Apne Hi Rang Main Rang Le Mujhko : Holi 26.Dainik.
©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
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Apne Hi Rang Main Rang Le Mujhko.
Yaad Rahegi Holi Re 26
Dainik.Volume : 2. Series : 3.
a Social Media.Web Blog Magazine Philosophical Page.
Holi Special.
Monthly.March.Address.
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होली : आवरण पृष्ठ : दैनिक.
अपने ही रंग में रंग ले मुझको
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पत्रिका / दैनिक अनुभाग..
पत्रिका / दैनिक अनुभाग..
तिथि : ३१.३.२०२६.
विक्रम संवत : २०८३ .शक संवत : १९४७.
विक्रम संवत : २०८३ .शक संवत : १९४७.
दिन : मंगलवार.
महाशक्ति.दिवस.मूलांक: ४ .
चैत : शुक्ल पक्ष : त्रियोदशी
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति.
नैना देवी डेस्क नैनीताल
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महाशक्ति.नैना देवी डेस्क.
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मेरा साया
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सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु : छाया
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जो अन्तःमन में है,समझो वही समीप है
जो समीप होते हुए मन में नहीं वो भला तुम्हारे नजदीक कहाँ
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ख़ोज या सोच
ख़ोज में मत उलझे कि ईश्वर है या नहीं
सोच पहले यह रखें कि पहले हम इंसान है या नहीं
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जब जब तू मेरे सामने आए
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सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : राधिका : कृष्ण : छाया.
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मै उस भीड़ से दूर रहता हूं जहां लोग अपना होने कानाटक करते हैं
लेकिन यह जहाँ भी बहुत बड़ी है माधव समयक जन की तलाश
करते रहें एक ढूँढो हज़ार मिल जायेंगे
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बुरे भी हम भले भी हम
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सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : मीना : छाया.
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सौ खामियाँ मुझ में सही मगर एक जिद तो अच्छी भी है,
कि जिन्हें भी हमने अपना माना है उन्हें आज तक ख़ुद से जुदा नहीं किया..
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तुम प्रीत अमर कर दो
रिश्ता वही कायम रहता है
जहाँ दोनों एक दूसरे को खोने से डरते हैं
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शक्ति @ डॉ.अनु मधुप प्रिया
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ये न सोचो इसमें अपनी हार है कि जीत है
इसे अपना लो जो भी जीवन की रीत है
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सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु : छाया
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जब आपको यह अनुभूति होने लगे कि
आप स्वयं ही अपने जीवन में आसन्न दुखों के कारण हैं
तो किंचित यह समझदार होने का पहला लक्षण है
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मन ही देवता मन ही ईश्वर
मन से बड़ा न कोई
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : राधिका : छाया
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यदि तुम ( ईश्वर )अन्तःमन में हो तो तुम्ही बस हमारे हो,
कोई संबंध तुम्हारी तरह आत्मीय नहीं बन सकता
तुम्हारे अतिरिक्त कोई मेरा मित्र व सखा नही है.
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टाइम्स मीडिया समर्थित
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शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
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©️®️
M.S.Media.
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जरा सुनिए , ज़रा सोचिए न
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अच्छे उतने ही बनो जितना कि
ज़माना तुम्हें बेवकूफ़ न समझने लगे
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सन्दर्भ विचार : माया
शक्ति : रितु : छाया
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ख़ामोशी और नाराजगी
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नाराजगी जीवन में रिश्तें का एक अहम हिस्सा है
लेकिन एक तरफ़ा अख़्तियार की गई ख़ामोशी रिश्ते का अंत
इसलिए पहल होती रहनी चाहिए
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प्रभु इतनी कृपा करना
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तुलसी दास
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होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
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व्यवहार संस्कार
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व्यवहार संस्कार से आता है
संस्कार सदैव आस पास और अपने परिवार से
शब्द ,व्यवहार, संस्कार बेहतर हो इसके लिए सदैव सम्यक जनों
का साथ जारी रहे
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विचार शक्ति @ प्रिया मधुप रितु
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सन्दर्भ विचार : माया
शक्ति : रितु : छाया
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सन्दर्भ विचार : माया
शक्ति : रितु : छाया.
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अपने जीवन की उलझन को
कैसे मैं सुलझाऊँ
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सुन लेने से कितने ही सवाल सुलझ जाते है माधव
सुना देने से तो हम फिर वही उलझ कर रह जाते हैं
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मन का संयम बिगड़ा जाए
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प्रतिकूल परिस्थितियों में सहना अपेक्षा कृत सरल है
मन के अनुकूल स्थिति में मन का संयम रखना कठिन होता है
शक्ति : नंदा : छाया
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अपने या अपनेपन
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लोग कहते है कि जिंदगी जीने के लिए अपनों की जरुरत होती है
मगर सच यह है कि जीने के लिए अपनों नहीं
अपनेपन की जरुरत होती है
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हा मैं पाप युक्त हूँ
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पाप : पुण्य : पंच परमेश्वर
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मुझे न्याय करने का अधिकार तब न देना ईश्वर
जब तक़ मैं स्वयं में अधिकांशतः पाप मुक्त न हो जाऊं
तुम्हारी तरफ तुम्हारे कर्मों की गिनती करने वाली एक उंगली
मेरी तरफ़ तो तीन इंगित करती हैं
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शोध विचार शक्ति @ अनुभूति प्रिया मधुप
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इस चंद्र ग्रहण का क्या ख़त्म हो ही जाएगा
लेकिन उस मन के ग्रहण का क्या होगा ?
जिसके ह्रदय में कलुषित विचारों,अपशब्दों और पाप कर्मो का
ग्रहण उम्र भर लगा होता है , जरा सुनिए , ज़रा सोचिए न
तूफ़ान को आना है आ कर चले जाना है
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परिस्थितियाँ कभी स्थायी नहीं रहतीं बुरा समय भी बीत ही जाता है
इसलिए कठिन दौर में हिम्मत बनाए रखना ही समझदारी और परिपक्वता की निशानी है
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शक्ति @ डॉ. सुनीता मधुप सीमा अनुभूति
शक्ति : दीप्ती बोरा : नैनीताल छाया :
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ईश्वर के हर फैसले पर खुश रहें
सुनते है ईश्वर वो नहीं देता जो आपको
अच्छा लगता है बल्कि ईश्वर वो देता है जो आपके लिए अच्छा होता है
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शक्ति शालिनी प्रिया मधुप अनभूति
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शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ /३
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नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना: सितम्बर. दिवस : ९.
