Karoge Yaad To Har Baat Yaad Aayegi : Dainik
©️®️M.S.Media.
Shakti Project.
Radhika Krishna Rukmini.
Karm.
&.
कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
In association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Presentation.
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Karoge Yaad To Har Baat Yaad Aayegi
Volume : 6. Series : 1.
a Social Media.Web Blog Magazine Philosophical Page.
Dainik.Address.
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Karoge Yaad To Har Baat Yaad Aayegi.
* करोगे याद तो हर बात याद आएगी : आवरण पृष्ठ : कोलाज : मास : जनवरी. * करोगे याद तो हर बात याद आएगी *
फोर स्क्वायर होटल : रांची :समर्थित :आवरण पृष्ठ. विषय सूची मार्स मिडिया ऐड:नई दिल्ली. ⭐ विषय सूची : पृष्ठ :०. ⭐ आवरण पृष्ठ :०. विषय सूची : पृष्ठ :० हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०. हिंदी अनुभाग : दैनिक / मासिक. शक्ति लेखकीय : हम चार : पृष्ठ : ० हिंदी अनुभाग : दैनिक / मासिक. शक्ति संशोधक : हम चार : पृष्ठ : ० राधिका कृष्ण रुक्मिणी मीरा : दर्शन : पृष्ठ :०. कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे : प्रारब्ध : पृष्ठ : ०. कृष्ण दर्शन. संभवामि युगे युगे : प्रारब्ध : शक्ति लिंक : पृष्ठ : ०. राधिकाकृष्ण : महाशक्ति : इस्कॉन डेस्क : नैनीताल. पृष्ठ : ० / १. रुक्मिणीकृष्ण : महाशक्ति : दर्शन दृश्यम : विचार डेस्क : नैनीताल. पृष्ठ : ० / २ . मीराकृष्ण : महाशक्ति डेस्क : मुक्तेश्वर : नैनीताल. पृष्ठ : ० / ३. त्रिशक्ति जीवन दर्शन विचार धारा : पृष्ठ : १. त्रिशक्ति जीवन दर्शन विचार धारा लिंक : पृष्ठ : १. त्रि - शक्ति : दर्शन. पृष्ठ : १ / ०. त्रिशक्ति : विचार : दृश्यम : पृष्ठ : १ / ० . त्रिशक्ति : शक्ति डेस्क : सम्यक वाणी : नैनीताल : पृष्ठ : १ / १. त्रिशक्ति : लक्ष्मी डेस्क : सम्यक दृष्टि : कोलकोता : पृष्ठ : १ / २. त्रिशक्ति : सरस्वती डेस्क :सम्यक कर्म : जब्बलपुर : पृष्ठ : १ / ३. महाशक्ति : जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १ / ४. नव जीवन विचार धारा : पृष्ठ : १ / ५. सम्पादकीय : पृष्ठ : २. सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०. आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति : पृष्ठ : ३. तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४. विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५. ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ :६. यादें न जाए : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७. यादें न जाए : कला दीर्घा : रंग बरसे : पृष्ठ : ९. समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११. यादें न जाए : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १२. यादें न जाए : शुभकामनाएं : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १३. आपने कहा : चलते चलते : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १४. * ⭐ हिंदी अनुभाग : दैनिक / मासिक पृष्ठ : ० * शक्ति लेखकीय : हम चार : पृष्ठ : ० * * शक्ति प्रिया शालिनी मधुप रेनू शब्दमुखर |
शक्ति संशोधक
हम चार : पृष्ठ : ०
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मूर्ति के आगे शीश झुकाना और बाहर सच को कुचलना , ऐसी पूजा से बेहतर ज्ञान का प्रश्न खड़ा होना है।
बसंत पंचमी महाशक्ति सरस्वती का स्मरण कराती है, पर यह विडंबना ही है कि शब्दों की देवी की पूजा करने वाला समाज शब्दों की मर्यादा सबसे तोड़ रहा है। भाषा हिंसक हो चली ही है। चाहे वह राजनीति हो सोशल मीडिया हो सार्वजनिक विमर्श।
आज जब ऐसे ही बैठे-बैठे सोचने लगी तो इतनी सारी बातें मन में कोंध गई कि सोचा की लिखकर ही इन बातों से मुक्त हुआ जा शब्दमुखर की लेखनी अबाध चल पड़ी।
नया साल केवल तारीखों का परिवर्तन नहीं है, यह मनुष्य को स्वयं से साक्षात्कार का अवसर देता है।
बीता हुआ वर्ष अपने साथ अनुभवों का बोझ छोड़ जाता है- कुछ ऐसे, जिन्हें याद कर मुस्कान आती
और कुछ ऐसे, जिन्हें याद कर मन भारी हो उठता है। पर नया साल उन सब पर एक विराम लगाकर थीरे से कहता है अब आगे बढ़ो. हल्के मन से।
जो बीत गया, उसे बोझ न बनाओ मन में, नया सूरज पूछता है - अब तुम क्या बनोगे ?'आज का समय तेज है, प्रतिस्पर्धी है, पर भीतर से कहीं ने कहीं थका हुआ भी है। हमने साधन हो बढ़ा लिए पर संवेदनाएँ सिकुड़ती जा रही है। ऐसे में नया साल हमे यह याद दिलाने आना है कि सच्ची प्रगति केवल आगे बढ़ने से नहीं भीतर बेहतर बनाने से होती है।
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स्तंभ संपादन : डॉ.अनु क्षमा प्रीति
स्तंभ सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा अनुभूति
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स्पीति का अर्थ है ' मध्यभूमि ' ( भारत और तिब्बत के बीच ) और यह भारत के सबसे कम आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है जो सर्दियों में शेष दुनिया से कट जाती है, लेकिन अटल टनल के कारण अब लाहौल जाना आसान हो गया है। स्पीति घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। हम सब सबसे पहले टोबो पहुंचे।
यात्रा : लघु फिल्म : शक्ति भावना
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रीता स्मिता
वाराणसी डेस्क.
वाराणसी डेस्क.
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मंगल अनंत शिव.शक्ति
शुभकामनाओं के साथ
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फोर स्क्वायर होटल बैंक्वेट : रांची : समर्थित : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली. * दैनिक पत्रिका अनुभाग * सुबह सवेरे : शाम. पृष्ठ : ०. * राधिकाकृष्णरुक्मिणी सदा सहायते. |
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आत्म दीपो भवः
कृष्ण : कर्म : कृण्वन्तो विश्वमार्यम.
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महाशक्ति दिवस : ४.मूलांक : ४.
मास : माघ : कृष्ण पक्ष : प्रतिपदा.
विक्रम संवत :२०८२.शक संवत : १९४७.
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दिव्य अनंत लक्ष्मी नारायण शिव शक्ति.
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हरे कृष्णा गोविन्दाय नमः
*
स्वर्णिका ज्वेलर्स.निदेशिका.शक्ति तनु.आर्य रजत.सोहसराय.बिहार शरीफ.समर्थित.
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त्रिशक्ति दर्शन.पृष्ठ : १.
