता है। मगर कही कही नेटवर्क की दिक्कत हो सकती है।
यात्रा आराम से करें। अपने आप को बढ़ती हुई ऊंचाई के हिसाब से अनुकूल करें। हो सके तो ऑक्सी लेवल नापने के लिए ऑक्सी मीटर रखें। ऊंचाई पर होने वाली बीमारी को पूरी तरह से ठीक करने का केवल एक ही तरीका है कम ऊंचाई पर उतरना।
काम करने वाले नेटवर्क : जिओ और एयरटेल का नेटवर्क बेहतर काम करता है।
माउंटेन सिकनेस से उत्पन्न बीमारी जैसे कि सिरदर्द, पेट खराब होना, चक्कर आना, उनींदापन, थकान और सांस लेने में तकलीफ होती हैं ।
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माउंटेन सिकनेस : ऊंचाई की आम बीमारी
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डॉ.अनु मधुप प्रशांत राखी
सावधानी : दवाइयाँ
डायमोक्स २५० मिली ग्राम : हमारे स्वास्थ्य सलाहकार, सहयात्री, मित्र डॉ. प्रशांत कहते है माउंटेन सिकनेस से बचने व पूर्व अनुकुलन करने के लिए जरुरी दवाईयों में अपने साथ २५० मिली ग्राम डायमोक्स टैबलेट जरूर रखें।
यह आपको ऊंचाई / पर्वतीय बीमारी के लक्षणों की गंभीरता और अवधि को कम करने में मदद करेगी।
ऊंचाई पर जाने से एक दो दिन पूर्व इसे लें । जितने दिन आप ऊंचाई में रहते हैं दिन में दो बार ले सकते है।
नीचे उतरने के साथ ही बंद कर दें।
कोका ३० : होम्योपैथिक दवा : डॉ.इंद्रदेव : हमारे स्वास्थ्य सलाहकार मित्र डॉ.इंद्रदेव बतलाते हैं यह होम्योपैथिक दवा मुख्य रूप से शारीरिक और मानसिक थकान, नसों की कमजोरी और ऊंचाई पर होने वाली बीमारी के इलाज में उपयोगी है।
यह ट्रेकिंग या अधिक ऊंचाई पर सांस फूलने, सिरदर्द, और चक्कर आने जैसी समस्याओं में राहत देती है, साथ ही हृदय स्वास्थ्य में सुधार के लिए भी प्रयोग की जाती है।
अत्यधिक शारीरिक / मानसिक थकान कमजोरी, थकावट और कमजोरी महसूस होने पर। नसों की कमजोरी नसों में कमजोरी और तनाव के कारण होने वाली समस्याओं में। पाचन में सुधार खराब पाचन तंत्र को ठीक करने में मदद करती है। हृदय स्वास्थ्य: हृदय की कमजोरी या धड़कन में अनियमितता में सहायता प्रदान करती है।
५ से ६ बूंद दिन में तीन बार दो तीन दिनों तक लें। सलाह यह है कि ऊंचाई पर बढ़ने से ठीक एक दिन पहले इस दवा का
तापमान : अप्रैल के महीने में अभी दिन में तापमान २ डिग्री से ४ डिग्री और रात के तापमान में शून्य से नीचे की गिरावट हो सकती है यह बात ध्यान देने योग्य है।
गर्मियों में यह दिन में ५ डिग्री से १० डिग्री रात में कुछ नीचे गिर सकता है।
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अनुभाग : ४
धारावाहिक : चल कहीं दूर निकल जाए
लाहौल और स्पीति :
लाहौल और स्पीति : हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले का मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय केलांग है। यह एक छोटा सा कस्बा है जो मुख्य रूप से लाहौल घाटी में स्थित है और प्रशासन का केंद्र है, जिला मुख्यालय केलांग।
केलांग : ३१६५ ( १०३८३ फ़ीट ) ध्यान देने योग्य बातें है कि स्थान बस : केलांग समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है ।
प्रशासनिक व्यवस्था : जिले में दो मुख्य विकास खंड हैं लाहौल का मुख्यालय केलांग है तो
काजा : ऊँचाई : ३६५० मीटर : दूसरे खंड स्पीति का मुख्यालय काजा है।
लांगचा : ऊँचाई :
हिक्किम : ऊँचाई
कौमिक : ऊँचाई ४५८७ मीटर : कौमिक गांव की ऊँचाई ४५८७ मीटर
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अनुभाग : ४.
हिमाचल : यात्रा संस्मरण : ५ /० .
धारावाहिक : चल कहीं दूर निकल जाए
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यात्रा संस्मरण : शक्ति डॉ.भावना स्मिता वनिता
यात्रा पड़ाव : १
शिमला : नारकंडा : हातू शिखर और बादलों के करीब.
