Bite Samay Ki Rekha : Mere Naina Sawan Bhadon. Patrika.
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Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
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Pratham Media.
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Bite Samay Ki Rekha.
Mere Naina Sawan Bhadon.
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पत्रिका.
आवरण पृष्ठ.संस्कृति विशेषांक.
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विषय सूची :पृष्ठ :०.

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अनुभाग : १.
शक्ति जीवन दर्शन.
आवरण पृष्ठ :०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ :०.
हम चार जीवन : दर्शन : पृष्ठ :०.
नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ :१.
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अनुभाग : २.
शक्ति सम्पादकीय.
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
यात्रा विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५.
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अनुभाग : ३.
शक्ति दृश्यम.
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
बीते समय की रेखा : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
बीते समय की रेखा : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
बीते समय की रेखा : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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अनुभाग : ४.
तुम्हारे लिए.
समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
: शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
मुझे भी कुछ कहना है.
कृष्णा : दृश्यम : छाया.
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वे कृष्ण ही हैं जो शब्दशील है ,मर्मज्ञ है, त्रिकालदर्शी भी
तथा जिन के अंतर्मन में मैत्री व अंतरंग संबंधों,के लिए समझ,व सहनशीलता है,
तथा जो ज्ञानी,सज्जनों व शिव शक्तियों की सुरक्षा,समृद्धि के लिए कर्म शील होते हैं,
*
विचार सन्दर्भ : माया.
शक्ति. मीना : छाया.
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कोई होता जिसको हम
अपना कह लेते यारों
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कहने को तो ज़माने में मेरे अपने बहुत हैं मगर मुझे गिरता हुए देखने के लिए भी मेरे अपने ही बहुत हैं
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अग्नि परीक्षा.
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सीता जीवित मिली ये राम की शक्ति थी.
सीता पवित्र रही ये रावण की मर्यादा थी.
लेकिन पवित्र सीता पर उँगली उठी,उन्हें अग्नि परीक्षा देनी पड़ी
ये संकीर्ण समाज की अपवित्र सोच थी.
विचार कीजिए ज़रा सोचिए..
*
तेरी विजय हो
विचार सन्दर्भ : माया.
शक्ति. प्रियंका : छाया.
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कद काठी नहीं : किसी व्यक्ति का क़ायदा व क़िरदार देखिए
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आज जिसकी जितनी' समझ ', ' सहन ', व शब्द शक्ति सिद्ध
होगी वह विजेता होगा
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* प्रथम मीडिया समर्थित. |
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शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / ३.
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नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
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संपादन.
शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा.
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अथ श्री महाभारत कथा.
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कृष्ण ने तो सार्थक ही प्रयास किया कि कर्म शब्दशः ही हो,
जो कहा जाए वही किया भी जाए,
लेकिन धृतराष्ट्र, शकुनि, दुर्योधन, दुःशासन, शिशुपाल,अश्वत्थामा
जनित कुछ ऐसी परिस्थितियां हो गयी कि धर्म की संस्थापना के लिए
उन्हें युधिष्ठिर के 'अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो वा ' जैसे अर्धसत्य
का सहारा लेना ही पड़ा.
*
शोध विचार @ शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा.
*
एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना हैं
*
*
क्रोध दुर्बल के सामने प्रत्यक्ष होता है तो
सबल के सामने अपने अंदर ज्वालामुखी बनकर धधकते हुए किसी
अवसर की तलाश में होता है
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*
परम रहस्य केवल उन्हीं लोगों के लिए खुलते हैं जिनके पास असीम धैर्य होता है
और जो विवेकशील होते हैं तथा सदैव सच की तलाश में लगे ही रहते हैं.
*
अध्याय : २ : श्लोक २० : गीता ज्ञान.
न जायते म्रियते वा कदाचि-न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
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शक्ति. शालिनी रेनू.
शक्ति. डॉ.रजनी नीलम.
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शक्ति.
कार्यकारी सम्पादिका.
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शक्ति. डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
*
कला सम्पादिका
शिमला डेस्क
*
*
दृश्यम. रील छाया
सम्पादिका.
*
देहरादून डेस्क
शक्ति. प्रियंका चौहान
शक्ति. डॉ. अनु
शक्ति. मीना सिंह
शक्ति. रितु सिंह
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एक पक्षीय नहीं बहुपक्षीय खुशियों की भावना और
अवधारणा हमें सदैव सकारात्मक और रचनात्मक बनाए रखने में सहायक होती हैं,
*शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता सीमा अनुभूति
*
ईमान : धरम : करम.
*
यदि मानव धर्म के पीछे है तो उसका कल्याण सुनिश्चित है
लेकिन उलट यदि धर्म किसी मनुष्य के पीछे है उसका भी परिणाम तय ही समझें
*
शक्ति.शालिनी मधुप प्रिया रितु
*
प्रथम मीडिया समर्थित.
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शिकायतें,नाराज़गी,उपक्षायें व अपेक्षाएं किसी रिश्तें नाते का अंत नहीं
प्रत्युत जीवन में प्रेम के जागृत रहने के सार्थक प्रमाण है
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शक्ति.डॉ.अनु मधुप रजनी रेनू
*
एम एस मीडिया समर्थित
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प्रेम की भव्यता सुंदरता तथा इसका उदगम निःशर्त होने,
अन्य प्राप्त गहरे सम्मान , व्यवहार व कृतज्ञता में ही हैं
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शक्ति.मीना सोनी प्रियंका नीलम
तीज विशेष भेंट : मेहंदी : लगाई तिथि : १२ : १३
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
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शक्ति. रेनू शब्द मुखर
जयपुर
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
*
कहा नहीं : तुम मेरे हो
*
प्रेम
प्रेम ने कभी नहीं कहा,
' मेरे हो जाओ.'
