Ye Paudhe Ye Patte Ye Phool Ye Hawaye : Paryatan : Patrika.

  ©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Presentation.
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email : Address.  
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Ye Paudhe Ye Patte Ye Phool Ye Hawaye.
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पत्रिका आवरण पृष्ठ. 
पर्यटन विशेषांक. 
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ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : मन कहे मैं झूमूँ : आवरण पृष्ठ : शक्ति.प्रिया सीमा विदिशा अनुभूति. 
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दैनिक आवरण पृष्ठ. 
पर्यटन विशेषांक. 
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ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : मन कहे मैं झूमूँ : दैनिक आवरण पृष्ठ :
शक्ति.
 दैनिक : में जाने व पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. 
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शक्ति ज्योति आर्य नरेंद्र. वायर एक्सिस प्राइवेट लिमिटेड मार्केट रिसर्च : नवी मुंबई समर्थित. 
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आत्म दीपो भवः 
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   विक्रम संवत : २०८३ शक संवत : १९४८. 
दिनांक : ३१.०७.२६. 
आषाढ़  : कृष्णपक्ष :द्वितीया . 
दिन. शुक्रवार. 
 शक्ति दिवस.मूलांक: ४ .     
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a rising Sun GIF.
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जागो उठ कर देखो 
जीवन जोत उजागर है. 
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विषय सूची :पृष्ठ :०.

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अनुभाग : १.
शक्ति जीवन दर्शन.

आवरण पृष्ठ :०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
हम चार जीवन : दर्शन : पृष्ठ : ०.
नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ :१.
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अनुभाग : २.
शक्ति सम्पादकीय.
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
 यात्रा विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५. 
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अनुभाग : ३.
शक्ति दृश्यम.
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
 ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं  : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
 ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं   : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
 ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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अनुभाग : ४.
तुम्हारे लिए.
समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
  : शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.

शक्ति ज्योति आर्य नरेंद्र. वायर एक्सिस प्राइवेट लिमिटेड मार्केट रिसर्च : नवी मुंबई समर्थित आवरण


 पृष्ठ : दैनिक / पत्रिका अनुभाग : लिंक : विषय सूची : सम्पादकीय : त्रिशक्ति :
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महाशक्ति विचार 
नैना डेस्क 
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति. 
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शक्ति : महाशक्ति दर्शन : पृष्ठ : १ / १ .
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नैना देवी डेस्क. नैनीताल. 
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महाशक्ति.नैना देवी डेस्क.
नैनीताल.प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई.दिवस :४.
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सम्पादित.
शक्ति.नैना डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
*
उसने कहा था.
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©️®️M.S. Media. Water  Colour.  Shakti /13  / 26.
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विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति : कृति : छाया.
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जिन खोजा तिन पाइया 

ढूंढ़ रहे थे अपनी ख़ुशी दूसरे के मन मन में 
जबकि ख़ुशी तो बसी थी पास मेरे मन के कण कण में 
*
मेरे अपने 

कभी कभी बेवजह भी सम्यक साथ ,जन की ख़ुशी की 
 एक वजह बन कर देखिए  यकीं हैं वो आपको 
हज़ार खुशियाँ देंगे 

शोध विचार शक्ति. @ डॉ.अनु सुनीता रंजीता सीमा .
*
लोग क्या कहेंगे 
*
फिक्र इस बात कि नहीं कि लोग क्या कहेंगे 
फर्क इस बात से पड़ता है कि आप क्या कहेंगे 
*
कभी कभी शब्दों से कुछ क़िरदार का पता सही न चले
लेकिन पच्चीस फीसदी तो अनुमानित हो ही जाता है
उलट वे लोग बेमिसाल हैं जिनके बोल कड़वे हो और व्यवहार अनमोल

*
*
©️®️M.S.Media.
Water Clour painting.Madhup. 98  / 26.
*

 यदि पक्ष में  है तो समर्थन है 
विपक्ष में है तो रणनीति की सीख है, और सावधानी है 
उन्हें  बोलने दे , शमित रह कर सुनने व क्रियाशील रहने 
में ही भलाई है,
*
कोई तो है : कुछ तो है

जीवन वहीं से शुरू होता है जहाँ भय समाप्त होता है...
लेकिन यह भी चिर सत्य है कि भय जीवन के हरेक क्षण में व्याप्त है 
भय रहित मन कैसे हो, इस कारण पर विचार कीजिए 
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
कृति  : मधुप : छाया.

*
मेरी दोस्ती मेरा प्यार.



*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु सिंह : छाया.
*
सच में मुनाफ़ा था ख़ुद के लिए जीने में 
मगर हम दूसरों के लिए प्यार में ख़र्च होते  गए 
*
रिश्ता, दोस्ती और प्रेम उसी से रखें 
जो आपकी हंसी के पीछे का दर्द, गुस्से के पीछे का प्यार 
और मौन के पीछे की बजह समझ सके
*
तोरा मन दर्पण कहलाए 
*

*
विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति. रितु सिंह  : कृति छाया.
*
जिसकी ईश्वर की आप तलाश कर रहे हैं, वह आपके अंतर्मन में  ही हैं
 नेकनियती बढ़ाइए बदनियती घटाइए 
*
वर्तमान में ही छोटी छोटी ख़ुशियों में  
जीना सीख लीजिये कोई मनचाहे अच्छे दिन विशेषतः आने वाले नहीं है 
*
दिल की गिरह खोल दो 

उम्मीदों के इस रचे बसे संसार में किसी के ना कहने से नहीं 
अपने मन की बनाई हुई हाँ के टूट जाने से होता है 
सही व्यक्ति से सही अपेक्षाएं रखें रिश्ते नाते अधिक सहज होंगे 
*
शोध विचार शक्ति.शालिनी रेनू मधुप रितु. 
*
टाइम्स मीडिया समर्थित. 

*
शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
*
*

*
महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून.दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
©️®️
M.S.Media.
*
हमारे संग संग चले गंगा की लहरें. 


 
©️®️MS*.Media. Water  Colour Painting. Madhup / 89 / 26.

गंगा : शक्ति : मन : छाया 
*
मन रावण जो तूने लहरों में बहाए 

ईश्वर कहीं बाहर नहीं है, राम रावण सब  तुम्हारे अंतर्मन में ही है 
यह तुम्हारी  प्राथमिकता में है कि तुम्हें क्या चाहिए ?
*
तुम्हारे  प्यार व्यवहार और संस्कार 
की मन्दाकिनी में धुल कर पतित मन रावण के पाप 
पावन हो जाए,यही मेरी अभिलाषा है 
 *
विचार @ शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
देखा है जिंदगी को 
कुछ इतना करीब से 
*

*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : गुल : छाया.
*
भाषाओं का अनुवाद तो हो सकता है लेकिन भावनाओं का नहीं 
इसे तो अन्तर्मन से समझना होगा 
जिंदगी में जिंदगी ढूंढना ही जिंदगी हैं 

*
चिट्ठियां हो तो हर कोई बांटें 
भाग न बांटें कोई 


Water Colour Painting : Shakti. Seema .94 / 26 
*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : सीमा  : छाया.

जो छोड़ जायेंगे वह न बादशाहत होगी न  फ़कीरी 
रह जाती है यहाँ सिर्फ़ यहाँ नेकनामी या बदनामी 
विचार कीजिए क्या छोड़ जाना है ? 
*
विचार @ शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.

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प्रथम मीडिया समर्थित. 
-------
शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ /३ 
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*
*
नर्मदा  डेस्क. जब्बलपुर. 
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
*
संपादन.
शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा
*



*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु सिंह : छाया.
*
जिंदगी कैसी ये पहेली है 
*
जिंदगी में कभी भी आस न छोड़े
क्योंकि कोई भी नहीं जानता कि आने वाला कल क्या लाने वाला है
*
न तुम हमें जानो न तुम हम तुम्हें जाने

अजीब नाकाम रहें हमदोनों न हम तुम्हें समझ सकें 
न तुम हमें जान सकें 
*
अँखियों को रहने दो अँखियों के आस पास 
*
सुकून तब नहीं मिला जब सब ठीक हुआ 
सुकून तब मिला जब हर चीज का ठीक होना जरुरी समझना छोड़ दिया 
*
एक तेरा साथ हमको दो जहाँ से प्यारा है 

अन्य के लिए आप एक साधारण इंसान हो सकते है
लेकिन किसी विशेष के लिए आप खास उसकी पूरी दुनियां और जीने
की वज़ह हो सकते हैं
*
कल आज और कल
*

*
सन्दर्भ : विचार : माया.
कृति  : मधुप : छाया.
*
क्या अतीत और भविष्य मन की निरर्थक भ्रांतियाँ मात्र हैं
या केवल वर्तमान क्षण ही वास्तविक है ?
गौरवशाली अतीत के सुनहरेपन को याद रखते हुए भविष्य के
नव निर्माण हेतू सार्थक प्रयास ही वर्तमान है
*
शोध विचार शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा  
*
*
स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.