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शीलं परम भूषणम
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धैर्य व सहिष्णुता ही पुरुषार्थ का अहम लक्षण है
जो विकट परिस्थितियों में समस्याओं से हमें लड़ना सिखाता है
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विचार : सन्दर्भ : माया : फिल्म : रफ़्तार : छाया :
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ये जीवन है इस जीवन का
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जीवन में शंका और विश्वास दोनों एक साथ नहीं चलते,
जहां शंका हो वहाँ विश्वास हार जाता है,
और जहां विश्वास हो,वहां शंका को हारना ही पड़ता है
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है कौन वो दुनियाँ में न पाप किया जिसने
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कहीं न कहीं इस दुनियाँ में कर्म सबके संदेहास्पद ही होते है
कोई छूट गया तो कोई पकड़ा गया
कोई भी यहाँ दूध का धुला नहीं है
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जो दिल देखा आपने
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अक्सर हम दोष देते हैं परस्पर एक दूसरे को,
लेकिन अपने अंदर झाँकता न मैं हूँ, न आप है ?
भ्रम ने पैदा कर दी है दूरियाँ हमारे दरमियाँ,
लेकिन सच में बुरा न मैं हूँ, न आप
*
संपादन
शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा
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क्या देखते हो : दिल में उतर कर देखो न
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एक आईने की क़ीमत निसंदेह हीरे से बहुत कम होती है
लेकिन हीरे की खूबसूरती देखने के लिए
हम से हर कोई आइना ही देखेगा
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जहाँ हम गलत हो अपनेपन में वहां राह तो दिखाओ
जहाँ हम सही है वहाँ मेरा साथ तो निभाओ
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ममता हॉस्पिटल बिहार शरीफ:शक्ति.डॉ.ममता.आर्य.डॉ.सुनील कुमार : समर्थित
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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शब्द : कर्म : संस्कार
की प्रेरणा
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मातृ शक्ति.
प्रधान आचार्या
निर्मला सिन्हा.
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शक्ति संरक्षण
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
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प्रधान शक्ति संपादिका.
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नव शक्ति.
श्यामली : डेस्क : शिमला.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९.
संस्थापना वर्ष : २०००.महीना :जनवरी. दिवस : ५.
*
दृश्यम :फोटो.
शक्ति सम्पादिका
*
शक्ति.नैना डॉ.अनु रितु मीना.
नैनीताल डेस्क.
*
विचार
शक्ति सम्पादिका
शक्ति श्रेया सीमा फरहीन सोनी
शिमला डेस्क.
शिमला डेस्क.
*
नव शक्ति.विचार : पृष्ठ : २
श्यामली : डेस्क : शिमला.*
ख़ामोशी
*
रहने दे कुछ बातें ऐसी ही
कुछ जवाब तेरी मेरी अनकही सी
ख़ामोशी में ही अच्छे है
*
नामांकन के लिए सीटें कुछ उपलब्ध हैं : संपर्क करें
*
अपने ही रंग में रंग लें मुझको
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
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शिमला डेस्क
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शक्ति रेनू अनुभूति शालिनी मानसी
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शक्ति अनुभाग.
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अपने ही रंग में रंग लें मुझको
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
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शक्ति अनुभाग
रेनू शब्दमुखर
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विश्व कविता दिवस की भेंट
क्षणिकाएं.
*
प्रेम का अंकुरण
*
शेफालिका के फूल सी
तुममें खिलती रहूंगी
सुनो !
मेरे बंजर मन पर
तुमने कुछ बीज प्रेम के
अनजाने ही रोप दिए थे
और संवेदना जल से
उसे सिक्त करते रहे
आज मैंने देखा
उस सूखे बंजर मन में
अब प्रेम का अंकुरण हो
छोटे-छोटे नव पल्लव
विकसित होने लगे है
और उन पर प्यार की कलियाँ
पुष्पित हो महकने भी लगी है
सुनो बस इतना करना
संदर्भित : छाया : शक्ति. शालिनी
*
इस अंकुरित पल्लव को
स्नेहसिक्त कर महके हुए पुष्पों में
नव ऊर्जा और नव ऊष्मा
की धूप लगा के
विश्वास की खाद से
सृजित आभा की सुखानुभूति से
प्रेम संसार को आलोकित कर
अंकुरण के अस्तित्व को गति देना
और मैं कविता बनकर
तुम्हारे अंतस को
प्रेम से प्लावित कर
सरस शेफालिका के फूल सी
तुममें खिलती रहूंगी।*
क्षणिकाएं.
*
अपने ही रंग में रंग लें मुझको
*
*
संदर्भित : छाया : शक्ति. रेनू
*
चेहरे पर रंग है,
पर मन भी रंगीन रहे,
होली तभी सच्ची है
जब रिश्ते कटु न रहें.
द्वेष की धूल झाड़ो,
प्रेम का अबीर उड़ाओ,
हर दिल में
विश्वास का इंद्रधनुष सजाओ
*
पृष्ठ सज्जा : संपादन : शक्ति शालिनी मधुप अनुभूति
*
शक्ति अनुभाग.
*
शक्ति शालिनी संदीप
लेखिका कवयित्री सम्पादिका
*
गीत गाती हूँ मुस्कुराती हूँ मैं.
*
खुलती पंखुड़ियाँ,
मानो मन का उल्लास हो..!
महकती हुई साँसों में,
कोई ख़ास एहसास हो..!
ज़िंदगी भी तो एक,
ख़ूबसूरत बागवाँ ही है..!
बस काँटों के बीच भी,
मुस्कुराने का अभ्यास हो..!
