Parvaton Ke Pedon Par Sham Ka Basera Hai : Patrika : Paryatan

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कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
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Parvaton Ke Pedon Par Sham Ka Basera Hai  :
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पत्रिका आवरण पृष्ठ. 
पर्यटन विशेषांक. 
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है :आवरण पृष्ठ : शक्ति.डॉ.सुनीता प्रिया मंजिता अनुभूति. 
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दैनिक आवरण पृष्ठ. 
पर्यटन विशेषांक. 
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दैनिक पर्वतों के पेड़ों पर में जाने पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.

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फोर स्क्वायर होटल : रांची :समर्थित.
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चला जाए सपनों के आगे कहीं : आवरण पृष्ठ : महाशक्ति मीडिया. पर्यटन विशेषांक. शक्ति. कृति. 
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विषय सूची :पृष्ठ :०.

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अनुभाग : १.
शक्ति जीवन दर्शन.

आवरण पृष्ठ :०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
हम चार जीवन : दर्शन : पृष्ठ :०.
नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १.
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अनुभाग : २.
शक्ति सम्पादकीय.
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
 पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५. 
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अनुभाग : ३.
शक्ति दृश्यम.
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ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
  पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है  : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है  : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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अनुभाग : ४.
तुम्हारे लिए.
समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
  : शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति. 
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शक्ति : महाशक्ति दर्शन : पृष्ठ : १ / १ .
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नैना देवी डेस्क. नैनीताल. 
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महाशक्ति.नैना देवी डेस्क.
नैनीताल.प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई.दिवस :४.
*
सम्पादित.
शक्ति.नैना डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
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महाशक्ति विचार.
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जिंदगी कैसी ये पहेली 
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सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति .प्रिया मधुप  : छाया.
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जीवन के विस्तार में परिवर्तन और परित्याग
अपरिहार्य है इसलिए जीवन के अनमोल क्षण का
सम्मान, और इसकी समझ रखें
*
कबीर दास

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय.
*
त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम
देवो न जानाति, कुतो मनुष्य:
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चैन से जीने के लिए सब बैचैन है. 
*
जब जब  तू मेरे सामने आए. 
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सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : रितु : सिंह : छाया. 
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इच्छा : कर्म : प्रार्थना और वरदान 
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हम कर्म और प्रार्थना साथ करते हैं 
इच्छा और वरदान मांगते समय लोभी डाही की कहानी 
सदैव  स्मृत रखें, प्रिय !
*
कच्चे धागे के साथ जिसे बांध दिया जाए 

एक  प्रेम के कच्चे धागे है जो उलझ कर बंधे रह जाते हैं 
दूसरी तरफ़ हमारे रिश्ते है जो ज़रा से उलझने पर टूट जाते हैं 
*
किसी और के जैसा बनने का विचार छोड़ दें ,
क्योंकि अनुकृति बनने से बेहतर  स्वयं के प्रयास से एक उत्कृष्ट कृति हो
*
विचार @ शक्ति. डॉ.अनु रितु मधुप अनुभूति 
*
छू कर मेरे मन को तूने 
*

*
सन्दर्भ : विचार : माया.
शक्ति : गुल  : छाया. 
*
भाव सँभालने से मन भी संभल जाता है 
या कहें पहले चंचल चितवन मन को संभालिये 
भाव अपने आप संभल जायेंगे 
*
जागो उठ कर देखो 
जीवन जोत उजागर है 

भावना के लिए मन ,
वेदना के लिए संवेदनशीलता चाहिए,
ईश्वर को समझने के लिए श्रद्धा चाहिए,
और इंसान को समझने के लिए सिर्फ इंसानियत के नजरिए की जरुरत है 
*
जिंदगी एक नयी जंग है 

सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी है
कर्म के अग्निपथ पर चलना, बढ़ना, गिरना 
और संभलना हर गिरावट के बाद फिर से खड़ा हो जाना
ही कर्मयोगी की पहचान है 
*
बीते हुए लम्हों की कसक याद तो होगी 

कैसे भूले हम कि आज वही कल हमारे सामने है 
जिस कल की बेहद फिक्र हमें कल होती थी
*
मुश्किलों से कह दो उलझा न करें हमसे 
हमें हर हाल में जीने का हुनर आता है 
*
 समस्त सांसारिक सीमाओं से परे द्वैत प्रेम की ऐसी अद्वैत भावना है  
मन का  ऐसा शाश्वत बंधन है जो सम्यक चेहरे से उतर कर मधुर वाणी व व्यवहार से और 
भी प्रगाढ़ हो जाता है 
*
अधिकांशतः किसी भी द्वैत सम्बन्ध  के मधुर व स्थायी रहने 
का एकमात्र आधार है व्यक्ति का विशेष से किसी भी उम्मीद,स्वार्थ का न होना. 
*
शोध विचार @ शक्ति नैना प्रिया मधुप अनुभूति

*
टाइम्स मीडिया समर्थित. 

*
शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
*

*
महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून.दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
दुसरों की जय से पहले
ख़ुद की जय करें
*

*
विचार : सन्दर्भ  माया 
शक्ति रितु : छाया.
*
जीवन की यात्रा में प्रत्येक क्षण अपनी कृतज्ञता का भाव सम्यक साथ, प्रेम, विश्वास, व
ईश्वरीय सीख के लिए अवश्य रखें
*
मन का संयम टूटा जाए.
*
जीने का अर्थ तब समझ में आता है जब ज़िन्दगी में ढ़ेर सारी मुश्किलें हो, परेशानियां आपको घेरे हुए हो
और आप संयमित,संतुलित हो कर मुस्कुरा रहे हों

*
धैर्य कोई निष्क्रिय प्रतीक्षा नहीं है ;
यह कार्य करते समय सही दृष्टिकोण बनाए रखने की शक्ति है.
यह कठिन समय में विश्वास और शांत मन रखने की कला है.
©️®️
M.S.Media.
*
इस दुनियाँ में जीना है 
तो सुन लो मेरी बात. 
*
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सन्दर्भ विचार माया
शक्ति. नैना छाया 
*
कस्में वादें प्यार वफ़ा सब 
बातें हैं बातों का क्या 

मन की कामनाओं  के उन धागों को हवा में झूलते देखें  
जो पेड़ों पर पूरी श्रद्धा के बंधे थे  मगर अधूरे रहें 
*
फिक्र में  रहेंगे तो खुद जलेंगे 
बेफिक्र रहेंगे तो दुनिया जलेगी... 

*
दर्पण को जब देखा 


*
सन्दर्भ विचार माया
शक्ति. रितु सिंह  छाया 
*
स्वयं की सबसे बड़ी ताक़त व पहचान 
स्वयं के  विश्वास , करम धरम में ही है दूसरों की अपने लिए रायशुमारी में नहीं 

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विचार शक्ति @ रेनू मधुप रितु शालिनी 

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प्रथम मीडिया समर्थित. 
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शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ /३ 
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नर्मदा  डेस्क. जब्बलपुर 
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना:सितम्बर.दिवस : ९.
*
संपादन.
शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा
*

*
सन्दर्भ विचार माया
शक्ति.रेखा : देहरादून  छाया 
*

रहिमन हीरा कब कहे लाख टका मेराे मोल. 
*
 अनमोल आसानी से मिल जाए तो  उसका मोल लोग नहीं समझते हैं 
लेकिन क़ीमत उसे ही मालूम होती है जो बड़ी जतन से उसे हासिल करता है 
*
ख़ुशी की वो रात आयी 
*

*
सन्दर्भ विचार माया
शक्ति.रितु  छाया 

*

ख़ुशी तीन चीजों से मिलती है जो पीड़ा देकर  चला गया  उसे भूल जाए 
जो वर्तमान में है बेहतर है उसका आनंद लें  
 कल क्या होगा अच्छा ही होगा उस पर विश्वास रखें 
*
विचार @ शक्ति रितु मधुप गरिमा श्रद्धा 
*
न जाने कहाँ जाए हम बहते धारे है
*
कभी गलती से चलते चलते गिर जाए तो स्वयं उठ जाए
लोग पैसे उठाते हैं इंसान नहीं
*
जब जब तू मेरे सामने आए 


*
सन्दर्भ विचार माया
शक्ति. नैना   छाया 
*
मन की शांति की पहली शर्त है स्वयं को
अनावश्यक चिंता व नकारात्मक लोगों से दूर रखना
*
विचार @ शक्ति.नैना.अनीता श्रद्धा जया
*

*
स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.
-------
सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २.
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शक्ति संरक्षण 
*
 प्रेरणा 
*
मातृ शक्ति.
*
शब्द : कर्म : संस्कार 
*

प्रधान आचार्या 
निर्मला सिन्हा. 
*
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
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*
प्रधान शक्ति संपादिका.
नव शक्ति.
श्यामली : डेस्क : शिमला.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९.
संस्थापना वर्ष : २०००. महीना : जनवरी. दिवस :५.
*

*
शक्ति.शालिनी रेनू.
नीलम 'अनुभूति '.