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महाशक्ति मीडिया प्रस्तुति
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शक्ति : महाशक्ति दर्शन : पृष्ठ : १ / १ .
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शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्य.
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महाशक्ति.नैना देवी डेस्क.
नैनीताल.प्रादुर्भाव वर्ष : १९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना : जुलाई.दिवस :४.
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सम्पादित.
शक्ति नैना @ डॉ.अनु सुनीता प्रिया.
*
नवशक्ति समर्थित
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ये जिंदगी मेरे घर आना
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ये जिंदगी उसी की है
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मनुष्य की अपनी चेतना,
अपने कर्म, और अपनी समझदारी होती है
जो उसके जीवन का निर्माण करती है सदैव कर्म और प्रार्थना
सदैव साथ होनी चाहिए
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रिश्ते नाते.
एक अच्छी किताब कितनी भी पुरानी हो जाए उसके ' शब्द ' नहीं बदलते,
अच्छे ' रिश्ते ' की भी यही ख़ासियत है.
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फ़िक्र और फायदा
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साथ वही चलते है, माधव !
साथ वही चलते है, माधव !
जिन्हें अपनें फ़ायदे की जग़ह अपनों की फ़िक्र ज्यादा होती है
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ये जिंदगी तेरा ही दिया गया उपहार है
जी रहीं हूँ इसलिए कि तुमने अपनी सांसें दी मुझे उधार है
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शक्ति.प्रिया मधुप रितु अनुभूति
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सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : साध्वी :छाया.
*
सन्दर्भ विचार : माया : छाया
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हमराज़
ख़ुश रहना है गर जिंदगी में तो हमशक्ल को ही हमराज बनने दो
गर मिल न पाया हयात में कोई तुम्हारी तरह तो अपनी जिंदगी
के राज को अपने साथ ही रहने दो
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कल आज और कल
*
अतीत की मधुर यादों को अपने ह्रदय में बसा कर
अपनी तल्ख़ यादों से सबक़ ले कर
हम सभी मेरे अपनों के सुनहरे भविष्य की कामना
के लिए आए अपने वर्तमान को सुधारें और संवारें प्रिय
*
भाग न बांटें कोई
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सहिष्णु बनें अपने तथा स्वयं के लिए
साथ व संवाद होना जरुरी है , निस्वार्थ ही सही
कभी न कभी सहयोग मिल ही जाएगा यदि आप संवेदन शील हो
*
सन्दर्भ विचार : माया : मधुप नवीन : छाया
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@ डॉ अनु शालिनी मधुप रेनू शब्द
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तोरा मन दर्पण कहलाए
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तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है आपका मन ही है ! प्रिय
ये आपका मन ही जो आपको भली भांति समझता है जानता है
यह जितना ' निर्मल ' और ' निष्पाप ' होगा,
सारी ' खुशियाँ ' व सारे ' तीर्थ ' उतने ही आपके पास होंगे.
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सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात
*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति : रितु : छाया
*
अंतर्मन अपने गुण दोषों
के आधार पर ही
अपने लिए कहे गए लोकोक्तियों की विवेचना करता है,
यह आपकी ' वाणी ' पर ही निर्भर करता हैं कि अप्रिय सत्य को
कितने प्रिय , व्यक्तिगत व प्रभावी माध्यम से उसे समझा पाते हैं
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त्रिशक्ति : लक्ष्मी डेस्क : सम्यक दृष्टि : कोलकोता : पृष्ठ : १ / २ .
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टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग : शक्ति.
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शक्ति : महालक्ष्मी : दर्शन : पृष्ठ : १ / २ .
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विष्णु प्रिया लक्ष्मी : दरबार : दर्शन :
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पंकज वासिनी देवसु पूजयति सतगुण वर्षनी
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लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्य
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शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २ .
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महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
©️®️
M.S.Media.
*
तुम्हारे लिए
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शक्ति : महालक्ष्मी जीवन दर्शन : पृष्ठ : १ / २.
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महालक्ष्मी डेस्क.कोलकोता.
प्रादुर्भाव वर्ष.१९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति.नैना प्रिया डॉ.सुनीता सीमा.
*
सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति: मीना :छाया.
*
सादगी : अच्छाई
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माना कि सादगी का दौर नहीं है
मगर सादगी से अच्छा कुछ और नहीं है
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सुख दुःख : अहंकार : आस्था
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सुख इतना भी न हो कि मन अहंकार में समाहित हो जाए
और दुःख इतना भी न देना कि मेरी तुममें आस्था ही चली जाए
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तन मन धन सब है तेरा
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जिस रिश्तें में ह्रदय का प्यार व सम्मान हो
तन मन धन का समर्पण वहीं हो जाता है
चाहे रिश्तें का कोई नाम हो
@ शक्ति शालिनी सीमा रितु मधुप
*
स्पर्श : प्रेम व पवित्रता
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जहाँ प्रेम है तो वहाँ छूना भी पवित्र है
जहाँ नहीं है वहाँ देखना भी पाप है
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सन्दर्भ विचार : माया : शक्ति:साध्वी :छाया.
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मुस्कुराकर माफ़ कर दूं,
हर ख़ता जमाने की...
विचार माया : शक्ति रितु छाया
*
सिर्फ तुम्हारे लिए
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अकेलेपन में हम
अपने भीतर ख़ुद से ज़्यादा तुम्हें साँस लेने देते हैं
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शक्ति प्रिया शालिनी सुनीता सीमा
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प्रथम मिडिया शक्ति.प्रस्तुति :
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शक्ति.तनु.आर्य.रजत निदेशक : स्वर्णिका ज्वेलर्स : सोहसराय : बिहार शरीफ समर्थित
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सम्पादकीय : पृष्ठ : २
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मातृ शक्ति
निर्मला सिन्हा
प्रधान आचार्या
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प्रेरणा शक्ति
१९४० - २०२३
जीवन : कर्म : संस्कार के लिए स्मृति विशेष
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प्रधान शक्ति संपादिका.
नव शक्ति.
श्यामली : डेस्क : शिमला.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९९९. संस्थापना वर्ष : २०००. महीना : जनवरी. दिवस :५.
शक्ति.शालिनी रेनू नीलम 'अनुभूति.
*
कार्य कारी सम्पादिका
*
शक्ति प्रिया सुनीता शक्ति प्रिया
नैना देवी.नैनीताल डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७०.संस्थापना वर्ष : १९९६.
महीना:जनवरी: दिवस :६.
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*
सहायक
कार्यकारी शक्ति.सम्पादिका.
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हरे कृष्णा गोविन्दाय नमः
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तारे जमीन पर : करोगे याद :गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
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संपादन
शक्ति
वाराणसी डेस्क.
शक्ति नीलम अनुभूति
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शक्ति सम्पादकीय आलेख.
