Parvaton Ke Pedon Par Sham Ka Basera Hai : Dainik : Paryatan
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कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
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Parvaton Ke Pedon Par Sham Ka Basera Hai :
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दैनिक: पर्यटन विशेषांक.
आवरण पृष्ठ.
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* पत्रिका : पर्यटन विशेषांक. आवरण पृष्ठ. * |
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : आवरण पृष्ठ : शक्ति.डॉ.सुनीता प्रिया मंजिता अनुभूति. पत्रिका पर्वतों के पेड़ों पर में जाने पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. https://msmedia4you.blogspot.com/2026/05/parvaton-ke-pedon-par-sham-ka-basera.html * महाशक्ति विचार. * जिंदगी कैसी ये पहेली * चैन से जीने के लिए सब बैचैन है * जब जब तू मेरे सामने आए * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु सिंह : छाया. * इच्छा : कर्म : प्रार्थना और वरदान. * हम कर्म और प्रार्थना साथ करते हैं इच्छा और वरदान मांगते समय लोभी डाही की कहानी सदैव स्मृत रखें, प्रिय ! * कच्चे धागे के साथ जिसे बांध दिया जाए एक प्रेम के कच्चे धागे है जो उलझ कर बंधे रह जाते हैं दूसरी तरफ़ हमारे रिश्ते है जो ज़रा से उलझने पर टूट जाते हैं * किसी और के जैसा बनने का विचार छोड़ दें , क्योंकि अनुकृति बनने से बेहतर स्वयं के प्रयास से एक उत्कृष्ट कृति हो * छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : गुल : छाया. * जागो उठ कर देखो जीवन जोत उजागर है * भाव सँभालने से मन भी संभल जाता है या कहें पहले चंचल चितवन मन को संभालिये भाव अपने आप संभल जायेंगे * भावना के लिए मन , वेदना के लिए संवेदनशीलता चाहिए, ईश्वर को समझने के लिए श्रद्धा चाहिए, और इंसान को समझने के लिए सिर्फ इंसानियत के नजरिए की जरुरत है * बीते हुए लम्हों की कसक याद तो होगी कैसे भूले हम कि आज वही कल हमारे सामने है जिस कल की बेहद फिक्र हमें कल होती थी * जिंदगी एक नयी जंग है समस्त सांसारिक सीमाओं से परे द्वैत प्रेम की ऐसी अद्वैत भावना है मन का ऐसा शाश्वत बंधन है जो सम्यक चेहरे से उतर कर मधुर वाणी व व्यवहार से और भी प्रगाढ़ हो जाता है. * अधिकांशतः किसी भी द्वैत सम्बन्ध के मधुर व स्थायी रहने का एकमात्र आधार है व्यक्ति का विशेष से किसी भी उम्मीद,स्वार्थ का न होना. * टाइम्स मीडिया समर्थित. * शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २. * * महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता. प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९. संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून.दिवस :२. सम्पादित. शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा. * दुसरों की जय से पहले ख़ुद की जय करें * जीवन की यात्रा में प्रत्येक क्षण अपनी कृतज्ञता का भाव सम्यक साथ, प्रेम, विश्वास, व ईश्वरीय सीख के लिए अवश्य रखें * मन का संयम टूटा जाए. * ज़िन्दगी जीने का अर्थ तब आता है जब
ढ़ेर सारी मुश्किलें हो, परेशानियां आपको घेरे हुए हो और आप संयमित हो कर मुस्कुरा रहे हों * धैर्य कोई निष्क्रिय प्रतीक्षा नहीं है ; यह कार्य करते समय सही दृष्टिकोण बनाए रखने की शक्ति है. यह कठिन समय में विश्वास और शांत मन रखने की कला है. ⭐ ©️®️ M.S.Media. * इस दुनियाँ में जीना है तो सुन लो मेरी बात * सन्दर्भ विचार माया. शक्ति. नैना छाया * कस्में वादें प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या मन की कामनाओं के उन धागों को भी हमने हवा में झूलते देखें जो पेड़ों पर पूरी श्रद्धा के बंधे थे मगर अधूरे रहें * फिक्र में रहेंगे तो खुद जलेंगे बेफिक्र रहेंगे तो दुनिया जलेगी... * दर्पण को जब देखा * स्वयं की सबसे बड़ी ताक़त व पहचान स्वयं के विश्वास, करम धरम में ही है दूसरों की अपने लिए रायशुमारी में नहीं * विचार शक्ति @ रेनू मधुप रितु शालिनी * * प्रथम मीडिया समर्थित ------- शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ /३ ------- * * नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर. प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२. संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना:सितम्बर.दिवस : ९. * संपादन. शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा. * कोई गीत बजने दो * * सन्दर्भ विचार माया शक्ति.रेखा : देहरादून छाया. * रहिमन हीरा कब कहे लाख टका मोरा मोल अनमोल आसानी से मिल जाए तो उसका मोल लोग नहीं समझते हैं लेकिन क़ीमत उसे ही मालूम होती है जो बड़ी जतन से उसे हासिल करता है * ख़ुशी की वो रात आयी * न जाने कहाँ जाए हम बहते धारे है * जब जब तू मेरे सामने आए * स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित. ------- सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २. --------- शक्ति संरक्षण. ⭐ * प्रधान शक्ति संपादिका. शक्ति. कार्यकारी सम्पादिका. * * शक्ति. डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया. नैना देवी.नैनीताल डेस्क. प्रादुर्भाव वर्ष.१९७०. संस्थापना वर्ष : १९९६.महीना:जनवरी:दिवस : ६. * दृश्यम :फोटो. शक्ति सम्पादिका * शक्ति.नैना डॉ.अनु रितु मीना. नैनीताल डेस्क. * ------------
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
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संपादन
* शिमला डेस्क * * शक्ति. रेनू अनुभूति शालिनी मानसी * शक्ति अनुभाग
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** शक्ति. अनुभाग रेनू शब्द मुखर. जयपुर कवयित्री. लेखिका.प्रधान सम्पादिका * धूप का टुकड़ा हो तुम * धूप का टुकड़ा हो तुम मेरी जिंदगी की ढ़लती शाम में. तुम प्रेम हो या नहीं , यह मैं नहीं जानती, पर जब भी मेरे मन के आँगन में धूप उतरती है, एक कोना तुम्हारे नाम का चमकने लगता है सुनो मैं उस धूप को हथेलियों में भरकर दिनभर मुस्कुराती रहती हूँ * संपादन. सज्जा शक्ति. मानसी शालिनी मंजिता स्वाति.