उसने बस इतना कहा,
'अपने जैसे बने रहना,
मैं तुम्हें बदलने नहीं,
*
राधिका : शक्ति रितु सिंह छाया.
*
*
समझने आया हूँ.'
शायद इसलिए
सच्चा प्रेम
किसी रिश्ते का नाम नहीं,
एक दुर्लभ संस्कार है.
प्रेम में सबसे सुंदर बात अधिकार नहीं,
अपनापन होता है.
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. डॉ. रजनी शालिनी मधुप मंजिता
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शक्ति.अनुभाग.
शालिनी
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
स्वयं : शक्ति शालिनी : छाया
*
आज फिर चाँद मेरी खिड़की पे
ठहर आया है,
जैसे कोई भूला अफ़साना
नज़र आया है.
रात चुप थी, मगर एहसास
यूँ बोल उठे,
दिल के वीरान मकाँ में
कोई घर आया है.
मैंने परदे की झिरी से
उसे देखा चुपके,
जैसे बरसों बाद कोई
हमसफ़र आया है.
उसकी चाँदी-सी किरण
रूह तलक उतरी है,
आज सुकूतों में भी इक
नया स्वर आया है.
*
अनुभाग.
मेरी तन्हाई ने जब ओढ़ ली
रातों की रिदा.
*
भाविका : सन्दर्भ : माया शक्ति. श्रद्धा : छाया
*
न कोई ख़त, न कोई नाम,
न कोई पैग़ाम,
फिर भी लगता है कि
कोई ख़बर लाया है.
मेरी तन्हाई ने जब ओढ़ ली
रातों की रिदा,
चाँद बनकर कोई ख़्वाबों में
उतर आया है.
मैंने पूछा कि सफ़र
कैसा रहा सदियों का
वो मुस्कुराए कि बस
वक़्त इधर आया है.
उनकी रौशन-सी निगाहों में
अजब सा ठहराव,
जैसे दरिया को मनाने
समंदर आया है.
रात ढल जाएगी,
यह चाँद भी खो जाएगा
दिल को इक उम्र का
मीठा-सा असर आया है.
*
सज्जा व संपादन
शक्ति.डॉ.रजनी रेनू मधुप मंजिता
*
कोई तो हो
क्यों होने लगता ख्यालों में इंतजार
किसी का
क्यों किसी को बताने को बेचैन
हो उठती है सांसे
वो सब,जो शायद इतने साल तक
इतने अपनों के बीच रह कर भी
कहा न गया हो कभी।
क्यों बालों से सफेदी के झांकते ही
चेहरों पे झुर्रियों के पड़ते ही
आंखों से धुंधलेपन को ताकते ही
और हाथों_पैरों की निर्भरता के खोते ही
आखिर क्यों ?
आंखें किसी ऐसे मजबूत सहारे को
ढूंढने लगती हैं
जो उसकी भावनात्मक ख्वाहिशों को समझे।
अनुभाग. भाविका
शक्ति डॉ. रजनी
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
मैं हूं न !
उसकी फिजूल की बातों पर हंसे
उसकी छोटी _छोटी खुशियों का
ख्याल रखे।
जब उदास हो प्यार से एक गुलाब
लाकर उसके हाथो में थमा दे।
जब भी वो परेशान हो,कारण जाने बिना
उसके सिर पे एक चुंबन जड़ दे
ये कहते हुए,
माया : सोनी : इद्रप्रस्थ
* तुम इतना क्यों सोचते हो, मैं हूं न !
* तुम इतना क्यों सोचते हो, मैं हूं न !
जो उसे भावनात्मक मजबूती दे सके
जो उसके छूटे सपनों को साकार
करने की वजह बने
दुनियां के साथ_साथ
उसे खुद के लिए भी जीना सिखाए
लोगों का ख्याल छोड़ते हुए
हर कदम कहे,,,
तुम बढ़ो आगे,साथ में, मैं हूं न !
*
सज्जा व संपादन
शक्ति शालिनी सीमा रंजिता मंजिता
*
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तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
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संपादन.
*
शक्ति आलेख :१ :गणपति
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शक्ति. शालिनी डॉ. सुनीता मधुप अनुभूति
गणपति विघ्नहर्ता महाकाय मंगलकारी हैं.
