Chala Jaye Sapno Ke Aage Kahi : Dainik : Paryatan
©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
Shakti Project.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Presentation.
Cover Page.0.
*
Blog Address.
Search Us at Google.
*
msmedia4you.blog.spot.com.
drmadhuptravel.blogspot.com.
*
email : Address :
m.s.media.presentation@gmail.com
*
Chala Jaye Sapno Ke Aage Kahi : Paryatan.
2026. Volume : 6. Series : 1.
a Social Media.Web Blog Magazine Tourism Page.
Monthly. May Address.
⭐
चला जाए सपनों के आगे कहीं : दैनिक : आवरण पृष्ठ :
![]() | ||
* चला जाए सपनों के आगे कहीं : आवरण पृष्ठ : पत्रिका. में जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं. https://msmedia4you.blogspot.com/2026/04/chala-jaya-sapno-ke-aage-kahi.html ⭐ * महाशक्ति विचार नैना डेस्क * ------- * महाशक्ति.नैना देवी डेस्क. नैनीताल.प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६. संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई.दिवस :४. * सम्पादित. शक्ति.नैना डॉ.सुनीता रंजीता प्रिया. * तू कर लें अपना आत्म परीक्षण सरल नहीं है करना सहन वश में है सिर्फ़ हरि के दूजे शक्ति शिव सज्जन * प्रार्थना : कर्म : धैर्य जिंदगी की सही क्षमता तो धारा के विपरीत परिस्थितियों में संतुलन क़ायम करते हुए आगे बढ़ने में है,प्रिय * * विचार शक्ति @ नैना रंजिता सुनीता अनुभूति * टाइम्स मीडिया समर्थित. * शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २. * * महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता. प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९. संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२. सम्पादित. शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा. * कर्म ही धर्म और ईश्वर में आस्था विषम से विषम समय और परिस्थितियों में भी मार्ग निकल ही आएगा * विचार शक्ति @ सीमा रितु प्रिया सुनीता ⭐ ©️®️ M.S.Media. * उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओं * * शब्द चित्र : विचार : माया : साल : १९८९. सुनीता : कृति : मधुप : स्केच : छाया * जिंदगी आपकी... फैसले भी आपके होने चाहिए समूह और समाज में सदैव अच्छे व्यक्ति विशेष के सन्दर्भ में निर्णय लें * विचार @ शक्ति.नैना मधुप प्रिया सीमा. * ©️®️ यदि आप कुछ अच्छा खो सकते हैं तो उससे बेहतर हासिल भी कर सकते हैं * विचार शक्ति.नैना प्रिया रितु सीमा. * दिल की क़िताब कोरी है * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : शालिनी : छाया. * चुप्पी हमेशा शून्य नहीं होती कभी कभी ये अनकहे जज्बातों से भरी किताब होती है जिसे सिर्फ़ मेरे अपने ही पढ़ सकते हैं * विचार शक्ति शालिनी @ सीमा रितु प्रिया * हम तोड़ के निकलेंगे जंजीर समाजों की * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु : छाया. * नीति करम नियति. * तुम्हारी नीति से ही तुम्हारी नियति सुनिश्चित है, प्रिय किसी के लिए यदि नेक न कर सकें तो बुरा तो किसी के लिए कभी भी मत करें * व्यक्ति, समाज और धर्म का मानवीय होना परम आवश्यक है अन्यथा रूढ़िवादी धर्म, समाज और व्यक्ति के विश्वास क्या औचित्य ? अपने अन्तर्मन में विचार कीजिए * ⭐ ------- शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ /३ ------- * * नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२. संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना : सितम्बर. दिवस : ९. * संपादन शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा * ------- शक्ति महासरस्वती.जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ /३ ------- नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२. संस्थापना वर्ष : १९८९.महीना:सितम्बर. दिवस : ९. * संपादन शक्ति.नैना प्रिया.अनीता श्रद्धा * कुछ खोकर पाना है कुछ पाकर खोना है. * * सन्दर्भ : विचार : कृति : सुनीता. माया. साल : १९९३ : स्केच : मधुप : छाया. * आवश्यकता के अनुसार मौन रहना एक साधना है तो सोच समझ कर उचित समय पर बोलना आपके जीने की सुन्दर कला * खुशियाँ पराई होती है सब में बाँट दी जाती है दर्द अपने होते हैं इसे अपने दिल में रखने पड़ते है. * परिवर्तन जीवन का शाश्वत नियम है परिवर्तन से डरो मत यदि आप कुछ अच्छा खो सकते हो तो उससे भी अच्छा प्राप्त कर सकते हो * विचार शक्ति @ डॉ. राखी मधुप रितु गरिमा * * सन्दर्भ : विचार : माया. शक्ति : रितु : छाया. * समझौता * इच्छाएं, आवश्यकताएं जीवन में अनंत है कभी पूरी नहीं होती, जो जितनी सुविधा में है वो उतनी ही दुविधा में भी है इसलिए परिस्थितियों से समझौता करना सीखिए करम किए जा * लोगों को परिणाम से मतलब है प्रयास से नहीं,
और विडंबना ये है कि हमारे हाथ में प्रयास है परिणाम नहीं * स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित. ------- सम्पादकीय शक्ति पृष्ठ : २. --------- * प्रधान शक्ति संपादिका. नव शक्ति. श्यामली : डेस्क : शिमला. प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९. संस्थापना वर्ष : २०००. महीना : जनवरी. दिवस :५. ** शक्ति.शालिनी रेनू. नीलम 'अनुभूति '. * डॉ.श्याम किशोर मॉडर्न एक्सरे : अल्ट्रा साउंड : सी टी स्कैन : बिहारशरीफ समर्थित. ------ आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३. ---------- * शिमला डेस्क * शक्ति रेनू अनुभूति शालिनी मानसी * शक्ति अनुभाग. * * तुम्हारे बिना भी तुम हो भाविका संदर्भित : माया शक्ति :स्वयं : रेनू : छाया * तुम्हारे बिना भी तुम हो... हर उस सन्नाटे में, जहाँ मैं अपनी धड़कन सुनती हूँ।
तुम हो उस अधूरी कॉफी के आखिरी घूंट में, जहाँ मैं सोचती हूँ काश! ये पल थोड़ी देर और ठहर जाता।
तुम हो मेरे शब्दों के बीच की जगहों में, जहाँ कोई अल्पविराम नहीं. सिर्फ एहसास की साँसें हैं।
तुम हो उस सड़क की धूल में, जहाँ हमने कभी साथ चलने का वादा किया था, और अब मैं अकेली चलती हूँ, फिर भी हर कदम पर तुम्हारा नाम बजता है।
कहते हैं, प्रेम मिटता नहीं, रूप बदलता है-
शायद अब मेरा प्रेम ' तुम ' नहीं, 'तुम्हारी यादों का व्याकरण' बन गया है।
* संपादन सज्जा शक्ति. प्रीति मानसी सीमा रंजिता * * तुम शब्द नहीं, संवेदना हो * शक्ति.रेनू शब्द मुखर * कवयित्री.लेखिका.सम्पादिका * तुम्हें चाहना जैसे कोई कविता * तुम शब्द नहीं, संवेदना हो
तुम्हें चाहना जैसे कोई कविता ख़ुद-ब-खुद उतर जाए काग़ज़ पर..