*
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सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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*
प्रधान शक्ति संपादिका.
नव शक्ति.
श्यामली : डेस्क : शिमला.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९.
संस्थापना वर्ष : २०००. महीना : जनवरी. दिवस :५.
*

*
शक्ति.शालिनी रेनू.
नीलम 'अनुभूति '.


शक्ति.
कार्यकारी सम्पादिका.
*


*
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
नैना देवी.नैनीताल डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७०.
संस्थापना वर्ष : १९९६.महीना : जनवरी : दिवस : ६.
*
दृश्यम : फोटो 
शक्ति सम्पादिका 

*
नैनीताल डेस्क 
*

शक्ति. गुल अनु रितु मीना 
*

*
सम्पादकीय शक्ति विचार : हम चार : पृष्ठ : २ 
*
जो हमारे साथ है वो ख़्वाब ही तो हैं : २ /१ 
*


वॉटर कलर पेंटिंग : अनुभूति : हम चार :  
*
जो  है हमारे साथ वो ख्वाब ही तो है 
पर जो भी है हमारे पास वो लाज़वाब ही तो है 

@ शक्ति. डॉ.सुनीता रंजिता रितु अनु 
*
हम इंतजार करेंगे :
 हम चार  : २ / २  
*

वॉटर कलर पेंटिंग : अनुभूति : हम चार : 
*
मुझे रहेगी प्रतीक्षा तेरी उम्र भर 
प्रेम मुझे तुझसे ही नहीं तेरे होने से भी है 

*
@ शक्ति.डॉ.अनु मीना रेनू 
शालिनी.
*

ख्वाहिशें और जिद  
हम चार : २ / ३   
*

ख्वाहिशें  भले ही छोटी सी हो 
लेकिन उसे पूरा करने के लिए दिल जिद्दी होना चाहिए 
*
@ शक्ति.प्रिया मधुप मानसी अनभूति .

लोग क्या कहेंगे : हम चार : २ / ४   


फोटो वॉटर कलर पेंटिंग : हम चार 
*
लोग क्या कहेंगे 
*
फिक्र इस बात कि नहीं कि लोग क्या कहेंगे 
फर्क इस बात से पड़ता है कि आप क्या कहेंगे 
*
@ शक्ति.नैना मधुप डॉ.रजनी सोनी.
---------

आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
---------
संपादन.
शिमला डेस्क.
*


शक्ति.रेनू अनुभूति शालिनी मानसी.
*
शक्ति.अनुभाग. 



*

शक्ति. अनुभाग. 
भाविकाएँ 

*
शक्ति.अनुभाग
शक्ति. नीलम पांडेय.वाराणसी. 
*

कवयित्री.लेखिका.
सम्पादिका. एम.एस.मीडिया.
*
है ! शहीद कारगिल के तुम्हें, है नमन वंदन और प्रणाम.
*
देश की आन - बान - शान पर, हो गए जो हंसकर कुर्बान,
है ! शहीद कारगिल के तुम्हें, है नमन, वंदन और प्रणाम
देश की मिट्टी दड़क उठी थी,लहू से अमर शहीदों की,
वंदे मातरम्'‌के जयघोष से था गूंज रहा नीला आसमान.

था एक ओर पराक्रम " शेरशाह " विक्रम बत्रा का,
दूसरी तरफ योगेंद्र यादव की साहस भरी ललकार.
भांप नहीं पाया दुश्मन, चक्रव्यूह था समझ के पार,
भड़का आग देशप्रेम की, थे जांबाज मनोज पांडे तैयार.
' महावीर ' बलवान और कैप्टन के गुस्से ने बरसाए गोले,


दुश्मन पर सबने मिल के, किए फिर अनगिनत वार,
हो गए छलनी बदन उनके, भरते रहे फिर भी हुंकार.
घुटना टेका फिर दुश्मन ने, भाग गए थे सीमा पार,
पलकें बिछाए देश खड़ा था. थे देख रहे सब सांसें.

तिरंगे में लिपटे इन सपूतों ने विजयश्री से किया विश्राम,
धन्य-धन्य है भारत भूमि, है धन्य मां और पिता महान.
है धन्य वो अधौगिनी, " परमवीर चक्र का जिसको मान,
देश की आन-बान-शान पर हो गए जो हंसकर कुर्बान.

है ! शहीद कारगिल के तुम्हें, है नमन वंदन और प्रणाम.
*
संपादन सज्जा
शक्ति.डॉ. रजनी शालिनी स्वाति अनुभूति
*

शक्ति. रेनू शब्दमुखर
कवयित्री.लेखिका.
सम्पादिका. एम.एस.मीडिया.
*

तू लाली है 
सबेरे वाली 

*


 
©️®️M.S.Media.
Shakti.Soni. Indraprasth.Water Colour Painting.16 / 26. 
*
शक्ति. सोनी माया भाविका : संदर्भित : छाया.
*
मेरे हिस्से की धूप 
किसी ने चुरा भी ली  
तो क्या हुआ ?
मैने फिर से
अपने मन के आँगन में 
एक पूरा सूरज उगा कर 
एक नया
सबेरा बसा लिया 
*

चुपके चुपके
चल री  पुरवईयां 


तुम मिले तो 
मौसमों ने रंग भर दिए 
सुने पड़े इन रास्तों ने 
फूल फिर से धर दिए 
अब दुआओं में 
हवाओं में बस तुम ही 
नज़र आते हो 
मेरी हर धड़कन के गीतों 
में तुम चुपके चुपके गाते हो 

*

*
शक्ति रेनू शब्दमुखर भाविका : संदर्भित : छाया
*
मैं ठीक हूँ.

वह रोई नहीं
मैंने आज देखा
क्लासरूम में
रोज की तरह चकर-चकर
करने वाली
वह बहुत शांत थी
लग रहा था जैसे मेरे पूछते ही रो देगी
पर वह रोई नहीं.
बस खिड़की से बाहर देखती रही.
मैं समझ गयी
कुछ टूट गया है भीतर.
पूरी क्लास में
वह सबसे शांत थी.
और मैं जानती हूँ,
सबसे ज़्यादा शोर
*

*
अक्सर
शांत लोगों के भीतर ही होता है।
मैंने फिर भी उससे पूछा 
क्या हुआ रिया ?
वह हलके से मुस्करा दी 
पर कुछ न बोली
इंटरवेल की घंटी बजने पर  
जाते-जाते बोली-
'मैम ! मैं ठीक हूँ।'
और उसी क्षण
मुझे समझ आ गया,
दुनिया का सबसे बड़ा झूठ
अक्सर यही होता है-
मैं ठीक हूँ।'

*
संपादन सज्जा शक्ति.शालिनी नीलम स्वाति अनुभूति 
*



*
शक्ति. अनुभाग 
 डॉ.रजनी परमार 
*

*
कवयित्री.लेखिका.एंकर पटना दूरदर्शन.
सम्पादिका एम.एस.मीडिया.

*
भाविकाएँ 
*
हिय लगने को तेरे प्रिय ! 
प्रेम में देना मुझे
कनेर के फूल प्रिय ! 
सज कनुप्रिया के जूड़े 
ज्यों इतराऊँ 
पीत पट श्याम सा
हर धूप,धूल,बारिश 

*


संदर्भित : छाया : शक्ति. रितु माया
*
और झेलते हुए उपेक्षा दंश को
जब भी बंशी की टेर सुनूं
कर श्रृंगार कनेल के फूलों से
दौड़ पड़ूं सब छोड़ छाड़
*
संपादन सज्जा 
शक्ति. डॉ.सुनीता रंजिता सीमा .
*


शक्ति अनुभाग
*
शक्ति.शालिनी 


कवयित्री. लेखिका. प्रधान सम्पादिका.
महाशक्ति मीडिया.
*
सवैया छंद : गुरु पूर्णिमा विशेष.