* भाविका सन्दर्भ : माया स्वयं शक्ति डॉ. रजनी छाया * नहीं चाहिए़ महल अटारी बूढ़े बरगद की छांव चाहिए फिर से सखि मुझे गांव चाहिएं. बहुत हो चुकी दौड़ सभ्यता बस ट्रेनों की भीड़ खचाखच कंकर –पत्थर की किचकिच से दूर नदी और नाव चाहिए फिर से सखि. एडी घिस–घिस चूल्हा जलता तब घर में नन्हा छौना पलता फटी बिवाइयां चीख रही है हारे श्रमिक को ठहराव चहिए फिर से सखि. * संपादन सज्जा शक्ति मानसी कंचन मंजिता स्वाति. * शक्ति अनुभाग
* शक्ति शालिनी कवयित्री लेखिका प्रधान सम्पादिका महाशक्ति मीडिआ * ग़ज़ल संदर्भित ग़ज़ल माया स्वयं शालिनीछाया * मेरे वजूद में मिट्टी की, सादगी भी है, उसी के साथ फ़लक छूने की ख़ुशी भी है. मैं अपने दर्द को, अशआर में सजाती हूँ, मेरी ग़ज़ल में मोहब्बत की रौशनी भी है. हज़ार ज़ख़्म मिले हैं, मुझे ज़माने से, मगर ये सच है कि जीने की दिलकशी भी है. अपने हर ज़ख्म को, दिल में संभाले रखा है, इन्हीं के साथ सँवरने की आग-सी भी है. मैं एक लफ़्ज़ नहीं, ज़िन्दगी का तजुर्बा हूँ, मेरी कहानी में सदियों की ख़ामोशी भी है. कभी नदी-सी बही हूँ, कभी शजर-सी रही, मेरे मिज़ाज में ममता की ताज़गी भी है. ग़ज़ल मेरी अना में मोहब्बत की इक नमी भी है. संदर्भित ग़ज़ल : माया स्वयं शालिनी : छाया न ताज चाहती हूँ मैं, न नाम की दौलत, मेरे ज़मीर में बस सच की बंदगी भी है। जो मेरी राह में काँटे, बिछाकर बैठे थे, उन्हीं के फ़ैज़ से पाँवों में पुख़्तगी भी है। मैं आईनों की नहीं, अपने दिल की सुनती हूँ, मेरे किरदार में रूहों की चाँदनी भी है। जो मेरे दर्द की, गहराइयों में उतरेगा, पता चलेगा उसे कितनी बेबसी भी है। न जाने कितने अँधेरों से, लड़ के निकली हूँ, मेरे सफ़र में दुआओं की रहबरी भी है। न मैं ग़ुरूर में डूबी, न हार से टूटी, मेरी अना में मोहब्बत की इक नमी भी है। * सज्जा व संपादन शक्ति नीलम रेनू अनुभूति स्वाति * --------- तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४. ---------- * संपादन वाराणसी डेस्क. शक्ति. नीलम अनुभूति शालिनी प्रीति. * * * लघु कथा : फादर्स डे शक्ति रेनू शब्द मुखर सुबह से मोबाइल पर फादर्स डे की बधाइयों की बाढ़ आई हुई थी। अमित ने भी अपने पिता के साथ पुरानी तस्वीर फेसबुक पर लगाई और लिखा - 'मेरे हीरो, मेरी ताकत, मेरे आदर्श। हैप्पी फादर्स डे पापा! '
कुछ ही देर में सैकड़ों लाइक और ढेरों टिप्पणियां आ गईं। ' वाह ! क्या संस्कार हैं। '
'भाग्यशाली हैं आपके पापा।' अमितं मुस्कुरा रहा था। तभी उसकी पत्नी बोली, ' ......पिताजी का फोन आया था। ' 'तो उठा लेतीं।' अमित ने कहा 'अभी व्यस्त हूं, बाद में कर लूंगा।' शाम तक वह दोस्तों के साथ फादर्स डे सेलिब्रेशन में व्यस्त रहा। रात को जब फोन देखा तो पिता का एक वाट्सऐप मैसेज पड़ा था-' बेटा, फोटो बहुत अच्छी लगी। मुझे टैग तो करना नहीं आता, इसलिए यहीं लिख रहा हूं। आज पूरा दिन तेरे फोन का इंतजार किया। सोचा, शायद तू दो मिनट बात कर लेगा। कोई बात नहीं। खुश रहो।'
मैसेज पढ़ते-पढ़ते अमित की नजर दीवार पर लगी उस तस्वीर पर गई, जिसमें बचपन में वह पिता की उंगली थामे चलना सीख रहा था। उसने तुरंत फोन मिलाया। उधर से घंटी बजती रही...। लेकिन इस बार किसी ने फोन नहीं उठाया। शायद पिता सो चुके थे। या शायद रिश्तों के बीच खड़ी ' ऑनलाइन दुनिया ' फिर एक बार जीत गई थी।
* संपादन : शक्ति. शालिनी प्रीति रीता नीलम सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति शक्ति मूल आलेख. विश्व पर्यावरण दिवस : ५ जून ये पौधे ये फूल ये हवाएं मन कहे मैं झूमूँ * शक्ति. शालिनी रंजिता मंजिता अनुभूति. * एक दिन का दिखावा या जीवन भर का संकल्प : मन की बात सिर्फ एक दिन का दिखावा या जीवन भर का संकल्प..? विकास के नाम पर कटते जंगल, और जून की तपती धूप में एक पौधे का ढोंग...ज़रा सोचिए, हम आने वाली पीढ़ी को क्या सौंप रहे हैं...?" खोखली नीतियां, सुलगती धरती या दिखावे का पर्यावरण...?