भारतवर्ष विविधताओं का देश है। लोग भाषा भाषी ,प्रांत अनेक है। संस्कृति भिन्न हैं। फिर भी हमारी अनेकता में भी एकता है। फिर भी हम सभी एक सूत्र में बंधे हैं । हमारे घर में भी गणपति बिराजे हुए हैं।
विसर्जन की परंपरा के लिए गणपति का स्थान परिवर्तन कर देतें हैं।
भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया तीज का शुभ दिन : भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया का शुभ दिन जब शक्तियां शिव की आकांक्षा में निर्जला तीज व्रत करती है। तब उनकी एक मात्र अभिलाषा होती है कि कई जन्मों तक उनके स्वामी भोले शिव शंकर जैसे ही मिले और वो एक पत्नी निष्ठ हो। शायद शिव की महिमा ही ऐसी है।
भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी गणेश का शुभ आगमन : तिथि का संयोग देखिए ठीक इसके एक दिन बाद ही भाद्र शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी का दिन आता है। इस दिन ही विघ्नहर्ता, वक्रतुंड, महाकाय, गणेश जी का शुभ आगमन होता है। गणेश का स्थान सर्वोच्च है क्योंकि उन्हें अपने माता पार्वती पिता शिव का आर्शीवाद प्राप्त था।
सनातनी परंपरा के अनुसार हम अपने प्रत्येक शुभ कार्य करने के पहले गजानन को स्मृत करते हैं और बार-बार दोहराते हैं, श्री गणेशाय नमः।
गणेश उत्सव इतिहास के झरोखें से : ज्ञात हो ब्रिटिश कालीन भारत में १९०४ - १९०५ के बंग भंग आंदोलन के विरुद्ध महाराष्ट्र केसरी बाल गंगाधर तिलक, बंगाल के विपिन चंद्र पाल और पंजाब केसरी लाला लाजपत राय ने महाराष्ट्र, बंगाल, पंजाब में गणेश उत्सव मनाने की परंपरा समस्त भारत में शुरू की थी और एकीकृत होने की प्रेरणा समस्त भारतीय को दी थी। गणेश उत्सव आज समस्त भारतीय को सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से जोड़ने में सक्षम होती दिख रही है। बल्कि यूँ कहें आज गणेश उत्सव की यह परंपरा विश्व व्यापी हो गई है।
महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की परम्पराएं : महाराष्ट्र में सार्वजानिक गणेशोत्सव आम तौर पर १० दिनों तक़ चलता है और ग्यारहवें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन मूर्ति विसर्जन के साथ समाप्त होता है। अगले वर्ष तू जल्दी आ इस कामना के साथ हम सब प्रतीक्षा रत होते हैं।
सामान्य तौर पर गणेश उत्सव पूरे भारत वर्ष में १० दिनों तक ही मनाया जाता है, जो गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है। हालांकि, लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार गणपति बप्पा को घर में अलग-अलग अवधियों के लिए स्थापित करते हैं।
स्थान परिवर्तन ही हमारा गणपति का प्राकृतिक, सांकेतिक विसर्जन : हम पर्यावरण को संरक्षित करते हैं।आप बप्पा को अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित दिनों के लिए रख सकते हैं यथा डेढ़ दिन ,बहुत से लोग चतुर्थी के दिन स्थापना कर के अगले दिन विसर्जन कर देते हैं।
३ दिन, ५ दिन या ७ दिन शास्त्रों में इन विषम दिनों में भी विसर्जन करने का विधान है।
१० या ११ दिन : सार्वजनिक पंडालों और कई घरों में बप्पा पूरे १० दिनों तक रहते हैं और आखिरी दिन अनंत चतुर्दशी को उनका विसर्जन किया जाता है। गणेश जी सभी के लिए कष्टहर्ता बने यह हमारी हार्दिक आकांक्षा है। सब के कार्य मंगल मय हो। हम गणपति बप्पा मोरया की ह्रदय से वंदना करते हैं।
आपके समक्ष है : महाशक्ति मीडिया की भक्ति की शक्ति प्रस्तुति
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संपादन : डॉ रजनी रेनू प्रीति रंजिता
सज्जा : शक्ति सीमा मंजिता स्वाति अनुभूति
शिव शक्ति की प्रेम कहानी : हरतालिका तीज: लोक पर्व
भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी : एक महिला -केंद्रित उत्सव
शक्ति आलेख
डॉ.सुनीता सीमा शक्ति प्रिया
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तीज : शिव शक्ति की प्रेम कहानी : हरतालिका तीज : जब कभी भी तीज आता है तो अम्मा याद आ जाती है। बड़ी विधि विधान से तीज व्रत करवाती थी। आज भी हम सभी इस लोक पर्व की संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है।
मेरी माने तो लोक पर्व भारतीय सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी है तीज. भगवान शिव और पार्वती की कहानी सती के रूप में शिव की पत्नी के दोबारा जन्म से शुरू होती है, जो शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या करती हैं, शिव उनकी परीक्षा लेते हैं,और अंत में वे उन्हें वर के रूप में प्राप्त कर शिव की अर्धांगिनी बनती हैं.शिव के प्रति शक्ति का प्रेम अतुलनीय है।
भारतीय लोक सभ्यता संस्कृति की अद्भुत कहानी : तीज
फसली हरियाली ख़ुशहाली का पर्व : मानसून के मौसम में है यह तीज। चंद्रमा का चक्र निर्धारित करता है कि प्रत्येक वर्ष तीज कब मनाई जाती है। यह त्यौहार भारत के मानसून के मौसम में सालाना जुलाई या अगस्त में मनाया जाता है। यह त्योहार कई राज्यों में मनाया जाता है, मुख्य रूप से देश के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में। हालांकि केवल हरियाणा में यह तीज आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश के साथ मनाया जाता है।
भारतीय सभ्यता संस्कृति : यह राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में विशेषतः मनाया जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर, तीज के कुछ सबसे प्रसिद्ध उत्सवों का घर है। बिहार, में नालन्दा , गया ,नवादा आदि समस्त मगध क्षेत्र में यह लोक पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं २४ घंटे का निर्जला उपवास करती है।
उनका प्रेम शिव शक्ति जैसा ही हो : संध्या के समय गौरी शिव की पूजा की जाती है और यह कामना की जाती हैं कि उनके पति परमेश्वर जैसी स्वस्थ दीर्घ आयु पाएं। और उनका प्रेम शिव शक्ति जैसा ही हो। और दूसरे दिन आसन का विसर्जन होता है। पास के नदी तालाब में मूर्तियां विसर्जित कर दी जाती है इस सन्देश के साथ की अगले वर्ष गौरी शिव की पूजा से जुड़ी तीज का वो व्रत पुनः करें। समस्त विधि विधान के बाद महिलाएं अपना उपवास जल या शर्वत ग्रहण कर तोड़ती हैं।
तीज महोत्सव भारत में मानसून के आगमन के साथ मनाया जाने वाला एक महिला -केंद्रित उत्सव है, जिसे मुख्य रूप से श्रावण मास में मनाया जाता है. यह पर्व भगवान शिव और पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है, और विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु व वैवाहिक सुख के लिए व्रत रखती हैं. इस दौरान महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं. यह त्योहार आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का प्रतीक है.