पिछले दिनों मैं दस दिनों की यात्रा पर थी। हम लोग कुल जमा तीन लोग थे। कॉलेज से दस दिनों की छुट्टियाँ स्वयं की यायावरी के लिए निकालनी थी। निकल पड़ी हम दो मस्तानी। आनन फानन में पटना से
चंडीगढ़ के लिए महंगी हवाई टिकट खरीद ली थी मैनें। सामान रखा और गली गली ढूंढें हिमाचल की खोज के लिए निकल पड़ी हम दो बहनें। प्रकृति, प्रेम,पहाड़,उत्तम पुरुष, पुनःनव निर्माण, के दर्शन के साथ हमारी यात्रा आरंभ हुई।
चंडीगढ़ पहुँचते ही हमने दस दिनों के जीप किराये पर ले ली और चल पड़ी हौसलों से हिमालय के उन दुर्गम घाटियों में दस दिनों के प्रवास के लिए ही सही उड़ान भरने के लिए।
फीचर डेस्क पर हमारे अनुभवों को शब्दशः करने के लिए तत्पर थी शक्ति सम्पादिका डॉ.सुनीता मधुप शक्ति प्रिया अनुभूति। शक्ति अनुभूति हमारी कला सम्पादिका हैं जिनका गृह राज्य हिमाचल ही हैं,इसलिए आशा रखती हूँ उन्हें मेरी यात्रा में विशेष दिलचस्पी होगी।
नारकंडा : हम चंडीगढ़ से शिमला, शिमला से नारकण्डा पहुँच चुके थे। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शहर में हम रुके नहीं। शिमला में पर्यटकों की भीड़ सालों भर लगी ही होती है।
नारकंडा भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के शिमला ज़िले में १२००० फुट पर स्थित एक सुन्दर नगर है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और स्कीइंग के लिए जाना जाता है। यह शिमला से लगभग ६५ किलोमीटर दूर देवदार के जंगलों चीड़ के वन से घिरा हुआ एक अत्यंत दिलकश पर्वतीय नगर है।
नारकंडा से मिलता जुलता नालदेहरा में, जो शिमला के पास है, एक प्रसिद्ध गोल्फ कोर्स है।
हातू शिखर : नारकंडा की सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक है हातू शिखर। इस जगह पर हातू माता का मंदिर है। यह सबसे ऊंचाई पर स्थित है जो कि समुद्र तल से करीब १२००० फुट ऊपर है। इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी हाटू माता की भक्त थीं और उन्होंने ही इस मंदिर को बनवाया था। यहां पर आप हिमालय की सभी दिशाओं का दर्शन कर सकते हैं। यह नारकंडा से ६ कि.मी. दूर है। इसके साथ ही इस जगह पर आप स्कीइंग का भी आनंद ले सकते हैं।
भीम का चूल्हा : हाटू शिखर के पास में ही भीम का चूल्हा भी है जो कि हाटू मंदिर से ५०० मीटर आगे है। इनके बारे में कहा जाता है कि पांडवों को जब अज्ञातवास मिला था तो वह चलते-चलते इसी जगह पर रूके थे और खाना भी यहीं बनाया था।
नारकंडा बाज़ार : नारकंडा का बाज़ार उतना ही है जितनी की एक सड़क। छोटा सा पहाड़ी कस्वां है। इस बाज़ार में छोटी-छोटी दुकानें हैं जिनमें छोले-पूरी से लेकर कीटनाशक दवाइयां आदि जरुरी सामान मिलती हैं। नारकंडा से ही हमने निकास व प्रवेश का द्वार चुना था
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अनुभाग : ५ .
हिमाचल : यात्रा संस्मरण : ५ /० .
धारावाहिक : चल कहीं दूर निकल जाए
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यात्रा संस्मरण : शक्ति डॉ.भावना स्मिता वनिता
यात्रा पड़ाव : २
यात्रा संस्मरण : हिमाचल
सांगला : ये पर्वतों के दायरे : बस्पा : चितकुल : नदियाँ किनारे मोरा गांव.
किन्नौर : हम शिमला से पूर्व की ओर बढ़ना था। किन्नौर शिमला का निकटवर्ती जिला है। किन्नर कैलाश की परिक्रमा ' कैलाश की चर्चा खूब सुनती हूँ और यात्रा में होने वाली परेशानियों की जिक्र हो ही जाती है। किन्नौर हिमाचल का एक दुर्गम पर्यटक स्थल जहाँ पहुंचना मुश्किल ही है।
किन्नौर से पूर्व में चीन तिब्बत की सीमाएं सटी है तो पश्चिम में कुल्लू मनाली है । उत्तर पश्चिम में लौहल स्फीति जिला, किन्नौर से सटी है तो दक्षिण में हिमाचल की राजधानी शिमला जिला की सीमाएं है।
यहाँ उगाए जाने वाले सेब, चिलगोजा और अन्य सूखे मेवे के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं ।
यहाँ की ऊँची-ऊँची ज़मीन हर तरह के बेहतरीन एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए आकर्षक जगह बनाती है। खूबसूरत ट्रैकिंग रूट में ' पर्यटकों की मनपसंदीदा ट्रेक किन्नर कैलाश की परिक्रमा ' भी शामिल है, जो लोगों को सदियों से सदैव अपनी ओर खीचता रहता है।
चितकुल : आखिरी गांव :
यहाँ खूबसूरत नाको झील और तीन प्रसिद्ध वन्य जीव अभ्यारण्य भी हैं जो दर्शनीय है ।.
चितकुल : आखिरी गांव : ३४०० - ३४५० मीटर की ऊंचाई पर हिंदुस्तान- तिब्बत व्यापार मार्ग में बसपा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित चितकुल, बसपा घाटी का आखिरी भारतीय गांव है। और पुराने हिंदुस्तान-तिब्बत व्यापार मार्ग का आखिरी गांव भी समझा जा सकता है। यह भारत का आखिरी बिंदु भी है जहां बिना परमिट के जाया जा सकता है। ऊंचाई से ठण्ड का अनुमान लगाया जा सकता है। गर्मियों में भी जबरदस्त ठंड पड़ती है।
क्योंकि पूरा गांव भारी बर्फबारी से ढक जाता है। इसलिए, इस गांव के लोगों को अपनी आजीविका के लिए किन्नौर जिले के अन्य हिस्सों या पहाड़ियों के निचले क्षेत्र में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसलिए, चितकुल घूमने के लिए सबसे अच्छे महीने मई, जून, सितंबर और अक्टूबर हैं।
यह सांगला से १३ किलोमीटर की दूरी पर है।
यह गॉव भी ट्रेकिंग व कैम्पिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ भी रहने लायक होटल व होम स्टे मिल ही जाते है। यहाँ के होटल संचालक सुशील नेगी जी से बात करने पर यह पता चला कि गर्मियों में यहाँ का मौसम बहुत ही सुहावना होता है। और जो लोग बर्फ़बारी देखना चाहते है फरवरी मार्च के महीने में यहाँ चले आए बर्फ ही बर्फ़ मिलेगी।
