Sawan Ko Aane Do : Sanskriti. Patrika

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कृण्वन्तो विश्वमार्यम. 
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Sawan Ko Aane Do.
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पत्रिका.आवरण पृष्ठ. 
संस्कृति विशेषांक. 
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सावन को आने दो : संस्कृति : पत्रिका.आवरण पृष्ठ.महाशक्ति मीडिया.
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सावन को आने दो : संस्कृति : दैनिक आवरण पृष्ठ.महाशक्ति मीडिया.
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सावन को आने दो :संस्कृति : दैनिक में जाने देखने व पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. 
https://msmedia4you.blogspot.com/2026/08/sawan-ko-aane-do-sanskriti-patrika.html
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शक्ति.राशि.
   प्रतीक चिन्ह.सिंह.  
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आत्म दीपो भवः 
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विक्रम संवत : २०८३ शक संवत : १९४८. 
दिनांक : २८.०८.२६ . 
श्रावण : शुक्लपक्ष : पूर्णिमा . 
दिन. शुक्रवार. 
दिवस. मूलांक : १ .
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a rising Sun GIF.
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जागो उठ कर देखो 
जीवन जोत उजागर है. 
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गीता : २ अध्याय : २२. श्लोक. 

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही॥
भावार्थ 
जिस प्रकार मनुष्य पुराने तथा फटे-पुराने  वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को धारण करता है, उसी प्रकार जीवात्मा पुराने तथा जीर्ण शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त करती है। आत्मा अजर-अमर है, इसलिए मृत्यु पर शोक व्यर्थ है , पार्थ 
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प्रस्तुति शक्ति शालिनी डॉ.राखी गोविंद मधुप  
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विषय सूची :पृष्ठ :०.

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अनुभाग : १.
शक्ति जीवन दर्शन.

आवरण पृष्ठ :०.
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
हम चार जीवन : दर्शन : पृष्ठ : ०.
नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ :१.
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अनुभाग : २.
शक्ति सम्पादकीय.
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
 यात्रा विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५. 
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अनुभाग : ३.
शक्ति दृश्यम.
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
 सावन को आने दो : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
सावन को आने दो   : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
सावन को आने दो  : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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अनुभाग : ४.
तुम्हारे लिए.
समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
  : शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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शक्ति ज्योति आर्य नरेंद्र. वायर एक्सिस प्राइवेट लिमिटेड मार्केट रिसर्च : नवी मुंबई समर्थित आवरण


 पृष्ठ : दैनिक / पत्रिका अनुभाग : लिंक : विषय सूची : सम्पादकीय : त्रिशक्ति :
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महाशक्ति विचार 
नैना डेस्क 
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति. 
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शक्ति : महाशक्ति दर्शन : पृष्ठ : १ / १ .
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नैना देवी डेस्क. नैनीताल. 
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महाशक्ति.नैना देवी डेस्क.
नैनीताल.प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई.दिवस :४.
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सम्पादित.
शक्ति.नैना डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
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©️®️M.S. Media WCP. Ranjita  /13  / 26.
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विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति :रंजिता  : छाया.
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स्वर्ग यही नर्क यहाँ. 
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अगर हर कोई प्रेम की बातें करने के बजाय ईमान धरम, व्यवहार,शब्द  
कर्म में प्रेम बांटना शुरू कर दे, तो यह धरती यहीं स्वर्ग बन सकती है
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कल आज और कल

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©️®️M.S. Media WCP. Sejal Mumbai  /25 / 26.
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विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति :सेजल : छाया.
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क्या बीता हुआ कल, एक सपना है, क्या आने वाला कल, एक कल्पना है, केवल आज ही सच है...
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उसने कहा था.
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प्रेम का उद्गम गहरे सम्मान और कृतज्ञता से होता है,
आपकी सुंदरता और भव्यता को देखकर, आपके उस निःशर्त प्रेम को देखकर 
जो बदले में कुछ नहीं मांगता, यहां तक ​​कि प्रेम भी नहीं
*
स्वयं को भली भांति जानना , समझना और फिर अपने सामर्थ्य के 
अनुसार सर्व हित में कार्य करना ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान अर्जन है 
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©️®️M.S. Media WC P. Anu /98 / 26.
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विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति : अनु : नैनीताल : छाया.

तेरी मेरी कहानी है 
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महत्व समय का भी है , भावना का भी  है, और  व्यवहार का भी 
कोई मिनटों में मन विजय कर लेता है
तो कोई जिंदगी भर साथ रहकर भी नही...बस,समझ समझ की बात है 
किसी ने स्वयं को जाना, तो किसी ने सर्वप्रथम दूसरे को 
*
जिंदगी और कुछ भी नहीं 

पहले जीवन की पटकथा के लिए एक तेरी मेरी मनभावन कहानी लिखें 
संवाद तैयार करें , सशक्त व सही क़िरदार चुनें 
उन्हें वास्तविक सही मर्मस्पर्शी अभिनय करने दें 
लोग इस कहानी को कभी भी नहीं भुलायेंगे 

विचार शक्ति.@ डॉ.अनु सुनीता रंजीता सीमा.
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अपनों को अपने से दूर करे है 
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जिस ह्रदय में क्षमाशीलता है वहाँ रिश्ते नाते है
अन्यथा क्रोध व असंयम तो अपनों को अपने से दूर ही करता है.
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उपेक्षाएँ और अपेक्षाएं
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 अपने शब्द ,व्यवहार और कर्म  ही अपने जीवन में उपेक्षाएँ और अपेक्षाएं की समानुपाती है 
और अपने कर्मों का प्रतिफल ही है , हिसाब स्वयं कर लें. 
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टाइम्स मीडिया समर्थित. 

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शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस : २.
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सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
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शक्ति : महालक्ष्मी दर्शन : पृष्ठ : १ / २ .
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रिश्ते नाते 


©️®️M.S. Media WCP. Seema   / / 26.
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विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति : सीमा  : छाया.
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एक समय के पश्चात रिश्ते में भी इतनी समझ व संयम 
होनी ही चाहिए कि उपेक्षा या अपेक्षा, की कब जरूरत है    
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धर्म संस्थापना के लिए.


फोटो : पत्नी इंद्राणी शची ने पति देवराज इंद्र को बांधा रक्षा सूत्र
*
' तुम्हारे विश्व विजय की कामनार्थ ,
कच्चे धागे से मैं तुम्हें सम्यक ' सोच ',शब्द , साथ ,सतकर्म, धर्म व सम्यक संसार निर्माण के लिए पवित्र और प्रेम के चिर स्थायी, दिव्य मजबूत रक्षा सूत्र : कच्चे धागे से बांधती हूँ। हे रक्षासूत्र ( रक्षे ) ! तुम स्थिर रहना और अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना। आप रक्षित रहें तथा सर्वदा धर्म की रक्षा करें ...' शची, इंद्राणी
शोध विचार @ शक्ति.शालिनी मधुप रेनू अनुभूति.
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दिल की आवाज़ भी सुन

जीवन का सही आनंद दिल तथा दिमाग में  सही 
सामंजस्य से  है दिल की आवाज़ भी सुने 
फ़साने पर न जाए अपनी समझ शक्ति है ना ? 

