Bite Samay Ki Rekha : Mere Naina Sawan Bhadon. Dainik.
©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Presentation.
Cover Page.0.
*
Blog Address.
Search Us at Google.
*
msmedia4you.blog.spot.com.
drmadhuptravel.blogspot.com.
*
email : Address.
m.s.media.presentation@gmail.com
*
Bite Samay Ki Rekha.
Mere Naina Sawan Bhadon.
*
दैनिक.आवरण पृष्ठ.संस्कृति विशेषांक.
*
*
अग्नि परीक्षा.
*
सीता जीवित मिली ये राम की शक्ति थी.
सीता पवित्र रही ये रावण की मर्यादा थी.
लेकिन पवित्र सीता पर उँगली उठी,उन्हें अग्नि परीक्षा देनी पड़ी
ये संकीर्ण समाज की अपवित्र सोच थी.
विचार कीजिए ज़रा सोचिए..
*
*
तेरी विजय हो
विचार सन्दर्भ : माया.
शक्ति. प्रियंका : छाया.
*
कद काठी नहीं : किसी व्यक्ति का क़ायदा व क़िरदार देखिए
*
आज जिसकी जितनी ' समझ ' , ' सहन ' , व शब्द शक्ति सिद्ध
होगी वह विजेता होगा
*
![]() |
* प्रथम मीडिया समर्थित. |
-------
शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / ३
-------
*
*
नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
*
संपादन.
शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा.
*
अथ श्री महाभारत कथा.
*
कृष्ण ने तो सार्थक ही प्रयास किया कि कर्म शब्दशः ही हो,
जो कहा जाए वही किया भी जाए,
लेकिन धृतराष्ट्र, शकुनि, दुर्योधन, दुःशासन, शिशुपाल,अश्वत्थामा
जनित कुछ ऐसी परिस्थितियां हो गयी कि धर्म की संस्थापना के लिए
उन्हें युधिष्ठिर के 'अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो वा ' जैसे अर्धसत्य
का सहारा लेना ही पड़ा.
*
शोध विचार @ शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा.
*
एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना हैं
*
परम रहस्य केवल उन्हीं लोगों के लिए खुलते हैं जिनके पास असीम धैर्य होता है
और जो विवेकशील होते हैं और सच की तलाश में सदैव लगे ही होते हैं
*
अध्याय : २ : श्लोक २० : गीता ज्ञान.
न जायते म्रियते वा कदाचि-न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥
*
*
शक्ति तनु.आर्य रजत. निदेशक. स्वर्णिका ज्वेलर्स. सोह सराय. बिहारशरीफ.समर्थित.
*
*
एक पक्षीय नहीं बहुपक्षीय खुशियों की भावना और
अवधारणा हमें सदैव सकारात्मक और रचनात्मक बनाए रखने में सहायक होती हैं,
*शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता सीमा अनुभूति
*
*
ये जीवन है.
*
शिकायतें, नाराज़गी, उपक्षायें व अपेक्षाएं किसी रिश्तें नाते का अंत नहीं
प्रत्युत जीवन में प्रेम के जागृत रहने के सार्थक प्रमाण है
*
शक्ति.डॉ.अनु मधुप रेनू रजनी.
*
एम एस मीडिया समर्थित
*
प्रेम की भव्यता सुंदरता तथा इसका उदगम निःशर्त होने,
अन्य प्राप्त गहरे सम्मान , व्यवहार व कृतज्ञता में ही हैं
*
शक्ति.मीना सोनी प्रियंका नीलम
प्रेम की भव्यता सुंदरता तथा इसका उदगम निःशर्त होने,
अन्य प्राप्त गहरे सम्मान , व्यवहार व कृतज्ञता में ही हैं
*
शक्ति. मीना सोनी प्रियंका नीलम
*
---------
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
---------
*
*
शक्ति. रेनू शब्द मुखर
जयपुर
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
*
कहा नहीं : तुम मेरे हो
*
प्रेम
प्रेम ने कभी नहीं कहा,
' मेरे हो जाओ.'
उसने बस इतना कहा,
'अपने जैसे बने रहना,
मैं तुम्हें बदलने नहीं,
*
राधिका : शक्ति रितु सिंह छाया.
*
*
समझने आया हूँ.'
शायद इसलिए
सच्चा प्रेम
किसी रिश्ते का नाम नहीं,
एक दुर्लभ संस्कार है.
