Jyoti kalash Chhalke : Dev Deepawali 25.

 ©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Presentation.
Cover Page.0.
 
 Dev.Deepawali. 
Volume : 1 Series :5.
a Social Media.Web Blog Magazine Page. 
Address.
https://msmedia4you.blogspot.com/2025/10/jyoti-kalash-chhalke-dev-deepawali-25.html
*
Cover Page. 
*
Jyoti kalash Chhalke : Dev Deepawali 25.Photo Slide : Shakti Priya.Dr.Sunita Madhup.
*
देव दीपावली:शक्ति:आवरण पृष्ठ. 
*

ज्योति कलश छलके: देव दीपावली :आवरण पृष्ठ :शक्ति.प्रिया डॉ.सुनीता मधुप.
*
रिश्तों की जमापूंजी:बैंक ऑफ़ इंडिया : प्रबंधक. शक्ति.नेहा :समर्थित.  
*
आ रहे प्रकाश पर्व : देव दीपावली की हमारी हार्दिक अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें.
*
शक्ति.नेहा.आर्य.अतुल.मुन्नालाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स.रांची रोड.बिहार शरीफ.समर्थित.
*

*
शक्ति.तनु.आर्य.रजत निदेशक : स्वर्णिका ज्वेलर्स : सोहसराय : बिहार शरीफ समर्थित.
*

*
विषय सूची :पृष्ठ :०.
*
राधिका कृष्ण रुक्मिणी मीरा : दर्शन : पृष्ठ :०.
अद्यतन विचार देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
*
संपादन
शक्ति *.प्रिया मधुप डॉ.सुनीता मीना
*

*
कृष्ण : महाभारत : अर्जुन : दुविधा
* अर्जुन : जो युद्ध के लिए तत्पर हमारे सामने है वो सभी अपने है , माधव ! कृष्ण : पार्थ ! वो जो अपने होते वो कभी सामने नहीं होते।
*
आस साँस और ईश्वर * जो निःशुल्क है वही सबसे ज़्यादा क़ीमती है, नींद, शांति, आनंद, हवा, पानी, आस और सबसे ज़्यादा हमारी साँस. इसलिए श्री हरि से आस और प्रीत बनाये रखें.
*
विषय सूची:पृष्ठ :०.

सम्पादित. डॉ. सुनीता सीमा शक्ति * प्रिया.
*
राधिका कृष्ण रुक्मिणी मीरा : दर्शन : पृष्ठ :०.
आवरण पृष्ठ :०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०
शक्ति विचार धारा : पृष्ठ : १
नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १ / ५.
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
 विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५. 
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
 शक्ति दिवाली  : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
 शक्ति दिवाली : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
 शक्ति  : आदित्य देव : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १२.
चलते चलते : शुभकामनाएं : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
आपने कहा : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १४.

*
शक्ति विचार.
*
---------
शक्ति : महाशक्ति दर्शन : पृष्ठ : १ / १ .
---------
शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्य
*

*
शक्ति : महाशक्ति : डेकोरेटिव : जी आई एफ.
*
महाशक्ति मीडिया एडवरटाइजिंग : शक्ति.
*
महाशक्ति. नैना देवी डेस्क.
नैनीताल. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना :जुलाई. दिवस :४.
*
सम्पादित.
शक्ति * नैना @ डॉ.सुनीता प्रिया.
*
*
पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं
*
मेरा मन क्यों ये चाहे मेरा मन
*
कहीं दूसरों के महलों में ' गुलामी '
करने से लाख गुना अच्छा है अपनी गरीबखाने में ही ' राज ' करना
*
कोई जब राह में आए
*
 समस्त परिस्थितियों में स्वयं को ' शांत ', ' सतत '  व ' संतुलित ' 
बने रहने  की कोशिश करें  , ' मुसीबतें ' अपना ' रास्ता ' स्वयं बदल लेंगी 
*
कुछ तो लोग कहेंगे मेरे अपने * दूसरे ' खूबियों ' में भी ' कमियाँ ' ढूंढ़ते हैं जबकि अपने ' कमियों ' में भी ' कामयाबियाँ ' ढूंढ़ते हैं *
स्वयं को बदल डालो
*
समाज की ' चिंता ' उस दिन के लिए करना
जब तक़ इस समाज में राम और कृष्ण की अवधारणा सत्यापित न हो जाए
अपना करम करते रहें
*
भोले भाव मिले रघुराई * सरल , भोले नादान इंसान ही ' ईश्वर ' के समीप रहकर सदैव ' जिंदगी ' का 'आनंद ' लेते हैं ..., अन्यथा ज्यादा ' ज्ञानी ' तो हमेशा जीवन के गणित ' ' हल ' तथा उसके ' रहस्य ' सुलझाने में ही उलझे हुए रहते हैं.
*
शरीर : आत्मा : शाश्वत प्रेम,सम्बन्ध जन्म जन्मांतर के.
* जहाँ से संकुचित संकीर्ण मानवीय विचारों का अंत होता है , सीमाएँ समाप्त होती है वहीं से अंतरआत्मा,उसकी वाणी, शाश्वत प्रेम,जन्म जन्मांतर सम्बन्ध की शुरुआत होती है.

*


टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग : शक्ति.
---------
शक्ति : महालक्ष्मी : दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
---------
लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्य
*

*
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमो नमः * शक्ति : महालक्ष्मी : डेकोरेटिव : जीआई एफ * शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २. *
* महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता. प्रादुर्भाव वर्ष. १९७९. संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२. सम्पादित. शक्ति. नैना @ डॉ.सुनीता सीमा प्रिया. * 


*
रिश्ते की डोर 
*
क़िसी भी रिश्ते की मजबूत डोर होती है 
प्यार का संरक्षण और सर्वोपरि बोलने का लिहाज़ 

*
दिल का रिश्ता 

जो रिश्ता अपने आप ही दिल से बंधा रहे वो संबंध है 
मगर जिनको संभालना पड़े वो व्यवहार होता है 

*
ये मेरा गीत ' जीवन ' संगीत 

मेरे जीवन संगीत का मैं शब्द हूँ तो तुम  अर्थ 
 न कोई सार तुम्हारे बिना मैं हूँ व्यर्थ 


*
ममता हॉस्पिटल बिहार शरीफ : शक्ति डॉ.ममता. आर्य डॉ.सुनील कुमार: समर्थित
मातृ शक्ति
*

निर्मला सिन्हा
प्रधान आचार्या
१९४० - १९२३
*
-----------
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
----------
शक्ति रूपेण संस्थिता.

संरक्षण शक्ति
*



*
शक्ति. रश्मि श्रीवास्तवा.भा.पु.से.
शक्ति. अपूर्वा.भा.प्र.से.
शक्ति.साक्षी कुमारी.भा.पु.से.
शक्ति.जसिका सिंह. अधिवक्ता.उच्च न्यायलय. प्रयाग राज
---------
संपादकीय शक्ति समूह.
----------
प्रधान शक्ति संपादिका.
नव शक्ति.
श्यामली : डेस्क : शिमला.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९.
संस्थापना वर्ष :२०००.महीना : नवम्बर. दिवस :८.


शक्ति : शालिनी रेनू नीलम 'अनुभूति '.
*
शक्ति. कार्यकारी सम्पादिका.


शक्ति. डॉ.सुनीता शक्ति*प्रिया.
नैना देवी.नैनीताल डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७०..
संस्थापना वर्ष : १९९६.महीना:जनवरी: दिवस :६.
*
सहायक.कार्यकारी.
शक्ति.संपादिका.


*
शक्ति.डॉ.अर्चना सीमा वाणी अनीता.
कोलकोता डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.

*
दृश्यम :फोटो.
शक्ति सम्पादिका
*
*
शक्ति.नैना डॉ.अनु रितु मीना.
नैनीताल डेस्क.
*
* महाशक्ति न्याय संहिता : विधिक सेवा : परामर्शदातृ संस्था : जागरूकता : क़ानूनी सलाह : समर्थित.

शक्ति. डॉ.रत्नशिला आर्य. डॉ.ब्रज भूषण सिन्हा. शिव लोक हॉस्पिटल बिहार शरीफ नालन्दा :समर्थित.
-----------
आकाश दीप : ज्योति कलश छलके : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
-----------
संपादन
*

शक्ति शालिनी मानसी रेनु अनुभूति
*
टाइम्स मीडिया शक्ति प्रस्तुति.
*
*
तमसो मा ज्योतिर्गमय :
देव दीपावली : प्रकाश पर्व विशेष 
*
भाविकाएँ. 
*
तुम्हारी कसम
*

ए री सखी रे : फोटो : शक्ति रेनू
*
कुछ लोग जो ठहर जाते हैं. * लोग आते हैं, मुस्कुराते हैं, कुछ पल दिल के दरवाज़े खटखटाते हैं। फिर यूँ ही वक़्त के साथ बह जाते हैं, जैसे रेत उंगलियों से सरक जाती है। पर कुछ चेहरे… कुछ आवाज़ें, यादों की तहों में ठहर जाती हैं। ना जाने क्यों, कैसे, कब, मन के किसी कोने में घर बना जाती हैं। वो बातों की गर्माहट, वो निगाहों की सच्चाई, वो अल्फ़ाज़ जो अनकहे रह गए, सब एक कहानी लिख जाते हैं जिसे कोई मौसम मिटा नहीं पाता। लोग आते हैं, चले भी जाते हैं, पर कुछ रिश्ते… समय के पार जीवित रह जाते हैं भीतर कहीं, सदा… सदा के लिए।
*
®️
*
शक्ति रेनू शब्दमुखर
प्रधान शक्ति सम्पादिका
*
पृष्ठ सज्जा संपादन : शक्ति प्रिया मधुप अनुभूति
*
सुनते है जब प्यार हो 
तो दिए जल उठते हैं 
*.

*
सन्दर्भ फोटो 
दिए जल उठते हैं : शक्ति.मीना. नैनीताल 
*
दीया - बाती और अंधेरे का ये कैसा नाता है,
एक जब जलता है तो दूसरा गुम हो जाता है।
 सदियों से,दरवाज़े पर एकटक, 
अंधेरे घर में बैठा दीया,
उस व्यक्ति को खोजता है,
आकर पास जो जला दे फिर से उसे,
और रौशन कर दे दीया, अंधेरे घर को।
स्नेह के तेल में डूबी बाती रात भर,
ख़ुद को ही तिल-तिल जलाती, 
अंधेरे को समझाती है।
दूसरे को रौशन करने की खुशी ,
इतनी बड़ी होती है जिसके आगे, 
 जी उठता है दीया,
 ख़ुद की हस्ती मिटा के भी.