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राष्ट्रीय बालिका दिवस : २४ जनवरी २०२६
शक्ति आरती अरुण
आज समस्त राष्ट्र १९ वां राष्ट्रीय बालिका दिवस मना रहा है जो भारतीय समाज की समस्त बेटियों के प्रति सम्मान, सुरक्षा, अधिकार, पहचान और सुरक्षा का प्रतीक है।
किसी भी सभ्य और सुसंस्कृत समाज की यही पहचान है कि उसकी बेटियां कितनी शिक्षित, सुरक्षित, विकसित और समृद्ध हैं और इसके लिए सिर्फ कानून ही नहीं, हम भी जिम्मेदार हैं। तो आइए, हम आज संकल्प लें कि बेटियों को शिक्षित बनाने के साथ साथ उसके अस्तित्व और अधिकारों की सुरक्षा हर कीमत पर करेंगे।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता : भारतीय सभ्यता संस्कृति की मौलिक विशिष्टताओं में से एक विशिष्टता यह भी है कि हमारे यहां सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में नारी को देव तुल्य स्थान देते हुए कहा गया है कि,यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता अर्थात् जहां नारियां समादरित और पूज्य हैं वहां देवता विचरण करते हैं अर्थात् वहां की व्यवस्था परिष्कृत, परिमार्जित और मर्यादित होती है। उस परिवार और समाज की संतानें श्रेष्ठ और संस्कारवान होती हैं।
शिक्षित,सभ्य और सुसंस्कृत नारियां ही एक श्रेष्ठ परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकती हैं।
इस सन्दर्भ में हम एक रोचक और सच कथन को बताना चाहेंगे कि अपने एक वक्तव्य में नेपोलियन ने कहा था,' तुम हमें अच्छी माएं दो,हम तुम्हें एक मजबूत और सशक्त राष्ट्र देंगे ',
अर्थात् एक अच्छी मां ही एक अच्छी बेटी का सृजन करती है और एक अच्छी बेटी जब माॅं बनती है तो एक श्रेष्ठ और संस्कारवान माॅं भी बनती है। इसलिए बेटियों को बचपन से ही सही और सम्यक् शिक्षा देने के साथ साथ अच्छे गुणधर्म सीखाए जाने चाहिए ताकि वह हर सही और ग़लत बातों को समझ सकें।
ए आइ युग में इन्टरनेट में इन्टरनेट डेटा का सही प्रयोग : आज के ए आइ युग में इन्टरनेट ने हमें कहां से कहां पहुंचा दिया है जिसके तनिक भी ग़लत इस्तेमाल से जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकती हैं। आज हर बच्चे बच्चियों के हाथों में मोबाइल फोन है,ए आइ और इन्टरनेट डेटा है जिसके सही इस्तेमाल के लिए माता पिता और शिक्षक को सचेष्ट रहने और अच्छे प्रशिक्षक बनने की नितान्त आवश्यकता है। उनके जीवन की दिशा और दशा के लिए सार्थक प्रयास : इस दिशा में सरकार को भी ऐसे डिवाइस विकसित करने की जरूरत है कि अल्पवयस्क या किशोरवय के बच्चे बच्चियां उसका गलत इस्तेमाल न कर सकें।विशेषकर भारतीय समाज के किशोर किशोरियों में यह बड़ी समस्याओं में से एक है। इसके लिए यांत्रिक तकनीक के साथ साथ मानसिक प्रशिक्षण भी बहुत जरूरी है और तभी हमारी बेटियां सही तरीके से शिक्षित, विकसित और सुरक्षित रह सकती है।
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आज की बेटियां ही कल के सुन्दर,शिक्षित सभ्य, विकसित, समृद्ध और सुरक्षित परिवार, समाज और राष्ट्र की बुनियाद हैं।
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समस्त परिवार,समाज और राष्ट्र को १९ वें राष्ट्रीय बालिका दिवस की हार्दिक बधाईयां एवं शुभकामनाएं।
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संपादन : शक्ति रजनी मानसी कंचन रेनू
सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा अनुभूति तनु
सम्पादकीय शक्ति आलेख
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अपने भीतर जमी हुई रूढ़ियों,भय और मौन को तोड़ना होगा.
सम्पादकीय शक्ति आलेख
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शक्ति.रेनू शब्द मुखर
लेखिका कवियत्री सम्पादिका
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सह : शक्ति प्रिया डॉ सुनीता मधुप
महाशक्ति मीडिया
बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का यह पर्व है, जो ज्ञान, विवेक और रचनात्मक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। किंतु आज यह प्रश्न अनिवार्य हो गया है कि क्या हम वास्तव में ज्ञान की उपासना कर रहे है या केवल उसकी औपचारिक पूजा तक सीमित रह गए हैं ? पीले वस्त्र, पुष्प और मंचीय कार्यक्रमों के बीच ज्ञान का वास्तविक अर्थ कहीं खोता जा रहा है।
| सन्दर्भ : स्केच : डॉ. मधुप : कृति : डॉ. सुनीता |
आज का समाज एक विचित्र विरोधाभास से जूझ रहा है। एक और सूचनाओं का अंबार है, दूसरी और विवेक का अभाव।
सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को वक्ता ती बना दिया है, पर सोचने समझने और है से, बोलने की क्षमता कम होती जा रही है। अफवाह, नफरत और आधी- अधूरी जानकारी को सत्य मान लिया जाता है और तर्क करने वाले को चुप कराने की प्रवृति बढ़ती जा रही है।
ऐसे समय में बसंत पंचमी केवल ऋतु पर्व नहीं, बल्कि चेतावनी है कि यदि ज्ञान मौन हो गया और अज्ञान मुखर, तो समाज का पतन निश्चित है।
भाषा हिंसक हो चली ही है : जब प्रश्न पूछना अपराध बने : और चुप रहना संस्कार, तब समझ लेना बसंत नहीं, पतझर है समाज में। शिक्षा व्यवस्था भी आत्ममंथन के कठघरे में खड़ी है। क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना रह गया है ? नैतिकता, मानवीय संवेदना, सामाजिक सरोकार और स्त्री सम्मान जैसे विषय पाठ्यक्रमों से बाहर क्यों होते जा रहे हैं। हम ऐसी पीढ़ी गढ़ रहें हैं जो तकनीक में दक्ष है, पुर मनुष्यता में कमजोर।
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| शक्ति सरस्वती : फोटो नेट : साभार |