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विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति : प्रिया : दार्जलिंग  : छाया.
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होनी तो हो के रहे 
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जिसने अपने एकाकीपन में ही स्वयं से जीना मरना सीख लिया 
उसे अपेक्षा जनित निर्भरता की पीड़ा नहीं सताएगी 
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स्वयं के सतत कर्म व इच्छा के बाद परिणाम स्वरुप 
प्रतिफल जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करने में भलाई है, प्रिय  
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संदर्भित : छाया : नेपाल : कलाकृति.
माया : शक्ति सोनी : इंद्रप्रस्थ 
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जीवन तेरी रीत निराली 
*
सबसे बड़ा पाप जीवन में किसी निर्दोष को दोष युक्त करार करना  
व  किसी षड्यंत्र में छलिए का साथ देना 
प्रभुता है समय सीमा से परे जानते हुए भी दोषी को क्षमा कर देना  
*
बीते हुए सुनहरे अतीत आने वाले कल के सपने
और आज वर्तमान की कोशिश ही जिंदगी है
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 झिझक व सात परदे के पीछे रहेंगे ,अब तक जो 
लोग क्या कहेंगे सोचने वाले ...वो सामने तुम्हारे लिए कैसे आयेंगे ?
*
जहाँ अपनी समझ और संवेदनाएं ही नहीं हो 
उस व्यक्ति विशेष से कहने का अर्थ ?
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©️®️
M.S.Media.

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प्रथम मीडिया समर्थित. 
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शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / ३ 
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नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर. 
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना : सितम्बर.दिवस : ९.
*
संपादन.
शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा
*

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विचार सन्दर्भ  माया 
शक्ति : नैना : जयपुर : छाया.
*
मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया 
*
मुझे अपने भीतर संस्कार संयम, शब्द इतना ही देना,भगवन 
कि मेरी चिंता आप स्वयं करें और मैं सिर्फ विश्वास में  साथ निभाता चलूँ  

शोध विचार @ शक्ति नैना मधुप रेनू अनुभूति 
*
तुमको पुकारे मेरा
मन का पपीहरा
*

*
संदर्भित : छाया : कलाकृति.
माया : शक्ति. रितु .
*
प्रेम ही समस्त समस्याओं का निराकरण है 
प्रेम ही प्रार्थना है, और प्रार्थना ही जीवन है
सोना सज्जन के लिए प्रेम पूर्ण वाणी व व्यवहार ही यथेष्ठ है 
*
स्वाधीनता : सही मायने
*
कुविचारों से आजादी , स्वस्थ्य मन, शुद्धता  
मानसिकता की आज़ादी, नकारात्मक भावों से आज़ादी ही वास्तव में स्वस्थ मन, 
आंतरिक शुद्धता और सच्ची मानसिक आज़ादी ही स्वाधीनता : का आधार है।
*
न उम्र की सीमा हो 
न जन्म का हो बंधन 


*
संदर्भित : माया : कलाकृति. 
पेंटिंग : मधुप : वर्ष : १९९२. 
*
न तुम खराब न हम ख़राब 
*
 आपस में अपनों के मसले का हल है यही जनाब 
कभी तुम सही कभी हम सही न तुम खराब न हम ख़राब 
*
शक्ति.शालिनी मधुप नैना अनुभूति 
*
यदि प्रेम एकपक्षीय है तो  आध्यात्मिक सही 
निस्वार्थ है , 
यदि प्रेम द्विपक्षीय है तो इसे सम्पूर्ण भी  समझिए व रचनात्मक 
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २. 
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शक्ति.
 प्रधान सम्पादिका.
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©️®️M.S.Media.WCP. Mansi : 
24/20/19/25/26
*


शक्ति. शालिनी रेनू. 
शक्ति. डॉ.रजनी नीलम. 
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शक्ति.
कार्यकारी सम्पादिका.
*

शक्ति. डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया.
*
दृश्यम. छाया
 सम्पादिका  


शक्ति.
 गुल डॉ.अनु मीना रितु 
*
कला सम्पादिका 

©️®️M.S.Media.WCP. AMDM
09/22/22/21/26

 शक्ति.अनुभूति मंजिता 
दीप्ति मानसी 
*
*
सम्पादकीय शक्ति विचार : हम चार : पृष्ठ : २.
नवशक्ति डेस्क : शिमला.  
*
जब जब तू मेरे सामने आए  : २ /१ 
*
क्या कभी ऐसा नहीं लगा कि जीवन विशेष में 
प्रेम में प्रतिकार का स्थान तो होता ही नहीं है यह तो अनंत उदारता से प्रारंभ होते हुए 
अनंत धैर्य की शिव शक्ति के साथ परिपूर्ण होता है ? ,
*
शोध विचार  
@ शक्ति.शालिनी मधुप डॉ.अनु रजनी.
 *
   विचार हम चार : भोले भाव मिले रघुराई २/२. 
*
किसी का सरल स्वभाव होना उसकी कमजोरी नहीं 
बल्कि उसके संस्कार होते हैं  अपने सरल स्वभाव वश ही
भोले ने गरल पी लिया था 
*
शोध विचार  
@ शक्ति.रेनू  मधुप रितु सोनी 
*
धरम करम : २ / ३. शक्ति विचार : हम चार.
*
कोई हमारा बुरा करे यह उसका करम है 
लेकिन हम किसी का बुरा ना करें यह हमारा ईमान धरम है 

*
शोध विचार  
@ शक्ति. मीना अनुभूति रंजिता सीमा. 
*
बुरे भी हम भले भी हम : विचार : हम चार. २ / ४.
*
अच्छाई और सच्चाई चाहे पूरी दुनियाँ में ढूंढ लो 
अगर ख़ुद में नहीं है तो कहीं न मिलेगी.  
*
शोध विचार  
@ शक्ति.डॉ.राखी मधुप  शबनम श्रद्धा . 
*
*
शक्ति तनु.आर्य रजत. निदेशक. स्वर्णिका ज्वेलर्स. सोह सराय. बिहारशरीफ.समर्थित.   
*
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आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३.
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*

शक्ति. अनुभाग
भाविकाएँ
*
शक्ति.मानसी पंत.
*
नैनीताल.
लेखिका. कवयित्री. चित्रकार.
*

©️®️M.S.Media.WCP. Mansi : 21/26
*
क्या देखना, सब दिख गया.

मन मौन है, तन क्या लिखे ?
लहू शब्द भारी लिख गया.

कफ़न तक नोंचा गया 
गर देह नारी दिख गया. 

वो किसान भूखा सोया है  
फसलों का मोल दिख गया.  

ग़रीब बच्चे ने चांद मांगा  
थाली रखी चाँद दिख गया.  

मासूम तड़पती आँचल को 
दर्पण दुनियाँ का दिख गया. 

कलयुग ख़त्म ही हो जाए
क्या देखना,सब दिख गया ?
*
संपादन. 
शक्ति. कंचन मधुप अनुभूति. 
*


शक्ति. अनुभाग
*

शक्ति शालिनी
* उत्तर प्रदेश लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका. *
भाविकाएँ
लघु कविता.
*
जो हैं रूठे मैं उनको मनाती चली.

प्रेम के पुष्प पग-पग बिछाती चली,
नित्य करती सृजन गीत गाती चली.
पत्थरों को रिझाने की आदत मेरी,
जो हैं रूठे मैं उनको मनाती चली.

ख़्वाब में आज उनसे मिली ही नही,
मन की कलियां हमारे खिली ही नही.
उधड़े रिश्तों की तुरपाई करती रही,
जाने क्यों अब तलक ये सिली ही नही.

काव्य का अंश बनकर मैं आयी यहाँ,
स्वसृजित धुन मधुर गुनगुनाती चली.
पत्थरों को रिझाने की आदत मेरी,
जो हैं रूठे मैं उनको मनाती चली.