बिना प्रयास, बिना भाषा के. तुम्हें महसूस करना जैसे पुराने मंदिर की घंटियों में किसी प्रार्थना की ख़ामोश गूंज छुपी हो.
तुम्हारे होने से हर मौसम को अर्थ मिला, बरसात महज़ पानी नहीं रही,
छुअन की याद बन गई। तुम मिलो या ना मिलो, तुम्हारा होना.....
हर लम्हे को संजीवनी-सा कर देता है.
तुम शब्द नहीं, संवेदना हो... जिन्हें केवल हृदय ही पढ़ सकता है * संपादन सज्जा शक्ति. प्रीति मानसी कंचन रंजिता * * शक्ति नीलम . वाराणसी कवयित्री.लेखिका.सम्पादिका. * मां के बिन मां के बिन मां का कोई दिन नहीं होता, यूं कहो मां के बिन, किसी का भी दिन नहीं होता. रसोई से ज्यों आती आवाज,
क्या स्कूल नहीं है आज ? सारे सपने तोड़ के, भागे बिस्तर छोड़ के, थोड़ा मां से छुप-छुपा के, थोड़ी सी नजरें बचा के. सारे काम जल्द निबटा के, दिन कुछ ऐसे गुजरता है. * भाविकाएँ : संदर्भित : माया शक्ति : निवेदिता सुमन : छाया * सोचो तब क्या होता है ? मां के बिन जब दिन होता है ! खुलती नहीं समय से आंख, सारा घर सूना-सा लगता है. कभी गर हो गए बीमार, हर घड़ी होंगी आंखे चार. सिर्फ दवा दारू दे के, वो हार नहीं मानती है, नमक मिर्च ले जल्दी से, नजरें भी उतारती है.दिखाती बनावटी गुस्सा, मन में मन्नत दुहराती है.
जन्नत है गर कहीं जमीं पर, वो है मां की खिलखिलाती हंसी पर. * संपादन सज्जा शक्ति. प्रीति मानसी कंचन मंजिता * * शक्ति.अनुभाग शालिनी.संदीप. * * अब अंधेरों के साथ और न चल ' मुसाफ़िर ' * भाविकाएँ : संदर्भित : माया शक्ति : शालिनी : स्वयं : छाया * अपनी बात से हर बार मुकर जाते हैं, वो तेरे अक्स को बस दागदार करते हैं.
बचा के रख तू परिंदों सी अपनी खुद्दारी, ये खोखले लोग तो हर बार वार करते हैं.
ताल्लुक़ात की चादर को मैला कर देंगे, ये बस झूठ का ही कारोबार करते हैं.
वो जिनके अपने इरादे ही डगमगाते हों, वो तेरे हौसलों को कमज़ोर यार करते हैं.
अब अंधेरों के साथ और न चल ' मुसाफ़िर ' ये चराग़ों का कत्ल सरे-बाज़ार करते हैं. तू राह बदल ले कि इसमें भलाई है तेरी. ये खुद बीमार.. सबको बीमार करते हैं. * आत्मिकअनुबंध प्रेम अनुभाग बस तुम ही तुम हो, शून्य से शिखर तक, बस तुम ही तुम हो, मेरे भीतर की एकांत गूँज, बस तुम ही तुम हो. मंदिर की चौखट पर, जब शीश नवाती हूँ, मंत्र कोई भी हो, ध्वनि तुम्हारी ही पाती हूँ.
हथेली की लकीरों में, जो उलझी हैं उँगलियाँ तुम्हारी, मानो सदियों की प्यास, अब तृप्त हुई है हमारी.
लोग कहते हैं मैं विरक्त हूँ, तेरे स्नेह में सराबोर हूँ, सच तो ये है कि मैं तेरे, प्रेम के बंधन में विभोर हूँ. * अनुभाग जैसे शिव की जटाओं में गंगा * * जैसे गंगा सिमट जाती है, शिव की जटाओं में, वैसे ही मैं सुरक्षित हूँ, तुम्हारी वफाओं में. ये मिलन आज का नहीं, किसी युग का उधार है, हर जन्म में तुझे ढूँढना ही, मेरा एकमात्र अधिकार है. धरा बदलेगी, अंबर बदलेगा, बदलेंगे ये शरीर कभी, पर बदलेगी नहीं मेरे, अंतर्मन की तस्वीर कभी. यदि बिछड़े कभी हम, तो न टूटेगी यह रीति, मैं फिर आऊँगी धरा पर, निभाने अपनी प्रीति. तुम मुझमें समाहित हो, एक मौन प्रार्थना की तरह, मैं तुममें सुरक्षित हूँ, प्राणों में बसी आत्मा की तरह. * संपादन सज्जा शक्ति रेनू मानसी कंचन अनुभूति. * * शक्ति.अनुभाग. * डॉ. रजनी परमार कवयित्री. लेखिका. सम्पादिका. महाशक्ति मीडिया * शक्ति : स्वयं : रजनी : छाया * ग़ज़ल * जो खता मैंने नहीं की उसपे पछताना पड़ा, जो खता मैंने नहीं की उसपे पछताना पड़ा, बेवफाई तूने की और मुझको शर्माना पड़ा. सुर्ख स्याह रंग जैसी हो गई सूरत मेरी, प्रीत के धोखे में यूं मुझको मुरझाना पड़ा. खिल उठा तेरा चमन,रौशन हुआ जहान है, अपनी हस्ती बेचकर,यूं हमने जुर्माना भरा. प्यार के इश्तिहार सारे राख अब हमने किए, एक एक लौ से खुद हमको जल जाना पड़ा. इश्क़ के सौदे में कुछ यूं मिली बरकत मुझे, सांसे चल रही लेकिन मुझको मर जाना पड़ा. * * संपादन सज्जा शक्ति. शालिनी नीलम मानसी स्वाति नैनीताल डेस्क * ----------- तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४. ----------- संपादन * शक्ति आलेख : रिश्ते नाते * * शक्ति मूल आलेख : रिश्ते नाते * सावित्री वट सत्यवान : शक्ति आलेख अशोक कर्ण भूतपूर्व छायाकार : हिदुस्तान टाइम्स पटना रांची भूतपूर्व : फोटो संपादक : एजेंडा नई दिल्ली. * पुनः संपादित शक्ति. डॉ रजनी सुनीता मधुप प्रिया. मति : शक्ति : पति :भक्ति : सावित्री ने यम से मांगे : तीन विवेकशील वरदान : मति : शक्ति : भक्ति : आज सुबह की सैर के दौरान मैंने एक बेहद सुंदर और आध्यात्मिक दृश्य देखा, जिसने मेरा ध्यान पूरी तरह अपनी ओर आकर्षित कर लिया। हमारी कॉलोनी के मंदिर परिसर में स्थित बरगद के पेड़ की ओर पीले, लाल और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएँ लंबी कतार में बड़े ही सौम्य अंदाज़ में जा रही थीं। उनके हाथों में सुंदर रूप से सजी हुई बांस की टोकरी थी, जिनमें पूजा सामग्री, फूल और प्रसाद रखे हुए थे। सुबह की सुनहरी किरणें उनके रंग-बिरंगे वस्त्रों पर पड़कर एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं, जो मेरे जैसे फोटोग्राफर के लिए किसी परफेक्ट फ्रेम से कम नहीं था। इस अवसर को लेकर जिज्ञासा होने पर मेरे चचेरे भाई