गीत गाती हूँ मुस्कुराती हूँ मैं.
*
*
यदि मिले अवहेलना भी, मुस्कुराती हूँ
साम्यता में जीवन जीती, गीत गाती हूँ.
सर्वश्रेष्ठ है जगत में बस यहाँ सद्कर्म
है यहाँ अंधेर नगरी समझ लो यह मर्म.
आँसुओं के घूंट पीकर, मुस्कुराती हूँ
साम्यता में जीवन जीती, गीत गाती हूँ.
याद रखता है जमाना, आचरण, सद्भाव
हृदय को उदार रखो, ना रखो दुर्भाव.
ज़िंदगी के सत्य संग प्रतिक्षण बिताती हूँ
साम्यता में जीवन जीती, गीत गाती हूँ.
ना रहूँगी मौन अब, मैं बन चुकी परवाज़
लेखनी की धार से आती मेरे आवाज़.
हो कोई दुर्लभ विषय पर समझ जाती हूँ
साम्यता में जीवन जीती, गीत गाती हूँ.
आयु से अनुभव का ये रिश्ता पुराना है
ठोकरें खाकर सिखाता ये जमाना है.
कौन क्या कहता कभी ना ये छिपाती हूँ
साम्यता में जीवन जीती, गीत गाती हूँ.
थी बड़ी मासूम मैं, अब तो सयानी हो गई
रहस्यमयी थी जो, जानी पहचानी हो गई.
चेहरे पर चेहरा छुपा, पर पढ़ ही जाती हूँ
साम्यता में जीवन जीती, गीत गाती हूँ.
*
*
पृष्ठ सज्जा : संपादन : शक्ति नीलम मधुप स्वाति
*
भाविकाएँ
*
शक्ति अनुभाग
शक्ति.रजनी परमार
*
मंगल गान
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अवध में राम आएं हैं
राम : लखन : सिया : जी आई एफ
*
डॉ. रजनी प्रभा
सखि री गाओ सब मंगल अवध में राम आएं हैं
सज रही रूपसी सीता,लखन को साथ लाएं हैं,सखि,,,,
बड़ा रोई थी कौशल्या, जुदाई थी बहुत भारी
अभी तक व्याकुल थें नैना, विरह में सारे नर –नारी
ख़बर प्रभु आने की सुनकर, देव भी मुस्कुराएं हैं सखि,,,,
सजा दो राह सब गलियां,बिछा कर फूल और कलियां
रोशनी खिल उठे इतनी,दिखे जगमग दुखी दुनियां
बनाओ स्वयं को सबरी,भावना प्रभु मन भाए है,सखी,,,
विधाता स्वयं दुःख में भी जगत को प्यार बांटे हैं
वनों में भटकते दिन–दिन,कुटी में रात काटे हैं
बना कर मन को तपोवन,भगवा तन लगाए हैं,सखी,,,
*
कोई तो हो
भाविकाएँ : सन्दर्भ : माया.
स्वयं : शक्ति रजनी : छाया.
*
क्यों होने लगता ख्यालों में इंतजार किसी का
क्यों किसी को बताने को बेचैन हो उठती है सांसे
वो सब,जो शायद इतने साल तक
इतने अपनों के बीच रह कर भी
कहा न गया हो कभी
क्यों बालों से सफेदी के झांकते ही
चेहरों पे झुर्रियों के पड़ते ही
आंखों से धुंधलेपन को ताकते ही
और हाथों पैरों की निर्भरता के खोते ही
आखिर क्यों ?
आंखें किसी ऐसे मजबूत सहारे को
ढूंढने लगती हैं
जो उसकी भावनात्मक
ख्वाहिशों को समझे ....
*
मैं हूं न !
भाविकाएँ : सन्दर्भ : माया.
स्वयं : शक्ति रजनी : छाया.
*
उसकी फिजूल की बातों पर हंसे
उसकी छोटी छोटी खुशियों का
ख्याल रखे.
जब उदास हो प्यार से एक गुलाब
लाकर उसके हाथो में थमा दे.
जब भी वो परेशान हो,कारण जाने बिना
उसके सिर पे एक चुंबन जड़ दे
ये कहते हुए,
तुम इतना क्यों सोचते हो, मैं हूं न !
एक सच्चा हमसफर,
जो उसे भावनात्मक मजबूती दे सके
जो उसके छूटे सपनों को साकार
करने की वजह बने
दुनियां के साथ साथ
उसे खुद के लिए भी जीना सिखाए
लोगों का ख्याल छोड़ते हुए
हर कदम कहे,
तुम बढ़ो आगे,
साथ में, मैं हूं न !
*
संपादन : डॉ.रजनी बीना नवीन तनु
सज्जा : शक्ति सीमा शिवानी स्वाति अनुभूति
*
शक्ति अनुभाग.
शक्ति नीलम पांडेय
लेखिका कवयित्री सम्पादिका
वाराणसी डेस्क
*
महिला दिवस पर विशेष
*
छूने लगी है आसमान.वो
नारी के हौसलों की उड़ान, छूने लगी है आसमान। शायद ! अब उसको तुम भी, मुश्किल से पाओगे पहचान. कि कल तक जो डरती थी, आये दिन के तानों से, सुनसान राहों को देख, कहीं भी अकेले जाने से. लगाई जा रही पाबंदियों और, रोज़ रोज़ के फरमानों से. दफना के अरमानों को अपने, झुक जाती थी,केवल समझाने से. भागता था मन तितलियों के पीछे, पर,डरती थी सखियों संग जाने में. आज की नारी का हर रूप, है अलग,बिल्कुल निराला है। चूल्हे चौके से निकल के बाहर , घर की देहरी को करके पार. पहुंच चुकी है हर जगह अब वो, किताबों का साथ और, कलम की ताकत पाकर, करती है सपने साकार.