*

शक्ति. नीलम पांडेय
वाराणसी. 
कवयित्री लेखिका सम्पादिका 
*
हँसिकाएँ
*
पतिव्रता : डॉ.मधुप.
व्यंग्य चित्र
*

संपादन पृष्ठ सज्जा :
शक्ति प्रिया शालिनी मंजिता अनुभूति
*
अनुगूँज : अनुभाग
सवैया छंद
*
अंधेरी रैन जभी घिरि आवै,


फोटो : सन्दर्भ : शालिनी

अंधेरी रैन जभी घिरि आवै,
अलकन साँझ सँवारत है।
पलकन बीच प्रभात जुगै है,
विस्मित भोर सो हारत है।
खग-कुल मौन हुवै चित भीतर,
कालिमा रात्रि पुकारत है।
मुखड़े पे निशि रूप सजावै,
बातन खंडन डारत है।

आँचर रंग बदलै छन-छन में, सूरज ऊगै औ व्योम जरै। यह जो रूप दिखै छलना है, मन मेरो जो सो मर्म करै। बिनु रितु मेघ बरै यह जानो, नभ में काजल सोई भरै। यह तो मिथ्या-नगरी सजनी, दिल्ली विष की गगरी ठहरै। ​कृत्रिम वारि झरी हिय भारी, माटी बूँद को प्यासी रही। पवन हलाहल बाँटि फिरै है, धूल रसायन घोंटि गही। बस्ती भारी बोझिल जानो, किन्तु खुल्लै मुख हास बही। मोहि बहिष्कृत करै यह नगरी, बाँह पसारि तऊ तकि रही। ​ ​पाटलिपुत्र की आस हिये धरि, दिल्ली खोजति अंधियारे में। भव की रानी, मसि-महल सिरजूं, नहिं पहचानी जग-जारे में। जब यह 'दिल्ली' मुखरित होवै, ऋतु पलटे क्षण एक बिचारे में। कील गड़ी धरती महँ ढीली, कष्ट अपार सहौं पिय प्यारे में।
*
शक्ति शालिनी
लेखिका कवयित्री
प्रधान सम्पादिका
--------
तारे जमीन पर : देव दीपावली : शक्ति आलेख : पृष्ठ : ४
---------
संपादन


शक्ति शालिनी प्रीति अनुभूति नीलम.
*
---------------------------
शक्ति आलेख : पृष्ठ .४ / ४ . कुमायूं में बूढ़ी दिवाली  
----------------------------

एकादशी के दिन गढ़वाल में  मनाई जाती है इगास और कुमायूं में बूढ़ी दिवाली. 

शक्ति आलेख : शक्ति बीना नवीन जोशी 
*
लोकप्रिय सेनापति माधव भंडारी की वीरता से है इसका संबंध. 

बड़ी दीपावली के बाद आने वाली एकादशी को पूरे देश में हरी बोधिनी एकादशी कहा जाता है इस दिन उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में और कुमायूं मंडल में बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है। इस वर्ष से प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार की बड़ी पहल बताई जा रही है इस दिन इगास पर राजकीय अवकाश घोषित करने की पहल हुई है।  तथा लोगों को इस त्यौहार के बारे में अतिरिक्त जानकारी मुहैया कराई  जाएगी क्योंकि इस त्योहार के बारे में उत्तराखंड ही देश के अन्य लोग भी अनजान है।  कहा जाता है कि हरिबोधनी  एकादशी को चार माह  के चातुर्मास में क्षीर सागर में योग निद्रा में सोने के बाद भगवान विष्णु जागते हैं। इस दौरान भगवान शिव भगवान विष्णु लोक की जग़ह पृथ्वी लोक का पालन करते हैं। इसी बीच दीपावली पड़ती है।  उत्तराखण्ड के कुमायूं मंडल में दीपावली तीन स्तरों पर मनाई जाती है। पहले कोजागरी यानी  शरद पूर्णिमा को  छोटी दिवाली के रूप में बालिका रूप लक्ष्मी की पूजा होती है , फिर दिवाली को यहां युवा माता लक्ष्मी की घूँघट में डिगारा  शैली में मूर्तियां बनाई जाती है। और चूँकि भगवान विष्णु इस दौरान सोए रहते हैं इसलिए अकेले माता लक्ष्मी के पदचिन्ह उकेरे जाते हैं उनके पति श्री विष्णु के नहीं। 

वही हरीबोधनी  एकादशी या


वही हरीबोधनी  एकादशी यानी गढ़वाल में बनाए जाने इगास  के दिन यहां बड़ी दिवाली मनाई जाती है और इस  दिन चूंकि हरि विष्णु जाग चुके होते हैं , इसलिए इस दिन माता लक्ष्मी के साथ श्री विष्णु के चरण भी ऐपन के माध्यम से बनाए जाते हैं। 
उधर गढ़वाल मंडल में मनाया जाने वाला पर्व माधों सिंह  भंडारी को याद कर मनाया जाता है। कहते हैं १७ वीं शताब्दी में था मलेथा गांव में पैदा हुए माधों सिंह  गढ़वाल के प्रसिद्ध भड़ यानी योद्धा थे। तब श्रीनगर गढ़वाल के राजाओं की राजधानी थी माधो सिंह के पिता कालू भंडारी की बहुत ख्याति थी। 

गतांक से आगे  पढ़े. 

बूढ़ी दिवाली : 

माधव सिंह पहले महीपत शाह फिर रानी कर्णावती और फिर पृथ्वी शाह के वजीर और वर्षों तक सेनानायक भी रहे।  कहा जाता है कि तब गढ़वाल और तिब्बत के बीच अक्सर गढ़वाल के ऊपरी भागों में अनाज की लूटपाट किया करते थे।  कहते हैं एक बार तिब्बत से युद्ध में इतने उलझ गए थे कि दिवाली के समय तक वापस श्रीनगर गढ़वाल नहीं पहुंच पाए । आशंका थी कि वे युद्ध में मारे जा चुके हैं। इस कारण तब गढ़वाल अंचल में दिवाली नहीं मनाई गई। लेकिन दिवाली के कुछ दिन बाद माधव सिंह की युद्ध में विजय और सुरक्षित होने की खबर श्रीनगर गढ़वाल पहुंची तब राजा की सहमति पर एकादशी के दिन दिवाली मनाने की घोषणा हुई। तभी से यहां एकादशी को दिवाली यानी  इगास मनाने की परंपरा की शुरुआत होती है। और तभी से भगवान निरंतर लोक पर्व के रूप में मनाई जाती है अलबत्ता गढ़वाल के कुछ गांवों में अमावस्या की भी दिवाली मनाई जाती है और कुछ गावों  में दिवाली के साथ इगास पर भी दिवाली मनाई जाती है। बिल्कुल दिवाली की तरह ही उड़द के पकोड़े की रोशनी भैला  और मंडान आदि के साथ मनाई जाती है
इन्हीं  माधो  सिंह भंडारी ने १६३४ के आसपास मलेथा की प्रसिद्ध भूमिगत सिंचाई नहर बनाई जिसमें उनके पुत्र का बलिदान हुआ जीवन के उत्तरार्ध में शायद १६६४ - ६५  के बाद उन्होंने तिब्बत से ही एक और युद्ध लड़ा जिसमें उन्हें वीरगति प्राप्त हुई इतिहास के अलावा भी अनेक लोकगाथा गीतों में माधो सिंह  की शौर्य गाथा गाई जाती है

संपादन : शक्ति प्रिया मानसी कंचन भारती 
सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा मीना अनुभूति 

शक्ति आलेख : ४ /३ 
हर शाम ही दिवाली है नैनीताल में 
यात्रा संस्मरण : ये पर्वतों के दायरे से साभार 
डॉ.मधुप 
*

था झील का किनारा पानी बरस रहा था : शाम : नैनीताल : और दिवाली हर दिन :
थीम फोटो : कोलाज : शक्ति.प्रिया मधुप डॉ.अनु

सामने नैनी झील पसरी पड़ी है। गहराती शाम और देर रात्रि में नयन की आकृति में पसरी झील एकदम शांत ही दिखती है । कभी कभी हवा चलने से उत्पन्न हुई तरंगों से हिलती डुलती है। बहुत ही खुबसूरत है यह झील । नैनी झील तो हम दोनों के मन में ही रचती बसती है न अनु......।
लोअर मॉल रोड अपर माल रोड ,नैना देवी मंदिर की सड़क फिर उससे जुड़ी ठंडी सड़क बस इतना में ही तो नैनीताल सिमटा पड़ा हैं ना , अनु।
तब भी तुमने कहा था,जैसे मुझे टोका ही था, ' अयार पाटा , डोरथी सीट, टिफिन टॉप ,चील चक्कर ,हनुमान गढ़ी ,नैना पीक, स्नो व्यू तो आपने छोड़ ही दिया....। '
याद है अनु ! हमलोग तो इसे १९७८ से ही देख रहें है ना ? नैनीताल की शाम में हम कहीं भी हो तल्ली ताल , मल्ली ताल, हाई कोर्ट,राज भवन या अयार पाटा हमें तो नीचे नैनी झील दिखने में हरेक शाम दिवाली दिखती है, ना ?
ठंडी सड़क से रात का दृश्य हम कभी भुला पाएंगे क्या ? नहीं न .....अंधेरी रात में सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ , जहाँ तेज़ ठंडी चलती हवायें..... दूर-दूर तक सिर्फ़ कुछ टिमटिमाती स्ट्रीटलाइटें ही दिखाई देती, जो धुंध के कारण और भी धुंधली हो जाती है । लेकिन फिर दूर से दिखती बनती , हिलती नैना देवी मंदिर की प्रतिबिंबित रोशनी क्यों कर दिखती थी .....अनु। याद है ना ?
*
संदर्भित यात्रा शक्ति लघु फिल्म : निर्माण : डॉ. मधुप