गोपाल ने बताया कि आज वट सावित्री व्रत है, जो विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं। पूजा वट वृक्ष की :अक्षय है अमरत्व,का प्रतीक : इस पूजा में बरगद का पेड़ ( वट वृक्ष ) अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह अमरत्व, शक्ति और अनंत जीवन का प्रतीक है। सदियों तक जीवित रहने वाला यह वृक्ष अटूट रिश्तों का प्रतीक माना जाता है और इसे हिंदू त्रिदेव : ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास स्थान भी माना जाता है। पूजा का शुभ मुहूर्त : यह पवित्र व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर शनि जयंती के साथ भी पड़ रहा है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। पुजारियों के अनुसार आज पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर अपराह्न १.३७ बजे से अपराह्न ३.३७ बजे तक है। व्रत रखने वाली महिलाएँ पूरे दिन कठोर उपवास रखती हैं, कई महिलाएँ निर्जला व्रत भी करती हैं। वे पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं, आभूषण और मेहंदी से स्वयं को सजाती हैं तथा बरगद के पेड़ के पास एकत्र होकर फल, फूल और पूजा सामग्री अर्पित करती हैं। वे श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक स्वरूप पेड़ के चारों ओर परिक्रमा करते हुए लाल या पीले धागे भी बांधती हैं।
सत्यवान की मृत्यु के निर्धारित दिन सावित्री ने बरगद के पेड़ के नीचे पूजा की, जबकि सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गए। भविष्यवाणी के अनुसार वे बेहोश होकर सावित्री की गोद में प्राण त्याग देते हैं। जब यमराज उनकी आत्मा लेने आए, तो सावित्री निडर होकर उनके पीछे चल पड़ीं। सावित्री की बुद्धिमत्ता,समर्पण और धर्मपूर्ण उत्तरों से प्रभावित होकर यमराज ने उन्हें कई वरदान दिए : सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की अत्यंत रूपवती और गुणवान पुत्री थीं। मति : शक्ति पति भक्ति : सावित्री के तीन विवेकशील वरदान : सत्यवान के प्राण वापस पाने के लिए सावित्री ने यमराज से कौन-से तीन वरदान मांगे थे ? उत्तर है अपने अंधे सास-ससुर के लिए पुनः दृष्टि और उनका खोया हुआ राज्य। अपने पिता के लिए सौ पुत्रों का वरदान। सत्यवान के माध्यम से खुद के लिए सौ पुत्रों का वरदान, जिसे पूरा करने के लिए यमराज को सत्यवान के प्राण छोड़ने पड़े। सावित्री की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? उत्तर: यह कथा पति-पत्नी के अटूट प्रेम और मृत्यु पर प्रेम की विजय को दर्शाती है। इससे हमें संकट के समय धैर्य, चतुराई और धर्म के मार्ग पर चलने की शिक्षा मिलती है। अपने साहस, बुद्धिमत्ता और अटूट समर्पण के कारण सावित्री आज भी वैवाहिक निष्ठा और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। पूजा विधि : लोकप्रियता : महिलाएँ पूरे दिन कठोर व्रत रखती हैं पारंपरिक वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार करती हैं बरगद के पेड़ के पास फल, फूल और पूजा सामग्री अर्पित करती हैं पेड़ की परिक्रमा करते हुए पवित्र धागा बांधती हैं अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनकर पूजा संपन्न करती हैं। वट सावित्री पूजा आज भी भारत के कई राज्यों, विशेषकर बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह परंपरा प्रेम, विश्वास और समर्पण की सुंदर मिसाल प्रस्तुत करती है। * स्तंभ संपादन : शक्ति. डॉ.अनु रेनू तनु रंजिता. स्तंभ सज्जा : शक्ति.रितु मंजिता सीमा अनुभूति. * न जाने क्यूँ बदल जाते है ये दुनियाँ के बदलते रिश्तें निभाने से निखरते रिश्ते. * शक्ति. रेनू शब्द मुखर. जयपुर. लेखिका कवयित्री प्रधान सम्पादिका महाशक्ति मीडिया न जाने क्यूँ बदल जाते है ये दुनियाँ के बदलते रिश्तें : कभी-कभी हम अपनों से अपनों से ही दूर हो जाते हैं अहंकार गलतफहमियों या व्यवस्थाओं के कारण। हम सोचते हैं कि वह समझ जाएंगे कभी भी बात कर लेंगे। लेकिन वक्त का कोई भरोसा नहीं होता है रिश्ते भी अगर समय पर संभाले ना जाए तो धीरे-धीरे उनकी गर्माहट कम होने लगती है। एक छोटी सी बात एक मीठा सा शब्द एक सच्चा सा प्रयास यह सब रिश्तो को फिर से जीवित कर सकते हैं रिश्तों की सबसे बड़ी खूबी ये है कि ये हमें इंसान बनाए रखते हैं। ये हमें सिखाते हैं कि देना क्या होता है, सहना क्या होता है और बिना शर्त प्यार करना क्या होता है। हर रिश्ता हमें कुछ न कुछ सिखाता है-कभी धैर्य, कभी त्याग, तो कभी अपनापन। निभाने से निखरते रिश्ते : इसलिए जरूरी है कि हम अपने रिश्तों को केवल निभाएं नहीं, बल्कि उन्हें महसूस करें, उन्हें जिएं। उनके लिए वक्त निकालें, उन्हें अहमियत दें। क्योंकि जब जीवन के आखिरी पड़ाव पर हम पीछे मुड़कर देखेंगे, तो ये रिश्ते ही होंगे जो हमारे चेहरे पर मुस्कान लाएंगे या आंखों में नमी भर देंगे। रिश्ते सच में एक फसल की तरह होते हैं अगर उन्हें प्यार, विश्वास और समझदारी से सींचा जाए, तो वे जीवनभर खुशियों की हरियाली देते हैं। लेकिन अगर उन्हें नजरअंदाज किया जाए, तो वे धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। तो आइए, आज ही अपने किसी अपने को याद करें, उनसे बात करें, उन्हें ये एहसास दिलाएं कि वे हमारे लिए कितने खास हैंज क्योंकि रिश्ते सिर्फ होने से नहीं, निभाने से खूबसूरत बनते हैं। * स्तंभ संपादन: शक्ति. शालिनी प्रिया प्रीति रंजिता सज्जा : शक्ति.