*
महिला दिवस
भाविकाएँ
अनुभाग
अबला नहीं रही आज की नारी,
*
सन्दर्भ : माया : शक्ति. सुमन छाया
*
*
संपादन : डॉ.रजनी बीना नवीन तनु
सज्जा : शक्ति सीमा शिवानी स्वाति अनुभूति
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तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
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संपादन
शक्ति
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शक्ति. आलेख
शक्ति. आरती अरुण.
सह : शक्ति प्रिया मधुप
*
अहिंसा परमो धर्म : महावीर जयंती विशेष.
मानवीय गुणों में क्षमा की बड़ी महिमा और महत्ता है। अगर कोई शक्तिशाली और सामर्थ्यवान है परन्तु क्षमाशील नहीं है तो सब व्यर्थ है।
अहिंसा : शक्तिशालियों का धर्म और आभूषण है : अहिंसा भी शक्तिशालियों का धर्म और आभूषण है, हिंसा की प्रकृति और प्रवृत्ति तो आदिम सामाजिक व्यवस्था में चली आ रही है लेकिन अहिंसक होना सहज नहीं है,जो सहजता से, समग्रता के साथ अहिंसक वृत्ति को अपनाकर आत्मसात कर लेते हैं,वे ही क्षमावान और अहिंसक हो सकते हैं। क्षमा और अहिंसा सहचर वृत्ति और प्रवृत्ति है।
क्षमा और अहिंसा की जरूरत : एक संतुलित और शान्त जीवन के लिए : आज की वैश्विक व्यवस्था में इसी क्षमा और अहिंसा की जरूरत है। परिवार और समाज में भी इसकी ग्राह्यता से अलग हटकर एक संतुलित और शान्त जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए जीण महावीर ने अपने दर्शन और चिन्तन में क्षमा और अहिंसा को एक व्रत के रूप में अपनाकर चलने का आग्रह किया है, जो जैन मत में खम्मन परब और अहिंसा के अणुव्रत के रूप में जाना जाता है।
अब इस अहिंसा के सन्दर्भ में जब यह कहा जाता है कि, अहिंसा परमो धर्म तो एक सवाल खड़ा होता है कि इस अहिंसा के सिद्धान्त या आदर्शों की रक्षा कैसे की जाए। यहां इतिहास के अवलोकन की जरूरत हो जाती है कि जैन मत और बौद्ध मत दोनों छठी सदी ई पू की अवधारणा हैं जब हिंसा और रक्तपात अपने चरम पर था।
सामाजिक,आर्थिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्रांति : जैन धर्म की स्थापना : बलि, यज्ञादि कर्मकाण्डों की वजह से गोधन या गोवंश की भयानक क्षति हो रही थी, समस्त सामाजिक आर्थिक और आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक आधारभूत संरचनाएं विकृत और विद्रूप होती जा रही थी जिससे ध्वस्त होती सामाजिक आर्थिक व्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने,समाज को समरसी समावेशी बनाने, हिंसा को रोकने तथा एक नवीन सामाजिक आर्थिक तथा आध्यात्मिक व्यवस्था को स्थापित करने के लिए दोनों मतों ने इस मार्ग को अपनाने का काम किया और इसीलिए इन दोनों को कभी कभी नवीन सामाजिक,आर्थिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्रांति भी कहा जाता है।
इससे स्पष्ट होता है कि संसार के समस्त दर्शन चिन्तन और सिद्धान्त अपने अपने युगधर्म को प्रतिबिम्बित करते हैं और इसमें जो सार्वकालिकता होती है,उसे अपनाया जाता है,तब इस अहिंसा के स्वरूप कोआधुनिक सन्दर्भों में भी देखने की जरूरत है कि जो व्यक्ति,समाज या राष्ट्र अगर शक्तिशाली, सामर्थ्यवान और सामरिक दृष्टिकोण से सक्षम नहीं है तो वह न तो क्षमावान हो सकता है ना ही उसके अहिंसा की कोई कीमत हो सकती है।
अहिंसा परमो धर्म : हिंसा धर्मो तथैव च : इसलिए हिन्दू जीवन दर्शन में इसे इस रूप में कहा गया कि,अहिंसा परमो धर्म हिंसा धर्मो तथैव च अर्थात् अहिंसा परम धर्म है पर उसी अहिंसा धर्म के रक्षार्थ अगर शस्त्र उठाना पड़े ,रक्त बहाना पड़े तो वह भी धर्म ही है।
आज की वैश्विक व्यवस्था इसी शक्ति संतुलन और समन्वय के सिद्धान्त पर चल रही है। इसलिए क्षमा,त्याग और अहिंसा वीरोचित धर्म है तभी तो दिनकर जी ने भी कहा है, क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो उसको क्या जो दंतहीन विषहीन विनीत सरल हो।
आज भगवान जीण महावीर की जयन्ती है। समस्त देशवासियों को महावीर जयन्ती की हार्दिक बधाईयां एवं मंगलकामनाऍं जय जीणेन्द्र.
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स्तंभ संपादन : शक्ति डॉ.रजनी रीता रंजीता रेनू
सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति।
भारतीय संस्कृति के शिखर पुरुषों में से एक श्रीराम.