प्रेम में सबसे सुंदर बात अधिकार नहीं,
अपनापन होता है.
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी शालिनी मधुप मंजिता
*
शक्ति. अनुभाग.
शालिनी
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
स्वयं : शक्ति शालिनी : छाया
प्रातः कालीन सभा में पहली कक्षा के एक बालक ने जो की ' कान्हा ' बन के आया था जब ये कहा कि..." मैं कान्हा हूं। मेरे कई रूप हैं। मैं कभी माखन चोर बन जाता हूं तो कभी ग्वाला बनकर गाय चराता हूं।तो कभी उंगली पर पर्वत उठाकर लोगों की रक्षा करता हूं। जब-जब इस धरती पर धर्म का नाश होगा तब तब मैं इस धरती पर अनेक रूपों में जन्म लेता रहूंगा ।"
*
आज फिर चाँद मेरी खिड़की पे
ठहर आया है,
जैसे कोई भूला अफ़साना
नज़र आया है.
रात चुप थी, मगर एहसास
यूँ बोल उठे,
दिल के वीरान मकाँ में
कोई घर आया है.
मैंने परदे की झिरी से
उसे देखा चुपके,
जैसे बरसों बाद कोई
हमसफ़र आया है.
उसकी चाँदी-सी किरण
रूह तलक उतरी है,
आज सुकूतों में भी इक
नया स्वर आया है.
*
अनुभाग
मेरी तन्हाई ने जब ओढ़ ली
रातों की रिदा.
न कोई ख़त, न कोई नाम,
न कोई पैग़ाम,
फिर भी लगता है कि
कोई ख़बर लाया है.
मेरी तन्हाई ने जब ओढ़ ली
रातों की रिदा,
चाँद बनकर कोई ख़्वाबों में
उतर आया है.
मैंने पूछा कि सफ़र
कैसा रहा सदियों का,
वो मुस्कुराए कि बस
वक़्त इधर आया है.
उनकी रौशन-सी निगाहों में
अजब सा ठहराव,
जैसे दरिया को मनाने
समंदर आया है.
रात ढल जाएगी,
यह चाँद भी खो जाएगा
दिल को इक उम्र का
मीठा-सा असर आया है.
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. डॉ.रजनी रेनू मधुप मंजिता
*
*
कोई तो हो.
क्यों होने लगता ख्यालों में इंतजार
किसी का
क्यों किसी को बताने को बेचैन
हो उठती है सांसे
वो सब,जो शायद इतने साल तक
इतने अपनों के बीच रह कर भी
कहा न गया हो कभी।
क्यों बालों से सफेदी के झांकते ही
चेहरों पे झुर्रियों के पड़ते ही
आंखों से धुंधलेपन को ताकते ही
और हाथों_पैरों की निर्भरता के खोते ही
आखिर क्यों ?
आंखें किसी ऐसे मजबूत सहारे को
ढूंढने लगती हैं
जो उसकी भावनात्मक ख्वाहिशों को समझे।
*
*
*
अनुभाग. भाविका
शक्ति डॉ. रजनी
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
मैं हूं न !
उसकी फिजूल की बातों पर हंसे
उसकी छोटी _छोटी खुशियों का
ख्याल रखे।
जब उदास हो प्यार से एक गुलाब
लाकर उसके हाथो में थमा दे।
जब भी वो परेशान हो,कारण जाने बिना
उसके सिर पे एक चुंबन जड़ दे
ये कहते हुए,
माया : सोनी : इद्रप्रस्थ
* तुम इतना क्यों सोचते हो, मैं हूं न !
* तुम इतना क्यों सोचते हो, मैं हूं न !
जो उसे भावनात्मक मजबूती दे सके
जो उसके छूटे सपनों को साकार
करने की वजह बने
दुनियां के साथ_साथ
उसे खुद के लिए भी जीना सिखाए
लोगों का ख्याल छोड़ते हुए
हर कदम कहे,,,
तुम बढ़ो आगे,साथ में, मैं हूं न !
*
सज्जा व संपादन
शक्ति शालिनी सीमा रंजिता मंजिता
*
संपादन : सज्जा
शक्ति रंजिता सीमा नीलम अनुभूति
----------
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
----------
संपादन
*
*
*
शक्ति आलेख :१ :गणपति
*
शक्ति. शालिनी डॉ. सुनीता मधुप अनुभूति
गणपति विघ्नहर्ता महाकाय मंगलकारी हैं.