*
*
©️®️
M.S.Media.WCP. Jawa Sen : 20/26
*
ख़्वाब बेरंग थे इक जमाने से जो,
*
सांझ की रिक्तिमा का अंधेरा बनी,
दुःख का कारण बहुत ही घनेरा बनी.
सुख का सूरज हुआ मैं प्रकाशित हुई,
फिर मैं सुन्दर, सुनहरी, सवेरा बनी.

नफ़रत-ए-दौर में प्रेम-दीपक जला,
मैं करामात सबको दिखाती चली.
पत्थरों को रिझाने की आदत मेरी,
जो हैं रूठे मैं उनको मनाती चली.

दोष गिनती रही उंगलियों पर मगर,
दोष तुम ही बताते तो मिलता सुकूँ.
तुमने रोका नही, तुमने टोका नही,
काश तुम ही बताते कहाँ मैं रुकूँ.

ख़्वाब बेरंग थे इक जमाने से जो,
मनपसंद रंग उनको दिलाती चली.
पत्थरों को रिझाने की आदत मेरी,
जो हैं रूठे मैं उनको मनाती चली.
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. रेनू मधुप मंजिता अनुभूति
*


शक्ति. अनुभाग
*
*
शक्ति. रेनू शब्द मुखर जयपुर लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका. *
*
धागा रेशम का
भाविका

*
फोटो : रक्षा बंधन : शक्ति नमिता रानीखेत
*
कलाई पर बँधा यह धागा रेशम का नहीं, विश्वास का होता है. इसमें बहन की आँखों में छिपी वह निःशब्द प्रार्थना भी… कि समय चाहे कितना ही बदल जाए, भाई के स्नेह की छाँव कभी कम न हो. रक्षाबंधन केवल रक्षा का वचन नहीं, यह उस प्रेम का उत्सव है जो अधिकार नहीं माँगता,
फिर भी जीवन भर साथ निभाता है. ईश्वर करे हर कलाई पर बँधा विश्वास अटूट रहे, हर आँगन रिश्तों की खुशबू से महकता रहे, और हर बहन की मुस्कान उसके भाई की सबसे बड़ी ताक़त बनी रहे.
*
*
राम रावण

पहले रावण बाहर था
दृश्य था
आज रावण
हमारे आस पास है
सबके भीतर है
अंतर्मन में है
अदृश्य है
इसलिए भीतर छिड़े अन्तर्द्वन्द
में आवश्यकता धनुष की नहीं
अपने विवेक का है
सही है ध्यातव्य है
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. डॉ. रजनी शालिनी मधुप मंजिता
*


शक्ति. अनुभाग

*
शक्ति. डॉ रजनी परमार 
प्रस्तोता : पटना दूरदर्शन 
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
*
कोई आकांक्षा प्रिय !
भाविका 
*
सच तो यह है 
कि उसे गेंदा सा
मौसमी बनना पसंद है
न ही रंगून क्रीपर सदृश
तिल–तिल रंग बदलना
और ना ही बेगोनिआ के  
कृत्रिम सुगंध सा बनने की
कोई आकांक्षा प्रिय ! 
*
तेरा मेरा साथ मगर 
फिर क्यों मुझको लगता है डर 
*

*
भाविका सन्दर्भ : माया 
शक्ति. अनु : नैनीताल :छाया 
*
वो तो मेहनत की भट्ठी में तपा
अनुभव की कसौटी को साधे 
अपने कर्मपथ पर निरंतर....
अग्रसर होता एक विलक्षण 
प्राणप्रिय वनफूल है.... 
जो अकेले हर महंगे और
खूबसूरत प्रजाति से भिन्न है
यही उसकी असल पहचान है
बिल्कुल हमारी तरह....
हाँ, बिल्कुल ही हमारी तरह !
*
सज्जा व संपादन
शक्ति. शालिनी रेनू मधुप अनुभूति
*
*
शक्ति. नेहा आर्य अतुल. मुन्ना लाल महेश लाल आर्य एंड संस ज्वेलर्स. बिहार शरीफ/ बरबीघा समर्थित  
*
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तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
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संपादन
*
संपादन.
वाराणसी डेस्क.

*
शक्ति.
नीलम अनुभूति शालिनी प्रीति.
*
*
सावन को आने दो.
शक्ति. शालिनी प्रिया मधुप अनुभूति 
शीर्षक. आलेख : ४ / १. 
*

सावन : मेहंदी : हरी भरी चूड़ियाँ : पेंटिग : संपादन : शक्ति. प्रिया मधुप रितु अनुभूति.

रिमझिम गिरे सावन सुलग सुलग जाए मन : रिमझिम गिरे सावन सुलग सुलग जाए मन किशोर कुमार का गाया हुआ एक गाना है। फिल्म थी मंजिल। अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी स्टारर फिल्म ' मंज़िल ' २८ सितंबर १९७९ को रिलीज़ हुई थी।
दो बार मुंबई यात्रा में इस गाने का सीन्स व लोकेशंस देखा। मुझे याद है मुंबई के मेरिन ड्राइव, गेट वे इंडिया छत्र पति शिवाजी रेलवे स्टेशन आदि लोकेशंस प्रकृति के मध्य इस गाने को फिल्माया गया था। इस तरह फ़िल्मी गाने सावन से भरे पड़ें हैं। बड़ी मनभावन गीत है। उम्दा अभिनय भी।
सच कहें तो सावन को आने दो यह  केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि तपती गर्मी से बेहाल धरती और मानव मन की एक गहरी पुकार है। सच कहें भीनी भीनी फुहार पड़ने दें। ख़ुशियों को आने दो। हरीतिमा को आने दो। 
इसी तरह इसी थीम पर १९७९ की सदाबहार फिल्म ' सावन को आने दो ' से हमारे ब्लॉग का शीर्षक प्रेरित है। ग्रामीण परिवेश पर आधारित एक संगीतमय प्रेमकहानी है। राजश्री प्रोडक्शंस की यह फिल्म अपने मूक संबल, साधारण जीवन और राज कमल द्वारा रचित यादगार गीतों के लिए जानी जाती है। जिसमें मुख्य भूमिकाओं में अरुण गोविल और ज़रीना वहाब की थी। इस तरह ढ़ेर सारी फिल्में बनी हैं। सावन के गीत भी अनगिनत हैं।
भारतीय संस्कृति में सावन श्रावण मास : भारतीय संस्कृति में सावन श्रावण मास का स्थान सभी महीनों में सबसे ऊपर माना जाता है। जेठ और आषाढ़ की चिलचिलाती धूप, उमस और लू से जब नदियां, तालाब, पेड़-पौधे और इंसान व्याकुल हो उठते हैं, तब हर कोई दिल से यही प्रार्थना करता है कि ' सावन को आने दो '। यह महीना अपने साथ जीवन, शीतलता और खुशहाली का संदेश लेकर आता है। हम बारिश की बूंदों का स्वागत करते हैं। 
चिलचिलाती धूप, जब हर कोई कह उठे ' सावन को आने दो ' प्रकृति का अद्भुत श्रृंगारसावन के आते ही प्रकृति का रूप पूरी तरह बदल जाता है। आकाश में काले-घने बादल छा जाते हैं और रिमझिम फुहारें गिरने लगती हैं। सूखी और बेजान धरती पानी पीकर तृप्त हो जाती है और चारों ओर मखमली हरी घास की चादर बिछ जाती है। पेड़-पौधे नहाकर साफ और हरे-भरे दिखाई देने लगते हैं। बागों में कोयल की कूक और जंगलों में मोरों का नृत्य सावन के स्वागत में चार चांद लगा देता है। ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने स्वयं अपना नया श्रृंगार किया हो।
बरखा बहार त्योहारों की उमंग : त्योहारों की उमंग और सामाजिक जीवनसावन का महीना अकेले नहीं आता, बल्कि अपने साथ कई हिंदू त्योहारों की सौगात लेकर आता है। हरियाली तीज, नाग पंचमी और भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन इसी महीने में मनाए जाते हैं। गांवों और शहरों में पेड़ों पर झूले डाल दिए जाते हैं।
महिलाएं और बच्चियां हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनकर सावन के मल्हार : गीत गाती हैं। यह महीना आपसी कड़वाहट को भुलाकर लोगों को एक-दूसरे के करीब लाता है। वे अनायास ही गा उठती हैं ओ सजना ,बरखा बहार आई , रस की फुहार लाई ,अँखियों में प्यार लाई ओ सजना।
सावन को आने दो' की गूंज हर दिल में उत्साह का संचार करती है। यह महीना हमें सिखाता है कि दुखों की तपन पतझड़ या गर्मी के बाद सुखों की वर्षा सावन अवश्य आती है। सावन प्रकृति, भक्ति और मानवीय खुशियों का एक अनूठा संगम है। यह हमें पर्यावरण से प्रेम करने और पृथ्वी को हरा-भरा बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
लगी आज सावन की फिर से झड़ी है : इस झड़ी का महत्व और अर्थ प्राकृतिक सौंदर्य में ही निहित है। सावन मास में लगातार बारिश से प्रकृति हरी-भरी हो जाती है। नदियां भर जाती हैं। और चारों ओर ठंडक व उल्लास छा जाता है। फुहारें निरंतर पड़ती ही रहती है। कही वियोग तो कही संयोग की संभावना बन जाती है। कथित है कि सावन इस बार जम के बरसेगा क्योंकि विरहन की आँखों से आंसू उधार लेकर घटायें गयी है
सांस्कृतिक संदर्भ हिंदी फिल्मों और गीतों जैसे प्रसिद्ध गाना लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है में इस शब्द का प्रयोग प्रेम, पुरानी यादों और रोमांस को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसका अर्थ किसी चीज़ का लगातार बिना रुके बरसना या बिछड़ने का गम भी होता है।
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स्तंभ सज्जा संपादन
शक्ति : रेनू रितु रंजिता सीमा
*
रिमझिम गिरे सावन
आलेख संदर्भित गीत प्रस्तुति
शक्ति. डॉ रजनी रितु भारती अनु
*
फ़िल्म : परख़. १९६०
गाना : ओ सजना ,बरखा बहार आई
सितारे : साधना. वसंत चौधरी.
*
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गीत : शैलेन्द्र. संगीत : सलिल चौधरी. गायिका : लता मंगेशकर.
गाना सुनने व देखने के लिए दिए गए नीचे लिंक को दवाएं