सांगला : बस्पा : नदियाँ किनारे मोरा गांव. भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के किन्नौर ज़िले में स्थित एक गाँव है। यह बस्पा घाटी में बस्पा नदी के किनारे बसा हुआ है और उस घाटी की सबसे बड़ी बस्ती है। शिमला से इसकी दूरी २२३ किलोमीटर है। हम तीन शक्तियां हम दो भावना और रंजना थी।
हमने सांगला स्थित बंजारा रेसॉर्ट को ठहरने के चुना था।
बताते चले सांगला के स्थानीय होटल किन्नर कैम्पस के संचालक प्रदीप जी ने बातचीत के दरमियान हमें बताया कि बस्पा : नदी का उदगम स्थल चितकुल से ४८ किलोमीटर आगे कोई ग्लेशियर है जहाँ से
यह नदी निकलती है। और आगे बढ़ते हुए ये करचम गॉव में सतलुज नदी के वाए किनारे से जा मिलती है।
बेरिंग नाग जी का मंदिर : यहाँ कई मंदिर हैं और बेरिंग नाग जी यहाँ के अधिदेवता हैं। दो अन्य देवता सांगला से सम्बन्धित हैं: माजेन नाग जी और पिरी नाग जी। इनके मंदिरों के अलावा बद्रीनाथ जी और चितकुल माता के मंदिर हैं।
सांगला बासपा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित एक गांव है ,यह समुद्र से २६२१ - २७०० मीटर की ऊँचाई पर स्तिथ ऊंची उपजाऊ मिट्टी के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र है, और कर्चम से १७ किमी की दूरी पर स्थित है। इस घाटी के लोगो ने अपने घरों का निर्माण कुछ इस प्रकार किया है कि एक के घर ऊपर दूसरा घर निर्मित है।
सांगला होली : फागल उत्सव : सांगला होली,की होली धीरे धीरे विश्व विख्यात हो रही है। होली का रंगपूर्ण त्योहार जिसे फागल उत्सव के नाम से भी जाना जाता है, किन्नौर जिले के सांगला घाटी में मनाया जाने वाला एक अनोखा और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध त्योहार है। यह मुख्यधारा के होली उत्सवों से काफी अलग है, जो संगीत, नृत्य और भगवान के साथ भक्ति पर केंद्रित है। इसलिए यहाँ विदेशी सैलानियों की भीड़ देखी जा सकती है।
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अनुभाग : ७
यात्रा संस्मरण : हिमाचल : किन्नौर कैलाश
डॉ.भावना सुनीता शक्ति प्रिया.
गर्मी : फिर भी जाड़े की नरम धूप हो :
कल्पा एक छोटा सा गाँव : सतलुज नदी : किन्नौर का पूर्व जिला मुख्यालय : हमें याद है कुल्लू मनाली के रोहतांग दर्रे में हमने व्यास नदी का उदगम श्रोत देखा था। अब हमारे साथ सतलुज बह रही थी।
सतलुज नदी का उद्गम स्थान दक्षिण - पश्चिम तिब्बत में समुद्र तल से ४६०० मीटर की ऊंचाई पर है। इसका उद्गम मानसरोवर के निकट राक्षस ताल से होता है, जहां इसका स्थानीय नाम लोगचेन खम्बाव पड़ जाता है। सतलुज नदी भारत की १० सबसे बड़ी नदियां में से एक है।
पूरे उत्तरी भारत में बहने वाली एक प्रमुख नदी है जिसका पौराणिक नाम शतुर्दि है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित कल्पा एक छोटा सा गाँव है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह सतलुज नदी की घाटी में २७५९ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
हम कई दिनों से किन्नौर में थे। यत्र तत्र घूम रही थी। भौगौलिक दशाओं से परिचित हो रही थी
कल्पा एक छोटा सा गाँव : कल्पा पहले किन्नौर का जिला मुख्यालय था, लेकिन अब रिकांग पियो जिला मुख्यालय है हो गया है ।
शिमला, मनाली, धर्मशाला, मैकलॉडगंज आदि जगहों पर तो अक्सर आपने लोगों की भीड़ देखी होगी। अगर आप इस भीड़-भाड़ से दूर जाना चाहती हैं, तो किन्नौर जिले में स्थित एक प्यारे शहर कल्पा में घूम आइए।
यह शिमला से २६० किलोमीटर की स्थित है। रिकांग पिओ से पहले यह किन्नौर जिला का मुख्यालय था। यह जिला मुख्यालय से १४ किलोमीटर की दूरी पर है । १९ वीं शताब्दी में ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौज़ी की यात्रा के बाद कल्पा को प्रसिद्धि महत्व दिया गया।
रिकांग पिओ : रिकांग पियो, किन्नौर जिले का मुख्यालय है, यहाँ देखने लायक कई जगहें हैं। प्रमुख आकर्षणों में किन्नर कैलाश पर्वत , चंडी माता मंदिर और भाभा घाटी शामिल हैं। आप राल्डांग पर्वत का भी दृश्य देख सकते हैं और सेब के बागों का आनंद ले सकते हैं।
राल्डांग पर्वत किन्नौर-कैलाश पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, जो किन्नौर जिले, हिमाचल प्रदेश में स्थित है। यह ५४९९ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और रिकांग पियो के पास दिखाई देता है।
किन्नौर कैलाश की वर्फ़ से ढकी चोटियां : हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। कहते हैं कि भगवान शिव अपने परिवार के साथ यहीं रहते हैं। माना जाता है कि कोई आम इंसान कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ सकता है। तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत यानी कैलास उल्लेख कई हिंदू ग्रंथों में मिलता है।
अगर आप कल्पा घूमने आते हैं, तो यहां से किन्नौर कैलाश एकदम से पार्श्व में हैं। शिव के कैलाश का दर्शन का आप आनंद उठा सकते हैं। शिव की अनुभूति सदैव होती रहेगी। ओम नमः शिवाय के भाव को मन में रखें और विश्व के कल्याण की बात करते रहें।
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किन्नौर संस्कृति : अति लघु फिल्म : प्रदीप : सांगला