शक्ति.
कार्यकारी सम्पादिका.
*

*
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
नैना देवी.नैनीताल डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७०.
संस्थापना वर्ष : १९९६.महीना : जनवरी : दिवस : ६.
*
दृश्यम :फोटो.
शक्ति सम्पादिका
*

शक्ति.नैना डॉ.अनु रितु मीना.
नैनीताल डेस्क.
*
सम्पादकीय शक्ति समूह
नवशक्ति विचार
पृष्ठ : २.
*

दुनिया में दान जैसी कोई संपत्ति नहीं
ईर्ष्या और लालच जैसा कोई और रोग नहीं
अच्छे स्वभाव जैसा कोई आभूषण नहीं
और संतोष जैसा कोई सुख नहीं.
*
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
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संपादन.
शिमला डेस्क.


शक्ति.रेनू अनुभूति शालिनी मानसी.
*
शक्ति. अनुभाग
*

*
शक्ति. अनुभाग

रेनू शब्द मुखर.
जयपुर
कवयित्री. लेखिका.प्रधान सम्पादिका
*
धूप का टुकड़ा हो तुम
*

*
भाविका सन्दर्भ : माया
शक्ति रितु सिंह छाया
*
धूप का टुकड़ा
हो तुम मेरी
जिंदगी की ढ़लती शाम में.
तुम प्रेम हो या नहीं ,
यह मैं नहीं जानती,
पर जब भी मेरे मन के आँगन में धूप उतरती है,
एक कोना तुम्हारे नाम का चमकने लगता है
सुनो मैं उस धूप को हथेलियों में
भरकर दिनभर मुस्कुराती
रहती हूँ
*
संपादन. सज्जा
शक्ति. मानसी शालिनी मंजिता स्वाति.
*

शक्ति.
डॉ.रजनी परमार.
कवयित्री. लेखिका.एंकर पटना दूरदर्शन.
*
भाविका
*
नहीं चाहिए़ महल अटारी.


*
भाविका सन्दर्भ : माया
स्वयं शक्ति डॉ. रजनी छाया
*
नहीं चाहिए़ महल अटारी
बूढ़े बरगद की छांव चाहिए
फिर से सखि मुझे गांव चाहिएं.
बहुत हो चुकी दौड़ सभ्यता
बस ट्रेनों की भीड़ खचाखच
कंकर –पत्थर की किचकिच से दूर
नदी और नाव चाहिए
फिर से सखि.
एडी घिस–घिस चूल्हा जलता
तब घर में नन्हा छौना पलता
फटी बिवाइयां चीख रही है
हारे श्रमिक को ठहराव चहिए
फिर से सखि.
*
संपादन सज्जा
शक्ति. मानसी कंचन मंजिता स्वाति.
*
*
शक्ति अनुभाग *
शक्ति. शालिनी
कवयित्री लेखिका प्रधान सम्पादिका
महाशक्ति मीडिआ
*
ग़ज़ल
*
उसी के साथ फ़लक छूने की ख़ुशी भी है.



संदर्भित ग़ज़ल माया
स्वयं शालिनीछाया
*
मेरे वजूद में मिट्टी की, सादगी भी है,
उसी के साथ फ़लक छूने की ख़ुशी भी है.

मैं अपने दर्द को, अशआर में सजाती हूँ,
मेरी ग़ज़ल में मोहब्बत की रौशनी भी है.

हज़ार ज़ख़्म मिले हैं, मुझे ज़माने से,
मगर ये सच है कि जीने की दिलकशी भी है.

अपने हर ज़ख्म को, दिल में संभाले रखा है,
इन्हीं के साथ सँवरने की आग-सी भी है.

मैं एक लफ़्ज़ नहीं, ज़िन्दगी का तजुर्बा हूँ,
मेरी कहानी में सदियों की ख़ामोशी भी है.

कभी नदी-सी बही हूँ, कभी शजर-सी रही,
मेरे मिज़ाज में ममता की ताज़गी भी है.

*
मेरी अना में मोहब्बत की इक नमी भी है.


संदर्भित ग़ज़ल : माया.
स्वयं शालिनी : छाया.

न ताज चाहती हूँ मैं, न नाम की दौलत,
मेरे ज़मीर में बस सच की बंदगी भी है.

जो मेरी राह में काँटे, बिछाकर बैठे थे,
उन्हीं के फ़ैज़ से पाँवों में पुख़्तगी भी है.

मैं आईनों की नहीं, अपने दिल की सुनती हूँ,
मेरे किरदार में रूहों की चाँदनी भी है.

जो मेरे दर्द की, गहराइयों में उतरेगा,
पता चलेगा उसे कितनी बेबसी भी है.

न जाने कितने अँधेरों से, लड़ के निकली हूँ,
मेरे सफ़र में दुआओं की रहबरी भी है.

न मैं ग़ुरूर में डूबी, न हार से टूटी,
मेरी अना में मोहब्बत की इक नमी भी है.

सज्जा व संपादन
शक्ति नीलम रेनू अनुभूति स्वाति
*

शक्ति. रश्मि नारायण आर्य डॉ. अमरदीप नारायण.नालंदा बोन एंड स्पाइन सेंटर बिहार शरीफ समर्थित 
*
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तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
----------
*
संपादन
वाराणसी डेस्क.


शक्ति.
नीलम अनुभूति शालिनी प्रीति.
*
*
लघु कथा : फादर्स डे
शक्ति रेनू शब्द मुखर

सुबह से मोबाइल पर फादर्स डे की बधाइ‌यों की बाढ़ आई हुई थी। अमित ने भी अपने पिता के साथ पुरानी तस्वीर फेसबुक पर लगाई और लिखा - 'मेरे हीरो, मेरी ताकत, मेरे आदर्श। हैप्पी फादर्स डे पापा! ' कुछ ही देर में सैकड़ों लाइक और ढेरों टिप्पणियां आ गईं। ' वाह ! क्या संस्कार हैं। ' 'भाग्यशाली हैं आपके पापा।' अमितं मुस्कुरा रहा था।
तभी उसकी पत्नी बोली, ' ......पिताजी का फोन आया था। '
'तो उठा लेतीं।' अमित ने कहा
'तीन बार आया था। शायद बात करना चाहते थे।'
'अभी व्यस्त हूं, बाद में कर लूंगा।'
शाम तक वह दोस्तों के साथ फादर्स डे सेलिब्रेशन में व्यस्त रहा। रात को जब फोन देखा तो पिता का एक वाट्सऐप मैसेज पड़ा था-' बेटा, फोटो बहुत अच्छी लगी। मुझे टैग तो करना नहीं आता, इसलिए यहीं लिख रहा हूं। आज पूरा दिन तेरे फोन का इंतजार किया। सोचा, शायद तू दो मिनट बात कर लेगा। कोई बात नहीं। खुश रहो।' मैसेज पढ़ते-पढ़ते अमित की नजर दीवार पर लगी उस तस्वीर पर गई, जिसमें बचपन में वह पिता की उंगली थामे चलना सीख रहा था। उसने तुरंत फोन मिलाया।
उधर से घंटी बजती रही...। लेकिन इस बार किसी ने फोन नहीं उठाया। शायद पिता सो चुके थे। या शायद रिश्तों के बीच खड़ी ' ऑनलाइन दुनिया ' फिर एक बार जीत गई थी।
*
संपादन : शक्ति. शालिनी प्रीति रीता नीलम
सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति