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मेघा रे मेघा रे, मेघा रे मेघा रे.
शक्ति. नीलम सुमन प्रिया अनुभूति 
वाराणसी डेस्क 
 शीर्षक. आलेख : ४ / २. 
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सावन  शिव भक्ति शक्ति : ओम नमो शिवाय : शक्ति. शालिनी रितु नीलम अनुभूति 

मेघा रे मेघा रे' केवल बादलों को पुकारने वाली एक पंक्ति नहीं है, बल्कि यह वर्षा ऋतु के आगमन पर हमारे मन में उठने वाले आनंद और उमंग की सुंदर अभिव्यक्ति है। ग्रीष्म ऋतु की भीषण तपन से व्याकुल धरती, पशु-पक्षी और इंसान जब आसमान की ओर आँखें टिकाए बैठे होते हैं, तब काले-घने बादलों को देखकर अनायास ही दिल गा उठता है ,' मेघा रे मेघा रे, बरस जा।'
प्रकृति का श्रृंगार और बादलों का महत्वआकाश में उमड़ते-घुमड़ते बादल प्रकृति के सबसे सुंदर रूप को दर्शाते हैं। जब काले मेघ आसमान में छा जाते हैं, तो चिलचिलाती धूप गायब हो जाती है और ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। बादलों के बरसते ही सूखी धरती की प्यास बुझती है और चारों ओर हरियाली की चादर बिछ जाती है। किसान भाई बादलों को देखकर ख़ुशी से झूम उठते हैं क्योंकि मेघा के बरसने पर ही उनकी फसलें लहलहाती हैं। पेड़-पौधों को नया जीवन मिलता है और बागों में मोर नाचने लगते हैं।
श्रावण मास, सबसे पवित्र महीना : मेघा रे मेघा रे, मेघा रे मेघा रे मत परदेस जा रे,आज तू प्रेम का संदेस बरसा रे बरसो रे मेघा-मेघा.., चूड़ी भी जिद पे आई है.., घोड़े जैसी चाल हाथी जैसी दुम, ओ सावन के राजा कहां से आए तुम.., आया सावन झूम के...। सावन  का महीना पवन करे शोर....तेरी दो टकिया की नौकरी मेरा लाखों का सावन जाए  ...... हिन्दी फिल्मों में कुछ ऐसे ही गानों के साथ  सावन  आता है तो लोक जीवन में ' कैसे खेले जयबू  सावन में कजरिया बदरिया घेरे आई ननदी ' के रूप में ननद भौजाई की नोंक झोंक से सजा हुआ आता है।पर हमारे आध्यात्मिक जीवन में सावन के अनेकार्थ हैं।
श्रावण मास, जिसे उत्तर भारतीय राज्यों में सावन माह के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। अपने धार्मिक महत्व और अनुष्ठानों के लिए जाने वाले इस दिन भगवान शिव को समर्पित किया जाता है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इसे शुभ माना जाता है।
कांवर यात्रा और बोल बम : पौराणिक कथाओं में वर्णन आता है कि इसी सावन मास में समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मथने के बाद जो हलाहल विष निकला, उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की।  लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम ' नीलकंठ महादेव ' पड़ा। 
विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का ख़ास महत्व है। यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। 
कांवर यात्रा के दौरान ' बोल बम का नारा है बाबा एक सहारा है ' की गूंज से भक्ति का जो समा बंध जाता है यही सावन की असली खूबसूरती है। 
कंधे पर कांवर लिए शिव भक्त का तांता,हाथों में हरी चूड़ियां, केसरिया वस्त्र धारण किए मेहंदी रचाए सुहागिन महिलाएं शिव की आराधना में लीन दिखती हैं। सावन सोमवार व्रत, नाग पंचमी और भाई बहनों के अटूट बंधन का त्योहार रक्षा बंधन, रुद्राभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान सावन को शिव मय बना देते हैं।
सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है. मान्यता है कि जो भक्त पूरे सावन के महीने में शिव जी की पूजा करता है और शिवलिंग का जलाभिषेक करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. वैसे तो सावन का हर दिन शिवजी की पूजा के लिए शुभ है, लेकिन सावन में सोमवार के दिन पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

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रिमझिम गिरे सावन
आलेख संदर्भित गीत प्रस्तुति
शक्ति. डॉ रजनी रितु भारती अनु
फिल्म शर्मीली. १९७१ 
सितारे : शशि कपूर. राखी. 
गाना : मेघा छाए आधी रात बैरन बन गयी निंदिया.


गीत : नीरज संगीत : एस डी वर्मन . गायिका : लता मंगेशकर.
गाना सुनने व देखने के लिए दिए गए नीचे लिंक को दवाएं
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स्तंभ सज्जा व संपादन 
शक्ति : शालिनी रेनू निवेदिता अनुभूति.