बदलाव शोर से नहीं, चरित्र से आता है : असहमति को शत्रुता में बदल देना आज सामान्य व्यवहार बन चुका है। जहाँ भाषा में जहर घुला और तर्क को कुचल दिया जाए , वहां सरस्वती नहीं रहती ,वहाँ केवल शोर बचता है।
स्त्री असुरक्षा, बाल हिंसा, जातीय और धार्मिक विद्वेष- ये सब हमारे समय की भयावह सच्चाइयां है। प्रश्न यह है कि इतनी पढ़ी-लिखी सभ्यता होने के बावजूद हम इन समस्याओं को क्यों नहीं रोक पा रहे ? इसका उत्तर स्पष्ट है हमने शिक्षा को संवेदना से अलग कर दिया है।
बसंत का पीला रंग ऊर्जा और आशा का प्रतीक है, पर आज यह रंग भी कई बार केवल दिखावे तक सीमित है। खेतों में खिलती सरसों हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति बिना शोर किए अपना धर्म निभाती है, जबकि मनुष्य ज्ञान पाकर भी विवेक खो बैठा है। ' पीले फूल चुपचाप कहते हैं बदलाव शोर से नहीं, चरित्र से आता है।
जहाँ प्रश्न जीवित है.वही बसत है.जहाँ विवेक जागृत है.वहीं सरस्वती : अब समय है कि बसंत पंचमी को आत्मसंतोष का पर्व नहीं, आत्म आलोचना का अवसर बनाया जाए। माँ सरस्वती की सच्ची आराधना वही है जो हमें प्रश्न करना सिखाए अन्याय के विरुद्ध बड़ा होना सिखाए और ज्ञान को केवल स्मृति नहीं जिम्मेदारी बनाए। यदि समाज को सच में बसंत चाहिए तो इसे पहले अपने भीतर जमी हुई रूढ़ियों,भय और मौन को तोड़ना होगा।
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संपादन : शक्ति शालिनी रीता नीलम रजनी
सज्जा शक्ति मंजिता सीमा तनु अनुभूति
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सम्पादकीय शक्ति आलेख : ४ / २
स्त्री की आवाज़ और नैतिकता का दोहरा मापदंड
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सन्दर्भ फोटो : शक्ति श्रेया. हिमाचल
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मूल.शक्ति शालिनी
सह रेनू मधुप अनुभूति
स्त्री को केवल एक 'मौन प्रतिमा' के रूप में देखना क्यों : क्या कारण है कि सदियों पुराने 'कामसूत्र' को हम अपनी विरासत मानते हैं..लेकिन उसी विषय पर आज किसी स्त्री का बोलना हमें विचलित कर देता है..? हाल ही में सीमा आनंद के इंटरव्यू पर आई प्रतिक्रियाएं यह स्पष्ट करती हैं कि हमारा समाज आज भी स्त्री को केवल एक 'मौन प्रतिमा' के रूप में देखना चाहता है..! जब स्त्री घर की वेदी पर अपनी इच्छाओं की बलि देती है, तो उसे 'आदर्श' कहा जाता है..परंतु जब वह अपनी देह, मन और स्वास्थ्य पर अधिकार के साथ बोलती है, तो उसे 'मर्यादा' का उल्लंघन बता दिया जाता है..!
अश्लीलता शब्दों में नहीं बल्कि सुनने वाले के पूर्वाग्रहों में ज्ञान पर एकाधिकार नही हो सकता..विमर्श कभी भी किसी एक लिंग की जागीर नहीं रहा..! अश्लीलता शब्दों में नहीं बल्कि सुनने वाले के पूर्वाग्रहों में होती है और शायद इसे ही ' बीमार दृष्टि ' कहते हैं..! जो परंपराएं दम घोटने लगें, उन्हें बदलना ही संस्कृति को जीवित रखना है..! योग करती स्त्री के चित्रों को विकृत करना हमारी उसी कुंठा का प्रमाण है..जिसे हम ' संस्कार ' की आड़ में छिपाते आए हैं..तो समय आ गया है कि हम ' सभ्य ' होने की परिभाषा बदलें..!
समाज का दोहरापन : जब पुरुष बोले तो 'दर्शन', स्त्री बोले तो ' प्रदर्शन '? स्त्री का बोलना अश्लीलता नहीं बल्कि आपकी सोच का असहज होना है..! जब पुरुष बोले तो 'दर्शन', स्त्री बोले तो ' प्रदर्शन '? यह दोहरापन ही हमारे समाज की सबसे बड़ी बीमारी है। सीमा आनंद जैसी वयोवृद्ध महिला, एक माइथोलॉजिस्ट और प्रोफेशनल स्टोरीटेलर जैसे व्यक्तित्वों को अश्लील कहना दरअसल अपनी संकीर्णता को स्वीकार करना है..!
सीमा जी, ' द आर्ट्स ऑफ सेडक्शन' की लेखिका : नारी शक्ति का निर्धारण : सीमा जी, 'द आर्ट्स ऑफ सेडक्शन' की लेखिका हैं, जो ' पुरस्कार विजेता लेखिका ' भी कहलाती हैं और भारतीय मौखिक परंपराओं पर उनके काम को यूनेस्को से जुड़े प्रोजेक्ट्स से भी जोड़ा जाता है..!
सीमा जी, अपनी कहानियों का उपयोग मनोरंजन, चिकित्सा और सकारात्मक बदलाव के लिए करती हैं। वह अपने इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से यौन सुख से जुड़े मिथकों का खंडन करती हैं और महाविद्याओं और भगवद् गीता जैसे प्राचीन ग्रंथों के रूपकों की व्याख्या भी करती हैं..!
त्याग को संस्कार और थकान को कर्तव्य मानना बंद कीजिए..एक स्वस्थ समाज वही है, जहाँ स्त्री अपनी देह और मन पर बिना किसी डर के बात कर सके..और बदलाव की शुरुआत हमेशा असहजता से ही होती है..!
| शक्ति लेखिका सीमा आंनद |
केवल स्त्री को ही नैतिकता का पाठ : समस्या सीमा जी के वस्त्रों की नहीं, उस ' दृष्टि ' की है..जो सदियों से संस्कार के चश्मे पहनकर केवल स्त्री को ही नैतिकता का पाठ पढ़ाती आई है..! जब तक 'काम' और 'देह' पर विमर्श पुरुषों की कलम से निकला..वह शास्त्र कहलाया..लेकिन जब एक स्त्री ने उसी सहजता और गरिमा के साथ अपनी बात रखी..तो समाज का तथाकथित 'नैतिक ढांचा' चरमराने लगा..!
सीमा आनंद की बातें सच का आईना : सीमा आनंद की बातें ' बोल्ड' नहीं..बल्कि उस सच का आईना हैं..जिसे हमने लोकलाज के संदूक में बंद कर रखा था..! विडंबना यह है कि एक स्त्री का त्याग उसकी नियति मान ली जाती है; उसकी थकान को ' कर्तव्य ' का नाम दे दिया जाता है..लेकिन जैसे ही वह अपने मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक अधिकारों की बात करती है..वह 'कुलघाती' या 'अश्लील' हो जाती है..! सच तो यह है कि..नैतिकता तब नहीं खतरे में पड़ती जब कोई पुरुष विकृत सोच रखता है..बल्कि तब जागती है जब कोई स्त्री मुखर होती है..! आधुनिकता जड़ों को काटना नहीं..बल्कि उन्हें रूढ़िवाद के दीमकों से बचाना है..! एक सजग और स्वस्थ स्त्री का होना ही एक स्वस्थ समाज की पहली शर्त है।
यह असहजता ही बदलाव की आहट है..!