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मर्यादा के प्रतीक : राम विष्णु के दशवें अवतार थे। मर्यादा के प्रतीक। वे जब त्रेता युग में धरती पर अवतरित हुए तो उनके विनम्र स्वभाव ,हितकारी उद्देश्य से समस्त जगत हर्षित था। भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी हरषित महतारी,मुनि मन हारी,अद्भुत रूप बिचारी ॥
राम नवमी मनाने का उद्देश्य भगवान राम के जन्म का जश्न मनाना और उनके आदर्शों को याद करना है. यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है. राम नवमी को हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है।
राम मिथक थे अथवा इतिहास : राम लला के अयोध्या में मंदिर के निर्माण के साथ अब तो सिद्ध हो गया कि राम मिथक नहीं इतिहास थे। प्रमाणों पर चर्चा की लम्बी प्रक्रिया चली। राम सिद्ध हो गए।
राम नवमी मनाने का उद्देश्य भगवान राम के जन्म का जश्न मनाना और उनके आदर्शों को याद करना है. यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है. राम नवमी को हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है।
राम मिथक थे अथवा इतिहास : राम लला के अयोध्या में मंदिर के निर्माण के साथ अब तो सिद्ध हो गया कि राम मिथक नहीं इतिहास थे। प्रमाणों पर चर्चा की लम्बी प्रक्रिया चली। राम सिद्ध हो गए।
रामनवमी हमारी भारतीय संस्कृति के शिखर पुरुषों में से एक श्रीराम का जन्मदिन है इस बात पर बहस होती रही कि राम मिथक थे अथवा इतिहास। लेकिन हमारी हजारों साल लंबी सांस्कृतिक परंपरा में ऐसे पहले व्यक्ति जरूर थे जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहां गया। वे प्रखर योद्धा भी थे ,अप्रतिम शासक भी और एक शालीन व्यक्तित्व के स्वामी भी थे।
वे ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन पर अपने समय के उच्चतम जीवन मूल्यों के आचरण के लिए देवत्व आरोपित किया गया। जिन पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को उन्होंने जिया वह उनकी मिसाले आज भी दी जाती है।
वे ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन पर अपने समय के उच्चतम जीवन मूल्यों के आचरण के लिए देवत्व आरोपित किया गया। जिन पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को उन्होंने जिया वह उनकी मिसाले आज भी दी जाती है। रामराज्य : आदर्श शासन व्यवस्था : उनकी शासन व्यवस्था रामराज्य को आज भी शासन का आदर्श माना जाता है। राम ऐसे पहले व्यक्ति थे जिनके जीवन पर महर्षि वाल्मीकि की रामायण और तुलसीदास के राम चरित्र मानस के अलावा देश और विदेश की कई भाषाओं में महाकाव्य रचे गए। राम भारत में ही नहीं नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सहित विश्व के कई देशों में आदर्श के रूप में पूजे जाते हैं।
आधुनिक समय में उनकी कुछ कृत्यों के लिए राम को कटघरे में भी खड़ा किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राम का मूल्यांकन हम आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर कस कर करते हैं। राम की जो सीमाएं दिखती है वे सीमाएं राम की नहीं, तत्कालीन जीवन मूल्यों, परंपरा और स्थापित शासकीय आदर्शों की थी। अपनी तमाम करुणा, प्रेम और मानवीयता के बावजूद राम परंपराओं और राजकीय मर्यादाओं के पार नहीं जा सके।
कृष्ण ने नई स्थापनाओं को मान्यता भी दिलाई : समय बदला तो द्वापर युग में कृष्ण ने अपने समय के धार्मिक ,नैतिक और सामाजिक मूल्यों का बार-बार अतिक्रमण भी किया और समाज द्वारा अपनी नई स्थापनाओं को मान्यता भी दिलाई। तथापि किसी ऐतिहासिक पौराणिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन उसके समय के सापेक्ष ही किया जाना चाहिए।
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स्तंभ संपादन : शक्ति डॉ रजनी रीता रंजीता रेनू
सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति
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गतांक से आगे : १
धर्म उत्सव के सही मायने : प्रीत ; गीत और सहिष्णुता
राम जी की निकली सवारी
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राम जी की निकली सवारी राम जी की लीला है प्यारी.कोलाज : शक्ति विदिशा निवेदिता शिवानी
दिल्ली की रामनवमी : दिल्ली उत्सवधर्मिता का शहर है बड़े ही जोश ख़रोश से यहां मिलजुलकर त्योहार मनाया जाता है ।इधर के कुछ सालों में मर्यादा पुरुषोत्तम राम को लेकर खासा उत्साह रहा है। हर मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ, शनिवार को हनुमान चालीसा और अब रामनवमी से पहले हर दिन रामायण का पाठ तकरीबन हर बड़े मंदिरों में चलता है ।
इन आयोजनों का सबसे बेहतरीन समाजिक लाभ बुजुर्ग महिलाओं को मिलता है । भक्ति के बहाने वे घर से बाहर निकलती है । समूह बनाकर आपस में पाठ करतीं हैं भजन करती हैं । सुख - दुख बांटती हुई एक दुसरे की मदद करतीं हैं । कुल जमा बात यह है कि अकेले पन से बच कर वो जीवन को जीने की कोशिश करती हैं ।
आज दिल्ली में दस दिवसीय रामायण पाठ का समापन आज सुबह के शोभा यात्रा से हुआ। सुबह आठ बजे शोभा यात्रा ,ग्यारह बजे मंदिर में पूजन ,राम जन्मोत्सव और फिर खुल्ला भंडारा ।मर्यादा में रहते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया गया ।