भारतवर्ष विविधताओं का देश है। लोग भाषा भाषी ,प्रांत अनेक है। संस्कृति भिन्न हैं। फिर भी हमारी अनेकता में भी एकता है। फिर भी हम सभी एक सूत्र में बंधे हैं । हमारे घर में भी गणपति बिराजे हुए हैं।
विसर्जन की परंपरा के लिए गणपति का स्थान परिवर्तन कर देतें हैं।
भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया तीज का शुभ दिन : भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया का शुभ दिन जब शक्तियां शिव की आकांक्षा में निर्जला तीज व्रत करती है। तब उनकी एक मात्र अभिलाषा होती है कि कई जन्मों तक उनके स्वामी भोले शिव शंकर जैसे ही मिले और वो एक पत्नी निष्ठ हो। शायद शिव की महिमा ही ऐसी है।
भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी गणेश का शुभ आगमन : तिथि का संयोग देखिए ठीक इसके एक दिन बाद ही भाद्र शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी का दिन आता है। इस दिन ही विघ्नहर्ता, वक्रतुंड, महाकाय, गणेश जी का शुभ आगमन होता है। गणेश का स्थान सर्वोच्च है क्योंकि उन्हें अपने माता पार्वती पिता शिव का आर्शीवाद प्राप्त था।
सनातनी परंपरा के अनुसार हम अपने प्रत्येक शुभ कार्य करने के पहले गजानन को स्मृत करते हैं और बार-बार दोहराते हैं, श्री गणेशाय नमः।
गणेश उत्सव इतिहास के झरोखें से : ज्ञात हो ब्रिटिश कालीन भारत में १९०४ - १९०५ के बंग भंग आंदोलन के विरुद्ध महाराष्ट्र केसरी बाल गंगाधर तिलक, बंगाल के विपिन चंद्र पाल और पंजाब केसरी लाला लाजपत राय ने महाराष्ट्र, बंगाल, पंजाब में गणेश उत्सव मनाने की परंपरा समस्त भारत में शुरू की थी और एकीकृत होने की प्रेरणा समस्त भारतीय को दी थी। गणेश उत्सव आज समस्त भारतीय को सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से जोड़ने में सक्षम होती दिख रही है। बल्कि यूँ कहें आज गणेश उत्सव की यह परंपरा विश्व व्यापी हो गई है।
महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की परम्पराएं : महाराष्ट्र में सार्वजानिक गणेशोत्सव आम तौर पर १० दिनों तक़ चलता है और ग्यारहवें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन मूर्ति विसर्जन के साथ समाप्त होता है। अगले वर्ष तू जल्दी आ इस कामना के साथ हम सब प्रतीक्षा रत होते हैं।
सामान्य तौर पर गणेश उत्सव पूरे भारत वर्ष में १० दिनों तक ही मनाया जाता है, जो गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। हालांकि, लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार गणपति बप्पा को घर में अलग-अलग अवधियों के लिए स्थापित करते हैं।
स्थान परिवर्तन ही हमारा गणपति का प्राकृतिक, सांकेतिक विसर्जन : हम पर्यावरण को संरक्षित करते हैं।आप बप्पा को अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित दिनों के लिए रख सकते हैं यथा डेढ़ दिन ,बहुत से लोग चतुर्थी के दिन स्थापना कर के अगले दिन विसर्जन कर देते हैं।
३ दिन, ५ दिन या ७ दिन शास्त्रों में इन विषम दिनों में भी विसर्जन करने का विधान है।
१० या ११ दिन : सार्वजनिक पंडालों और कई घरों में बप्पा पूरे १० दिनों तक रहते हैं और आखिरी दिन अनंत चतुर्दशी को उनका विसर्जन किया जाता है। गणेश जी सभी के लिए कष्टहर्ता बने यह हमारी हार्दिक आकांक्षा है। सब के कार्य मंगल मय हो। हम गणपति बप्पा मोरया की ह्रदय से वंदना करते हैं।
आपके समक्ष है : महाशक्ति मीडिया की भक्ति की शक्ति प्रस्तुति
*
संपादन : डॉ रजनी रेनू प्रीति रंजिता
सज्जा : शक्ति सीमा मंजिता स्वाति अनुभूति
*
शिव शक्ति की प्रेम कहानी : हरतालिका तीज: लोक पर्व
भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी : एक महिला -केंद्रित उत्सव
शक्ति आलेख
डॉ. सुनीता सीमा प्रिया रंजिता.