मंजिता नेहा सीमा अनुभूति * --------- विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५. ---------- आ अब लौट चले : हिमाचल यात्रा संस्मरण डॉ. भावना * रश्मि * लेखन सह संपादन शक्ति.शालिनी डॉ.सुनीता रेनू अनुभूति. * लाहौल और स्पीति : हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले का मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय केलांग Keylong है। यह एक छोटा सा कस्बा है जो मुख्य रूप से लाहौल घाटी में स्थित है और प्रशासन का केंद्र है,जिला मुख्यालय केलांग। ध्यान देने योग्य बातें है कि स्थान बस : केलांग समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है । प्रशासनिक व्यवस्था : जिले में दो मुख्य विकास खंड हैं लाहौल का मुख्यालय केलांग है तो और दूसरे खंड स्पीति का मुख्यालय काजा है। लाहौल और स्पीति : केलांग : हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले का मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय केलांग Keylong है। यह एक छोटा सा कस्बा है जो मुख्य रूप से लाहौल घाटी में स्थित है और प्रशासन का केंद्र है,जिला मुख्यालय केलांग। केलांग : ३१६५ ( १०३८३ फ़ीट ) ध्यान देने योग्य बातें है कि स्थान बस : केलांग समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है । प्रशासनिक व्यवस्था : जिले में दो मुख्य विकास खंड हैं लाहौल का मुख्यालय केलांग है तो और दूसरे खंड स्पीति का मुख्यालय काजा है। स्पीति : काजा : ऊँचाई : ३६५० मीटर और दूसरे खंड स्पीति का मुख्यालय काजा है। कौमिक गांव की ऊँचाई ४५८७ मीटर.काजा में गर्मियों का तापमान लगभग दिन में १० डिग्री से २० डिग्री होता है और रात के तापमान में ० डिग्री के आस पास हो सकता है। सर्दियों की तो बात ही न करें। दूरी : मार्ग : मनाली से काजा की दूरी लौहल घाटी ,सिसु केलांग की दूरी अटल टनल के रास्ते ३३ से ५० किलोमीटर तथा कुंजुम दर्रे होकर २०२ किलोमीटर के आस पास है। दूरी : मार्ग : शिमला : शिमला ,नारकंडा, रामपुर, किन्नौर, रेकॉन्ग पीओ, नाको, ताबो, काज़ा तकरीबन ४१० से ४५० किलोमीटर पड़ता है। रेकॉन्ग पीओ से काजा की दूरी २१० किलोमीटर है।
समय : यदि निजी कार से जाएं तो लगभग १५ से १८ घंटे, लेकिन पहाड़ी रास्तों और रुकने के कारण इसे २ दिन में करना बेहतर है। माध्यम : बस (HRTC) : शिमला ( ISBT Tutikandi ) से हर सुबह रिकांगपिओ के लिए बसें मिलती हैं। वहां से सुबह ७.३० बजे के आसपास काज़ा के लिए सीधी बस मिलती है। निजी कार / टैक्सी भी उपलब्ध होती है। किराया : आने जाने का : निजी कार / टैक्सी : टैक्सी का किराया आमतौर पर ₹ ४५०० -₹ ६००० एक तरफ हो सकता है। जबकि सरकारी रोड बस का किराया ४८३ रुपया से लेकर ५०० हो सकता है स्टे होम किराया : ताबो और काजा में आपको तिब्बती होम स्टे मिल जायेंगे जिनके एक दिन रहने खाने का किराया गर्मियों में १५०० तथा सर्दियों में १००० रुपया हो सकता है। रोड की स्थिति : रिकांग पीओ के बाद सड़क काफी दुर्गम और खतरनाक हो जाती है, जो अक्सर संकरी और कच्चे रास्तों वाली होती है। बेहतरीन समयः जून से अक्टूबर जब बर्फबारी कम हो । निकटतम स्थान : कलपा, जो अपनी प्राचीन सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान NH-22 पर स्थित है और यहां से किन्नर कैलाश पर्वत श्रृंखला के दृश्य दिखाई देते हैं। काजा और आस पास : दर्शनीय स्थल काजा से लाग्चा : कामिक हिक्किम : चिमचिम ब्रिज, की मोनेस्ट्री और कीबर * लाहौल स्पिती घाटी की ओर.ताबो यात्रा संस्मरण : हिमाचल. डॉ.भावना. महाशक्ति मीडिया * @ हम चार : मैं, रश्मि, भावना और सिद्धार्थ : किन्नौर घाटी के बाद हम चार लोग मैं, रश्मि, भावना और सिद्धार्थ ड्राइवर के साथ स्पिती घाटी की ओर निकले। रास्ता काफी दुर्गम पर रोमांचकारी था। स्पिती घाटी में प्रवेश करते ही वातावरण काफी सर्द, खुश्क और वनस्पति विहिन दिखने लगा और शायद इसी वजह से आक्सीजन की कमी भी महसूस होने लगी। लाहौल और स्पीति भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित दो खूबसूरत और दुर्गम घाटियाँ हैं, जो अपनी शानदार ठंडी रेगिस्तानी सुंदरता, ऊँचे पहाड़ों, प्राचीन बौद्ध मठों ( गोम्पा ), स्पीति नदी और रोमांचक ट्रेकिंग के लिए जानी जाती हैं। स्पीति का अर्थ है ' मध्यभूमि ' ( भारत और तिब्बत के बीच ) और यह भारत के सबसे कम आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है जो सर्दियों में शेष दुनिया से कट जाती है, लेकिन अटल टनल के कारण अब लाहौल जाना आसान हो गया है। स्पीति घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। हम सब सबसे पहले टोबो पहुंचे। ताबो एक गाँव : ३२८० मीटर और वो बौद्ध मठ : हमने सुना कि लोग इसे ' हिमालय का अजंता ' भी कहते हैं यह स्पीति नदी के किनारे है । पहली रात हमलोगों ने टोबो में गुजारी जो कि स्पिती घाटी का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह स्पीति घाटी हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत और ठंडा रेगिस्तानी इलाका है, जो अपनी प्राचीन बौद्ध मठों, शानदार परिदृश्यों और कठोर जलवायु के लिए जाना जाता है। सुबह मानेस्टरी घूमने के बाद हमें यह स्पष्ट हुआ कि स्पीति घाटी में ताबो एक गाँव है जहाँ यह ऐतिहासिक मठ स्थित है। यह मठ अपनी वास्तुकला,मूर्तियों और प्राचीन पांडुलिपियों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ का ' ताबो मठ ' जो किंचित एक हज़ार साल से भी पुराना है। और इसे ' हिमालय का अजंता ' भी कहते हैं, जो अपनी दीवारों पर बनी शानदार भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है,यह हमें जानना चाहिए ।