शक्ति मूल आलेख.
विश्व पर्यावरण दिवस : ५ जून
ये पौधे ये फूल ये हवाएं मन कहे मैं झूमूँ
*
शक्ति.
शालिनी रंजिता मंजिता अनुभूति.
*
एक दिन का दिखावा या जीवन भर का संकल्प : मन की बात सिर्फ एक दिन का दिखावा या जीवन भर का संकल्प..? विकास के नाम पर कटते जंगल, और जून की तपती धूप में एक पौधे का ढोंग...ज़रा सोचिए, हम आने वाली पीढ़ी को क्या सौंप रहे हैं...?" खोखली नीतियां, सुलगती धरती या ​दिखावे का पर्यावरण...? विश्व पर्यावरण दिवस ५ जून पर केवल सोशल मीडिया पर फोटो खिंचवाने से पर्यावरण नहीं बचेगा..! ​विनाश बनाम विकास का यह जो दौर चला है वह एक तरफ बसे-बसाए जंगलों को विकास की बलि चढ़ा दिया जाता है, और दूसरी तरफ ' माँ के नाम ' पर या अभियानों के नाम पर पौधे लगाने का नाटक होता है..! विडम्बना यह रही कि एक सत्र मैं भी एक संस्था के बैनर तले इस नाटक का हिस्सा बनी और पेड़ ख़रीदने के लिए न केवल सहयोग किया अपितु बाँटने में भी सशक्त भूमिका निभाई पर जब मुझसे पूछा गया कि आप नहीं ले जाएंगी पेड़..?
तो मैंने संकोचवश दो पेड़ उठा लिया फिर सोचा इस भीषण गर्मी में जहाँ हम लोग दिन-भर ठंडा पानी पीते हैं, ए सी में रहते हैं फिर भी वातावरण का प्रकोप नहीं झेल पा रहे हैं तो क्या ये पौधे झेल पाएंगे..?
ये पौधे ये फूल ये हवाएं : फोटो : शक्ति रितु सिंह
बस..इसी अंतर्द्वंद्व के फलस्वरूप मैंने अपने वह आख़िरी पौधे भी दूसरों को दान कर दिए क्योंकि ऐसी भीषण गर्मी में मैं ख़ुद को बचा लूँ यही बहुत बड़ी बात है, पौधों की जिम्मेदारी लेना तब तक सही नहीं जब तक आपको यह पता न हो कि इन्हें लगाने का सही समय मानसून होता है और इनकी देखभाल बिल्कुल अपने बच्चों की तरह की जाती है और मैंने प्लांटिंग कभी सीखी ही नहीं..!
हमारी मम्मी को प्लांटिंग आती है इसलिए मॉयके में घर के चारों तरफ की हरियाली में फोटोशूट कराने के बाद अक्सर लोग पूछते हैं, उत्तराखंड की तस्वीर है क्या..? मुझे पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़ ये सभी आकर्षित करते हैं और मैं चाहती हूँ कि सरकार इनके संरक्षण का कोई पुख़्ता इंतज़ाम करे..!
पर सरकार का भी कुछ समझ नहीं आ रहा..कि इस जानलेवा गर्मी में हरे-भरे पेड़ ही हमारी जान बचा रहे हैं, फिर भी उन्हें काटने की अनुमति क्यों दी जा रही है..? ​और इस विषम वातावरण में पौधे लगवाने का ढोंग क्यों..?
पर्यावरण संरक्षण ३६५ दिन का कर्तव्य न कि एक दिन का : सही समय, सही नीयत से पौधे लगाए जाएं, तभी विकास को गति मिलेगी क्योंकि भीषण जून की गर्मी में लगाए गए पौधे अक्सर सूख जाते हैं। पेड़ लगाने का सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक समय सावन मानसून का महीना है और पर्यावरण संरक्षण ३६५ दिन का कर्तव्य है..!
पर्यावरण बचाना किसी एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि हमारी हर दिन की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए...! फोटो खिंचवाने के लिए नहीं, पौधे को जीवित रखने की ज़िम्मेदारी के साथ पेड़ लगाएं, कृपया दिखावा बन्द करें..!
पेड़ केवल कागज़ों या नारों में नहीं, बल्कि हमारी ज़मीन पर हो : नए पौधे लगाने से कहीं ज्यादा ज़रूरी है पुराने और घने पेड़ों को कटने से बचाना। आपके द्वारा निष्ठा से लगाये गए पौधे आपकी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षा प्रदान करेगी किन्तु हमारे-आपके लिए वर्तमान जंगलों बचाना अत्यधिक जरूरी है।
बड़े-बड़े उद्योगपतियों को जंगल बेच दिए जा रहे हैं। जंगल काटकर इमारतें खड़ी की जा रही हैं। यह सब चिंतन का विषय है..! आप सभी से अनुरोध है कि ​नेताओं और प्रशासन से सवाल करें और विकास के नाम पर होने वाले अंधाधुंध पर्यावरण विनाश के खिलाफ आवाज़ उठाएं..याद रखें..
पेड़ केवल कागज़ों या नारों में नहीं, बल्कि हमारी ज़मीन पर और हमारी सांसों में होने चाहिए।" पर्यावरण की रक्षा एक दिन का शून्य-संकल्प नहीं, अपितु रोज़ का काम है..! कृपया जागरूक हों..पर्यावरण बचाएं.. स्वयं को सुरक्षित बनाएं..! ​ प्रकृति बचेगी, तभी हम बचेंगे..!
*
संपादन : शक्ति माधवी सीमा रेनू प्रीति
सज्जा : शक्ति डॉ अनु रितु सीमा स्वाति


*
ए एंड एम मीडिया अधिकृत 
----------
 पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : विशेषांक :  धारावाहिक आलेखपृष्ठ : ५. 
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संपादन.
शक्ति. मानसी कंचन रंजिता बीना जोशी
नैनीताल डेस्क  
*

 पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है. 
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल. 
   धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५ / १.
*

*
शक्ति.सोनी अनुभूति. 
   रितु मधुप.  
*
अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती भारतीय शहर रक्सौल : ३१ मई। फोटो शक्ति सम्पादिका सोनी को रक्सौल के रास्ते बीरगंज, काठमांडू, पोखरा, मुक्ति नाथ, जनक पुर की यात्रा करनी थी । दिए गए सलाह के अनुसार रात पटना से बस की स्लीपर सेवा ली गई। किराये के ६०० रूपये मात्र ख़रच हुए। सुबह सुबह हम रक्सौल पहुंच गए थे।
पटना से रक्सौल यातायात के लिए ढ़ेर सारी लग्जरी बसें उपलब्ध हैं, जिसका किराया ६०० रूपये है बताते चले पटना से रक्सौल की दूरी २१० किलोमीटर है जो आप छ से सात घंटे में पूरे कर सकते है।
रक्सौल से जुड़े जुड़वाँ शहर वीर गंज से आपको मात्र १४० किलोमीटर का फासला और तय करना होगा आप हिन्दू धर्म मतालम्बी राष्ट्र नेपाल की वादियों में होंगे।
बिहार राज्य के पूर्वी चंपारण ज़िला, मुख्यालय रक्सौल की अंतरराष्ट्रीय सीमा नेपाल के बीरगंज शहर से सटी हुई है। वीरगंज से हमने नेपाल काठमांडू के लिए साझेदारी वाली टैक्सी ली जिसके लिए हमने सात सौ से आठ सौ रुपये खर्च किये। हमें काठमांडू पहुंचने में छ से सात घंटे लगे।
परिवहन की सुविधा : यह एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन स्टेशन कोड RXL है, जहाँ से दिल्ली, कोलकाता और हैदराबाद जैसे कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं। आर्थिक महत्व के लिए यह भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार का सबसे व्यस्त और प्रमुख पारगमन मार्ग है , जहाँ से पर्यटन उद्योग पनपते है ।
वीरगंज की सुबह : फोटो : शक्ति सोनी 
नेपाल की व्यावसायिक राजधानी बीरगंज : दक्षिणी नेपाल के मधेस प्रांत के पर्सा जिले में स्थित एक प्रमुख महानगर और औद्योगिक शहर है। इसे नेपाल की व्यावसायिक राजधानी और भारत से नेपाल में प्रवेश करने का प्रमुख द्वार माना जाता है।
सीमा और महत्व : यह शहर भारतीय राज्य बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल से सटा हुआ है। यह भारत और नेपाल के बीच सड़क मार्ग द्वारा व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है।
बीरगंज : की ऐतिहासिकता : यह शहर नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग १३५ किलोमीटर या ८४ मील दक्षिण में स्थित है।
१८९७ में बीर शमशेर जंग बहादुर राणा द्वारा स्थापित इस शहर का प्राचीन नाम ' गहवा ' था।
पर्यटन और आवागमन : भारत की ओर से नेपाल जाने वाले पर्यटकों और व्यापारियों के लिए यह सड़क मार्ग का सबसे आसान और सुगम रास्ता है।
बीरगंज में घूमने और देखने लायक प्रमुख जगहें :
घड़ियारवा पोखरी : घड़ियारवा पोखरी शहर के बीचों-बीच स्थित यह एक बेहद खूबसूरत और शांत तालाब। यहाँ आप शाम के समय सुकून से टहल सकते हैं और मछलियों को दाना खिला सकते हैं।
श्री गहवा माई मंदिर : यहाँ का सबसे प्रसिद्ध और आस्था का मुख्य केंद्र। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से पर्यटक भी माता के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं।
विशाल बजार और स्थानीय मार्केट्स : बीरगंज अपनी हलचल भरी मार्केट के लिए जाना जाता है। यहाँ से आप काफी किफायती दामों में नेपाली हस्तशिल्प, कपड़े, मसाले और सूखे मेवे खरीद सकते हैं।
घंटाघर : शहर के मुख्य चौराहे पर स्थित यह विशाल क्लॉक टावर शहर की एक प्रमुख पहचान है। मुझे याद है, साल २००७, जब हम बीरगंज में घंटा घर तक चहल कदमी करते चले गए थे। कुछेक कैलकुलेटर भी ख़रीदे थे जो आज भी कही पड़ी होगी। सोनी कह रही थी तब से अब तो बीरगंज काफ़ी बदल गया है, न ,काफी व्यावसायिक इमारतें बन गयी हैं ।
परसा राष्ट्रीय उद्यान : यदि आपको वाइल्डलाइफ पसंद है, तो बीरगंज से लगभग कुछ ही दूरी पर स्थित इस पार्क में हाथी, बाघ और कई प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं।