*
तीज : शिव शक्ति की प्रेम कहानी : हरतालिका तीज : जब कभी भी तीज आता है तो अम्मा याद आ जाती है। बड़ी विधि विधान से तीज व्रत करवाती थी। आज भी हम सभी इस लोक पर्व की संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है।
मेरी माने तो लोक पर्व भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी है तीज. भगवान शिव और पार्वती की कहानी सती के रूप में शिव की पत्नी के दोबारा जन्म से शुरू होती है, जो शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करती हैं, शिव उनकी परीक्षा लेते हैं,और अंत में वे उन्हें वर के रूप में प्राप्त कर शिव की अर्धांगिनी बनती हैं.शिव के प्रति शक्ति का प्रेम अतुलनीय है।
भारतीय लोक सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी : तीज
फसली हरियाली ख़ुशहाली का पर्व : मानसून के मौसम में है यह तीज। चंद्रमा का चक्र निर्धारित करता है कि प्रत्येक वर्ष तीज कब मनाई जाती है। यह त्यौहार भारत के मानसून के मौसम में सालाना जुलाई या अगस्त में मनाया जाता है। यह त्योहार कई राज्यों में मनाया जाता है, मुख्य रूप से देश के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में। हालांकि केवल हरियाणा में यह तीज आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश के साथ मनाया जाता है।
भारतीय सभ्यता संस्कृति : यह राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में विशेषतः मनाया जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर, तीज के कुछ सबसे प्रसिद्ध उत्सवों का घर है। बिहार, में नालन्दा , गया ,नवादा आदि समस्त मगध क्षेत्र में यह लोक पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं २४ घंटे का निर्जला उपवास करती है।
उनका प्रेम शिव शक्ति जैसा ही हो : संध्या के समय गौरी शिव की पूजा की जाती है और यह कामना की जाती हैं कि उनके पति परमेश्वर जैसी स्वस्थ दीर्घ आयु पाएं। और उनका प्रेम शिव शक्ति जैसा ही हो। और दूसरे दिन आसन का विसर्जन होता है। पास के नदी तालाब में मूर्तियां विसर्जित कर दी जाती है इस सन्देश के साथ की अगले वर्ष गौरी शिव की पूजा से जुड़ी तीज का वो व्रत पुनः करें। समस्त विधि विधान के बाद महिलाएं अपना उपवास जल या शर्वत ग्रहण कर तोड़ती हैं।
तीज महोत्सव भारत में मानसून के आगमन के साथ मनाया जाने वाला एक महिला -केंद्रित उत्सव है, जिसे मुख्य रूप से श्रावण मास में मनाया जाता है. यह पर्व भगवान शिव और पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है, और विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु व वैवाहिक सुख के लिए व्रत रखती हैं. इस दौरान महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं. यह त्योहार आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक है.
*
संपादन : शक्ति. डॉ. रजनी शालिनी रंजिता स्मिता
सज्जा : शक्ति. मंजिता स्वाति रितु अनुभूति
आगे अभी जारी
*
शक्ति आलेख : ४ / ०
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरम.
*
*
शक्ति. नीलम पांडेय.
लेखिका. कवयित्री. सम्पादिका.