कृष्ण : अर्जुन : गीता
*
ज्ञान-सुधाकर-दीप्ति निरंतर,
गुरु-चरणाम्बुज-रेणु ललाट धरे,
भव-भ्रम-भंजक भाव जगावै।
ज्ञान-सुधाकर-दीप्ति निरंतर,
अज्ञान-निशा क्षण-एक नसावै।।
वेद-विभा, विनय-विवेक-विभूति
सुधा उर-उद्यान महकावै।
कोटि प्रणाम गुरुवर को करूँ,
जिनकी कृपा भवसिंधु तरावै।।
पूर्णिमा-शशि-सी शीतल छाया,
तप्त हृदय पर अमृत बरसावै।
सूखे मन-वन में प्रेम-प्रसूनन की
नव-पल्लव-पाँति खिलावै।।
दंभ-दहन कर दया-सरिता की
निर्मल धारा नित्य बहावै।
धन्य वही जन, धन्य वह जीवन,
जो गुरु-पद-पंकज शीश नवावै।।
शब्द नहीं, निज मौन उपासना
ही गुरु-महिमा कहि पावै।
दीपक बन निज देह जलाकर
औरन के पथ दीप जलावै।।
ऐसे कृपासिंधु सद्गुरु के
चरणन में मन नित्य समावै।
जन्म अनेक सफल हो जाएँ,
यदि गुरु-कृपा का अंश मिलावै।।
*
शालिनी राय 'डिम्पल'
लेखिका/कवयित्री/ सम्पादिका
गज़ल

*

दर्द के सारे सफ़्हे मेरी आशनाई हो गए.
*

*
गज़ल  सन्दर्भ : माया 
कृति : कलर पेंटिंग ९२ : मधुप : छाया. 

*
जो अश्क़ आँख से उतरे, रोशनाई हो गए,

दर्द के सारे सफ़्हे मेरी आशनाई हो गए.

मैंने जो कुछ भी जिया था,वही अल्फ़ाज़ बना,
उम्र के बिखरे हुए लम्हें  मेरी गहराई हो गए.

माँ की दुआ, बाप की सीख,घर की वो मिट्टी की महक,
मेरे काग़ज़ पर उतरकर मेरी रहनुमाई हो गए.

कुछ शिकायत थी ज़माने से,कुछ ख़ुद से गुफ़्तगू,
दिल में दफ़्न सारे क़िस्से लब की गोयाई हो गए.
*
शब्दार्थ 
रोशनाई-स्याही, सफ़्हे-पन्ना/पृष्ठ,
आशनाई-परिचय/लगाव/मोहब्बत, 
गोयाई- बोलने की क्षमता.

*
जो अश्क़ आँख से उतरे, रोशनाई हो गए,



*
गज़ल  सन्दर्भ : माया. 
कृति : कलर पेंटिंग ९२ : मधुप : छाया. 

*
मैंने तन्हाई के मौसम में, जिन्हें सींचा था,
वो सभी ख़्वाब एक दिन मेरी शनासाई हो गए।
कितनी रातों की थकन,कितने सुकूतों का सफ़र,
मेरे अशआर में ढलकर दर्द की गवाही हो गए।

जो किसी से कह न पाई,जो किसी ने सुन न पाए,
रूह के पोशीदा राज़ मेरी बीनाई हो गए।
वक़्त ने जो ज़ख़्म दिए,मैंने सजाए शेर में,
दर्द के सब रंग आख़िर मेरी दानाई हो गए।

अब किताबों में जो पढ़ते हैं मेरे एहसास को,
जानते क्या हैं कि कितने दिन मेरी तन्हाई हो गए।
जो अश्क़ आँख से उतरे, रोशनाई हो गए,
दर्द के सारे सफ़्हे मेरी आशनाई हो गए.

*
शब्दार्थ 
शनासाई - पहचान, सुकूत - मौन, 
पोशीदा -छिपा हुआ : रहस्यमयपूर्ण , 
बीनाई - दृष्टि, दानाई -बुद्धि.

*


ख़्वाब. 

सूक्ष्मिकाएँ 

*

*
भाविका सन्दर्भ : माया 
कृति : पेंटिंग :  मधुप : छाया 
*
दिन में  देखा, वह  ख़्वाब था.
रात्रि में आया, वह  ख़्वाब था।
संघर्षों में रहा, वह  ख़्वाब था.
पूरा भी हुआ, वह  ख़्वाब था।

शक्ति शालिनी
*
संपादन सज्जा 
शक्ति.मानसी कंचन मंजिता स्वाति.
*

--------

यात्रा विशेषांक :  ये फूल ये हवाएं :शक्ति : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५.
-------- 
संपादन 
शक्ति. शालिनी कंचन मंजू बीना  जोशी 
*
दिल पुकारे. आ रे आ रे. 
बादलों का डेरा : सिक्किम : यात्रा संस्मरण 
शक्ति डॉ.भावना सुनीता रश्मि. 
सह : 
शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति.
 *


दिल पुकारे आ रे आ रे : अभी न जा मेरे साथी : फोटो : शक्ति. प्रिया मधुप अनभूति. 

साल १९६७ और  ' ज्वेल थीफ '  की यादें ' ज्वेल थीफ ' से मिली थी मुझे प्रेरणा।  प्रकृति, प्रेम, पहाड़ की समझ यही से हुई थी। मैंने ये फिल्म १९८५ में देखी थी। मन को भा गयी थी। सालों तक़ घूमती रही। तब से सिक्किम घूमने की इच्छा बनी रही। मैंने दो बार सिक्किम का भ्रमण किया। २००६ और फिर २०१६। दूसरी बार छांगू लेक तक गए थे।  याक की सवारी भी की थी, मुझे याद है। २०२६ में शक्ति सम्पादिका सिक्किम भ्रमण करके आयी हैं। यह यात्रा संस्मरण कई एक की मधुर स्मृतियों को संजोये हुए होगी।  
साल १९६७ में आई देव आनंद और वैजयंतीमाला स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म ' ज्वेल थीफ ' की शूटिंग सिक्किम की खूबसूरत वादियों में हुई थी। इस फिल्म का मशहूर गाना ' दिल पुकारे आ रे आ रे ' एवं ' होठों पे ऐसी बात मैं दबाकर चली आई ' जिसे गंगटोक के रॉयल पैलेस में शूट किया गया था।  सिक्किम और हिंदी सिनेमा मुंबई बॉलीवुड  का रिश्ता बहुत पुराना और दिलचस्प है। 
गंगटोक : दिल पुकारे आ रे आ रे : अभी न जा मेरे साथी :स्थानीय भाषा में गंगटोक  शब्द का अर्थ पहाड़ी की चोटी या पहाड़ होता है। सिक्किम भारत का एक खूबसूरत उत्तर-पूर्वी राज्य है, और गंगटोक इस राज्य की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। यह शहर पूर्वी हिमालय श्रृंखला में लगभग १६५० मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ एक अत्यंत साफ़ सुथरा शहर है। 
गंगटोक अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सुंदर वादियों, बौद्ध मठों और कंचनजंगा पर्वत के शानदार नज़ारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। 
भौगोलिक स्थिति की यदि बात करें तो यह भारत का दूसरा सबसे छोटा और सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है। इसकी सीमाएं पश्चिम में नेपाल, उत्तर और पूर्व में चीन तिब्बत और दक्षिण-पूर्व में भूटान से लगती हैं। 
रोमियो इन सिक्किम : श्याम प्रधान। इस फिल्म की शूटिंग को देखकर ही स्थानीय नागरिक श्याम प्रधान प्रेरित हुए और उन्होंने सिक्किम की पहली हिंदी फिल्म बनाने का फैसला किया। सिक्किम की पहली हिंदी फिल्म का नाम ' रोमियो इन सिक्किम '  है, जो साल १९७५  में रिलीज हुई थी। यह फिल्म सिक्किम के ही एक स्थानीय नागरिक श्याम प्रधान द्वारा बनाई गई थी, जिन्होंने फिल्म में मुख्य भूमिका भी निभाई थी। रोमियो इन सिक्किम ' यह फिल्म ठीक उसी वर्ष रिलीज हुई थी जब सिक्किम का भारत संघ में पूरी तरह विलय हुआ था। इस फिल्म के गाने मशहूर गायक मोहम्मद रफी और उषा मंगेशकर ने गाए थे तथा इसे पूरी तरह से सिक्किम की पृष्ठभूमि पर तैयार किया गया था।
रोड टू सिक्किम १९६९ : अन्य महत्वपूर्ण फिल्में यथा  रोड टू सिक्किम १९६९ : इस नाम से भी बॉलीवुड में एक थ्रिलर फिल्म बनाई गई थी, जिसमें देव कुमार और हेलन ने काम किया था.
सत्यजीत रे की  ' सिक्किम ' डॉक्यूमेंट्री : सत्यजीत रे की  ' सिक्किम ' डॉक्यूमेंट्री १९७१ भी बहुत चर्चित हुई : भारत के महान निर्देशक सत्यजीत रे ने सिक्किम के राजा चोग्याल के अनुरोध पर ' सिक्किम ' नाम से एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी. हालांकि, १९७५  में सिक्किम के भारत में विलय के बाद भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे बाद में साल २०१० में हटाया गया। आज के समय में भी सिक्किम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक पसंदीदा शूटिंग डेस्टिनेशन बना हुआ है। 
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दिल पुकारे. आ रे आ रे. 
बादलों का डेरा : पूर्वी सिक्किम : यात्रा संस्मरण 
अभी न जा मेरे साथी : गतांक से आगे : १ 
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शक्ति. डॉ.भावना सुनीता रश्मि. 
सह :
शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति.
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गंगटोक : बादलों का डेरा : पर्वतों के ऊपर : फोटो : शक्ति. शालिनी प्रिया मधुप अनुभूति 