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किन्नर कैलाश की बर्फ से लदी - ढकी चोटी : यहां से बेहद खूबसूरत दिखती है। इस चोटी को रंग बदलने के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि यह भगवान शिव का घर है। अगर आप ट्रैकिंग करना चाहती हैं, तो उसके लिए भी यह जगह सटीक है। नमी के अभाव होने की वज़ह से ख़ुश्की की शिकायत रहती है।
नारायण नागिनी मंदिर : यहां का दूसरा आकर्षण केंद्र है यह मंदिर, जो पारंपरिक तिब्बतन पगोड़ा स्टाइल में बनाया गया है। यह मंदिर चीनी गांव के बिल्कुल टॉप पर बसा है, जहां से आप पूरे किन्नौर जिले की खूबसूरती को निहार सकती हैं। विदित हो कि यह मंदिर कुछ पांच हजार साल पुराना है। इस मंदिर के कुछ ही दूरी पर ही हु - बू -लान - कार नाम की एक मोनस्ट्री है, आप चाहें तो यहां भी जा सकते हैं।
आप सभी के लिए हिमाचल प्रदेश का मैप सामने है। भौगोलिक स्थिति देखते रहे कि आप किस दिशा की ओर अभिमुख हो रहें हैं। शिमला से किन्नौर पूर्व उत्तर में स्थित है। लौहल स्फीति शिमला से उत्तर कुल्लू मनाली और कुल्लू मनाली से भी उत्तर में स्थित है लौहल स्फीति का बर्फिस्तान।
करछम गॉंव : करछम बांध यह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में सतलुज नदी पर स्थित एक जलविद्युत परियोजना है. यह १०९१ मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाली एक रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है।
अब हमें नाको, ताबो के रास्ते लौहल स्पीति : जाना था। किनौर तक रास्ता तो ठीक था लेकिन काजा के रास्ते बहुत ही कच्चे,व खतरनाक है। सदैव राह चलते हुए यहीं लगता है कि भगवत कृपा से ही हम लाहौल और स्पीति घूम सकते हैं।
लाहौल और स्पीति : लाहौल और स्पीति अपनी ऊंची पर्वतमाला के कारण शेष दुनिया से कटा हुआ था। रोहतांग दर्रा ३९७८ मी की ऊंचाई पर लाहौल और स्पीति को कुल्लू घाटी से पृथक् करता है।
साल २०२१ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अटल टनल का उद्घाटन करने के बाद लाहौल तक पहुंचना आसान हो गया है। यह रास्ता लगभग पूरे साल खुला रहता है। जिले़ की पूर्वी सीमा तिब्बत से मिलती है, उत्तर में लद्दाख भू-भाग जम्मू और कश्मीर में स्थित और किन्नौर एवं कुल्लू दक्षिण सीमा में हैं।
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पृष्ठ संपादन सज्जा : शक्ति. मंजु रेनू रंजीता अर्चना
पृष्ठ सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति.
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मुसाफ़िर हूँ मैं यारों :
शक्ति आलेख सुबह सुबह ले शिव का नाम.
यात्रा वृतांत टिम्मरसैंण महादेव गुफा : चमोली
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संपादन
शक्ति डॉ. रजनी मंजिता मानसी बीना जोशी
शक्ति.नमिता सिंह.
रानीखेत
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सह शक्ति
डॉ.सुनीता मधुप अनुभूति
टिम्मरसैंण महादेव गुफा उत्तराखंड के चमोली जिले की नीति घाटी में स्थित एक पवित्र धार्मिक स्थल है।
टिम्मरसैंण महादेव के बारे में मुख्य बातें हम आप को बता दें।
टिम्मरसैंण महादेव के बारे में मुख्य बातें हम आप को बता दें।
स्थान : यह गुफा चमोली के नीति गांव में स्थित है।
विशेषता : सर्दियों के दौरान, यहां प्राकृतिक रूप से बर्फ से शिवलिंग की आकृति उभरती है, जिसे बाबा बर्फानी के रूप में जाना जाता है।
प्राकृतिक शिवलिंग अमरनाथ मंदिर की प्रतिकृति महत्व : यह २ - ३ फीट ऊंचा प्राकृतिक शिवलिंग अमरनाथ मंदिर की प्रतिकृति के रूप में प्रसिद्ध है। दिसंबर-मार्च में बर्फ का प्राकृतिक शिवलिंग छोटा अमरनाथ का प्रारूप है ।
प्रकृति के मध्य स्थानीय लोगों द्वारा पूजनीय यह स्थल चमोली के प्रमुख शीतकालीन धार्मिक पर्यटन स्थलों में से एक है। टिम्मरसैंण महादेव के दर्शन के लिए चमोली आगमन पर नीति घाटी की यात्रा की जा सकती है। पर्यटकों के बीच टिम्मरसैंण महादेव गुफा छोटा अमरनाथ के नाम से चर्चित हो रहा है।
ऊंचाई : उत्तराखंड के चमोली जिले में नीति घाटी के पास लगभग 3,600 मीटर से ४००० मीटर १०००० से १२००० फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। पहुँचने के लिए जोशीमठ-मलारी-नीति मार्ग आना होता है , जहाँ से १ से २ किमी का पैदल ट्रेक करना पड़ता है
जब शिव पर आपकी आस्था हो और शिव की असीम कृपा हो तो शिव मनुष्य को उसकी इच्छाओं के स्वरूप उसे दर्शन देने को अपने पास जरूर बुलाते हैं । मेरी भी इच्छा शिव को अलग-अलग रूपों में देखने की होती है। अमरनाथ यात्रा करने के बाद में शिव का ध्यान लगा ही रही थी ,कि मानोचमत्कार सा हो गया मुझे टिम्मरसेन महादेव के बारे में जानकारी हुई जहां की शीतकालीन में अनगिनत बर्फ के शिवलिंग बनते हैं ,फिर क्या था जानकारी के बाद में जोड़-तोड़ में लग गई ।
जहां चाह वहां राह : लोकोक्तियां तो बहुत है ' जहां चाह वहां राह ' पर सच यह है कि बिना भोले के बुलावा के आप उन तक पहुंच नहीं सकते टीमबरसेन की खोज करते-करते हमें एक साथी इंस्टाग्राम के माध्यम से मिल गया ।होली अपने चरम सीमा पर थी मैंने देवी मईहर के दरबार में अर्जी लगाई थी पर बुलावा तो भोले के दरबार में आया था । जल्दी में हम व्यवस्थाएं कर होलिका दहन के दिन अपने गंतव्य स्थान हरिद्वार पहुंचे ,पर अचानक ड्राइवर ने कहा मैडम जी पहाड़ों पर होली कल है गाड़ी नहीं जाएगी यह सुनकर मुझे लगा कि भोले परीक्षा ले रहे हैं....
गतांक से आगे : १.