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गतांक से आगे : १
लोक पर्व उत्सव की मुख्य गतिविधियाँ.
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उपवास और पूजा : महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और शिव -पार्वती की पूजा करती हैं. पति पत्नी के मध्य अमर प्रेम की चर्चा होती है तो हरतालिका तीज: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाने वाली हरतालिका तीज की चर्चा होती है।
झूला झूलना: यह तीज का एक प्रमुख आकर्षण है, जिसमें महिलाएं पेड़ों से बंधी डालियों पर झूला झूलती हैं. सावन के झूले खूब चर्चें में होते हैं। गांवों में इसका प्रचलन अब भी है।
सजावट : महिलाएं नए और रंगीन वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और अन्य पारंपरिक श्रृंगार करती हैं. अलता पैरों में लगाती हैं। खूब सजती सवरती है। तीज के दौरान महिलाएं अपनी बेहतरीन एक्सेसरीज और पोशाक पहनती हैं। वे अक्सर अपने हाथों पर मेहंदी या मेहंदी की सजावट भी करवाती हैं। वे कई गीत गाते हैं जो त्योहार से जुड़े होते हैं। वे झूलों पर झूलते हैं जो पेड़ की बड़ी शाखाओं से बंधे होते हैं। वे उपवास और भव्य, भव्य दावतों के संयोजन का भी अनुभव करते हैं। नृत्य एक और विशिष्ट तीज गतिविधि है।
संगीत और नृत्य: इस अवसर पर लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य प्रस्तुतियां दी जाती हैं. पूजा संपन्न होने के बाद बिहार झारखण्ड में महिलाओं को लोक गीत गाते हुए देखा जा सकता हैं जिसमें शक्ति की शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की बात होती हैं।
त्योहार के व्यंजन : पारंपरिक घेवर मिठाई तीज से जुड़ी हुई है. गुजिया ठेकुए आदि बनते हैं।
जुलूस : राजस्थान जैसे राज्यों में, जयपुर में तीज का भव्य जुलूस निकाला जाता है.
महत्व : जीवन में वैवाहिक सुख का : यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है, जो अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. यह त्योहार सुहागन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है, जो पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख की कामना करती हैं.
तीज पत्नी पार्वती और पति शिव के बीच संबंधों का प्रतिनिधित्व करती है। यह त्योहार पार्वती के अपने पति के प्रति अटूट समर्पण की याद दिलाता है। जब भारतीय महिलाएं तीज के दौरान अपने आशीर्वाद की तलाश करती हैं, तो वे एक मजबूत विवाह – और गुणवत्तापूर्ण पति प्राप्त करने के साधन के रूप में ऐसा करती हैं। तीज न केवल एक मजबूत शादी के इर्द-गिर्द केंद्रित है, बल्कि यह बच्चों की खुशी और स्वास्थ्य पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
प्रकृति का उत्सव : यह मानसून के आगमन और चारों ओर फैली हरियाली का भी उत्सव है. हम हरीतिमा को बचा सकें,यह सन्देश भी हम देना चाहते हैं।
तीज नाम को एक छोटे लाल कीट का संदर्भ माना जाता है जो मानसून के मौसम में जमीन से निकलता है। हिंदू मिथकों का मानना है कि जब ऐसा हुआ, तो पार्वती ने शिव के निवास का दौरा किया। इसने पुरुष और महिला के रूप में उनके संबंध को सील कर दिया।
तीज न केवल शादी और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि यह मानसून पर भी ध्यान केंद्रित करती है। मानसून लोगों को गर्मी के महीनों की भीषण गर्मी से आराम देता है।
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तीज के प्रकार : हरियाली तीज : कजरी तीज : हरतालिका तीज :
१. हरियाली तीज : यह श्रावण : सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। सावन के महीने में चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े, चूड़ियां पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने अपनी १०८ वें जन्म की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।
२. कजरी तीज : यह भाद्रपद : भादों मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसे बूढ़ी तीज या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है।इस दिन महिलाएं जौ, गेहूं, और चने के सत्तू के विभिन्न पकवान बनाती हैं। इस व्रत में शाम के समय नीमड़ी माता की पूजा करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने की विशेष परंपरा है।
३. हरतालिका तीज : यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह तीनों तीज में सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि यह व्रत निर्जला और निराहार बिना अन्न-जल के रखा जाता है। इस दिन महिलाएं बालू मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर रात्रि भर चारों पहर की विशेष पूजा और जागरण करती हैं। ' हरतालिका ' शब्द का अर्थ है ' सखियों द्वारा हरण ', क्योंकि माता पार्वती की सखियां उन्हें उनके पिता की इच्छा के विरुद्ध घने जंगल में ले गई थीं ताकि वे शिव जी को प्राप्त करने के लिए तपस्या कर सकें।
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संपादन : शक्ति. डॉ. रजनी शालिनी रंजिता स्मिता
सज्जा : शक्ति. मंजिता स्वाति रितु अनुभूति
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शक्ति आलेख : ४ / ०
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरम.