सिक्किम में घूमने के लिए सबसे प्रमुख और खूबसूरत जगहें गंगटोक, त्सोमगो झील, नाथुला दर्रा, युमथांग घाटी, और गुरुदोंगमार झील हैं।  सिक्किम अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़ों, प्राचीन मठों और खूबसूरत झीलों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यात्रा की बेहतर योजना बनाने के लिए सिक्किम के प्रमुख दर्शनीय स्थलों को चार अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है। 
पूर्वी सिक्किम : गंगटोक: यह सिक्किम की सुंदर और व्यवस्थित राजधानी है.ताशी व्यू पॉइंट से कंचनजंगा की चोटियों का दीदार कर सकते हैं और रोपवे केबल कार का आनंद ले सकते है। शाम के वक़्त सिक्किम के प्रमुख व व्यस्तम मार्ग महात्मा गाँधी मार्ग पर जरूर चहल कदमी करें, बड़ा अच्छा लगेगा। यहाँ आप एमजी यथा महा त्मागांधी मार्ग पर खरीदारी कर सकते हैं,
त्सोमगो झील : छंगू लेक  गंगटोक से लगभग ४० किमी दूर स्थित यह एक बेहद पवित्र और ऊंचाई पर बनी झील है. सर्दियों में यह पूरी तरह बर्फ से जम जाती है। 
त्सोमगो झील, जिसे लोकप्रिय रूप से छंगू लेक भी कहा जाता है, भारत के सिक्किम राज्य के पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत खूबसूरत और पवित्र हिमनदी झील है।यह राजधानी गंगटोक से लगभग ४०  किलोमीटर दूर गंगटोक-नाथुला राजमार्ग पर समुद्र तल से १२३१३ फीट ३७५३ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
मुख्य विशेषताएं और महत्व नाम का अर्थ : भूटिया भाषा में ' त्सोमगो ' का शाब्दिक अर्थ ' पानी का स्रोत ' होता है। त्सो यथा झील,मगो यथा शीर्ष। यह झील लंगतसेचू नदी का उद्गम स्थल भी है।पवित्रता और मान्यता की बात माने तो  स्थानीय सिक्किमी लोग, बौद्ध और हिंदू इस झील को बेहद पवित्र मानते हैं। प्राचीन समय में बौद्ध भिक्षु झील के बदलते पानी के रंगों को देखकर भविष्य की भविष्यवाणियां करते थे।
नाथुला दर्रा : भारत और चीन सीमा पर स्थित यह दर्रा अपनी रणनीतिक अहमियत और लुभावने बर्फीले नजारों के लिए जाना जाता है। यहाँ जाने के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। गंगटोक से नाथुला दर्रे  की सड़क मार्ग से दूरी लगभग ५४ से ५८  किलोमीटर है। पहाड़ी रास्ता होने के कारण टैक्सी या निजी वाहन से यहाँ पहुँचने में करीब तीन से  चार घंटे का समय लगता है।
प्राचीन चीनी रेशम मार्ग : नाथूला दर्रा समुद्र तल से लगभग १४१४० फीट ४३१०  मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह प्रसिद्ध पर्वतीय दर्रा भारत के सिक्किम राज्य और दक्षिण तिब्बत में चुम्बी घाटी को आपस में जोड़ता है। अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण यहां ऑक्सीजन का स्तर काफी कम रहता है और सर्दियों में भारी बर्फबारी देखने को मिलती है।  ऐतिहासिक रूप से यह प्राचीन चीनी रेशम मार्ग का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। 
नाथुला दर्रा : यात्रा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें परमिट चाहिए। नाथुला पास एक प्रतिबंधित सीमा क्षेत्र है, इसलिए यहाँ जाने के लिए सिक्किम पर्यटन विभाग का विशेष परमिट  लेना अनिवार्य है। यह परमिट गंगटोक में पंजीकृत ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से आसानी से मिल जाता है।
रास्ते के आकर्षण : जब आप गंगटोक से नाथुला जाते हैं, तो रास्ते में प्रसिद्ध त्सोमगो झील चंगू लेक  और बाबा हरभजन सिंह मंदिर भी आते हैं। ज्यादातर पर्यटक इन तीनों जगहों को एक ही दिन के टूर में कवर करते हैं।
कार्य दिवस का भी ख्याल रखें। नाथुला पास पर्यटकों के लिए हर हफ्ते केवल बुधवार से रविवार तक खुला रहता है। सोमवार और मंगलवार को यह पूरी तरह बंद रहता है। नागरिकता नियम के अंतर्गत  यहाँ केवल भारतीय नागरिकों को ही जाने की अनुमति है, विदेशी पर्यटकों का प्रवेश यहाँ वर्जित है। 

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दिल पुकारे. आ रे आ रे. 
बादलों का डेरा : पूर्वी सिक्किम : यात्रा संस्मरण 
अभी न जा मेरे साथी : गतांक से आगे : २  
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शक्ति डॉ.भावना सुनीता. 
सह :
शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति.
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बारिश : बादल : रुमटेक मठ : धुंध


ज्वेल थीफ : दिल पुकारे आ रे आ रे : शॉर्ट रील. 

बादल घिरे हुए थे। बारिश हो सकती थी। साल १९८५ का वर्ष था। बीच अक्टूबर का महीना। ठंड दस्तक देने लगी थी। मुझे याद है पूरी शांति के साथ हम ज्वेलथीफ़ फ़िल्म देख रहे थे। उनदिनों सिनेमा देखना ही मनोरंजन का मनभावन और सर्वोत्तम साधन था। सिक्किम की नैसर्गिक खूबसूरती हमारे आँखों के सामने परदे पर दिख रही थी।
और इसी बीच यह गाना दिल पुकारे आरे आरे सिनेमा स्क्रीन पर आने लगा था। किसी मोनेस्ट्री का दृश्य था। हम तो जैसे मंत्र मुग्ध थे। वर्ष १९७८ में जन्मी पहाड़, प्रकृति, प्रेम व पुनर्जन्म की अवधारणा उसी क्षण अब और भी पनपने लगी थी।
सिक्किम की प्राकृतिक खूबसूरती देखकर ही तब से ही पहाड़ प्रेम प्रकृति और पुनर्जन्म के सिलसिला के तहत हमने सिक्किम जाने का निर्णय ले लिया था। और गए भी २००६ में लेकिन २१ सालों के बाद। यह दूसरी बार पहाड़ों की यात्रा थी। कैसे भूल सकते हैं वह दिन ? दुबारा जाने का मौका २०१६ में मिला।
सच में हिमालय की गोद में बसा यह छोटा सा राज्य अपनी खूबसूरती से हर किसी को हैरान कर देता है। बर्फ से ढके पर्वत, नीले आसमान के नीचे चमकती झीलें और फूलों से भरी घाटी। चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली सर्वत्र फूल ही फूल। सिक्किम भारत का वनस्पति उद्द्यान जैसा ही है। याद है हमने सब प्रधान मोनेस्ट्री देख ली थी।
रुमटेक मठ : मैंने यह मठ दो बार २००६ तथा २०१६ में भ्रमण किया। इस जगह पर बादल आते जाते हैं।
याद कीजिए फिल्म ' ज्वेल थीफ' १९६७ का प्रसिद्ध गाना ' दिल पुकारे आ रे आ रे ' इस गाने की शूटिंग के दौरान अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री वैजयंतीमाला को एक ऐतिहासिक और खूबसूरत बौद्ध मठ के परिसर में गाते हुए दिखलाया गया है। तब से ही उस मोनेस्ट्री की ख़ोज थी हमें।
अगर लोगों की माने तो इस गाने को सिक्किम के गंगटोक में स्थित रुमटेक मठ में शूट किया गया था। जब १९६० के दशक में इस फिल्म की शूटिंग हुई थी, तब सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं बल्कि एक स्वतंत्र राजशाही ब्रिटेन का प्रोटेक्टोरेट हुआ करता था। मेरे सिक्किम आने जाने घुमने तक़ इस परिसर में कई तब्दलियां आई होगी। मैंने गाने के प्रत्येक फ्रेम को मिलाने की कोशिश की है।
डॉ. मधुप. 
ज्ञात है यहाँ मठों की भरमार है। लेकिन रुमटेक मठ सबसे अधिक लोकप्रिय है। सभी पर्यटक जाते ही हैं। हम भी गए थे। यह मठ पूर्वी सिक्किम की राजधानी गंगटोक से लगभग २३ से २४ किलोमीटर की दूरी पर, एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है जो ठीक गंगटोक शहर के सामने पड़ती है। 
रुमटेक मठ भारत के सिक्किम राज्य की राजधानी गंगटोक के पास स्थित एक बेहद प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बौद्ध विहार : गोम्पा है यह । इसे धर्मचक्र केंद्र के नाम से भी जाना जाता है। यह सिक्किम का सबसे बड़ा मठ है और तिब्बती बौद्ध धर्म के कर्मा काग्यू ब्लैक हैट संप्रदाय का एक प्रमुख केंद्र है।
इतिहास: मूल रूप से इसे १८ वीं शताब्दी के मध्य में बनाया गया था, लेकिन बाद में तिब्बत से आए १६ वें करमापा रंगजुंग रिगपे दोरजे ने १९६०  के दशक में इसका पुनर्निर्माण करवाया। यह उनका निर्वासनकालीन निवास स्थान भी बना।
मुख्य आकर्षण : इस मठ में एक गोल्डन स्तूप सोने का स्तूप  है, जिसमें १६ वें करमापा के अवशेष रखे गए हैं। इसके अलावा यहाँ पर दुर्लभ तिब्बती थंगा पेंटिंग्स और धार्मिक ग्रंथ भी सुरक्षित हैं।
वास्तुकला की यदि बात करें तो  यह मठ तिब्बत के प्रसिद्ध सूरफू मठ की हुबहू नकल रेप्लिका के रूप में बनाया गया है।