हरिद्वार : गंगा : चमोली
शक्ति.नमिता सिंह. रानीखेत
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सह लेखन
शक्ति. डॉ.सुनीता मधुप अनुभूति
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चमोली की ठंडी सुबह : छाया : शक्ति. नमिता मानसी शालिनी. |
हरिद्वार से चमोली की दूरी लगभग २०० २५० किमी है, जिसे तय करने में टैक्सी या बस से ७ से ८ घंटे लगते हैं। यह मार्ग ऋषिकेश-देवप्रयाग-रुद्रप्रयाग से होकर गुजरता है। आप टैक्सी बुक कर सकते हैं या बजट यात्रा के लिए बसें उपलब्ध हैं, और यात्रा का सबसे अच्छा समय मार्च-जून और सितंबर-नवंबर है। मार्ग में आपको : हरिद्वार, ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग। कर्णप्रयाग और चमोली।
काफी प्रयास के बाद ड्राइवर ने कहा कि आपको यात्रा रात में करनी होगी मैं तैयार हो गई हरिद्वार से गंगा मैया का आशीर्वाद लेकर हम लोग रात १२ : ३० बजे वहां से निकले। और रात भर काली -सूनी रात में हमारी गाड़ी पहाड़ों के सीने को चीरते हुए प्रातः ६ बजे चमोली पहुंची। वहां पहुंचकर ड्राइवर ने कहा आपकी यात्रा समाप्त हो गई है यहां के बाद आपको आपके गंतव्य पर कोई और पहुंचाएगा। हमने देवभूमि की जमीन पर अपना स्थान प्राप्त किया ।
काफी प्रयास के बाद ड्राइवर ने कहा कि आपको यात्रा रात में करनी होगी मैं तैयार हो गई हरिद्वार से गंगा मैया का आशीर्वाद लेकर हम लोग रात १२ : ३० बजे वहां से निकले। और रात भर काली -सूनी रात में हमारी गाड़ी पहाड़ों के सीने को चीरते हुए प्रातः ६ बजे चमोली पहुंची। वहां पहुंचकर ड्राइवर ने कहा आपकी यात्रा समाप्त हो गई है यहां के बाद आपको आपके गंतव्य पर कोई और पहुंचाएगा। हमने देवभूमि की जमीन पर अपना स्थान प्राप्त किया ।
होली का दिन था ९ बजे, जब हम शंकराचार्य जी के शहर जोशीमठ पहुंचे तो देखा लोग नरसिंह मंदिर में रंग खेलने पहुंच रहे थे चारों तरफ जय जयकार हो रही थी होली का रंग सब पर चढ़ चुका था। हम भी आराम कर रात की थकान मिटाकर शाम आरती में नरसिंह नारायण के मंदिर पहुंचे। रोम-रोम आरती को देखकर तृप्त हो गया था ।
वापस कमरे में पहुंच कर सुबह की तैयारी में लग गए प्रात ७ बजे हम नीति घाटी की यात्रा पर निकल गए जो जोशी मठ से ८५ किलोमीटर की दूर समुद्र तल से १२००० फीट की ऊंचाई पर स्थित है। रास्ते में प्रकृति का आनंद उठाते हुए आंखों में बर्फ से लिपटी पहाड़ों को देखते हुए कई महत्वपूर्ण स्थान का दर्शन किया। जैसे द्रोणागिरी पर्वत जिस पर संजीवनी बूटी वाली पहाड़ी थी। हनुमान जी ने लक्ष्मण जी की मूर्छा को तोड़ने के लिए इस पर्वत को वहां से उठा लिया था आज भी उसे गांव के लोग हनुमान जी से नाराज हैं ,क्योंकि उन्होंने उनकी बेशकीमती पहाड़ को अभी तक नहीं लौटाया।
इसी तरह से बर्फ की चादरों में लिपटी विशालकाय पहाड़ों को देखकर लगा मनुष्य तो एक अत्यंत लघु व तुच्छ प्राणी है।
अचानक ड्राइवर ने कहा, चाय पी ले आगे कुछ नहीं है चीन की सीमा रेखा है। चाय पीते हुए मैं रील बनाती रही। फिर गाड़ी में बैठ कर पहाड़ों की ओर निहारती रही । मैं जैसे हनुमान पर्वत, हाथी पर्वत, स्लीपिंग ब्यूटी पर्वत को, देखकर मंत्र मुग्ध हो गई। और उनकी बातों को सुनते-सुनते अचानक ब्रेक लगा मैडम तैयार हो जाए बाबा का दरबार आ गया ।
भारत-चीन सीमा के पास नीति घाटी में
स्थित एक सुदूर और अंतिम सीमावर्ती गाँव : नीति गांव
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शक्ति.नमिता सिंह. रानीखेत
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सह लेखन
शक्ति. डॉ.सुनीता मधुप अनुभूति
नीति गाँव उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा के पास नीति घाटी में स्थित एक सुदूर और अंतिम सीमावर्ती गाँव है। यह ३६०० मीटर, या ११८११ फीट की ऊंचाई पर बसा है और प्राचीन तिब्बत व्यापार मार्ग के लिए प्रसिद्ध था। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और टिम्मरसैंण महादेव की प्राकृतिक बर्फानी गुफा के लिए जाना जाता है।
ऐतिहासिक महत्व : १९६२ से पहले, यह तिब्बत के साथ व्यापार का एक मुख्य मार्ग ( नीति दर्रा ) था।
संस्कृति की बात करें तो यह भोटिया जनजाति का एक खूबसूरत गाँव है, जो अपनी अनोखी संस्कृति और पारंपरिक घरों के लिए जाना जाता है।
कैसे पहुँचें : नीति गाँव का सबसे नजदीकी बड़ा कस्बा जोशीमठ है। सड़क मार्ग से जोशीमठ से मलारी और फिर यहाँ पहुँचा जा सकता है।
यात्रा का समय : मई से जून और सितंबर से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा है।
निकटतम पर्यटन स्थल : में मलारी गाँव द्रोणागिरी पर्वत फूलों की घाटी। सावधानी याद रख्ने यह क्षेत्र संवेदनशील है और ऊँची ऊँचाई पर स्थित है, इसलिए यहाँ जाने के लिए परमिट की आवश्यकता हो सकती है।
चारों तरफ खिड़की से देखा वीरान ऊंची -ऊंची पहाड़ी तेज हवाएं गाड़ी से बाहर देखा तो टिममरसेन जाने का बोर्ड दिखा।
मैने कौतूहल से पूछा किधर चले ? .....उसने इशारा किया।
धूल भरी दुर्गम पहाड़ी रास्ते मैंने ऊपर देखा तो पूछा मंदिर कहां है ?