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शक्ति. नीलम पांडेय.
लेखिका. कवयित्री. सम्पादिका.
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| बाल कृष्ण : माखन चुराते हुए : GIF |
मैं अवाक उसका मुंह ताकती रही। ये है कृष्ण का विलक्षण व्यक्तित्व जिसे हर धर्म , समाज यहां तक की विश्व में अधिकांश जानते हैं। उन्हें वह अपना लगता है क्योंकि श्री कृष्ण का जीवन समाज के हर तबके के लोगों के जीवन में कहीं ना कहीं घुला मिला हुआ है।
श्रीकृष्ण जीवन-दर्शन के पुरोधा : श्रीकृष्ण जीवन-दर्शन के पुरोधा बनकर आए थे। एक ऐसा महामानव जिसके जीवन के अथ से इति तक का पूरा सफर पुरुषार्थ की प्रेरणा है। उन्होंने उस समाज में आंखें खोलीं जब निरंकुश शक्ति के नशे में चूर सत्ता मानव से दानव बन बैठी थी। सत्ता को कोई चुनौती न दे सके इसलिए दुधमुंहे बच्चे मार दिए जाते थे।
खुद श्रीकृष्ण के जन्म की कथा भी ऐसी है। वे जीवित रह सकें इसलिए जन्मते ही माता-पिता की आंखों से दूर कर दिए गए। उस समय के डर से जमे हुए समाज में बालक श्रीकृष्ण ने संवेदना, संघर्ष, प्रतिक्रिया और विरोध के प्राण फूंके।
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| कृष्ण : पार्थ : महाभारत : GIF |
कृष्ण के वंदनीय पक्ष की जगह अनुकरणीय पक्ष की ओर ध्यान : महाभारत का युद्ध तो लगातार चलने वाली लड़ाई का चरम था जिसे श्रीकृष्ण ने जन्मते ही शुरू कर दिया था। हर युग का समाज हमारे सामने कुछ सवाल रखता है। श्रीकृष्ण ने उन्हीं सवालों के जवाब दिए और तारनहार बने। आज भी लगभग वही सवाल हमारे सामने मुंह बाए खड़े हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि श्रीकृष्ण के चकाचौंध करने वाले वंदनीय पक्ष की जगह अनुकरणीय पक्ष की ओर ध्यान दिया जाए ताकि फिर इन्हीं जटिलता के चक्रव्यूह से समाज को निकाला जा सके। उनका संपूर्ण व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व धार्मिक इतिहास का एक अमिट आलेख बन चुका है। उनकी संतुलित एवं समरसता की भावना ने उन्हें अनपढ़ ग्वालों, समाज के निचले दर्जे पर रहने वाले लोगों, उपेक्षा के शिकार विकलांगों का प्रिय बनाया।
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गतांक से आगे : १.
शक्ति आलेख : ४ / ० शक्ति. नीलम पांडेय.
श्रीकृष्ण के चरित्र में नृत्य, गीत, प्रीति, समर्पण है, हास्य है, रास है :
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श्रीकृष्ण एक योद्धा व सामाजिक क्रान्ति के प्रणेता :श्रीकृष्ण का चरित्र अत्यंत दिव्य है। हर कोई उनकी ओर खिंचा चला जाता है। जो सबको अपनी ओर आकर्षित करे, भक्ति का मार्ग प्रशस्त करे, भक्तों के पाप दूर करे, वही श्रीकृष्ण है। वह एक ऐसा आदर्श चरित्र है जो अर्जुन की मानसिक व्यथा का निदान करते समय एक मनोवैज्ञानिक, कंस जैसे असुर का संहार करते हुए एक धर्मावतार, स्वार्थ पोषित राजनीति का प्रतिकार करते हुए एक आदर्श राजनीतिज्ञ, विश्व मोहिनी बंसी बजैया के रूप में सर्वश्रेष्ठ संगीतज्ञ, बृजवासियों के समक्ष प्रेमावतार, सुदामा के समक्ष एक आदर्श मित्र, सुदर्शन चक्रधारी के रूप में एक योद्धा व सामाजिक क्रान्ति के प्रणेता हैं। उनके जीवन की छोटी से छोटी घटना से यह सिद्ध होता है कि वे सर्वैश्वर्य सम्पन्न थे। धर्म की साक्षात मूर्ति थे।
सामाजिक समता समरसता एवं राष्ट्रप्रियता का प्रेरक मानदण्ड : के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव सामाजिक समता का उदाहरण है। उन्होंने नगर में जन्म लिया और गांव में खेलते हुए उनका बचपन व्यतीत हुआ। इस प्रकार उनका चरित्र गांव व नगर की संस्कृति को जोड़ता है, गरीब को अमीर से जोड़ता है, गो चारक से गीता उपदेशक होना, दुष्ट कंस को मारकर महाराज उग्रसेन को उनका राज्य लौटाना,धनी घराने का होकर गरीब ग्वाल बाल एवं गोपियों के घर जाकर माखन खाना आदि जो लीलाएं हैं ये सब एक सफल राष्ट्रीय महामानव होने के उदाहरण हैं।