विश्व पर्यावरण दिवस ५ जून पर केवल सोशल मीडिया पर फोटो खिंचवाने से पर्यावरण नहीं बचेगा..!
विनाश बनाम विकास का यह जो दौर चला है वह एक तरफ बसे-बसाए जंगलों को विकास की बलि चढ़ा दिया जाता है, और दूसरी तरफ ' माँ के नाम ' पर या अभियानों के नाम पर पौधे लगाने का नाटक होता है..! विडम्बना यह रही कि एक सत्र मैं भी एक संस्था के बैनर तले इस नाटक का हिस्सा बनी और पेड़ ख़रीदने के लिए न केवल सहयोग किया अपितु बाँटने में भी सशक्त भूमिका निभाई पर जब मुझसे पूछा गया कि आप नहीं ले जाएंगी पेड़..? तो मैंने संकोचवश दो पेड़ उठा लिया फिर सोचा इस भीषण गर्मी में जहाँ हम लोग दिन-भर ठंडा पानी पीते हैं, ए सी में रहते हैं फिर भी वातावरण का प्रकोप नहीं झेल पा रहे हैं तो क्या ये पौधे झेल पाएंगे..? बस..इसी अंतर्द्वंद्व के फलस्वरूप मैंने अपने वह आख़िरी पौधे भी दूसरों को दान कर दिए क्योंकि ऐसी भीषण गर्मी में मैं ख़ुद को बचा लूँ यही बहुत बड़ी बात है, पौधों की जिम्मेदारी लेना तब तक सही नहीं जब तक आपको यह पता न हो कि इन्हें लगाने का सही समय मानसून होता है और इनकी देखभाल बिल्कुल अपने बच्चों की तरह की जाती है और मैंने प्लांटिंग कभी सीखी ही नहीं..! हमारी मम्मी को प्लांटिंग आती है इसलिए मॉयके में घर के चारों तरफ की हरियाली में फोटोशूट कराने के बाद अक्सर लोग पूछते हैं, उत्तराखंड की तस्वीर है क्या..? मुझे पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़ ये सभी आकर्षित करते हैं और मैं चाहती हूँ कि सरकार इनके संरक्षण का कोई पुख़्ता इंतज़ाम करे..! पर सरकार का भी कुछ समझ नहीं आ रहा..कि इस जानलेवा गर्मी में हरे-भरे पेड़ ही हमारी जान बचा रहे हैं, फिर भी उन्हें काटने की अनुमति क्यों दी जा रही है..? और इस विषम वातावरण में पौधे लगवाने का ढोंग क्यों..? पर्यावरण संरक्षण ३६५ दिन का कर्तव्य न कि एक दिन का : सही समय, सही नीयत से पौधे लगाए जाएं, तभी विकास को गति मिलेगी क्योंकि भीषण जून की गर्मी में लगाए गए पौधे अक्सर सूख जाते हैं। पेड़ लगाने का सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक समय सावन मानसून का महीना है और पर्यावरण संरक्षण ३६५ दिन का कर्तव्य है..! पर्यावरण बचाना किसी एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि हमारी हर दिन की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए...! फोटो खिंचवाने के लिए नहीं, पौधे को जीवित रखने की ज़िम्मेदारी के साथ पेड़ लगाएं, कृपया दिखावा बन्द करें..! पेड़ केवल कागज़ों या नारों में नहीं, बल्कि हमारी ज़मीन पर हो नए पौधे लगाने से कहीं ज्यादा ज़रूरी है पुराने और घने पेड़ों को कटने से बचाना। आपके द्वारा निष्ठा से लगाये गए पौधे आपकी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षा प्रदान करेगी किन्तु हमारे-आपके लिए वर्तमान जंगलों बचाना अत्यधिक जरूरी है। बड़े-बड़े उद्योगपतियों को जंगल बेच दिए जा रहे हैं। जंगल काटकर इमारतें खड़ी की जा रही हैं। यह सब चिंतन का विषय है..! आप सभी से अनुरोध है कि नेताओं और प्रशासन से सवाल करें और विकास के नाम पर होने वाले अंधाधुंध पर्यावरण विनाश के खिलाफ आवाज़ उठाएं..याद रखें.. पेड़ केवल कागज़ों या नारों में नहीं, बल्कि हमारी ज़मीन पर और हमारी सांसों में होने चाहिए।" पर्यावरण की रक्षा एक दिन का शून्य-संकल्प नहीं, अपितु रोज़ का काम है..! कृपया जागरूक हों..पर्यावरण बचाएं.. स्वयं को सुरक्षित बनाएं..! प्रकृति बचेगी, तभी हम बचेंगे..! |
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संपादन : शक्ति माधवी सीमा रेनू प्रीति
सज्जा : शक्ति डॉ अनु रितु सीमा स्वाति
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : विशेषांक : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५.