एन्चे मोनेस्ट्री सिक्किम अभी न जा मेरे साथी : प्रेम पर्वत : फोटो कोलाज :
शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति 

एन्चे मठ : भारत के सिक्किम राज्य की राजधानी गंगटोक में स्थित तिब्बती बौद्ध धर्म का एक बेहद पवित्र और प्रमुख धार्मिक स्थल है। शाब्दिक अर्थ: ' एन्चे ' का अर्थ एकांत मठ या 'एकांत मंदिर' होता है। 
इसे इस उद्देश्य से बनाया गया था कि इसके आसपास कोई अन्य निर्माण न हो और शांति बनी रहे।इतिहास की बात यदि करें तो माना जाता है कि लगभग २००  वर्ष पहले तांत्रिक कला के ज्ञाता और उड़ने की शक्ति रखने वाले प्रसिद्ध लामा द्रुपथोब कार्पो ने इस स्थान पर आकर एक छोटी सी कुटिया बनाई थी। बाद में, १९०९ - १९१०  में सिक्किम के शासक सिदकेओंग तुलकु के शासनकाल में इसका भव्य जीर्णोद्धार किया गया।
एन्चे मठ की वास्तुकला : यह मठ दिखने में एक खूबसूरत चीनी पैगोडा शैली जैसा लगता है। इसके मुख्य प्रार्थना कक्ष में भगवान बुद्ध, गुरु पद्मसंभव और लोकी शरिया की भव्य मूर्तियां व तांत्रिक भित्तिचित्र बने हुए हैं।
धार्मिक संप्रदाय तिब्बती : यह मठ तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे प्राचीन न्यिंगमा संप्रदाय  का एक प्रमुख केंद्र है। वर्तमान में यहाँ लगभग ९० भिक्षु निवास करते हैं।
प्रमुख त्योहार बतौर :  दो दिवसीय चाम नृत्य : यहाँ हर साल जनवरी के महीने में होने वाला दो दिवसीय चाम नृत्य धार्मिक मुखौटा नृत्य सबसे प्रसिद्ध है। इसमें भिक्षु रंग-बिरंगे पारंपरिक मुखौटे पहनकर संगीत की थाप पर नृत्य करते हैं।

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दिल पुकारे. आ रे आ रे. 
बादलों का डेरा : पश्चिम सिक्किम : पेलिंग यात्रा संस्मरण 
अभी न जा मेरे साथी : गतांक से आगे : ३   
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शक्ति डॉ.भावना सुनीता. 
सह :
शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति.
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 मन कहे मैं झूमूँ :
ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : पेलिंग : सिक्किम : फोटो : शक्ति. डॉ.भावना. 

पेलिंग भारत के पश्चिम सिक्किम जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। यह समुद्र तल से लगभग २१५० मीटर या ७०५० फीट की ऊंचाई पर बसा है। गंगटोक के बाद यह सिक्किम का दूसरा सबसे बड़ा पर्यटन स्थल माना जाता है।
पेलिंग मुख्य रूप से दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी, कंचनजंगा के सबसे नजदीकी और मनमोहक दृश्यों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मुख्य आकर्षण और घूमने की जगहें पेलिंग और उसके आसपास घूमने के लिए कई बेहतरीन सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं।
पेलिंग स्काईवॉक : यह भारत का पहला ग्लास स्काईवॉक है, जो पहाड़ों के बीच हवा में चलने का रोमांचक अनुभव देता है। इसके ठीक सामने बुद्ध के अवतार चेनरेज़िग की एक विशाल और भव्य मूर्ति स्थापित है।पेमायंगत्से मठ : यह सिक्किम के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण बौद्ध मठों में से एक है, जिसका निर्माण १७०५ में हुआ था।
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हरियाली और रास्ता : सिक्किम पेलिंग : बौद्ध मठ :सिद्धार्थ फोटो : डॉ.भावना 

राबडेंटसे खंडहर : यह ऐतिहासिक स्थल कभी सिक्किम साम्राज्य की दूसरी राजधानी हुआ करता था। आज यहाँ महल के खूबसूरत खंडहर और कंचनजंगा घाटी के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं।खेचेओपालरी झील : इसे एक पवित्र और इच्छा पूरी करने वाली झील माना जाता है। बौद्ध और हिंदू दोनों ही समुदायों में इसकी बड़ी धार्मिक मान्यता है।
कंचनजंगा जलप्रपात : यह पहाड़ों से तेजी से गिरता हुआ एक विशाल और खूबसूरत झरना है, जो पर्यटकों के बीच पिकनिक के लिए बेहद लोकप्रिय है।
सिंशोर पुल : यह सिक्किम का सबसे ऊंचा और एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा सस्पेंशन ब्रिज झूलता हुआ पुल है, जो दो गहरी पहाड़ियों को जोड़ता है।
यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी : पहुंचने का तरीका पेलिंग का सबसे नजदीकी मुख्य रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी और सबसे नजदीकी लोकप्रिय हवाई अड्डा बागडोगरा है, जो दोनों पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हैं।
वहां से आप प्राइवेट या शेयरिंग टैक्सी लेकर आसानी से पेलिंग पहुंच सकते हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय : पेलिंग जाने के लिए अक्टूबर से मई का महीना सबसे बेहतरीन माना जाता है। सर्दियों नवंबर से फरवरी में यहाँ कंचनजंगा के सबसे साफ नजारे दिखाई देते हैं और मौसम काफी ठंडा रहता है।
भाषा की बात करें तो यहाँ के स्थानीय लोग बहुत मिलनसार हैं। बातचीत के लिए यहाँ हिंदी और अंग्रेजी बड़े पैमाने पर समझी और बोली जाती है।
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दिल पुकारे.आ रे आ रे.
बादलों का डेरा : उत्तरी सिक्किम : युमथांग  घाटी ज़ीरो पॉइंट यात्रा संस्मरण 
अभी न जा मेरे साथी : गतांक से आगे : ४.    
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शक्ति डॉ.भावना सुनीता. 
सह :
शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति.
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फ़िल्म लोकेशंस 
सिक्किम की ख़ोज : मेरी  यात्रा २००६ : कला कृति पेंटिंग : शक्ति भावना सुनीता मधुप अनुभूति 