*
सह शक्ति. रेनू मधुप रीता
![]() |
| बाल कृष्ण : माखन चुराते हुए : GIF |
मैं अवाक उसका मुंह ताकती रही। ये है कृष्ण का विलक्षण व्यक्तित्व जिसे हर धर्म , समाज यहां तक की विश्व में अधिकांश जानते हैं। उन्हें वह अपना लगता है क्योंकि श्री कृष्ण का जीवन समाज के हर तबके के लोगों के जीवन में कहीं ना कहीं घुला मिला हुआ है।
श्रीकृष्ण जीवन-दर्शन के पुरोधा : श्रीकृष्ण जीवन-दर्शन के पुरोधा बनकर आए थे। एक ऐसा महामानव जिसके जीवन के अथ से इति तक का पूरा सफर पुरुषार्थ की प्रेरणा है। उन्होंने उस समाज में आंखें खोलीं जब निरंकुश शक्ति के नशे में चूर सत्ता मानव से दानव बन बैठी थी। सत्ता को कोई चुनौती न दे सके इसलिए दुधमुंहे बच्चे मार दिए जाते थे।
खुद श्रीकृष्ण के जन्म की कथा भी ऐसी है। वे जीवित रह सकें इसलिए जन्मते ही माता-पिता की आंखों से दूर कर दिए गए। उस समय के डर से जमे हुए समाज में बालक श्रीकृष्ण ने संवेदना, संघर्ष, प्रतिक्रिया और विरोध के प्राण फूंके।
![]() |
| कृष्ण : पार्थ : महाभारत : GIF |
कृष्ण के वंदनीय पक्ष की जगह अनुकरणीय पक्ष की ओर ध्यान : महाभारत का युद्ध तो लगातार चलने वाली लड़ाई का चरम था जिसे श्रीकृष्ण ने जन्मते ही शुरू कर दिया था। हर युग का समाज हमारे सामने कुछ सवाल रखता है। श्रीकृष्ण ने उन्हीं सवालों के जवाब दिए और तारनहार बने। आज भी लगभग वही सवाल हमारे सामने मुंह बाए खड़े हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि श्रीकृष्ण के चकाचौंध करने वाले वंदनीय पक्ष की जगह अनुकरणीय पक्ष की ओर ध्यान दिया जाए ताकि फिर इन्हीं जटिलता के चक्रव्यूह से समाज को निकाला जा सके। उनका संपूर्ण व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व धार्मिक इतिहास का एक अमिट आलेख बन चुका है। उनकी संतुलित एवं समरसता की भावना ने उन्हें अनपढ़ ग्वालों, समाज के निचले दर्जे पर रहने वाले लोगों, उपेक्षा के शिकार विकलांगों का प्रिय बनाया।
*
गतांक से आगे : १.
शक्ति आलेख : ४ / ० शक्ति. नीलम पांडेय.
श्रीकृष्ण के चरित्र में नृत्य, गीत, प्रीति, समर्पण है, हास्य है, रास है :
*
श्रीकृष्ण के चरित्र में कहीं किसी प्रकार का निषेध नहीं : फ़ोटो : शक्ति रितु राधिका कृष्ण :
श्रीकृष्ण एक योद्धा व सामाजिक क्रान्ति के प्रणेता :श्रीकृष्ण का चरित्र अत्यंत दिव्य है। हर कोई उनकी ओर खिंचा चला जाता है। जो सबको अपनी ओर आकर्षित करे, भक्ति का मार्ग प्रशस्त करे, भक्तों के पाप दूर करे, वही श्रीकृष्ण है। वह एक ऐसा आदर्श चरित्र है जो अर्जुन की मानसिक व्यथा का निदान करते समय एक मनोवैज्ञानिक, कंस जैसे असुर का संहार करते हुए एक धर्मावतार, स्वार्थ पोषित राजनीति का प्रतिकार करते हुए एक आदर्श राजनीतिज्ञ, विश्व मोहिनी बंसी बजैया के रूप में सर्वश्रेष्ठ संगीतज्ञ, बृजवासियों के समक्ष प्रेमावतार, सुदामा के समक्ष एक आदर्श मित्र, सुदर्शन चक्रधारी के रूप में एक योद्धा व सामाजिक क्रान्ति के प्रणेता हैं। उनके जीवन की छोटी से छोटी घटना से यह सिद्ध होता है कि वे सर्वैश्वर्य सम्पन्न थे। धर्म की साक्षात मूर्ति थे।
सामाजिक समता समरसता एवं राष्ट्रप्रियता का प्रेरक मानदण्ड : के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सामाजिक समता का उदाहरण है। उन्होंने नगर में जन्म लिया और गांव में खेलते हुए उनका बचपन व्यतीत हुआ। इस प्रकार उनका चरित्र गांव व नगर की संस्कृति को जोड़ता है, गरीब को अमीर से जोड़ता है, गो चारक से गीता उपदेशक होना, दुष्ट कंस को मारकर महाराज उग्रसेन को उनका राज्य लौटाना,धनी घराने का होकर गरीब ग्वाल बाल एवं गोपियों के घर जाकर माखन खाना आदि जो लीलाएं हैं ये सब एक सफल राष्ट्रीय महामानव होने के उदाहरण हैं।