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संपादन : शक्ति
शक्ति. मानसी कंचन रंजिता बीना जोशी
नैनीताल डेस्क
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
धारावाहिक यात्रा संस्मरण :नेपाल.
धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५ / १ .
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शक्ति.सोनी अनुभूति.
रितु मधुप.
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यात्रा संस्मरण : नेपाल.
धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५ / १.
शक्ति.सोनी रितु मधुप अनुभूति.
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अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती भारतीय शहर रक्सौल : ३१ मई। फोटो शक्ति सम्पादिका सोनी को रक्सौल के रास्ते बीरगंज, काठमांडू, पोखरा, मुक्ति नाथ, जनक पुर की यात्रा करनी थी । दिए गए सलाह के अनुसार रात पटना से बस की स्लीपर सेवा ली गई। किराये के ६०० रूपये मात्र ख़रच हुए। सुबह सुबह हम रक्सौल पहुंच गए थे।
राज्य बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िला, मुख्यालय रक्सौल की अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल के बीरगंज शहर से सटी हुई है। एक द्वार दिखेगा और एक सीमारेखा फिर देश परदेश। वीरगंज से हमने नेपाल काठमांडू के लिए साझेदारी वाली टैक्सी ली, जिसके लिए हमने सात सौ से आठ सौ रुपये खर्च किये। हमें काठमांडू पहुंचने में छ से सात घंटे लगे।
परिवहन : यह एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन स्टेशन कोड RXL है, जहाँ से दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद जैसे कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। आर्थिक महत्व यह भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार का सबसे व्यस्त और प्रमुख पारगमन मार्ग है।
नेपाल की व्यावसायिक राजधानी बीरगंज : दक्षिणी नेपाल के मधेस प्रांत के पर्सा जिले में स्थित एक प्रमुख महानगर और औद्योगिक शहर है। इसे नेपाल की व्यावसायिक राजधानी और भारत से नेपाल में प्रवेश करने का प्रमुख द्वार माना जाता है। सीमा और महत्व : यह शहर भारतीय राज्य बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल से सटा हुआ है। यह भारत और नेपाल के बीच सड़क मार्ग द्वारा व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है।
यह शहर नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग १३५ किलोमीटर या ८४ मील दक्षिण में स्थित है।
१८९७ में बीर शमशेर जंग बहादुर राणा द्वारा स्थापित इस शहर का प्राचीन नाम 'गहवा' था।
पर्यटन और आवागमन : भारत की ओर से नेपाल जाने वाले पर्यटकों और व्यापारियों के लिए यह सड़क मार्ग का सबसे आसान और सुगम रास्ता है।
बीरगंज में घूमने और देखने लायक प्रमुख जगहें :
घड़ियारवा पोखरी : घड़ियारवा पोखरी शहर के बीचों-बीच स्थित यह एक बेहद खूबसूरत और शांत तालाब। यहाँ आप शाम के समय सुकून से टहल सकते हैं और मछलियों को दाना खिला सकते हैं।
श्री गहवा माई मंदिर : यहाँ का सबसे प्रसिद्ध और आस्था का मुख्य केंद्र। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से पर्यटक भी माता के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं।
विशाल बजार और स्थानीय मार्केट्स : बीरगंज अपनी हलचल भरी मार्केट के लिए जाना जाता है। यहाँ से आप काफी किफायती दामों में नेपाली हस्तशिल्प, कपड़े, मसाले और सूखे मेवे खरीद सकते हैं।
घंटाघर : शहर के मुख्य चौराहे पर स्थित यह विशाल क्लॉक टावर शहर की एक प्रमुख पहचान है। मुझे याद है, साल २००७, जब हम बीरगंज में घंटा घर तक चहल कदमी करते चले गए थे। कुछेक कैलकुलेटर भी ख़रीदे थे जो आज भी कही पड़ी होगी। सोनी कह रही थी तब से अब तो बीरगंज काफ़ी बदल गया है, न ,काफी व्यावसायिक इमारतें बन गयी हैं ।
परसा राष्ट्रीय उद्यान : यदि आपको वाइल्डलाइफ पसंद है, तो बीरगंज से लगभग कुछ ही दूरी पर स्थित इस पार्क में हाथी, बाघ और कई प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं।
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टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग समर्थित
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गतांक से आगे : ५ / २
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल.
काठमांडू : कांची रे कांची रे प्रीत मेरी साची.
