Yaadein Na Jaye Bite Dino Ki : Saal 25

 ©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Presentation.
Cover Page.0.
 
 Yaadein Na Jaye.  
Volume : 1. Series : 5.
MS*
a Social Media.Web Blog Magazine Page. 
Address.Monthly.
https://msmedia4you.blogspot.com/2025/12/yaadein-na-jaye-bite-dino-ki.html.
*
Cover Page. 
*
आवरण पृष्ठ.
*

दिल क्यों भुलाये उन्हें:यादें न जाए बीते दिनों की:आवरणशक्ति.शालिनी प्रिया डॉ.सुनीता अनुभूति. 



फोर स्क्वायर होटल : रांची :समर्थित :आवरण पृष्ठ. विषय सूची मार्स मिडिया ऐड:नई दिल्ली.

विषय सूची : पृष्ठ :०.


  राधिका कृष्ण रुक्मिणी  मीरा : दर्शन : पृष्ठ :०.
आवरण पृष्ठ :०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे : प्रारब्ध : पृष्ठ : ०.
कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे : प्रारब्ध : शक्ति लिंक : पृष्ठ : ०.
राधिकाकृष्ण : महाशक्ति : इस्कॉन डेस्क : नैनीताल. पृष्ठ : ० / १.
रुक्मिणीकृष्ण : महाशक्ति : दर्शन दृश्यम : विचार डेस्क : नैनीताल. पृष्ठ : ० / २ .
मीराकृष्ण : महाशक्ति डेस्क : मुक्तेश्वर : नैनीताल. पृष्ठ : ० / ३.
त्रिशक्ति जीवन दर्शन विचार धारा : पृष्ठ : १.
त्रिशक्ति जीवन दर्शन विचार धारा लिंक : पृष्ठ : १.
त्रि - शक्ति : दर्शन. पृष्ठ : १ / ०.
त्रिशक्ति : विचार : दृश्यम : पृष्ठ : १ / ० .
त्रिशक्ति : लक्ष्मी डेस्क : सम्यक दृष्टि : कोलकोता : पृष्ठ : १ / १.
त्रिशक्ति : शक्ति डेस्क : सम्यक वाणी : नैनीताल : पृष्ठ : १ / २.
त्रिशक्ति : सरस्वती डेस्क :सम्यक कर्म : जब्बलपुर : पृष्ठ : १ / ३.
महाशक्ति : जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १ / ४.
नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १ / ५.
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
 विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५. 
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ :६.
यादें न जाए  : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
यादें न जाए  : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
यादें न जाए : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १२.
यादें न जाए : शुभकामनाएं : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १३.
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १४.
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हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०
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संयोजन.
शिमला.डेस्क.
नैनीताल डेस्क.
इन्द्रप्रस्थ डेस्क.
पाटलिपुत्र डेस्क.
पद्मावत डेस्क.

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शक्ति.शालिनी.स्मिता.वनिता.शवनम .
संयोजिका / मीडिया हाउस ,हम मीडिया परिवार
की तरफ़ से
आपके लिए धन्यवाद ज्ञापन
*
यादें न जाए बीते दिनों की
वेब मैगज़ीन पेज के निर्माण व सहयोग के लिए


*
डॉ.भावना. 
शक्ति सम्पादिका 
महाशक्ति मीडिया 
को 
संयोजिका / मीडिया हाउस ,हम मीडिया परिवार
की तरफ़ से
हार्दिक आभार

*
शक्ति.तनु.आर्य.रजत निदेशक : स्वर्णिका ज्वेलर्स : सोहसराय : बिहार शरीफ समर्थित.
*

*
विषय सूची :पृष्ठ :०.
*
राधिका कृष्ण रुक्मिणी मीरा : दर्शन : पृष्ठ :०.
*

*
सन्दर्भ फोटो : राधिका कृष्ण रुक्मिणी मीरा.
अद्यतन विचार देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
*
संपादन
शक्ति.प्रिया मधुप डॉ.सुनीता मीना
*
त्रिशक्ति दर्शन.

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शक्ति : महाशक्ति दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्य.
*
*
शक्ति : महाशक्ति : डेकोरेटिव : जी आई एफ.
*

*
महाशक्ति मीडिया एडवरटाइजिंग : शक्ति.
*
*
महाशक्ति.नैना देवी डेस्क.
नैनीताल.प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई.दिवस :४.
*
सम्पादित.
शक्ति नैना @ डॉ.सुनीता शक्ति*प्रिया.

*
सम्यक वाणी,प्रिय
*

*
सन्दर्भ विचार माया : शक्ति : छाया : डॉ. अनु
*
यथार्थ में प्रार्थना शब्दों में नहीं हृदय व कर्म से ही होनी चाहिए क्योंकि ईश्वर उनकी भी सुनते ही हैं जो बोल नहीं सकते। मूक हैं

©️®️ डॉ.अनु मधुप अनुभूति आस्था 
* स्थिति प्रज्ञ * शब्द सार्थक शब्द हो यह केवल स्थिति प्रज्ञ ही जान सकता है मौन और मुखर होना समय समझ और अपनी परिस्थिति से तय करें अन्यथा अनर्गल प्रलाप तो संशय ,संकट और सवाल को ही जन्म देते हैं *
स्वयं को बदल डालो *
* विचार : सन्दर्भ : शक्ति : डॉ.अनु * क्रांति या परिवर्तन वही सही है. जो तुम्हें तुम्हारे अंतःमन के भय से मुक्त करे, जो तुम्हें सांसारिक भीड़ से अलग खड़ा करे, और तुम्हारा सम्यक जो तुम्हें ' स्वयं ' लौटा दे
*
शक्ति. शब्द चित्र विचार
*

*
फोटो : सन्दर्भ : शक्ति : कर्म : ईश्वर

रास्तें का पत्थर
*
क़िस्मत ने मुझे बना दिया
किसी ने प्रेम से मुझे ईश्वर बना दिया
तो किसी ने राह चलते ठोकर लगा दिया

*

फोटो : सन्दर्भ : शक्ति : कर्म : कृष्ण

*
मिथ्या लोक लाज, समाज के भय से कभी अपने कर्म , कृष्ण निर्णय नहीं बदलना,
अधिकतर जन, सलाह ही देते हैं ' समाधान ' और ' साथ ' नहीं...

*
संदर्भ : चित्र : सोच : : शिव : शक्ति की
*
संसार हैं एक नदियाँ दुःख सुख दो किनारे हैं
न जाने कहाँ जाए हम बहते धारे हैं
*
जीवन में प्राप्त कष्ट और समस्याएं
दंड नहीं बेहतर जीवन जीने के अनुभव व नए रास्ते प्रशस्त करती हैं
*
साभार.
शक्ति. रेखा : उत्तराखण्ड
*

*
शक्ति विचार : सन्दर्भ फोटो.
*
भाई हो तो ऐसा ?
*
निश्चित नहीं ,कौन अपना और कौन पराया ,
शिशुपाल ' कृष्ण ' का ... रावण का ' विभीषण ' से बैर
उधर ......रक्तीय सम्बन्ध से हटकर ' राम ' ने सुग्रीव से
कृष्ण ने ' सुदामा ' से प्रीत निभाई
*
मन का ' संयम ' टूटा जाए
*
तप,ध्यान,मौन सब व्यर्थ हैं
यदि आपके अन्तःमन में क्रोध की ज्वाला है
हमको मन की शक्ति देना
दूसरों की जय से पहले ख़ुद को जय करें
*
जिंदगी का सफ़र ये है कैसा सफ़र

*
विचार : सन्दर्भ : फोटो : शक्ति.
*
अगर आप अपने ' मन ' के ' मिथ्या भ्रम ' ' और
' माया जाल ' में ही खोए रहेंगे तो इस ' मानव जीवन '
की सही ' सुन्दरता ' से चूक जायेंगे...मुसाफ़िर !
इसलिए जीवन के अंतहीन ' सफ़र ' में ' समय ' ' सच ' के साथ
सोना ' सज्जन ', ' साधु ' जन ' साध्वी ' और ' सद्गुरु ' की
तलाश जारी रखना,
*
तोरा मन दर्पण कहलाए
*
मन ही ईश्वर मन ही देवता
मन से बड़ा न कोई
*
सत्य कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे बाहर खोजा जाए,
बल्कि यह सब के भीतर उनके अंतर्मन का अनुभव है
जो अदृश्य है पहेली है जो व्यक्ति विशेष ही समझ सकता है
*
समस्या समाधान और संयम.
*
*
विचार सन्दर्भ स्केच : शक्ति. रीता
*
संकट के समय ,संयम , सहिष्णुता प्रयास और ईश्वर साथ का कभी नहीं
छोड़े, प्रिय ! समस्या का समाधान निकल ही जायेंगा
*
यदि मित्र ह्रदयगत परम स्नेही,सहिष्णु संवेदनशील हो तो सम्यक ' शक्ति ' बनकर
सदैव हमसाया हो कर साथ बने रहना चाहिए
*
संदेह : भरोसा और अन्तःमन.


*
फोटो : आभार : शक्ति
*
व्यक्ति की ' बुद्धि ' सदैव तो सदैव ' संदेह ' करती है
भरोसा तो केवल ' हृदय ' ' अन्तःमन ' ही जानता है..प्रिय !
*
तू जहाँ जहाँ रहेगा मेरा साया साथ होगा
*
*

टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग : शक्ति.
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शक्ति : महालक्ष्मी : दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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*
*
लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्य
*
शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.

*


*
महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
©️®️
M.S.Media.
*
प्यार समर्पण और संस्कार
*
*
छाया : विचार : सन्दर्भ : शक्ति  : रितु 
*
हमको तुमसे है हर ख़ुशी अपनी 
*
वास्तविक ख़ुशी क्या है 
जब कोई अपने समझे हुए आपके करम से हंसने लगे 
*
रिश्ते मैत्री और प्यार वहीं ठहरते हैं 
जहाँ समय, सुरक्षा, शब्द,समर्पण और संस्कार मिलता हो 
*
©️®️शक्ति प्रिया शालिनी सीमा सुनीता 
*
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः
*

विचार सन्दर्भ फोटो : शक्ति रितु
*
गंगा : भगीरथ 
सफलता के लिए प्रयास सतत रखें
बिना भागीरथ प्रयास के गंगा भी धरा पर नहीं उतरी थी
*

     सन्दर्भ : विचार : फोटो शक्ति स्मिता 
*
मैं जो बोलूं हा तो हा

*

*
किसी अन्य के बजाय स्वयं पर
विश्वास करना ही अधिक श्रेष्यस्कर है, प्रिय !
वही तुम्हें सफलता के
पहले और अंतिम सोपान तक़ ले जाएगा
*
तू जहाँ जहाँ रहेगा 
*

©️®️
M.S.Media.
     सन्दर्भ : विचार फोटो 
   राधिका : कृष्ण : शक्ति स्मिता 
*
मेरा साया साथ होगा 
*
प्रेम त्याग है  विश्वास है 
विश्वास से ही प्रेम की शुरुआत है 
 हर वक़्त साथ होना प्रेम नहीं 
 हर परिस्थिति में साथ होना प्रेम है 
*
शक्ति स्मिता
  एंकर पटना दूरदर्शन 
*

विचार : सन्दर्भ : फोटो : शक्ति.
* पाप और पुण्य * ' पुण्य ' क्या हैं ? आपकी बजह से किसी का प्रसन्न होना और ' पाप ' क्या है ? किसी सोना सज्जन साधु जन का आपकी बजह से दुःखी होना * कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

*
कौन कहता हैं तुमसे यह कार्य नहीं हो पायेगा
कोशिश कर के तो देखें
क्या पता पहले प्रयास में
ही सफलता आपके कदमों में हो
*

विचार : सन्दर्भ : शक्ति मीना.
*
उत्तम से ' सर्वोत्तम ' वही हुआ है प्रिय जिसने अपनी
' आलोचनाओं ' को धैर्यपूर्वक सुना है, सहा है  
और आवश्यकता पड़ने पर अपनी ' गलतियों ' को
सुधारा है
*
विध्वंस नहीं निर्माण ही फिर
*

*
विचार : सन्दर्भ : फोटो : शक्ति. रितु
*
याद रहें कई ' साल ' लग जाते है ' निर्माण ' में
और ' विध्वंस ' के लिए एक ' क्षण ' ही काफ़ी है

*
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
प्रथम मिडिया शक्ति.प्रस्तुति. 
*
 
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शक्ति. महासरस्वती : दर्शन  पृष्ठ : १ / ३.
--------
बुद्धि रूपेण संस्थिता नमस्तस्य. 
*

शक्ति.महासरस्वती.


*
नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर 
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना:सितम्बर. दिवस : ९.
*
संपादन
शक्ति.नैना @ प्रिया. श्रद्धा अनीता
*
धुंध : जीवन : दर्शन 
एक धुंध से आना है 
एक धुंध में जाना हैं 
*

जीने की राह
*
विचार सन्दर्भ : छाया : धुंध : डॉ. मधुप नवीन 
स्थान : महाबलेश्वर : महाराष्ट्र 
*
  जीने की राह  कोहरे में दिखती नहीं 
जब  कोई रास्ता नहीं दिखाई दें  तो 
बहुत दूर तक देखने की कोशिश व्यर्थ ही है ईश्वर को याद करें 
धीरे धीरे सावधानी सूझ बूझ एक एक कदम बढ़ते  रहिये 
राहें  अपने आप दिखने लगेंगी  
*
©️®️शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मधुप 
मनुष्य : ईश्वर : रिश्ते.
*

सन्दर्भ : फोटो : शक्ति : जवां सेन 
*
जिसने भी ' मुसीबत ' में एक ' कतरा ' साथ दिया है मेरी ' जिंदगी ' में
मैं उसे ' बदले ' में ' समंदर ' लौटाऊंगा
ये मेरा वादा है

*


*
शक्ति.नेहा.आर्य.अतुल.मुन्नालाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स.रांची रोड.बिहार शरीफ.समर्थित.
*

--------
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
-----------
*
मातृ शक्ति.
*
नमन


*
निर्मला सिन्हा.
प्रधान आचार्या.
१९४० - २०२३.
*
शेष है स्मृति विशेष है
संघर्ष : सहयोग : सफ़लता
के लिए आप
*
निर्वाण दिवस
१५। १२। २५.
प्रधान शक्ति संपादिका.

नव शक्ति.
श्यामली : डेस्क : शिमला.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९.
संस्थापना वर्ष : २०००. महीना : जनवरी. दिवस :५.
*
शक्ति.


*
शालिनी रेनू नीलम 'अनुभूति '.

*
कार्यकारी सम्पादिका.



शक्ति. डॉ.सुनीता शक्ति*प्रिया.
नैना देवी.नैनीताल डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७०..
संस्थापना वर्ष : १९९६.महीना:जनवरी: दिवस :६.
*

सहायक.कार्यकारी.
शक्ति.संपादिका.


*
शक्ति.डॉ.अर्चना सीमा वाणी अनीता.
कोलकोता डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.
*
दृश्यम :फोटो.
शक्ति सम्पादिका
*
*
शक्ति.नैना डॉ.अनु रितु मीना.
नैनीताल डेस्क.
*
* ममता हॉस्पिटल बिहार शरीफ : शक्ति डॉ.ममता. आर्य डॉ.सुनील कुमार: समर्थित *
----------- आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३. ----------- शिमला डेस्क *
* शक्ति रेनू अनुभूति शालिनी मानसी
*
* शक्ति अनुभाग : शालिनी *
* भाविकाएँ. *