पटना के महावीर मंदिर : रामनवमी का उत्साह : हालांकि रामनवमी का धार्मिक एकता का सबसे बेहतर उदाहरण पटना के महावीर मंदिर में देखा जा सकता है । स्टेशन स्थित महावीर मंदिर और उसके सटे मस्जिद दोनों के परिसर में आपसी सामंजस्य इस तरह है कि आजतक कितने भी राजनैतिक विवाद देश भर में होता रहे लेकिन पटना स्तिथ महावीर मंदिर और मस्जिद के आपसी भाईचारे तथा सामंजस्य में कोई फर्क नहीं पड़ता है ।
महावीर मंदिर और मस्जिद के आपसी भाईचारे तथा सामंजस्य की झलक : रामनवमी की पांच किलोमीटर दूर से लगनी वाली पंक्तियों को मस्जिद वाले भी सहेजते व संभालते हैं । उस दिन पटरी पर अपनी दूकान लगाने वाले दुकानदार खुद की दुकान समेट लेते हैं। उससे भी अधिक हुआ तो पंक्तिबद्ध राम के भक्तों को मुस्लिम युवक पानी या शरबत तक पिलाते हैं । कभी कभी रमजान के महीने में मंदिर की तरफ से सारी सुविधाएं नमाजियों को दी जाती है। यदि ऐसा भाई चारा पूरे देश में चले तब ही सार्थक होगा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का रामराज्य जो कभी पहले था।
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संपादन. शक्ति स्मिता रंजीता रेनू नीलम
पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति सुष्मिता अनुभूति
पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति सुष्मिता अनुभूति
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शक्ति आलेख : ४ / १ : अपने ही रंग में
शक्ति. शालिनी मधुप प्रिया मीना
फूल देई : छम्मा देई : उत्तराखंड नव वर्ष की शुरुआत
सह
शक्ति.भारती सुनीता डॉ.नवीन बीना जोशी
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सुबह सबेरे ही मेरी शक्ति सम्पादिका बीना नवीन जोशी ने आज १५ मार्च को नैनीताल में होती ओलों की वारिश को लेकर ट्वीट किया था प्रकृति आज नैनी ताल में अपने तरीक़े से फूल देई मना रही हैं। ठंड फिर से बढ़ गयी।
फूल खिलते हैं दिल मिलते है : शक्ति सम्पादिका लतिका ,लक्षिका ललिता भुवन जोशी ने कहा पकवान बन रहें है। खीर बन चुका है। बड़े बनने बाकी है। भुवन कहते है यही समय होता है जब पहाड़ों के शीर्ष से बर्फ़ पिघलती है। बसंत की शुरुआत हो जाती है बच्चों को फूलदेई में जो आशीष और प्यार स्वरूप में जो भेंट मिलती है ,उससे अलग अलग स्थानों में अलग अलग पकवान बनाये जाते हैं। फूलदेई से प्राप्त चावलों को भिगा दिया जाता है। और प्राप्त गुड़ को मिलाकर ,और पैसों से घी तेल खरीदकर ,बच्चों के लिए हलवा ,छोई , शाइ , नामक स्थानीय पकवान बनाये जाते हैं। कुमाऊं के भोटान्तिक क्षेत्रों में चावल की पिठ्ठी और गुड़ से साया नामक विशेष पकवान बनाया जाता है।
कैसे मनाते है हम यह फूल देई : उत्तराखंड कुमाऊंनी गढ़वाली पहाड़ों में वसंत की घोषणा कैलेंडरों से नहीं की जाती... यह फूल देई के साथ आती है। फूल देई उत्तराखंड का एक पारंपरिक लोकपर्व है जो चैत्र मास की संक्रांति को बसंत के स्वागत में मनाया जाता है. इस दिन बच्चे घर - घर जाकर देहरी पर फूल चढ़ाते ..
प्रकृति अपने सबसे बेहतरीन रूप में विचरण कर रही होती है। प्रकृति में विभिन्न प्रकार के फूल खिले रहते हैं । नववर्ष के स्वागत की परम्परा विश्व के सभी सभ्य समाजों में पाई जाती है। चाहे अंग्रेजी समाज का न्यू ईयर डे हो ,या पडोसी तिब्बत का लोसर उत्सव हो। या पारसियों का नैरोज हो या सनातन समाज की चैत्र प्रतिपदा। फूलदेइ पर्व के रूप में देवतुल्य बच्चों द्वारा प्रकृति के सुन्दर फूलों से नववर्ष का स्वागत किया जाता है.
वसंत की घोषणा : बसंत के चपल चरण : अर्थात प्रत्येक वर्ष मार्च १४ या १५ तारीख को यह त्योहार मनाया जाता है। मीन संक्रांति उत्तराखंड के दोनों मंडलों में मनाई जाती है। कुमाऊं गढ़वाल में इसे फूलदेई और जौनसार में गोगा कहा जाता है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सौर कैलेंडर का उपयोग किया जाता है। इसलिए इन क्षेत्रों में हिन्दू नव वर्ष का प्रथम दिन मीन संक्रांति अर्थात फूल देइ से शुरू होता है। चैत्र मास में बसंत ऋतु का आगमन हुआ रहता है।
उत्तराखंड के मानसखंड कुमाऊं क्षेत्र में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकपर्व एवं बाल पर्व फूलदेई पर छोटे छोटे बच्चे पहले दिन अच्छे ताज़े फूल वन से तोड़ के लाते हैं। जिनमे विशेष प्योंली के फूल और बुरॉश के फूल का प्रयोग करते हैं। इस दिन गृहणियां सुबह सुबह उठ कर साफ सफाई कर चौखट को ताजे गोबर मिट्टी से लीप कर शुद्ध कर देती है। फूलदेई के दिन सुबह सुबह छोटे छोटे बच्चे अपने वर्तनों में फूल एवं चावल रख कर घर घर जाते हैं । और सब के दरवाजे पर फूल चढ़ा कर फूलदेई के गीत , 'फूलदेई छम्मा देई दैणी द्वार भर भकार !! " गाते हैं। और लोग उन्हें बदले में चावल गुड़ और पैसे देते हैं। छोटे छोटे देवतुल्य बच्चे सभी की देहरी में फूल डाल कर शुभता और समृधि की मंगलकामना करते हैं। इस पर गृहणियां उनकी थाली में ,गुड़ और पैसे रखती हैं।
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संपादन : शक्ति रंजीता मानसी कंचन रेनू
सज्जा : शक्ति दीप्ती मंजिता सीमा स्वाति
शक्ति आलेख : ४ / २ : अपने ही रंग में
सम्पादकीय.
होली : रंगों का उत्सव ही नहीं हमारे जीने की बजह भी है.