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सज्जा व संपादन : शक्ति नीलम मानसी रीता क्षमा
शक्ति : डॉ अनु सीमा रितु मंजिता
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शक्ति आलेख ४ /४ /
उत्तराखंड की मकर संक्रांति : घुघुती
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डॉ. अनु मधुप
बीना नवीन जोशी
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घुघुती त्यौहार उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली की सजीव झलक प्रस्तुत करता है. यह पर्व बच्चों को प्रकृति, पशु-पक्षियों और पर्यावरण से जोड़ता है. साथ ही यह पारिवारिक एकता, आपसी प्रेम और सामूहिक खुशी का प्रतीक भी है।
उत्तराखण्ड के लोक पर्व मकर संक्रांति के उपलक्ष में आयोजित उत्तरायणी कौतिक ( घुघतिया त्यार ) पर आज गढ़वाल कुमायूँ नैनीताल के हल्द्वानी एवं लालकुआं में सांस्कृतिक रंग बिखेरती परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है
शोभायात्रा में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं और पुरुष कुमाऊँनी पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर शामिल होते हैं शोभायात्रा के दौरान जहां लोगो ने झांकियों पर पुष्पवर्षा होती है , वहीं स्थानीय शोभायात्रा में सम्मिलित लोगो का स्वागत एवं फल आदी वितरित कर करते हैं ।
शोभायात्रा में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं और पुरुष कुमाऊँनी पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर शामिल होते हैं शोभायात्रा के दौरान जहां लोगो ने झांकियों पर पुष्पवर्षा होती है , वहीं स्थानीय शोभायात्रा में सम्मिलित लोगो का स्वागत एवं फल आदी वितरित कर करते हैं ।
शोभायात्रा में उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को दर्शाती विभिन्न झांकियों ने जहां दर्शकों को भाव-विभोर किया, वहीं बाहर से आए कलाकारों ने लोकनृत्य, ढोल-दमाऊ, झोड़ा-चांचरी व छोलिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर देते हैं । इस दौरान स्थानीय बैंड की अपनी धुन बड़ी ही मनभावन होती है।
हालिया शोभायात्रा में श्री केदारनाथ, नंदा देवी, भैरव पूजा, सातूं -आठूं पर्व सहित लगभग ढ़ेर सारी झांकियां होती है । बच्चों और महिलाओं के पारंपरिक नृत्य, ढोल-दमाऊ की धुन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं । कही शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण उत्तराखण्ड के न्याय के देवता श्री गोलू भगवान का डोला होता है , तो कभी कभी श्रद्धालुओं का मन बना राधा-कृष्ण का झूला भी लोगों की उत्सुकता का केंद्र बना रहता है । जानते है इसके पीछे की कहानी
घुघुती की कहानी : उत्तराखंड में चित्तीदार कबूतर को घुघुती कहा जाता है। घुघुती की कहानी दुख और तड़प से भरी है। कभी एक बेफिक्र और खुशमिजाज युवती रही घुघुती की जिंदगी शादी के बाद बदल गई, जब उसे अपने परिवार के प्यार भरे आलिंगन से दूर एक दूर के गांव में रहने के लिए भेज दिया गया।
उसे अपने प्यारे भाई से मिलने की एकमात्र उम्मीद भाई दूज के त्योहार के दौरान ही होती थी।
एक बार, उनके भाई ने त्योहार के अवसर पर उनसे मिलने के लिए घने जंगलों और उफनती नदियों को पार करते हुए एक कठिन यात्रा की। परंपरा के अनुसार, घुघुती को अपने भाई के साथ अनुष्ठान करने से पहले उपवास रखना आवश्यक था। बड़ी उत्सुकता से उन्होंने अपना घर साफ किया और भट्ट की चूड़कनी, चौसा और फानू से सजी एक भव्य पहाड़ी दावत तैयार की। अथक तैयारियों से थककर वे अचानक गहरी नींद में सो गईं।
उसका भाई आखिरकार घर पहुँचा तो उसे घर में असामान्य रूप से सन्नाटा मिला। उसने अपनी बहन को आवाज़ दी, पर कोई जवाब नहीं मिला। अंदर जाकर उसे आराम करते देख उसने उसे परेशान न करने का फैसला किया। अंधेरा होने के बाद घर लौटने के खतरे को देखते हुए, वह चुपचाप अपने लाए हुए उपहार - बाल मिठाई, ऊनी कपड़े, बेडू और घुघुते - वहीं छोड़कर बिना उससे मिले चला गया।
जब घुघुती की नींद खुली, तो उसने अपने भाई द्वारा छोड़े गए उपहार देखे। उसे तुरंत एहसास हुआ: वह उससे मिलने का दुर्लभ अवसर चूक गई थी, और वह बिना भोजन किए ही चला गया था। दुःख से व्याकुल घुघुती फूट-फूटकर रोने लगी और विलाप करते हुए बोली, “मैं एक अभागी बहन हूँ। मेरा भाई भूखा आया था, और मैं सोती रही।”
कहा जाता है कि घुघुती का हृदय इस दुःख को सहन नहीं कर सका। अंततः, वह अपने हृदय के दर्द से विरक्ति हो उठी और मृत्यु के बाद घुघुती चिड़िया के रूप में पुनर्जन्म लिया। आज भी, चिड़िया की मधुर आवाज में घुघुती के विरह और तड़प की कहानी गूंजती हुई मानी जाती है, मानो उसके उदास गीत में उसकी गाथा समाई हो।
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सज्जा व संपादन : शक्ति मानसी कंचन अंजू मनोज
शक्ति : भारती मीना लतिका लक्षिका
शक्ति आलेख : ४ ४ / १
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तेरे मेरे सपने अब एक रंग है
हो जहाँ भी ले जाए राहें हम संग है
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शक्ति शालिनी
सह शक्ति डॉ सुनीता रेनू मंजिता
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हमारी पसंद
शक्ति प्रिया अनुभूति बीना भारती
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फिल्म गाइड. १९६५
सितारे वहीदा रहमान देव आनंद
गाना : तेरे मेरे सपने अब एक रंग है
गीत : शैलेन्द्र संगीत आर डी वर्मन गायक : किशोर कुमार
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
शक्ति आलेख : ४ / १
तेरे मेरे सपने अब एक रंग है, हो जहाँ भी ले जाए राहें हम संग है" यह प्रसिद्ध हिंदी गीत ' गाइड ' १९६५ फिल्म से है, जिसका मतलब है कि हमारे और तुम्हारे सपने अब एक जैसे हो गए हैं, और चाहे रास्ते हमें कहीं भी ले जाएं, हम हमेशा साथ रहेंगे", जो गहरे प्यार, साझेदारी और अटूट रिश्ते को दर्शाता है, जिसमें एक-दूसरे के सुख-दुख को अपनाना शामिल है.
तेरे मेरे सपने अब एक रंग है : इसका मतलब है कि प्रेमी या प्रेमिका के सपने अब एक-दूसरे से जुड़ गए हैं; वे अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही लक्ष्य और भविष्य की कल्पना करते हैं.हो जहाँ भी ले जाए राहें हम संग है": इसका अर्थ है कि जीवन के रास्ते, चाहे वे कितने भी अलग हों या कोई भी दिशा लें , वे हमेशा एक-दूसरे का साथ निभाएंगे, और यह साथ कभी नहीं छूटेगा.