शालिग्राम की बनी प्रिया तुम : तुलसी. *

*

आँगन में जो महक रही है, वह पावन सी क्यारी हो। देवों को अति प्रिय हो तुम, तुलसी मेरी भी प्यारी हो।। ​सात्विक भाव जगाती हो शक्ति, हर घर की तुम शान हो, कण-कण में घोलती अमृत, तुम वो दिव्य वरदान हो। तुमसे ही घर महक रहा है, पावन जिसकी क्यारी हो, देवों को अति प्रिय हो तुम, तुलसी मेरी भी प्यारी हो।। ​रोग-शोक तुम दूर भगाती, औषधि रूप निराला है, श्रद्धा के इस दीप ने ही तो, घर-आँगन को पाला है। रोगों को जो हर लेती हो, तुम वो सघन फुलवारी हो, देवों को अति प्रिय हो तुम, तुलसी मेरी भी प्यारी हो।। ​शालिग्राम की बनी प्रिया तुम, विष्णु के मन भाती हो, बिना तुम्हारे भोग न लागे, तुम ही मुक्ति दिलाती हो। हरि के मन को मोह लिया है, ऐसी तुम सुकुमारी हो, देवों को अति प्रिय हो तुम, तुलसी मेरी भी प्यारी हो।। ​सुबह-शाम दीप जलाकर, चरणों में जो शीश झुकाए, सुख-समृद्धि और शांति का, वह अनमोल वर है पाए। भक्तों के सौभाग्य की देवी, तुम ही मंगलकारी हो, देवों को अति प्रिय हो तुम, तुलसी मेरी भी प्यारी हो।। ​धरती की तुम दिव्य चेतना, ममतामयी स्वरूप हो, शीतल करती मन के तप को, तुम ही सुखद अनूप हो। सारे जग का कष्ट मिटाती, तुम अनुपम अवतारी हो, देवों को अति प्रिय हो तुम, तुलसी मेरी भी प्यारी हो।।
मुक्तछंद *
सन्दर्भ : फोटो : शालिनी. *
आध्यात्मिक प्रेम, सीमाएं बांधती हैं,इसे * आध्यात्मिक प्रेम, आत्मा के साथ, देह से पृथक..! अनन्त काल तक, अनवरत चलती है, जन्म-जन्मांतर तक..! ​यह बंधन नहीं, मुक्ति है, जो दो चेतनाओं को मिलाती है..! नश्वर का इसमें कोई स्थान नहीं, यह केवल शुद्ध अस्तित्व है..! दो आत्माओं का मौन संवाद, हर साँस में होता एहसास..! यह प्रेम अलौकिक है, अमर है, ईश्वर का दिया हुआ वर है..! इसे न सीमाएं बांधती हैं, न समय की धारा रोक पाती है..! यह एक शून्य में समाहित है, जहाँ द्वैत का होता अंत..! न हानि का कोई भय है, न वियोग का कोई क्रंदन..! यह मिलन है परम सत्य का, चेतना का शुद्ध स्पंदन..! यह ही योग है, यही वैराग्य, जीवन का सच्चा सार..! दोनों के हृदय में बसता, एक ही परम आधार..! यह अदृश्य है, पर सशक्त, हर पल देता है सहारा..! * अनुभाग 'शिव' और 'शक्ति' का यह प्रेम भाव
*
शिव गौरी : GIF *
ह केवल प्रेम नहीं, यह है भक्ति, ईश्वर की अनुपम धारा..! इसी भाव से जग चलता, यही है जीवन का अर्थ..! यह चिरंतन है, यह सनातन, प्रेम, जो कभी न होता व्यर्थ..! यह प्रेम ही तो साधना है, मोक्ष की ओर ले जाने वाली..! जीवात्मा का परमात्मा से, अंतिम और पूर्ण मिलन..! जहाँ "मैं" और "तू" का भेद मिटे, सब कुछ हो जाए एकरूप..! यही है ज्ञान, यही वैराग्य की पराकाष्ठा, आनंद का शुद्धतम स्वरूप..! इस प्रेम की ही खोज में, संतों ने त्यागा जग सारा..! यह केवल आत्मा का नहीं, यह 'शिव' और 'शक्ति' का जुड़ाव है..! जहाँ सृष्टि का रहस्य छिपा, हर कण में उसका फैलाव है..! यह है प्रेम का उच्चतम स्तर, जो हर बंधन से मुक्त करता है..! आत्मा को उसके मूल स्वरूप में, परम धाम तक पहुँचाता है..! अनुभाग. *
राधा के बिना कृष्ण अधूरे, * राधिका : कृष्ण : कलाकृति : *
सन्दर्भ : कर्नल. सतीश सिन्हा
यह राधा और श्याम का रास, जहाँ प्रेम ही बना परिभाषा..! देखा नहीं, पर अनुभव हुआ, हर पुकार में कृष्णा की भाषा..! राधा के नयन में कान्हा, कान्हा की बंसी में राधा..! नाम अलग, पर सार एक, जैसे निर्गुण से सगुण साधा..! प्रेम की वह उच्चतम सीढ़ी, जहाँ विराग भी बन गया अनुराग..! यह प्रेम नहीं केवल कहानी, यह 'ह्लादिनी शक्ति' का जाग..! यही तो है वह दिव्य स्नेह, जो गोलोक में होता साकार..! राधा के बिना कृष्ण अधूरे, यह प्रेम है मोक्ष का द्वार..! हर कण में है ब्रज की छाया, हर धड़कन में उनका नाम..! यह है प्रेम का परम स्वरूप, राधा-माधव का अविराम..!
* शक्ति शालिनी प्रधान सम्पादिका. कवयित्री * भाविका पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा माधवी अनुभूति * शक्ति : अनुभाग : २ शक्ति रेनु शब्द मुखर * * प्रधान सम्पादिका महाशक्ति मीडिया * भाविकाएँ * सिर्फ़ तुम.
* शक्ति : फोटो : रेखा : देहरादून * तुम्हारा नाम लूँ तो दिल मुस्कुरा जाता है, जैसे हर अधूरा पल अचानक पूरा हो जाता है। तुम साथ हो तो हर पल प्यारा सा लगता है, हर एक ख़्वाब मुमकिन होने लगता है। प्यार कोई वादा नहीं, प्यार तो साँसों की आदत है, जो तुम पास न भी हो तब भी साथ होने की राहत है। ज़िंदगी तुमसे कुछ माँगती नहीं ज़्यादा, बस इतना सा चाहती है- हर जन्म में तुम जैसा ही साथी हो … रेनू ‘शब्दमुखर’
सांता ! आज जब तुम आओगे तो एक काम करना *
शांता : GIF * सांता ! आज जब तुम आओगे तो एक काम करना पल-पल फिसलते हुए रिश्तों को अपने झोले से खुशियों का पुलंदा मेरे नाम करते हुए उनको थामते जाना कल तक जो रिश्ते अपने थे उनमें भावों की ऊष्मा खत्म होने लगी है कल तक जिन बातों में रस था आज उनमें विष नजर आने लगा है कल तक इक-दूजे के सुख-दुख में ढाल बन कर साथ खड़े थे आज वे बच कर निकलने लगे है कल तक जिनको पाकर सूरज-सा खिल रहे थे आज राख की ढेरी से बुझ रहे हैं फिर भी ,कुछ अवशेष है वो प्यार,वो साथ,वो भावनाएं, वो सपने जो साथ देखे थे उन सबको हे सांता ! खंडित होने से रोक लो तुम बस इस इच्छा को इतने वर्षों की साधना को ये सुंदर उपहार दे, मेरे मन को अपने इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर कर ' सांता आया खुशियां लाया ' पंक्ति को चरितार्थ कर क्रिसमस के त्योहार को सार्थक कर दो * प्रेम का अमर दीया. *
* साभार : सन्दर्भ : फोटो : शक्ति * प्रेम कोई दूर का सफ़र नहीं, यह तो दिल की धड़कनों में जलता दीया है। वक्त की आंधियों से पलट कर भी, यह बुझता नहीं,बस और तेज़ होता है। लोग भले बदल जाएँ, पर प्रेम की लौ बुझती नहीं। वो फ़र्क नहीं पड़ता वक्त के कदमों में, क्योंकि प्रेम तो एक जज़्बा है,आग की तरह। हर याद, हर मुस्कान, हर आवाज़ में, वह उम्मीदों का उजाला जगाता है। प्रेम कभी खत्म नहीं होता, बस नए रंगों में रंगता रहता है। मन की सबसे गहरी लाइनों में छिपा, प्रेम की वह मशाल सदियों तक जलती रहेगी। जब भी दिल तड़पे, वह लौ फिर से प्रज्वलित होगी, और हमसे कहेगी - जियो, मोहब्बत से जियो! क्योंकि प्रेम है- अमर, अडिग, और हमेशा तैयार हमारे हर संघर्ष, हर जीत के लिए।
* भाविकाएँ * ये जो मन की सीमा रेखा है
*
फोटो सन्दर्भ : शक्ति डॉ. अनु *
कुछ आघात… इतने गहरे होते हैं, कि समय की मरहम भी उन पर असर नहीं कर पाती। शब्दों का प्रहार अक्सर तलवार से भी तीखा होता है; भीड़ में कही गई कठोर बातें एकांत में हज़ार बार प्रतिध्वनित हो उठती हैं। मन भले ही सामान्य दिखने लगे, पर हृदय के किसी एकांत कोने में वह पीड़ा चुपचाप ठहर जाती है, जैसे मौन का कोई अनचाहा साथी…
* कवयित्री. शक्ति रेनू शब्दमुखर प्रधान सम्पादिका. * भाविका पृष्ठ सज्जा : शक्ति प्रिया मंजिता सीमा अनुभूति * ----------- *
वो शाम भी कुछ अजीब थी *
सन्दर्भ : फोटो : डॉ.अनु. * यादों की तश्तरी में वह गोधूलि शाम बेहद खूबसूरत थी डूबता सूरज मद्धिम अंधेरा, सुरमयी सी गहराइयों में उसका होले से संबल देना उन बेतरतीब आंसुओं को मेरे कपोल से उठा भीनी मुस्कुराहट के साथ अपने पास सहेजते हुए पसरे हुए मौन में संवाद भरते हुए उम्मीद की जद में अभी भी जमाना है जो सोचा है वो पाना है यूँ नहीं आंसुओं को बहाना है इश्क फिर मुकम्मल करना है। * कवयित्री. शक्ति रेनू शब्दमुखर प्रधान सम्पादिका *
भाविका पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा माधवी अनुभूति * ग़ज़ल * बहारें अब न आती है गली के इस मुहाने पर.
* रेखांकन : सुनील दत्त : नंदा : साभार. * ग़ज़ल. * जुदा हो कर यहां से तू कहां अब जी लगाते हो सितमगर ने सितम ढाये नजर पर तू न आते हो। जो रुखसत की घड़ी हीं थी बताकर तूं गये ना क्यूं बताओ ना नज़र खोजे नजर क्यूं अब न आते हो। लगे है फिर बुलाओगे अभी भी लौट आवोगे बुझाते थे जलाते थे दिये अब ना बुझाते हो। निगाहें ढ़ूंढ़ती तुमको ही खाबों में खयालों में मगर अफसोस आंखों में न अब सूरज बसाते हो। बहारें अब न आती हैं गली के इस मुहाने पर मुक्कमल है खिजा तब से यहां जब से ना आते हो। लकीरों में नहीं थे तुम मेरे हाथों के बस केवल तभी तो धड़कनों में तुम समाये से ही भाते हो। नफस में जब भी कोई खाब हल्के से चमकता है तसव्वुर में मैं खोता और तुम दिल ही जलाते हो * डॉ.आर के दुबे *
* डॉ.आर के दुबे.
शक्ति सीमा. * पृष्ठ सज्जा संपादन शक्ति प्रिया डॉ सुनीता सीमा रेनू
----------
पांव जमीं पे रखो 
आस्मां में घर नहीं होता 
--------
गज़ल.
 
*
फोटो : संदर्भ : शक्ति नीतू 
*
पांव जमीं पे रखो आस्मां में घर नहीं होता
वजह है सबकी बेवजह कुछ नहीं होता. 
देखिए हीरे और शीशे में बड़ा फर्क होता है
हर चमकदार पत्थर यहां हीरा नहीं होता.
सफ़र पे चलते हैं सब  मंजिल के लिए 
पर हर सफर यहां सबका पुरा नहीं होता.
अनीश वक्त रहमदिल बेरहम भी है यहां 
सफरे जिन्दगी एकसां कभी बसर नहीं होता.
*
अरुण कुमार 
शक्ति.आरती
* कविता पाठ मैं बाखली हूँ : पलायन पर एक दर्द भरी कविता शक्ति बीना।डॉ.नवीन जोशी. नवीन समाचार नैनीताल *
प्रस्तुति मीना अंजू भारती ललिता.जोशी
*
*
आर्य डॉ दीनानाथ वर्मा : फिजिसियन : दृष्टि क्लिनिक : बिहार शरीफ : समर्थित 
-------- तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४. ---------- संपादन शक्ति * शक्ति शालिनी प्रीति अनुभूति नीलम. * लघु कथा : सांप और सीढ़ी.
ऑफिस में प्रमोशन की लिस्ट लगी थी। नोटिस बोर्ड के सामने भीड़ जमा थी। आरव का नाम सबसे ऊपर देखकर तालियाँ बजों। वह मुस्कुराया, पर कुछ चेहरों की मुस्कान अचानक गायब हो गई। ' वाह ! प्रमोशन ? लगता है किस्मत खुल गई इसकी ! एक ने ताना कसा। ' किस्मत ? अरे भाई, विना कुछ जोड़-तोड़ के ये मुमकिन नहीं, ' दूसरे ने फुसफुसाया। दिन भर यही फुसफुसाहट अफवाहों का रूप लेती रही,..' बॉस को खुश किया होगा, तभी ये आगे निकला है। '
इतने साल से मेहनत करने वाले लोग पीछे,और ये ऊपर। आरवं सुनता रहा, चुप रहा। कल तक जो लोग दोस्त थे,आज सांप क्यों बन गए ?
शाम को लिफ्ट में जाते हुए उसने सुना, ' इसे गिराना पड़ेगा, वरना हम सबका रास्ता रोक देगा। ' घर पहुँचा तो उसकी नज़र गली के बच्चों पर पड़ी। एक बच्चा सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, और दूसरा बार-बार उसका पैर खींच रहा था।
आरंव ने दोनों को अलग किया और मुस्कराकर कहा, ' अगर तुम इसे गिराओगे,तो खुद ऊपर कैसे चढ़ोगे? ' यह सुनकर बच्चा चुप हो गया। आरव के मन में गूंज यही तो हो रहा है मेरे साथ। अगले दिन ऑफिस की मीटिंग में आरव ने एक वाक्य कहकर सबको खामोश कर दिया, ' दोस्तों, किसी को गिराकर आप ऊँचे नहीं हो संकते। ....जीत का असली स्वाद तब है जब आप किसी को चढ़ने में सहारा देते हैं। याद रखिए- सीढ़ी बनने में ही सच्ची ताकत है, सांप बनने में नहीं। ' उसके शब्द जैसे सबके दिल में उतर गए। कमरे में पहली बार खामोशी थी.. पर यह खामोशी बदलाव का वादा कर रही थी।
फोटो : शक्ति मीडिया
पृष्ठ सज्जा : शक्ति शालिनी मंजिता सीमा प्रीति
* दोस्त : मैत्री प्यार : याराना मेरे दिल की ये दुआं है तू दूर कहीं नहीं जाए. *

* शक्ति : आलेख : शक्ति प्रिया रेनू शब्द मुखर सह डॉ सुनीता मधुप *
गलतियां हर इंसान से होती हैं कोई भी पूर्ण नहीं होता। कमियां भी सबमें होती हैं, लेकिन रिश्ता जोड़ लेने के बाद उन्हीं पर लड़ते रहना उसे धीरे-धीरे मिटा देता है।प्यार निभाने का असली अर्थ है एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करना, समझनों और भरोसे की डोर को मजबूत बनाए रखना।
मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया : रिश्तों की दुनिया में सच्चा स्नेह और भरोसा ही वह नींव है, जो हर तूफान झेल लेती है। जब कोई आपसे दिल से जुड़ता है, सम्मान देता है, तो हमारा फर्ज बनता है कि हम उसका विश्वास कभी न तोड़ें। झूठ बोलना, दूसरों के सामने लज्जित करना या बुरे वक़्त में साथ छोड़ देना ये वे कदम हैं, जो रिश्ते को जड़ से कमजोर कर देते हैं।
आज के दौर में, जहां सोशल मीडिया पर हर पल की चमक दिखाई जाती है, रिश्ते अक्सर ईगो की भेंट चढ़ जाते हैं। एक तरफ दोस्त को आकाश छूने वाले शब्दों से ऊपर उठा दिया जाता है, तो दूसरी तरफ छोटी-सी गलती पर उसे धड़ाम से नीचे गिरा दिया जाता है।

दोस्तों की कमियों खूबियों दोनों को स्वीकारें : ऐसे उतार-चढ़ाव न केवल रिश्तों को तोड़ते हैं, बल्कि मन में अविश्वास की खाई भी पैदा कर देते हैं। गलतियां हर इंसान से होती हैं कोई भी पूर्ण नहीं होता। कमियां भी सबमें होती हैं, लेकिन रिश्ता जोड़ लेने के बाद उन्हीं पर लड़ते रहना उसे धीरे-धीरे मिटा देता है। प्यार निभाने का असली अर्थ है एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करना, समझना और भरोसे की डोर को मजबूत बनाए रखना। यह केवल एक पक्ष की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दोनों का संयुक्त प्रयास है। सोचिए, यदि दोस्ती में इंगो हावी हो जाए और बात-बात पर अपमान होने लगे तो वो रिश्ता कितना टिकेगा ?
लेकिन रिश्ता जोड़ लेने के बाद उन्हीं पर लड़ते रहना उसे धीरे-धीरे मिटा देता है। प्यार निभाने का असली अर्थ है एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करना, समझना और भरोसे की डोर को मजबूत बनाए रखना। यह केवल एक पक्ष की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दोनों का संयुक्त प्रयास है। सोचिए, यदि दोस्ती में ईगो हावी हो जाए और बात-बात पर अपमान होने लगे, तो वह रिश्ता कितना टिकेगा?
सम्मान स्थिरता और समभाव ही है मैत्री और प्यार का आधार : आजकल लोग खुद को दूसरों से बेहतर साबित करने की होड़ में लगे रहते हैं, लेकिन भूल जाते हैं कि सच्ची दोस्ती में सम्मान और स्थिरता ही असली मापदंड हैं। समाज में यह समस्या आम होती जा रही है। एक दिन व्हाट्सएप पर तारीफों के पुल बांध दिए जाते हैं, तो अगले ही दिन स्टेटस पर व्यंग्य के तीर चला दिए जाते हैं।
इससे न केवल व्यक्तिंगत रिश्ते टूटते हैं, बल्कि पूरे सामाजिक ताने-बाने पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि रिश्तों को मजबूत रखने के लिए संवाद बेहद जरूरी है गलतफहमियों को बातचीत से सुलझाइए, ईगो से नहीं।
आ बता दें कि तुझे कैसे जिया जाता है : कमियों को नजर अंदाज न करें, बल्कि उन्हें सुधारने में साथ दें। जब दोनों मिलकर रिश्तों को निभाते हैं, तभी वे सच में खूबसूरत बनते हैं। तो आइए, आज से यह संकल्प लें कि अपने प्रियजनों का सम्मान करेंगे, भरोसा बनाए रखेंगे और ईगो को दरकिनार कर रिश्तों को सींचेंगे। याद रखिए, सच्चा
प्यार उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि स्थिरता सिखाता है।
* पृष्ठ संपादन : शक्ति रीता प्रीति तनु बीना जोशी पृष्ठ सज्जा : डॉ अनु मंजिता रितु माधवी



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नकली चेहरा सामने आए असली सूरत छिपी रहे.
शक्ति. आलेख.कटाक्ष.
साभार : शक्ति. आराधना शर्मा
प्रस्तुति शक्ति. शालिनी अनुभूति नीलम प्रीति.