*
टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग समर्थित
*

 गतांक से आगे : ५  / २  
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है. 
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल. 
काठमांडू : कांची रे कांची रे प्रीत मेरी साची. 

शक्ति शिव भक्ति : बागमती काठमांडू और पशुपति : कोलाज : शक्ति.सोनी रितु मधुप अनुभूति

कांची रे कांची रे प्रीत मेरी साची : १९७१ :  फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा और काठमांडू : साल १९७१। देव आनंद की ब्लॉकबस्टर फिल्म ' हरे रामा हरे कृष्णा ' फिल्म प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म की मुख्य शूटिंग काठमांडू, नेपाल के विभिन्न प्रतिष्ठित स्थानों पर की गई थी।
फिल्म में काठमांडू के मुख्य दर्शनीय स्थलों जैसे पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू दरबार स्क्वायर और शहर की सड़कों को प्रमुखता से दिखाया गया है।
फिल्म से जुड़ी खास बातें कहानी यह है कि एक भारतीय भाई अपनी खोई हुई बहन ज़ीनत अमान को तलाशने नेपाल जाता है, जो वहां जाकर हिप्पियों के एक समूह में शामिल हो जाती है। लोकप्रिय स्थान: फिल्म में दिखाई गई काठमांडू की लोकेशंस स्थलों ने १९७० के दशक में नेपाल में पर्यटन को बहुत बढ़ावा दिया था।
स्टारकास्ट की बात करें तो इसमें देव आनंद के साथ ज़ीनत अमान और मुमताज़ मुख्य भूमिकाओं में थे।
एक अत्यंत लोकप्रिय मधुर गाना कांची रे कांची रे प्रीत मेरी साची काठमांडू  में फिल्म अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री मुमताज़ पर शूट किया गया था। यह प्रेम से जुड़ा कालजयी गीत संगीत जो आज भी हमारे मन को भाता है। 
काठमांडू नेपाल की राजधानी अपनी प्राचीन संस्कृति, भव्य मंदिरों और हिमालय की तलहटी में बसी खूबसूरत वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ घूमने के लिए प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान मौजूद हैं।
हम अर्थात मैं, शक्ति समूह सुनीता, राशि रतनिका साल २००७ में नेपाल पोखरा के भ्रमण पर थे । इसके बाद हमारी शक्ति समूह सम्पादिका रितु सिंह साल २०२५, व शक्ति सोनी संजय साल २०२६ में नेपाल के जनकपुर, काठमांडू, पोखरा, मुक्तिधाम की ख़ोज के लिए निकले थे।
इस्कॉन मंदिर : राजधानी काठमांडू : हे राम : मुझे याद है जब हम वहां गए थे तो जगजीत सिंह का गाया हुआ भजन हे राम बज रहा था। हम मंत्रमुग्ध थे। बैठे हुए भजन सुन रहे थे। हमने वहां दीर्घ समय बिताया था।
नेपाल का प्रमुख इस्कॉन मंदिर राजधानी काठमांडू में बुद्धनीलकंठ नारायण के पास स्थित है। 'श्री श्री राधागोविन्द हरि ' को समर्पित यह मंदिर भक्ति, योग और शाकाहार का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।
मुख्य विशेषताएं और जानकारी ,स्थानांतरण / स्थान के बारे में बात करें तो यह मंदिर शिवपुरी पर्वत की तलहटी में और पवित्र बिष्णुमती नदी के पास स्थित है। पूजित देव यहाँ मुख्य रूप से श्री श्री राधागोविन्द हरि, श्री श्री गौर सुंदर, नितई सुंदर, जगन्नाथ बलदेव, सुभद्रा और भगवान नरसिम्हा की पूजा की जाती है।विशेष आयोजन में यहाँ हर साल भव्य रूप से जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों स्थानीय और विदेशी श्रद्धालु भाग लेते हैं।
याद रखें दर्शन का समय : मंदिर सुबह मंगला आरती से लेकर रात को शयन आरती तक खुला रहता है। इस्कॉन के बारे में अधिक जानकारी व अपडेट्स के लिए आप इस्कॉन डिज़ायर ट्री या इस्कॉन की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
यदि आप दर्शन करने की योजना बना रहे हैं या मंदिर के समय के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो क्या आप मंदिर के त्योहारों जैसे जन्माष्टमी या आसपास रुकने के स्थानों के बारे में जानना चाहते हैं जानकारी पहले इकट्ठी कर लें ?
और क्या देखें : पशुपतिनाथ मंदिर : बागमती नदी के तट पर स्थित यह भगवान शिव का सबसे पवित्र और प्राचीन मंदिर है। यहाँ की शाम की महाआरती और आध्यात्मिक माहौल बहुत शांति प्रदान करता है। पार्श्व में ही काशी की तरह यहाँ भी श्मशान है जहाँ चिताएं सदैव जलती रहती हैं
बौद्धनाथ स्तूप : यह दुनिया के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है। तिब्बती बौद्ध धर्म का यह मुख्य केंद्र चारों तरफ से मठों और सुंदर प्रार्थना चक्रों से घिरा हुआ है। यहाँ शांति का अनुभव करने के लिए बौद्धनाथ स्तूप टूर बुक कर सकते हैं।
स्वयंभूनाथ स्तूप : इसे मंकी टेंपल : बंदर मंदिर भी कहा जाता है। काठमांडू घाटी की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित इस जगह से पूरे शहर का शानदार नज़ारा दिखाई देता है। यहाँ बौद्ध धर्म का एक प्रमुख और प्राचीन मंदिर / स्तूप है। कुछ कुछ मुझे याद है हल्की चढ़ाई के बाद हम स्वयंभू नाथ स्तूप पहुँच गए थे।
दरबार स्क्वायर : नेपाल के प्राचीन राजाओं के राजसी महल और उत्कृष्ट नक्काशी वाले लकड़ी के मंदिर यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। इसमें ' काठमांडू दरबार स्क्वायर ' और ' पाटन दरबार स्क्वायर ' दोनों प्रमुख हैं। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। यहाँ प्राचीन मंदिर, मूर्तियां और पुराना शाही महल स्थित है
पाटन स्क्वायर : काठमांडू घाटी का सबसे पुराना शहर। यह अपनी बेहतरीन नेवारी वास्तुकला और लकड़ी की नक्काशी के लिए जाना जाता है
थामेल स्ट्रीट : अगर आप शॉपिंग, स्ट्रीट फ़ूड और काठमांडू की नाइटलाइफ़ का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह सबसे बेहतरीन जगह है। यहाँ कई कैफे और पब हैं।काठमांडू के इन प्रमुख और शानदार पर्यटन स्थलों की झलक देखें।
नारायणहिती पैलेस संग्रहालय : यह नेपाल के पूर्व शाही परिवार का महल था, जिसे अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।
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गतांक से आगे : ५ / ३ . 
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है. 
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल.
भक्तपुर : मध्ययुगीन स्वरूप और भव्य नेपाली वास्तुकला.
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल.