कोई भी साधारण मानव श्रीकृष्ण की तरह समाज की प्रत्येक स्थिति को छूकर, सबका प्रिय होकर राष्ट्रोद्धारक बन सकता है। कंस के वीर राक्षसों को पल में मारने वाला अपने प्रिय ग्वालों से पिट जाता है, खेल में हार जाता है। यही है दिव्य प्रेम की स्थापना का उदाहरण। भगवान श्रीकृष्ण की यही लीलाएं सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रप्रियता का प्रेरक मानदण्ड हैं।
अध्यात्म के विराट आकाश में श्रीकृष्ण ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों व ऊंचाइयों पर जाकर भी न तो गंभीर दिखाई देते हैं और न ही उदासीन दीख पड़ते हैं, अपितु पूर्ण रूप से जीवनी शक्ति से भरपूर व्यक्तित्व हैं।
श्रीकृष्ण के चरित्र में नृत्य, गीत, प्रीति, समर्पण है, हास्य है, रास है : श्रीकृष्ण के चरित्र में नृत्य है, गीत है, प्रीति है, समर्पण है, हास्य है, रास है, और है आवश्यकता पड़ने पर युद्ध को भी स्वीकार कर लेने की मानसिकता। धर्म व सत्य की रक्षा के लिए महायुद्ध का उद्घोष है। एक हाथ में बांसुरी और दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र लेकर महाइतिहास रचने वाला कोई अन्य व्यक्तित्व नहीं हुआ संसार में।
श्रीकृष्ण के चरित्र में कहीं किसी प्रकार का निषेध नहीं : श्रीकृष्ण के चरित्र में कहीं किसी प्रकार का निषेध नहीं है, जीवन के प्रत्येक पल को, प्रत्येक पदार्थ को, प्रत्येक घटना को समग्रता के साथ स्वीकार करने का भाव है। वे प्रेम करते हैं तो पूर्ण रूप से उसमें डूब जाते हैं, मित्रता करते हैं तो उसमें भी पूर्ण निष्ठावान रहते हैं, और जब युद्ध स्वीकार करते हैं तो उसमें भी पूर्ण स्वीकृति होती है।
जय श्री कृष्ण
*
आगे जारी
संपादन : शक्ति. शालिनी डॉ. रजनी प्रीति
सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति रंजिता सीमा.
*
*
आज कल : पृष्ठ : ४ / १
डिजिटल दुनियाँ : तथापि गुरु की आवश्यकता
शिक्षक दिवस : गुरु शिष्य परंपरा.
*
शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उस गुरु का सम्मान करें.
यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं
*
शक्ति. आलेख
डॉ.सुनीता रंजिता सीमा.
*
अन्य संस्थानों की तरह डी ए वी विद्यालयों में भी शिक्षक दिवस की धूम रही। परिसर, व कक्षाएं सजाई गई। सजे सजाए गए डॉ.राधाकृष्णन की फोटो के आगे पुष्पांजलि की गयी। उनकी जीवनी, उनका जीवन संघर्ष, उनके त्याग उनके आदर्श किसने कितना याद किया यह प्रश्न भी अनुत्तरित ही है सब के अपने मन के भीतर है ।
हम पार्थ हैं श्री कृष्ण ही हमारे गुरु पथ प्रर्दशक हैं : हमने अपने लिए गोविन्द को ही सर्वस्व चुना है। हमारे लिए शिक्षक, भगवान सब वही हैं। तथापि उन समस्त गुरुओं के लिए चाहे उनकी उम्र सीमा कुछ भी हो, बड़े, छोटे या बूढ़े हो उनका हम सदैव सम्मान करते हैं।
शिक्षकों को शिक्षक दिवस की भेंट दी गयी। उनका सम्मान हुआ। क्या यह सम्मान सिर्फ एक दिन के लिए हो ? या फिर पूर्ण साल के लिए। विचार करें। गुरु शिष्य परंपरा में किस गुरु किस शिष्य की बात करें। सिर्फ सम्यक के लिए।
आज की डिजिटल दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गूगल और इंटरनेट के युग में गुरु का महत्व कम होने के बजाय और भी अधिक बढ़ गया है। जहाँ इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें कुछ ही सेकंड में किसी भी विषय की असीमित जानकारी दे सकते हैं, वहीं उस जानकारी को सही दिशा में उपयोग करने का विवेक सिर्फ एक गुरु ही सिखा सकता है।
डिजिटल युग में गुरु की भूमिका अब केवल ' सूचना देने वाले ' की नहीं, बल्कि एक गाइड, मेंटॉर और फिल्टर की हो गई है.