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आत्ममुग्ध के व्यवहार : जब आप किसी आत्ममुग्ध के व्यवहार की सच्चाई सामने लाते हैं चाहे बहुत शांति से ही क्यों न कहें तो आप उसे सबसे ज़्यादा चुभने वाली जगह पर छू देते हैं : सच। ऐसे लोग दिखावे, नियंत्रण और अपनी बनाई कहानियों पर जीते हैं। जैसे ही आप उनके झूठ को मानना बंद करते हैं या उनकी बातों में विरोधाभास देखने लगते हैं, उनका नकाब उतरने लगता है। उन्हें साफ़-साफ़ पहचाना जाना बिल्कुल पसंद नहीं होता। उनके लिए अपनी गलती मानना हमला लगता है और सच्चाई अपमान।
जब तक फ़ायदा तबतक प्यार या रिश्ता : एक आत्ममुग्ध तब तक ही किसी की ज़िंदगी में रहता है, जब तक उसे फ़ायदा मिल रहा हो। उन्हें प्यार या रिश्ता नहीं, अपना मतलब ज़्यादा प्यारा होता है। जिस दिन आप उनकी तारीफ़ करना, उनकी हर बात मानना या उनके आगे झुकना बंद कर देते हैं, उस दिन उनकी दिलचस्पी कम हो जाती है। फिर वे किसी ऐसे इंसान को ढूँढने लगते हैं जो उन्हें फिर से अहम महसूस कराए। आपको उन्होंने आपके लिए नहीं, बल्कि अपने फ़ायदे के लिए चुना था।
अगर आप मज़बूत सोच वाले हैं, आसानी से बहकने वाले नहीं हैं और खुद फैसले लेते हैं, तो वे आपको ज़्यादा मुश्किल मानते हैं। आत्ममुग्ध बराबरी का रिश्ता नहीं चाहते, वे चाहते हैं कि सामने वाला चुपचाप माने। वे चाहते हैं कि आप खुद पर शक करें, उन पर नहीं। जब उन्हें लगता है कि आप समझदार और अंदर से मज़बूत हैं, तो वे असहज हो जाते हैं, क्योंकि आप उन्हें उनकी सच्चाई दिखा देते हैं और वे इससे भागते हैं।
समझदारी और आत्मसम्मान की अपनी सीमाएं : सीमाएँ बनाना, समझदारी और आत्मसम्मान रखना उनके झूठे रुतबे को तोड़ देता है। आपके बराबर आने की बजाय, वे आपसे दूर हो जाते हैं और किसी ऐसे को ढूँढते हैं जिसे कंट्रोल करना आसान हो। इसका आपके महत्व से कोई लेना-देना नहीं है, यह उनकी अपनी कमज़ोरी है।
और सबसे ज़रूरी बात उनसे जितनी दूरी हो, उसी में आपकी सुरक्षा है। जब कोई आत्ममुग्ध आपकी ताक़त और सच्चाई से दूर भागता है, तो समझ लीजिए कि आप सही रास्ते पर हैं। आपकी सीमाओं ने उन्हें दूर नहीं भगाया, बल्कि शोषण को रोका है। यह नुकसान नहीं है, यह राहत है। अगर आज आपने चुप रहना नहीं, खुद को चुनना सीखा है..तो यह आपकी जीत है। इस पोस्ट को अपने दिल में सहजता से रखें उन दिनों के लिए पढ़ें जब मन डगमगाए।
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लेख के कुछ अंश ही प्रकाशित किये गए
पृष्ठ सज्जा : शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मंजिता सीमा
सन्दर्भ फोटो : साभार शक्ति
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विशेषांक : यादें न जाए : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५.
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दृष्टि क्लिनिक : बिहारशरीफ.आर्य.डॉ.दीनानाथ वर्मा:ह्रदय शुगर रोग विशेषज्ञ :समर्थित.

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सम्पादकीय :धारावाहिक : यात्रा संस्मरण : पृष्ठ : ५ / ०.
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संपादन शक्ति.नीलम प्रीति तनु बीना जोशी
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क्रिसमस विशेष ------------ यात्रा विशेषांक : उत्तराखंड परिशिष्ट .पृष्ठ ५ / ०
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ये पर्वतों के दायरे : यात्रा संस्मरण से साभार
*
वो तुम नहीं तो कौन थी : तुम्ही तो थी 
*
डॉ. सुनीता मधुप.
शक्ति प्रिया.डॉ अनु अनुभूति सीमा.


नैनीताल : सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस चर्च : 
१८५६ से पूर्व की स्थिति. फोटो साभार : डॉ.नवीन जोशी

दिसंबर : ठंड : नैनीताल : धुंध क्रिसमस : मुझे दिसंबर और जनवरी महीना बेहद अच्छा लगता है क्योंकि मैदानी इलाके में रहते हुए मुझे पहाड़ों,यथा अपने घर की याद आने लगती है। इन दिनों सर्दियां पड़ रही होती है। धुंद रास्तें में पसरी होती है।रास्तें खाली मिलते है। लोग घरों में कैद होते हैं। आबादी नहीं के बराबर दिखती है।
२५ दिसंबर के आस पास शांता क्लॉज के कदमों की आहट सुनाई देने लगती है। चीड़ और देवदारों के घने जंगलों से रेंडीयरों के द्वारा स्लेज खींची जाने की आवाजें भी मेरे स्नो हाउस तक आने लगती है। चांदनी बर्फ़ के ढलानों पर बिछी होती है। हलकी नीलिमा फैली होती है। मुझे इसलिए नीला रंग बेहद पसंद है। बर्फ़बारी में अपने घर के बाहर तुमने जुराबें टांगी की नहीं मैं अक्सर तुमसे पूछता भी हूँ। कहते है शांता सारी इच्छाएं पूरी करते हैं।
शांता क्लॉज के कदमों की आहट :
जब कभी भी क्रिसमस पास होता है ईशा, चर्च ,कैंडल सब कुछ स्मृत हो जाता है। ईशा इसलिए याद आते हैं क्योंकि इतिहास साक्षी है कि ऐसा भी हाड़ मांस का व्यक्ति इस धरा पर पैदा हुआ जिसने सब पीड़ाएँ सही और समस्त जगत की मानवता की रक्षा के लिए अपना जीवन दे दिया। इसलिए जब कभी भी मैं अपने गांव ( पहाड़ी स्थान ) जा रहा होता हूँ तो वहाँ के चर्च को जरूर देखता हूँ क्योंकि जीवन की अवस्था में इस सन्यास आश्रम के काल में मुझे शांति और सम्यक साथ की बेहद तलाश है। जीवन का अर्थ ढूंढना है अब इस उम्र में अर्थ ( धन ) की उतनी अहमियत नहीं। जरुरत भी इतनी ही जितनी की आवश्यकता हो।
वो तुम नहीं तो कौन थी : तुम्ही तो थी हम विश्व के श्रेष्ठ हिन्दू धर्म के अनुयायी होने की बजह से ही सभी धर्मों के अच्छे सारों को अपने भीतर आत्मसात करने के लिए प्रेरित और सदैव तत्पर रहते हैं। नैनीताल प्रवास के दरमियाँ मैंने जिस चर्च को देखा है उसका व्योरा मैं आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।
मेरी खुद की लिखी ये पर्वतों के दायरें,नैनीताल.उत्तराखंड यात्रा वृतांत ३.धारावाहिक.अंक ९.से साभार ली गयी है,इस छोटे से अंश का आंनद आप भी उठाए।
वो तुम नहीं तो कौन थी, जिसने मुझे पवित्र बाइबिल,भागवत गीता की तरह ही पढ़ रखा है। समझ रखा है, अर्थ जान रखा है। वो तुम ही तो हो ,अनु जो मुझे पूरी शिद्दत से जानती हो, मेरे जीवन के सारांश को समझती हो ,....बिना बोले, बिना कहे।
बचपन, विलियम वर्ड्सवर्थ, सोलिटरी रीपर,स्कॉटलैंड की पहाड़ियां,रेनबो, ....चर्च, कैंडल पढ़ते पढ़ते मैं
कब थोड़ा सनातनी थोड़ा ईसाई बन गया था मुझे तो पता ही नहीं चला, अनु !
मेरे रंग में रंगते रंगते आप भी कब से सनातनी हिन्दू से उदार हो रही थी ...इसकी भी मुझे जानकारी दिन ब दिन हो ही रही थी। परिवर्तन तो महसूस किया जा सकता था न
स्नो,रेन्डियर ,शांता, क्रिसमस ट्री,चर्च , जिंगल बेल , स्लेज से आप भी जुड़ने लगी है यह बोध तो मुझे बीते कई सालों से होने लगा था। जब से आप मेरी तरह सर्विस टू मैन इज सर्विस टू गॉड...आदि के सिद्धांतों में विश्वास रखने लगी थी। आप में बदलाव मेरे लिए तो पठनीय ही था। आज भी आप पूरे मनोयोग से क्रिसमस सेलिब्रेट करती है,मैं यह भली भांति जानता हूँ। मैंने देखा भी है।जब भी मैं कारण पूछता तो आप हँस कर कहती , '...आपके लिए ..मैं क्या नहीं कर सकती हूँ ...कुछ भी। देख लीजियेगा ...तुम्हारे लिए ....एक दिन आपकी जोगन बन भी बन जाऊंगी ...."
याद है,अनु इधर पता नहीं क्यों पिछले एकाध सालों से मैं आपको नेस्ट टू सुप्रीम पॉवर ही मानने लगा हूँ न ? एकदम से सच्ची,अदृश्य शक्ति जैसी। न जाने क्यों याद कर लेने मात्र से ही सुरक्षित महसूस करने लगता हूँ ...
मुझे देखती हुई, मेरी हर पल की निगरानी करती हुई। रात में पहाड़ी धुंध में पसरती, खिली हुई चांदनी जैसी...सुबह में कमल के पत्तों पर ठहरी ओस की बूंदों जैसी। मानो समस्त ब्रह्माण्ड में आप वर्तमान हो।
मुझे याद है आर्य समाज मंदिर में उस दिन मैं बहुत पहले ही उठ गया था। दूर नैना देवी का प्रवेश द्वार यहाँ से भी दिख रहा था। एकदम से चिर शांति दिख रही थी।
कुछ लोग प्रातः ही आर्य समाज मंदिर में यज्ञ के लिए आ चुके थे। भजन कीर्तन का कार्यक्रम पहले की तरह चल ही रहा था। कोई आर्य समाजी अनूप जलोटा का भजन...कैसी लागी लगन ...मीरा हो गयी मगन ...गा रहा था।
नित्य क्रिया से फ़राग़त होने के बाद नीचे बजरी वाले मैदान में उतर गया था। वही गोरखे से एक प्याली गर्म चाय ली और फूंक फूँक कर गर्म ही पीने लगा था। तब कोई यही दिन के आठ बज रहें थे।
हम हाई कोर्ट के पास के रास्ते से ही सूखा ताल जाने वाले थे ना ? रात में भी हमने नवीन दा से इस सन्दर्भ में ढ़ेर सारी बातें की थी। उन्होंने इसके इतिहास पर व्यापक प्रकाश भी डाला था। बस हमें वहां जाना और देखना मात्र था। ....

*
सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस : ‘ जंगल के बीच ईश्वर का घर.’
नैनीताल का सबसे पुराना चर्च.
डॉ. मधुप रमण.
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ये पर्वतों के दायरें,नैनीताल.
उत्तराखंड यात्रा वृतांत ३.धारावाहिक.अंक ९. से साभार
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गतांक से आगे : १
चलो एक बार फिर से अज़नबी बन जाए हम दोनों

नैनीताल की सुबह बेहद खूबसूरत, शांत और ठंडी होती है, जहाँ ताज़ी हवा, सुहावनी धूप और झीलों की शांति महसूस होती है। पर्यटक माल रोड पर चहलकदमी करते दिख ही जाते हैं, जाने वाले सुबह सुबह नैना मंदिर कर आते हैं। कितने लोग और स्थानीय परांठे,चाय,टोस्ट व मैगी का आनंद लेने वाले दिख जाते हैं, अनु , तुम तो जानती ही हो। जबकि शाम होते ही फिर से ठंडक बढ़ जाती है, खासकर सर्दियों में, जैसा कि
तुम अक्सर बताती हो बाहर से आने वाले सैलानियों की आवा जाही बढ़ी ही रहती है ।
सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस चर्च : हमने सुन रखा था नैनीताल का सबसे पुराना सूखाताल क्षेत्र में स्थित चर्च है। मैं बजरी बाले मैदान के मस्जिद के पास खड़ा तुम्हारी राह देख रहा था।
कुछ देर में ही तुम आ गयी थी। हम पैदल ही हाई कोर्ट के रास्तें चढ़ाई के लिए निकल पड़े थे।साथ चलते हुए तुमने पूछा भी, ' ....थकेंगे तो नहीं ना .... ? ...चलना पड़ेगा..'
'देखता हूँ ....
राह चलते चलते तुमने पुरानी बातें बतलानी शुरू कर दी थी , '....इतिहास साक्षी है साल १८४१ से ही नैनीताल में बाहरी लोगों के बसने की प्रक्रिया आरम्भ हो गयी थी।अंग्रेज जहाँ कहीं भी गए उन्होंने अपने लिए चर्च बनवाए। आबादी के बसने की शुरूआत के साथ ही इस सरोवर नगरी में अंग्रेजों के पूजास्थल के रूप में स्थान ढूंढना शुरू कर दिया था ...'
इस चर्च की स्थापना के लिए अंग्रेज अधिकारी प्रयासरत हो गए थे।
अंत में इस कार्य हेतु कुमाऊं के वरिष्ठ सहायक कमिश्नर जॉन हैलिट बैटन ने काफी सोच विचार करने के बाद चर्च बनाने के लिए सूखाताल के पास इस स्थान को बेहतर समझते हुए चुना था ।
थोड़े देर सुस्ताने के लिए मैं सड़क के किनारे ही पत्थर पर बैठ गया था। तुमने थोड़ी देर ठहरते हुए फिर चर्च की कहानी दुहरानी शुरू कर दी थी , '...मार्च १८४४ में कोलकाता के बिशप डेनियल विल्सन
टहलते हुए हमलोग चर्च के एकदम नजदीक पहुंच चुके थे। आस पास लगभग सन्नाटा पसरा हुआ था। पेड़ों की कतारें आसमान जैसे क्षितिज को छू रहीं थी। पूजा के लिए तो शांति की अतीव आवश्यकता होती है न । शांति हो तो मनन चिंतन में मन लगता है। है ना ,अनु ? कुमाऊं के तत्कालीन कमिश्नर जीटी लूसिंगटन के आदेश पर अधिशासी अभियंता कैप्टन यंग ने चर्च की इमारत का एक मुकम्मल नक्शा बनाया। अक्टूबर १८४६ में चर्च का नक्शा पास हुआ और आगे चल कर विशप के कार्यकाल के १३ वर्ष पूरे होने के मौके पर १३ अक्टूबर १८४६ को चर्च की इमारत का शिलान्यास हुआ। और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया ......' तुम अपने धुन में बोले जा रहीं थी।
एक पादरी के साथ नैनीताल भ्रमण के लिए आए। अथिति विशप को चर्च के लिए चुनी गई इस जगह पर ले जाया गया तो उन्हें पहली नजर में यह जगह इतनी पसंद आ गई कि उन्हें यह जगह जन्नत जैसी लगी
इसलिए बिशप ने इस चर्च को नाम दिया ‘ सेंट जॉन इन द विल्डरनेस , यानी ‘ जंगल के बीच ईश्वर का घर 
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सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस : ‘ जंगल के बीच ईश्वर का घर.’
नैनीताल का सबसे पुराना चर्च.
डॉ. मधुप रमण.
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ये पर्वतों के दायरें,नैनीताल.
उत्तराखंड यात्रा वृतांत ३.धारावाहिक.अंक ९. से साभार
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गतांक से आगे :२
चल बैठे चर्च के पीछे

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चर्च : वीरानगी : हम और तुम : सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस : फोटो : शक्ति. बीना नवीन जोशी

जानते है एक अनोखी बात ...? क्या .....? तुमने कहा , ' ...इस चर्च के शिलान्यास की पूरी दिलचस्प कहानी एक कांच की बोतल में लिखकर बोतल को इमारत की बुनियाद में रख दिया गया था। पता नहीं क्या सोच रही होगी। आगे चर्च की इमारत तो दिसंबर १८५६ में बन कर तैयार हुई, परंतु इससे पहले ही २ अप्रैल १८४८ को निर्माणाधीन चर्च को पहले ही आम अवाम के प्रार्थना के लिए खोल दिया गया। चर्च के निर्माण में उस समय लगभग १५ हजार रुपए खर्च हुए थे । यह धनराशि १८०७ में चंदे के रूप में जुटाई गई थी। इसके लिए वहां मौजूद कमरों को किराए पर लगाया गया भी था। याद रखने योग्य यह है कि चंदे से जुटाए गए ३६० रुपए से रुड़की के कैनाल फाउंड्री से चर्च के लिए पीतल का घंटा भी बनवाया गया जिसे यहाँ स्थापित किया गया, जिसमें यह लिखा गया था - एक आवाज - शून्य में चिल्लाना।
साल १८ सितंबर १८८० को नैनीताल में हुए प्रलयंकारी भूस्खलन हुआ जिसमें ४३ यूरोपियन सहित १५१ लोग मारे गए। इनमें से कुछ को चर्च में लगे कब्रिस्तान में दफनाया गया और इस भूस्खलन में मौत के मुंह में समा गए यूरोपियन नागरिकों की याद में चर्च मे एक पीतल की पट्टी
पर सभी यूरोपियन मृतकों के नामों का उल्लेख किया गया, जिसे आज भी यहां देखा जा सकता है। '
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फोटो : मधुप. शक्ति : अनु. 
चर्च फोटो :  सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस : शक्ति बीना नवीन जोशी