कोई भी साधारण मानव श्रीकृष्ण की तरह समाज की प्रत्येक स्थिति को छूकर, सबका प्रिय होकर राष्ट्रोद्धारक बन सकता है। कंस के वीर राक्षसों को पल में मारने वाला अपने प्रिय ग्वालों से पिट जाता है, खेल में हार जाता है। यही है दिव्य प्रेम की स्थापना का उदाहरण। भगवान श्रीकृष्ण की यही लीलाएं सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रप्रियता का प्रेरक मानदण्ड हैं।
अध्यात्म के विराट आकाश में श्रीकृष्ण ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों व ऊंचाइयों पर जाकर भी न तो गंभीर दिखाई देते हैं और न ही उदासीन दीख पड़ते हैं, अपितु पूर्ण रूप से जीवनी शक्ति से भरपूर व्यक्तित्व हैं।
श्रीकृष्ण के चरित्र में नृत्य, गीत, प्रीति, समर्पण है, हास्य है, रास है : श्रीकृष्ण के चरित्र में नृत्य है, गीत है, प्रीति है, समर्पण है, हास्य है, रास है, और है आवश्यकता पड़ने पर युद्ध को भी स्वीकार कर लेने की मानसिकता। धर्म व सत्य की रक्षा के लिए महायुद्ध का उद्घोष है। एक हाथ में बांसुरी और दूसरे हाथ में सुदर्शन चक्र लेकर महाइतिहास रचने वाला कोई अन्य व्यक्तित्व नहीं हुआ संसार में।
श्रीकृष्ण के चरित्र में कहीं किसी प्रकार का निषेध नहीं : श्रीकृष्ण के चरित्र में कहीं किसी प्रकार का निषेध नहीं है, जीवन के प्रत्येक पल को, प्रत्येक पदार्थ को, प्रत्येक घटना को समग्रता के साथ स्वीकार करने का भाव है। वे प्रेम करते हैं तो पूर्ण रूप से उसमें डूब जाते हैं, मित्रता करते हैं तो उसमें भी पूर्ण निष्ठावान रहते हैं, और जब युद्ध स्वीकार करते हैं तो उसमें भी पूर्ण स्वीकृति होती है।
जय श्री कृष्ण
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संपादन : शक्ति. शालिनी डॉ. रजनी प्रीति
सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति रंजिता सीमा.
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आज कल : पृष्ठ : ०
गुरु ही हमें
संस्कार,संवेदनशीलता,ईमानदारी और मानवीय मूल्य
सिखा सकते
शिक्षक दिवस : गुरु शिष्य परंपरा.
हम पार्थ हैं श्री कृष्ण ही हमारे गुरु पथ प्रर्दशक हैं
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शक्ति. आलेख
शक्ति. शालिनी डॉ.सुनीता रंजिता सीमा.
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अन्य संस्थानों की तरह डी ए वी विद्यालयों में भी शिक्षक दिवस की धूम रही। परिसर, व कक्षाएं सजाई गई। सजे सजाए गए डॉ.राधाकृष्णन की फोटो के आगे पुष्पांजलि की गयी। उनकी जीवनी, उनका जीवन संघर्ष, उनके त्याग उनके आदर्श किसने कितना याद किया यह प्रश्न भी अनुत्तरित ही है सब के अपने मन के भीतर है ।
हम पार्थ हैं श्री कृष्ण ही हमारे गुरु पथ प्रर्दशक हैं : हमने अपने लिए गोविन्द को ही सर्वस्व चुना है। हमारे लिए शिक्षक, भगवान सब वही हैं। तथापि उन समस्त गुरुओं के लिए चाहे उनकी उम्र सीमा कुछ भी हो, बड़े, छोटे या बूढ़े हो उनका हम सदैव सम्मान करते हैं।
शिक्षकों को शिक्षक दिवस की भेंट दी गयी। उनका सम्मान हुआ। क्या यह सम्मान सिर्फ एक दिन के लिए हो ? या फिर पूर्ण साल के लिए। विचार करें। गुरु शिष्य परंपरा में किस गुरु किस शिष्य की बात करें। सिर्फ सम्यक के लिए।
आज की डिजिटल दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,गूगल और इंटरनेट के युग में गुरु का महत्व कम होने के बजाय और भी अधिक बढ़ गया है। जहाँ इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें कुछ ही सेकंड में किसी भी विषय की असीमित जानकारी दे सकते हैं, वहीं उस जानकारी को सही दिशा में उपयोग करने का विवेक सिर्फ एक गुरु ही सिखा सकता है।
डिजिटल युग में गुरु की भूमिका अब केवल ' सूचना देने वाले ' की नहीं, बल्कि एक गाइड, मेंटॉर और फिल्टर की हो गई है.