संपादन : शक्ति. प्रिया मीना शबनम 

सड़कें खाली होती , उन पर ठण्डी में कहीं-कहीं पाले की पतली परत भी जमी मिलती।
तो भी हम एक बार टहलना नहीं छोड़ते,थे ।
चर्च रोड से शेरवुड कॉलेज जाने वाली रोड से नीचे तल्लीताल मल्ली ताल झील के पानी में प्रतिबिंबित पीले ,नीले, लाल बल्बों की रौशनी..... दिवाली जैसी ही तो प्रतीत होती है ना ?
याद है इसी टहलने के बीच सुबह सवेरे भारती मिल गयी थी। शौकिया छायाकार। सीधी सरल मानवता प्रेमी। बहुत ही संवेदन शील। उन्होंने न जाने कितनी ऐसे फोटो धुंध,बादल, नैना देवी, नैनी झील की खींच कर दी है..... जिसे हमने अपनी पत्रिका में प्रकाशित भी की है। और करते ही रहेंगे .....
अक्सर सुबह सवेरे जब स्थानीय, वो, अन्य सभी सैर के लिए निकलते हैं तो उस समय जाड़े में घनी धुंध ही रहती है। कोहरा तो कभी भी कब बादलों के उतरने से छा जायेगा .... कोई बता सकता है क्या ?
सर्दियों में तो हवा इतनी सर्द होती है कि शरीर ही कांपने लगता है और नाक सुन्न हो रही होती है। आसपास की खामोशी में सिर्फ़ रात में कभी-कभी किसी कुत्ते के भौंकने या दूर से आती किसी गाड़ी की हल्की आवाज़ ही चुप्पी को तोड़ती है।
कभी कभी तो हमें अकेले घुमने में गुलदारों का भी भय सताता रहता था। एकाकी देखकर उनके हमले की तस्वीरें अक्सर नवीन दा अपने नवीन समाचार में प्रकाशित करते रहते हैं ।
कभी कभी तो तुम बड़े प्यार से कहने लगती थी जानते है इसतरह सरे राह चलते चलते शेर बाघ मिल जाए तो मैं शेर से कह दूँगी .... कि आपको छोड़ दे ....मुझे खा जाए ...
राजकपूर की फिल्म बॉबी याद आ गयी ....इसका एक कर्णप्रिय गाना भी


नैना देवी:मल्ली ताल:ठंढी सड़क:तल्ली ताल:जैसे हर रात दिवाली:
शक्ति प्रिया मधुप मीना भारती

रात के अँधेरे में जब आसमान में तारे या चाँद दिख नहीं रहे होते हैं, और सड़क पर सिर्फ़ स्ट्रीटलाइटों की मरी हुई पीली-नारंगी रोशनी ही दिखती है, सर्वत्र धुंध की चादर लिपटी हुई होती है। तब ठहरे हुए पानी में झिलमिलाती हुई रोशनी कितनी मनभावन लगती है .....तुमसे बेहतर कौन जानता है...?
ठंड और हवा रोजाना की तरह बहती थी। कभी कभी हवा बहुत तेज़ और बर्फीली होती , शरीर में चुभती भी थी । हवा के चलने से पत्तों या पेड़ों की आवाज़ें आती ,तब भी हम झील का एक पूरा चक्कर लगाने से नहीं चुकते थे।
सड़कें और तंग रास्ते ,और इक्के दुक्के ही लोग नज़र आते थे । भूटिया मार्केट , मंदिर की सड़कें एकदम से सुनसान होती, और उसके किनारे घास पर ओस या पाले की एक पतली, सफेद परत जम जाती थी । ठंड के कारण त्वचा सुन्न हो रही होती ,और कपड़ों के अंदर भी सरदी महसूस होती । तो भी हम घंटों गोलू देवता या पाषाण देवी के पास बैठे रहते थे।
साँस से भाप निकल रही होती , कभी कभी तो हम अपने पास में ही जैसे जमती भाप को देख लेते।
ठंडी सड़क के इर्द गिर्द सन्नाटा ही पसरा होता है , पूर्व परिचित चारों ओर एक गहरा सन्नाटा रात की खामोशी को कभी-कभी किसी दूर से आती गाड़ी की हल्की आवाज़ या किसी जानवर की आवाज़ तोड़ती है,रात ज्यादा गहरी होती या फिर कपडें ओस से भींग गए होते तभी हमारी तन्द्रा टूटती।
रात के इस अँधेरे और ठंड में सड़क के किनारे या किसी झोपड़ी में रहने वाले गरीब लोग ठंड से सिकुड़ रहे होते , तो हम कभी चाय वाले या अंडे वाले से कुछ खरीद लिया करते थे। निम्न तबके के गरीब
लोग और उनका जीवन तो अमीरों के लिए आरामदायक रात के बिल्कुल विपरीत है,ना ?

संपादन  शक्ति प्रिया मानसी डॉ.अनु 
सज्जा : शक्ति तनु मीना सीमा अनुभूति 
-----------
 काशी में ही देव दीपावली क्यों शक्ति : आलेख : ४ /२ .
--------------
धर्म : अध्यात्म :
देव दीपावली / कार्तिक पूर्णिमा का सनातन धर्म में अद्भूत महत्व है.


शक्ति. दया जोशी. 
सम्पादिका : केदार दर्शन  
नैनीताल.
सह लेखन : शक्ति मीना सुनीता नीलम 

कई कहानियाँ प्रचलित हैं। सुनी सुनाई एक कहानी है। कहते है काशी के राजा ने काशी के ही किसी घाट के पास एक शिवलिंग की स्थापना की थी और शिव से वहाँ स्थायी रूप से निवास करने का अनुरोध किया। 
प्रसन्न होकर, देवता काशी लौट आए और घाटों को दीपों की पंक्तियों से जगमगा दिया, जिससे दिव्य घर वापसी के उत्सव के रूप में देव दीपावली का जन्म हुआ। आज, यह उत्सव किसी अद्भुत अनुभव से कम नहीं है।
मुख्य आकर्षण: वाराणसी के सभी ८८ घाटों को रोशन किया जाता है, जिनमें दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और राजेंद्र प्रसाद घाट प्रमुख हैं। इसके साथ ही गंगा आरती, नाव की सवारी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लेजर शो और आतिशबाजी का भी आयोजन होता है। 


देवों की दीपावली : काशी में शिव : फ़ोटो : साभार 

देव दीपावली / कार्तिक पूर्णिमा * का सनातन धर्म में अद्भूत महत्व है। इस दिन कार्तिक का पावन महीना समाप्त होता है। इस दिन को देव दीपावली कहते हैं .....धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताजन दीपदान करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा का यह दिन त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जगत में प्रसिद्व है।
भगवान शिव की नगरी काशी में इस दिन गंगा पूजन, हवन, दीपनदान जैसे विराट आध्यात्मिक कार्यक्रमों का बड़ी ही आस्था के साथ आयोजन होता है। देव दीपावली का प्रमुख संबंध त्रिपुरासुर के बध से जाना जाता है।
काशी  में ही देव दीपावली क्यों * : काशी में विशेष रुप से देव दीपावली मनाने के पीछे एक एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है, कि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध करके देवताओं को स्वर्ग वापस दिलाया था।
तारकासुर के वध के बाद उसके तीनों पुत्रों ने देवताओं से बदला लेने का प्रण कर लिया। इन्होंने ब्रह्माजी की तपस्या करके तीन दुर्लभ अभेद नगर मांगे इस वरदान को पाकर त्रिपुरासुर खुद को अमर समझकर मद में उन्मत होकर वे महाभयंकर अत्याचार करनें लगे। अत्याचार के मद में उन्मत्त होकर उन्होंने देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ डाला। परेशान देवता शंकर की शरण में गये। 
त्रिपुरासुर का वध : काशी में देव -दिवाली की परंपरा *: देवताओं का कष्ट दूर करने के लिए भगवान शिव स्वयं भद्रकाली कवच धारण कर त्रिपुरासुर का वध करने पहुंचे और त्रिपुरासुर का अंत करके इनके आतंक से भूधरा को मुक्त किया इसी खुशी में सभी देवी-देवता शिव की नगरी काशी में पधारे और और शिवजी को दीप दान अर्पित किया। कहते हैं तभी से काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव - दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है।
भगवान विष्णु और भगवान शिव के जागने की ख़ुशी देव दिवाली * :  बताते चले  देव दिवाली का सम्बध भगवान शिव और भगवान विष्णु के अभेद संबंध से भी है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चतुर्मास की निद्रा से जगते हैं और चतुर्दशी को भगवान शिव। इस खुशी में सभी देवी-देवता धरती पर आकर काशी में दीप जलाते हैं। वाराणसी में इस दिन विशेष आरती का महा विराट आयोजन किया जाता है, जो पूरे देश में प्रसिद्ध है।

स्तंभ : संपादन : शक्ति  माधवी शालिनी नीलम रेनू 
सज्जा : शक्ति प्रिया  सीमा स्वाति अनुभूति . 
नैनीताल डेस्क 

*
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह : शक्ति आलेख : ४ /१
*
मैं तुलसी तेरे आँगन की : शालिग्राम : भगवान विष्णु और शक्ति वृंदा तुलसी का विवाह: कोलाज.