उत्तरी सिक्किम अपनी अचेतन प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़ों, पवित्र झीलों और खूबसूरत घाटियों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।यदि आप उत्तरी सिक्किम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित स्थान देखने योग्य और सबसे प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं 
गुरुडोंगमार झील : यह समुद्र तल से लगभग १७,८००  फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची झीलों में से एक है। बौद्धों, हिंदुओं और सिखों के लिए पवित्र मानी जाने वाली इस झील का साफ नीला पानी और चारों तरफ फैले बर्फीले पहाड़ आपको एक अलग दुनिया का अहसास कराएंगे।
युमथांग घाटी : इसे सिक्किम में फूलों की घाटी  भी कहा जाता है। वसंत ऋतु मार्च से मई के दौरान यहाँ सैकड़ों प्रकार के रंग-बिरंगे रोडोडेंड्रोन और जंगली फूल खिलते हैं। यहाँ आपको प्राकृतिक गर्म पानी के झरने भी मिलेंगे।
जीरो पॉइंट : युमथांग घाटी से आगे स्थित यह स्थान भारत का अंतिम नागरिक गंतव्य है। समुद्र तल से १५,३०० फीट से अधिक की ऊंचाई पर होने के कारण यहाँ साल के अधिकांश महीनों में भारी बर्फ देखने को मिलती है।
लाचेन और लाचुंग : ये उत्तरी सिक्किम के दो बेहद खूबसूरत और शांत पहाड़ी गांव हैं। लाचेन गुरुडोंगमार झील का बेस कैंप है, जबकि लाचुंग युमथांग घाटी और जीरो पॉइंट जाने वाले पर्यटकों के रुकने का मुख्य पड़ाव है।
चोपता घाटी और थांगू : लाचेन से गुरुडोंगमार झील के रास्ते में आने वाली ये दोनों घाटियाँ अपने अल्पाइन परिदृश्य और प्राचीन, अछूती प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती हैं।
नागा और भीम नाला झरना : लाचुंग के रास्ते में मुख्य सड़क के किनारे स्थित ये विशाल और आकर्षक झरने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
मत भूले आवश्यक यात्रा नियम और बजट उत्तरी सिक्किम चीन की सीमा के बेहद करीब स्थित है, इसलिए यहाँ जाने के लिए सुरक्षा कारणों से कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है

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दिल पुकारे.आ रे आ रे.
बादलों का डेरा : दक्षिण सिक्किम : यात्रा संस्मरण 
अभी न जा मेरे साथी : गतांक से आगे : ५ .    
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शक्ति डॉ.भावना सुनीता. 
सह :
शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति.
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दक्षिण सिक्किम अपनी धार्मिक भव्यता, हरी-भरी वादियों, चाय के बागानों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहाँ की सबसे प्रमुख और आकर्षक देखने योग्य जगहों की सूची नीचे दी गई है: प्रमुख दर्शनीय स्थल निम्न हैं . 
१.नामची : यह दक्षिण सिक्किम का जिला मुख्यालय है और पहाड़ों के बीच बसा एक खूबसूरत शहर है। सोलोफोक पहाड़ी पर स्थित इस भव्य परिसर में भगवान शिव की ८७ फीट ऊँची विशाल मूर्ति है। यहाँ भारत के चार प्रसिद्ध धामों जगन्नाथ, द्वारका, रामेश्वरम, बद्रीनाथ और १२ ज्योतिर्लिंगों की हूबहू प्रतिकृतियां बनाई गई हैं।
समद्रुपत्से पहाड़ी : इसे 'इच्छा पूर्ति पहाड़ी' भी कहा जाता है। यहाँ गुरु पद्मसंभव : गुरु रिनपोछे की १३५ फीट ऊँची दुनिया की सबसे विशाल सोने की परत वाली मूर्ति स्थापित है। 
नामची वनस्पति रॉक गार्डन : समद्रुपत्से के रास्ते में स्थित यह एक बेहद शांत पार्क है, जहाँ रंग-बिरंगे फूल और छोटे झरने देखने को मिलते हैं।
२.रावांगला : यह समुद्र तल से ७०००  फीट की ऊँचाई पर स्थित एक शांत और खूबसूरत पहाड़ी कस्बा है।बुद्ध पार्क : रावांगला का सबसे मुख्य आकर्षण है, जहाँ भगवान बुद्ध की १३०  फीट ऊँची तांबे और कांसे की भव्य प्रतिमा स्थापित है। साफ मौसम में इसके पीछे कंचनजंगा पर्वतमाला का नजारा मंत्रमुग्ध कर देता है।
रालोंग मठ : बौद्ध धर्म और तिब्बती संस्कृति को करीब से जानने के लिए यह एक बेहद शांत और पवित्र स्थान है।
३. टेमी चाय बागान : यह सिक्किम का एकमात्र चाय बागान है, जो करीब ५०० एकड़ के बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ की हरी-भरी ढलानों पर चलना और पहाड़ों के बैकड्रॉप में तस्वीरें लेना पर्यटकों को बेहद पसंद आता है। यहाँ आप एडवेंचर के लिए ज़िपलाइन और पैराग्लाइडिंग का आनंद भी ले सकते हैं।
४. तारे भीर : अगर आपको एडवेंचर और प्रकृति की ऊंचाइयों से प्यार है, तो यह जगह आपके लिए है। यह लगभग ३५००  फीट गहरी खाई के किनारे बनी एक लंबी पगडंडी  है, जहाँ बनी सीढ़ियों पर चलकर आप तीस्ता और रंगीत नदियों के संगम और पहाड़ों का शानदार नजारा देख सकते हैं।
५. ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास जगहें : मेनम हिल : अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं, तो मैनाम हिल के घने जंगलों के बीच से होकर गुजरने वाला ट्रैक बेहद रोमांचक अनुभव देता है।
बोरोंग : पहाड़ों के बीच बसा यह एक छोटा और बेहद खूबसूरत गाँव है, जहाँ से माउंट कंचनजंगा की चोटियों का अनोखा नजारा दिखता है।
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सज्जा व संपादन 
शक्ति : शालिनी रेनू रंजिता कंचन 
शक्ति : मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति.


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शक्ति सोनालिका आर्य डॉ दीना नाथ वर्मा : दृष्टि क्लिनिक : किसान बाग : बिहारशरीफ़ समर्थित. 
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ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा :पृष्ठ : ६.
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संपादन 
शक्ति.
श्रद्धा मधुप गुल अनु. 
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लघु वृत चित्र :
धारावाहिक : १. 
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जन्म दिवस : १५. ०७. १९४६. 

लघु वृत चित्र : फिल्म अभिनेता : शत्रुघ्न सिन्हा. 
शोध निर्माण : संपादन : आवाज़ : डॉ.मधुप. 
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कई सदियों से कई जन्मों से 
तेरे प्यार को तरसे मेरा मन 
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प्रकृति : प्रेम : पर्वत : पुनर्जन्म.
लघु वृत चित्र : धारावाहिक : २. 



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जन्म दिवस : १५.०७.१९४६. 

लघु वृत चित्र : फिल्म अभिनेता : शत्रुघ्न सिन्हा. 
शोध निर्माण : संपादन : आवाज़ : डॉ.मधुप. 
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सूना है पहाड़ों का आँगन आ जा
आ जा  के अधूरा है अपना मिलन  आ जा 
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कई सदियों से कई जन्मों से
प्रकृति : प्रेम : पर्वत : पुनर्जन्म.
लघु वृत चित्र : धारावाहिक : ३.
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शोध : निर्माण : संपादन : आवाज़ : डॉ.मधुप.
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लोगों ने कितना समझाया मैंने एक न मानी
मेरी मति गयी थी मारी यूँ न कोई मरे
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कई सदियों से कई जन्मों से
प्रकृति : प्रेम : पर्वत : पुनर्जन्म.
लघु वृत चित्र : धारावाहिक : ४.


फ़िर भी चाहा तुझे तू न समझा मुझे पत्थर की पूजा करके हारी मैं हारी.
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कई सदियों से कई जन्मों से
प्रकृति : प्रेम : पर्वत : पुनर्जन्म.
लघु वृत चित्र : धारावाहिक : ५ .



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सपनों से मुझे न यूँ बहला पायल के सोए गीत जगा
सूनसान है जीवन की बगिया सूना है पहाड़ों का आँगन
आ जा, आ जा के अधूरा है अपना मिलन कई सदियों से
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शीर्षक गीत संगीत  मन कहे मैं झूमूँ
फिल्म : एक बार फ़िर. 
१९८०.