तेरे मेरे सपने अब एक रंग है : इसका मतलब है कि प्रेमी या प्रेमिका के सपने अब एक-दूसरे से जुड़ गए हैं; वे अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही लक्ष्य और भविष्य की कल्पना करते हैं.हो जहाँ भी ले जाए राहें हम संग है": इसका अर्थ है कि जीवन के रास्ते, चाहे वे कितने भी अलग हों या कोई भी दिशा लें , वे हमेशा एक-दूसरे का साथ निभाएंगे, और यह साथ कभी नहीं छूटेगा.
आगे की पंक्तियाँ : तेरे दुख अब मेरे, मेरे सुख अब तेरे इस रिश्ते की गहराई को और स्पष्ट करती हैं, जहाँ एक-दूसरे के दर्द और खुशी को साझा किया जाता है.
शुक्रिया हर उस पल के लिए जिसने मुझे आज 'मैं' बनाया : २०२५, तुमने हमें बहुत कुछ सिखाया..!
शुक्रिया हर उस पल के लिए जिसने मुझे आज 'मैं' बनाया..अलविदा २०२५ : यादों का एक और ख़ूबसूरत सफ़र.. रहा हमारे लिए ! जैसे-जैसे साल २०२५ के आख़िरी सूरज की किरणें ढल रही थीं .मेरा मन पुरानी यादों की एक किताब की तरह खुल गया था ..! यह साल मेरे लिए सिर्फ ३६५ दिन ही नहीं बल्कि अनुभवों का एक ऐसा गुलदस्ता था जिसमें खट्टी-मीठी यादें, कुछ अनकहे सबक और ढेर सारी खुशियाँ शामिल थीं..!
जीवन हमेशा हमारी योजनाओं के अनुरूप नहीं चलता.. क्या खोया और क्या पाया..? इस साल ने हमें सिखाया कि जीवन हमेशा हमारी योजनाओं के अनुरूप नहीं चलता..लेकिन यह जहाँ ले जाता है; वहाँ भी कुछ न कुछ खूबसूरत छिपा होता है..! कुछ ख़्वाब पूरे हुए..तो कुछ ने अगली सुबह के लिए नई उम्मीदें जगाईं और मैंने सीखा कि खुद पर भरोसा करना और मुस्कुराते रहना ही सबसे बड़ी जीत है..
शुक्रिया उन सबका..
मैं उन सभी लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने इस सफर में मेरा साथ दिया..! चाहे वो परिवार की अटूट ताकत हो, दोस्तों की वो बेमतलब की हँसी..या वो अज़नबी..जिन्होंने मुश्किल वक्त में हाथ बढ़ाया। आप सभी ने मेरे २०२५ को बेहद खास बनाया..
नया साल, नई उम्मीदें : बीत गया जो साल, उसे एक मुस्कुराहट के साथ विदा करते हैं, जो आने वाला है कल, उसका बाहें फैलाकर स्वागत करते हैं। नया साल, नई उम्मीदें अब समय है २०२६ की दहलीज़ पर कदम रखने का..!
मैं अपने साथ २०२५ की गलतियों को नहीं, बल्कि उनसे मिले ढेर सारे सबक को लेकर जा रही हूँ..! आने वाले साल में मेरी कोशिश रहेगी कि मैं और भी बेहतर इंसान बनूँ, अपनों के और करीब रहूँ और अपने सपनों को नई उड़ान दूँ..! अलविदा . २०२५ .! तुमने मुझे बहुत कुछ दिया..! स्वागत है २०२६ ..! एक बार फिर..हम तैयार हैं नई कहानियाँ लिखने के लिए..! आप सभी को नव वर्ष की ढेर सारी अग्रिम शुभकामनाएँ !
शक्ति शालिनी
कवयित्री / लेखिका / सम्पादिका
सज्जा व संपादन : शक्ति रीता माधवी तनु प्रीति
शक्ति डॉ अनु मानसी कंचन मीना ति शालिनी प्रीति.
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शक्ति आलेख : ४ / २
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करोगे याद तो हर बात आयेगी
तेरी मेरी दोस्ती प्यार में बदल गयी
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एच.जी. वेल्स : द कंट्री ऑफ़ द ब्लाइंड : न्यूनेज़
तेरे मेरे जीवन की : आंशिक कहानी : अंधों का देश :
शक्ति आलेख शक्ति प्रिया मधुप
सह : शक्ति सुनीता अनुभूति
एच.जी. वेल्स द कंट्री ऑफ़ द ब्लाइंड की प्रसिद्ध कहानी मेरे जीवन की प्रेरणा दायी हैं। कुछ कुछ मेरे जीवन के परिदृश्य में घटता हुआ भी। जब आप उनको समझा नहीं सकते। और लोग आपको नहीं समझ सकते है तो ढ़ेर सारी दिक्क्तें होती हैं। थोड़ा समय से आगे होते हैं।
अपने जीवन काल के ५० से ६०के दशक में जीवन का काल चक्र क्रम में इस तरह घूमा की एच.जी. वेल्स , उनकी रचना द कंट्री ऑफ़ द ब्लाइंड : न्यूनेज़, उसकी प्रेमिका तथा वो पागल, सनकी अंधविश्वासी हकीम बरबस ही याद आ जाता है।
फिर इतिहास गवाह है समाज उनकी अच्छी परीक्षा लेता है, जो थोड़े पृथक होते हैं ।
जिसमें एक आँख वाले व्यक्ति न्यूनेज़ की कहानी है जो ऐसे देश में पहुँच जाता है जहाँ सभी लोग अंधे होते हैं, और वे उसे आँख वाला कहकर अजीब समझते हैं और उसकी दृष्टि पर संदेह करते हैं, जो कहानी में 'अंधों के हाथ' उनकी सामूहिक शक्ति और विश्वास और एक आँख वाले व्यक्ति के संघर्ष को दर्शाती है।
तेरी मेरी कहानी : मुझे याद है कहानी में न्यूनेज़, एक पर्वतारोही, एंडीज पहाड़ों में भटककर एक छिपी घाटी में पहुँच जाता है, जहाँ के सभी लोग जन्म से अंधे होते हैं। वहाँ दिन में सोते थे और रात्रि में काम करते थे। घरें भी अजीब शक्लों में बनी थी।
देखने' का अर्थ: वहाँ के अंधे लोग ' देखने ' का अर्थ स्पर्श और सुनने से समझते हैं। जब न्यूनेज़ कहता है कि वह ' देख ' सकता है, प्रकृति को ,इसकी खूबसूरती को ,तो लोग उसे पागल या भ्रमित मानते हैं।
अंधों का हाथ सामूहिक शक्ति : अंधे लोग अपनी 'अंधता' को सामान्य मानते हैं और न्यूनेज़ की 'दृष्टि' को एक गड़बड़ी समझते हैं। वे उसे ' ठीक ' करने के लिए उसके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा वे एक अंध व्यक्ति के साथ करते हैं, उसे अँधेरे में रहने पर जोर देते हैं और उसकी आँखों की रोशनी पर संदेह करते हैं, जिसे मनोवैज्ञानिक कंडीशनिंग जैसा कहा जा सकता है।