शक्ति.रेनू शब्दमुखर
शक्ति. शालिनी मधुप अनुभूति
साझे उल्लास का भी नाम है होली : त्योहार केवल तिथियों का क्रम नहीं होते, वे समाज की सामूहिक चेतना की धड़कन होते हैं। विशेषकर होली जैसा पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि जीवन केवल व्यक्तिगत व्यस्तताओं का नाम नहीं, बल्कि साझे उल्लास का भी नाम है। जब तक त्योहार जीवित रहते हैं, समाज में संवेदना जीवित रहती है; और जब संवेदना क्षीण होने लगती है, तो सबसे पहले त्योहारों की चमक फीकी पड़ती है।
कभी त्योहार जीवन की सहज लय का हिस्सा हुआ करते थे। उनका आगमन किसी विशेष घोषणा का मोहताज नहीं था। मौसम बदलते थे और मन भी बदल जाता था। घरों में तैयारियाँ कई दिनों पहले आरंभ हो जाती थीं। सफाई केवल दीवारों की नहीं, मन की भी होती थी। रिश्तों पर जमी धूल झाड़ी जाती थी और मनुष्यों के बीच के छोटे-छोटे अंतराल पाटे जाते थे। त्योहार मिलन का अवसर होते थे ऐसा मिलन जिसमें औपचारिकता नहीं, आत्मीयता होती थी।
औपचारिकता नहीं, आत्मीयता होती है होली में : होली का रंगे केवल अबीर- गुलाल नहीं है, वह मनुष्यता का रंग है। यह पर्व भेद मिटाने की प्रेरणा देता है। रंगों का स्पर्श हमें यह अनुभव कराता है कि मनुष्य की पहचान उसके बाहरी रूप से नहीं, भीतर की ऊष्मा से होती है। परंतु जय यही रंग केवल औपचारिकता बन जाएँ और मिलन तस्वीरों व संदेशों तक सीमित रह जाए, तब हमें ठहरकर सोचना चाहिए-क्या हम उत्सव मना रहे हैं या केवल उसका प्रदर्शन कर रहे हैं?
समय बदला है और परिवर्तन स्वाभाविक है। आधुनिक जीवन में सुविधाएँ दी है, संभावनाएं दी है, पर जीवन की गति इतनी तीव्र कर दी है कि ठहराव के क्षण दुर्लभ होते रहें हैं।
बनने लगते हैं। बाहरी सजावट के बीच मानवीय ऊष्मा दब जाती है।
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| फोटो : शक्ति मीना |
यह कहना उचित नहीं कि परंपराएँ ज्यों की त्यों बनी रहें। समाज स्थिर नहीं होता, त्योहार भी समय के साथ बदलते हैं। पर यदि परिवर्तन के बीच उनकी मानवीयता ही नष्ट हो जाए, तो केवल रूप बचता है, सार नहीं। तब त्योहार रस्म बन जाते हैं, उत्सव नहीं। वास्तव में त्योहारों का महत्व केवल सांस्कृतिक नहीं, मानवीय है। वे हमे स्मरण कराते हैं कि जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष का नाम नहीं; उसमें साझा सुख-दुख भी हैं। त्योहार पीढ़ियों के बीच संवाद का सेतु होते हैं। वे स्मृतियों को भविष्य से जोड़ते हैं और मनुष्य को मनुष्य के निकट लाते हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम त्योहारों को नए संदभों में समझें। आधुनिकता को नकारना समाधान नहीं, पर संवेदना को बचाए रखना आवश्यक है। यदि इस होली पर हम कवल रंग न लगाकर संबंधा पर जमी धूल को भी झाड़ दें, यदि औपचारिक संदेशों की जगह किसी के द्वार पर जाकर मुस्कान बाँट दें, तो शायद त्योहार अपनी खोई हुई आत्मा पुनः पा सकेंगे। क्योंकि त्योहारों की असली रोशनी दीयो या रंगों में नहीं, मनुष्य के भीतर जलती है और वही रोशनी समाज को जीवित रखती है।
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स्तंभ संपादन : शक्ति शालिनी नीलम प्रीति क्षमा
सज्जा : मंजिता सीमा अनुभूति स्वाति
| शक्ति. डॉ.रश्मि. आर्य डॉ.अमरदीप नारायण.नालंदा बोन एंड स्पाइन सेंटर.बिहारशरीफ समर्थित |
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अपने ही रंग में रंग ले मुझको : याद रहेगी होली रे : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन
शक्ति शालिनी मधुप रेनू अनुभूति
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अपने ही रंग में रंग ले मुझको : याद रहेगी होली रे : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन
शक्ति. शालिनी मधुप रेनू अनुभूति
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शक्ति राखी.आर्य. सुजीत कुमार. शाखा प्रबंधक. यूको बैंक : विश्वास का सम्मान : समर्थित
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याद रहेगी होली : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
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संपादन
शक्ति मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति
शिमला डेस्क
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अपने ही रंग में रंग ले मुझको : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ११ .
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संपादन
शक्ति नैना शालिनी सीमा रितु .
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शक्ति राखी.आर्य. सुजीत कुमार. शाखा प्रबंधक. यूको बैंक : विश्वास का सम्मान : समर्थित
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समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : १० .
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संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी माधवी स्मिता शबनम
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सरयू : अयोध्या : राम की पैड़ी : रामनवमी
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२१ मार्च : विश्व कविता दिवस
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कविता है
भावनाओं का सुन्दर चित्रण
मानव जीवन का दर्पण
सुख दुःख प्रकृति
मन का प्रतिबिम्बन
जो रचते बसते शब्दों में
उन कवियों का
करते है हम कोटिशः नमन
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शक्ति शालिनी मधुप रेनू अनुभूति
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२० मार्च २०१६ गौरैया दिवस
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जिओ और जीने दो
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संगीत : प्रकृति का संरक्षण
कभी हमारे घरों का हिस्सा रही नन्हीं गौरैया आज लुप्त होने की कगार पर है। 'विश्व गौरैया दिवस' पर आइए हम अपने छज्जों और आँगन में उनके लिए घोंसले और पानी के सकोरे रखें बढ़ते शहरीकरण के बीच इन बेजुबान परिंदों को बचाना हमारा सामूहिक उत्तरदायित्व है। प्रकृति के इस मधुर संगीत को शांत न होने दें....
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शॉर्ट रील : शक्ति रितु ये फागुन बीत न जाए
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होली : दृश्यम : मृगनयनी : साभार
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होली : दृश्यम : मृगनयनी : साभार
पलट के दूंगी रे गाली रे
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अपने ही रंग में रंग ले मुझको : याद रहेगी होली रे : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ११ .
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संपादन
शक्ति नैना शालिनी सीमा रितु
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अपने ही रंग में रंग ले मुझको : याद रहेगी होली रे : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : ११ .