काठमांडू नेपाल की राजधानी अपनी प्राचीन संस्कृति, भव्य मंदिरों और हिमालय की तलहटी में बसी खूबसूरत वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ घूमने के लिए प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान मौजूद हैं।
पशुपतिनाथ मंदिर : बागमती नदी के तट पर स्थित यह भगवान शिव का सबसे पवित्र और प्राचीन मंदिर है। यहाँ की शाम की महाआरती और आध्यात्मिक माहौल बहुत शांति प्रदान करता है। पार्श्व में ही काशी की तरह श्मशान भी है जहाँ चिताएं जलती हैं।
बौद्धनाथ स्तूप : यह दुनिया के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है। तिब्बती बौद्ध धर्म का यह मुख्य केंद्र चारों तरफ से मठों और सुंदर प्रार्थना चक्रों से घिरा हुआ है। यहाँ शांति का अनुभव करने के लिए बौद्धनाथ स्तूप टूर बुक कर सकते हैं।
स्वयंभूनाथ स्तूप : इसे मंकी टेंपल' : बंदर मंदिर भी कहा जाता है। काठमांडू घाटी की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित इस जगह से पूरे शहर का शानदार नज़ारा दिखाई देता है।
दरबार स्क्वायर : नेपाल के प्राचीन राजाओं के राजसी महल और उत्कृष्ट नक्काशी वाले लकड़ी के मंदिर यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। इसमें ' काठमांडू दरबार स्क्वायर ' और ' पाटन दरबार स्क्वायर ' दोनों प्रमुख हैं। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। यहाँ प्राचीन मंदिर, मूर्तियां और पुराना शाही महल स्थित है
पाटन स्क्वायर : काठमांडू घाटी का सबसे पुराना शहर। यह अपनी बेहतरीन नेवारी वास्तुकला और लकड़ी की नक्काशी के लिए जाना जाता है
थामेल स्ट्रीट : अगर आप शॉपिंग, स्ट्रीट फ़ूड और काठमांडू की नाइटलाइफ़ का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह सबसे बेहतरीन जगह है। यहाँ कई कैफे और पब हैं।काठमांडू के इन प्रमुख और शानदार पर्यटन स्थलों की झलक देखें।
नारायणहिती पैलेस संग्रहालय : यह नेपाल के पूर्व शाही परिवार का महल था, जिसे अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।
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गतांक से आगे : ५ / ३
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल.
भक्तपुर : मध्ययुगीन स्वरूप और भव्य नेपाली वास्तुकला.
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल.
भक्तपुर : नेपाल की काठमांडू घाटी में स्थित एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है। यह काठमांडू से पूर्व में लगभग १३ किलोमीटर या ८ मील की दूरी पर स्थित है। नेपाल यात्रा में भक्तपुर अवश्य देखने योग्य शहर है। मुझे याद है घूमना बड़ा अच्छा लगा था।
'भक्तों का शहर ' कहलाने वाले इस स्थान को 'भादगाँव ' या ' ख्वोपा ' भी कहा जाता है। अपने मध्ययुगीन स्वरूप और भव्य वास्तुकला के कारण यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। शहर के संकरे और पारंपरिक रास्तों पर घूमने के दौरान आप कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को देख सकते हैं ।भक्तपुर दरबार स्क्वायर : यह एक खुला ऐतिहासिक प्रांगण है जहाँ १५ वीं सदी का पचपन्ना झ्याले दरबार ५५ खिड़कियों वाला महल और कलात्मक गोल्डन गेट मौजूद है।
न्यातपोल मंदिर : पाँच मंजिला यह पैगोडा शैली का मंदिर नेपाल का सबसे ऊंचा मंदिर है, जो अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है।
दत्तात्रेय स्क्वायर : यहाँ तीन मंजिला दत्तात्रेय मंदिर और लकड़ी की उत्कृष्ट नक्काशी वाली मयूर खिड़कियां पीकॉक विंडो आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। स्थानीय व्यंजन और कलाजूजू धौ भक्तपुर का यह खास मीठा दही भैंस के दूध से बनाया जाता है और यह स्थानीय संस्कृति का सबसे स्वादिष्ट हिस्सा है।
हस्तशिल्प और पॉटरी : यह शहर अपनी अद्भुत लकड़ी की नक्काशी, पत्थर की मूर्तियों और मिट्टी के बर्तनों के लिए देश भर में मशहूर है।
पर्यटन शुल्क : शहर में प्रवेश करने के लिए विदेशी पर्यटकों को प्रवेश शुल्क लगभग १५०० नेपाली रुपये देना होता है, जिसके पास के साथ आप यहाँ कई दिन बिता सकते हैं।भक्तपुर के ऐतिहासिक मंदिरों, नेवार वास्तुकला और प्रसिद्ध आकर्षक स्थलों की झलक देखने के लिए, आप भक्तपुर जरूर देखें:
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गतांक से आगे : ५ / ४
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल.
नेपाल के गोरखा जिले का
मनोकामना मंदिर : मनकामना मन्दिर :
मनोकामना मंदिर : मनकामना मन्दिर : नेपाल के गोरखा जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू शक्तिपीठ है, जो माता पार्वती के अवतार देवी भगवती को समर्पित है।
'मन' का अर्थ हृदय और 'कामना' का अर्थ इच्छा होता है, इसलिए यह माना जाता है कि यहाँ आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मुख्य विशेषताएं भौगोलिक स्थिति : यह मंदिर समुद्र तल से लगभग १३०२ मीटर ४ २७२ फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ से अन्नपूर्णा और मानसुलु पर्वतमालाओं के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।मंदिर वास्तुकला : यह मंदिर पारंपरिक पैगोडा शैली में बना हुआ है, जिसकी छतें सीढ़ीदार हैं।
केबल कार सुविधा : कैसे पहुंचें : मंदिर तक पहुँचने के लिए कुरीनटार से मनोकामना केबल कार की सुविधा उपलब्ध है, जो करीब १० से १५ मिनट में पहाड़ी की चोटी तक पहुँचा देती है।
मंदिर का इतिहास और गाथाएं : मान्यतादेवी मनकामना की कहानी : १७ वीं शताब्दी के गोरखा राजा राम शाह की रानी से जुड़ी है। माना जाता है कि रानी के पास दिव्य शक्तियां थीं, जिसके बारे में केवल उनके भक्त लखन थापा जानते थे।
राजा की मृत्यु के बाद जब रानी सती हो गईं, तो उन्होंने लखन थापा से वादा किया कि वे दोबारा प्रकट होंगी। कुछ समय बाद एक किसान को खेत जोतते समय एक पत्थर मिला जिससे दूध और खून बह रहा था। लखन थापा ने तांत्रिक अनुष्ठान कर उस स्थान पर पहला मंदिर बनवाया। परंपरा के अनुसार आज भी इस मंदिर के मुख्य पुजारी लखन थापा के वंशज मगर समुदाय ही होते हैं
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गतांक से आगे : ५ / ६
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल. पोखरा
अन्नपूर्णा रेंज में बसा यह शहर : नेपाल की पर्यटन राजधानी.