वहां उसकी मुलाकात एक युवती से होती है जिससे उसे भावनात्मक लगाव भी हो जाता है। जहाँ सभी लोग अंधे हैं; वह मेडिना-सारोते नामक युवती से प्रेम करता है, जो उसे अपनी दृष्टि खोने और गांव के अनुरूप ढलने के लिए कहती है। बात शादी तक़ भी पहुँचती है।
लेकिन वहां के सनकी अंधविश्वासी नीम हकीम की सलाह अनुसार शादी के पूर्व उसे अपनी आँखें निकलवानी होगी।
प्रेयसी वही छूट गयी घाटियों में जहाँ विशेष ज्ञान का संरक्षण करने वाला हकीम इतना दकियानूसी और अंधविश्वासी होगा वहां अन्य की इलाज की बात ही बेमानी है।
एक, आँख वाले न्यूनेज़ का संघर्ष: के लिए यह पीड़ादायक होता है क्योंकि वह ' देख ' सकता है, लेकिन कोई उसकी बात पर विश्वास नहीं करता। अंत में, वे उसकी आँखों को निकालने और उसे अंधा करने का फैसला करते हैं ताकि वह ' सामान्य ' हो सके, जो उसकी व्यक्तिगत इच्छा के विरुद्ध होता है।
और अंत में अपनी अनमोल दृष्टि जो उसे सर्वस्व देखने की शक्ति प्रदान करती है के लिए वह अपने प्रेम और उस अंध देश के परित्याग करने का निर्णय भारी मन से कर लेता है।
जब समस्त रात में कार्य करते हुए थके लोग आम दैनिक से हटकर दिन में सो रहें थे तब वह भारी मन से पर्वत का आरोहण कर रहा था। कभी कभी उसने मुड़ कर पीछे नीचे देखा ....उसकी प्रेमिका छूट गयी थी। यह कहानी दृष्टि, सामान्यता और समाज के दबाव पर गहरा विचार प्रस्तुत करती है, जहाँ बहुमत का 'अंधापन' अल्पसंख्यक की दृष्टि पर हावी होने लगता है।
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फोटो : कोलाज : शक्ति प्रिया मधुप नैना अनुभूति
स्तंभ संपादन : शक्ति डॉ. अनु शालिनी रेनू माधवी
सन्दर्भ आलेख सज्जा : शक्ति सीमा अनीता स्मिता रंजीत नैना
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संदर्भित गाना
मेरी आपकी पसंद
शक्ति रितु तनु मीना भारती
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फिल्म : समझौता. १९७३
गाना : समझौता ग़मों से कर लो
रेत के नीचे जल की धारा
हर सागर का यहाँ किनारा
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सितारे : शत्रुघ्न सिन्हा. योगिता वाली. अनिल धवन.
गीत : इंदीवर. संगीत : कल्याण जी आनंद जी. गायिका : लता.
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
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नया साल : बीते बोझ से मुक्ति,शक्ति आलेख : ४ / १
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शक्ति. रेनू आलेख
रिश्तों की प्यार भरी मर्यादा और उम्मीदों की नई रोशनी
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शक्ति.प्रिया रेनू मधुप शालिनी
आज जब ऐसे ही बैठे-बैठे सोचने लगी तो इतनी सारी बातें मन में कोंध गई कि सोचा की लिखकर ही इन बातों से मुक्त हुआ जा शब्दमुखर की लेखनी अबाध चल पड़ी।
नया साल केवल तारीखों का परिवर्तन नहीं है, यह मनुष्य को स्वयं से साक्षात्कार का अवसर देता है।
बीता हुआ वर्ष अपने साथ अनुभवों का बोझ छोड़ जाता है- कुछ ऐसे, जिन्हें याद कर मुस्कान आती
और कुछ ऐसे, जिन्हें याद कर मन भारी हो उठता है। पर नया साल उन सब पर एक विराम लगाकर थीरे से कहता है अब आगे बढ़ो. हल्के मन से।
जो बीत गया, उसे बोझ न बनाओ मन में, नया सूरज पूछता है - अब तुम क्या बनोगे ?'आज का समय तेज है, प्रतिस्पर्धी है, पर भीतर से कहीं ने कहीं थका हुआ भी है। हमने साधन हो बढ़ा लिए पर संवेदनाएँ सिकुड़ती जा रही है। ऐसे में नया साल हमे यह याद दिलाने आना है कि सच्ची प्रगति केवल आगे बढ़ने से नहीं भीतर बेहतर बनाने से होती है। पुराने दुखों को अनदेखा कर दो, वह कहता है , उन्हें स्वीकारों ,समझो और उनसे सीखो। क्योंकि जो पीड़ा हमें परिपक़्व बनाती है वही भविष्य में हमारी सबसे बड़ी ताक़त बनती है।
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गतांक से आगे : १
मित्र वही जो गिरने पर थामे हाथ, भीड़ में नहीं, एकांत में समझाए।
दर्द अगर समझ बन जाए वही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है :
इस नए साल की सबसे बड़ी आवश्यकता है - नई ऊर्जा। ऐसी ऊर्जा जो क्रोध से नहीं, संवेदनशीलता से जन्म ले। जो आरोपों से नहीं, आत्ममंथन से विकसित हो। जब मन शांत होता है, तभी समाज में सौहार्द संभव होता है।
रिश्तों की बात हो और मित्रता का उल्लेख न हो, तो संवाद अधूरा रह जाता है। लंबे समय की मित्रता विश्वास की नींव पर टिकी होती है। यदि ऐसे रिश्ते में कभी कोई भूल हो जाए, तो उसे सार्वजनिक करना, उसे चटक देना - मित्रता नहीं, उसके अपमान के समान है।
मित्र वही जो गिरने पर थामे हाथ, भीड़ में नहीं, एकांत में समझाए।
सच्चा मित्र वही होता है जो गलती गिनाने के बजाय उसे दोहराने से रोके। जो साथ छोड़ने में नहीं, सुधार करने में विश्वास रखे। जो व्यक्ति छोटी-सी बात पर किसी और को नये मित्र मिलने पर पुरानी मित्रता तोड़ देता है वह न मित्रता की मर्यादा समझता है और न स्वयं मित्र चनन योग्य होता है।
जो निभा न सके मौन में भी रिश्ता, वह शोर में साथ होने का दावा कैसे करे? नया साल हमें यह सिखाने आता है कि रिश्ते अधिकार से नहीं, सम्मान और संवाद से निभते हैं। चाहे परिवार हो, मित्रता हो या कार्यक्षेत्र संयम, संवेदनशीलता और समझ हर संबंध की प्राणवायु हैं। आज आवश्यकता है. कि हम तुलना छोड़ें और संतोष अपनाएँ। ईर्ष्या नहीं, प्रेरणा लें। हर व्यक्ति की यात्रा अलग है और हर संघर्ष का समय भी। ....