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल.भक्तपुर : मध्ययुगीन नेपाली शहर : कोलाज : एम एस मीडिया

भक्तपुर : नेपाल की काठमांडू घाटी में स्थित एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है। यह काठमांडू से पूर्व में लगभग १३ किलोमीटर या ८ मील की दूरी पर स्थित है। नेपाल यात्रा में भक्तपुर अवश्य देखने योग्य शहर है। मुझे याद है घूमना बड़ा अच्छा लगा था।
'भक्तों का शहर ' कहलाने वाले इस स्थान को 'भादगाँव ' या ' ख्वोपा ' भी कहा जाता है। अपने मध्ययुगीन स्वरूप और भव्य वास्तुकला के कारण यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। शहर के संकरे और पारंपरिक रास्तों पर घूमने के दौरान आप कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को देख सकते हैं ।भक्तपुर दरबार स्क्वायर : यह एक खुला ऐतिहासिक प्रांगण है जहाँ १५ वीं सदी का पचपन्ना झ्याले दरबार ५५ खिड़कियों वाला महल और कलात्मक गोल्डन गेट मौजूद है।
न्यातपोल मंदिर : पाँच मंजिला यह पैगोडा शैली का मंदिर नेपाल का सबसे ऊंचा मंदिर है, जो अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है।
दत्तात्रेय स्क्वायर : यहाँ तीन मंजिला दत्तात्रेय मंदिर और लकड़ी की उत्कृष्ट नक्काशी वाली मयूर खिड़कियां पीकॉक विंडो आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। स्थानीय व्यंजन और कलाजूजू धौ भक्तपुर का यह खास मीठा दही भैंस के दूध से बनाया जाता है और यह स्थानीय संस्कृति का सबसे स्वादिष्ट हिस्सा है।
हस्तशिल्प और पॉटरी : यह शहर अपनी अद्भुत लकड़ी की नक्काशी, पत्थर की मूर्तियों और मिट्टी के बर्तनों के लिए देश भर में मशहूर है।
पर्यटन शुल्क : शहर में प्रवेश करने के लिए विदेशी पर्यटकों को प्रवेश शुल्क लगभग १५०० नेपाली रुपये देना होता है, जिसके पास के साथ आप यहाँ कई दिन बिता सकते हैं।भक्तपुर के ऐतिहासिक मंदिरों, नेवार वास्तुकला और प्रसिद्ध आकर्षक स्थलों की झलक देखने के लिए, आप भक्तपुर जरूर देखें:



गतांक से आगे : ५  / ४   
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है. 
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल.

नेपाल के गोरखा जिले का.
मनोकामना मंदिर : शक्ति मन, मन्नत के धागे.


प्रेम : पर्वत : मनोकामना शक्ति मन मन्नत के धागे : नेपाल : फोटो कोलाज : शक्ति सोनी मधुप रितु 

काठमांडू से पोखरा जाते समय १०६ किलोमीटर दूर पश्चिम में और पोखरा से करीब १२५ किलोमीटर की दूरी पर, १३०० मीटर ऊँची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है यह मनकामना मन्दिर। आस पास एक पहाड़ी गांव जैसा बसा हुआ है यह शहर। कहते है यहाँ मन में माँगी गयी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
मनोकामना मंदिर : नेपाल के गोरखा जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू शक्तिपीठ है, जो माता पार्वती के अवतार देवी भगवती को समर्पित है।
'मन' का अर्थ हृदय और ' कामना ' का अर्थ इच्छा होता है, इसलिए यह माना जाता है कि यहाँ आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मुख्य विशेषताएं भौगोलिक स्थिति : यह मंदिर समुद्र तल से लगभग १३०२ मीटर ४२७२ फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ से अन्नपूर्णा और मानसुलु पर्वतमालाओं के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।मंदिर वास्तुकला : यह मंदिर पारंपरिक पैगोडा शैली में बना हुआ है, जिसकी छतें सीढ़ीदार हैं।
केबल कार सुविधा : कैसे पहुंचें : मंदिर तक पहुँचने के लिए कुरीनटार से मनोकामना केबल कार की सुविधा उपलब्ध है, जो करीब १० से १५ मिनट में पहाड़ी की चोटी तक पहुँचा देती है।
मंदिर का इतिहास और गाथाएं : मान्यतादेवी मनकामना की कहानी : १७ वीं शताब्दी के गोरखा राजा राम शाह की रानी से जुड़ी है। माना जाता है कि रानी के पास दिव्य शक्तियां थीं, जिसके बारे में केवल उनके भक्त लखन थापा जानते थे।
राजा की मृत्यु के बाद जब रानी सती हो गईं, तो उन्होंने लखन थापा से वादा किया कि वे दोबारा प्रकट होंगी। कुछ समय बाद एक किसान को खेत जोतते समय एक पत्थर मिला जिससे दूध और खून बह रहा था। लखन थापा ने तांत्रिक अनुष्ठान कर उस स्थान पर पहला मंदिर बनवाया। परंपरा के अनुसार आज भी इस मंदिर के मुख्य पुजारी लखन थापा के वंशज मगर समुदाय ही होते हैं।

नेपाल के गोरखा जिले का मनोकामना मंदिर :
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गतांक से आगे : ५ / ५    
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है. 
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : नेपाल. पोखरा
अन्नपूर्णा रेंज  में बसा यह शहर : नेपाल की पर्यटन राजधानी 
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फेवा झील
अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला के नजारें : हम और तुम फोटो कोलाज : शक्ति. प्रिया मधुप रितु सोनी
पोखरा, काठमांडू के बाद नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत पर्यटन शहर है। हिमालय की गोद अन्नपूर्णा रेंज  में बसा यह शहर अपनी शांत झीलों, साहसिक खेलों जैसे पैराग्लाइडिंग , और ट्रैकिंग मार्गों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। 
पोखरा नेपाल घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से नवंबर शरद ऋतु  और मार्च से मई वसंत ऋतु  के बीच का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, आसमान साफ रहता है और हिमालय की चोटियों अन्नपूर्णा रेंज  के सबसे बेहतरीन नज़ारे देखने को मिलते हैं
यह नेपाल की अनौपचारिक पर्यटन राजधानी भी माना जाता है। नेपाल के पोखरा में देखने के लिए सबसे प्रमुख जगहें फेवा झील, सारंगकोट हिमालय के नज़ारों के लिए , विश्व शांति पैगोडा वर्ल्ड पीस पगोडा और डेविस फॉल्स हैं।
पोखरा में घूमने के लिए बेहतरीन और चुनिंदा जगहों की सूची यहाँ दी गई है जिसे आप याद रखें।
फेवा झील : यह पोखरा की सबसे प्रसिद्ध और दूसरी सबसे बड़ी झील है। यहाँ आप बोटिंग का आनंद ले सकते हैं। झील के बीच में ताल बाराही मंदिर स्थित है।
पोखरा लेकसाइड : यह पोखरा का मुख्य टूरिस्ट हब है। यहाँ कैफे, पब, और होटलों की लंबी कतारें हैं। शाम के समय यहाँ घूमने का अलग ही मज़ा है।
सारंगकोट : यह जगह अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला और सूर्योदय का अद्भुत नज़ारा पेश करती है। यह पैराग्लाइडिंग का मुख्य लॉन्चिंग पॉइंट भी है।
विश्व शांति पैगोडा : फेवा झील के पार एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह स्तूप, सफेद रंग की एक खूबसूरत बौद्ध स्मारक है। यहाँ से पूरी पोखरा घाटी और हिमालय का शानदार दृश्य दिखाई देता है。डेविस फॉल्स और गुप्तेश्वर महादेव गुफा : डेविस फॉल्स एक अनोखा भूमिगत झरना है। इसी के ठीक सामने गुप्तेश्वर गुफा है, जिसके अंदर एक प्राकृतिक शिवलिंग और बहते हुए पानी का अद्भुत नजारा देखा जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय संग्रहालय : अगर आप पहाड़ों, पर्वतारोहियों और उनकी कहानियों में रुचि रखते हैं, तो यह संग्रहालय आपके लिए बेहतरीन है। इसमें एवरेस्ट और अन्य चोटियों से जुड़ी जानकारी रखी गई है।विंध्यवासिनी मंदिर : यह शहर के सबसे पुराने और पूजनीय मंदिरों में से एक है जो एक पहाड़ी पर स्थित है।
बेतनास झील : अगर आप भीड़भाड़ से दूर शांति चाहते हैं, तो फेवा झील से कुछ दूरी पर स्थित इस शांत और खूबसूरत झील पर ज़रूर जाएँ.