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फेवा झील अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला के नजारें : हम और तुम फोटो कोलाज : शक्ति प्रिया मधुप रितु सोनी |
पोखरा, काठमांडू के बाद नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत पर्यटन शहर है। हिमालय की गोद अन्नपूर्णा रेंज में बसा यह शहर अपनी शांत झीलों, साहसिक खेलों जैसे पैराग्लाइडिंग , और ट्रैकिंग मार्गों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
पोखरा नेपाल घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से नवंबर शरद ऋतु और मार्च से मई वसंत ऋतु के बीच का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, आसमान साफ रहता है और हिमालय की चोटियों अन्नपूर्णा रेंज के सबसे बेहतरीन नज़ारे देखने को मिलते हैं
यह नेपाल की अनौपचारिक पर्यटन राजधानी भी माना जाता है। नेपाल के पोखरा में देखने के लिए सबसे प्रमुख जगहें फेवा झील, सारंगकोट हिमालय के नज़ारों के लिए , विश्व शांति पैगोडा वर्ल्ड पीस पगोडा और डेविस फॉल्स हैं।
दर्शनीय स्थल : पोखरा में घूमने के लिए बेहतरीन और चुनिंदा जगहों की सूची यहाँ दी गई है जिसे आप याद रखें।
फेवा झील : दूसरी सबसे बड़ी झील : यह पोखरा की सबसे प्रसिद्ध और दूसरी सबसे बड़ी झील है। यहाँ आप बोटिंग का आनंद ले सकते हैं। झील के बीच में ताल बाराही मंदिर स्थित है।
पोखरा लेकसाइड : यह पोखरा का मुख्य टूरिस्ट हब है। यहाँ कैफे, पब, और होटलों की लंबी कतारें हैं। शाम के समय यहाँ घूमने का अलग ही मज़ा है।
सारंगकोट : यह जगह अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला और सूर्योदय का अद्भुत नज़ारा पेश करती है। यह पैराग्लाइडिंग का मुख्य लॉन्चिंग पॉइंट भी है।
विश्व शांति पैगोडा : फेवा झील के पार एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह स्तूप, सफेद रंग की एक खूबसूरत बौद्ध स्मारक है। यहाँ से पूरी पोखरा घाटी और हिमालय का शानदार दृश्य दिखाई देता है。डेविस फॉल्स और गुप्तेश्वर महादेव गुफा : डेविस फॉल्स एक अनोखा भूमिगत झरना है। इसी के ठीक सामने गुप्तेश्वर गुफा है, जिसके अंदर एक प्राकृतिक शिवलिंग और बहते हुए पानी का अद्भुत नजारा देखा जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय संग्रहालय : अगर आप पहाड़ों, पर्वतारोहियों और उनकी कहानियों में रुचि रखते हैं, तो यह संग्रहालय आपके लिए बेहतरीन है। इसमें एवरेस्ट और अन्य चोटियों से जुड़ी जानकारी रखी गई है।विंध्यवासिनी मंदिर : यह शहर के सबसे पुराने और पूजनीय मंदिरों में से एक है जो एक पहाड़ी पर स्थित है।
बेतनास झील : अगर आप भीड़भाड़ से दूर शांति चाहते हैं, तो फेवा झील से कुछ दूरी पर स्थित इस शांत और खूबसूरत झील पर ज़रूर जाएँ
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गतांक से आगे : ५ / ७
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है.
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : जनकपुर नेपाल.
राम सिया की यहीं है कहानी
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जनकपुर जनकपुरधाम नेपाल के मधेश प्रदेश में स्थित एक अत्यंत ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है, जो भारत के बिहार राज्य की सीमा के नजदीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह शहर प्राचीन मिथिला साम्राज्य की राजधानी था और राजा जनक का महल यहीं स्थित था।
सांस्कृतिक केंद्र : यह शहर आज भी अपनी समृद्ध मिथिला संस्कृति और कला मिथिला पेंटिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. जनकपुर के मुख्य दार्शनिक स्थल निम्न है।
धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व सीता की जन्मस्थली: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा जनक को इसी भूमि से हल चलाते समय सीता जानकी प्राप्त हुई थीं.
राम-सीता विवाह स्थल : भगवान श्रीराम ने इसी पावन नगरी में शिव का धनुष तोड़कर सीता से विवाह रचाया था.
जानकी मंदिर : यह जनकपुर का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण है. इसे ' नौलखा मंदिर ' भी कहा जाता है, क्योंकि सन १९११ में इसके निर्माण में ₹ ९ लाख खर्च हुए थे. इस भव्य मंदिर का निर्माण टीकमगढ़ की महारानी वृषभानु कुमारी ने करवाया था.