--------
मैं तुलसी तेरे आँगन की : शक्ति : आलेख : ४ /१.
-----------
*
शक्ति. प्रिया डॉ.सुनीता मधुप अनुभूति.
*
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह : कल देव उठनी एकादशी थी। एकादशी को श्री हरि अपनी चिर निद्रा से उठे थे । देवउठनी वस्तुतः भगवान विष्णु जी का योग निद्रा से उठना है। और आज कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी है। भगवान शालिग्राम ( श्री हरि ) और सती पतिव्रता तुलसी के आध्यात्मिक प्रेम विवाह का पवित्र दिवस भी है। हरि अनंत हरि कथा अनंता।
हम तुलसी से भली भांति परिचित हैं। हमने इसे घर घर में देखा हैं। हमारे घरों में तुलसी पाई जाती है। समस्त भारत में बहुत ही पूज्य है। इसमें चिकित्सीय व औषिधीय गुण समाहित है। हम तुलसी के काढ़े का खूब प्रयोग करते है।
भगवान विष्णु और देवी तुलसी का विवाह : भगवान विष्णु ने वृंदा ( तुलसी ) के त्याग और सच्चे प्रेम का सम्मान करते हुए उन्हें वरदान दिया कि वे तुलसी के रूप में सदैव पूजी जाएंगी और बिना तुलसी के उनकी व किसी की भी कोई भी पूजा पूर्ण नहीं होगी।
कार्तिक शुक्ल द्वादशी को तुलसी और शालिग्राम का यह विवाह होता है, जिसे देवउठनी एकादशी के अगले दिन मनाया जाता है. तुलसी विवाह : शालिग्राम ( भगवान विष्णु ) का विवाह तुलसी के साथ भी किया जाता है, जो हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थीं और उन्होंने अपने पति,असुर जलंधर की वजह से उन पर श्राप दिया था। भगवान विष्णु को शापित करने के बाद वह स्वयं सती हो गयी थी।
कहानी पुरानी : भगवान विष्णु के छल की : जालंधर नामक राक्षस देवताओं के लिए एक बड़ा खतरा था और उसकी पत्नी वृंदा के सतीत्व के कारण उसे कोई नहीं हरा पा रहा था। देवताओं की प्रार्थना पर, विष्णु ने जालंधर के रूप में एकनिष्ठ पतिव्रता वृंदा के पास जाकर छल से उसका तप भंग किया, जिससे जालंधर की शक्ति समाप्त हो गई। तब देवताओं द्वारा जालंधर का वध हो पाया था।
कहानी वृंदा : जालंधर : और छल : भगवान विष्णु की : विष्णु ने छल से वृंदा के पति जालंधर का रूप धारण किया, जिससे वृंदा की तप और एकनिष्ठता नष्ट हो गयी थी । इस कृत्य से क्रोधित होकर, वृंदा ने भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया और प्रभु श्री हरि शालिग्राम बन गए। वृंदा ने भगवान विष्णु को छल करने और पतिव्रता धर्म को भंग करने के कारण यह श्राप दिया था।
सतीत्व भंग : वृंदा की प्रतिक्रिया : एक श्राप : जब वृंदा को पता चला कि उसके सतीत्व के साथ छल हुआ है और उसके पति का वध हो गया है, तो वह क्रोधित हो गई। उसने भगवान विष्णु को भी स्त्री-वियोग सहने और पत्थर बनने का श्राप दिया। और स्वयं गहरे दुख और वेदना से व्याकुल होकर अपने प्राण त्याग दिया। उनके तप, भक्ति और पतिव्रता की शक्ति से धरती पर एक दिव्य पौधा उत्पन्न हुआ। वही पवित्र तुलसी के रूप में जाना गया।
यही कारण है कि त्रेता युग में विष्णु अवतरित राम को वृंदा के श्राप के कारण ही अपनी सीता के वियोग का सामना करना पड़ा था । ज्ञात हो कि सती वृंदा ने क्रोध और दुख में भगवान विष्णु को श्राप दिया था कि वे पत्थर के हो जाएं और पत्नी-वियोग सहें।
पत्थर बनने के बाद : परिणाम : वृंदा का श्राप स्वीकार करते हुए, भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर बन गए। वृंदा ने भी आत्मदाह कर लिया, देवताओं की प्रार्थना पर,वृंदा ने अपना श्राप वापस ले लिया और राख से एक पौधा निकला, जिसे तुलसी नाम दिया।
शालिग्राम और तुलसी का विवाह : भगवान विष्णु ने वृंदा से वादा किया कि वे अगले जन्म में उससे विवाह करेंगे। इस प्रकार, वृंदा तुलसी के रूप में और विष्णु शालिग्राम के रूप में पूजे जाने लगे, और उनका विवाह तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है।
भगवान विष्णु ने बाद में वृंदा को तुलसी के रूप में रहने का वरदान दिया और कहा कि उनकी पूजा तुलसी के बिना अधूरी होगी। तभी से तुलसी और शालिग्राम के विवाह ( तुलसी विवाह ) की परंपरा शुरू हुई।
आखिर कौन है ये शालिग्राम ? शालिग्राम भगवान विष्णु का एक निराकार और विग्रह रूप है, जो नेपाल की काली गंडकी नदी से प्राप्त एक पवित्र पत्थर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह भगवान विष्णु का ही एक रूप है, जिन्हें तुलसी के श्राप के कारण हृदयहीन शिला का रूप धारण करना पड़ा था।
उत्पत्ति और नाम : शालिग्राम को नेपाल में गंडकी नदी के तट पर पाया जाता है, और जिस स्थान पर भगवान विष्णु का मंदिर है, उसी के नाम पर इसका नाम ' शालिग्राम ' पड़ा।
भगवान विष्णु का रूप : इन्हें भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है, ठीक वैसे ही जैसे शिवलिंग को भगवान शिव का निराकार रूप माना जाता है।
पवित्रता : माना जाता है कि जिस घर में शालिग्राम होता है, वहां वास्तु दोष नहीं होता, और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
विविध रूप : शालिग्राम के कई प्रकार होते हैं लगभग ३३ प्रकार, जो उनके आकार, रंग और चिन्हों के आधार पर भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से संबंधित होते हैं।
पूजा : शालिग्राम की पूजा के कई लाभ बताए गए हैं, जैसे कि रोग और संताप का नाश होना और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होना।
देवउठनी एकादशी व्रत : ज्योतिष में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह को खास मौका माना गया है. इस दिन व्रत रखने और तुलसी विवाह से सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
हालांकि, इस बार एकादशी और तुलसी पूजन के समय और तारीख को लेकर संशय की स्थिति है.
हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह का विशेष महत्त्व है.
इस दिन सभी व्रत रखते हैं और तुलसी विवाह करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. जीवन में हर समस्या दूर होती है.हालांकि, इस बार एकादशी और तुलसी पूजन के समय और तारीख को लेकर संशय की स्थिति है.बहुत से लोगों के मन में शंका है कि एकादशी और तुलसी विवाह कब होता है. हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी श्री हरि विष्णु योग निद्रा से जागते हैं. इसी दिन गौधुली बेला में तुलसी का विवाह होता है, जो शालिग्राम से होता है.
*
संपादन : शक्ति. प्रिया माधवी शालिनी वनिता  . 
स्तंभ सज्जा शक्ति.अनुभूति सीमा मंजिता स्वाति 
शिमला डेस्क



----------
शक्ति : सम्पादकीय : तमसो मा ज्योतिर्गमय : आलेख : ४ /०    
------------ 
असतो मा सद्गमय,तमसो मा ज्योतिर्गमय. 
दीपों से ज्योतिर्मय काशी वासियों का देव महोत्सव ' देव दीपावली '


' शक्ति 'नीलम
लेखिका. कवयित्री.
प्रधान सम्पादिका
वाराणसी. 
*

पार्वती संगे काशी से हरिद्वार..हर-हर महादेव.हर- हर गंगे..फोटो : शक्ति : निवेदिता
*
काशी से हरिद्वार तक : काशी से हरिद्वार तक दीपों से ज्योतिर्मय गंगा घाटों की छवि देख श्रद्धा से दोनों हाथ जुड़ जाते हैं मन में एक ही भाव उठता है " तमसो मा ज्योतिर्गमय ".... आलोकित पथ करो हमारा हे जग के अंतर्यामी ......

" ..हर-हर महादेव...हर- हर गंगे..
         काशी विश्वनाथ गंगे,माता पार्वती संगे " ...

के जयघोष  के बीच आस्था, भक्ति और विश्वास की अद्भुत त्रिवेणी में डूबकी मारती काशी ! इस अभूतपूर्व दृश्य को कैमरे में संजोते सैलानी...सब कुछ शब्दों में समेट पाना निःसंदेह असंभव-सा जान पड़ता है आज। धार्मिक और सांस्कृतिक  काशी विश्वनाथऔर उत्तरवाहिनी गंगा की नगरी काशी का विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक महोत्सव-'' देव दीपावली " कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। 
हर की पौड़ी* : हर की पौड़ी हरिद्वार में लाखों श्रद्धालु माटी के दिए जलाकर इस त्यौहार को ऐतिहासिक बना देते हैं। ऐसी मान्यता है कि त्रिपुरासुर के आतंक  से त्रस्त देवताओं की विनती पर इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का बध किया  और देवताओं को मुक्ति प्रदान कर त्रिपुरासुर कहलाए। प्रसन्न देवताओं ने स्वर्ग में दीप जलाकर अपनी खुशी प्रकट  की। दीपोत्सव का  त्योहार तब से मनाए जाने की परंपरा है।काशी की देव दीपावली* :  काशी में दीपोत्सव मनाए जाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि राजा दिवोदास ने अपने राज्य काशी में देवताओं के प्रवेश पर रोक लगा रखी थी । 
कार्तिक पूर्णिमा के दिन शिव ने वेश बदल कर गंगा नदी में स्नान करने पहुंच गए जिसकी सूचना राजा को मिल गई और तब उसने प्रतिबंध हटा लिया था। 
लाखों की संख्या में जग मग करते मिट्टी के दियों से सजे काशी के घाटों की छटा देखने वालो की संख्या लाखों में होती है। देव दिवाली पर काशी में मौजूद होना मेरे लिए अद्भुत अनुभव है। फोटोज़ में कुछ लम्हों की कोशिश कर रहे हैं।सच में देवताओं को काशी की धरती पर उतारते देखने जैसा अनुभव है ये। मन में दोहराए जा रही हूं...
" हो ना तम का निशान अब कहीं पर,
   चांद उतर के आ जाए इस जमीं पर। "

माटी का दीया हाथ में लिए आकाश की ओर नजरें उठाए जन समूह अपलक इस सौंदर्य को आत्मसात करने में लगा है। ना कोई बड़ा ना कोई छोटा, अमीरी गरीबी की सीमा से परे रौशनी का यह त्यौहार सबके लिए शुभ हो,कल्याणकारी भावनाओं से ओतप्रोत हो। शुभ देव दिवाली 
" सभी के दीप सुंदर हैं, हमारे क्या तुम्हारे क्या ?
उजाला हर तरफ़ है,इस किनारे.. उस किनारे क्या ?"