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सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस : ‘ जंगल के बीच ईश्वर का घर.’
नैनीताल का सबसे पुराना चर्च.
डॉ. मधुप रमण. 
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ये पर्वतों के दायरें,नैनीताल.
उत्तराखंड यात्रा वृतांत ३.धारावाहिक.अंक ९. से साभार
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गतांक से आगे : ३
मेरे जीवन के एकाकीपन का गीत संगीत
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मैं
,तुम,मेरी तन्हाई और चर्च सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस.फोटो.शक्ति.प्रिया
डॉ.अनु मधुप.नैनीताल
*
इस बार भी गर्मियों में जब मैं नैनीताल गया था तो आप विदेश के दौरे पर थी। मैं तुम्हारे बिना ही सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस ‘ जंगल के बीच ईश्वर का घर ’ देखने अकेले ही चला गया था। हाई कोर्ट के पास ही मैंने किसी मोटर साइकिल वाले से लिफ्ट ले ली थी। सहर्ष तैयार हो गए थे। शायद वह भी चर्च ही जा रहे थे। जल्द ही हम वहाँ पहुंच गए थे।
वहाँ कितनी चिर शांति पसरी पड़ी थी अनु...? चर्च खाली पड़ा था। पादरी भी नहीं थे। सुबह ही तो हुई थी अभी। इतनी सुबह इतनी जल्दी लोग थोड़े ही आते हैं ?मैं कुछ पहले ही आ गया था।
कुछ लोग दिखे जो सुबह सबेरे चहल कदमी करने आए थे। उनमें से ही किसी ने बताया चर्च अब प्रेयर टाइम में ही खुलता है ...रविवार के दिन...
निराशा हुई थी। चर्च खुला होता तो एक कैंडल भी जलाता अपनी तुम्हारी सुख समृद्धि के साथ साथ समस्त जगत के कल्याण के लिए। आज भी जब कभी कहीं भी मैं पहाड़ों पर दार्जलिंग ,कलिम्पोंग , गंगटोक,शिमला,डलहौज़ी, चम्बा, मसूरी,कसौली, नैनीताल, ऊटी,तथा कोडाईकैनाल की यात्रा पर गया मैंने आपके,सब के कल्याण लिए कैंडिल जलायी है,..आप इस बात को जानती भी है ।
सूरज की किरणें पेड़ों से छन कर चर्च की दीवारों पर गिर रहीं थी। सच में कोई भी यहाँ नहीं था। लेकिन मन की रिक्तता में भी तुम कहीं न कहीं वर्तमान ही थी न अनु।
मेरे जीवन के हरेक क्षण में अणु बन कर तुम शामिल हो ... ऐसा लग रहा था जैसे आज भी मैं और मेरी तन्हाई में तुम इस चर्च के बारें में सब कुछ बतला रही थी ....
अब यहीं एकाकीपन और खालीपन जो मेरी आदत ही बन गयी है। मेरे एकांत को लेकर याद है तुमने कभी मुझसे सवाल भी किया था, " आप इतना अलग थलग क्यों रहना चाहते हैं ..भीड़ से हटकर.... ...सामाजिकता भी तो कोई चीज है न ..थोड़ा बदल क्यों नहीं लेते अपने आप को ...?
तब भी मैंने इतना ही कहा था , "... बदल नहीं सकता ...मेरे लिए समाज नहीं ...व्यक्ति महत्वपूर्ण है ..मैं भीड़ का हिस्सा नहीं बन सकता ...और फिर सच कहें अनु ! फिर समाज में अच्छें लोग हैं ही कहाँ ....? ...फिर ऐसे में उनलोगों के साथ उठने बैठने ,बातचीत करने में घुटन ही होगी न... इसलिए अलग थलग ही रहता हूँ ..."
"..अगर मैं इस भीड़ में शामिल हो गयी तो..क्या करेंगे आप ..? ", जैसे आप ने मुझसे जानना चाहा था। ...बड़ी उत्सुकता से पूछते हुए आप मेरी तरफ देखने लगी थी। थोड़ी हँसी भी थी आपके चेहरे पर।
"... तय है ..तब भी शायद मैं आपके पीछे भागूंगा नहीं ..अपने पूरे धैर्य संयम के साथ ही भीड़ से हटकर आपके अकेले होने का इंतिजार ही करूँगा ...शायद अगले जनम तक .."
"..सच्ची ...अगले जनम तक ...प्रतीक्षा करेंगे..., " बड़ी भावुक हो गयी थी ...अपने दोनों हाथों की हथेलियों से चेहरा छुपाते हुए आप मुस्कुराने लगी थी...। ठंढ में निकलती धुआं होती मेरी नर्म सांसें आपके चेहरे को रह रह कर छू रहीं थी। थोड़ी उष्णता प्रदान कर रही थी।
चेहरे से हथेलियाँ हटाते हुए आपकी आँखों में देखते हुए मैंने कहा था, "... जी ..सोलह आने सच ...",
मेरी इस तसदीक पर आपने स्मित मुस्कराहट के बीच ही कहा ," ... चलिए..ठीक है ...आप नहीं बदलते हैं तो मैं ही बदल लेती हूँ ...अपने आप को ..आपके लिए ...आपकी राधा जो हूँ ...अपने और आपके लिए तो इतना तो कुछ करना ही पड़ेगा न ...?
यह था मेरे जीवन के एकाकीपन का गीत संगीत जो सेंट जॉन्स इन द विल्डरनेस ‘ जंगल के बीच ईश्वर का घर ’ के माहौल में इसके नाम के साथ ही सार्थक हो रहा था।
मैं अकेला था भी ...नहीं भी .. आप तो हमसाया बन कर ही साथ रहती है न ..? कब मैं रिक़्त हुआ ..शायद नहीं ...
मैं ,तुम और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं ..एकाध घंटे रहने के बाद जब मैं पैदल नीचे उतरा तो माल रोड पर टहलते हुए कैथोलिक चर्च तक़ चला गया था। अभी चर्च का आँगन सूना पड़ा था ..लोग नहीं के बराबर थे ..
चर्च की बेंच पर बैठते ही दस साल पहले का क्रिसमस सेलेब्रेशन याद आ गया जब मैं वीकेंड पर दिल्ली से नैनीताल के क्रिसमस पर मैं रिपोर्टिंग करने आया था तब आपभी मेरे साथ थी....

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गतांक से आगे : ४.
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क्रिसमस की पूर्व संध्या : अयार पाटा बंगले की सजावट.
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क्रिसमस के एक दो दिन पहले से ही नैनीताल में अच्छी खासी भीड़ जमा होने लगी थी। दुकानें सज गयी थी। गिफ्ट शॉप में क्रिसमस ट्री भरे पड़े थे। चर्च के रंग रोगन का काम सप्ताह पूर्व ही हो जाता है और ऐसा हो भी गया था। न जाने क्यूँ सैलानियों की आवाजाही इन दिनों पहाड़ों पर इतनी ठंढ के बाबजूद क्यों अधिक बढ़ जाती हैं। शायद क्रिसमस की शुरुआत के साथ नए साल की छुटियाँ मनाने के लिए लोग पहाड़ की ओर रुख कर लेते हैं। सर्वधर्म की अच्छाई के प्रति प्रीत के भाव अपनाने का पाठ शायद आपने मुझसे ही सीखा था, यह भी कभी आपने बात चीत के दरमियाँ मुझे ही बतलाया था। आपको क्रिश्चियनिटी के प्रति झुकाव शायद मेरी लगाव की बजह से हुआ था मुझे ऐसा बार बार क्यों लगता है ,अनु ...।


नैनीताल की पहाड़ियां : अयारपाटा का बंगला. फोटो : शक्ति प्रिया शालिनी डॉ. अनु सीमा.
मुझे याद है क्रिसमस के लिए अपने अयारपाटा के बंगले को आपने बड़े सलीके से सजाया था। पूरे बंगले सहित फर्न के पौधे को आपने नीली कलर वाले चाइनीज बल्ब से सवार दिया था। एक बड़ा सा तारा जिसमें एक नीला बल्ब जल रहा होता है, आपने दरबाजें पर भी लगा रखा था। भीतर बैठक खाने में मदर मरियम, पिता युसूफ ,शिशु इशू एकदम नवजात लग रहे थे, उनकी बड़ी प्यारी सी प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्ति रखी हुई थी। इसके पार्श्व में गुलाबी रोशनी बिखर रही थी। इसकी हल्की किरण मदर मरियम की आँखों पर पड़ रही थी। इसके ठीक पीछे में सांता क्लाज की प्रतिमूर्ति लगी होती थी जिसमें जिंगल बेल जिंगल बेल की ट्यून लगातार बज रही थी । ठीक इसके पीछे ही तो आपने हरे रंग की क्रिसमस ट्री रख दी थी जिसमें लगा नीली रौशनी बाले बल्ब जगमगा कर टिमटिमा रहें होते थे । याद है कभी मैंने आपको बतलाया था कि इस हरे भरे क्रिसमस ट्री के पीछे बस इतनी सी ही मान्यता है कि यह खुशहाली का प्रतीक होता है। इसके घर में लाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है जो हमारी जिंदगी के लिए बेहतर है । २५ दिसंबर को ईसा के जन्म की खुशी में स्वर्ग के दूतों ने फर्न के पेड़ों को रोशनी, फूलों और सितारों से सजा दिया था। उन्हीं की याद में आज भी क्रिसमस के दिन क्रिसमस ट्री को सफेद रूई ,लाइट, टॉफियों,घंटियों और छोटे-छोटे उपहारों से सजाया जाता है। वनीला के स्वाद वाला केक हमलोगों ने दो तीन पाउंड का मॉल रोड से पहले ही मंगा रखा था। जिस तरह हिंदू धर्म के त्योहारों में लोग एक दूसरे को मिठाई बांटते हैं उसी तरह क्रिसमस पर केक खाने और बांटने की परंपरा है। लोग एक दूसरे के साथ अपनी खुशियां बांटते हैं और इसके पीछे मानना है कि केक बांटने और साथ खाने से मैत्री बढ़ती है आपस के तनाव और अवसाद भी खत्म होते हैं । अच्छी सोच है न अनु !
मोज़े : आपने खिड़कियों में रंग बिरंगे कई मोज़े भी टांग रखें थे। आपने यह भी याद रखा था कि मैंने कभी शायद आपको यह बतलाया था कि मोजें में सेंटा ढ़ेर सारी खुशियां लेकर आते हैं ,इसलिए इन्हें खिड़कियों पर लगाना चाहिए । सांता बच्चों और बड़ों के लिए भी गिफ्ट लेकर आते हैं यह भी हमने आपको ही बताया था ,इसके पीछे सोची गई वजह यह है कि इन मोजों को घर में टांगने से आर्थिक तंगी दूर होगी और धन वृद्धि भी होगी । घंटियों की बाबत आप मुझे ही बतला रही थी , " जानते हैं क्रिसमस ट्री में लगी घंटी की मधुर ध्वनि से लोग फेंगशुई के अनुसार मानते हैं कि घंटियां बजने पर निकलने वाली ध्वनि से पूरे घर की नकारात्मक उर्जा बाहर हो जाती है...इसलिए मैं भी लगाती हूँ ।
मोमबत्ती : जिस तरह हिंदू धर्म में आस्था के दीपक लगाकर इष्ट देवी देवताओं की आराधना की जाती है उसी तरह से क्रिसमस में मोमबत्ती जला कर लोग प्रभु यीशु से प्रार्थना करते हैं कि आम जीवन से दुख के अंधकार को दूर हो तथा सुख शांति का प्रकाश सभी के जीवन में सर्वत्र फैले। रंग बिरंगी मोमबत्तियां जलाने का भी अपना अलग ही महत्व है...।

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गतांक से आगे : ५.
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ये पर्वतों के दायरें,नैनीताल.
उत्तराखंड यात्रा वृतांत ३.धारावाहिक.अंक ९. से साभार
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क्रिसमस की सुबह नैनीताल और मॉल रोड का कैथोलिक चर्च. 


क्रिसमस की सुबह : नैनीताल : फोटो : शक्ति. प्रिया डॉ. अनु शालिनी अनुभूति 
 
२५ दिसंबर। बड़ा दिन। हम जानते ही है इस दिन से ही उत्तरी गोलार्ध में रातें छोटी होने लगती हैं और दिन बड़े होने लगते हैं। नैनीताल में सुबह होने को थी। सुबह भी पूरब की अपेक्षा थोड़ी देर से ही होती है। 
मैंने तय कर लिया था सुबह आठ बजे चर्च खुलने के साथ ही हमदोनों चर्च में कैंडिल जला आयेंगे। तब ज्यादा भीड़ नहीं होगी। और हमें मॉल रोड तल्ली ताल स्थित कैथोलिक चर्च पैदल ही जाना था। मार्निंग वॉक के लिए आप जल्दी उठ गयी थी। आप भी मेरी तरह समय ,शब्द और संस्कार की बेहद पाबंद है यह देखना समझना मुझे हमेशा से अच्छा लगा है और लगता भी रहेगा । इसलिए तो मुझे आप से असीम लगाव है,अनु। 
अभी सात बज रहें थे। अयारपाटा के बंगले के आस पास बैसी ही चिर परिचित ख़ामोशी फैली थी जैसी पहले  होती है। जंगल का इलाका है,पेड़ पौधे अधिक है । इसलिए यहाँ कुछ ठंढ अधिक ही होती है। 
सुबह की लेमन टी लेकर हम नीचे चर्च की तरफ वॉक के लिए निकल पड़े थे। 
नीले सलवार समीज, बादामी कलर की जैकेट तथा स्पोर्ट्स शू में आप के व्यक्तित्व में इजाफ़ा हो रहा था। आप बेहद शांत ,संयमित और खूबसूरत दिख रही थी। 
रास्ते चलते पूछा था आप ने , " ...आप बताएंगे कि इस धर्म में कब से लगाव रखने लगे थे ...? "  
"..बचपन से ही ..जब से मैंने विलियम वर्ड्सवर्थ को पढ़ा है ..पहाड़ों के सपनें देखने लगा हूँ .. कोनिफर्स के पेड़ देखें हैं  ...चर्च गया हूँ  ..कैंडिलें जलाई हैं ..कई दफ़ा सोचा है ..कई बार विचार किया है ..तब से ही मैं इस धर्म में विश्वास करने लगा हूँ, ..अनु। "
"...यहाँ शांति ही शांति हैं ...दिखावा नहीं के बराबर है ..पाखंड नहीं ही होता है .. ..लोगों के चित में शांति है ,आचार व्यवहार में शांति है...सहिष्णुता है ...मन में शांति है। मैं तो सम्यक धर्म सम्यक साथ को ही एक ही  मानता हूँ ..क्योंकि अच्छें जन अच्छें विचार ..." 
मैं कई एक इसाईओं से इंटरव्यू के सिलसिले में मिला हूँ। उनके साथ बातें की हैं। 
मैं देख रहा था आपके बढ़ते हुए कदम थोड़े सुस्त थे। मैं जानता हूँ आप पहाड़ी है आप तेज चल सकती थी ,लेकिन आप धीरे ही चल रही थी क्योंकि मेरे कदम धीरे थे ..और आपको मेरी जिंदगी में हर क्षण का  साथ जो निभाना था... । 
आप भली भांति जानती है कि मैं मैदानी इलाके से हूँ ,मैं इतना तेज़ नहीं चल सकता ..सांसे फूलने लगेंगी। इसलिए धीरे धीरे बाजू में  चलते हुए आप ने मेरी बाहें पकड़ रखी थी। ..कितना ख़्याल और असीम लगाव रखती हैं आप....हमारे लिए... 
इसलिए मैंने भी तो एक कसम उठाई हैं कि इस जीवन में अपने जीते जी आपको कोई तक़लीफ़ नहीं होने दूंगा ..आपकी इच्छाएं ही मेरा धर्म मेरा ईमान होंगी .. ऐसी मेरी कोशिश होगी। 
हम चर्च पहुँच चुके थे। आज के दिन दरवाज़ा कुछ पहले ही खुल गया था। हल्की भीड़ भी वहां थी। हमने कैंडिल का पैकेट्स पहले ही रख लिया था। 
प्रेयर का समय अभी नहीं हुआ था। कुछ बच्चें आनंदित होकर आपस में ही केरोल गा रहें थे। दूर कहीं उपर से ही जिंगल बेल ..जिंगल बेल का अपना दीर्घ परिचित केरोल सुनाई दे रहा था .. 
मैं जो बोलूं हा तो हा क्या यहीं प्यार है ? हम दोनों चर्च के भीतर बीच वाली बेंच पर बैठ गए थे एक दूसरे के करीब..आपने तब भी मेरा हाथ नहीं छोड़ा था...लगातार मोबाइल में बज रहें रिंग टोन्स से यह प्रतीत हो रहा था क्रिसमस के मैसेज हम तक आ रहें थे। हमारे मध्य मौन पसरा हुआ था। 
हमने लाई हुई अपनी कैंडिलें जला ली थी..इसे सैंड ट्रे में रख दिया था। वहां और भी मोमबत्तियां पहले से जल रही थी। किसी ने जलाई होगी। जब मैं मोमबत्तियां जला रहा था तो आपने अपनी उंगलियों से मेरे हांथों को स्पर्श कर रखा था..
मैंने जब पूछा आप भी एक कैंडिल जला लो तो प्रत्युत्तर में आपने कहा था .." देख लीजिए ...आपके साथ ही तो जला रही हूँ..". यह कहते हुए दिखलाने के लिए आपने मेरी हाथों को ज़ोर से दवा दिया था। 
आप  कह रही थी , "..मैं अपने आपके हर धरम करम में आपके साथ हूँ ..मैं प्रभु से प्रार्थना करती हूँ कि हर जन्म में मुझे आपका साथ ही मिले .. बस मुझे और कुछ नहीं चाहिए..आप होंगे ..तो आपके सम्यक साथ से मेरा जीवन ऐसे ही कष्ट मुक्त और प्रकाश मय हो जाएगा। ...होगा न ..?..आप ही मेरे धरम है आप ही मेरे करम .., सुन रहें है न ? ..."
मैं नजरें उठा कर कभी कभी आपको ही देख ही रहा था। पलकें  उठा कर एक बार भगवान की तरफ़ भी मैंने देखा जैसे पूछना चाह रहा था  ..." हे भगवान ! जीवन क्या है ..धर्म क्या है ..समझायेंगे ? स्वयं का धर्म क्या होना चाहिए ..? "
प्रेम पूर्ण ,सहनशील व्यवहार ही तो जीवन का सार है : जवाब भी अपने साथ अपने अन्तःमन में ही था ..सब के साथ प्रेम पूर्ण ,सहनशील व्यवहार ही तो जीवन का सार है। क्या यहीं प्यार है ..किसी की इच्छा पर समर्पित होना ..उसका ख्याल रखना ..किसी को चोट नहीं पहुँचाना ही तो हमारा सर्वश्रेष्ठ मानव धर्म होना चाहिए न। "
चीफ प्रीस्ट वहां पहुंच चुके थे। प्रेयर की घड़ी समीप थी। थोड़े ही समय में प्रेयर शुरू भी हो गया था । मुख्य प्रार्थना सभा में शामिल होने के बाद हमने रोटी का एक टुकड़ा ,चैलिस में रखे वाइन जैसे तरल पदार्थ की कुछेक बुँदें प्रसाद के रूप में ग्रहण की और बाहर निकल आए। 
बाहर धुप अच्छी खिली हुई थी। आप चाय कॉफी की शौक़ीन हैं मैं यह जानता था। यह सोच कर हम मॉल रोड पर लगने वाले टी स्टॉल की तरफ बढ़े थे। सच कहें तो यह शौक भी आपको मेरी बजह से ही लगा था। अब तो आप बेहतर चाय और कॉफ़ी भी बनाना जान गयी थी। 
यह भी सच है कि आपके हाथों की बनी चाय और कॉफ़ी का कोई जवाब नहीं। इलायची,आदि वाली थोड़ी दूध ..थोड़ी ज्यादा शक्कर वाली चाय ..मेरी कमजोरी रही है। इसके साथ ब्रिटानिया का ब्रिस्क बिस्किट्स मिल जाए तो क्या कहना ? आप इस सन्दर्भ में मेरी पसंद का बहुत ख्याल भी रखती हैं यह भी मैं जानता हूँ।  
मेरे लिए आपके हाथों की बनी चाय और कॉफ़ी पीना अमृत के सामान ही हैं न..?  दिव्य प्रसाद जैसा। ..पास के स्टॉल से हमने दो कॉफ़ी की प्याली ले ली थी और साथ में ब्रिटानिया ब्रिस्क बिस्किट्स का एक पैकेट भी। थोड़ी दूर चलते हुए अपर मॉल रोड में रखी बेंच पर बड़ी इत्मीनान के साथ बैठ गए थे ..हमदोनों ..और कॉफ़ी की चुस्कियां लेने लगे थे। 
हमारे सामने झील थी। दायी तरफ थोड़ी दूर हटकर गवर्नर वोट हाउस क्लब था। झील में एक दो पाल वाली नौकाएं तिरती हुई दिख रही थी। लोअर मॉल रोड पर गाड़ियों की आवाजाही बढ़ गयी थी। पर्यटक नए साल मनाने चले आ रहें थे। 
घर वापस लौटते हुए हमने चॉकलेट्स, स्वीट्स, गिफ्ट्स और कैंडिल्स की खरीददारी भी की क्योंकि आपने अपने बंगले पर शाम को क्रिसमस सेलेब्रेशन को लेकर जान पहचान वाले बच्चों को बुलाया भी था।
शायद एक छोटा सा इवेंट होना था यही कोई शाम के ६ -७ बजे। इसकी तैयारी भी करनी थी। पैदल चलते हुए हमें लगभग दो घंटे लग ही गए थे १२ - १ बजे तक़ हम अपने बंगले में थे।