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संपादन.
शक्ति नैना शालिनी सीमा रितु.
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--------- शुभकामनाएं : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२. ---------- संपादन.
शक्ति.डॉ.अनु रितु मीना शबनम. * शॉर्ट रील : जिंदगी बन गए हो तुम : शक्ति रितु * एपिसोड : ३. जीवन भर ढूंढ़ा जिसको : अभिनेता : नवीन. शक्ति : लघु वृत्त चित्र फिल्म :अभिनेता :नवीन निश्चल * एपिसोड :४. वो प्यार मिला पर नहीं मिला : अभिनेता : नवीन. शक्ति : लघु वृत्त चित्र फिल्म : अभिनेता : नवीन निश्चल. एपिसोड :५ : बैठो न दूर हमसे देखो खफ़ा न हो : अभिनेता : नवीन. शक्ति : लघु वृत्त चित्र फिल्म : अभिनेता : नवीन निश्चल. * साभार राधिका कृष्ण : होली : दृश्यम पिया तोसे नैना लागी रे
* साभार : प्रस्तुति : शक्ति डॉ. अनु शालिनी रेनू आस्था. * हम देव शक्ति परिवार की तरफ से होली की हार्दिक अनंत शिव शक्ति शुभकामनाओं * -------- आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३ . ---------- संपादन शक्ति डॉ अनु प्रिया शालिनी सीमा * -------- आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३. ---------- संपादन शक्ति. डॉ.अनु प्रिया शालिनी सीमा * तेरे संग प्यार मैं नहीं तोड़ना : तराने. * चेहरा क्या देखते हो : दिल में उतर कर देखो न * चेहरा क्या देखते हो : दिल में उतर कर देखो न * शक्ति रितु सिंह : शॉर्ट रील कि जैसे तुमको बनाया गया हो मेरे लिए मन सौप दिया कुछ और तो मेरे पास नहीं हैं जो तुमसे है मेरे हमदम भगवान से भी कोई आस नहीं * फिल्म : धुंध : कुछ समझ न पाऊं क्या होना है मेरा दृश्यम : गाना : संजय खान. जीनत अमान. डैनी. * |
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Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4.
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
Shakti : Kriti Art Link : English : Page : 7
Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9.
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English Section.
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting
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Shakti Vibes English Page : 3
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Editor.
Shakti Priya Shalini Ranjita Seema.
Darjeeling Desk
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Mistake is a single page of life
But relationship is a complete book.
So don't close a full book
for a single page.
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Shakti Editorial. Prose : English Page : 4
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Editor Shakti.
Anuradha Priya Madhvee Seema
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Remembering the Kapda Phad Holi
A unique Tradition of Bihari Holi.
Ashok Karn.
Ex.Press Photographer Hindustan Times Patna Ranchi.
Co : Shakti Dr. Sunita Priya Madhup.
Kapda Phad Holi : Remembering the Kapda Phad Holi A unique Tradition of Bihari Holi. Ashok Karn. Ex.Press Photographer Hindustan Times Patna Ranchi. Co : Shakti Dr. Sunita Priya Madhup. Kapda Phad Holi Just I go in our high time when we were at age 20 to 30. We were full of energy. completely roamed at the day of holi.We always got together meeting one to one. We used to visit our friends houses just I remembered .We used to sing a chorus. These are specially Key Aspects of Kapda Phad Holi in Bihar : Action is known to each Bihari. Participants, often in groups, tear each other's clothes (usually shirts /kurtas) while celebrating. While playing such an indecent holi such an atmosphere is created. It is characterized by loud music, dholak beats, and intense, rustic fun, where traditional,.
Cultural Significance : This tradition is deeply rooted in local culture, especially among youth, making the celebration more intimate and energetic, often blending with mud or sludge bathing. Locatedly it is quite popularized in Patna, Jehanabad, and rural Bihar.Timing: Celebrated during the main day of Holi (Rangwali Holi). It is a, intense, and, unapologetic, expression of, joy, and camaraderie.
Holika Dahan : A Journey Down Memory Lane Holika Dahan always takes me on a nostalgic trip back to my childhood. I vividly remember the excitement of running around with my siblings and friends, searching for discarded wooden items—broken chairs, old benches, and anything wooden that caught our eyes. Our mischievous mission was simple: gather… Celebrating the Colors of Life : The Vibrance of Holi As the month of Phagun comes to an end, India bursts into a celebration of colors, love, and spring—Holi, one of the most joyous and significant Hindu festivals. Holi symbolizes rebirth and
![]() |
| Celebrating the Colors of Life : Photo Ashok Karn. |
rejuvenation, commemorating the eternal love of Lord Krishna and Radha. People dressed… Shirtless Holi – Shirtless Holi – A Contemporary Expression of Celebration As the month of Phagun draws to a close, India comes alive with the vibrant festival of Holi—an occasion that celebrates color, love, and the arrival of spring. Rooted in the divine bond of Lord Krishna and Radha, Holi symbolizes renewal, joy, and the timeless spirit… Kapada Phad Holi (cloth-tearing Holi) is a raw, high-energy, and traditional form of celebration in Bihar, particularly popular in rural areas
and places like Jehanabad and Forbesganj. It involves singing folk songs (Jogira), dancing, and tearing clothes off friends in a playful, chaotic, and enthusiastic celebration of the festival.
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Column Editor Shakti Dr R.K Sinha.Bhagwanti Seema Ranjita.
Decorative : Shakti : Dr Bhwana Smita Sangeeta Madhvee
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Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
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Editor.
Shakti.Shalini Farheen Ranjita Seema.
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Holi : Togetherness Collage
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Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
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Editor.
Shakti.Shalini Farheen Ranjita Seema.
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Holi : Togetherness Collage
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Days Special : English : Page : 8.
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Editor
Shakti Seema Ankita Farheen Shahina
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Day Special.
a Holika Decorative.
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negativity and all evil things
be burt this Holika.









































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