सितारे : सुरेश ओबरॉय. दीप्ति नवल. प्रदीप वर्मा 
गाना : ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : मन कहे मैं झूमूँ 


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गीत : विनोद पांडे. संगीत : रघुनाथ सेठ. गायक  अनुराधा पौंडवाल भूपिंदर. 
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं 
https://www.youtube.com/watch?v=HlVBoK3tpZc&list=RDHlVBoK3tpZc&start_radio=1

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ये पौधे ये फूल ये हवाएं  : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन
शक्ति.नैना तनु स्मिता अनुभूति
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सूना है पहाड़ों का आँगन आ जा प्रकृति : प्रेम : पर्वत : पुनर्जन्म : शक्ति प्रिया अनु रितु गुल 
ओ प्रिया ओ प्रिया : झुक गया आसमान : प्रकृति : प्रेम : पर्वत : पुनर्जन्म : शक्ति नैना प्रिया मधुप अनु 
रुला के गया सपना मेरा बैठी हूँ कब हो सबेरा : शक्ति प्रिया अनु रितु गुल 

ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : मन कहे मैं झूमूँ : कोलाज : शक्ति प्रिया अनु रितु गुल 
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ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : कलाकृति पृष्ठ : ९ .
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संपादन 
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शिमला डेस्क 
शक्ति. तनु मंजिता स्वाति अनुभूति 
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अभी न जा मेरे साथी दिल पुकारे आ रे : सिक्किम : कलाकृति : शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप प्रिया भावना
आत्म दीपो भवः : तमसो माँ ' ज्योतिर्गमय ' कृति : शक्ति. विदिशा सीमा अनुभूति 

ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं : मन कहे मैं झूमूँ : कलाकृति  :
शक्ति.विदिशा. 
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ये पौधे ये पत्ते ये फूल ये हवाएं
: फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.  ---------
संपादन शक्ति. शबनम रंजिता सीमा लक्षिका जोशी *
चंद्रताल : मनाली : हिमाचल की एक झलक : कोलाज : शक्ति मंजू श्रीराम संजू अनुभूति 
* --------- समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११. --------- संपादन  शक्ति डॉ. रजनी स्मिता रेनू मंजू 
* शक्ति आरती अरुण झारखण्ड.
कलम के सिपाही की १४६ वीं जयन्ती 
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मुंशी प्रेमचन्द : 
 हिन्दी कथा साहित्य के अद्भुत चितेरे : 
उपन्यास सम्राट : कलम के सिपाही की १४६ वीं जयन्ती 

३१ जुलाई को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती देश भर में मनाई गई। उनके पैतृक गांव वाराणसी के लमही में विशेष साहित्यिक आयोजन हुए, जहां ' ठाकुर का कुआं ', ' कफन ' और ' पंच परमेश्वर ' जैसी उनकी प्रसिद्ध रचनाओं का नाट्य मंचन किया गया। 
विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई व उनकी कृति को याद किया गया ।
अठारहवीं सदी के उत्तरार्ध में साहित्य सर्जना के क्षेत्र में ऐसे तो कई विभूतियों का अवतरण इस धरती पर हुआ पर मुंशी प्रेमचंद जी का प्रादुर्भाव एक विशिष्ट घटना थी। 
पाश्चात्य साहित्य में समरसेट माॅम, मार्क ट्वेन,  चेखव, इवान तुर्गनेव, टालस्टाय, दोस्तोयेवस्की, डिकेन्स हेमिंग्वे आदि वहाँ नजर आते हैं तो भारतीय साहित्याकाश में प्रसाद, निराला, अज्ञेय, कौशिक, गुलेरी, शिवपूजन सहाय, सांकृत्यायन व उग्र राजा जी  आदि यहाँ नजर आते हैं। 
पर इनकी तो बात ही निराली थी। यह मुंशी जी का बहुआयामी व्यक्तित्व का करिश्मा है जिसे कोई स्पर्श करके आगे निकलता नहीं दिखाई देता है।
लमही के लाल धनपत राय श्रीवास्तव जो अजायब राय श्रीवास्तव के पुत्र हैं और सारा संसार जिन्हें साहित्य की दुनियाँ में कथा सम्राट / उपन्यास सम्राट / कलम के सिपाही के नाम से जानता है, के साहित्यिक जीवन यात्रा का आरम्भ एक उर्दू रचना से होती है। 
उपाधि व सम्मान : इनकी साहित्यिक विशिष्टताओं के कारण ही बंगला साहित्य के मुर्धन्य साहित्यकार शरत जी ने इन्हें  उपन्यास सम्राट की उपाधि से सम्मानित किया था और बड़े पुत्र अमृत राय ने इन्हें  कलम का सिपाही कहा था।
जिस कालखण्ड में इनके जीवन यात्रा की शुरूआत होती है, उर्दू फारसी और अंग्रेजी के प्रभाव का युग था। हिन्दी धीरे-धीरे निखर कर उभर रही थी। 
कथा साहित्य की यात्रा : नतीजतन इनके कथा साहित्य की यात्रा असरारे म आबिद ( उर्दू रचना ) से शुरू होती है जिसे देवस्थान रहस्य के नाम से धारावाहिक के रूप में प्रकाशित किया गया। दूसरी रचना हमखुर्मा व हमसवाब के नाम से प्रकाशित हुयी जो हिन्दी में प्रेमा के नाम से छप कर बाजार में आया। 
इनका पहला कहानी संग्रह सोजे वतन भी उर्दू में  ही आया जो नवाब राय के नाम से आया और इस रचना ने इनके जीवन में एक नये आयाम का सृजन किया। ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंधित करने के कारण अब इन्होने प्रेमचंद , यह नाम उनके प्रकाशक ने दिया था , के नाम से लिखना शुरू किया। हिन्दी की पहली कहानी बड़े घर की बेटी है जो आज भी अनुपम कृति है।
जहाँ तक इनके साहित्यिक यात्रा की शुरूआत उर्दू से होती है उसकी वजह इनकी पारिवारिक विरासत है। इनके घर में भी उर्दू फारसी बनारसी भोजपुरी और अंग्रेजी का चलन था। स्वयं एक जगह वे कहते हैं कि, * पढ़ी पढायी तो फारसी जाती है, उर्दू तो घलुए ( मुफ्त) में मिलती है। इनका रचना संसार बहुरंगी है। कथा कहानी उपन्यास नाटक आदि हर विधाओं को इन्होने बाखुबी लिखा और संसार को दिखाया। इनका साहित्य संसार कोरा आदर्शवाद, कल्पना, फंतासी,तिलस्म आदि का नहीं बल्कि आदर्शोन्मुख यथार्थवाद का है,करैले से कड़वे सच का है, जमीनी हकीकत का है, मानवीय वेदना और चेतना का है।
*
संपादन : शक्ति शालिनी  डॉ रजनी रेनू नीलम 
सज्जा : शक्ति सीमा रंजिता मंजिता अनुभूति 
आगे भी जारी 

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न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११ / २ .
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संपादन
शक्ति डॉ अनु स्मिता रितु मीना
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मोहम्मद रफ़ी.
वो जब याद आए बहुत याद आए.
२४.१२.२४. - ३१.०७.८०.
*
फिल्म : नीलकमल : १९६८ : मेरी पसन्द
*
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इतने युगों तक़ इतने दुखों को कोई सह न सकेगा
मुझसे है तेरा इकरार तुझको पुकारे मेरा प्यार.
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प्रकृति : प्रेम :पहाड़ : पुनर्जन्म
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शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
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संपादन  
शक्ति. शालिनी मानसी  रेनू भारती 
*
३. जुलाई. 
विश्व प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस
स्वच्छ संसार हरित संसार
*
डॉक्टर्स डे : १ जुलाई. 
सेवा सहयोग संपादन के लिए सम्मानित 


शक्ति. डॉ.शालिनी
*
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मुझे भी कुछ कहना है : तराने दिल के
*
शर्मीली : कल रहे न रहे मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके डोला बहार का


*
तूने देखा मुझे ऐसा कि तबीयत मचल गई
बर्ना तेरे सर की कसम आदमी मैं बुरा नहीं


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फ़िल्मी : राज कपूर वहीदा : तीसरी क़सम
सजनवां बैरी हो गए हमार.
*
*
जा के बसे परदेश सजनवां सौतन के भरमाए 
ना संदेश ...ना कोई खबरिया... रुत आए रुत जाए.
डूब गए हम बीच भँवर में... करके सोलह पार.
*
मुझे भी कुछ कहना है : तराने दिल के
*