आवाज आई ना बस थोड़ी दूर ऊंचाई पर।
....बढ़ते बढ़ते सांस फूलने लगी बाए पहाड़ सिर के ऊपर सूरज की रोशनी ,मार्च का प्रथम सप्ताह धूप की गर्मी का तो जवाब नहीं अचानक पानी खत्म हुआ तो देखा कि ऋषि गंगा का पिघलता पानी नीचे उतर रहा था।
मैंने बोतल से पानी भर ली करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा मैंने डेढ़ घंटे में तय की रास्ते में रमणीक दृश्य पानी की धारा ऊंची -ऊंची चट्टानें बर्फ से भरे रास्ते संभल संभल कर बर्फीले रास्तों को पार कर रही थी नहीं तो नीचे खाई में जाने का डर था ।
अचानक लंबी रास्तों को देख मैं पगडंडियों से आधे रास्ते पर कर गई ,तभी देखा कि एक पहाड़ के छोर पर बर्फ की जटाए लटक रही है।
गतांक से आगे : ३
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बर्फ की जटाओं से घिरे : बाबा भोले नाथ
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शक्ति.नमिता सिंह. रानीखेत
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सह लेखन
शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप अनुभूति
उत्तराखंड के चमोली जिले में नीति घाटी में स्थित प्राकृतिक शिवलिंग को टिम्मरसैंण महादेव के नाम से जाना जाता है। स्थानवश : यह नीति गांव के पास स्थित एक पवित्र गुफा मंदिर है, जो चमोली जिले के जोशीमठ ब्लॉक में भारत-चीन सीमा के पास है। प्रकृति यहां सर्दियों के दौरान गुफा की छत से टपकने वाले पानी से प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनाती है। समय का ध्यान रखें तो यह प्राकृतिक शिवलिंग मुख्य रूप से दिसंबर से मार्च के बीच भक्तों को दर्शन देता है। यह क्षेत्र लगभग ३६०० मीटर या ११८११ फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां हर साल बर्फ की मोटी परत जम जाती है। यह स्थान शीतकालीन धार्मिक पर्यटन के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बन गया है।
मैंने पूछा तो उसने उत्तर दिया,.... वही तो बाबा की गुफा है ,अलौकिक सुख प्रकृति का स्वरूप गुफा में पहुंचने पर बाबा चारों तरफ से बर्फ की जटाओं से घिरे हुए थे
मैंने पूछा तो उसने उत्तर दिया,.... वही तो बाबा की गुफा है ,अलौकिक सुख प्रकृति का स्वरूप गुफा में पहुंचने पर बाबा चारों तरफ से बर्फ की जटाओं से घिरे हुए थे
टिम्मरसैंण महादेव गुफा छोटा अमरनाथ : अलग-अलग स्वरूप की बर्फ की जटाए और गुफा के भीतर लगातार जल की वर्षा हो रही थी पता चला होकर गुजरती है और गुफा के छिद्रों से बाबा पर जल जलाभिषेक करती है।
और अधिक ठंड पड़ने पर पड़ने पर गिरते पानी लिंगो का स्वरूप लेते हैं गुफा में बड़ी मुश्किल से प्रवेश किया मानो लगा की फ्रिज के भीतर है।
पर थोड़ी देर के लिए पैर सुन्न हुआ फिर भक्तिमय होकर जब ठंडे पानी का एहसास भूल हम पूजा में लीन हो गए। गुफा को देख लगा कि ईश्वर को कुछ नहीं चाहिए फल, रुपए ,सब पड़े थे। अभी और बैठने का दिल था पर शेखर ने कहा चलिए ठंड लग जाएगी बर्फ में ।
हम भी डर कर जान बचाने उसके पीछे चल पड़े उतरने के बाद भारत का पहला गांव नीति देखें और चल पड़े आगे की ओर तभी गाड़ी पंचर हो गई। और हम वीरान पहाड़ों के बीच थोड़ा पैदल चले तो जान में जान आई और खुशी का ठिकाना जब चाय की दुकान मिली ।
गाड़ी बनने में देर थी नजरों को घुमाया तो देखा की दुकान के ऊपर खूबानी का बगीचा सफेद और गुलाबी रंगों से अपने को सजाए हुए थे। किताबों में फिल्मों में देखा था ऐसे बगीचे।
घुसते ही बगीचे का मालिक ने कहा, इस तरह मत पकड़ो फूल झड़ जाएंगे
तभी शेखर ने आवाज दी, ....आ जाओ, गाड़ी बन गई है ।
मैं कोशिश करते हुए नीचे उतरी , अब जाने की जिद ना करो' ।
पर मैं तो मुसाफिर थी मेरे लिए सब नया था पर उनके लिए तो रोज की जिंदगी थी। गाड़ी चल पड़ी। नजरों में यादों को संजोए हुए फिर नीति की यात्रा समाप्त कर हम जोशीमठ पहुंच गए ।
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पृष्ठ संपादन : शक्ति मानसी स्मिता नीलम वनिता
पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा प्रेरणा फ़रहीन
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चल कहीं दूर निकल जाए हम : सफ़रनामा : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन
शक्ति. डॉ.अनु माधवी सीमा नैना
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![]() |
| तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यू मस्त नग्में लुटाता रहूं : शक्ति. मीना सीमा प्रिया मधुप |
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समाचार : चित्र : दिन विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : १० .
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संपादन
शक्ति. शालिनी डॉ.रजनी माधवी शबनम
*
२८ अप्रैल.
अंतराष्ट्रीय श्रमिक स्मृति दिवस
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*
अभिनेता : सांसद :पूर्व केंद्रीय मंत्री
स्मृति : विशेष विनोद खन्ना : जीवनवृत धारावाहिक
६.१०.१९४६ - २७.४.२०१७
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स्मृति : विशेष
अभिनेता निर्माता निदेशक फ़िरोज खान
२५.९.३९ - २७.४.२००९
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फिल्म अभिनेता : विनोद खन्ना : धारावाहिक :१.