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बारिश की बूंदें ,
कजरी,और सावन के झूले.
शक्ति. आलेख. ४ / ३ . 
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शक्ति. शालिनी.
सहशक्ति रेनू मधुपअनुभूति
लेखिका.कवयित्री.सम्पादिका.
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सावन की फुहारों में भीगी कजरी लोक संवेदना है : डॉ.आर के दुबे कहते है कजरी सावन की फुहारों में भीगी, विरह की पीड़ा और मिलन की मधुर आशा को स्वर देती लोक - संवेदना की अनमोल धरोहर है। इसकी लय में नदियों-सी कोमलता, बादलों-सा गाम्भीर्य और मन की अनकही भावनाओं की सजीव छवि मिलती है।
पूर्वी भारत की धरती से उपजी यह गायन-परंपरा कभी झूले की मस्ती बनती है, तो कभी प्रिय-वियोग की करुण पुकार। कजरी का प्रत्येक सुर वर्षा,श्रृंगार और लोकजीवन की सादगी को एक साथ पिरोकर मन में भीगी हुई-सी मिठास छोड़ जाता है।
कजरी भारत के उत्तर प्रदेश विशेषकर मिर्जापुर, वाराणसी, अवध और बिहार क्षेत्र का एक बेहद लोकप्रिय वर्षा ऋतु का लोकगीत है। यह मुख्य रूप से सावन के महीने में महिलाओं द्वारा झूला झूलते समय, तीज के त्योहार पर या रिमझिम बारिश के दौरान गाया जाता है।
सावन के झूले पड़ें तुम चले आओ : कुछ त्योहार कैलेंडर की तारीख नहीं होते, वे हमारी स्मृतियों में बसे पूरे संसार का नाम होते हैं। भोजपुरी अंचल की नाग पंचमी यानी पचईंया भी ऐसा ही एक पर्व था। पचईंया की सुबह घर-आँगन की सफाई, नागदेवता की पूजा और दूध-लावा छिड़कने की परंपरा से शुरू होती थी। रसोई में बनते पारंपरिक पकवानों की खुशबू पूरे घर को उत्सव में बदल देती थी।
फिर गाँव के नीम और आम के पेड़ों पर पड़ते झूले..बच्चों की किलकारियाँ..और सबसे मधुर..महिलाओं की सामूहिक कजरी.. एक कंठ से उठता हुआ सुर धीरे-धीरे कई कंठों में घुल जाता था। कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी...!
झूला और उल्लास : सावन में महिलाएं पेड़ों पर डाले गए झूलों पर झूलते हुए और समूह में तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कजरी गाती हैं।उत्पत्ति: कजरी की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर क्षेत्र से मानी जाती है, जहाँ इसे माता विंध्यवासिनी के गुणों और सावन के स्वागत में गाया जाता है।
कजरी : गीत नहीं खुशी, विरह, प्रेम, कसक
और मायके की याद : कजरी केवल गीत नहीं थी : वह गाँव की स्त्रियों की खुशी, विरह, प्रेम, मायके की याद और लोकजीवन की जीवन्त अभिव्यक्ति थी। उधर बच्चे दिनभर झूले और खेलों में मस्त रहते, तो युवाओं के लिए मैदान में कबड्डी का रोमांच चरम पर होता। दो टीमों के बीच जीत-हार की जोरदार टक्कर और चारों ओर खड़े बुजुर्गों की निर्णायक भूमिका. प्रतिस्पर्धा होती थी, पर मन में कटुता नहीं..
आज समय बदल गया है। मोबाइल ने मैदानों की जगह ले ली, व्यस्तता ने चौपालों को छोटा कर दिया और स्थानीय पर्वों से जुड़े अवकाश भी कम होते गए।
सरकारी अवकाश केवल काम से छुट्टी नहीं होता कई बार वह अपनी जड़ों से मिलने का अवसर भी होता है।
कजरी और सावन :
राधिका कृष्ण झूले में : GIF 

मेघा छाए आधी रात बैरन बन गयी निंदिया : पचईंया की छुट्टी में बच्चे गाँव लौटते थे, परिवार के सभी लोगों से मिलते थे, महिलाएँ कजरी गाती थीं, झूले पड़ते थे, कबड्डी होती थी और एक पूरी पीढ़ी अपनी संस्कृति को जीकर सीखती थी।
हर लोकपर्व को राजकीय अवकाश मिले, यह संभव न हो; लेकिन क्या स्थानीय संस्कृति के ऐसे पर्वों के लिए वैकल्पिक अवकाश या सांस्कृतिक आयोजन का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सकता..?
क्योंकि... देश की संस्कृति केवल बड़े त्योहारों से नहीं बनती; वह उन छोटे-छोटे लोकपर्वों से भी बनती है, जिन्हें महिलाएँ गीतों में, बच्चे खेलों में और बुजुर्ग अपनी स्मृतियों में सँजोकर रखते हैं।
बता दे रे मैं क्या करूँ : आइए, पचईंया को केवल याद न करें बल्कि उसे फिर से जीने का प्रयास करें. फिर कभी किसी नीम पर झूला पड़े, किसी आँगन से कजरी की आवाज आए,
मैदान में कबड्डी की हुंकार गूँजे और किसी बच्चे की आवाज सुनाई दे... अम्मा! आज पचईंया हऽ… आज त पूरा दिन खेलब ! ” तब समझिएगा... पचईंया खत्म नहीं हुई थी, हमने बस उसे कुछ समय के लिए भुला दिया था.
कजरी : यह सावन के महीने में गाया जाने वाला एक प्रसिद्ध पारंपरिक प्रेम पूर्ण लोकगीत और संगीत शैली है, जो विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार में बहुत ही लोकप्रिय है। यदि हम परंपराएँ की बात करें प्रकृति और प्रेम का अनूठा समन्वय है कजरी के गीतों में। काले बादलों की घटा, वर्षा की फुहार, राधा-कृष्ण का प्रेम और प्रकृति के सौंदर्य का भी अनूठा वर्णन होता है,इसमें ।

कजरी गीत संगीत 
साभार प्रस्तुति : शक्ति. शालिनी श्रद्धा स्मिता अनुभूति 
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गीत संगीत : तू तो जात हउ अकेली कोई संग न सहेली
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स्तंभ संपादन : शक्ति.रीता डॉ.आर के दुबे.प्रीति नीलम 
सज्जा : शक्ति. रंजिता मंजिता सीमा अनुभूति
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शक्ति. आलेख. ४ / ४. 
रक्षा बंधन : रक्षा सूत्र
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येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
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शक्ति.शालिनी मधुप रेनू अनुभूति.