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गतांक से आगे : ५ / ६
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नेपाल : शोध : शक्ति : यात्रा संस्मरण.
शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता रितु.
दार्जलिंग डेस्क.
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गतांक से आगे : मुक्ति नाथ यात्रा

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मारफा : पत्थरों के घर
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लेकिन धड़कती हैं दिल में , पहाड़ी देव शक्ति की सभ्यता और संस्कृति


पत्थरों के घरों में दिल : धड़कती हैं सभ्यता और संस्कृति :कोलाज : डॉ.सुनीता रितु अनुभूति

मार्फा : गाँव : मुक्ति नाथ से ४० किलोमीटर पहले मारफा नेपाल के मस्तांग जिले का एक सुरम्य गाँव है। निचले मस्तंग क्षेत्र की काली गंडकी घाटी में २६५० मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह गाँव एक पर्यटन केंद्र है।इसकी सुंदर गलियों और भव्य बाग़बानी ने एक अनोखा माहौल बनाया है। यहाँ आप पारंपरिक संस्कृति और भावपूर्ण सौंदर्य को अनुभव कर सकते हैं। मारफा : पत्थरों के घर लेकिन धड़कती हैं पहाड़ी देव शक्ति की सभ्यता और संस्कृति दिल में ,मुक्ति नाथ जाते समय एक दिन पत्थरों के शहर में जरूर रहें। यह प्राचीन गांव अन्नपूर्णा सर्किट ट्रेक का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां से हिमालय के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं और नेपाल के पारंपरिक पहाड़ी जीवन की झलक मिलती है। मारफा अपने सफेदी किए हुए घरों, पत्थर की सड़कों और स्वादिष्ट सेब ब्रांडी के उत्पादन के लिए जाना जाता है। मारफा गांव के प्रमुख आकर्षण थाकाली संस्कृति संग्रहालय, पुराना मठ, सेब के बाग, काली गंडकी नदी, और स्थानीय बाज़ार आदि हैं जिन्हें पर्यटक घूम सकते हैं। पत्थर के बने मकान अत्यंत मनभावन दिखते हैं कब जाएँ : यात्रा के लिए सितंबर - नवंबर और मार्च - जून का समय सबसे अच्छा है, और आप पोखरा से हवाई जहाज या जीप द्वारा जोमसोम पहुँचकर, फिर जीप और पैदल चलकर मंदिर तक पहुँच सकते हैं, जहाँ लगभग ३०० सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। ३८०० मीटर की ऊंचाई है। इसलिए सर्दी होगी जरूर जानें। गर्म कपड़े दास्तानें मफ़लर शॉल ,चश्में जरूर रखें।

काठमांडू : पोखरा से जोमसोम के रास्ते : फोटो कोलाज : शक्ति रितु मधुप सोनी


कैसे पहुँचें : काठमांडू / पोखरा : यात्रा की शुरुआत नेपाल की राजधानी काठमांडू या खूबसूरत शहर पोखरा से होती है। हवाई मार्ग जोमसोम : पोखरा से जोमसोम सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा के लिए छोटी उड़ान भरें या फिर जीप से जाएं। सड़क मार्ग पहले दिन की यात्रा : पहले दिन की यात्रा पोखरा से शुरू होगी और कुसमा और बेनी होते हुए तातोपानी पहुँचेगी। यात्रा के बीच में, हम देवी की पूजा करने के लिए गैलेश्वर मंदिर में कुछ देर रुकेंगे। तातोपानी पहुँचने के बाद आप प्राकृतिक गर्म पानी के झरने का आनंद ले सकते हैं और आराम कर सकते हैं। पोखरा से बेनी तक लगभग तीन घंटे की ड्राइव है, लगभग पूरी सड़क पर। कभी-कभी, निर्माण प्रक्रिया आपको यह महसूस करा सकती है कि यह पूरी तरह से काली सड़क नहीं है। दूसरे दिन की यात्रा : दूसरे दिन की यात्रा सुबह-सुबह शुरू होगी और दुनिया की सबसे गहरी खाई, लारजंग, तुकुचे, मारफा ,जोमसोम, कागबेनी और झारकोट गाँव से होते हुए रानीपौवा पहुँचेगी। मुक्तिनाथ दर्शन के बाद, एक ही दिन में कागबेनी की खोज करते हुए पोखरा वापस लौटेगी। जीप या कार से पवित्र मुक्तिनाथ की यात्रा करने पर आपको भगवान की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होगा, और यात्रा के अंत में यह पूरी तरह से सार्थक होगी। बेनी से, तातोपानी, घासा, लेटे, कोबांग और मार्फा होते हुए जोमसोम तक लगभग पाँच घंटे की ड्राइव है। यह पूरी तरह से उबड़-खाबड़ सड़क है। याने कुल मिला के आठ से नौ घंटे का रास्ता है। जोमसोम से मुक्तिनाथ मंदिर तक पहुँचने के लिए जीप, पैदल या घोड़े / पालकी पहाड़ी चढ़ाई के लिए का उपयोग करें। पोखरा से मुक्तिनाथ यात्रा एक आनंददायक यात्रा है जो नेपाल की आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता का संगम है। यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में डूबने और हिमालय के दुर्गम प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने का एक अनूठा अवसर है। बस, कार ,जीप द्वारा मुक्तिनाथ तीर्थ यात्रा एक ऐसा अनुभव है जो आपको जीवन भर याद रहने वाली यादें देगा।
ध्यान रखने योग्य बातें : मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का मौसम यात्रा के लिए सबसे अच्छा होता है, जब मौसम सुहावना और रास्ते साफ होते हैं। ऊँचाई और ठंड के कारण, गर्म कपड़े, अच्छे जूते और दवाइयाँ साथ रखें। यात्रा से पहले शारीरिक रूप से फिट रहें क्योंकि रास्ते चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मंदिर के अंदर तस्वीरें लेना वर्जित है। यदि आप प्रेस से है,स्थापित ब्लॉगर है, लेखक हैं,फ़िल्म कार हैं तो मंदिर प्रबंधन से अनुमति लेकर फोटो खींच सकते हैं। दूरी : पोखरा से मुक्तिनाथ लगभग १७५ किलोमीटर है. पोखरा से कुशमा भाया बागलुंग ७० किलोमीटर, बागलुंग से बेनी ३० किलोमीटर, बेनी से तातोपानी ( गर्म पानी ) २२ किलोमीटर, तातोपानी से लेते १६ किलोमीटर, लेते से मारफा २० किलोमीटर, मारफा से जोमसोन ( हवाईअड्डा ) ८ किलोमीटर, जोमसोन से मुक्तिनाथ २४ किलोमीटर है.

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ए.एंड एम. मीडिया अधिकृत
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गतांक से आगे : ५ / ७
श्री लक्ष्मी नारायण : भगवान विष्णु को समर्पित.
एक महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिर
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मुक्ति नाथ : मुस्तांग : नेपाल : यात्रा संस्मरण.

हम साथ साथ है : मीडिया टीम : २००७ में नेपाल की यात्रा : हम साथ साथ है की मीडिया टीम २००७ में नेपाल की यात्रा पर थी । हमने नेपाल स्थित काठमांडू,सारंगकोट, नागरकोट ,पोखरा आदि का भ्रमण किया था। मुक्ति नाथ के लिए उड़ाने भी देखी थी। समय अभाव की बजह से जा नहीं पाए थे। २०२५ में जब हमारी शक्ति फोटो लघु फिल्म सम्पादिका रितु ने मुक्ति नाथ की यात्रा पूरी की तो निश्चित हुआ कि इस यात्रा वृतांत को शब्द दिया जाए। लिपिबद्ध किया जाए। वर्ष २००७ की नेपाल की यात्रा में डॉ.सुनीता मधुप,डॉ.राशि, डॉ.रतनिका,व डॉ.रूप कला शामिल उस यात्रा में शामिल थी ही। तय हुआ कुछ लिखा जाए। फीचर डेस्क ने इसकी तैयारी शुरू कर दी। तब हमने पशुपति नाथ, बागमती नदी हनुमान डोका,ललितपुर ,भक्तपुर , काठमांडू स्थित इस्कॉन टेम्पल भी देखा था। पोखरा की गहरी झील अभी भी याद है। काठमांडू नेपाल में सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली जगह है और नेपाल की राजधानी भी। यह जगह प्राचीन मंदिरों, सुनहरे पैगोडा, प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक गाँवों से भरपूर है, जिन्हें आप नेपाल के अपने दर्शनीय स्थलों की सूची में शामिल कर सकते हैं। पशुपतिनाथ मंदिर: शिव :मसाने और बागमती : नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित है, जो भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू मंदिर है और दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है, जहाँ हिन्दू रीति-रिवाज और अंतिम संस्कार भी होते हैं। कितनी अजीब बात है कि काशी की तरह यहाँ भी बाबा भोले नाथ बागमती नदी के किनारे मसाने के समीप ही बसते है। जनम जनम के फेरों से मुक्ति आप यहाँ अनवरत जलती चिताओं मैं देख सकते हैं। हमने भी देखी थी। २०२५ : पुनः पहाड़ों की सैर : मुक्तिनाथ यात्रा : नेपाल के धौलागिरी और अन्नपूर्णा चोटियों के मध्य घाटियों में स्थित मुस्तांग जिले में स्थित,भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थ स्थल होने के साथ साथ और एक प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल भी है, जहाँ अवलोकितेश्वर बुद्ध की पूजा की जाती है। यह तीर्थ ३८०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ लक्ष्मी नारायण के साथ बुद्ध की भी मूर्ति आप देख सकते हैं।
मुक्ति नाथ गांव से इसके प्रवेश द्वार से मंदिर तक पहुंचने में समय २० मिनट का लगता है। यहाँ से पैदल चढ़ते हुए संख्या में लगभग ३०० सीढियाँ चढ़नी पड़ती है।