: गतांक से आगे : १ लाहौल स्पिती घाटी की ओर.काजा यात्रा संस्मरण : हिमाचल. डॉ.भावना. ' देखों तो .....कोलम्बस कहाँ तक पहुंचा है ? * लांगजा गांव से दिखता : हिमालय : वर्फ़िस्तान : यात्रा : लघु फिल्म : शक्ति भावना स्पीति घाटी की राजधानी काज़ा : हम बर्फिस्तान में थे। अपनों से दूर। घर बाले चिंतित भी थे। हमारे परिचितों ने यह कह कर आपस में हाल पूछना कर दिया था, ' कोई पूछे तो ....देखों तो .....कोलम्बस कहाँ तक पहुंचा है ?' हमसभी को खोजकर्ता .कोलम्बस ही मान लिया था जो दुनियां की खोज भारत के लिए निकला था। काज़ा, हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति ज़िले में स्थित स्पीति घाटी की राजधानी और क्षेत्रीय मुख्यालय है। शिमला से ४१२ किलोमीटर दूर है काजा। काज़ा के सबसे नजदीक कौन सा हिमाचल का शहर है ? काज़ा से अच्छी कनेक्टिविटी वाले सबसे नजदीक के प्रमुख शहर हिमाचल प्रदेश में स्थित शिमला और मनाली हैं। शिमला किन्नौर होते हुए लगभग ४१२ किमी दूर है, जबकि मनाली कुंजुम दर्रे मौसमी होते हुए लगभग २०२ किमी दूर है। माइनस ११ डिग्री का भयानक ठंड : हमलोग नाश्ता करके काजा की ओर निकल पड़े और शाम होने से पहले काबा में एक तिब्बती परिवार के यहाँ होमस्टे लिया। काज़ा अपने रंगीन त्योहारों और प्राचीन साक्या तांग्युद मठ के खंडहरों के लिए जाना जाता है, जो काज़ा से १४ किलोमीटर या ८.७ मील दूर कोमिक गांव के पास स्थित है। हमलोगों को काजा में दो दिन रुकना था। पर ठंड इतनी ज्यादा थी, माइनस ११ डिग्री, या फिर इससे अधिक ऊँचाई के कारण ऑक्सीजन कम होने की वजह से हमलोग अगले दिन ही काजा से निकल गए। सुबह ब्रेकफास्ट किया, थोडा लोकल काजा मार्केट घूमें और स्पीति घाटी से विदा हो गये। तांग्युड मठ : यहाँ १४ वीं सदी का तांग्युड बौद्ध मठ है, जो भारत के सबसे ऊँचे मठों में से एक है और आध्यात्मिकता का केंद्र है। जहाँ तांग्युड मठ और अद्वितीय हिमालयी प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है,और यह साहसिक यात्राओं के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में स्पीति घाटी के हिक्किम से दो किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित कोमिक गाँव में स्थित तंग्युद मठ भी लिखा जाता है। एक गहरी घाटी के किनारे पर एक किलेबंद महल की तरह बना है। इसकी विशाल तिरछी मिट्टी की दीवारें और ऊर्ध्वाधर लाल गेरू और सफेद धारियों वाले प्राचीर इसे वास्तविक ऊंचाई से कहीं अधिक ऊंचा दिखाते हैं। चिचम ब्रिज : हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में चिचम और किब्बर गाँवों को जोड़ने वाला एशिया का सबसे ऊँचा सस्पेंशन ब्रिज है, जो करीब ४१५० मीटर की ऊंचाई पर एक गहरी खाई पर बना है और २०१७ में बनकर तैयार हुआ, जिससे पहले ग्रामीणों को खतरनाक रोपवे का इस्तेमाल करना पड़ता था, अब यात्रा आसान हो गई है. लांग्ज़ा : हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में स्थित एक छोटा और बेहद खूबसूरत गाँव है, जिसे अक्सर जीवाश्मों का गाँव कहा जाता है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ लांग्ज़ा गाँव के बारे में मुख्य बातें हिंदी में दी गई हैं समुद्र तल से लगभग ४४०० मीटर १४४३५ फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो इसे दुनिया के सबसे ऊंचे गाँवों में से एक बनाता है। यह काज़ा से लगभग १६ किमी की दूरी पर है।
बुद्ध प्रतिमा : गाँव के ऊपर एक पहाड़ी पर भगवान बुद्ध की एक विशाल और भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो पूरे गाँव की ओर देखते हुए शांति और सुरक्षा का प्रतीक है।
जीवाश्म : लांग्ज़ा को ' जीवाश्म गाँव ' कहा जाता है क्योंकि यहाँ के पहाड़ों में लाखों साल पुराने समुद्री जीवाश्म आसानी से मिल जाते हैं। माना जाता है कि करोड़ों साल पहले यह क्षेत्र टेथिस सागर के नीचे था।