फोटो : पत्नी इंद्राणी शची ने पति देवराज इंद्र को बांधा रक्षा सूत्र
जब पत्नी इंद्राणी शची ने अपने पति देवराज इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा : कथा का प्रसंग: भविष्य पुराण के अनुसार, एक बार देवताओं और असुरों के बीच १२ वर्षों तक भयंकर युद्ध चला, जिसमें असुरों का बोलबाला था और देवराज इंद्र हारने की कगार पर थे।
गुरु बृहस्पति की सलाह: तब इंद्र ने अपने गुरु बृहस्पति से उपाय पूछा। गुरु बृहस्पति ने श्रावण पूर्णिमा के दिन वैदिक मंत्रों से एक रक्षा पोटली : धागा तैयार करवाकर इंद्राणी द्वारा इंद्र की दाहिने कलाई पर बंधवाने को कहा।
उनकी पत्नी इंद्राणी शची ने पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवराज इंद्र को रक्षा सूत्र पत्नी इंद्राणी में बांधा था। इस पवित्र रक्षा सूत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र को युद्ध में विजय मिली और उनका खोया हुआ राज्य वापस मिल गया।
संकल्प से कभी विचलित मत हो : सदियों पुरानी बात है। अम्मा के समय से ही पंडित जी आते रहे। रक्षा बंधन,सत्य नारायण पूजा व विजयादशमी के दिन दाहिने हाथ में कुछ मंत्रो उच्चारण करते हुए एक लाल कच्चा धागे बांधते थे। वो मन्त्र अब याद करता हूँ। ..येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
इसकी सरल हिंदी व अर्थमंत्र का भाव कुछ इस प्रकार है :" जिस प्रकार रक्षा सूत्र से दानवों के महाबली और दानी राजा को बांधा गया था, उसी पवित्र और मजबूत धागे से मैं तुम्हें बांधती /बांधता हूँ। हे रक्षासूत्र ( रक्षे ) ! तुम स्थिर रहना और अपने संकल्प से कभी विचलित मत होना।"
सदैव श्रेष्ठ आर्य के साथ रहें : सच माने तो इसमें उच्च मानवीय गुणों मर्यादा के संरक्षण की बात निहित थी।
यह मंत्र भाई-बहन के पवित्र प्रेम, सुरक्षा के संकल्प के अतिरिक्त अन्य किसी के सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने, व उसकी रक्षित रहने की कामना भी रखना सिद्ध है। ऐसी अवधारणा रखते हुए अन्य किसी के द्वारा उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र का बांधा जाना भी श्री हरि ,राम कृष्ण अवतरित दिव्य पुरुषों के श्रेष्ठ मानवीय गुणों संरक्षण का अर्थ भी इसमें निहित है। इस बाबत शास्त्रों में कहानी भी ढूंढी। मिल गयी। बहुत ही दिलचस्प लगी।

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स्तंभ  संपादन  डॉ. रजनी अनु तनु रितु 
सज्जा  शक्ति : मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति

अनुभाग : २ : परम्पराएं रक्षा बंधन की.
राजा बलि : देवी लक्ष्मी : और नारायण

पौराणिक कथा . वामन अवतार और राजा बलि का दान : पौराणिक कथा के अनुसार, असुरों के राजा बलि बहुत दानवीर और शक्तिशाली थे। उन्होंने अपने १०० यज्ञ पूरे कर स्वर्ग पर अधिकार करने का प्रयास किया।
तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार बौने ब्राह्मण का रूप धारण किया और राजा बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने हां कर दी। भगवान ने दो ही पग में पूरी धरती और आकाश नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए जब कोई जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के आगे झुका दिया।
भगवान विष्णु बने पाताल लोक में राजा बलि के पहरेदार : भगवान विष्णु बने पाताल के पहरेदार राजा बलि के इस परम दान और भक्ति से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और उनसे एक वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने वरदान में मांगा कि भगवान विष्णु हमेशा उनके सामने प्रत्यक्ष रहें और उनके महल के पहरेदार बनकर रहें।
फोटो राजा बलि : देवी लक्ष्मी : रक्षा बंधन
जब देवी लक्ष्मी ने नारायण की मुक्ति के लिए राजा बलि को बाँधी राखी : भगवान ने अपना वचन निभाया और पाताल लोक में बलि के द्वारपाल बन गए। देवी लक्ष्मी की चिंता जब भगवान विष्णु लंबे समय तक वैकुंठ लौटकर नहीं आए, तो महालक्ष्मी अत्यंत चिंतित हो गईं। तब देवर्षि नारद ने लक्ष्मी को एक उपाय सुझाया।
उन्होंने कहा कि आप राजा बलि को अपना भाई बना लीजिए और उपहार में भगवान विष्णु को मांग लीजिए।
तब देवी लक्ष्मी ने बांधी राखी राजा बलि को : नारद जी की सलाह पर माता लक्ष्मी ने एक साधारण गरीब महिला का रूप धारण किया और पाताल लोक में राजा बलि के पास पहुंचीं। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर एक पवित्र रक्षा सूत्र (राखी) बांधा और उन्हें अपना भाई माना।
बलि को राखी बांधने के बाद उपहार में मांग लिया देवी लक्ष्मी ने नारायण की मुक्ति : जब राजा बलि ने अपनी बहन लक्ष्मी से कुछ उपहार मांगने को कहा, तो देवी लक्ष्मी ने अपने असली रूप में आकर उंगली से द्वारपाल की तरफ इशारा किया और कहा कि वे भगवान विष्णु को उपहार स्वरूप वापस चाहती हैं।
राजा बलि ने अपनी बहन को दिया वचन निभाया और भगवान विष्णु को उनके बंधन से मुक्त कर वैकुंठ वापस भेज दिया।जाते-जाते भगवान विष्णु ने बलि को आशीर्वाद दिया कि वे हर साल चार महीने या चातुर्मास पाताल लोक में उन्हीं के पास निवास करेंगे।

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स्तंभ  संपादन  डॉ.रजनी अनु तनु रंजिता 
सज्जा  शक्ति : मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति.

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शक्ति सोनालिका आर्य डॉ दीना नाथ वर्मा : दृष्टि क्लिनिक : किसान बाग : बिहारशरीफ़ समर्थित
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सावन को आने दो : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९.
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संपादन
शक्ति. मंजिता सीमा स्वाति अनभूति
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 बागमती : शक्ति : भक्ति  : पशुपति और सावन : काठमांडू ; कला : शक्ति सोनी मधुप रितु अनुभूति 
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अयारपाटा : ठंढ़ी सड़क : नैनी झील और नैना देवी मंदिर : वर्ष ९८ : कलाकृति : फोटो वॉटर कलर पेंटिंग 
शक्ति.
अनु मधुप प्रिया अनुभूति  

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शक्ति.रश्मि नारायण. आर्य डॉ. अमरदीप नारायण.नालंदा बोन एंड स्पाइन सेंटर बिहार शरीफ समर्थित
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सावन को आने दो : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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संपादन
शक्ति. लक्षिका प्रतीक्षा भारती भुवन जोशी.
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शक्ति.रश्मि नारायण.आर्य डॉ. अमरदीप नारायण.नालंदा बोन एंड स्पाइन सेंटर बिहार शरीफ समर्थित
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सावन को आने दो : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १०.
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संपादन
शक्ति.लक्षिका प्रतीक्षा भारती भुवन जोशी
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सम्पादिका ने पूर्ण की परंपरायें रक्षा बंधन की : शक्ति. रेनू शबनम काजल रश्मि. जयपुर काशी. 
नैनीताल बोट हाउस क्लब : खुरपा ताल  डोर्थी सीट : फोटो कोलाज : शक्ति अनु मधुप  अनुभूति 
सावन की घटा : मेघा रे मेघा रे मत परदेश जा रे  : फोटो : अशोक करण 
सावन बारिश की बूंदें और दिखती हिमालय की श्रृंखलाएं : अल्मोड़ा : छाया
शक्ति लक्षिका लतिका भुवन जोशी
 