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गतांक से आगे : ५ / ७
नेपाल : शोध शक्ति : यात्रा संस्मरण. मुक्तिनाथ शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता रितु. दार्जलिंग डेस्क. *
मुक्तिनाथ:लक्ष्मी और सरस्वती कुंड में पवित्र स्न्नान करती शक्ति : शक्ति.डॉ.सुनीता भारती रितु
यह तीर्थ ३८०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है शायद विश्व का सबसे ऊँचा श्री लक्ष्मी नारायण का मंदिर है। १०८ जल की नल धाराओं ,२ पवित्र तालाब यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड : और यहाँ १०८ जल कुंड तथा धुँए की धारा हैं,जहाँ श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। हिमालय से निसृत होती १०८जल कुंड धाराओं के ठंडे जल में स्नान करना एक खास आध्यात्मिक अनुभव है। मुक्तिनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है मंदिर परिसर के पीछे १०८ जल की हिमालय निःसृत नल धाराएं, व २ पवित्र कुंड यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड है। कहते है १०८ जल की नल धाराओं ,२ पवित्र तालाब यथा लक्ष्मी व सरस्वती कुंड में स्नान करने से जन्म जन्मांतर के पाप धुलते हैं। शक्ति ने कितने लोगों को पंक्ति बद्ध होते हुए इस जल धारा में स्न्नान करने के पश्चात लक्ष्मी व सरस्वती कुंड में डूबकी लगाते हुए देखा था।
सर्द पानी। बर्फानी हवा। पानी में प्रवेश करते ही लगे की शरीर जम जाए। लेकिन लक्ष्मी नारायण के हांथों से मुक्ति जो पानी है। और यहाँ हिमाचल के ज्वाला देवी की तरह जमीन से निकली प्राकृतिक गैस की ज्वाला भी है।

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साभार शॉर्ट रील : नेपाली भाषा : दार्जलिंग डेस्क 


मुक्तिनाथ मंदिर  मा  हवा चले सर....र.. र ..आ 

* स्तंभ संपादन : शक्ति शालिनी रेनू माधवी.
स्तंभ सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा अनुभूति.

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गतांक से आगे : ५ / ८    
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है. 
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : जनकपुर नेपाल. 
राम सिया की यहीं है कहानी 
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राम सिया की यही है कहानी : जनकपुर : नेपाल : कोलाज : शक्ति : सोनी मधुप रितु अनुभूति 


जनकपुर जनकपुरधाम नेपाल के मधेश प्रदेश में स्थित एक अत्यंत ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है, जो भारत के बिहार राज्य की सीमा के नजदीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह शहर प्राचीन मिथिला साम्राज्य की राजधानी था और राजा जनक का महल यहीं स्थित था।
सांस्कृतिक केंद्र : यह शहर आज भी अपनी समृद्ध मिथिला संस्कृति और कला मिथिला पेंटिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. जनकपुर के मुख्य दार्शनिक स्थल निम्न है।
धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व सीता की जन्मस्थली: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा जनक को इसी भूमि से हल चलाते समय सीता जानकी प्राप्त हुई थीं.
राम-सीता विवाह स्थल : भगवान श्रीराम ने इसी पावन नगरी में शिव का धनुष तोड़कर सीता से विवाह रचाया था.
जानकी मंदिर : यह जनकपुर का सबसे बड़ा और मुख्य आकर्षण है. इसे ' नौलखा मंदिर ' भी कहा जाता है, क्योंकि सन १९११ में इसके निर्माण में ₹ ९ लाख खर्च हुए थे. इस भव्य मंदिर का निर्माण टीकमगढ़ की महारानी वृषभानु कुमारी ने करवाया था.
विवाह मंडप : जानकी मंदिर के पास ही स्थित वह स्थान है जहाँ माना जाता है कि भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था.
पवित्र तालाब पोखर : जनकपुर को 'तालाबों का शहर' भी कहा जाता है. यहाँ कई पवित्र तालाब हैं जैसे गंगा सागर, धनुष सागर और राम सागर, जहाँ शाम को भव्य आरती होती है.भाषा और संस्कृतियहाँ की मुख्य भाषा मैथिली है, लेकिन भारत से निकटता और धार्मिक जुड़ाव के कारण यहाँ हिंदी, भोजपुरी और अवधी बोलने और समझने वाले लोगों की भी बहुत बड़ी संख्या में हैं।

 
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : शक्ति सफ़रनामा : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन.
डॉ. अनु स्वाति प्रिया अनुभूति
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रोज शाम आती थी मगर ऐसी न थी रोज रोज घटा छाती थी : शक्ति अनु मंजु अनुभूति मधुप 
दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया है : खज्जियार : हिमाचल : शक्ति अनु मंजु अनुभूति मधुप 
तेरी आँखों के सिवा इस दुनियाँ में रखा क्या है : कोलाज : शक्ति शालिनी रितू मधुप  अनुभूति 
तेरे हाँथों में है मेरी डोरी जैसे कच्चे धागे से मैं बंधा आया ऐसे : कोलाज : शक्ति रितू मधुप सोनी अनुभूति 
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स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.
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समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
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संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी रेनू रितु लक्षिका जोशी
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महानाटि : नृत्य : शिमला : महोत्सव : २०२६.  

दृश्यम : रिज पर
शिमला समर फेस्टिवल की धूम.
*
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पशुपति नाथ मंदिर : काठमांडू :
संध्या आरती : दृश्यम 

प्रस्तुति : शक्ति.सोनी प्रिया मधुप रितु.
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पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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संपादन
शक्ति.लक्षिका रितु प्रिया अनुभूति.
दार्जलिंग डेस्क
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ये पर्वतों के दायरे : जोमसोम के रास्ते  : मुस्तांग : नेपाल : शक्ति सोनी मधुप रितु अनुभूति  
राम सिया की यही है कहानी : जनकपुर : नेपाल : कोलाज : शक्ति : सोनी मधुप रितु अनुभूति 
प्रकृति पहाड़ पुरुष उत्तम : प्रेम और पुनर्जन्म : कोलाज : काठमांडू : शक्ति.सोनी मधुप अनुभूति 
शक्ति शिव भक्ति : बागमती काठमांडू और पशुपति : कोलाज : शक्ति.सोनी संजय रितु मधुप
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समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
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संपादन.
शक्ति.मंजू सीमा रंजिता अर्चना
शिमला डेस्क.
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माल रोड : रिज पर शिमला समर फेस्टिवल की धूम.
शक्ति. डॉ.अनुराधा अनुभूति मधुप शालिनी

माल रोड : रिज पर शिमला समर फेस्टिवल की धूम : कोलाज : शक्ति मंजु स्वाति अर्चना अनुभूति

शिमला / संवाद सूत्र. साल २०११ या २०१२ रहा होगा । मैं तीन या चार बार शिमला आ चुका हूँ। हम चार रिज पर थे। शाम का वक़्त था। काफी भीड़ थी। कुर्सियों पर हम बैठ गए थे। समर फेस्टिवल चल रहा था। आस पास बैठे लोगों से निरन्तर बातें भी हो रहीं थीं। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हर साल मई या जून के महीने में आयोजित होने वाला सबसे बड़ा और प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव है।
इस बार भी अंतरराष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल ८ जून से १२ जून तक हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक द रिज और मॉल रोड पर आयोजित किया जा रहा है। यह पांच दिवसीय भव्य उत्सव हर साल राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए मनाया जाता है। यह पाँच दिनों तक चलने वाला भव्य आयोजन होता है, जो शहर के ऐतिहासिक रिज मैदान और माल रोड पर मनाया जाता है। पहले की तरह काफ़ी भीड़ स्केंडल पॉइंट से रिज पर आ रही थी।
शिमला समर फेस्टिवल के मुख्य आकर्षण : महानाटी इस महोत्सव की शुरुआत सैकड़ों महिलाओं द्वारा पारंपरिक हिमाचली पोशाक जैसे 'दाठू' और 'रेजटा' पहनकर 'महानाटी' पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत करके की जाती है, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है।
स्टार नाइट्स और संगीत: बॉलीवुड के मशहूर गायकों और क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा लाइव प्रस्तुतियां दी जाती हैं।
शिमला स्वाद महोत्सव : इस दौरान लेडीज़ पार्क में विशेष फूड स्टॉल लगाए जाते हैं, जहाँ हिमाचली धाम और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाया जा सकता है।
प्रतियोगिताएं : युवाओं और पर्यटकों के लिए गायन, फैशन शो, फिल्म फेस्टिवल, और 'वॉयस ऑफ माउंटेन्स' जैसी रोमांचक प्रतियोगिताएं होती हैं, जिनमें भारी नकद इनाम दिए जाते है।
 