पर्यटन और दृश्य: यहाँ से बर्फ से ढकी चोटियों जैसे चाओ चाओ कांग निल्डा का शानदार नज़ारा दिखता है। यहाँ के घर पारंपरिक तिब्बती शैली में बने हैं। * गतांक से आगे : २. लाहौल स्पिती घाटी की ओर.कामिक हिक्किम की मोनेस्ट्री :: यात्रा संस्मरण : हिमाचल. डॉ.भावना. कल्पना कीजिये जब मैदानी इलाकों में ८ या ९ डिग्री या मध्य रात्रि तापमान ६ डिग्री पहुँचता है तो समस्त जीवन ही जैसे अस्त व्यस्त हो जाता है। वैसी जिंदगी की कल्पना हमने महसूस की थी। लाग्चा : कामिक हिक्किम : विश्व के ३० घरों वाला लाग्चा गाँव , सबसे ऊँचे गाँव कामिक व पोस्ट ऑफिस हिक्किम देखा। ऊँचे गाँव कामिक : फिर वहीं से विश्व के सबसे ऊँचे गाँव कामिक और ऊँची मानेस्टरी धनकड और लाग्चा गाँव घूमे जहाँ विश्व का सबसे ऊँचा पोस्ट ऑफिस हिक्किम भी देखने को मिला। ये काजा से लगभग १५ से २० किलोमीटर की दूरी पर हैं। ऊँचे गाँव कामिक हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्थित दुनिया के सबसे ऊँचे गाँवों में से एक है, जो समुद्र तल से ऊंचाई : समुद्र तल से लगभग ४५८७ मीटर की ऊँचाई पर है और मोटर योग्य सड़क से जुड़ा है, प्राकृतिक सौंदर्य बरबस ही हमें खींचती है। पर्यटकों के लिए बर्फ से ढकी चोटियाँ, बंजर परिदृश्य और जीवाश्मों से भरी पहाड़ियाँ इसे एक शानदार दिलकश नज़ारा देती हैं। ऊँचाई की बात करें तो यह दुनिया के सबसे ऊँचे मोटर-योग्य गाँवों में से एक है, जो इसे रोमांचक बनाता है। हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में स्थित है, जो अपनी शांत सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है। जैसी ऊंचाई अधिक है श्वास लेने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए इस भौगोलिक स्थिति का ख्याल रखें। जनसंख्या के सन्दर्भ में यह एक छोटा सा गाँव है जहाँ बहुत कम घर और परिवार रहते हैं, और यहाँ की पहाड़ी जीवनशैली बेहद सरल है। हिक्किम देश का सबसे ऊंचा पोस्ट ऑफिस : हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी के नाम एक और नया इतिहास जुड़ गया है. विश्व के सबसे ऊंचे वाहन योग्य गांव हिक्किम में देश का पहला लेटर बॉक्स जैसा पोस्ट ऑफिस निर्मित किया गया है। जनजातीय जिला लाहुल स्पीति के नाम एक और तमगा जुड़ गया है। स्पीति घाटी के हिक्किम गांव में विश्व का सबसे ऊंचा और देश का पहला लैटर बाक्स आकार का डाकघर आरंभ हो गया है जो समुद्रतल से १४,५६७ फीट पर स्थित है। बनाए गए इस डाकघर को देखने में पर्यटक भी उत्सुकता दिखा रहे हैं। पहले लेह के चोगलमसार में ११ ,००० फीट पर सबसे ऊंचा डाकघर था उसकी जगह हिक्किम देश का सबसे ऊंचा पोस्ट ऑफिस ने ले ली हैं । हिक्किम विश्व का सबसे ऊंचा वाहन योग्य सड़क से जुड़ा गांव भी है। की मोनेस्ट्री : हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्पीति घाटी से १२ किलोमीटर दूर है, १३५०० फीट की ऊंचाई ‘की मोनेस्ट्री’ नाम का एक मठ है. लगभग १००० साल पुराना है। ये प्राचीन मठ न सिर्फ इतिहास में १७ वीं शताब्दी के मध्य में, पाँचवें दलाई लामा के शासनकाल के दौरान , मंगोलों द्वारा की मोनेस्ट्री को बड़े पैमाने पर लूटा और क्षतिग्रस्त किया गया, और यह गेलुग्पाओं का गढ़ बन गया। फिर भी आज वर्तमान में पर्यटकों का स्वागत करता है। मठ की दीवारें चित्रों और भित्तिचित्रों से ढकी हुई हैं, जो १४ वीं शताब्दी की मठ वास्तुकला का एक उदाहरण है, जिसका विकास चीनी प्रभाव के परिणामस्वरूप हुआ। क्ये मठ में बुद्ध प्रतिमाओं सहित प्राचीन भित्ति चित्रों और पुस्तकों का संग्रह है । इसमें तीन मंजिलें हैं, पहली मंजिल मुख्य रूप से भूमिगत है और भंडारण के लिए उपयोग की जाती है। एक कमरा, जिसे तंग्युर कहा जाता है , भित्ति चित्रों से खूबसूरती से सजाया गया है। भूतल पर खूबसूरती से सजा हुआ सभा भवन और कई भिक्षुओं के लिए कोठरियाँ हैं। * गतांक से आगे : ३ --------- नारकंडा शिमला : शुरुआती स्कीइंग स्थलों में से एक ---------- नारकंडा शिमला के पास हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो देवदार के घने जंगलों, सेब के बगीचों और हिमालय के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है; यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य और भारत के शुरुआती स्कीइंग स्थलों में से एक होने के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है, खासकर अपनी ऊंची चोटी हाटू पीक और आसपास की शांत घाटियों के लिए। नारकंडा का बाज़ार उतना ही है जितनी की एक सड़क। इस बाज़ार में छोटी-छोटी दुकानें हैं जिनमें छोले-पूरी से लेकर कीटनाशक दवाइयां मिलती हैं। मुख्य विशेषताएँ : यह स्थान: शिमला से लगभग ६० किमी दूर, समुद्र तल से २७०८ मीटर की ऊंचाई पर स्थित। प्राकृतिक सुंदरता में यहाँ देवदार के जंगल, चीड़ के पेड़, और चेरी व सेब के बगीचे पाए जाते हैं । प्राकृतिक महत्व : भारत के शुरुआती स्कीइंग स्थलों में से एक है। प्रमुख आकर्षण : दर्शनीय : स्थल : नारकंडा की सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक है हाटू शिखर। इस जगह पर हाटू माता का मंदिर है। इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी हाटू माता की भक्त थीं और उन्होंने ही इस मंदिर को बनवाया था। यहां पर आप हिमालय की सभी दिशाओं का दर्शन कर सकते हैं। यह नारकंडा से ६ कि.मी. दूर है। इसके साथ ही इस जगह पर आप स्कीइंग का भी आनंद ले सकते हैं। भीम का चूल्हा : हाटू शिखर के पास में ही भीम का चूल्हा भी है जो कि हाटू मंदिर से ५०० मीटर आगे है। इनके बारे में कहा जाता है कि पांडवों को जब अज्ञातवास मिला था तो वह चलते-चलते इसी जगह पर रूके थे और खाना भी यहीं बनाया था।
ठाणेधार : सेब के बागानों के लिए प्रसिद्ध।
कोटगढ़ घाटी : बर्फ और पहाड़ों के बीच की शांत सुंदरता के लिए जानी जाती है।
रोमांचक गतिविधियाँ में आप स्कीइंग (सर्दियों में), ट्रैकिंग, और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं ।
बताते चले दिए गए उपनाम में इसे ' फलों का कटोरा ' भी कहा जाता है।