जानकारी और ज्ञान में अंतर : इंटरनेट के पास डेटा का भंडार है, लेकिन गुरु के पास अनुभव और विवेक होता है। डेटा को सार्थक ज्ञान में बदलना केवल गुरु ही सिखा सकते हैं।
सही और गलत की पहचान : डिजिटल दुनिया में ' फेक न्यूज़ ' और भ्रामक जानकारियों की भरमार है। गुरु छात्रों को विशाल सामग्री में से प्रासंगिक और विश्वसनीय सामग्री चुनना सिखाते हैं।
नैतिक मार्गदर्शन : मशीनें या हमें कोडिंग या गणित तो सिखा सकते हैं, लेकिन वे हमें संस्कार, संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवीय मूल्य नहीं सिखा सकते
मानसिक और भावनात्मक सहारा : इंटरनेट स्क्रीन की दुनिया में अक्सर बच्चे अकेलेपन या मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। एक गुरु ही शिष्य की मनःस्थिति को समझकर उसे सही और सकारात्मक रास्ता दिखाता है।
डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग : तकनीक का आँख बंद करके भरोसा करने के बजाय, उसका रचनात्मक और सही इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह समझ हमें गुरु से ही मिलती है。
आज डिजिटल गुरु - शिष्य परंपरा के माध्यम से संवाद और भी आसान हो गया है। देश के किसी भी कोने में बैठा छात्र ऑनलाइन कक्षाओं और ई - लर्निंग के जरिए बेहतरीन गुरुओं से जुड़ पा रहा है।
निष्कर्षतः तकनीक चाहे जितनी भी उन्नत हो जाए, वह केवल एक साधन है। मशीन हमें 'आजीविका' के साधन दे सकती है, लेकिन जीवन जीने की ' विद्या ' और सही दिशा आज भी सिर्फ एक गुरु ही दे सकता है। अच्छे संस्कार अपनी संस्कृति का ज्ञान गुरु ही दे सकता है , यह सदैव याद रखें।
गुरु शिष्य परंपरा : शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं।
चलते -चलते गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करते रहिए यदि गुरु है तो उसकी मर्यादा को निभाएं।
यदि शिष्य बनकर कुछ सीखते हैं तो उसे गुरु का सम्मान करें। यही शिक्षक दिवस का निहित संदेश है आप समस्त शिक्षकों को जिनका स्वयं, परिवार, समाज तथा देश के उन्नयन में कुछ न कुछ,कहीं ना कहीं योगदान है उन समस्त शिक्षकों को हम याद करते हैं। और उनके लिए हमारी तरफ से अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं। बने रहिए हमारे साथ सम्यक साथ के लिए हम आपका आभार प्रकट करते हैं.
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संपादन : शक्ति : रेनू माधवी रीता नीलम
सज्जा : शक्ति. मंजिता स्वाति अनुभूति
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बीते समय की रेखा : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
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संपादन
शक्ति.मंजिता स्वाति दीप्ती अनुभूति.
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बीते समय की रेखा : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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संपादन
जयपुर डेस्क
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शक्ति. शालिनी रेनू रंजिता सीमा
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| शिव ही मिले जन्म जन्मांतर तक शक्तियों की तीज की पूजा :फोटो : शक्ति सीमा सुनीता स्मिता अनुभूति |
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समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
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संपादन.
शक्ति. डॉ.रजनी स्मिता बीना दीप्ती.
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कुमायूं नैनीताल.
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को हरतालिका तीज की अनंत शिव शक्ति शुभकामनायें
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शक्ति.मीना अनु रितु सीमा.
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हिंदी दिवस : १४ सितम्बर
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तन मन से हिंदी जन जन से हिंदी
जैसे सजती दुल्हन के माथे की बिंदी
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हिंदी दिवस की मनभावन बधाई
अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
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निवेदक
हम शक्ति देव परिवार
शक्ति. डॉ.रजनी शालिनी रेनू नीलम.
शक्ति. डॉ. सुनीता रंजिता सीमा तनु.
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आजकल : व्यंग्य चित्र : मधुप.
सिलेबस कैसे पूरा हो ?
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सीधा प्रसारण : शक्ति. शैली राम कृष्ण.मुम्बई
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति : समर्थित : दृश्यम : ११ / २
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वो जब याद आए बहुत याद आए
फिल्म अभिनेता ; देव आनंद
२६. ९. २३. - ३. १२. २०११.
तराने : पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए
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शक्ति. सीमा सुनीता स्मिता अनुभूति
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मुंबई : गणपति : विसर्जन : आज
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तीज लोक गीत : गायन :
का ले के शिव के मनाईब हो शिव मानत नाहीं
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लोक पर्व तीज लघु फिल्म अवधि : २.२४ मिनट
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: शक्ति स्मिता : हम भी ऐसे रंग जाए प्रेम में
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शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
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संपादन.
शक्ति मंजू स्मिता प्रियंका रितु
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दिन विशेष :
शुभकामनाएं : जन्म दिन की
२३. ९.
संरक्षिका.डेवलपर महाशक्ति मीडिया
बंगलोर
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अवतरण दिवस
जन्मदिन की अशेष अनंत शिव शक्ति शुभकामनाएं
शक्ति. डॉ. सुनीता सीमा रंजिता अनभूति
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दिन विशेष : १८ सितम्बर
विश्व जल निगरानी दिवस
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हर साल १८ सितंबर को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने आसपास के जल स्रोतों (जैसे नदियों, झीलों, तालाबों की स्वच्छता की जांच करने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
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शिक्षक दिवस : ५ सितम्बर
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दिन विशेष : जन्माष्टमी :
प्यार : व्यवहार : संस्कार
ज्ञान : कर्म : धर्म : साथ : नीति के
पर्याय रहें गोविन्द के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य पर
हम समस्त शक्ति देव परिवार की तरफ़ से आप सभी को
अनंत शिव शुभकामनाएं
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शक्ति समूह
शक्ति.डॉ.रजनी शालिनी रेनू अनुभूति
शक्ति.डॉ.सुनीता रंजिता सीमा अनु
तथा अन्य समस्त.