*
*
नैनो में दर्पण दर्पण में कोई देखूं जिसे सुबह शाम
लेखन :संपादन : आवाज़ : निर्माण : डॉ.मधुप.
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फिल्म अभिनेता : विनोद खन्ना : धारावाहिक : २
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प्रिय प्राणेश्वरी : हृदयेश्वरी : प्रेम का हम श्री गणेश करें
लेखन :संपादन : आवाज़ : निर्माण : डॉ. मधुप
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फिल्म अभिनेता : विनोद खन्ना : धारावाहिक : ३
*
मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए बोल तेरे साथ क्या सलूक किया जाये
*
फिल्म अभिनेता : विनोद खन्ना : धारावाहिक : ४.
*
कांच की चूड़ियां भी मैंने खनकाई
अपनी जुल्फें भी मैंने तो बिखराई
*
लेखन : संपादन : आवाज़ : निर्माण : डॉ. मधुप
*
फिल्म अभिनेता : विनोद खन्ना : धारावाहिक : ५ .
अंतिम क़िस्त
कोई होता जिसको अपना हम अपना कह लेते यारों.
पास नहीं तो दूर ही होता लेकिन कोई मेरा अपना.
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अक्षय तृतीया : बद्री विशाल
धारावाहिक : दृश्यम : लघु वृत्त चित्र : १
लेखन : आवाज संपादन : निर्माण : डॉ.मधुप
*
अक्षय तृतीया : बद्री विशाल के खुले कपाट
धारावाहिक : दृश्यम : लघु वृत्त चित्र : २
*
प्रस्तुति :शक्ति डॉ. राखी सीमा रंजिता अनु
लेखन : आवाज संपादन : निर्माण : डॉ.मधुप*
*
अक्षय तृतीया : सोना अक्षय है
धारावाहिक : दृश्यम : लघु वृत्त चित्र : ३
*
निर्माण : संपादन : आवाज़ : डॉ.मधुप.
*कार्टून : राज में नीति
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कल ' सम्मान ' आज ' सम्मन '
*
क्या कह रहें है..? ... कल ' सम्मान ' दिया था
आज इडी का ' सम्मन ' भिजवायेंगे
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दिन विशेष : पृष्ठ : १० .
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शक्ति.सीता प्राकट्योत्सव दिवस
*
बैशाख शुक्ल पक्ष नवमी
*
बैशाख शुक्ल पक्ष अक्षय तृतीया
*
परशुराम जयंती
बद्री विशाल मंदिर कपाट खुलने का दिवस
अक्षय तृतीया
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१० अप्रैल :डॉ.सैमुअल हैनिमैन जयंती
विश्व होम्योपैथी दिवस
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१० अप्रैल होम्योपैथी के संस्थापक डॉ.सैमुअल हैनिमैन की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
इसका उद्देश्य होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इसके स्वास्थ्य लाभों को बढ़ावा देना है।
२०२६ में यह दिवस "स्थायी स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी" थीम के साथ मनाया जा रहा है.
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शक्ति.डॉ.तनु मुंबई
डॉ. राखी मधुप अनुभूति
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चल कहीं दूर निकल जाए : सफ़र नामा : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ११ .
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संपादन
शक्ति. डॉ.अनु रितु मधुप सोनी
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शुभकामनाएं : मुझे भी कुछ कहना है : शब्द चित्र दृश्यम :पृष्ठ : १२ .
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शुभकामनाएं : संपादन
शक्ति.नैना डॉ.अनु मीना शबनम
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मेरे दिल में आज क्या है
तू कहे तो मैं बता दूँ : शॉर्ट रील
ये बता दो कहीं तुम वोही तो नहीं
शक्ति. प्रिया अनु मधुप आस्था प्रस्तुति
*ख्यालों का शहर : जब्बलपुर : यात्रा दृश्यम
प्रस्तुति : शक्ति शिवानी अनीता सुजाता रश्मि
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चाहे रहो दूर चाहे रहो पास :
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मैं कमसिन हूँ नादाँ हूँ नाजुक हूँ भोली हूँ थाम लो मुझे मैं यहीं इल्तिज़ा करूँ
शुभकामनाएं :
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अवतरण दिवस : जन्म दिवस
९ अप्रैल
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*
शक्ति रेनू शब्दमुखर
लेखिका कवयित्री
प्रधान सम्पादिका : महाशक्ति मीडिया
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को उनके अवतरण दिवस पर
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शक्ति शलिनी डॉ.अनु रंजीता रितु
शक्ति डॉ.रजनी मीना नीलम अनुभूति सहित
*
' हम ' एकीकृत देव शक्ति ' मीडिया ' परिवार की तरफ़ से
ढ़ेर सारी अनंत ' प्यार भरी ' शिव शक्ति ' शुभकामनाएं '
*
शक्ति प्रिया मधुप सुनीता सीमा
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हनुमान जयंती विशेष : अयोध्या : हनुमान गढ़ी : दृश्यम
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न्यूज़ क्लिप : संपादन : आवाज़ : डॉ.मधुप.
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अक्षय तृतीया की शुभकामनाओं के साथ
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आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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संपादन
शक्ति शबनम मीना सीमा राखी
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धड़कन की बीना सपनों की गीतांजलि तू
लेना होगा जनम हमें कई कई बार
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एक मन था मेरे पास वो अब खोने लगा है
पाकर तुझे हाय मुझे कुछ होने लगा है
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बीती बातों का कुछ ख्याल करो
कुछ तो बोलो कुछ हमसे बात करो
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एक प्यार का नगमा है मोजों की रवानी है
जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
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शक्ति.शालिनी डॉ सुनीता मधुप अनुभूति
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*
हम दोनों मिलके कागज़ पे दिल के
चिट्ठी लिखेंगे जवाब आएगा
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संसार है एक नदियाँ सुख दुःख दो किनारे है
न जाने कहाँ जाए हम बहते धारे है
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*
है कौन वो दुनियाँ में न पाप किया जिसने बिन उलझे काँटों से है फूल चुने कि सने
*
साभार
फिल्म रफ़्तार : १९७५
अभिनीत : मौसमी चटर्जी. मदन पुरी.