संक्षेप में, नारकंडा शिमला के पास एक शांत और प्राकृतिक रूप से समृद्ध स्थान है जो साहसिक गतिविधियों और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने के लिए सैलानियों के लिए एक आदर्श स्थान है। * गतांक से आगे : ५ : हिमाचल पर्यटन नालदेहरा : हिमाचल : गोल्फ कोर्स. वाइसराय लॉर्ड कर्जन की पसंदीदा सैरग़ाह डॉ.सुनीता विदिशा अनुभूति * साल २०१४। हम हिमाचल की यात्रा पर थे। मुझे याद है हमने एक बार नालदेहरा भ्रमण किया था। नालदेहरा हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। यह समुद्र तल से लगभग २२०४ मीटर ७२०० फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित है और अपने शानदार गोल्फ कोर्स और प्राकृतिक नजारों के लिए जाना जाता है। मुख्य आकर्षण नालदेहरा गोल्फ कोर्स : यह भारत के सबसे पुराने और सबसे खूबसूरत गोल्फ कोर्स में से एक है इसे १९०५ में वाइसराय लॉर्ड कर्जन द्वारा बनवाया गया था। यहाँ देवदार और चीड़ के पेड़ों के बीच गोल्फ खेलना एक अद्भुत अनुभव है। भीतर जाने की अनुमति नहीं थी। हमने जालियों से ही तस्वीरें ली थी। वाइसराय लॉर्ड कर्जन इस जग़ह से इतना प्रभावित हुए थे कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम नालदेहरा रख दिया था। पास में ही है तत्तापानी : बहती सतलुज नदी : नालदेहरा से लगभग ४५ मिनट की दूरी पर स्थित, यह स्थान अपने प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों के लिए प्रसिद्ध है। सल्फर युक्त इस पानी में स्नान करना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। हिमाचल प्रदेश के तत्तापानी के पास सतलुज नदी बहती है। यह स्थान इसी नदी के दाहिने किनारे पर बसा हुआ है और अपने प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों के लिए प्रसिद्ध है। शैली पीक : यह नालदेहरा की सबसे ऊँची चोटी है। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह जगह जन्नत है और यहाँ से हिमालय की चोटियों के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। हिमाचली संस्कृति कोगी गाँव : यदि आप हिमाचली संस्कृति और पारंपरिक जीवन को देखना चाहते हैं, तो कोगी गाँव ज़रूर जाएँ। यहाँ ' कोगी माता ' का प्रसिद्ध मंदिर भी है। सबसे अच्छा समय : गर्मियों में मार्च से जून : मौसम बहुत सुहावना होता है और घूमने के लिए सबसे उत्तम है। सर्दियों में दिसंबर से फरवरी : यदि आप बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं, तो सर्दियों का समय चुनें।कैसे पहुँचें निकटतम हवाई अड्डा : शिमला का जुब्बरहट्टी हवाई अड्डा लगभग ४४ किमी दूर । निकटतम रेलवे स्टेशन : शिमला रेलवे स्टेशन लगभग २२ किमी दूर । सड़क मार्ग द्वारा: शिमला या चंडीगढ़ से नालदेहरा के लिए आसानी से टैक्सी या बसें मिल जाती हैं। * * गतांक से आगे : ६ : हिमाचल पर्यटन मशोबरा : हिमाचल : . भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक रिट्रीट : शक्ति डॉ.सुनीता विदिशा अनुभूति. * शिमला से सिर्फ १३ किमी दूर बसा मशोबरा हिमाचल प्रदेश का एक ऐसा शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है, जहाँ पहुँचते ही देवदार, ओक और चीड़ के घने जंगलों के बीच ठंडी पहाड़ी हवा आपका स्वागत करती है। अगर आप हिमाचल में सुकून, हरियाली और शांत माहौल तलाश रहे हैं, तो मशोबरा आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक रिट्रीट : ब्रिटिश शासन के दौरान साल १८५० में मशोबरा को एक शांत रिट्रीट के रूप में विकसित किया गया था। आज भी यहाँ पुराने ब्रिटिश दौर की झलक देखने को मिलती है। यही नहीं, यह भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक रिट्रीट भी है, जहाँ राष्ट्रपति साल में कम से कम एक बार आते हैं। मशोबरा एशिया के सबसे बड़े वाटरशेड क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जो शिमला शहर को पानी सप्लाई करता है। राष्ट्रपति निवास यानी रिट्रीट बिल्डिंग १७३ साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत है, जो अपनी वास्तुकला और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। वहीं क्रैग्नानो पार्क अपनी इटालियन शैली की विला, नेचर वॉक और रॉक क्लाइंबिंग के लिए जाना जाता है। महासू देवता मंदिर यहाँ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान माना जाता है, जहाँ स्थानीय लोग बड़ी श्रद्धा से पूजा करते हैं। मशोबरा पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन शिमला है, जो १३ किमी दूर स्थित है। कालका-शिमला टॉय ट्रेन का सफर इस यात्रा को और भी यादगार बना देता है। शिमला से टैक्सी या लोकल वाहन आसानी से मिल जाते हैं। मशोबरा में घूमने के लिए कई शानदार जगहें मौजूद हैं। रिजर्व फॉरेस्ट सैंक्चुअरी ट्रेकिंग और बर्डवॉचिंग के लिए बेहद प्रसिद्ध है, जहाँ हिमालयी पक्षियों की १०० से ज्यादा प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं। चैडविक फॉल्स : चैडविक फॉल्स लगभग ८६ मीटर ऊँचा खूबसूरत झरना है, जो मानसून के दौरान बेहद आकर्षक दिखाई देता है। महासू पीक लगभग २७०० मीटर ऊँची चोटी है, जहाँ से हिमालय की बर्फीली पर्वत श्रृंखलाओं का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। मशोबरा