लोअर और अपर मॉल रोड में क्रिसमस की भीड़ : फोटो शक्ति प्रिया डॉ.अनु सुनीता भारती    
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मेरी पसंद 
शक्ति प्रिया अनु स्मिता 
यात्रा लघु फ़िल्म : निर्मित महाशक्ति मीडिया : प्रयुक्त 


यही वो जगह है यही पर आके आप हमसे मिले थे 
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------------- गतांक से आगे : ६ . ------------- बंगले में क्रिसमस की शाम
जिंगल बेल .. जिंगल बेल जिंगल आल दे वे : डॉ.मधुप
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* जिंगल बेल..जिंगल बेल जिंगल आल दे वे : मॉल रोड : नैनीताल : शक्ति प्रिया डॉ.अनु सुनीता सीमा
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शाम के ६ - ७ बजे से थोड़ा पहले बच्चें आने लगे थे। आस पास तल्ली ताल शेरवुड के ही बच्चें थे। उनकी उम्र यहीं कोई १२ से १३ साल के मध्य ही रही होगी। ठीक शिशु ईशु के सामने केक सजा दिया गया था। मेरी सोच के हिसाब से जन्मदिन के उपलक्ष्य पर कैंडिल जलाई गयी क्योंकि मैं फूंक कर कैंडिल को बुझाने में विश्वास नहीं करता हूँ। इसलिए आपने मेरी इच्छा अनुसार किसी छोटी बच्ची श्रुति सलोनी से कैंडिल जलवाया। जैसे ही कैंडिल जली पीछे से क्रिसमस केरोल की ट्यून चला दी गई। बच्चें एक्शन्स में आ गए थे। जिंगल बेल.. जिंगल बेल जिंगल आल दे वे :
: की मधुर ध्वनि कानों में गूंजने लगी थी। कुछेक बच्चों ने जमीन पर रखें रंग बिरंगे गुब्बारें को हवा में तिरा दिया था । जो भी आपने बच्चों को अपने एक्शन्स में स्टेप्स बतलाया था,सिखलाया था वे किसी माहिर लिटिल चैम्प्स की तरह अनुकरण कर रहें थे। क्रिसमस केरोल पर उन्होंने बेहतर स्टेप्स ,एक्शन्स के साथ मन को भाने वाला डांस दिखलाया। आपने फिर बड़े सलीके से केक काट कर उसे ट्रे में सजा दिया था। एक अलग ट्रे में बिस्किट्स ,कुकीज़ और चॉकलेट्स भी रखे हुए थे। फिर आपने उनके गिफ्ट्स के लिए पेंसिल बॉक्स में उनके लिए उपयोगी कलर पेन्सिल , रबर ,कटर का भी इन्तजाम कर रखा था। बच्चों ने आओ तुम्हें चाँद पर ले जाए फ़िल्मी गाने पर अच्छा मूवमेंट्स भी दिखाया जिसमें उनके साथ आपने मुझे भी अपने स्टेप्स में शरीक कर ही लिया था। म्यूजिक धुन बदल रही थी। एकाध घंटे की मस्ती के बाद उन्हें मैगी नूडल्स परोसा गया। बच्चों की इस अंतहीन खुशी में ही हम दोनों की ख़ुशी थी। मैं कह सकता हूँ कि मुझे आप पर गर्व हैं। आप जहीन हैं, दूरदर्शी हैं,सहनशील,कर्मठ,संयमित और न जाने सब कुछ है। इसलिए तो मैंने आपके समक्ष ऐसी अभिलाषा रखी है, वसीयत किया हैं कि मेरे सामने मेरे रहते मेरे सपनें मीडिया संभाग,मेरे ब्लॉग,मेरे चैनल को आप संभाले। आप इतनी सक्षम भी है कि आप किसी भी दायित्व को भली भांति निभा सकती हैं। मैंने शायद आपको कभी कहा भी था ,याद है न अनु ! मेरे दो ही सपनें हैं। एक कि मैं दुनियाँ का सबसे बड़ा प्रोफेशनल ब्लॉगर हो जाऊं। मेरे यूट्यूब चैनल की लोकप्रियता पूरे समस्त जगत में हो। मैं इस सन्दर्भ में मैं आपसे अक्सर ये बातें करता रहता हूँ। और दूसरा नैनीताल में एक छोटा सा घर हो। इन दोनों सपनों की तामीर की जवाबदेही मैं आपको सौपता हूँ। यह भी मैंने पूरे होशोहवास में ही आपसे कहा था। और आपने बड़ी शांति से सुन लिया था। कितनी अजीब है कि कभी कभी अपनी जिंदगी में कुछ अनचाहे काम भी करने पड़ जाते है। आपके ख्यालात मीडिया, मीडिया पर्सन को लेकर अच्छे नहीं हैं शायद इसलिए कि आप झूठ ,फरेब ,गॉसिप से दूर रहने वाली हैं शख़्सियत हैं और आपकी नजरों में हम मीडिया पर्सन झूठ ,फरेब ,गॉसिप से ही अपना काम चलाते हैं।
लेकिन अपनी तरफ से आपकी तस्दीक के लिए मैं इतना ही कहूंगा सब मीडिया पर्सन वैसे नहीं होते...जैसा आपने सोच रखा है। फिर मैं तो फ़ीचर सेक्शन यथा फोटो ,कहानी ,कविता ,यात्रा वृतांत,संस्मरण ,आलेख से जुड़ा हुआ हूँ जो हमारी भावनाओं, संबेदनाओं से जुड़ी होती है। और में लोगों की मात्र खुशी के लिए लिखता हूँ और लिखता रहूँगा यहीं मेरी ईमानदार कोशिश होगी ... मैं अपने ख्यालों में था उधर बच्चों का क्रिसमस सेलेब्रेशन जारी था।
रात्रि के नौ बजने जा रहें थे। बच्चों को विदा करने का भी वक़्त आ चुका था। आपने ड्राइवर को आदेश दिया कि बच्चों को उनके घरों तक छोड़ दे। इसके पहले बच्चें जाए आपने सभी को एक एक पेंसिल बॉक्स गिफ्ट में दिया था
जाते समय बच्चों के भाव से भरे शब्द ' थैंक यू आंटी ..आई लव यू आंटी ..में कभी न अटने समाने वाली ख़ुशी थी जो हमारी मधुर स्मृतिओं की धरोहर थी। जिसे हम कदाचित कभी न भूला पाए...। उन तस्वीरों को हम दोनों आज तक नहीं भुला पाए हैं ... इति शुभ. सिर्फ तुम्हारे लिए / तेरी मेरी कहानी.

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संदर्भित गीत :आज का संगीत

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नैनीताल में फ़िल्माया गया
फिल्म :अभी तो जी ले.१९७७.
सितारे : डैनी.जया भादुड़ी
गाना सुनने के लिए पृष्ठ में नीचे दिए गए लिंक दवाएं. 
गीत : नक्श लायल पूरी. संगीत : सपन जगमोहन. गायक : आशा भोसले किशोर कुमार.

क्रमशः जारी।
संपादन : शक्ति माधवी स्मिता रेनू कंचन
सहयोग : सज्जा : शक्ति रितु मीना भारती ललिता भुवन जोशी

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था झील का किनारा : पृष्ठ ५ / १ : यात्रा संस्मरण
धारावाहिक : यात्रा संस्मरण भुवाली :
अनुभाग : वो तूफानी रात : रे का बंगला छोटी सी मुलाकात.
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डॉ.मधुप.
सह लेखन : शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता
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ये पर्वतों के दायरे ये शाम का धुआँ :भुवाली :नैनीताल :फोटो:शक्ति. प्रिया मधुप डॉ.सुनीता मीना


आ जा रे परदेशी .मैं तो कब से खड़ी इस पार: नैनीताल.वर्ष २०२४। गर्मियां का महीना था। यही कोई मई जून का। यायावर, लेखक है हम। घूमते ही रहते है और लिख़ते रहते है,तुम्हारे लिए। शोध का विषय रहता है आपका मेरा ,चंचल मन चितवन हम और तुम। सर्वकालिक रुचिकर विषय प्रेम,प्रकृति,पहाड़ और पुनर्जन्म पर मानवीय शोध करते हुए प्रेम ग्रन्थ के लिखने का कार्य निरंतर जारी ही रहता है ।
अकेले थे हम। कुछ लोग साथ भी थे। सच कहें शरीर से यहाँ रहते हुए दिखते हैं मन से तो कहीं और होते है ,सदैव। पहाड़ों में भटकते हुए। कई सदियों से कई जन्मों से। मन चंचल सदृश्य मधुप जो है। कभी यहाँ तो कभी वहाँ। यात्रा के इस सन्दर्भ में मेरे साथ थे पटना के सुनील, लखनऊ से चिंतक विचारक कमल और नैनीताल भुवाली से स्थानीय प्रकाश आर्य जी और अभय सिंह। मानवीय संवेदनाओं को पढ़ने ,लिखने,समझने के क्रम में जाने अनजाने लोगों से मिलना और चरैवेति जारी ही था। आ जा रे परदेशी ....आ जा रे...मैं तो कब से खड़ी इस पार ये अँखियां....थक गयी ....पंथ निहार
राधिका:कृष्ण : मंदिर : उनकी प्रेम गाथा : भुवाली पर शोध जारी ही था। उनके मंदिर जहाँ जहाँ मिल रहें थे उनपर लिखना सतत था। जहाँ प्रेम , सदभाव और आत्मीयता है वही राधिका कृष्ण है। जीवन भी वही है।
मैं उन स्थानों से गुजर रहा था जहाँ कभी विमल रॉय ने फिल्म मधुमती की शूटिंग की थी। ये सारी बातें
भुवाली के स्थानीय अभय जी और प्रकाश आर्य जी बतला रहे थे।
१९५८ के आसपास बनी फिल्म मधुमती के रे बंगले की तलाश जारी थी। इसे देखना समझना ही था।
नैनीताल के पास भुवाली में हम उपस्थित थे।
आ जा रे परदेशी : वो तूफानी बारिश की रात :फिल्म मधुमती : रात भर कहीं रुकने की जुगत। पहाड़ी रास्ते पर गाड़ी तेजी से भाग रही है। यह थी फिल्म मधुमती का एक अंश। अंत में उस फिल्म के नायक दिलीप कुमार और नायिका वैजन्ती माला एक सूनसान हवेली या कहें बंगले में रुकते हैं। जहाँ से एक खिड़की खुलते ही एक झील दिखती है। शायद वहां से दिखने वाली वो झील भीम ताल ही रही होगी।
बताते चले फिल्म मधुमती की अधिकांश शूटिंग मुख्य रूप से नैनीताल,रानीखेत और अल्मोड़ा जैसे कुमाऊं क्षेत्र के सुंदर स्थानों पर ही हुई थी। जबकि प्रमुखतः नैनीताल के पास भवाली में ही कई स्थानों में शूट हुई थी। वैसे मधुमती का सीधा संबंध भवाली से ही नहीं, बल्कि नैनीताल जिले के अन्य हिस्सों से भी है। इसलिए हम भुवाली एक खोज में अपने किसी विशेष लक्ष्य के साथ थे।
भुवाली पहुंचते ही प्रकाश जी से मिला। उनके घर अल्मोड़ा की प्रसिद्ध मिठाई भी खायी। उनका प्यार भरा आथित्य मैं कैसे भूला सकता हूँ ? उनके साथ हम फिर प्रॉपर्टी देखने निकल पड़ें। रास्ते में ही मैंने फिल्म मधुमती और उस फिल्म में दिखलाए गए रे के बंगले को देखने की अभिलाषा जाहिर की। और प्रकाश जी वहाँ ले गए भी। आभार और प्यार है उनके लिए।
फिल्म की शूटिंग स्थल : रे बंगले की तलाश : प्रकाश आर्य जी की मदद से मैं वेरोनिका ग्रेवाल रे जी के बंगले तक पहुंच भी गया था। कहते है न जहाँ चाह वहाँ राह मिल ही जाते है। शहर से हम उपर की तरफ़ चढ़ाई के लिए गए होंगे।
पन्दरह बीस मिनट के बाद हम फिल्म मधुमती १९५८ के उस चिर प्रतीक्षित बंगले तक पहुंच ही गए थे उस फिल्म की रहस्य रोमांच मिश्रित कहानी के ताने बाने में जिसकी तलाश हमें कई बरसों से थी।
भूले नहीं तो उस फिल्म में पूर्व जनम की कहानी किसी पहाड़ी हवेली के इर्द गिर्द घूमती है।
मुझे याद है एकाध घंटे तक मैं वहां रुका था। भुवाली पहाड़ी के शीर्ष पर ब्रिटिश काल में बना यह बंगला मेरे मन को खूब भाया था। लॉन में ढ़ेर सारे फूल खिले थे। लॉन में एक झूला भी बना हुआ था। ढ़ेर सारे फूल खिले हुए थे।
आबादी नीचे छूट गयी थी। उतनी ऊंचाई पर अमीरों की सिर्फ कोठियाँ ही बनी थी। ठीक इसके नीचे भुवाली शहर पसरा पड़ा है।
मैं जैसे साठ के दशक में चला गया था जिस समय फिल्म मधुमती की शूटिंग हुई होगी। स्थानीय के मुख से उस फिल्म की चर्चा हो ही जाती है। प्रेम,पुनर्जन्म,मधुमती की प्रेम कहानी यहाँ की पहाड़ी और हवाओं में गूंजती रहती है।

आ जा रे परदेशी
 मैं तो कब से खड़ी इस पार ये अँखियां....थक गयी ....पंथ निहार : कोलाज शक्ति
खूब देर तक बातें हुई। उन्होंने मुझे सारा बंगला दिखलाया। एक एक शूटिंग से जुड़ी तस्वीरें व कहानियाँ भी बतलाई। मुझे याद है वो बतला रही थी कि फिल्म मधुमती के समय एक या दो साल की रही होगी। फिर उन्होंने घोड़े, बग्घी अभिनेता प्राण से जुड़ी हुई कुछ बातें बतलाई।
जाते जाते मेहमाननवाजी में पेश की गई मीठी चाय मैं कैसे भूला सकता हूँ ? मैंने उनसे मधुमती से जुड़ी,अभिनेता दिलीप कुमार,और बैजंती माला से जुड़ी ढ़ेर सारी कहानियां सुनी।
मैंने वो प्राण साहेब का तथाकथित निर्जन पहाड़ी बंगला के बारे में उनसे पूछा ...जाती हुई बग्घी..कोठी से दिखती हुई झील यही कोई अभी की यहाँ से दिखने वाली भीम ताल ही रही होगी...
तो उन्होंने कहा फिल्म में दिखाई गयी कोठी की शूटिंग घोड़ा खाल की कोठी में हुई है जहाँ अभी सैनिक स्कूल है।
अत्यंत सभ्य सुसंस्कृत शालीन वेरोनिका ग्रेवाल रे : और उनसे छोटी सी मुलाकात : मालकिन से अभी ठीक लिखने से पहले फिल्म मधुमती फिल्म की अधिकांश शूटिंग स्थल रे के बंगले, और बंगले की वर्त्तमान मालकिन रे की पुत्री वेरोनिका ग्रेवाल रे से मेरी ५ दिसंबर को अपराह्न १ बज कर १९ मिनट में हल्की औपचारिक बात चीत हुई। उनसे कुछ फोटो बगैरह लेना था। कुछ जानकारी भी हासिल करनी थी।
मैंने जब २०२४ में मिलने की बात दोहराई तो भी उन्हें ठीक से याद नहीं आया। फिर भी औपचारिकता वश पूछ ही लिया, ' कैसे है डॉ.रमण....?
मैंने कहा, ' ठीक हूँ , आप कैसी है ? '
उत्तर था, ' ठीक हूँ ...'
मैंने घोड़ा खाल मंदिर के इतिहास और वहाँ स्थित राधा कृष्ण मंदिर के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने कहा, ....नहीं पता मैं ईसाई हूँ
ईसाई धर्म से जुड़ी वेरोनिका से जब मैंने पूछा कि आपके बारे में मैं अपने कॉलम छोटी सी मुलाकात में आपके के बारे में लिख रहा हूँ,आप हिंदी पढ़ लेगी....?
तो उन्होंने विनम्रता से जबाव दिया, हिंदी मैं पढ़ी हूँ ....हिंदी मेरी सब्जेक्ट रही है आप लिंक भेजिए मैं पढ़ लूंगी।
वेरोनिका ग्रेवाल अंग्रेजीदा हैं। उम्र यही कोई लगभग ६० वर्ष के आस पास ....लिखने पढ़ने की शौक़ीन हैं । बहुत ही शालीन लगी और दिखी। मुझ जैसे अज़नबी के लिए समय देना मैं इसके लिए आभार प्रगट करता हूँ। ऊँचे कुल के लोग है ये लोग।
पहाड़ियां में जैसे आजा रे परदेशी की सुरीली जैसे धुन गूंज ही रही थी। जैसे कई जन्मों की पहेलियों को सुलझाने मैं निकला था। छोटी सी मुलाकात मैं कैसे भूलूँ।
प्रकाश जी बतला रहे थे कभी कभी सर्दियों में वो अपनी बेटी के पास न्यूजीलैंड चली जाती है। इन पहाड़ी जगहों में तो सर्दियों में जीवन के हालात ही बदल जाते हैं। सर्दियाँ काटनी मुश्किल हो जाती है जब पारा नीचे गिरता है ,नल और टोटके का पानी जम जाता है। लेकिन बात चीत करने के दरमियाँ पता चला फ़िलहाल अभी वह भुवाली में ही वर्तमान है। मैंने उनसे कुछ उनके बंगले की कुछ तस्वीरें भी मांगी है, शायद मिल जाए तो प्रकाशित कर सकूं ....
लौटने के क्रम में घोड़ाखाल मंदिर मिल गया था। मैं स्वयं सीढियाँ चढ़ते हुए मंदिर के भीतर गया जहाँ राधिका कृष्ण जी भी हैं ....जानकारी थी कि इस मंदिर परिसर में राजश्री की चर्चित फिल्म ' विवाह ' की भी शूटिंग यही हुई थी। शायद एक गाने की

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प्रेम प्रकृति पहाड़ और पुनर्जन्म
सन्दर्भ गीत संगीत
प्रस्तुति
शक्ति प्रिया माधवी रेनू अनुभूति
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फिल्म : मधुमती.१९५८.
सितारे : दिलीप कुमार. वैजन्ती माला. प्राण.
गाना : आ जा रे परदेशी ....आ जा रे...
मैं तो कब से खड़ी इस पार ये अँखियां....थक गयी ....पंथ निहार
गीत : शैलेन्द्र. संगीत सलिल चौधरी. गायिका : लता मंगेशकर.
गाना देखने व सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं

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गतांक से आगे : १. 
घोड़ा खाल : भुवाली नैनीताल : यात्रा संस्मरण  : 
प्रकृति, प्रेम, पहाड़ और पुनर्जन्म. 