स्तंभ  : सज्जा : शक्ति अनुभूति सीमा मंजिता स्वाति 
शिमला डेस्क 
संपादन : शक्ति शालिनी  वनिता शालिनी अनीता 

* दृष्टि क्लिनिक:आर्य डॉ दीनानाथ वर्मा.फिजिसियन.किसान बाग बिहार शरीफ.समर्थित. *  --------
विशेषांक : आलेख : धारावाहिक 
आलेख : पृष्ठ : ५. 
--------- संपादन शक्ति प्रिया शालिनी तनु सीमा *
हिंदी अनुभाग. दिए जलते है 
*
शिमला यात्रा संस्मरण 
छोटी सी मुलाकात.कला की अनुभूति के साथ 
आम - ख़ासअनजाने लोग.
डॉ. मधुप  

ओ जाने वाले ! लौट के आना : शिमला : पहाड़ियां : फोटो : शक्ति प्रिया डॉ सुनीता मधुप 
*

एक लेखक कवि  विचारक की यात्रा : एक लेखक कवि  विचारक की यात्रा जारी रहती है। यात्रा लेखक भौतिक परिदृश्यों, संस्कृतियों और कहानियों का अनुभव करते हैं और इन अनुभवों को अपने शब्दों यथा कविता ,कहानी संस्मरण आदि में लिखते हैं। 
एक लेखक की यात्रा  एक शब्द के कई मतलब हो सकते हैं, जैसे कि एक यात्रा लेखक का काम  जिसमें वह यात्रा करके अपने अनुभव हासिल करता है उसके बारें में  लिखता है। 
मेरी लेखकीय यात्रा भी सतत रहती है। मैं अपने एकदम से नए वातावरण में कई लोगों से मिलना,नई रचनात्मक, कलात्मक शक्तियों की तलाश उनसे मिलने ,उन्हें अपने भाव प्रधान लेखकीय समूह में जोड़ने, चैनल , ब्लॉग पेज को प्रसारित प्रचारित करने, के क्रम में हमारी यात्रायें जारी ही रहती है । अनयास ही अनजाने लोगों से मिलता ही रहता हूँ। शक्ति समर्थित वेब पत्रिका के लिए लेखकीय शक्ति की फिर वही तलाश जारी ही रहती है। पहले मिलना बातें करना फिर जुड़ना बड़ा अच्छा लगता हैं। स्वयं के जीवन में शब्दों और प्रेम पूर्ण मैत्री का लिखने पढ़ने जानने का जिज्ञासा पूर्ण अंतहीन सफ़र जारी ही है।  
पत्रिका : सम्पादकीय कल्पना शक्ति की ख़ोज : एक प्रसिद्ध लेखक की व्यक्तिगत यात्रा, या किसी लेखक के जीवन की यात्रा और उसके काम पर उसका प्रभाव दिखता है । यह एक लेखक द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों  जैसे कि पुरानी बस में यात्रा  करना  कभी कुछ अप्रियकर घट जाना ,या  मधुर जैसे अच्छे जनों से मिलना उनके अनुभवों को व्यक्त करने के  तरीकें मनभावन व काल्पनिक हो सकते हैं।  अपनी रचनाओं को मनमोहक अंदाज में प्रकाशित करने के लिए मैं निरंतर कल्पना शक्ति की ख़ोज में लगा ही रहता हूँ।  

      
 छोटी सी मुलाकात.कला की अनुभूति के साथ 
*
शिमला
 .दो से ढाई बजे का वक़्त  था 
दोपहर का । हमलोग शिमला के रिज पर टहल रहे  थे। खुश्क और ठंढी हवा हमें छू कर निकल रही थी। जून का ही महीना था। पार्श्व में ही शिमला की पुरानी एतिहासिक थियेटर थी - 
गैटी थिएटर, जिसके बारे में मैं काफी सुन चुका था। देखने के ख्याल से ही हमलोग उस थिएटर में प्रवेश कर गए। सुना था कई फिल्मों यथा ' बदलते रिश्तें ',' ग़दर ' की शूटिंग इस गैटी थिएटर में हुई थी। उत्सुकता थी सामने से इस थिएटर को देखूं। सच में इसके वास्तु शिल्प ,इसकी सजावट,खूबसूरती  देखने लायक है। साथी गाइड ने हमें इसके इतिहास के बारे में भी बतलाया।
चित्रों की प्रदर्शनी : देखने के बाद मालूम हुआ कि बगल में आर्ट गैलरी में चित्रों की प्रदर्शनी लगी हुई है। सोचा वह भी देख लेते है। मुझें याद है मेरे हाथ में लौटते समय गैटी थिएटर, शिमला  की आर्ट गैलरी की सन २०१२ की कोई पेंटिंग्स से सम्बंधित किताब थी जो मैंने बहुत संभाल कर इतने दिनों तक रखी थी यह सोच कर कि न जाने कब मेरे काम आ जाए । बहुत पुरानी। कोई आठ नौ साल पुरानी। दिन महीने साल गुजरते चले गए थे। यादों पर गर्द भी आने लगे  थे । लेकिन स्मृतियाँ बिजली होती हैं कभी भी कौंध जाती हैं। याद थी, उसमें ढ़ेर सारी 
वाइसराय लॉज : कई एक ख़ूबसूरत पेंटिंग्स छपी बनी दीवारों पर टंगी थी। लेकिन एक पेंटिंग शिमला की हायर स्टडीज की लग रही थी। और उस पेंटिंग के नीचे उस चित्रकार  की तस्वीर भी छपी थी जिसने उसकी रचना की थी।  
अनजाने में ही अनजाने सफ़र के अनजाने लोग के अंतर्गत मैंने बात करने की सोची थी जिसे मैं जानता तक़ नहीं था । न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा था इस पेंटिंग के पीछे कहीं न कहीं कोई न कोई पहाड़ की पहचान गुम  है,कोई रहस्य अनजाना 
वाइसराय हाउस शिमला : अनुभूति सिन्हा 
है।  क्योंकि मुझे लग रहा था जैसे मैंने कहीं यह इमारत 
देखी है। मुझे जानना था आख़िर यह इमारत कहां कि है। 
न जाने क्यों अक्सर पहाड़ों से आती हुई अनजानी आवाजें 
मुझे खींचती रहती है। जैसे मेरे अपने सगे सम्बन्धी दूर कहीं हिमालय की गोद में ही बसते हैं। 
मैंने उसी क़िताब के पन्ने में छपी  एक खूबसूरत महिला कलाकार ,एक हस्ताक्षर अनुभूति सिन्हा से बात करने की सोची थी। 
पुनः बता दें इसके पूर्व मेरी उनसे कोई जान पहचान नहीं थी। 
कोई बात-चीत भी नहीं। अतः  मैंने जानने समझने के लिए बहुत संकोच करते हुए काफ़ी कुछ सोचते हुए आखिर फ़ोन लगा ही दिया। हम कलमकार लोग थोड़े साहसी होते है।
...हेलो...' फोन के जुड़ने के बाद मैंने धीरे से संकोच वश पूछा।
जी...' उधर से एक अत्यंत सलीके वाली धीमी मीठी आवाज़ आयी,अनजानी......। 
मैंने फिर से आश्वस्त होने के लिए उनसे पूछा आप ...अनुभूति ही बोल रही  है...न ? '......................
...जी.हाँ ..आप कौन ..? उधर से एक सयंमित सवाल था मेरे लिए जो सहज था।  
' जी...मैं अपने मीडिया के लिए आपसे अनजाने सफ़र के अनजाने लोग से छोटी सी मुलाक़ात के अंतर्गत बात करना चाहता हूँ। .क्या आप हमसे अपने मुताल्लिक बात करना  पसंद करेंगी ..? 
' जी...बोलिये आप क्या जानना चाहते है ?..फ़िर घंटों  बातों का सिलसिला जारी रहा। 
कितनी अजीब बात थी जिस पहाड़ की बात मैं सदियों से करता आया हूँ  वह जानी अनजानी हस्ती शिमला की पहाड़ियों से सन्नद्ध थी। 
मैं फिर से आठ दस साल पीछे चला गया। जिस सपने जिस रहस्य की बात मैं कर रहा था इस पेंटिंग को बनाने वाली शिमला से ही ताल्लुकात रखती है। मैं भी कहीं पहाड़ों से जुदा हुआ मैदानी समतल में भटकता हुआ एक परिंदा ही हूँ जो जाने अनजाने में अपने देश पहाड़ की ओर लौटने की हसरत रखता है। 
शिमला टाउन हॉल : कृति अनुभूति सिन्हा. 
*
शिमला यात्रा संस्मरण 
छोटी सी मुलाकात.कला की अनुभूति के साथ 
गतांक से आगे : १ : मिल गया था कोई : 
*
ओ जाने वाले हो सके लौट के आना शिमला की पहाड़ियां ढ़लता सूरज फोटो शक्ति.प्रिया डॉ.सुनीता मधुप 

अब तक शिमला मेरी यादों में :अब की यात्रायें : साल १९९९ की बात थी। सर्दियां शुरू हो गई थी। यही कोई नवंबर का महीना था,जब हिमाचल लोक सेवा आयोग से लेक्चरर पद की परीक्षा के लिए बुलावा पत्र आया था। शिमला जाने की तैयारी हो रही थी। मसूरी और नैनीताल के बाद यह पहाड़ों की तीसरी यात्रा थी। लेकिन मुझे याद है शिमला की मेरी पहली यात्रा थी। बनारस के भोले भाले सीधे पंडित जी राजेश पाठक को कैसे भूला सकता हूँ। अभी भी जुडें हुए हैं। अकेले के सफ़र के वो मेरे हमराही थे।
लेक्चरर पद की परीक्षा पास करने के उपरांत साल २००० में लोक सेवा आयोग से परीक्षा के बाद होने वाले साक्षात्कार के लिए पुनः शिमला जाना पड़ा था। तब शिमला से लौटते समय समरहिल,सोलन बड़ोग से गुजरते हुए बहुत सारे अपने सपनें
ताना बाना बुन रहे थे। लग रहा था यहीं कहीं समरहिल या पोर्टर हिल के आस पास रहने लगूंगा।
साल २०१२ में जब अपनी टीम के साथ मैं पुनः शिमला आया तब ही मैंने शिमला की ख़ोज पूरी की। खूब घूमा। लिखने के लिए शोध किया। कुफरी ,नालदेहरा,तारादेवी सभी जग़ह घूमा था।