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समाचार : चित्र : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
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संपादन
डॉ. रजनी स्मिता मधुप रितु.
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तुमको न भूल पायेंगे : स्मृति 
मुकेशचंद्र माथुर.
२२.०७. २३. - २७.०८.१९७६.
एक महान पार्श्व  गायक. 
विशेष : गौरव शाली कायस्थ परंपरा की सुनहरी कड़ी 
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©️®️MS*.Media. with Courtesy Videos.
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लघु वृत्त चित्र : अवधि ४ मिनट : अनुभाग : १ 
शोध आवाज संपादन  निर्माण : डॉ. मधुप 
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तुमको न भूल पायेंगे : स्मृति 
मुकेशचंद्र माथुर.
२२. ०७. २३. - २७. ०८. १९७६.
एक महान पार्श्व  गायक 
विशेष : गौरव शाली कायस्थ परंपरा की सुनहरी कड़ी 
*
जाने कहाँ गए वो दिन कहते थे तेरी राह में 
नजरों को हम बिछायेंगे 
*
©️®️MS*.Media. with Courtesy Videos.
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लघु वृत्त चित्र : अवधि ४ मिनट : अनुभाग : २.  
शोध आवाज संपादन  निर्माण : डॉ. मधुप 
*
*
तुमको न भूल पायेंगे : स्मृति 
मुकेशचंद्र माथुर.
२२. ०७. २३. - २७. ०८. १९७६.
एक महान पार्श्व  गायक 
विशेष : गौरव शाली कायस्थ परंपरा की सुनहरी कड़ी 
*

जीना यहाँ मरना यहाँ इसके सिवा जाना कहाँ 
ये मेरा गीत जीवन संगीत कल भी कोई दोहरायेगा 
जग को हँसाने बहरूपिया रूप बदल फिर आयेगा 
*
*
©️®️MS*.Media. with Courtesy Videos.
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लघु वृत्त चित्र : अवधि ४ मिनट : अनुभाग : ३.  
शोध. आवाज. संपादन.  निर्माण : डॉ. मधुप. 
*
*
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तुमको न भूल पायेंगे : स्मृति 
मुकेशचंद्र माथुर.
२२. ०७. २३. - २७. ०८. १९७६.
एक महान पार्श्व  गायक 
विशेष : गौरव शाली कायस्थ परंपरा की सुनहरी कड़ी
*
कल खेल में हम हो न हो गर्दिश में तारें  रहेंगे सदा 
ढूंढोगे तुम  
ढूंढेगे वो पर हम तुम्हारे रहेंगे सदा 
जीना यहाँ मरना यहाँ इसके सिवा जाना कहाँ *
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लघु वृत्त चित्र : अवधि ४ मिनट : अनुभाग : ४.  
शोध. आवाज. संपादन. निर्माण : डॉ.मधुप. 
* समसामयिकी.समाचार :
दृश्यम. 
*
समसामयिकी.समाचार : दृश्यम. 

तुलसी दास जयंती.

धीरज धरम मित्र अरु नारी,
आपद काल परखिअहिं चारी.
*
श्रीरामचरितमानस (अरण्यकांड)
*
व्यंग्य चित्र : आजकल : मधुप
*
समाचार : बांकीपुर विधान सभा. 
उपचुनाव : भाजपा हारी.
* 
*
 पेपर लीक की तरह लगता है हम  
सब का वोटवां भी लीक कर गया 
*
तुम मुझे भुला न पाओगे : स्मृति : दृश्यम 
अभिनेता शम्मी कपूर 
२१. १०. १९३१. - १४. ०८. २०११. 


मुखड़ा : धुन ; तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे हा तुम मुझे यूँ 
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शुभकामनाएं : दिन विशेष : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १२.
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*
नैना देवी डेस्क नैनीताल
शुभकामनाएं :
*
दिन विशेष :
२२. ०८. २६.
मूलांक दिवस : हम चार : ४
*
कृष्ण : साथ : समझशक्ति और धर्म
के लिए
  
©️®️M.S.Media. WCP.Dr.Prashant.1976.
*
डॉ. प्रशांत.
बालसखा : सहयात्री : संपादक : लेखक समालोचक
स्वास्थ्य अधिकारी. बड़ौदा. गुजरात
को उनके
जन्मदिन विशेष की ' हम ' ' देव शक्ति ' परिवार की तरफ़ से
' अनंत ' ' शिव' शक्ति शुभकामनाएं
*
निवेदक : डॉ सुनीता मधुप
डॉ.अनीता
*
शक्ति अवतरण दिवस.
*
१०. ०८. २०२६.
शक्ति शालिनी
*

©️®️M.S.Media.WCP. Shalini : 24 /26
*
उत्तर प्रदेश 
लेखिका.कवयित्री.
प्रधान सम्पादिका. महाशक्ति मीडिया.
*
हमारे वेब ब्लॉग मैगज़ीन पेज महा शक्ति मीडिया की निर्भीक,संवादपूर्ण, संरक्षण दायिनी, शक्ति प्रधान ' सम्पादिका ' जिन पर भारती ( सरस्वती ) की विशेष कृपा है जिनसे हम वर्ष २०२४ नैनीताल में मिले को उनके जन्म दिन : शक्ति अवतरण दिवस १० अगस्त के मनभावन पावन अवसर पर ' हम ' एकीकृत देव शक्ति ' मीडिया ' परिवार की तरफ़ से ढ़ेर सारी प्यार भरी 'अनंत ' ' शिव शक्ति ' शुभकामनाएं '


* व मीडिया परिवार की अप्रतिम भेंट संस्कृति का प्रतीक गुलाबी गुलाब *
0 ८. ० ८.
अष्टमी दिवस


  
©️®️M.S.Media.WCP.Rakhi 26 / 26

डॉ.राखी सिन्हा
डेंटल सर्जन
कृष्ण की अनन्य भक्त सम्पादिका
*
को उनके अवतरण दिवस की हम सभी देव शक्ति मीडिया परिवार
की तरफ़ से हार्दिक ' अनंत ' ' शिव ' ' शक्ति ' शुभकामनायें.
*
दिन विशेष : पृष्ठ : १२ / ०२ 
विश्व शेर दिवस : १०. ०८. २०२६


आईये साहस , सामर्थ्य ,गति और 
शक्ति के प्रतीक सिंहों के संरक्षण का संकल्प ले 
*
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आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
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संपादन.
डॉ.अनु शालिनी प्रिया अनुभूति
*
दिल से : मेरी ख़ामोशियों को समझो तुम 
जिंदगी याद में गुजारी है : तराने 
*
धुन : मेरे तुम्हारे बीच में अब तो न पर्वत न सागर 
 अब आन मिलो सजना अब आन मिलो. 
*

*
धुन : फिल्म वंदना : आपकी इनायतें आपके करम 
आप ही बताये कैसे भूलेंगे हम 


*
फ़िल्मी मुखड़े :  गुंचे गुंचे में हँस रहे हो तुम. 
इन ख्यालों में बस रहे हो तुम. जैसे मुरली में तान होती है  
*
धुन : मेरी जिंदगी सवारी मुझको गले लगा के
बैठा दिया फ़लक पे मुझे ख़ाक से उठा के

*
पुनीत शर्मा म्यूजिक प्रस्तुति. 
स्वामित्व : पुनीत शर्मा : मुंबई : निर्माता 
 मित्रता दिवस के लिए भेजी गई 
 पुनः आपके लिए अग्रसारित करते हुए 
*
सावन को आने दो. 
*
©️®️M.S.Media.
WCP. Meena.24/26
*
शक्ति
.मीना सिंह. 
छाया रील सम्पादिका 
*
तराने : दृश्यम : सत्यम शिवम् सुंदरम 
छाया : अभिनय : शक्ति.मीना सिंह. 
*

लोकेशंस : शक्ति. नैना देवी मंदिर.नैनीताल. 
*
*
    मुझे भी कुछ कहना हैं : पृष्ठ : १३ /२ 

संपादन
*
शक्ति.भारती.तनु अनुभूति प्रीति 
नैनीताल.
*

*
शॉर्ट रील : कुछ कहो तो कहा नहीं जाता 
बिन तुम्हारे रहा नहीं जाता : लोकेशंस : नेपाल 
*

 साभार प्रस्तुति : शक्ति. प्रिया मधुप रितु सोनी 
दार्जलिंग डेस्क. 
*
बी एस एफ के लिए : संदेशे आते है : देश प्रेम.