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स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.
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समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
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संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी रेनू रितु लक्षिका जोशी
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नेपाल जनकपुर : दृश्यम : शक्ति : रितु सिंह 

कैंची धाम : दृश्यम : समाचार 


प्रस्तुति : ललिता लक्षिका लतिका भुवन जोशी 


पशुपति नाथ मंदिर : काठमांडू :
संध्या आरती : दृश्यम :  सोनी 

प्रस्तुति : शक्ति. सोनी प्रिया मधुप रितु
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शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
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संपादन.
शक्ति. शालिनी मानसी कंचन बीना जोशी
नैनीताल डेस्क.
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२९. ६. २६.
कबीर दास जयंती.

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ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की
हिंदी एकादशी तिथि
गायत्री जयंती



*
२.६.२६. 
शक्ति.जन्म दिन विशेष.
*

सम्पादिका. 
शक्ति.सीमा सिंह.कोलकोता डेस्क. 
कला,अंग्रेजी अनुभाग सम्पादिका.महाशक्ति मीडिया  
को उनके अवतरण दिवस की हम सभी देव शक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से हार्दिक अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें.
*

*
तराने दृश्यम : शुभ जन्मदिन शक्ति
शक्ति. शालिनी डॉ.सुनीता रंजीता अनीता प्रस्तुति
*
०१.०६.२०२६
जन्म दिन शक्ति विशेष.
*
*
जुड़वां शक्ति. 
लक्षिका लतिका जोशी.नैनीताल.  
फोटो : रील सम्पादिका.महाशक्ति मीडिया  
को उनके अवतरण दिवस की हम सभी देव शक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें.
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आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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संपादन
शक्ति. डॉ. अनु स्मिता प्रिया मधुप
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शक्ति धुन : पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए


बालाजी क्रिएशन : स्वामित्व : पुनीत शर्मा : मुंबई

तराने : साभार
ओ .....तुमसे दूर रहके हमने जाना प्यार क्या है
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दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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*
तराने : जिधर जाइएगा हमें पाइएगा


*
तराने
ओ ..तुमसे दूर रहके हमने जाना प्यार क्या है


*
मृगनयनी : शॉर्ट रील : तुम परदेशी किधर से आए
आते ही मेरे दिल में समाए


तराने दिल से : शक्ति. गुल सक्सेना : मुम्बई :
*

आज फिर जीने की तमन्ना है
*
परदेशियों से ना अँखियां मिलाना


*
जिधर देखती हूँ उधर तुम ही तुम हो
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तुम ही मेरी मंदिर हो तुम ही मेरी पूजा


माय हार्ट इज बीटिंग कीप्स ऑन रीपीटिंग
*

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जन्म में मुलाक़ात हो न हो
*
*
बेदर्दी बालमा मेरा मन तुझको याद करता है
*
तेरा जाना दिल के अरमानों का लूट जाना
*

साभार शक्ति : गुल सक्सेना : महाराष्ट्र : गायन :
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आपने कहा : पृष्ठ : १३ / ३
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*
डॉ. रजनी
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बहुत ही शानदार कवरेज और बहुत ही अनुकरणीय 
/ प्रशंसनीय कार्य। सामाजिक परिवर्तन हेतु सार्थक प्रयास। 

Parvaton Ke Pedon Par Sham Ka Basera Hai : 
Paryatan.
*

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Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4. 
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
 Shakti : Kriti Art  Link :  English :  Page : 7.
 Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9.
* 
English Section.
*
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Shakti.Pooja. Arya. Dr. Rajeev Ranjan. Child  Specialist. Biharsharif. supporting 
*

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Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
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Editor.
Shakti. Lakshika Bani Madhavee Priya.
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Neem Karoli Baba :
Forthcoming Kainchi Dham Foundation Day : June 15 :
Shakti. Dr. Sunita Madhup Seema Priya

Devotees moving towards Baba Neem Karoli Ashram : Nainital : Collage photo Shakti Dr. Sunita Bharti Dr. Naveen Bina Joshi

Nainital : CR : Kainchi Dham Foundation Day June 15 is just a day head. As I remember I visited this spiritual place thrice or four times. Kainchi Dham is nestled in the Kumaon Hills near Nainital, Uttarakhand. This ashram was established in 1964. Neem Karoli Baba : Neem Karoli Baba, affectionately is called Maharaj-ji by his known followers. He had been a revered 20th-century Indian mystic, yogi, and lifelong devotee of the Hindu deity Hanuman. Born as Lakshman Narayan Sharma around 1900 in Uttar Pradesh, he is universally celebrated for his philosophy of unconditional love, selfless service (seva), and devotion. He did not give formal religious discourses ; instead, he taught through simple, everyday actions and deeply personal interactions. Pratishtha Diwas/Foundation Day : The major annual celebrations for Neem Karoli Baba center around June 15th (Pratishtha Diwas/Foundation Day) and the Mahasamadhi anniversary (typically observed in September). Devotees also commemorate his physical birth anniversary. Silicon Valley Connections : Baba has been very popular amongst us .High-profile figures like Steve Jobs and Mark Zuckerberg made pilgrimages to Kainchi Dham during critical turning points in their lives, crediting the ashram with restoring their vision and purpose. It serves as the primary spiritual epi center for global devotees. It is the most heavily attended event, drawing well over a hundred thousand devotees for special bhandaras (feasts) and prayers. * Column Editing : Shakti Latika Ravi Rashmi Dr. Naveen Joshi Decorative Shakti. Mansi. Seema Manjita Bhuwan Joshi.
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Shakti Safarnama : Photo Gallery : English : Page : 6.
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Shakti Dr. Anuradha Manju Smita Shreya.
Mandi Desk : Himachal
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ye dil aur unki nigahon ke Saye :  Nepal : collage Shakti Priya Madhup Soni Ritu
stay healthy stay happy : Yoga Collage : Shakti Ritu Ranjita Smita Anubhuti  
Neem Karauli Baba Ashram at Night : Shakti.Bharti Madhup Deepti Bhuwan 
Nainital : During Mansoon : Collage : Shakti. Bharti Madhup Naveen Beena 
an Evening in  Rishkesh : Collage. Shakti. Shreya Anita Madhup Anubhuti
at the highest suspension Chimchim Bridge in Kaja : Collage : Shakti. Manju Shreeram Sanju Shreya. 
 Midst the clouds & snow : Kaja : Hikkim Post office : photo Shakti Manju Shriram Sanjay
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32 Digital OPG Center. Sadar Alam Waqf Market. Ranchi Road. Biharsharif Supporting
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Days Special : Wishes : English : Page : 8.
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Editor.
Shakti. Dr.Anu Naina Lakshika Smita.
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Day Special 
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21.06.2026.
Father's day.
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Decorative : GIF : Best Dad Ever.
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16th of June.
International Day of Family Remittances.

10th of June.
World Eye Donation Day


an opening eye decorative 

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World Environment Day 
5.6.26.
powered with a GIF decorative
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Dr. Sunita Ranjita Seema Anita.
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Birthday Hearty Wishes.
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on 07.06.26.
many many happy 
returns of the day
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Co traveller : Ph0tographer 
Gaurav Dhal. Jaipur.
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' Hum'  MS * Media Family
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Shakti. Shalini Naina Madhup Sunita.
*
Birthday Wishes.
*
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Shakti. Lalita Joshi.
Resident Nainital.
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Our Heartiest Wishes for 
her Birthday. on 4.6.26.
*
Dr. Naveen Latika Lakshika Bhuvan Joshi
Nainital. 
*







Comments

  1. Too good. I love visiting this page

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  2. It is a nicely edited well decorated page.. specially for photographs..

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