जानकारी और ज्ञान में अंतर : इंटरनेट के पास डेटा का भंडार है, लेकिन गुरु के पास अनुभव और विवेक होता है। डेटा को सार्थक ज्ञान में बदलना केवल गुरु ही सिखा सकते हैं।
सही और गलत की पहचान : डिजिटल दुनिया में ' फेक न्यूज़ ' और भ्रामक जानकारियों की भरमार है। गुरु छात्रों को विशाल सामग्री में से प्रासंगिक और विश्वसनीय सामग्री चुनना सिखाते हैं।
नैतिक मार्गदर्शन : मशीनें या हमें कोडिंग या गणित तो सिखा सकते हैं, लेकिन वे हमें संस्कार, संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवीय मूल्य नहीं सिखा सकते
मानसिक और भावनात्मक सहारा : इंटरनेट स्क्रीन की दुनिया में अक्सर बच्चे अकेलेपन या मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। एक गुरु ही शिष्य की मनःस्थिति को समझकर उसे सही और सकारात्मक रास्ता दिखाता है।
डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग : तकनीक का आँख बंद करके भरोसा करने के बजाय, उसका रचनात्मक और सही इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह समझ हमें गुरु से ही मिलती है。
आज डिजिटल गुरु - शिष्य परंपरा के माध्यम से संवाद और भी आसान हो गया है। देश के किसी भी कोने में बैठा छात्र ऑनलाइन कक्षाओं और ई - लर्निंग के जरिए बेहतरीन गुरुओं से जुड़ पा रहा है।
निष्कर्षतः तकनीक चाहे जितनी भी उन्नत हो जाए, वह केवल एक साधन है। मशीन हमें 'आजीविका' के साधन दे सकती है, लेकिन जीवन जीने की ' विद्या ' और सही दिशा आज भी सिर्फ एक गुरु ही दे सकता है। अच्छे संस्कार अपनी संस्कृति का ज्ञान गुरु ही दे सकता है , यह सदैव याद रखें।
गुरु शिष्य परंपरा : शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं।
चलते -चलते गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करते रहिए यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं।
यदि शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें। यही शिक्षक दिवस का निहित संदेश है आप समस्त शिक्षकों को जिनका स्वयं, परिवार, समाज तथा देश के उन्नयन में कुछ न कुछ, कहीं ना कहीं योगदान है उन समस्त शिक्षकों को हम याद करते हैं। और उनके लिए हमारी तरफ से अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं। बने रहिए हमारे साथ सम्यक साथ के लिए हम आपका आभार प्रकट करते हैं.
*
सज्जा व संपादन :
शक्ति : डॉ.भावना माधवी नीलम.
हर चीज़ की एक सीमा होती है.
*
हर बार चुप रह जाना डर नहीं होता, और हर बार सहते रह जाना सहमति भी नहीं होता।
प्रकृति का नियम है -हर चीज़ की एक सीमा होती है। नदी भी किनारों तक ही बहती है, रबर भी एक सीमा तक ही खिंचती है, और धैर्य भी एक मर्यादा तक ही साथ देता है।
समझदारी इसी में है कि किसी के मौन को उसकी आदत न समझा जाए। कई बार शब्द नहीं बदलते, लेकिन परिस्थितियाँ बदलने की आवश्यकता होती है। समय रहते छोटी-सी संवेदनशीलता बड़े रिश्तों, बड़े विश्वास और बड़े संतुलन को बचा लेती है।
क्योंकि जब सब्र अपनी सीमा पार कर लेता है, तब शिकायतें नहीं जन्म लेतीं -दूरियाँ जन्म लेती हैं।
--------
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
----------
⭐
शक्ति. शालिनी रेनू.
शक्ति. डॉ.रजनी नीलम.
⭐
| * शिमला डेस्क सम्पादकीय नव शक्ति विचार : पृष्ठ : २. |
*
एक पक्षीय नहीं बहुपक्षीय खुशियों की भावना और
अवधारणा हमें सदैव सकारात्मक और रचनात्मक बनाए रखने में सहायक होती हैं,
*शक्ति. डॉ सुनीता रंजिता सीमा अनुभूति
*
-----------
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
-----------
*
![]() |
शक्ति. अनुभाग भाविकाएँ |
*
---------
बीते समय की रेखा : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
---------
संपादन
शक्ति. मंजिता स्वाति दीप्ती अनुभूति.
---------
बीते समय की रेखा : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
---------
संपादन
शक्ति. मंजिता स्वाति दीप्ती अनुभूति.
*
----------
बीते समय की रेखा : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
----------
संपादन
जयपुर डेस्क
*
शक्ति. शालिनी रेनू रंजिता सीमा
*
*
------------
समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
------------
संपादन.