के आसपास भी कई खूबसूरत जगहें मौजूद हैं। कुफरी सिर्फ ५ किमी दूर है, जहाँ स्नो एक्टिविटीज का मजा लिया जा सकता है। नालदेहरा अपने मशहूर गोल्फ कोर्स के लिए जाना जाता है, जबकि फागू अपने सेब के बागानों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ रहने के लिए खूबसूरत होमस्टे, कॉटेज और होटल आसानी से मिल जाते हैं। कैसे पहुँचे : दूरी : सड़क मार्ग से चंडीगढ़ से शिमला तक ११० किमी का सफर ३ से ४ घंटे में पूरा होता है, जबकि दिल्ली से यह दूरी करीब ३४० किमी है। हिमाचल टूरिज़्म की बसें भी नियमित रूप से चलती हैं। मार्च से जून तक यहाँ का मौसम बेहद सुहावना रहता है और तापमान लगभग १५ से २५ डिग्री के बीच रहता है। सितंबर से नवंबर के दौरान पूरी घाटी रंग-बिरंगी दिखाई देती है, जबकि दिसंबर से फरवरी तक यहाँ बर्फबारी का खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलता है। हालांकि भारी बर्फबारी के समय कुछ रास्ते बंद भी हो सकते हैं। * स्तंभ संपादन: शक्ति. शालिनी मंजु प्रिया स्मिता. सज्जा : शक्ति.मंजिता नेहा सीमा अनुभूति * * गतांक से आगे : ६ : हिमाचल पर्यटन. हिमाचल का एक शांत कस्बाई शहर कसौली. * डॉ. सुनीता मधुप अनुभूति कसौली हिमाचल का एक अत्यंत शांत कस्बाई शहर है जो चंडीगढ़- कालका के बहुत नजदीक है। बल्कि कहे तो कालका से कसौली की पहाड़ियां गर्मियों में साफ़ दिखती है। कभी सर्दियों में बर्फ़ गिरती है तो पंजाब चंडीगढ़ से आये सैलानियों की अच्छी ख़ासी तादाद जमा हो जाती है। आप कल्पना नहीं कर सकते जिस मई जून के महीने में कालका के मैदानी इलाके की तपिश हमें परेशान करती है वहीं ३० से ३५ किलोमीटर की ऊंचाई पर गयी रात सर्दी से बचने के लिए ओढ़ने के कम्बल की जरुरत पड़ जाती है। दूरी : आप दो तीन दिन के अल्प समय में घूमने का आनंद उठा सकते है। चंडीगढ़ शिमला मार्ग में चंडीगढ़ से ६२ किलोमीटर और कालका से मात्र ३५ किलोमीटर दूर प्रकृति की गोद में ब्रिटानिया काल में बसाया गया यह शहर अभी भी आपको किसी ब्रिटिश कस्बें की याद दिला देगा। हिमाचल के प्रवेश द्वार परमाणु से प्रवेश करते ही हमें चीड़ ,देवदार के सिलसिले मिलने शुरू हो जाते है। कुछेक घंटे उपरांत ही आप घुमावदार रास्तें तय करते हुए आप कसौली पहुंच जाते है। पंजाब चंडीगढ़ रहने वालों के लिए यह तुरंत पहुँचने वाली मनपसंदीदा पर्वतीय सैरगाह है जहां वीक एंड में पहुंचने वाले स्थानीय सैलानिओं की भीड़ अक्सर जमा होती है। देखने लायक यहां घाटियों की तरफ़ उतरती हुई सड़कें। सडकों के दोनों ओर पुरानी शैली में बनी कॉटेज नुमा घर ,कसौली क्लब ,टीबी सनोटोरियम ,लोअर अपर मॉल रोड ,मंकी पॉइंट है जहां से देवदारों की गंध वाली ताजी हवा के झोकों को अनुभूत किया जा सकता है। मंकी पॉइंट : शहर का सबसे ऊंचा स्थान जहाँ भगवान हनुमान को समर्पित एक मंदिर है। यहाँ से चारों ओर की घाटियों का अद्भुत नज़ारा दिखता है। क्राइस्ट चर्च : 19वीं सदी का यह चर्च अपनी गोथिक वास्तुकला और हरे रंग की छत के लिए पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। गिल्बर्ट ट्रेल : प्रकृति प्रेमियों और पैदल चलने वालों (hikers) के लिए चीड़ के पेड़ों के बीच एक बेहतरीन और शांत रास्ता। टिम्बर ट्रेल : यहाँ केबल कार की सवारी से पहाड़ों और गहरी घाटियों के विहंगम दृश्य का अनुभव किया जा सकता है कसौली की ख़ोज में यहीं पर हिंदुस्तान टाइम्स के सम्पादक रहें देश की चर्चित हस्ती खुशवंत सिंह का बंगला भी आपको दिख जायेगा। ये वही खुशवंत सिंह है जिन्होंने कई किताबें लिखी हैं और 'बुरा मानों या भला ' कॉलम के लिए खुल कर अपनी बेवाक विवादित टिपण्णियों के लिए विशेष कर जाने जाते है। फ़िल्म १९४२ लव स्टोरी, माया मेम साहेब का लोकेशंस : कसौली की गलियों में चहलकदमी करते हुए शायद आपको अनिल कपूर अभिनीत फ़िल्म १९४२ लव स्टोरी माया मेम साहेब के लोकेशन्स जैसा दृश्य भी मिल जाए। अभी भी पगड़ी वाले सिपाही आपको देखने में मिल जायेंगे। अभी तक़ वो बंगला याद है जहाँ से माया मेम साहेब झाँकती हुई मिल जायेंगी । रहने के लिए आपको यहां छोटे मध्यम स्तर के होटल्स ,लॉज ,गेस्ट हाउस भी पर्याप्त संख्या में मिल जायेंगे। यहां खाने पीने की भी कोई कमी नहीं हैं तो आप शीत काल में अपना कुछ समय कसौली की वादियों में व्यतीत कर सकते है। * संपादन शक्ति शालिनी प्रिया सीमा मंजिता हिमाचल डेस्क . कसौली, आगे जारी ------------ ये मेरा गीत : जीवन संगीत : सफ़रनामा : चला जाए सपनों के आगे कहीं : पृष्ठ : ६. --------- संपादन. फ़िल्म : मिलाप. १९७२. सितारे : शत्रुघ्न सिन्हा. रीना रॉय. गाना : कई सदियों से कई जन्मों से तेरे प्यार को तरसे मेरा मन गीत : नक़्श लायलपुरी. संगीत : बृज भूषण. गायक : मुकेश. गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं ⭐ * ---------- चला जाए सपनों के आगे कहीं : सफ़रनामा : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७. --------- संपादन * शक्ति. मीना रितु प्रिया अनभूति |















































































It is an interesting travelogue page everyone will like visiting page
ReplyDeleteToo good and nice
ReplyDelete