विवाह मंडप : जानकी मंदिर के पास ही स्थित वह स्थान है जहाँ माना जाता है कि भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था.
पवित्र तालाब पोखर : जनकपुर को 'तालाबों का शहर' भी कहा जाता है. यहाँ कई पवित्र तालाब हैं जैसे गंगा सागर, धनुष सागर और राम सागर, जहाँ शाम को भव्य आरती होती है.भाषा और संस्कृतियहाँ की मुख्य भाषा मैथिली है, लेकिन भारत से निकटता और धार्मिक जुड़ाव के कारण यहाँ हिंदी, भोजपुरी और अवधी बोलने और समझने वाले लोगों की भी बहुत बड़ी संख्या में हैं।
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गतांक से आगे : ७.
नेपाल : शोध शक्ति : यात्रा संस्मरण. मुक्तिनाथ
शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता रितु.
दार्जलिंग डेस्क.
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| मुक्तिनाथ:लक्ष्मी और सरस्वती कुंड में पवित्र स्न्नान करती शक्ति : शक्ति.डॉ.सुनीता भारती रितु |
यह तीर्थ ३८०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है शायद विश्व का सबसे ऊँचा श्री लक्ष्मी नारायण का मंदिर है।
१०८ जल की नल धाराओं ,२ पवित्र तालाब यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड : और यहाँ १०८ जल कुंड तथा धुँए की धारा हैं,जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। हिमालय से निसृत होती १०८जल कुंड धाराओं के ठंडे जल में स्नान करना एक खास आध्यात्मिक अनुभव है।
मुक्तिनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है मंदिर परिसर के पीछे १०८ जल की हिमालय निःसृत नल धाराएं, व २ पवित्र कुंड यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड है। कहते है १०८ जल की नल धाराओं ,२ पवित्र तालाब यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड में स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पाप धुलते हैं। शक्ति ने कितने लोगों को पंक्ति बद्ध होते हुए इस जल धारा में स्न्नान करने के पश्चात लक्ष्मी व सरस्वती कुंड में डूबकी लगाते हुए देखा था।
सर्द पानी। बर्फानी हवा। पानी में प्रवेश करते ही लगे की शरीर जम जाए। लेकिन लक्ष्मी नारायण के हांथों से मुक्ति जो पानी है। और यहाँ हिमाचल के ज्वाला देवी की तरह जमीन से निकली प्राकृतिक गैस की ज्वाला भी है।
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साभार शॉर्ट रील : नेपाली भाषा : दार्जलिंग डेस्क
मुक्तिनाथ मंदिर मा हवा चले सर....र.. र ..आ
संपादन : शक्ति. डॉ.रजनी सुनीता प्रीति रंजीता.
सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति.
संपादन : शक्ति. डॉ रजनी सुनीता सीमा रंजीता
सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति.
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आगे जारी क्रमशः
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : शक्ति सफ़रनामा : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन.
डॉ. अनु स्वाति प्रिया अनुभूति
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : शक्ति सफ़रनामा : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन.
डॉ. अनु स्वाति प्रिया अनुभूति
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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संपादन
शक्ति.लक्षिका रितु प्रिया अनुभूति.
दार्जलिंग डेस्क
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| तेरे हाँथों में है मेरी डोरी जैसे कच्चे धागे से मैं बंधा आया ऐसे : कोलाज : शक्ति रितू मधुप सोनी अनुभूति |
स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.
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समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
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संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी रेनू रितु लक्षिका जोशी
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पशुपति नाथ मंदिर : काठमांडू : संध्या आरती : दृश्यम |
प्रस्तुति : शक्ति.सोनी प्रिया मधुप रितु.
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समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : पृष्ठ : ११.
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संपादन
शक्ति. मंजू सीमा रंजिता अर्चना
शिमला डेस्क.
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माल रोड : रिज पर शिमला समर फेस्टिवल की धूम :
शक्ति डॉ. अनुराधा अनुभूति मधुप शालिनी.
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| माल रोड : रिज पर शिमला समर फेस्टिवल की धूम : शक्ति मंजु स्वाति अर्चना अनुभूति |
शिमला / संवाद सूत्र। साल २०११ या २०१२ था। हम रिज पर थे। समर फेस्टिवल चल रहा था। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हर साल मई या जून के महीने में आयोजित होने वाला सबसे बड़ा और प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव है। इस बार भी अंतरराष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल ८ जून से १२ जून तक हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक द रिज और मॉल रोड पर आयोजित किया जा रहा है। यह पांच दिवसीय भव्य उत्सव हर साल राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए मनाया जाता है। यह पाँच दिनों तक चलने वाला भव्य आयोजन होता है, जो शहर के ऐतिहासिक रिज मैदान और माल रोड पर मनाया जाता है।
शिमला समर फेस्टिवल के मुख्य आकर्षण : महानाटी इस महोत्सव की शुरुआत सैकड़ों महिलाओं द्वारा पारंपरिक हिमाचली पोशाक जैसे 'दाठू' और 'रेजटा' पहनकर 'महानाटी' पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत करके की जाती है, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है।
स्टार नाइट्स और संगीत: बॉलीवुड के मशहूर गायकों और क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा लाइव प्रस्तुतियां दी जाती हैं।
शिमला स्वाद महोत्सव: इस दौरान लेडीज़ पार्क में विशेष फूड स्टॉल लगाए जाते हैं, जहाँ हिमाचली धाम और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाया जा सकता है।
प्रतियोगिताएं : युवाओं और पर्यटकों के लिए गायन, फैशन शो, फिल्म फेस्टिवल, और 'वॉयस ऑफ माउंटेन्स' जैसी रोमांचक प्रतियोगिताएं होती हैं, जिनमें भारी नकद इनाम दिए जाते है।
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शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
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संपादन.