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डॉ. मधुप. 
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सह लेखन संपादन सज्जा 
शक्ति  प्रिया डॉ.सुनीता. 
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सहयोग ; शक्ति ललिता. आर्य : भुवन जोशी. नैनीताल 
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घोड़ाखाल सैनिक स्कूल : स्थापना काल १९६६ : कोलाज. शक्ति.प्रिया डॉ.सुनीता मधुप. 
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ये वादियां ये फिजाएं बुला रही है तुम्हें : साल १८५७ सिपाही विद्रोह के बाद कभी अवध के क्रांतिकारियों से बचते हुए एक ब्रिटिश अधिकारी भुवाली के पहाड़ी क्षेत्रों में भटक रहे थे। उनके घोड़े की मृत्यु हो जाने से यह स्थान किसी कहानी से निकल कर यथार्थ में हो गया। मैं दो या तीन बार यहाँ आ चुका हूँ। भुवाली से आप यहाँ मात्र ३० रूपये किराया देकर घोड़ाखाल सैनिक स्कूल तथा घोड़ा खाल गोलू देवता मंदिर आ सकते हैं। 
चीड़ और देवदार के पेड़। सर्वत्र नीरवता फैली हुई। मैं कहीं कवि न बन जाऊं। प्रकृति,पहाड़,पेड़ में हम प्रेम और पुनर्जन्म को तलाश करते हुए यहाँ तक़ पहुंचे थे। स्थानीय अभय सिंह के घर से निरंतर वो झील भी दिख रही थी। 
राधिका कृष्ण या कहें शाश्वत प्रेम की ख़ोज में। हमारे साथ निरंतर हमारे फीचर डेस्क से नैनीताल से भुवन जोशी,भुवाली से प्रकाश जी तथा मुक्तेश्वर से शक्ति संवाददाता सिमरन ऐंजेल जुड़ी थी। 
गोलू देवता का मंदिर : घोड़ाखाल मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित भगवान गोलू देवता को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है,जो न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। कहते है गोलू देवता त्वरित गति से न्याय करते हैं। 
इस मंदिर को ' घंटी वाला मंदिर ' भी कहा जाता है क्योंकि भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहाँ सैकड़ों घंटी बांधते हैं। यह मंदिर भुवाली के पास, समुद्र तल से लगभग २००० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। सुना है  यहाँ राधा कृष्ण का मंदिर भी है।
घोड़ाखाल मंदिर के बारे में मुख्य बातें यह है कि देवता : यह मंदिर न्याय के देवता गोलू देवता को समर्पित है। उन्हें गौर भैरव ( शिव ) का अवतार भी माना जाता है। यह नैनीताल जिले में स्थित है,जो भवाली से लगभग ३ किलोमीटर की दूरी पर है। 
घंटी वाला मंदिर : कागज़ पर लिखी चिट्ठियाँ : भक्तों का मानना है कि गोलू देवता उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। जब मनोकामना पूरी हो जाती है, तो भक्त आभार व्यक्त करने के लिए मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं, जिसके कारण मंदिर में सैकड़ों घंटी बंधी हुई हैं। यह मंदिर अपनी अनोखी प्रथाओं के लिए जाना जाता है जहाँ भक्त अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए घंटियाँ और कागज़ पर लिखी चिट्ठियाँ चढ़ाते हैं, और यह कुमाऊं क्षेत्र में आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। 
कहानी गोलू देवता की : कहते है घोड़ाखाल में गोलू देवता के मंदिर की स्थापना महरागांव की एक महिला ने की थी, जो अपने ससुराल वालों से प्रताड़ित थी। उसने चंपावत जाकर गोलू देवता से न्याय मांगा और वे उसके साथ घोड़ाखाल आ गए, जहाँ उन्होंने मंदिर में निवास किया और लोगों को न्याय देना शुरू किया। 
यह मंदिर कुमाऊँ क्षेत्र में न्याय के देवता के रूप में प्रसिद्ध है और भक्त अपनी मनोकामनाएं लिखकर यहां चढ़ाते हैं।यह मंदिर अपने आध्यात्मिक वातावरण और अनोखी प्रथाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई है,जैसे ' विवाह '।
क्या देखें घोड़ाखाल सैनिक स्कूल : यह स्थान प्रसिद्ध सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के लिए भी जाना जाता है,जिसकी स्थापना १९६६ में हुई थी। इस स्कूल के लिए जमीन रामनगर के राजा ने उपलब्ध करवायी जहाँ भारत सरकार ने घोड़ा खाल स्कूल को विकसित किया। 
इस स्कूल देखने के प्रति मेरी रूचि फिल्म मधुमती १९५८ के बाद हुई जब से मैंने जाना कि पहले कभी फिल्म मधुमती १९५८ की शूटिंग यहाँ हुई थी। मैं इसके प्रवेश द्वार तक गया हूँ। प्रवेश की अनुमति मिलने में बिलम्ब होने की बजह से परिसर नहीं घुम सका। 
हालांकि फिल्म मधुमती के एक सीन में आती हुई बग्घी किसी हवेली में आ कर रूकती हुई प्रतीत होती है, वह हवेली घोड़ा खाल सैनिक स्कूल के रमण ब्लॉक जैसी ही प्रतीत होती है ,शायद जैसा की वेरोनिका ने हमें बतलाया था। आप भी उस सीन सीकवेन्स के लिए फ़िल्म को देख सकते हैं।
फिल्म मधुमती : सुनसान हवेली : वो दिखती झील : वेरोनिका के कथनानुसार जमींदार अभिनेता प्राण की उस हवेली को देखना चाह रहा था जिसका वर्णन उस फिल्म में हुआ था। 
यह तो सच दिखा घोड़ाखाल सैनिक स्कूल परिसर से उस फिल्म में वर्णित किसी झील की चर्चा थी। वो झील भीम ताल ही रही होगी। हमलोगों ने दिन के उजाले में पास कहीं घाटियों में पसरी झील भी देखी भी थी। 
घोड़ाखाल सैनिक स्कूल का स्कूल परिसर और भवन जैसे अनायास ही मुझे खींचते हुए मधुमती के शूटिंग लोकेशंस और सेट्स तक ले जा रहा था जहाँ से मेरी कल्पना में पूरी फिल्म ही चल रही थी । 
आप फिल्म देखिये। फिर से बार बार देखिए। हवेली कुछ ऐसी ही दिखेगी। तुम यहीं कहीं न थीं मधुमती...? आ जा रे परदेशी ...
कुछ ऐसा ही दिखता था न...? मधुमती के जमींदार के क़िरदार निभाने वाले फिल्म अभिनेता प्राण तथाकथित दुर्जन की हवेली। जहाँ दुर्जन से बचने के लिए हवेली के छत से  गिरकर नीचे अँधेरी गहरी खाई में नायिका ने अपने प्राण गवां दिए थे। 
आ जा रे परदेशी मैं तो कब से खड़ी इस पार आ जा रे परदेशी ....अँखियाँ थक गयी पंथ निहार.... आ जा रे परदेशी...

कोलाज. घोड़ाखाल सैनिक स्कूल : स्थापना काल १९६६ : शक्ति.प्रिया डॉ.सुनीता मधुप.
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प्रेम प्रकृति पहाड़ और पुनर्जन्म 
सन्दर्भ गीत संगीत 
प्रस्तुति 
शक्ति प्रिया माधवी रेनू अनुभूति 
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फिल्म : मधुमती.१९५८.  
सितारे : दिलीप कुमार.वैजन्ती माला.प्राण. 
गाना : दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा
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गीत : शैलेन्द्र. संगीत : सलिल चौधरी. गायिका : लता मंगेशकर.मुकेश 
गाना देखने व सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. 

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गतांक से आगे : ३ . 
घोड़ा खाल : भुवाली नैनीताल : यात्रा संस्मरण  : 
प्रकृति, प्रेम, पहाड़ और पुनर्जन्म. मधु मती 
तुम संग जन्म जनम के फेरें : भूल गए क्यों साजन मे्रे 
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डॉ.मधुप. 
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सह लेखन संपादन सज्जा 
शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता अनुभूति . 
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फ़िल्म में वर्णित बायीं तरफ़ कोई झील : भीम ताल . छाया चित्र : शक्ति प्रिया मीना. बीना नवीन जोशी 

प्रकृति, प्रेम, पहाड़ और पुनर्जन्म.गौरतलब है कि पुर्नजन्म पर आधारित इस फिल्म की पूरी कहानी भवाली में मौजूदा टीआरएच के शीर्ष की पहाड़ी पर बने मिस्टर रे के बंगले के इर्द-गिर्द घूमती है,जैसा कि मेरे साथी संपादक डॉ.नवीन जोशी ने अपने समाचार में कहा था। हमने कोशिश कि मिस्टर रे के बंगले की तलाश की जाए आख़िर यह कहाँ और किस हाल में है ? हम २०२४ में उस बंगले तक पहुंच चुके थे। आइए फ़िल्म के घटना क्रम की तरफ़ चलते है एकबारगी कहानी को फिर से याद करते है।
मधु मती फ़िल्म की कहानी बेहद तूफ़ानी सर्द रात थी वो। बारिश हो रही थी। पहाड़ी रास्ते में धुंध भी छायी हुई थी। बड़ी सावधानी से एक कार सन्नाटे को चीरते हुए अपनी मंजिल की तरफ़ जा रही थी। उस कार में देवेंद्र ( दिलीप कुमार ) अपने साथी के साथ सफ़र कर रहे थे।
अचानक पेड़ गिरने के कारण मार्ग बाधित हो जाता है। और उन्हें पास की हवेली ( मिस्टर रे के बंगले ) में रात्रि कालीन विश्राम के लिए शरण लेना पड़ता है। वह बारिश के कारण एक रात के लिए उस बंगले में फंस जाते हैं, वहां उन्हें अपने पूर्व जन्म की प्रेमिका मधुमती ( वैजयंतीमाला ) की स्मृतियां ताजी हो आती हैं। जहां कभी उस बंगले में उन्हें अपने पूर्व जन्म में नायक आनंद ( दिलीप कुमार ) होने की बात याद आती है कि कभी यहां वो मैनेजर बन कर आये थे।
कहीं इसी बंगले में उन्होंने दुष्ट राजा उग्र नारायण ( प्राण ) की तस्वीर बनाई थी। उन्हें लगता है यहीं वो वादियां है , यहीं वो जग़ह है जहां वो मधुमती से आकर मिले थे जिसकी हत्या राजा उग्र नारायण ( प्राण ) ने कर दी थी ।
इसी मिस्टर रे के बंगले या कहे मधुमती फिल्म में वर्णित हवेली का मालिक राजा उग्र नारायण ( प्राण ) होता है,जहाँ पूर्व जन्म में आनंद ( दिलीप कुमार ) उनके स्टेट के देख भाल के लिए वह मैनेजर नियुक्त होते है। राजा उग्र नारायण ( प्राण ) की कुदृष्टि मधुमती पर होती है वह धोखे से आनंद को काम के बहाने बाहर भेज कर मधुमती को इस हवेली में बुलाता है और वहीं अपनी इज्जत बचाने के निमित्त हवेली के शीर्ष से कूद कर मधुमती अपनी जान दे देती है।


प्रेमऔर पुनर्जन्म :मधुमती :मैं तो कब से खड़ी इस पार:मधुमती कोलाज:शक्ति.प्रिया मधुपअनुभूति
आनंद ( दिलीप ) को इस पूर्व जन्म में ही दूसरी हमशक्ल माधवी ( वैजयंती माला ) मिल जाती हैं, जिसे वो मधुमती समझ लेते है। और उसकी मदद से वह उस जन्म में ही मधुमती की गई हत्या का बदला राजा उग्र नारायण ( प्राण ) से लेते हैं। मैं,मेरे हमसफ़र,घोड़ाखाल मंदिर:वो झील:मधुमती की तलाश.शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मीना.


प्रेम,है सदभाव है,सहयोग है वही: जिंदगी  हैं : हम ढूंढने निकले थे फिल्म में दिखलाए गए उस मंदिर को जिसमें नायिका किसी देव स्थल पर अपनी चाहत मनोकामनाओं के फूल चढ़ाती है। पता चला कोई गोलू दवता का मंदिर है। शायद इसी क्रम में भटकते हुए उस मंदिर परिसर तक पहुंच गए थे जहाँ कई देवी देवता थे।


प्रेम प्रकृति पहाड़ और पुनर्जन्म : फैली वादियाँ और देवदार की बांहें : फोटो शक्ति प्रिया डॉ मधुप 

हम प्रकाश,तथा अभय  जी के आभारी है। सदैव निस्वार्थ भाव से उन्होंने मेरी मदद की। प्रकाश जी के  घर में उनकी जीवन संगिनी शक्ति सुधा आर्य जी ने हम जैसे अनजाने के लिए खुले भाव से स्वागत किया अल्मोड़ा की बाल मिठाई खिलाई वो सदैव स्मृत रहेगा। 
फ़िल्म की वो झील : भीम ताल भी दिखी : घोड़ा खाल से दिखने वाली झील भीमताल ही है, जो नैनीताल जिले की एक बड़ी और शांत झील है। यह झील अपनी हरियाली, शांत वातावरण और मध्य में बने टापू जिस पर मछलीघर है, के लिए प्रसिद्ध है, और यहाँ से भीमेश्वर महादेव मंदिर भी दिखाई देता है, जो इसे एक अद्भुत मनोरम दृश्य देता।
जब हम अभय जी के छत पर थे जो ठीक घोड़ा खाल सैनिक स्कूल के पार्श्व में है वहाँ से हमने खुले आसमां के नीचे झील देखी थी। हमने कुछेक फोटो भी खींची थी।


१९५८.मधुमती के फ़िल्म में दिखती की शिप्रा की धाराएं और मधुमती : आ जा रे परदेशी. 

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प्रेम प्रकृति पहाड़ और पुनर्जन्म 
सन्दर्भ गीत 
ये मेरा गीत जीवन संगीत कल भी 
कोई दोहराएगा 
प्रस्तुति 
शक्ति प्रिया माधवी रेनू अनुभूति 
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फिल्म : मधुमती.१९५८.  
सितारे : दिलीप कुमार.वैजन्ती माला.प्राण. 
गाना : सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीन....
गीत : शैलेन्द्र. संगीत : सलिल चौधरी. गायक  : मुकेश 
गाना देखने व सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. 

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गतांक से आगे : ४. 
घोड़ा खाल : भुवाली नैनीताल : यात्रा संस्मरण  : 
प्रकृति, प्रेम, पहाड़ और पुनर्जन्म. मधु मती 
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यही वो जग़ह है यहीं पर तो आप हमसे मिले थे

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इच्छाओं की बंधी घंटियां : हमसब साथ साथ है : मन्नतों के धागे अर्जियां : शक्ति प्रिया तनु मीना सीमा  


फिल्म मधुमती में नायिका अपने प्रेम परिहार के लिए किसी देव स्थल में जाती है। वहां किसी कुल देवता 
को फूल अर्पित करती है। फूल दुर्भाग्य वश गिर जाता है। किसी अनहोनी की आशंका से उसका मन सिहर जाता है। और सच में अनहोनी हो ही जाती है। हम वहाँ के देव स्थलों की तलाश में थे। और इसी घुमक्कड़ी के सिलसिले में घोड़ा खाल मंदिर के बारे में सुना। और फिर वही तलाश जारी हो गयी। कुछेक मिनटों के बाद हम किसी मंदिर परिसर में ही थे। 
शायद फिल्म में दिखाई गयी देव स्थल यही कोई आस पास रहा होगा। 
हमसब साथ साथ है : मन्नतों के धागे : शायद हम एक दो बार घोड़ा खाल ,राधिका कृष्ण मंदिर नैनीताल आए हैं। २०२४ में और उसके पहले जब डॉ.प्रशांत गुजरात,संजय पटना से मेरे साथ थे। हमने नीचे से प्रसाद लिया था। सीढियां चढ़ते हुए गोलू देवता के मंदिर के दर्शन किए थे। हमने भी मन ही मन अपनी मन्नतों के लिए गोलू देवता को कई अर्जियां लिखी हैं कुछ यहाँ कुछ वहाँ। चिर भी बांधे हैं। दूसरों के बंधे धागे,टंगी हुई घंटियों में भी अभिलाषाओं का स्पंदन अनुभूत किया हैं।
हमारी महाशक्ति मीडिया टीम की जो भी शक्ति सदस्या जाती हैं हमसब साथ साथ है इस प्रेम पूर्ण भावना के लिए घंटियां बांध ही आती हैं। 
राधा-कृष्ण प्रेम के प्रमुख भाव मुख्य भावनाएँ : निस्वार्थता : राधा ने कृष्ण से कुछ मांगा नहीं, केवल उनके प्रेम में खो गईं। उनका प्रेम 'पाने' की चाह नहीं, 'समर्पण' का था। 
आत्मा - परमात्मा का मिलन : राधा-कृष्ण का प्रेम ' भाव ' या कहें गहरी भावना का प्रतीक है, जो आत्मा और परमात्मा के मिलन को दर्शाता है,जहाँ प्रेम निष्काम, निस्वार्थ, समर्पण और त्याग से भरा होता है, जिसमें अधिकार नहीं, सिर्फ एक-दूसरे में एक हो जाने की चाह होती है, जो सांसारिक रिश्तों से परे, शुद्ध भक्ति और शाश्वत आनंद का मार्ग है, जिसे राधा ने पूजा बना दिया और कृष्ण ने ईश्वरता दी। जहाँ प्रेम,है सदभाव है,सहयोग है वही राधिका कृष्ण है याद रखिए। राधिका कृष्ण भाव है अपने जीवन का। प्रेम से परिपूर्ण। नियंत्रण से परे.
प्रेम व्यवहारिकता और अध्यात्म का संयोग : यह सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका का रिश्ता नहीं, बल्कि जीवात्मा राधा और परमात्मा कृष्ण के शाश्वत मिलन का प्रतीक है। कैसे आप अपने जीवन में व्यवहारिकता और अध्यात्म का संयोग कर सम्यक मार्ग ,और कर्म की तरफ उन्मुख होते हैं। 
समर्पण और भक्ति : राधा की भक्ति इतनी गहरी थी कि कृष्ण भी उसमें बंधे थे। उनका प्रेम हर अपेक्षा से परे था। अधिकारहीन प्रेम बतलाता हैं प्रेम में सिद्ध अधिकार ही नहीं, कर्तव्य विशेष है। सिर्फ एक-दूसरे के उनकी ख़ुशी के लिए जीना होता है। राधा - कृष्ण ने यह सिखाया कि प्रेम में ' मेरा ' नहीं, ' हम ' होता है। हमारे व्लॉग में एक का प्रयास सम्मिलित खुशी देती है समस्त समूह के लिए। त्याग धर्म : सम्यक के लिए अपने जीवन में कुछ दे देना सीखिए। सच्चा प्रेम त्याग मांगता है, जहाँ व्यक्ति अपने प्रिय के लिए सब कुछ न्योछावर कर सकते हो । 
एकता : राधा और कृष्ण अलग नहीं हैं : एक के बिना दूसरे का नाम अधूरा है राधे-कृष्ण, या कृष्ण-राधे । निष्कर्ष देखें : राधा-कृष्ण का प्रेम हमें सिखाता है कि वास्तविक प्रेम पाने या हासिल करने में नहीं, बल्कि खुद को पूरी तरह से उसमें खो देने, निस्वार्थ भाव से जुड़ने और प्रेम को एक पवित्र पूजा बनाने में है। यह प्रेम भक्ति, शांति और आनंद का सबसे सुंदर उदाहरण है जो हमें ईश्वर के करीब ले जाता है। 