शिमला:रिज:चर्च:और गेटी थियेटर:१९९९ की मेरी यादें:शक्ति.प्रिया मधुप डॉ.सुनीता 

चलते चलते : मिल गया था कोई : सच कहें आदमी मुसाफिर ही है। इधर उधर आता है जाता हैं। आते जाते राहों में ऐसे लोगों से मिलता है जिनमें कुछ मिलते है कुछ बिछड़ जाते हैं और कुछ की  यादें साथ हो जाती  हैं। यही से बनती है उन कल्पनाओं से मर्मस्पर्शी कवितायें ,कहानियां और किस्से। 
बस मैंने उन यादों को कैद करने की भरसक कोशिश की है। सिलसिला जारी रहे बस इतना ही प्रयास जारी रखा है। यह भी एक सत्य है कि मेरे वेब ब्लॉग मैगज़ीन पेज पर जितनी भी सम्मानित सम्पादकीय शक्तियां आज उपस्थित रही हैं वो कहीं न कहीं पहाड़ी रही हैं, कुछेक को छोड़ कर। 
अधिकांशतः उनसे मेरी मुलाकात यायावरी के निमित्त जान पहचान नैनीताल, मुक्तेश्वर,सोलन,कसौली ,शिमला,दार्जलिंग, सिक्किम , भूटान,नेपाल ,जम्मू  आदि पहाड़ी क्षेत्रों में ही हुई। 
फिर से याद आ गया २०१२ का ही वर्ष था जब मैं शिमला की यात्रा पर था। हमलोग मॉल रोड के आस पास ही टहल रहें  थे। शायद गैटी थिएटर देखने जाना था। संयोग कहें वहां आर्ट गैलरी में कुछ पेंटिंग्स की
गैटी 
थिएटर चित्र कला प्रदर्शनी : और वो : प्रदर्शनी भी लगी थी इसलिए वहां भीड़ भी जमा थी । हम भी उसे देखने के सिलसिले में ही चले गए थे । वहां गैलरी में दीवारों पर ढ़ेर सारी पेंटिंग्स लगी सजी  पड़ी थी। अपनी अपनी पेंटिंग्स के पास उनके सृजक भी खड़े थे। उस पेंटिंग ,आर्ट गैलरी से सम्बंधित एक किताब भी मुझे दिखी  मिली थी जिसे मैंने सावधानी से अपनी जानकारी के लिए सहेज कर रखी थी। सच कहूँ बहुत सारी पेंटिंग्स के भाव तो हम नहीं समझ पाएं। एकाध दो पेंटिंग्स जो प्राकृतिक दृश्यों वाली थी हमें अच्छी लगी। उनमें से एक थी शिमला की हायर स्टडीज वाली जो इतिहास भी बयां करती है। उस पर ५००० रुपए का दाम टंगा था। चाह कर भी हम साधारण मध्यम वर्गी लोग इतनी महंगी पेंटिंग्स खरीद सकते है क्या ? नहीं ना।और शायद वहीं दिखी थी अनुभूति सिन्हा । बहुत ही शालीन ,सभ्य और सुसंस्कृत भी। ऐसे भी कलाकार लोग बहुत ही भावुक और संवेदनशील होते है। होते है ना ? हम कब के वापस लौट चुके थे। उसी क़िताब के पन्ने में ही दर्ज़ थी हमारी जिज्ञासा जिसने मुझे इतने सालों बाद बात करने की बजह बनी। 
हायर स्टडीज सेंटर शिमला : कला कृति : शक्ति अनुभूति 
बात चीत के सिलसिले में ही अनुभूति ने कहा उनका जन्म  तो बनारस में हुआ लेकिन माँ पिता शिमला आ गए वो पढ़ी लिखी शिमला में ही है । लोरेटो कान्वेंट शिमला से उन्होंने शिक्षा हासिल की। चूंकि शिमला की वादियों में बचपन बीता इसलिए प्रकृति से बहुत ही  करीब का नाता रहा। इसलिए उनकी पेंटिंग्स में स्वाभाविक शिमला की पहाड़ियां और उनकी ऐतिहासिक इमारतों का ख़ूबसूरत दर्शन और विवरण मिलता है। उन्होंने विज़ुअल आर्ट्स में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी पेंटिंग्स की सराहना देश विदेश में हुई मैं भी उनकी कलाकृतियों का मुरीद हूं । आज मैं उनके लिए शुभ कामना करता हूँ वो मेरे लिए शिमला की अमृता शेरगिल ही हो। खूब नाम कमाएं, प्रसिद्धि मिले।
सम्प्रति कुछ दिनों पहले तक वह डी पी एस स्कूल दिल्ली में कला शिक्षिका के पद पर कार्यरत थी ।

*
शिमला यात्रा संस्मरण 
छोटी सी मुलाकात.कला की अनुभूति के साथ 
गतांक से आगे : २: पर्यटन : शिमला मेरी यादों विरासत का शहर
*



याद है शिमला भारतीय ब्रिटिश काल में भारत की ग्रीष्म कालीन राजधानी रही है। इसलिए ब्रिटिश सरकार ने यहाँ रेलवे लाइन भी बिछाई। शिमला में हरेक घर घर की अपनी ही कहानी है। विरासत का शहर है।
कालका शिमला टॉय ट्रेन फिल्म लोकेशंस : कालका से शिमला पहुँच सकते हैं। सड़क मार्ग से भी बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। परमाणु बड़ोग,सोलन से गुजरते पहाड़ी स्टेशन से गुजरते हुए न जाने क्यों ऐसा लगता है कि कोई निरंतर आवाजें दे रहा हो ....
बचपन में लौट जाता हूँ। एकाकी जीने का अभ्यस्त रहा। कल्पनाजीवी रहा हूँ। तब विविध भारती से पुराने गाने बजते थे। उन दिनों ओ जाने वाले लौट के आना वादा भूल न जाना....बजता रहता था। अनायास ही रामानंद सागर निर्देशित, किरण कुमार कुमकुम अभिनीत १९७३ की फिल्म जलते बदन यह गाना गूंजता रहता था भी और है भी ।
इस गाने का लोकेशंस भी यही कहीं कालका शिमला ट्रेक पर ही शूट हुआ था।
आप पहुँचने के साधन में आप हवाई जहाज़ से जुब्बरहट्टी हवाई अड्डे या कालका रेलवे स्टेशन से कालका-शिमला टॉय ट्रेन से भी शिमला पहुँच सकते हैं। पहली बार हम टॉय ट्रेन से ही आए थे।
सड़क मार्ग से भी बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। हमने जुब्बर हट्टी की हवाई पट्टी भी देखी थी जो एकदम से ढ़लान में ख़त्म हो गयी थी।
मॉल रोड : यह शिमला का मुख्य केंद्र है, जहाँ दुकानें, भोजनालय और स्कैंडल पॉइंट हैं। शिमला की यात्रा में औपनिवेशिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव होता है,जहाँ आप मॉल रोड पर घूम सकते हैं।
ओ जाने वाले लौट के आना वादा भूल न जाना....


हमारी विरासत,रिज शिमला,एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज ऑफिस, शिमला : कृति शक्ति अनुभूति 


क्राइस्ट चर्च : गेयटी थिएटर : लक्कड़ बाज़ार:

क्राइस्ट चर्च : और रिज पर घुमते हुए क्राइस्ट दिख जाएगी। चर्च की नव - गॉथिक वास्तुकला देख सकते हैं। कालका-शिमला टॉय ट्रेन की सवारी, स्कैंडल पॉइंट का ऐतिहासिक महत्व, और लक्कड़ बाज़ार की खरीदारी जैसे कई आकर्षण इस यात्रा को यादगार बनाते हैं।
क्राइस्ट चर्च १८५७ में बना यह उत्तर भारत का दूसरा सबसे पुराना चर्च है और अपनी नव -गॉथिक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। याद है हमने यहाँ कैंडिल भी जलाई थी। कितनी बार एक दो दफ़ा तो चर्च जा ही चुका हूँ।
गेयटी थिएटर : कैसे भूल सकते है हम लोग । माल रोड पर थोड़ा सा आगे बढ़ते ही शिमला का गेयटी थिएटर दिखा था। हमने टिकट ख़रीदी। हमने भीतर भ्रमण भी किया था।
गाइड ने बतलाया था यह एक ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प रूप से महत्वपूर्ण इमारत है, जो ब्रिटिश काल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
इसे थिएटर का मक्का भी कहा जाता है और यह कई दिग्गज कलाकारों जैसे पृथ्वीराज कपूर, बलराज साहनी, अनुपम खेर और कुंदन लाल सहगल के लिए एक मंच रहा है। यह थिएटर नाटक, संगीत और नृत्य प्रदर्शन सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करता है और इसमें एक आर्ट गैलरी और संग्रहालय भी है। याद है इसी आर्ट गैलरी में ही अनदेखी मुलाक़ात हुई थी। बिना बात चीत की।
आप की चित्र प्रदर्शनी लगी हुई थी। प्रकृति,पहाड़ प्रेम से सम्बंधित।
लक्कड़ बाज़ार: रिज से पहाड़ी की तरफ से ही एक रास्ता बढ़ता है यहाँ आप लकड़ी की बनी विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं। हमनें भी कितनी गिफ्ट्स खरीदी थी अपनों को देने के लिए कुछ कुछ अभी तक़ याद है ।


स्कैंडल पॉइंट:जाखू मंदिर: इंडियन कॉफ़ी हाउस

स्कैंडल पॉइंट: शिमला
जाखू मंदिर :यह शिमला की सबसे ऊँची चोटी पर स्थित एक महत्वपूर्ण मंदिर है।यही से उपर ट्रेक करते हुए जाखू हिल्स में पवन सूत हनुमान मंदिर के दर्शन कर सकते हैं,हा बंदरों से सावधान रहें। बजरंग बली तो शिमला से बहुत दूर से ही दिख जाते है। वापसी में शिमला से कालका हमें टॉय ट्रेन से उतरते हुए भी हनुमान जी बहुत दूर तलक दिख रहें थे।
स्कैंडल पॉइंट : स्कैंडल आम खास सभी के जीवन में होता है। शिमला में भी स्कैंडल कुछ हुए। मॉल रोड रिज से जुड़े नीचे ढ़लान पर उतरते रास्ते का वह स्थान है जहाँ पटियाला के महाराजा और वायसराय की बेटी के बीच एक ऐतिहासिक प्रेम की यादगार घटना हुई थी। सच समझे तो प्रेम ,मुहब्बत ,दुनियाँ , जहाँ ,स्कैंडल सब यही की रीत है। अपने लिए जीने वालों की मुसीबतें हर पल जिन्दा ही रहती है। वही नीचे उतरते हुए काली बाड़ी हैं जहाँ से आप अक्सर दुर्गा पूजा की तस्वीरें भेजती है।
इंडियन कॉफ़ी हाउस : १९५७ से स्थापित यह कॉफ़ी हाउस ऐतिहासिक महत्व रखता है। कॉफ़ी हाउस एक ख़ास जगह रही है जहाँ मोदी १९९० के दशक में हिमाचल प्रदेश में भाजपा को मज़बूत करने की रणनीतियाँ बनाते थे, जब वे हिमाचल प्रदेश के भाजपा प्रभारी के तौर पर कॉफ़ी की चुस्कियाँ लेते हुए पार्टी सहयोगियों के साथ बैठकें करते थे। उस समय वहाँ मौजूद कॉफ़ी हाउस के कर्मचारी उन दिनों को बड़े प्यार से याद करते हैं।
*
शिमला यात्रा संस्मरण : अंतिम क़िस्त 
छोटी सी मुलाकात.कला की अनुभूति के साथ 
प्रेम प्रकृति पहाड़ और पुनर्जन्म
डॉ.मधुप 
सह शक्ति प्रिया सुनीता अनुभूति 