शक्ति शालिनी मानसी कंचन बीना जोशी
नैनीताल डेस्क.
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२९. ६. २६.
कबीर दास जयंती
०२.०६.२६.
शक्ति. विशेष.जन्म दिन.
शक्ति.सीमा सिंह.कोलकोता डेस्क.
कला,अंग्रेजी अनुभाग सम्पादिका.महाशक्ति मीडिया.
को उनके अवतरण दिवस की हम सभी देव शक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से हार्दिक अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें.
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तराने दृश्यम : शुभ जन्मदिन.शक्ति.
शक्ति. शालिनी डॉ.सुनीता रंजीता अनीता प्रस्तुति.
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आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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संपादन
शक्ति. डॉ.अनु स्मिता प्रिया मधुप
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शक्ति धुन : पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए
तराने : जिधर जाइएगा हमें पाइएगा
मृगनयनी : शॉर्ट रील : तुम परदेशी किधर से आए
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तराने ओ .....तुमसे दूर रहके हमने जाना प्यार क्या है
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दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
मृगनयनी : शॉर्ट रील : तुम परदेशी किधर से आए
आते ही मेरे दिल में समाए
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तराने दिल से : शक्ति. गुल सक्सेना : मुंबई.
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जिधर देखती हूँ उधर तुम ही तुम हो
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माय हार्ट इज बीटिंग कीप्स ऑन रीपीटिंग.
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लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो शायद फिर इस जन्म में मुलाक़ात हो न हो
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तेरा जाना दिल के अरमानों का लूट जाना
कोई देखे बन के तकदीरों का मिट जाना
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साभार शक्ति.गुल सक्सेना : महाराष्ट्र : गायन : *
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आपने कहा : पृष्ठ : १३ / ३
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डॉ. रजनी
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बहुत ही शानदार कवरेज और बहुत ही अनुकरणीय
/ प्रशंसनीय कार्य। सामाजिक परिवर्तन हेतु सार्थक प्रयास।
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Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
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Editor.
Shakti. Lakshika Bani Madhavee Priya.
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Neem Karoli Baba :
Nainital : CR : Kainchi Dham Foundation Day June 15 is just a day head. As I remember I visited this spiritual place thrice or four times. Kainchi Dham is nestled in the Kumaon Hills near Nainital, Uttarakhand. This ashram was established in 1964.
Neem Karoli Baba : Neem Karoli Baba, affectionately is called Maharaj-ji by his known followers. He had been a revered 20th-century Indian mystic, yogi, and lifelong devotee of the Hindu deity Hanuman.
Born as Lakshman Narayan Sharma around 1900 in Uttar Pradesh, he is universally celebrated for his philosophy of unconditional love, selfless service (seva), and devotion.
He did not give formal religious discourses ; instead, he taught through simple, everyday actions and deeply personal interactions.
Pratishtha Diwas/Foundation Day : The major annual celebrations for Neem Karoli Baba center around June 15th (Pratishtha Diwas/Foundation Day) and the Mahasamadhi anniversary (typically observed in September). Devotees also commemorate his physical birth anniversary.
Silicon Valley Connections : Baba has been very popular amongst us .High-profile figures like Steve Jobs and Mark Zuckerberg made pilgrimages to Kainchi Dham during critical turning points in their lives, crediting the ashram with restoring their vision and purpose.
It serves as the primary spiritual epi center for global devotees. It is the most heavily attended event, drawing well over a hundred thousand devotees for special bhandaras (feasts) and prayers.
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Column Editing : Shakti Latika Ravi Rashmi Dr. Naveen Joshi
Decorative Shakti. Mansi. Seema Manjita Bhuwan Joshi.
Neem Karoli Baba :
Forthcoming Kainchi Dham Foundation Day : June 15 :
Shakti. Dr. Sunita Madhup Seema Priya
Devotees moving towards Baba Neem Karoli Ashram : Nainital : Collage photo Shakti Dr. Sunita Bharti Dr. Naveen Bina Joshi
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Shakti Safarnama : Photo Gallery : English : Page : 6.
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Shakti Dr. Anuradha Manju Smita Shreya.
Mandi Desk : Himachal
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Days Special : Wishes : English : Page : 8.
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Day Special
World Environment Day
5.6.26.
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Birthday Hearty Wishes.
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on 07.06.26.
many many happy
returns of the day
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Gaurav Dhal. Jaipur.
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Hum Media Family
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Shakti. Shalini Naina Madhup Sunita.
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Resident Nainital.
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Our Heartiest Wishes for
her Birthday. on 4.6.26.
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Dr. Naveen Latika Lakshika Bhuvan Joshi
Nainital.
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English Section.
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting
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Shakti Safarnama : Photo Gallery : English : Page : 6.
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Shakti Dr. Anuradha Manju Smita Shreya.
Mandi Desk : Himachal
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| at the highest suspension Chimchim bridge in Kaja : Collage : Shakti Manju Shreeram Sanju Shreya. |






























































बहुत ही शानदार कवरेज और बहुत ही अनुकरणीय/प्रशंसनीय कार्य।सामाजिक परिवर्तन हेतु सार्थक प्रयास
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