यही वो जगह है यहीं पर आके हमसे मिले थे : कोलाज : शक्ति प्रिया डॉ सुनीता शालिनी 

प्रेम, प्रकृति, पहाड़, उत्तम पुरुष के लिए साधुवाद : हमारी शक्ति सिमरन हमारे शोध विषय पर पहले से ही काम कर रही है। जहाँ कही भी राधिका कृष्ण मंदिर  उपलब्ध है वहाँ जाकर लघु फिल्में बनाना, मुझ तक़ पहुँचाना,जानकारियाँ हासिल करने का प्रयास करती हैं। 
मेरे भ्रमण के पश्चात शेष कार्य उन्होंने ही पूरे किए हैं। पहाड़ी लोग सीधे साधे होते हैं। छल प्रपंच से अलग। अब दूषित होती सभ्यता संस्कृति की हवाएं उन्हें भी छू रहीं हैं। उन सहिष्णु ,मेहनती , सरल लोगों , समुदायों और जातियों को कहते हैं जो मुख्य रूप से पर्वतीय और पहाड़ी क्षेत्रों जैसे हिमालय की तलहटी और घाटियों में रहते हैं। ये लोग अपनी सादगी, मेहनत और प्रकृति से जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं, और भारत व नेपाल के कई राज्यों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम ,अरुणाचल,पूर्वोत्तर भारत में पाए जाते हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषाएँ और जीवनशैली होती है. मेरी अभी तक की अनुभूति में कण कण में भगवान होते हैं। डॉ. नवीन बीना जोशी , रवि रश्मि शर्मा ,आर्य प्रकाश सुधा, केदार, भुवन जोशी ,शक्ति भारती मीना संजय इसी संस्कृति की देन हैं। कहते हैं न भोले भाव मिले रघुराई।       
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गतांक से आगे : ५ . 
प्रकृति, प्रेम, पहाड़ और पुनर्जन्म. मधु मती 
वो झील का किनारा  : भीम ताल : यात्रा संस्मरण  : 
प्रकृति, प्रेम, पहाड़ और पुनर्जन्म. मधु मती 
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डॉ. मधुप. 
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सह लेखन संपादन सज्जा 
शक्ति  प्रिया डॉ.सुनीता. 
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चल चले ए दिल करे चल कर किसी का इंतजार


झील के उस पार : भीम ताल : लघु फिल्म : डॉ मधुप

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चल कर किसी का इंतजार : हमें याद है घोड़ा खाल मंदिर से दुर कहीं दिखने वाली झील एक दम छोटी सी तिकोनी दिख रही थी। अब हमें वो झील भी देखनी थी। 
मधुमती फिल्म लोकेशंस की झील,अपने पूर्व जनम में  अभिनेता दिलीप का किसी झील का जिक्र करना,हालिया उस झील की क्या स्थिति है यह जानने के लिए हम भवाली से भीम ताल के लिए जानने के लिए निकल पड़ें। एकाध घंटे के भीतर ही हम भीम ताल के किनारे थे। एकाध घंटे के भीतर ही हम भीम ताल के किनारे थे। सच में यह बहुत बड़ी झील थी।
भीमताल एक त्रिभुजाकर झील है। यह उत्तरांचल में काठगोदाम से १० किलोमीटर उत्तर की ओर है।
भीमताल एक त्रिभुजाकर झील है। यह उत्तरांचल में काठगोदाम से १० किलोमीटर उत्तर की ओर है। इसकी लम्बाई १६७४  मीटर, चौड़ाई ४४७ मीटर और गहराई १५ से ५० मीटर तक है। 
सच माने तो नैनीताल से भी यह बड़ा ताल है। नैनीताल की तरह इसके भी दो कोने हैं जिन्हें निचला इलाका तल्ली ताल और ऊपरी भाग मल्ली ताल कहते हैं। यह भी दोनों कोनों सड़कों से जुड़ा हुआ है। अपर मॉल रोड और लोअर मॉल रोड यहाँ भी है।  
झील में नौकाएं तैर रहीं थीं। झील के मध्य एक टापू बना हुआ था। 
झील के उस पार : मधुमती फिल्म लोकेशंस की झील,अपने पूर्व जनम में अभिनेता दिलीप का किसी झील का जिक्र करना,हालिया उस झील की क्या स्थिति है यह जानने के लिए हम भवाली से भीम ताल के लिए जानने के लिए निकल पड़ें। इसकी लम्बाई १६७४ मीटर, चौड़ाई ४४७ मीटर और गहराई १५ से ५० मीटर तक है।
सच माने तो नैनीताल से भी यह बड़ा ताल है। नैनीताल की तरह इसके भी दो कोने हैं जिन्हें निचला इलाका तल्ली ताल और ऊपरी भाग मल्ली ताल कहते हैं। यह भी दोनों कोनों सड़कों से जुड़ा हुआ है। अपर मॉल रोड और लोअर मॉल रोड यहाँ भी है।
झील में नौकाएं तैर रहीं थीं। झील के मध्य एक टापू बना हुआ था।
प्रमुख आकर्षण : क्या देखें :
भीम द्वारा निर्मित भीमेश्वर महादेव मंदिर : इस ताल का नाम भीम ताल क्यों पड़ा ? जरूर कहीं न कहीं यह पांडवों से जुड़ा हैं। भारत एक ख़ोज जारी थी।
भीमताल में मुख्य शिव मंदिर भीमेश्वर महादेव मंदिर है, जो भीमताल झील के किनारे स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसका निर्माण महाभारत काल में पांडवों के भीम ने करवाया था और यह कुमाऊँ की चंद वंश की वास्तुकला का प्रतीक है, जहाँ शिवलिंग और नक्काशीदार मूर्तियाँ हैं और यह शांति और आध्यात्मिकता के लिए एक सुंदर स्थान है.
भीमताल झील और एक्वेरियम : झील के बीच में एक द्वीप है जहाँ एक एक्वेरियम है, यहाँ नाव ( बोटिंग ) करके जा सकते हैं. यह मुख्य आकर्षण है, जहाँ आप मछलियाँ देख सकते हैं और कैफे का आनंद ले सकते हैं.
हनुमान गढ़ी : यह एक धार्मिक स्थल है जहाँ हनुमान जी का मंदिर है और यहाँ से झील का सुंदर नज़ारा दिखता है.
तितली अनुसंधान केंद्र और कैफे : प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक बेहतरीन जगह है जहाँ आप विभिन्न प्रकार की तितलियों को देख सकते हैं.
विक्टोरिया बांध : झील के किनारे बना यह पुराना बांध भी देखने लायक है.


गतांक से आगे : ६.
प्रकृति, प्रेम, पहाड़ और पुनर्जन्म.
था झील का किनारा : भीम ताल : यात्रा संस्मरण
भीम ताल : वो झील का किनारा
और शक्ति से मुलाकात :
अंतिम क़िस्त
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था झील का किनारा : झील के उस पार : भीम ताल फोटो : शक्ति. शालिनी सुनीता रेनु अनुभूति

नौकुचिया ताल : भीमताल के पास ही स्थित यह एक और सुंदर और शांत झील है जहाँ कई तरह की गतिविधियाँ होती हैं,नौ कोनों वाली। इसके बगल में ही कमल ताल है।
बहुत बड़ी झील है यह भीम ताल। लेकिन घोड़ा खाल से कितनी छोटी और तिकोनी दिख रही थी।
धूप खिली थी। दूर दूर तक पर्यटक नौकाओं में नजर आ रहें थे।
भीम ताल : वो किनारा : विशाल काय झील है यह। झील के शान्त किनारे अमूमन प्रेमी-प्रेमिका,रचनाकारों को आकर्षित करता ही है। अक्सर किसी शांत, सुंदर झील के किनारे कवि, लेखक,दार्शनिक व चित्रकार, देखे जा सकते हैं।
प्रेमी जोड़े का घूमना,एकांत में बैठना, प्रेम प्रलाप करना तो आम ही होता है। और वैसे भी प्रकृति प्रेमी लोगों को पसंद होता है, कि भीड़ भाड़ वाले इलाके से दूर जो प्रकृति की शांति और सुंदरता के बीच बैठे प्यार तथा अपनापन का अनुभव करे।
मैं बैठकर सबकुछ शांत भाव से देख रहा था,कितना मनभावन प्राकृतिक दृश्य है यह,जैसे पहाड़ों की झीलें या शांत पानी के किनारे। कुछ और लोग भी बैठे हुए थे। उनमें से एक शालिनी भी थी।
उदाहरणतः भारत में डल झील,नैनीताल या पैंगोंग झील जैसी जगहों पर ऐसे दृश्य आम होते हैं, जहाँ लोग प्रकृति के बीच अपने प्रियजनों के साथ छुटियों में होते हैं। प्रकृति और शांति झील का किनारा आमतौर पर शांत और सुंदर होता है, जहाँ जोड़े सुकून पाते हैं और प्रकृति का आनंद लेते हैं।
रोमांटिक दृश्य वाले स्थलों जिसका वर्णन किसी फिल्म, गाने या कहानी में हुआ हो। एक खूबसूरत, शांत प्राकृतिक जगह हो अधिकतर प्रेमी जोड़े एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं।
शक्ति सम्पादिका से मुलाक़ात : भीमताल से वापसी के समय ही हमारी मुलाकात तब शक्ति सम्पादिका से हुई। वह भी एक सैलानी ही थी।
बाद में पता चला वह हिंदी की लेखिका, व कवयित्री है ,नाम है शालिनी। जो बाद में हमारे ब्लॉग मैगज़ीनक की प्रधान सम्पादिका बनी । बाद में मैंने उनके नाम के आगे शक्ति जोड़ दिया।
उनके साथ संदीप जी थे। उनके श्रीमान। शायद उनके बच्चें भी थे। वे दोनों उत्तरप्रदेश,आजमगढ़ से आए हुए थे। हम सभी बुद्धिजीवियों की तलाश में रहते है। अपनी ब्लॉग मैगज़ीन के लिए योग्य शक्ति सम्पादिका की खोज़ में। यह ख़ोज जारी ही रहती है।
अपनी आदतों के अनुसार हमने एक दूसरे के नंबर ले लिए। बहुत दिनों तक़ कोई बातचीत नहीं हुई। २०२४ के कुछ महीनों के बाद ही अचानक याद आने ,या कहें ब्लॉग मैगज़ीन के सन्दर्भ हुई बातचीत के सिलसिले में कविता, कहानी और कल्पनाओं भेजने छपने की शुरुआत हो ही गयी। विचारों के आदान प्रदान हुए। और आज वो हमारे ब्लॉग मैगज़ीन की सम्मानित प्रधान शक्ति सम्पादिका है। और मुझे उनपर असीम गर्व है।
रहस्य और रोमांच का आनंद उठाये : बोटिंग के लिए आप भीमताल झील में नाव की सवारी करें. बड़ा अच्छा लगेगा।
पैराग्लाइडिंग : रोमांच पसंद करने वालों के लिए पैराग्लाइडिंग का विकल्प है.
ट्रेकिंग : आसपास की पहाड़ियों और जंगलों में ट्रेकिंग का मज़ा लें.
शॉपिंग : स्थानीय बाज़ारों में कुछ खरीदारी करें.
क्यों जाएँ ? भीमताल १६०० मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित नैनीताल के बहुत पास होने के बावजूद शांत और कम भीड़ वाला है पर्यटन स्थल है। यह प्राकृतिक सुंदरता और झीलों के लिए जाना जाता है, जो इसे सुकून भरी छुट्टियों के लिए एक अच्छा विकल्प बनाता है। आप इस वीडियो में भीमताल के शांत और खूबसूरत नजारों को देख सकते हैं:
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चल चले ए दिल करे चल कर किसी का इंतजार


झील के उस पार : भीम ताल : लघु फिल्म : डॉ.मधुप.
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स्तंभ संपादन : शक्ति शालिनी रेनू माधवी तनु
स्तंभ सज्जा : शक्ति. मंजिता सीमा मीना अनुभूति
फोटो : गोलू देवता मंदिर. शक्ति.सिमरन. मुक्तेश्वर


* लीवर. पेट. आंत. रोग विशेषज्ञ. *
शक्ति. डॉ.कृतिका. आर्य. डॉ.वैभव राज :किवा गैस्ट्रो सेंटर : पटना : बिहारशरीफ : समर्थित. * --------- यादें न जाए : बीते दिनों की : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७. --------- संपादन शक्ति डॉ.अनु शालिनी प्रिया मधुप दार्जलिंग डेस्क *
तुम मुझे यूँ भूला न पाओगे जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे : शक्ति प्रिया मीना शालिनी अनुभूति 
लिखे जो ख़त तुझे वो तेरी याद में हजारों रंग के नज़ारे बन गए : शक्ति.प्रिया सीमा रेनू अनुभूति.
तुम जो कहोगे वो हम करते जायेंगे: इश्क़ का सफर नामा :कोलाज : शक्ति प्रिया शालिनी रेनू अनुभूति
* ------- यादें न जाए : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९. --------- संपादन शक्ति मंजिता सीमा अनुभूति दीप्ती शिमला डेस्क

हले प्यार की पहली चिट्ठी साजन को दे आ कबूतर जा : कलाकृति. शक्ति. मंजिता.चंडीगढ़.

*
शक्ति.तनु.आर्य.रजत निदेशक : स्वर्णिका ज्वेलर्स : सोहसराय : बिहार शरीफ समर्थित.
*
*
--------
समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील :पृष्ठ : ११.
--------
समाचार : चित्र : दिन : विशेष : पृष्ठ : ११.
संपादन
शक्ति हिमानी फरहीन स्मिता बीना जोशी.
*
३० दिसंबर १९४३ : जब अंडमान-निकोबार में लहराया आज़ाद भारत का तिरंगा
*
शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नैनीताल में शीत कालीन उत्सव की शुरुआत 
*
समाचार संकलन 
शक्ति.बीना नवीन जोशी 
सह भारती दीप्ती बोरा 
*

नैनीताल शीत कालीन उत्सव की शुरुआत : कोलाज : शक्ति.डॉ.सुनीता बीना भारती दीप्ती 

*
नवीन समाचार, नैनीताल.२३ दिसंबर २०२५.मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शीतकालीन 
पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोककला व संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से २२ से २६ दिसंबर तक आयोजित विंटर कार्निवाल के अंतर्गत मंगलवार सायंकाल नैनीताल में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। मुख्य मंच पर दीप प्रज्वलन और फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
सांस्कृतिक संध्या में वंदना और स्वागत गीत के साथ कुमाऊनी व गढ़वाली लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों तथा हिंदी, पंजाबी और आधुनिक गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी प्रस्तुतियों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे, जिससे पूरा परिसर उत्सवमय हो उठा।
इस अवसर पर सांसद नैनीताल - उधम सिंह नगर अजय भट्ट, विधायक सरिता आर्या,भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, नगर पालिका अध्यक्ष सरस्वती खेतवाल, कुमाऊं आयुक्त एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, स्थानीय नागरिक और बड़ी संख्या में
सैलानी उपस्थित थे

नैनीताल : शीतकालीन उत्सव दृश्यम


प्रस्तुति.
शक्ति. दीप्ती बोरा. नैनीताल.
*


क्रमशः जारी :
*
स्तंभ समाचार संपादन : शक्ति प्रिया कंचन दया भुवन जोशी
सज्जा : शक्ति मानसी सीमा अनुभूति ललिता जोशी

*
कैलाश खेर, सलमान अली, हरप्रीत कौर,व  भाव्या पंडित की आवाज़  से गूंजती रहीं  राजगीर की वादियां :
कोलाज : महाशक्ति शक्ति 
*
दिन विशेष : पृष्ठ : ९ /३ 
संपादन 
शक्ति हिमानी फरहीन स्मिता बीना जोशी. *
३० दिसंबर १९४३ : जब नेता जी ने अंडमान-निकोबार में लहराया आज़ाद भारत का तिरंगा
*
*
३.१२.१८८४
देश के प्रथम राष्ट्रपति
३.८.१८८४ - २८. २. १९६३
भारत रत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद
की जयंती पर शत शत नमन

*
यादें न जाए : दृश्य माध्यम : पृष्ठ : ११.
संपादन.


*
शक्ति स्मिता राधा * मीना रितु
*
दृश्यम : १३ सेकंड : अर्ध नारीश्वर : आदि योगी : कोयंबटूर
प्रस्तुति : शक्ति सीमा
*
*
अत्यंत संक्षिप्त यात्रा लघु फ़िल्म :
शक्ति स्मिता : हिमाचल की वादियाँ :


*
मुखड़ा : तेरे मेरे होठों पे मीठे मीठे गीत मितवा
आगे आगे चलेहम पीछे पीछे प्रीत मितवा
*
डॉ.अनु : अत्यंत संक्षिप्त यात्रा लघु फ़िल्म :
*

*
मुखड़ा : किसका रस्ता देखें ऐ दिल सौदाई
*
भारत का अंतिम गाँव : चितकुल : हिमाचल
*

शक्ति तनु :चंडीगढ़ : हिमाचल यात्रा : लघु फिल्म.
*
*
रिश्तों की जमापूंजी:बैंक ऑफ़ इंडिया : प्रबंधक. शक्ति.नेहा :समर्थित.  
*
यादें न जाए : बीते दिनों की हमारी शुभकामनायें.
*
---------
यादें न जाए : सफ़रनामा : साल का : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १२.
----------
संपादन

*
शक्ति.नैना डॉ.अनु रितु मीना.
नैनीताल डेस्क.
*
नैनीताल कहीं दूर जब दिन ढल जाए:अलविदा २०२५:शक्ति.लतिका लक्षिका ललिता भुवन जोशी. 