गीतकार : अभिलाष.संगीतकार सोनिक ओमी. गायक : मुकेश.
प्रेम कहानी : दोनों किसी को नज़र नहीं आए : तराने
*
Chal Kahin Door Nikal Jaye : Paryatan.
*
*
Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4.
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
Shakti : Kriti Art Link : English : Page : 7
Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9.
*
English Section.
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting
*
Shakti Editorial Page : 2.
*
Chief Editor.
*
* Shakti.
Prof. Dr. Roop Kala Prasad.
Shakti : Prof. Dr. Bhwana
Shakti : Madhvee.
Shakti : Baisakhi.
*
Baroda Desk.
*
Executive Editor
*
*
Editor : Shakti. Manjita Seema
Priya Tanu Sarvadhikari.
Darjeeling Desk.
*
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Shakti Editorial Writeups : 4.
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Editor.
Shakti. Shalini Priya Seema Anubhuti.
*
Akshaya Tritiya : never-ending.
*
Lord Krishna bestowed the Akshaya Patra to Draupadi.
Akshaya Tritiya, celebrated on the third bright day of Vaisakha , is a highly auspicious Hindu and Jain festival marking eternal prosperity.
It is celebrated by purchasing gold to bring lasting wealth, performing Lakshmi-Vishnu puja, donating to the needy, and starting new ventures.
The day symbolizes 'never-diminishing ' good fortune.
Significantly Known as Akha Teej, it is believed that any good deed, charity, or investment made on this day multiplies, as ' Akshaya ' means never-ending.
Rituals & Puja : Devotees wake up early, bathe in holy rivers, and worship Lord Vishnu and Goddess Lakshmi to seek blessings.
Homes are cleaned, and special, satvik meals like Puran Poli and Aamras are prepared and offered to the deities.
Tradition to buy gold : Gold and Investments : It is a widespread tradition to buy gold, silver, or jewelry, believed to bring prosperity. It is also considered a prime day for starting new businesses or buying property.
Charity (Daana) : People donate food, clothes, and water to the underprivileged, as charitable acts done on this day are considered highly beneficial.
Regional Variations :
| Lord Krishna bestowed Akshaya Patra to Draupadi |
Odisha : Farmers start sowing seeds in their fields and worship Goddess Lakshmi.
Maharashtra : Women celebrate by exchanging turmeric and vermillion haldi-kumkum, praying for the longevity of their husbands.
Jain Tradition : The day commemorates Tirthankara Rishabhanatha ending his 400-day fast by consuming sugarcane juice, known as Varshitapa.
Lord Krishna bestowed the Akshaya Patra a bowl that never runs out of food upon Draupadi. It is believed that on this day,
Sage Vyasa started writing the Mahabharata.
Sudama visited Lord Krishna, receiving unexpected wealth.
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Column Editing : Shakti Dr. Anuradha Madhvee Ranjita Ankita
Decorative : Shakti. Dr.Anu Manjita Shivani Seema
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Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
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Akshaya Tritiya : 19.4.26.
Offering alluring discount : Shakti Tanu Rajat.
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Nalanda / : CR/ Swarnika Jewellers shop is ready for serving the customers on the auspicious Akshaya Tritiya 19 th of April 2026 with alluring discounts applied to jewellery items.
While having a talk to the Director, Swarnika Jewellers,Sohsarai,Biharsharif Shakti Tanu Rajat clearly said to us about the offers are applied for the gold's ornament making charges 7.5 % flat to be reduced.
Diamond value 25% or Diamond Ornament making charge reduced to 50 % for the Akshaya Tritiya special day only.
For Silver items making charges have been reduced too.
Akshaya Tritiya is a special day that is seen as a symbol of good luck, prosperity, Happy Akshaya Tritiya. It is believed to be one of the most auspicious times of the year.This is the time when people buy jewellery, gold or gold.
a short reel : Spiti.
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Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
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Editor
Shakti Manju Ranjita Seema Anubhuti.
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Times Media Powered
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Shakti : Kriti Art : Safarnama : English : Page : 7.
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Editor.
Shakti. Anubhuti.Swati Ranjita. Seema.
![]() |
Musafir Hu Main Yaro : Sketch : Art : Dr.Sunita Madhup Seema Anubhuti. |
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Days Special : English : Page : 8.
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Day Special.
Editor.
Shakti. Anita Ranjita Seema Vanita.
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Days Special : News : English : Page : 8.
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Day Special.
Editor.
Shakti Anita Ranjita Seema Vanita..
April 16, 1853, Safarnama.
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India's first passenger train ran on April 16, 1853, traveling 34 km between Bori Bunder (Bombay) and Thane.
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India's first passenger train ran on April 16, 1853, traveling 34 km between Bori Bunder (Bombay) and Thane. It carried 400 passengers in 14 carriages, hauled by three steam locomotives—Sahib, Sindh, and Sultan. The journey lasted 57 minutes and marked the birth of Indian Railways.
April 16, 1853 was declared as a public holiday in Bombay.
from Bori Bunder now Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus, Mumbai to Thane.
Significantly it was operated by the Great Indian Peninsula Railway (GIPR).
It counted : 400 invited guests as the passenger
Inauguration was accompanied by a 21-gun salute
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World Art Day.
15.4.26.
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we Shakti Editors
write the Hearty Anant Shiv Shakti Wishes
for Our Shakti Art Ediors
Manjita,Swati Anubhuti,Shivani
on our Blog Magazine Wall
Shakti Shalini.Madhup Priya Renu.
International Day of Human Space Flight.
Being Remembered
Bankim Chandra Chatterjee,
the renowned Indian novelist, poet,
and composer of ' Vande Mataram ',
passed away on April 8, 1894,
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3.4.26.
Good Friday. Wishes
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demonstrating unconditional love without limits.
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Seen Somewhere : Cartoon Corner
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Cartoonist : Dr.Madhup.
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I st of April.2026.April Fool.
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Getting confused ... is she lovingly blinking me ..
or ...making me April Fool only.
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Heartfelt Tribute to Asha Bhosle
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ReplyDeleteEr Ankit