शक्ति. डॉ.रजनी स्मिता बीना दीप्ती.
*
कुमायूं नैनीताल
*
------------
समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
------------
संपादन.
शक्ति. डॉ.रजनी स्मिता बीना दीप्ती.
*
कुमायूं नैनीताल
को हरतालिका तीज की अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें
*
शक्ति.मीना अनु रितु सीमा
.आजकल : व्यंग्य चित्र : मधुप.
*
*
न्यूज़ : कई जिलों में बाढ़ की स्थिति : डूबे स्कूल सिलेबस कैसे पूरा हो ?
*
*
महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति : समर्थित : दृश्यम :
*
तीज लोक गीत : गायन :
शक्ति.सीमा सुनीता अनुभूति
*
*
सीधा प्रसारण : शक्ति. शैली राम कृष्ण.मुम्बई
*
--------
महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति : समर्थित : दृश्यम : ११ / २
--------
*
*
--------
महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति : समर्थित : दृश्यम : ११ / २
--------
शक्ति. सीमा सुनीता स्मिता अनुभूति
*
वो जब याद आए बहुत याद आए
फिल्म अभिनेता ; देव आनंद
२६. ९. २३. - ३. १२. २०११.
तराने : पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए
*
मुंबई : गणपति : विसर्जन : आज
*
तीज लोक गीत : गायन :
का ले के शिव के मनाईब हो शिव मानत नाहीं
*
*
लोक पर्व तीज लघु फिल्म अवधि : २.२४ मिनट
*
शक्ति स्मिता : हम भी ऐसे रंग जाए प्रेम में
*
----------
शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
----------
संपादन.
*
*
*
दिन विशेष :
शुभकामनाएं : जन्म दिन की
२३. ९.
संरक्षिका.डेवलपर महाशक्ति मीडिया
बंगलोर
*
अवतरण दिवस
जन्मदिन की अशेष अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
शक्ति. डॉ. सुनीता सीमा रंजिता अनभूति
*
दिन विशेष : १८ सितम्बर.
विश्व जल निगरानी दिवस
*
हर साल १८ सितंबर को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने आसपास के जल स्रोतों (जैसे नदियों, झीलों, तालाबों की स्वच्छता की जांच करने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
*
---------
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
-----------
संपादन.
डॉ.अनु शालिनी प्रिया अनुभूति
*
शक्ति रेखा : देहरादून : शॉर्ट रील
पल भर में ये क्या हो गया वो मैं गयी वो मन गया
*
दृश्यम : सौ बार जनम लेंगे सौ बार फना होंगे
प्रस्तुति : शक्ति मीना रितु प्रिया भारती
*
दृश्यम : सौ बार जनम लेंगे सौ बार फना होंगे.
*
*
राधाष्टमी विशेष : गीत : जीवन संगीत
*
मैंने ओढ़ी चुनरियाँ तेरे नाम की
*
*
प्रस्तुति : शक्ति मीना रितु प्रिया भारती
*
धुन : फिल्म वंदना : आपकी इनायतें आपके करम
आप ही बताये कैसे भूलेंगे हम
*
----------
दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३ / ३
----------
संपादन.
देहरादून डेस्क.
शक्ति.शालिनी प्रियंका अमित चौहान.अनुभूति
*
---------
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
-----------
संपादन.
डॉ.अनु शालिनी प्रिया अनुभूति
*
शक्ति. प्रियंका अमित चौहान : शॉर्ट रील :प्रस्तुति
ओ मेरी जान तेरे नाम सनम
*
शॉर्ट रील : शक्ति. प्रियंका अमित चौहान.
*
*
धुन : पंख होती तो उड़ आती रे रसिया ओ जालिमा तुझे दिल का दाग दिखलाती रे
*
* ------- You Said It : English : Page : ------- Editor. Shakti. Naina Himani Seema Anubhuti. * Keep up the amazing work, looking forward to the next one ! Shakti. Shahina Naz. Editor in English. MS* Media. * It always gets started with a nice and impressive ideas. Shakti : Seema. * |



.gif)

















































You put your best efforts into making this vlog look perfect and it is.
ReplyDelete"Keep up the amazing work, looking forward to the next one!"
ReplyDeleteNice
ReplyDelete