किसी दिल वाली ने किसी मतवाली ने हमसे पूछा है 

*
भाविकाएँ
पानी : पुल और किनारा.
*

*
१४ अगस्त विभाजन
' विभीषिका ' स्मृति दिवस.
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अलग होने का दर्द भला वो क्या जाने जिनके अपने झेलम चनाब के इस पार रह गए नीचे बहते दरिया पर बने पुल भी टूटे कुछ इस पार तो कुछ उस पार तकते पानी पुल और किनारे को अपने कितने बेवश लाचार हो गए.

*

*
डॉ.मधुप.
पृष्ठ सज्जा : संपादन
शक्ति. प्रिया @डॉ. सुनीता सीमा
*

हर हर महादेव.सभी को सावन की शुभकामनाएं.
 
*
शक्ति. डॉ.रजनी परमार 
लेखिका.कवयित्री.प्रधान सम्पादिका.
महाशक्ति मीडिया.
प्रस्तोता : पटना दूरदर्शन.
*
आप लोगों की  मेहनत और पत्रिका के प्रति लोगों का रूझान निस्संदेह प्रशंसनीय है.
शक्ति. तनु सर्वाधिकारी. बंगलोर.
* 
१०. ०८. २०२६
*
दिन विशेष : विश्व शेर दिवस. 


आईये साहस , सामर्थ्य ,गति और 
शक्ति के प्रतीक सिंहों के संरक्षण का संकल्प ले 
*
English Section.
*
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Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting 
*
Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4. 
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
 Shakti : Kriti Art  Link :  English :  Page : 7
 Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9.
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Shakti Editorial Page : 2.
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Chief Shakti Editor. 
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Shakti. 
Naina Vani Shraddha Jawa
Gangotri Desk.

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Executive Shakti Editor. 
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©️®️M.S.Media.WCP. 4 Shaktis.
16/89/ 25/ 20/26
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Shakti. Priya Tanu Kajal Seema.
Darjeeling Desk.
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Shakti Editorial Write Ups : 4. 
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a short passionate poem


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Shakti. Priya 
Darjeeling 
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Where My Every Heart Beats.
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The purity of joy and shallow healed feelings
Paved its way towards your heart
With the crave is to be with you forever
Filled my mind with everlasting love.

Never be wrong to judge me with my age
As my heart beat is equal till my death
Just be aside to hold me tight
Guiding me as you are always my sight.


Dil Pukare Aa Re Aa Re : Monestry.Sikkim. Related : Poem.WCP.2016.
*
The purity of my feeling are every time true
Forecasting your beauty and appreciating your crew
Shine like a star of my journey till the end
And never vanish away like a rainbow in the vain

Your every glimpse gives me strength to rule
The day out with the family and friends to spool 
Be always my charming and daring companion 
Where my every heart beats just belongs to you.
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Editing 
Shakti.Shalini Madhup.
Decorative.
Shakti. Anubhuti.Manjita.
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Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
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Editor.
Shakti Naina Priya Ranjita Seema 
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celebration of Raksha Bandhan in India : Shakti Shabnam Renu Namita Manju
Bokaro, Jaipur, Ranikhet. Kinnaur. 
*
Short Reel : Courtesy Video 
Nepal Flash Floods : Nepal Tragedy 
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Nepal weeps, but hope remains.Deepest sorrow for Nepal's loss.Hearts break for flood victims.Mourning lives lost in Nepal.In grief, we joint media houses with our entire family stand together.
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Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
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Editor.
Shakti. Lakshika Bharti Naina Shreya.
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Sawan : Shakti : Shiv :Hariyali : Mukteshwar : Shakti Meena Anjel Bharti Anubhuti
Timber Sen : Om Namah Shivay : collage Shakti Namita Seema Ritu Sunita
Manson Cloud The Mall Almora : photo collage Shakti. lakshika Latika Bhuwan Joshi
Nature, beauty, and culture : Sikkim cradles your worries : photo Shakti. Priya.
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 Shakti : Kriti Art  Link :  English :  Page : 7
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Editor.
Shakti. Ranjita Manjita Seema Anubhuti.
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 Aaya Sawan Jhoom Ke. Zero Point Mukteshwar Shakti Meena Bharti Anu Beena Joshi.
a Fifteen August Celebration PWCP  : Shakti Seema.Preety.Shivani.
Nainital Thandi Sadak Naina Devi : Hum Aur Tum : Painting 1998. Shakti. Naina Anu Madhup
 
Sawan : Somvar : Shakti Aur Shiv : Deoghar : WCP.Dr.Sunita Ranjita Seema Ritu.
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Day's Special. Wishes : Page : 8
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Editor.
Shakti. Naina Dr.Sunita Ranjita Seema 
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30 th of August 
National Small Industry Day
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Women's Equality Day.


 a trishakti dancing mode GIF
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Since 26.of August.1920.
*
Let's rock and roll
Might and Right  for the women all.
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   ©️®️M.S.Media.
Dr. Sunita Madhup Shalini Renu.
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Shakti Avtaran Divas.
3rd of August 
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©️®️M.S.Media.WCP.Shakti Priya.16/26
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Shakti. Priya 
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a Birthday Wishes.GIF.
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A Writer Poetess. 
A Media Concerned Experienced Shakti.
Gulf Country.
Shakti.Editor. English Section. 
Photographer. MS* Media.
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with Anant Shiv Shakti Shubhkamnaye.
We all united Hum : Dev Shakti Family wishing  you 
May this year bring you closer to all your dreams, beloved ones and goals.

Gifting you a Khilta Hua Gulab.
Exclusively.
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Shakti.
Dr.Anu.Madhup.Shalini.Renu
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A Friendship Day.
the first Sunday of  August.
In term of Bhartiye contents.
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Hum Panch : 
WPC : ©️®️M.S.Media.
 Siddhant Jyoti.Vidisha.Snigdha Nirnay.

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Friends are  like stars in the Sky...
you may not always notice them, but they are always there 
watching over you
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Dr. Anita Prashant Shalini.
Dr. Sunita Seema Ranjita.
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Prudential. Shakti. Shahina Naaz.Principal.Biharsharif. Supporting. 
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You Said It : Page : 9.
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Editor.
Shakti. Naina Ankita Himani Shahina.
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Your words stayed with me long after I finished reading. 
This post gave me a lot to think about.
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Shakti. Shahina. Naz. Principal. Editor.
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Comments

  1. हर हर महादेव।सभी को सावन की शुभकामनाएं।

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  2. It always gets started with a nice start....this opens with the same flavour and colour

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  3. आप लोगों की मेहनत और पत्रिका के प्रति लोगों का रूझान निस्संदेह प्रशंसनीय है.
    शक्ति.तनु सर्वाधिकारी. बंगलोर.

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  4. This looks really impressive! The concept and presentation are quite engaging .The overall look is classy, creative, and impactful. ✨

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  5. Your words stayed with me long after I finished reading This post gave me a lot to think about.

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  6. First time I was visiting this running blog page and I liked visiting the published contents...

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