आप की नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे
*
जी हमें मंजूर था आप का ये फैसला
मुझे भी कुछ कहना है : तराने दिल के
*
*
सुनाई देती है जिसकी धड़कन
तुम्हारा दिल या हमारा दिल है
*
मुझे भी कुछ कहना है : ये आसमां ये बादल


कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से
*
मुझे भी कुछ कहना है : बरखा से बचा लूँ


मुंबई : बारिश : साथ : प्रेम की झड़ी
*
मुझे भी कुछ कहना है : अज़ीब दास्ताँ है ये


कहाँ शुरू कहाँ ख़तम ये मंजिलें हैं कौन सी
*
मुझे भी कुछ कहना है : पहले तुम पहले तुम


दिल से तराने : फिल्म बॉबी : ऋषि डिंपल.
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दिल जो न कह सका : चलते चलते : आपने कहा : पृष्ठ : १३.
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संपादन
शक्ति.शालिनी प्रिया स्मिता गुल
*
२०.जुलाई.
मूलांक तिथि : २: शक्ति दिवस.
अवतरण दिवस.
*
*
©️®️
M.S.Media. Vidisha. 26.Water colour Painting
*
शक्ति. विदिशा.
अधिवक्ता. क़ानूनी संरक्षिका.
महाशक्ति मीडिया.
*
को उनके अवतरण दिवस की हम सभी देव शक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से हार्दिक ' अनंत ' ' शिव ' ' शक्ति ' शुभकामनायें.
*
*
हो आसमानों को छू ले तू ये दुआ हमारी है
अपनी उमर भी हमने तो हंस के तुम पर बारी है
*
तराने दृश्यम : शुभ जन्मदिन शक्ति
शक्ति. प्रिया सीमा सुनीता रंजीता.प्रस्तुति
*
कल्पना शक्ति. रचनात्मक


.अनु. नैनीताल
अवतरण दिवस. ४ जुलाई.
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दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३ / २
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संपादन
शक्ति. श्रद्धा सीमा रंजीता गुल
गंगोत्री डेस्क : उत्तरकाशी
*
साभार : मनभावन : सादगी : गायन.
शक्ति : धरना पाहवा : रियल्टी शो.
*

*
फ़िल्म : टॉवर हाउस : १९६२. 
सितारे : अजीत. शकीला. 
नगमें : ए मेरे दिले नादाँ तू गम से घबड़ाना 
एक दिन तो समझ लेगी दुनियाँ तेरा अफ़साना. 
संगीत : रवि. गीत : अशद भोपाली. गायिका : लता. 
*
रितु विष्ट : उत्तराखंड. चलो सजना जहाँ तक़ हवा चले


तराने दिल से : नज़र की जुवां से समझ जाइएगा


शक्ति गुल : अजी हमसे रूठ कर कहाँ जाइएगा. 
*

*
Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4. 
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
 Shakti : Kriti Art  Link :  English :  Page : 7
 Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9.
* 
English Section.
*
*
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting 
*
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Shakti Editorial Page : 2.
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 Chief Editor. 
  *



Shakti.  
Shakti : Dr.Anuradha.
Shakti.Garima.
Shakti : Madhvee. 
Shakti : Baisakhi. 
*
Executive Editor 
*
*
Darjeeling Desk
 * 
Editor : 
Shakti.Priya Tanu Sarvadhikari. 
 Manjita Seema. 
*
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Shakti Vibes : English Page : 3
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Editor 
Shakti. Dr. Anuradha Priya Madhvee Seema.
Inner Peace
*

*
©️®️M.S.Media.
Thought Related Photo : Shakti.Anu 

Water Colour Painting : Madhup : 98/ 26.
*
Speak truly but lovely and
personally
 believe you will be loved by all then only
*
Don't let  the behaviour of others destroy your inner peace 

Dr.Bhawana Madhvee Seema Anubhuti.
*
Setback to a Comeback.
*

*
Thought Related Photo : Shakti.Seema.
Water Colour Painting : MS* Media : / 26.
*
Setback to a Comeback.
*
to turn a setback into a comeback,
a mistake into a valuable lesson,
or an enemy into a friend
really only a great person can  accomplish 
such a difficult task into simple work with the legendary experiment 
Shakti.Dr.Sunita Ranjita Seema Priya.
*
Either Silence or Better Speaking
*
 ©️®️M.S.Media. Water  Colour Painting.
Madhup / 89 / 26.

*
Shakti. Shalini Priya Madhup Ritu. 
*
If your eyes are positive you  will love the world
and if your said words are sweet and positive 
the world will love you. 

*
Speak only when you feel  that your words are 
better than your silence.
*


*
thought related photo : 
Shakti. Ritu.
*
We are born to be good, real with 
words and actions not to be perfect.
*
Stars don't born by birth
Nor they never die by death.
*
---------
Shakti Editorial English : Writeups : 4. 
----------
Editor.
Shakti Priya.Madhavee.Seema Kajal
Darjeeling.Desk. 
*
My dreams Sparkling beams.
Poem.

Shakti. Priya.Darjeeling. 
*
 The golden rays of morning kissed my face, 
While I still rested in my peaceful place. 
I wandered through my dreams with quiet delight, 
Their gentle glow still shining warm and bright. 


for in its arms I longed a while :
Painting. MS* Media.
*
 That lovely dream refused to fade away, 
For in its arms I longed a while to stay. 
But sparkling beams awakened me at last, 
Though I wished those precious moments wouldn't pass.
*
Yet still I dream, 
and hope continues high.
poem.
*

Priya : Darjeeling :  Monastery : 
Photo Water Colour Painting
*
Oh, what a life—so busy like a bee,
From office work to home, no time feels free.
Each day repeats beneath the endless sky,
Yet still I dream, and hope continues high.

*
Editing : Decorative 
Shakti. Naina Manjita Anubhuti.
-------
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
----------
Shakti Editor 
Shakti. Shalini Madhvee Ranjita Seema
*
Aye Mere Vatan Ke Logo
Jara Yaad Karo Kurbani
26th of  July.2026.
Kargil Vijay Divas.
*
" Either I will return after unfurling the tricolour, 
or I will return wrapped in it, but I will definitely return." 
Captain.Vikram Batra

*
Harela. Dev Shakti Slide 
*
Harela being celebrated 
in the Kumaon region for
Agricultural Abundance :
Religious Connection: Environmental Movement

Nainital : CR / Shakti Deepti Bharti Beena Navin Joshi
Harela is a prominent Hindu folk festival celebrated primarily in the Kumaon region of Uttarakhand and parts of Himachal Pradesh. The word Harela translates to "Day of Green," symbolizing prosperity, a successful agricultural harvest, and environmental conservation.The festival takes place three times a year, but the Shravan Harela (celebrated on 16 July 2026) is the most socially significant, marking the arrival of the monsoon season and the start of the sowing cycle.
Editing : Shakti Lakshika Bhuwan Meena Anubhuti.
*
---------
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
----------
Nainital Desk.
Editor. Naina Bharti Deepti Lakshika Joshi
*
Sawan Ko Aaane Do : Mukteshwar : Photo : Shakti Meena Bharti Lakshika
Sawan : Shakti : Shiv : Om Namo Shivay : Photo : Dr.Suita Ranjita Seema Ritu.
a Mandakini Waterfall Trail : Harshil : Gangotri : Photo Collage : MS* Media
Nowadays Nainital During Monsoon : photo collage : Shakti Dipti Bharti Beena Lakshika
*
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Shakti : Kriti Art :  English :  Page : 7
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Editor.
Shakti. Manjita Seema Ranjita Anubhuti.


Ye  Paudhe Ye Patte Ye Phool Ye Hawaye : Kriti : Shakti. Vidisha.

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 Days Special : English : Page : 8.
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*
Day Special . July 6.
International Kissing Day
day Special July 6.

*
International Kissing Day or World Kiss Day 
is an official holiday celebrated each year on July 6.

*
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You Said It : Gratitude : Page : 9.
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Editor.
Shakti.Naina Priya.Seema Anubhuti.
*

*
Let the sacred rains of Sawan wash away all negativity of our mind 
Dr.Anu Madhup Seema Shalini.
*
Gratitude.
for Providing  Judicial Umbrella.
*
Shakti. Manjushree.
Chief Judicial Magistrate.
Shakti. Seema.Advocate.
Shakti.Jasika Singh.Advocate.
Shakti.Vidisha.Advocate.
*


Comments

  1. Personally I feel the blog page contains all sorts of interesting contents... and worth reading for everyone..
    Seema

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