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आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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संपादन.
डॉ.अनु शालिनी प्रिया अनुभूति
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शक्ति रेखा : देहरादून : शॉर्ट रील
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एक मन था मेरे पास वो अब खोने लगा है
पाकर तुझे, हाय मुझे, कुछ होने लगा है
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पल भर में ये क्या हो गया वो मैं गयी वो मन गया
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दृश्यम : सौ बार जनम लेंगे सौ बार फना होंगे
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प्रस्तुति : शक्ति मीना रितु प्रिया भारती
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मैंने ओढ़ी चुनरियाँ तेरे नाम की
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धुन : फिल्म वंदना : आपकी इनायतें आपके करम
आप ही बताये कैसे भूलेंगे हम
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दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३ / ३.
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संपादन.
शक्ति.शालिनी प्रियंका अमित चौहान.अनुभूति
देहरादून डेस्क.
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शक्ति.प्रियंका अमित चौहान :शॉर्ट रील :प्रस्तुति.
ओ मेरी जान तेरे नाम ओ सनम !
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शॉर्ट रील : साभार : शक्ति श्वेता श्रीवास्तव.
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कल किसने देखा है कल किसने जाना है
जीने वाले सोच लें यहीं वक़्त है कर ले पूरी कर आरजू
कल किसने देखा है कल किसने जाना है
जीने वाले सोच लें यहीं वक़्त है कर ले पूरी कर आरजू
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शॉर्ट रील : शक्ति. प्रियंका अमित चौहान.
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धुन : पंख होती तो उड़ आती रे रसिया ओ जालिमा तुझे दिल का दाग दिखलाती रे
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English Section.
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting
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Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3.
Shakti Editorial Write Ups : 4.
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
Shakti : Kriti Art Link : English : Page : 7.
Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9.
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Shakti Editorial Page : 2.
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Executive Shakti Editor.
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©️®️M.S.Media.WCP. 4 Shaktis.
16/89/ 25/ 20/26
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Shakti. Priya Tanu Kajal Seema.
Darjeeling Desk.
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Shakti Vibes English Page : 3.
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Editor
Shakti. Priya Teanu Kajal Seema
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With an equal mind remaining balanced in success and failure
such equanimity is called yoga.
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Always remember empty seats are
better than wrong company.
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Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
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Editor.
Shakti. Shalini Naina Seema Kajal
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Nanda : Sunanda : Parvati.
Shakti returns to her husband's divine abode on Mount Kailash.
Cultural Report : Dr.Suita Madhup
Shakti. Beena Dr.Navin Joshi.
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News Clip.
Shakti Seema Ranjita Dr.Sunita Anubhuti.
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Teachers’ Day Celebrated with Grandeur everywhere.
Remembering Gurus as Guru Brahma Vishnu Mahesh, Krishna, Guru Vashisht, Sandipani and Drone,
their disciples as Lord Rama , Lord Krishna and Arjuna.
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CR / Kolkotta. Teachers’ Day is celebrated with great enthusiasm and gratitude to honour the dedication and contribution of teachers throughout the country.
The special Student-as-Teacher activity is the highlight of the today in the school premises , where students stepped into the role of teachers and conducted classes for their juniors, experiencing the joy and responsibility of teaching.
As part of the CCA activities, students participate enthusiastically in bouquet-making and card-making for their favourite teachers. Through their colourful creations and heartfelt messages, they express their love and gratitude towards their mentors.
The celebration also includes speeches, songs and cultural performances dedicated to the teachers.
The day concludes with smiles, appreciation and beautiful memories of exclusive teacher who shape their students , celebrating the special bond between teachers and students.
On this day remembering Radha Krishnan, ex. President of India with all other mighty and divine gurus as Guru Brahma Vishnu Mahesh, Krishna, Guru Vashisht, Sandipani and Drone, we also recall their disciples too Lord Rama , Lord Krishna and Arjuna.
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Editing : Shakti. Dr.Anuradha.Kajal.Madhvee.Shahina
Decoration : Shakti. Manjita Shwati Naina Lakshika.
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You Said It : Page : 9.
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Shakti. Garima Anita Ranjita Seema.
| * Shakti. Anita. Shakti Editor. Jabalpur Desk. Today once again refreshing the memories of those good days with our best wishes for her day special * Dr.Sunita Ranjita Seema Anubhuti. You Said It : English : Page : Editor. Shakti. Naina Himani Seema Anubhuti. * Keep up the amazing work, looking forward to the next one ! Shakti. Shahina Naz. Editor in English. MS* Media. * It always gets started with a nice and impressive ideas. Shakti : Seema. * |




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It always gets started with a nice and impressive ideas...
ReplyDeleteShakti : Seema.
Gradually the blog magazine page is being successful in grabbing the attraction of the visitors and readers....
ReplyDeleteA perfect blend of knowledge and spirituality. Loved reading this.
ReplyDeleteShakti. Kajal