प्रकृति : प्रेम पहाड़ और पुनर्जन्म :

ओरोफाइल है हम : प्रेम प्रकृति पहाड़ और पुनर्जन्म :पहला रहस्य उनके स्थान विशेष का ही है ओरोफाइल का अर्थ है पहाड़ों और पर्वतीय क्षेत्रों से प्यार करने वाला व्यक्ति। यह शब्द ग्रीक शब्दों ओरोस पहाड़ और फाइल प्रेमी या मित्र से मिलकर बना है। यह उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें पहाड़ों के प्रति गहरा प्रेम और लगाव होता है।
विस्मय और सुंदरता : पहाड़ों की विशालता और भव्यता एक विस्मयकारी और शांत अनुभव प्रदान करती है। विस्मय और प्राकृतिक सुंदरता जो अनछुई हो प्रदूषण लेश मात्र नहीं हो हमें अच्छा लगता है।
विनम्रता सादगी होती है यहाँ : पहाड़ लोगों को यह एहसास कराते हैं कि वे प्रकृति के सामने कितने छोटे हैं, जिससे वे विनम्र बनते हैं। हालांकि अब परिवेश बदल रहें है।
पहाड़ में रहना रचना बसना साहस और चुनौती का पर्याय है: ट्रेकिंग और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियाँ रोमांच और उपलब्धि की भावना प्रदान करती हैं। पहाड़ों में रहना है तो कर्मवादी बनना होगा।
सीखने का अनुभव यहाँ है एकदम पृथक तरीक़े से। पहाड़ों में रहना और वहाँ के लोगों से मिलना जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाता है जो कहीं और नहीं मिलते।
आंतरिक शांति एकांत और जीवन का दर्शन पहाड़ों में रहकर लोग व्यस्त दुनिया से दूर शांति और सुकून पाते हैं।पहला रहस्य स्थान विशेष का था। वह पहाड़ से थी और है भी। हम सभी कहीं न कहीं ओरोफाइल ही है। पहाड़ों के प्रति प्रेम का मतलब ओरोफाइल होना है, जो पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता और शांति को पसंद करता है। यह प्रेम विस्मय, रोमांच, और विनम्रता की भावनाओं से जुड़ा है। लोग पहाड़ों की सुंदरता को देखने, ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों से खुद को चुनौती देने और प्रकृति के बीच एकांत का आनंद लेने के लिए पहाड़ों की ओर आकर्षित होते हैं।
तो दूसरा रहस्य व्यक्तिगत है,या महज एक संयोग मात्र है जो हमें सुखद अनुभूति दे जाती है, जिसे मैं अनावरण करना चाहता हूं। वह यह है कि वह भी हमारी तरह उस गौरवशाली कायस्थ जाति,परंपरा और परिवार, की एक सुनहरी कड़ी है जिस महापरिवार में हम सभी डॉ.राजेंद्र प्रसाद ,लाल बहादुर शास्त्री ,सुभास चंद्र बोस ,कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंदहरिवंश राय बच्चन ,महादेवी वर्मा तथा सिने अभिनेता अमिताभ बच्चन जैसे अनमोल सितारें,और  महापुरुषों के होने मात्र का गर्व एवं गौरव रखते है। 
मुझे कदाचित यह सुनना अच्छा लगा था जब उन्होंने अपने परिचय देने के क्रम में यह कहा था कि वह बंगाली कायस्थ परिवार की एक सदस्या है। हालांकि हम साहित्यकार ,कलमकार , चित्रकार लोग जाति, धर्म,रंग से परे मानवता तथा सर्व धर्म के अच्छे सार भाव के समर्थक होते हैं। और होना भी चाहिए। उनकी कुछ कलाकृतियों का कोलाज नीचे है जो आपकी नज़र है। वह एक चित्रकार होने के साथ साथ एक अच्छी सिद्ध लेखिका भी है उनकी कलम,उनकी रचना से वाक़िफ़ मैं बाद में करवाऊंगा।
तीसरी बात : एक काबिल कला शक्ति सम्पादिका का मिलना : इति शुभ कहने से पहले हम आपको यह भी तीसरी बात बता ही दें, जरूर बता दें कि हमारे वेब ब्लॉग मैगज़ीन की एक क़ाबिल शक्ति सम्पादिका मिल गयी।  एक कला शक्ति सम्पादिका जो ऑन लाइन हम सभी की पत्रिका की कलात्मक पहलुओं को देखती है।  वर्त्तमान में हम सभी के अनुरोध पर स्वयं की इच्छा से हमारे ब्लॉग पेज की  बतौर अतिथि कला संपादक जुड़ी हुई हैं। इनके सहयोग के लिए मैं, हम और आप  आभारी है ।  ( मेरे ही लेख सारे जहाँ से अच्छा से उद्धृत एक अंश )
डॉ.मधुप रमण .
स्वतंत्र व्यंग्य चित्रकार ,लेखक 
*
संपादन : शक्ति प्रिया रेनू मानसी कंचन
सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा मीना अनुभूति
*

हमारी पसंद : संदर्भित गीत
शिमला यात्रा विशेष
*
शक्ति प्रिया मीना भारती अनुभूति
*
फिल्म. प्रोफेसर.१९६२.
सितारे : शम्मी कपूर.कल्पना.
गाना : मैं चली मैं चली
पीछे पीछे जहाँ ये न पूछो किधर ये न पूछो कहाँ
गीत : शैलेन्द्र संगीत : शंकर जय किशन गायिका : लता रफ़ी
*
*
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं

----------
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : देव दीपावली : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
-----------
संपादन
शक्ति प्रिया मधुप शालिनी अनुभूति
*
दिए जल उठते है : जन्मदिन विशेष तराने :
दिल से हम सभी की तरफ़ से
*
फिल्म : आन मिलो सजना १९७०
सितारे : राजेश खन्ना. आशा पारेख. विनोद खन्ना.
गाना : कोई नजराना ले कर आया हूँ मैं
तुझे दुश्मनों की नज़र न लग जाये
रहे दूर तुझसे सदा गम के साए


गीत : आनंद बख्शी. संगीत : लक्ष्मी कांत प्यारेलाल. गायक : रफ़ी
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को

*
फिल्म : करीब. १९९८.
गाना : चोरी चोरी जब नजरें मिली
चोरी चोरी ये दिलने ने कहा
सितारे : नेहा. बॉबी देयोल.



गीत : राहत इंदौरी संगीत : अनु मलिक. गायक : कुमार सानू. संजीवनी
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को
*
लीवर. पेट. आंत. रोग विशेषज्ञ.
*
शक्ति. डॉ.कृतिका. आर्य. डॉ.वैभव राज :किवा गैस्ट्रो सेंटर : पटना : बिहारशरीफ : समर्थित.
*
------------
समाचार : चित्र : दिन विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
--------------
संपादन
शक्ति. मीना शबनम रितु स्मिता
*
अनंत शिव शक्ति देव दीपावली के प्रेम
सदभावना के दीप सदैव जलते रहें
*
न्यूज़ शॉर्ट रील : नैनीताल की शाम : शक्ति भारती
:

*
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
सुरमई उजाला है चम्पई अँधेरा है

*
शुभकामनाओं के साथ हम लोग
*

*
कार्तिक मास तिथि शुक्ल पक्ष वैकुण्ठ चतुर्दशी
श्री लक्ष्मी नारायण दर्शन की
की अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें
*

वैकुण्ठ चतुर्दशी. GIF.
*

*
हम देवशक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से
कार्तिक मास तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी को
शालिग्राम ( श्री हरि ) वृंदा ( तुलसी ) की आध्यात्मिक शादी
पवित्र विवाह की अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें

*

*
हम देव शक्ति मीडिया परिवार की तरफ़ से 
देव उठनी एकादशी की 
अनंत, शिव शक्ति शुभकामनाएं 
 *

रिश्तों की जमापूंजी : बैंक ऑफ़ इंडिया : शक्ति. नेहा. शाखा प्रबंधक : समर्थित 
*
--------
शक्ति दिवाली : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
---------
संपादन
शक्ति. प्रिया अनुभूति सीमा मंजिता
*
दिए जल उठते हैं : रिज : शिमला : रात्रि : चांदनी : कलाकृति : शक्ति प्रिया अनुभूति.मंजिता सीमा
शक्ति लक्ष्मी के चपल चरण : कलाकृति : शक्ति. दीप्ती बोरा. नैनीताल. 

 
प्रकाश पर्व गुरु नानक जयंती जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल:शक्ति प्रिया मंजिता सीमा अनुभूति 


साहिल : केशव ज्वेलर्स. चौक बाजार. बिहारशरीफ. नालंदा. समर्थित. 
---------
देव शक्ति दीपावली : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १२.
------------
संपादन
शक्ति. नीलम मीना भारती बीना.
*
सुनते है जब प्यार हो तो दिए जल उठते है : दीवाली : कोलाज : शक्ति प्रिया दीप्ती भारती मीना 
पर्वतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है : झील शाम बसेरा कोलाज : शक्ति प्रिया भारती मीना अनुभूति 
नैनीताल:ठंडी सड़क:लैंप पोस्ट:गहराती शाम और जलते बल्ब :शक्ति प्रिया सुनीता दीप्ती भारती 
नैना देवी:मल्ली ताल:ठंढी सड़क:तल्ली ताल:जैसे हर रात दिवाली:शक्ति प्रिया मधुप मीना भारती   
अस्सी बनारस और काशी : शक्ति की देव दीपावली : थीम फोटो : शक्ति प्रिया सुमन निवेदिता 
हरिद्वार देव दीपावली : दिए जल उठते हैं : थीम फोटो कोलाज : शक्ति. प्रिया मीना हिमानी रितु 
सुनते है जब प्यार हो तो दिए जल उठते हैं : दीपावली कोलाज : शक्ति. प्रिया मधुप सुनीता नैना 
एकादशी देवउठनी द्वादशी शालिग्राम तुलसी विवाह :कोलाज:शक्ति प्रिया शालिनी सुनीता अनुभूति 