आदि कैलाश शिव शक्ति के दर्शन : कोलाज :
शक्ति. नमिता वनिता स्मिता अनुभूति 


त्रिवेणी:गंगा यमुना सरस्वती: प्रयाग राज कुंभ : 
सफ़र नामा : कोलाज : शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता मधुप


कहीं दूर जब दिन ढल जाए : रानीखेत : फोटो : शक्ति ललिता भुवन जोशी 


वादियाँ मेरा दामन रास्तें मेरी बाहें,हिमाचल:यात्रा कोलाज:
शक्ति स्मिता प्रिया डॉ सुनीता अनुभूति 


एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना है : कोलाज:मसूरी:शक्ति नैना डॉ.सुनीता मधुप वनिता 


ए दिल है मुश्किल जीना यहाँ.मुंबई मेरी जान नरीमन पॉइंट मुंबई.
शक्ति प्रिया मधुप सुनीता अनुभूति  
नेपाल पोखरा फ़ेबा लेक से दिखती: मच्छपुच्छ्रे पर्वत :फोटो: शक्ति प्रिया मधुप डॉ सुनीता अनुभूति

तुझे पुकारे है मेरी बाहें न ऐसी गंगा कही मिलेगी : हर्षिल गंगोत्री : डॉ. उनियाल प्यार किरण 

सत्यम शिवम सुंदरम:पशुपति नाथ मंदिर: काठमांडु:कोलाज:शक्ति प्रिया रितु मंजिता अनुभूति
* शक्ति रश्मि नारायण आर्य : डॉ. अमर दीप नारायण : नालन्दा हड्डी एवं रीढ़ सेंटर समर्थित
-------
यादें न जाए : शुभकामनाएं : तुम्हारे लिए : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १३.
--------
संपादन
शक्ति डॉ.अनु मीना प्रिया मधुप.
*
शॉर्ट रील.साभार : यादें न जाए : तुम्हारे लिए :
*
शॉर्ट रील : साभार : शक्ति : रेखा देहरादून.


रूठ जाए हम तो तुम हमको मना लेना सनम
दूर हो तो पास हमको तुम बुला लेना सनम
*

साभार : लिपिका सामंता : मेरी हंसनी कहाँ उड़ चली


रिवाइंड : २५

आज कोई प्यार से दिल की बातें कह गया
मैं तो आगे बढ़ गयी पीछे ज़माना रह गया
*

*
मुखड़ा : मेरी हंसनी कहाँ उड़ चली
मेरे अरमानों के पंख लगा के कहाँ उड़ चली
*
तुम्हारे लिए : पारुल : लखनऊ : शॉर्ट रील.

*
जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज !
*

तुम्हारे लिए : ख़ुशी : देहरादून : शॉर्ट रील.
*
*
हमने देखी हैं इन आँखों की महकती खुशबू
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो

*
तुम्हारे लिए : मुझे भी कुछ कहना है :
*
*
धीरे धीरे मचल ऐ दिले बेक़रार कोई आता है
शॉर्ट रील : साभार : शक्ति : रेखा देहरादून.
*
*
जब भी नैनीताल आता हूँ लगता है घर आ गया हूँ
अनु : सही कहते हैं पागल है.......
*
*
साभार : दृश्यम : नैनीताल : तेरी मेरी कहानी है
*
तुम जो कह दो तो तेरे घर के सामने एक घर बना लें
नैना पीक कैमल्स बैक पर फोटो खिचवा लेना तुम
*
--------
शुभकामनाएं : तुम्हारे लिए : पृष्ठ : १३ / ४
-----------
*
संपादन
शक्ति शालिनी प्रिया रेनू अनुभूति
*
शुभकामनाएं : जन्म दिन की.
२४.दिसम्बर .
शक्ति.अवतरण दिवस.
*

*
शक्ति. नैना
फोटो लघु फिल्म सम्पादिका
वेब ब्लॉग मैगज़ीन पेज महाशक्ति मीडिया.
*
दिये जलते है : ग्राफिक्स बधाई : तुम्हारे लिए
*

*
को उनके जन्म दिन : शक्ति अवतरण दिवस २४ दिसम्बर . मूलांक ६ .
के मनभावन पावन अवसर पर
' हम ' एकीकृत देव शक्ति ' मीडिया ' परिवार की तरफ़ से ढ़ेर सारी प्यार भरी
'अनंत ' ' शिव शक्ति ' शुभकामनाएं '
*
Mahashakti Media Powered
*
दोस्ती मैत्री : विश्वास और प्यार के लिए
मेरी पसंद का गीत
शक्ति डॉ अनु शालिनी रेनू सुनीता
*
फिल्म : दोस्त. १९७४
सितारे : धर्मेंद्र हेमा मालिनी शत्रुघ्न सिन्हा
गाना : दिल पे सह के सितम के तीर भी
पहन कर पाँव में भी ज़ंजीर भी
रक़्स किया जाता है आ बता दें कि तुझे कैसे जिया जाता हैं
गीत : आनंद बख्शी. संगीत : लक्ष्मी कांत प्यारे लाल. गायक : रफ़ी. लता.
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
*
MS Media Powered.
*

English Section 
*

*
Coming New Year Celebration with Focus Club & Resort. Ranchi.Supporting 
*

*
Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4. 
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
 Shakti : Kriti Art  Link :  English :  Page : 7
 Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9
* 
English Section.
*

Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting 
*
-------- 
Shakti Editorial : English Page : 2. 
--------- 
 Chief Editor. 
  *


* Shakti. 
Prof. Dr. Roop Kala Prasad. 
Shakti : Prof. Dr. Bhwana 
Shakti : Madhvee. 
Shakti : Baisakhi. 
*
Baroda Desk. 
*
Executive Editor 
*

 * 
Editor : Shakti. Manjita Seema 
Priya Tanu Sarvadhikari. 
Darjeeling Desk.
*
Shakti Vibes English Page : 3
*
*
Always being with you Mahashakti Legal Houses Suggesting Supporting
*
-------
Shakti Vibes English Page : 3
---------
Editor.
Darjeeling Desk.
*

Shakti.
*
Naina Priya Seema Tanu Sarvadhikari.
*
Change Yourself.
*
*
Vibe : Related: Photo: Shakti Shalini.
*
MS Vibe : Concept :
Victory over the Core of the Heart through Love Dhamma and tolerance ,
*
Don't try to be the 'next'.
Instead, try to be the other, the changer, the new

Kuchh To Log Kahenge
*
Easy : Busy : Lazy : Uneasy.

Everything remains very easy
In your moto When you are busy
What happens you become lazy
When something makes you very uneasy



Related : Photo : Shakti Dr.Madhup.
*
Let your small steps & actions today
become the spark for tomorrow's big change,
in the mindsets of the orthodox Society

*
You Can
*
Change begins the day
You believe you can
*
Doing something very special
*
*
Vibe Reference : Photo Shakti Seema.
*
The Best Version.
*
Be the best version of yourself so that everyone should love and befriend you
*
Success : Dream : Efforts
*
Some people only dream of success
Others stay awake to achieve it.
*
Escaping with Solutions.
*
The best way to escape from your problem
is to solve it
*
Right Action.
*
Do the right thing always without fear
Even if no one is watching you dear.
*
20 Minutes of doing something,anything
is more valuable than 20 hours
of thinking about doing something very special
*
The Best Version.
*
Be the best version of yourself so that everyone should love and befriend you
*
Everything is Possible
*
*
Photo Reference : Tumhare Liye. Dr.Madhup.
*
Beloved One
*
Indeed Possible is for willing one.
*
If you believe in yourself anything and Everything
is possible
*
-------
Shakti Editorial Write Ups : 4.
-------- 
Editor 
Shakti Naina Baishakhi Kanchan Tanu Sarvadhikari.
---------- 
*
Short Poem 
 * 
a passionate poem


*
Shakti Priya Madhup
Darjeeling Desk. 
*
Some leaned their shoulder for you to rest
*
Some people taught the lesson, where others just hopped on it,
Some people judged the show, where others simply clapped for it.
Some left us for no reason, where others pretended for it,
Some showed sympathy, where others only laughed for it.

*
Sea : Waves : myself : Photo Priya
*
Some became memories to be mesmerized, where others became cheers,
Some became happiness to be shared, where others became fears.
Some came and went with a reason, where others became dear,
Some cherished us with laughter, where others only gave us tears.

Some lent the hand of friendship, where others betrayed the bond,
Some leaned their shoulder for you to rest, where others took your calm.
Some cleaned your mind with positiveness, where others filled it with doubt,
Some guided your heart with warmth, where others tried to shut it out.
*
Some gave us love unspoken,
Part 2
*

*
photo : shakti Priya Madhup
*
Some lent the hand of friendship, where others betrayed the bond, Some leaned their shoulder for you to rest, where others took your calm. Some cleaned your mind with positiveness, where others filled it with doubt, Some guided your heart with warmth, where others tried to shut it out. Some gave us love unspoken, where others left us cold, Some stood with silent courage, where others only scolded. Some became the light in darkness, where others added night, Some became the soul’s companion, where others vanished out of sight

*
Tumhare Liye
*

photo : MS*

With open hearts and courage, ready for the best to appear.
*
We thank this year for all it taught, the joy, the pain, the fight,
For every lesson, every memory, every shadow and light.
We step into the coming year with hope held bright and clear,
With open hearts and courage, ready for the best to appear.
*
Page Editing : Decorative : Shakti Shalini Tanu Seema Anubhuti
*
Peace, Love and Prosperity. 
May the journey to capture the new forum 
 * 
Shakti Priya Madhup.

 
 * 
Sketch : Sunil Dutt & Nanda : Film Aajkal 

*
 May our media family flourish With new changes, 
peace, love and prosperity. 
May our media be blessed with the almighty’s blessings, 
 Cherishing every moment with new people and their new knowledge. 
May the journey to capture the new forum Being achieved with a great spirit and dedications. 
May we all live a happy, healthy and joyous year ahead, 

 * 
Edited & Decorated 
 * 
Shakti Priya Madhup Sunita Anubhuti. 
*
--------
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
--------
Editor.
Shakti Priya Madhvee  Shalini Seema.

*
Christmas Special : Celebration.
of three Idiots.

Shakti Priyanshi Lovely Sakshi.
*
 Jingle bells, Jingle bells, Jingle all the way.
Fiction : feeling : Story.
*

Nalanda : CR : 3 Idiots characters are liked and imitated by everyone of us. We are assigned for an exclusive interview of  a few on the occasion of Christmas by our Shakti Editorial Team.  
First we with our beloved virus mam Dr. Sunita Sinha altogether wish you a merry Christmas. We 3 Idiots visit a house where humanity exists, the family is having the broad minded approaches.
3 Idiots isn't a direct true story but it is realised  by all of us. Each and every parent is facing the same problem in the running life.
The character of Phunsukh Wangdu (Rancho) was heavily inspired by real-life Ladakhi innovator and education reformer Sonam Wangchuk, who founded the Students' Educational & Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) and created innovations like the Ice Stupa. The movie combines elements of Wangchuk's life and struggles with a fictional narrative to critique the Indian education system.


*
we the great Indian kids known for our Tolerance : Mental Broadness : and Vividness : with Unity in  Diversity 
Merry Christmas : photo : Shakti Priya Shalini Prerna Farheen.  
*
As we share that Christmas is a global festival on December 25th celebrating Jesus' birth. It is well marked by traditions like decorating trees, exchanging gifts, special meals, caroling, and church services, 
It according to us blends religious significance for Christians with widespread cultural festivities including festive markets, Santa Claus stories, and unique family customs like Secret Santa or finding a pickle ornament, making it a season of joy, giving, and togetherness.
The same we did and enjoyed a lot . We were given Chocolates, cakes by Santa symbolically stands for passion.The word also comes from Sanskrit, meaning "peaceful," "calm," or "good man," used as a name for  a common Italian word  "saint.
*
*
Visual : Every Festival giving the happiness..
Shakti Priya Dr Sunita Madhup Anubhuti :

*
Where History Meets Melody, in Rajgir Mahotsav.25
in a 3 day Cultural Programme.
*
*
 Day 3 : Soulful performance of  Bhavya Pandit 
and Salman Ali for Day 2

*  
News Clipping : Shakti Priya.Dr.Sunita Madhup
*
.

 an electrifying and  soulful performance of  
Bhavya Pandit : Photo : MS*Media.

*Under the keen observation of Bihar Government with District Administration The Rajgir Mahotsav, a vibrant cultural festival celebrates Bihar's rich history.
The Rajgir Mahotsav, a major cultural festival in Bihar, India, first began in 1986,inaugurated on April 4th by then - Chief Minister, to showcase the rich heritage of Rajgir and Nalanda through dance, music, and art
Day 3 : For having the last review I reached Rajgir by 7 PM around .Personally I was witnessing the live concert of Bhavya Pandit at Rajgir Mahotsav 25 for Day 3, really it was a concluding day of Rajgir Mahotsav while she appeared at stage around 8 pm. 
*
*
Visual Song Clip :  Day : 3 : Harshpreet Kaur : Dard  Aisa Jaga 
*
While  I was entering a Punjab based famous Bollywood Singer Harpreet Kaur was  captivating audiences with her versatile range in Hindi,  and Sufi music,  And she has been recognized as an iconic face for her classical training and popular film songs
Bhavya Pandit who is now a promising playback singer.Bhavyas melodious voice as well as her ability to naturally achieve brilliant pitching was unmatched and being  recognised by all of us. 
She allured the audience with the very popular song ' Bas Ek Bar Mera Kaha Maan Lijiye', O Mere Rashke Qamar'... 

Day 2 : was special for exclusively for Salman Ali, the winner of Indian Idol, delivered an electrifying and  soulful performance on December 20, 2025, which was the second day of the festival. He mesmerized the audience with a mix of Bollywood and Sufi melodies, celebrating Bihar's rich cultural heritage.
Noticeably the youths enjoyed a lot with soulful songs of  the beloved singer Salman Ali.
*
Kailash Kher : Where History Meets Melody, in Rajgir Mahotsav.25
*
Visual : a Kailash Kher's Song 
Na Kabhi Amber Se Surya Bichhadta Hai 

*
a soulful Sufi singer Kailash Kher mesmerizing the audience at Rajgir Mahotsav 25 : Shakti Collage : MS* Media.

Nalanda : CR / 19 th of December.It was a misty day. Temperature was dipping since yesterday.Today was the inauguration day of the Rajgir Mahotsav 25.
However the visitors were gathered there in spite of cold waves to witness the live performance of Padma Shri Kailash Kher. While travelling from Patna to Rajgir he felt very good , ' Indeed Bihar is changing now.'
It has been our glorious culture and tradition of Nalanda that the land of Gautam Buddha and Mahavir, imparting knowledge has been alluring several preachers like Nanak jee and others to visit this place since later Vedic period.
Kailash Kher actively performs, at the Rajgir Mahotsav 2025 in Bihar, mesmerizing audiences with his hit songs like, ' Mai to Tere Pyar Main Diwana', 'Tu Jane Na ',and . ' Kaun Jai Jai Kara '
He's a prominent live performer, known for soulful Sufi/Bollywood hits, with his band KAILASA often featured in festivals and shows across India with recent headlines highlighting his powerful shows.
The Bihar Minister for Rural Development and Transport,Shree Shrawan Kumar, and the Minister of Culture and Tourism,Shree Arun Shankar jointly inaugurated the most notably the annual Rajgir Mahotsav yesterday.
Recently the Rajgir Mahotsav,2025 edition around Dec 19 -21 with performances by artists like Padam Shree Kailash Kher and others, alongside local cultural shows, food fairs, and sports, will attract the tourists from the different parts of India aiming to boost tourism up in the historically significant town, Rajgir , Nalanda and Pawapuri around.
With anticipation of further more development in tourism sector,now Bihar is moving
ahead indeed.


*
Page Decoratives
Shakti Archna Madhvee Seema Anubhuti
Shimla Desk.


16th of December 
Historic Victory of India in 1971 War
Formation of Bangladesh.
*
 Davian Children experiencing a 2 day Adventure Camp 


*
Shakti Editor witnessing the adventure camp at DAV. photo .Shakti Priya Dr.Sunita Madhavi Seema 
*
CR / Nalanda. Today I was  witnessing a 2 day adventure camp that took place in PGC Dav Biharsharif . Interested  students participants  from SP Arya & PGC Bihar Sharif enthusiastically took part in the adventure camping.
A complete jungle set up was there. I was assuming that I was somewhat in the war camp where students were being trained. Really our  experiences were awesome. 
As we observe in  the adventure camps in schools offer thrilling, supervised activities  like zip-lining, climbing, zorbing  for physical and mental growth, building confidence, teamwork, and life skills away from screens, often held within school grounds or nearby venues for a few hours to overnight, providing fun, stress relief, and experiential learning for students of all ages. 

Swarnika Jewellers : Bihar Sharif  Supporting
-------
Shakti Photo Travelogue Gallery : English : Page : 6.
---------
Editor 
Shakti Naina Priya Smita Beena  Joshi
*
View of Langza village : Lahaul Spiti : Valley Himachal : Shakti Dr.Bhwana Smita Vanita Anubhuti.
Nainital : Naina Peak : New Year Christmas Celebration : Reporter.
Shakti Naina.Dr.Anu Bharati Latika Joshi : Nainital.

Hamare Sang Ganga Ki Lahren : Gangotri : Meena Shraddha Vanita Megha

Nepal Nagarkot  Nature Mist and the Beauty : photo Shakti Priya Madhup Dr.Sunita Seema.
Himalayan View during winter Ranikhet : Bhuwan Joshi .Collage Shakti Priya Meena Sunita.
An Evening ensures Morning : Sun Setting at Ranikhet:Shakti Lalita Bhuwan Joshi.
--------
Shakti : 
Kriti Art  :  English :  Page : 7
---------
Editor 
Shakti  Manjita Smita Deepti Anubhuti
Shimla Desk.
*
Let the hundred flowers bloom in side the hearts : Art Work : Shakti Anubhuti 
*
*
--------
Gratitude : We : You Said It :  Page : 9.
-----
 You Said It :
Editor.
Shakti. Manjita Seema 
Priya Tanu Sarvadhikari. 
Darjeeling Desk.
*
May this Nirvan Divas make her soul rest in peace
Shakti Priya Madhup Sunita Seema.
*
--------
You Said It : Gratitude : Page : 9
--------
Editor .
*
Shakti Priya Madhavi Shalini Anubhuti. 
*
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Now it is the right time to place any comment with your name. Write then publish.Visiable.
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Comments

  1. Like other series,this page also begins with a nice look,and an impressive start...

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