फल्गु तट देव दीपावली गया जी की यादें :थीम फोटो कोलाज : शक्ति.माधवी स्मिता वनिता संगीता  
*
देव दीपावली की अनंत शिव शक्ति शुभकामनाओं  के साथ 

शक्ति पूजा आर्य डॉ. राजीव रंजन शिशु रोग विशेषज्ञ बिहार शरीफ़ नालंदा समर्थित 
------------

शुभकामनाएं : दिल जो न कह सका : चलते चलते : पृष्ठ : १३.
-------------
*
संपादन
शक्ति. प्रिया डॉ.सुनीता सीमा
--------
शुभकामनाएं : जन्म दिन : पृष्ठ : १३.
---------
संपादन.
*
शक्ति
डॉ.अनु भावना माधवी शालिनी
*
शुभकामनाएं : जन्म दिन की.
८.नवम्बर .
शक्ति.अवतरण दिवस.
*

शक्ति
अनुभूति
नव शक्ति डेस्क. शिमला
कला सम्पादिका
वेब ब्लॉग मैगज़ीन पेज महाशक्ति मीडिया.
*
दिये जलते है : ग्राफिक्स बधाई : तुम्हारे लिए
*
*
को उनके जन्म दिन : शक्ति अवतरण दिवस ८ नवम्बर . मूलांक ८ .
के मनभावन पावन अवसर पर
' हम ' एकीकृत देव शक्ति ' मीडिया ' परिवार की तरफ़ से ढ़ेर सारी प्यार भरी
'अनंत ' ' शिव शक्ति ' शुभकामनाएं '

*
शुभकामनाएं : जन्म दिन की.
३१.अक्टूबर.
शक्ति.अवतरण दिवस.
*

*
शक्ति.भारती.
नैनीताल.
*
विचार नीति शक्ति. सम्पादिका.
वेब ब्लॉग मैगज़ीन पेज महाशक्ति मीडिया.
*
को उनके जन्म दिन : शक्ति अवतरण दिवस ३१ अक्टूबर. मूलांक ४.
के मनभावन पावन अवसर पर
' हम ' एकीकृत देव शक्ति ' मीडिया ' परिवार की तरफ़ से ढ़ेर सारी प्यार भरी
'अनंत ' ' शिव शक्ति ' शुभकामनाएं '

-------
दिल जो न कह सका : दिए जलते है : चलते चलते : पृष्ठ : १३
---------
संपादन
शक्ति नैना प्रिया मीना अनुभूति
मेरी पसंद
*
शक्ति प्रिया मधुप मीना अनुभूति
तुम्हारे लिए
*
दिव्य विवाह प्रेम संगीत : तेरा मेरा साथ रहे
साभार : शॉर्ट रील : मृगनयनी
*
*
शॉर्ट रील : साभार : रेखा : अल्मोड़ा :


शॉर्ट रील : आओ तुम्हें चाँद पर ले जाए


तुम्हारी पलकों से गिर के शबनम
हमारी आँखों में रुक गई हैं
*
फिल्म : धुएं की लकीर.१९७४
गाना : तेरी झील सी गहरी आँखों में
कुछ देखा हमने देखा क्या देखा
सितारे : रमेश अरोरा.परवीन बॉबी.


गीत : साजन देहलवी. संगीत : श्याम जी घनश्याम जी. गायक : नितिन मुकेश वाणी जयराम.
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को

*
MS Media Powered
*
*
English Section.
*

*
Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4. 
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
 Shakti : Kriti Art  Link :  English :  Page : 7
 Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9
*
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting

---------
Shakti Vibes : English Page : 3
-----------
Editor.


Shakti Priya Seema Tanu Anubhuti
*
You & Unique Journey
*
Don't compare yourself
to others you have your unique journey
*
Effort : Goal : Destination.
*
Keep going towards your goal
One day you will arrive at your destination
*
Behaviour & Talent
*
Talent takes you to the top, O ! dear
but your behaviour decides how log you stay there
*
Success
*
Success is not a luck
It is a game of Patience and Hard Work
*

---------
Shakti Today Photo : English Page : 3
-----------
Nainital Desk.
*
Editor.
Shakti Priya Madhup Bharti Meena
Nainital Mukteshwar Desk.



Point : Naina Devi : Naini Lake
Mist Just stepping down in the lake.
*

--------
Shakti Editorial Write up's : 4.
--------
Editor
Shakti Bhagwanti Madhvee Seema Naina
*
Dev Deepawali.at Naini Lake ,Nainital.
*
Fiction Story.


*
' Light diya reflects in the Naini lake' as fireflies coming down
Shakti Priya Madhup Dr.Sunita
*

Film Kareeb : 1998. Locations : Deepawali : Likely framed to be at hill : It is around 1998 while I travelled nainital first.It was the same year when Neha and Bobby Deol acted film Kareeb was released.
I remember the beautiful scene of my beloved one director Vidhu Vinod Chopra's film Kareeb. In a beautiful scene the actor while burning the diyas, looking over the face of his belovedone fell in to the water.
Probably the location might be from any hilly area that captivated me too.
Naini Lake witnesses every evening as the Deepawali : I just recall Anu , the Naini Lake witnesses every evening as the Deepawali. The phrase ' Light diya reflects in Naini lake' as fireflies coming to the ground.
it is likely not a famous quote or established idiom, but rather a love based poetic description of the beautiful, real-life phenomenon that occurs at Naini Lake in Nainital, India.
Here's an explanation of the scene and its likely meaning :
Dev Deepawali ! at Naini lake : How it will be amazing whenever I feel like Shree Hari with Lakshmi we two keep lighting the diyas and celebrating Dev Deepawali at Naini lake.
fireflies just coming down.
The Scene : Naini Lake is a natural freshwater lake surrounded by hills and the bustling town of Nainital. At night, the countless electric lights from the buildings on the surrounding hills and along the Mall Road create a ' magical' scene where the water acts as a 'shimmering mirror,' reflecting the golden and multicolored lights. During festivals like Diwali, Dev Deepawali additional diyas (oil lamps) and festive lights would add to this natural spectacle.
Symbolic Meaning : The imagery evokes a sense of peace, reflection, and spiritual beauty. Light often symbolizes hope, knowledge, and the divine, representing the triumph of good over evil or knowledge over ignorance.
The reflection signifies introspection, self-discovery, or the mirroring of the divine within the natural world.
Naini Lake itself has spiritual significance, as local legend holds that the left eye (Nain) of the goddess Sati fell there, giving the place its name and making it a place of pilgrimage.
Therefore, the phrase likely describes a moment of serene beauty or a spiritual reflection inspired by the real, picturesque scene at Naini Lake
A significant festival in Hinduism, celebrated on the full moon day of the Kartik month (October or November).
Significance of Dev Deepawali : Dev Deepawali, also known as Dev Diwali or Gods' Diwali, is a festival that commemorates the day when the gods and goddesses descended to the Ganges River to take a holy bath. It's believed that on this day, the gods and goddesses light diyas (earthen lamps) to celebrate the victory of light over darkness. Celebrations Dev Deepawali is celebrated with great fervor in Varanasi, Uttar Pradesh, where thousands of diyas are lit on the ghats of the Ganges River. The festival is also celebrated in other parts of India, particularly in temples and holy cities.
Rituals - Lighting diyas and candles - Performing puja (worship) to the gods and goddesses - Taking a holy bath in the Ganges River - Offering prayers and gratitude to the divine Wishes- "Happy Dev Deepawali !
May the light of the diyas guide you towards peace and prosperity." - "Wishing you a joyous Dev Deepawali! May the gods' blessings be upon you." - "May the divine light of Dev Deepawali illuminate your life with happiness and fulfillment."

Column Editing : Naina Shakti Seema Garima Anubhuti
Decorative : Shakti Manjita Shalini Swati Pratibha.

DEV DIPAWALI : Write Up : 4/1
CONJUGATION  OF PHYSICALMETAPHYSICAL WORLD.
 Senior Editor 
Dr. R. K. Dubey. Shakti Seema.
victory of Lord Shiva over the demon Tripurasur. : courtesy photo net

It goes without saying that it is a risky undertaking to tackle such a great  theme of the discussion over celebration of Dev Dipawali within limited words & lines or pages as it evolves various questions such as - what is it, how is it different from Dipawali, why is it celebrated and on which day, what do we do on the day etc. However an endeavour has been made to provide a satisfactory explanation to the discussion over celebration of Dev Dipawali within limited space.
Dipawali is celebrated on Kartik Amawasya to mark the victory of Ram over Ravana and His return to Ayodhya from His Exile whereas Dev Dipawali is celebrated on kartik purnima to mark the victory of Lord Shiva over the demon Tripurasur. It is believed that on the day special worship is offered to Tulsi and lord Shaligraam, Lord Vishnu incarnated in the form of fish after getting up from His deep slumber. It isn't only related to the followers of Sanatan Dharma rather it is also related to Sikhism as it was the day which proved to be the gong which announced the birth of Guru Nanak Dev Ji.
It is believed that the demon Tripurasur was defeated and finished by Lord Shiva in Kashi (Varanasi)and thus the deities were set free from the tortures of Tripurasur.
So the deities celebrated Dipawali in Kashi to mark the occasion on the day of Kartik Purnima......

Column Editing : Shakti 

Shakti Bhagwanti Madhvee Garima. Naina
to be continued 

--------
Day Special.Wishes. News : English : Page : 8.
---------
Editor.
Shakti Priya Madhvee Seema.Garima.
*

Bihar Legislative Assembly Election 25. Shakti Enjoying Right to Vote
Theme Collage Photo : Dr. Bhawana Sunita Ritu Seema.
*
31 of October
Sardar Ballabh Bhai Patel 150 Jayanti
Celebrated as the Unity Day.
*
a Decorative GIF
*

31.10.1875-15.12.1950


Comments

  1. Shree Ganeshay Namah.
    Again nice presentation

    ReplyDelete
  2. It is a very nice page

    ReplyDelete
  3. A very nice title. Diye Jal Uthte Hai. Really it simply symbolises the removal of self ignorance and all negativity that we have in our life. Once again with a nice effort of Shakti Editorial Team the web blog magazine draws our attention for visiting once ...

    ReplyDelete
  4. धन्यवाद और सुंदर 🙏🙏

    ReplyDelete

Post a Comment

Don't put any spam comment over the blog.

Popular posts from this blog

IX.S.Sc.Questions Answers Banks.20-21

Syllabus IX.S.St.DAV/NCERT