हर किसी का आकाश अलग-अलग है, फिर क्यों किसी और के सूरज से जलन ? नया साल हमें यह अवसर देता है कि हम नकारात्मकता को विदा करें -न शिकायत के साथ, बल्कि समाधान की सोच के साथ। क्योंकि आशा कोई भ्रम नहीं, यह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।
जहाँ उम्मीद साँस लेती है, वहाँ अंधकार ठहर नहीं पाता।' आइए इस नए साल में हम यह संकल्प लें कि हम रिश्तों को निभाएँगे तोड़ेंगे नहीं। हम गलतियों को सुधारेंगे- उछालेंगे नहीं। हम आगे बढ़ेंगे-पर अपनों को साथ लेकर । क्योंकि नया साल तभी सार्थक होगा जब हम बेहतर इंसान बनेंगे-अपने लिए भी और समाज के लिए भी।
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माया : छाया : शक्ति रितु
रेनू शब्द मुखर.प्रिया मधुप
स्तंभ संपादन : डॉ.अनु क्षमा प्रीति सीमा
स्तंभ सज्जा : शक्ति मंजिता स्वाति माधवी अनुभूति
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शून्य से ब्रह्माण्ड की ओर : विवेकानंद जयंती संस्कृति समाचार :
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शक्ति डॉ. सुनीता मधुप
शक्ति आरती अरुण
संस्कृति समाचार : नई दिल्ली : आज १२ जनवरी को समस्त भारतीय राष्ट्रीय युवा दिवस मना रहें हैं। संकल्प लें। उठो,जागो और तबतक चलते रहो जबतक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए। स्मृत रहे नर सेवा ही नारायण सेवा है और विश्व में धर्म के जितने मार्ग हैं,सभी उसी परम सत्य अर्थात् परमात्मा की ओर ले जाते हैं।
भारत की आत्मा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना में बसती है,भारत इनकी जड़ों से कटकर अपने अस्तित्व में नहीं रह सकता है। इन उक्तियों को वैश्विक पटल और भारत की पूण्यभूमि पर रखने वाले भारत के युवा संन्यासी स्वामी विवेकानन्द जी की आज हम १६३ वीं जयन्ती मना रहे हैं और आज हमारे देश को इनके वचनों को अपने जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है। इन महान आत्मा को कोटि कोटि नमन।
१९ वीं २० सदी में जब भारत में अंग्रेजी शासन का बोल-बाला था और दूनिया हमें हेय दृष्टि से देख रही थी,तब भारत में एक ऐसे रत्न जनवरी १८६३ का अवतरण हुआ, जिसने भारत के लोगों का ही नहीं पूरी मानवता का गौरव विश्व के मान चित्र पर बढ़ाया। उसे भारतीय धर्म व राष्ट्र से संबंध रखने पर गर्व था। शिकागो के धर्म सम्मलेन में जिसने समस्त दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिकता की पाठ सिखाई है। राम कृष्ण परमहंस के परम शिष्य स्वामीजी इसलिए महान हैं कि उन्होंने पूर्व और पश्चिम, धर्म और विज्ञान, अतीत और वर्तमान में सामंजस्य स्थापित किया था।
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* शक्ति डॉ. कृतिका आर्य डॉ.वैभव राज. लीवर पेट आंत रोग विशेषज्ञ.बिहार शरीफ समर्थित * |
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विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५.
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संरक्षिका लेखिका
महाशक्ति मीडिया
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आ अब लौट चले : हिमाचल यात्रा संस्मरण
डॉ. भावना * रश्मि
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लेखन सह संपादन
शक्ति. शालिनी डॉ.सुनीता रेनू अनुभूति.
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लाहौल स्पिती घाटी की ओर.ताबो
यात्रा संस्मरण : हिमाचल.
डॉ.भावना.
*
बर्फ़ ही बर्फ़ : माइनस ११ डिग्री : मुश्किलातों से भरी जिंदगी : आ अब लौट चले : फोटो :
*
हम चार : मैं, रश्मि, भावना और सिद्धार्थ : किन्नौर घाटी के बाद हम चार लोग मैं, रश्मि, भावना और सिद्धार्थ ड्राइवर के साथ स्पिती घाटी की ओर निकले। रास्ता काफी दुर्गम पर रोमांचकारी था। स्पिती घाटी में प्रवेश करते ही वातावरण काफी सर्द, खुश्क और वनस्पति विहिन दिखने लगा और शायद इसी वजह से आक्सीजन की कमी भी महसूस होने लगी।
लाहौल और स्पीति भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित दो खूबसूरत और दुर्गम घाटियाँ हैं, जो अपनी शानदार ठंडी रेगिस्तानी सुंदरता, ऊँचे पहाड़ों, प्राचीन बौद्ध मठों ( गोम्पा ), स्पीति नदी और रोमांचक ट्रेकिंग के लिए जानी जाती हैं।
ताबो एक गाँव : और वो बौद्ध मठ : हमने सुना कि लोग इसे ' हिमालय का अजंता ' भी कहते हैं। पहली रात हमलोगों ने टोबो में गुजारी जो कि स्पिती घाटी का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह स्पीति घाटी हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत और ठंडा रेगिस्तानी इलाका है, जो अपनी प्राचीन बौद्ध मठों, शानदार परिदृश्यों और कठोर जलवायु के लिए जाना जाता है।
सुबह मानेस्टरी घूमने के बाद हमें यह स्पष्ट हुआ कि स्पीति घाटी में ताबो एक गाँव है जहाँ यह ऐतिहासिक मठ स्थित है। यह मठ अपनी वास्तुकला,मूर्तियों और प्राचीन पांडुलिपियों के लिए बहुत प्रसिद्ध है।
यहाँ का ' ताबो मठ ' जो किंचित एक हज़ार साल से भी पुराना है। और इसे ' हिमालय का अजंता ' भी कहते हैं, जो अपनी दीवारों पर बनी शानदार भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है,यह हमें जानना चाहिए ।
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गतांक से आगे : १
लाहौल स्पिती घाटी की ओर.काजा
यात्रा संस्मरण : हिमाचल.
डॉ.भावना.
' देखों तो .....कोलम्बस कहाँ तक पहुंचा है ?
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लांगजा गांव से दिखता : हिमालय : वर्फ़िस्तान :
यात्रा : लघु फिल्म : शक्ति भावना
स्पीति घाटी की राजधानी काज़ा : हम बर्फिस्तान में थे। अपनों से दूर। घर बाले चिंतित भी थे। हमारे परिचितों ने यह कह कर आपस में हाल पूछना कर दिया था, ' देखों तो .....कोलम्बस कहाँ तक पहुंचा है ?
काज़ा, हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति ज़िले में स्थित स्पीति घाटी की राजधानी और क्षेत्रीय मुख्यालय है। शिमला से ४१२ किलोमीटर दूर है काजा। काज़ा के सबसे नजदीक कौन सा हिमाचल का शहर है ? काज़ा से अच्छी कनेक्टिविटी वाले सबसे नजदीक के प्रमुख शहर हिमाचल प्रदेश में स्थित शिमला और मनाली हैं। शिमला किन्नौर होते हुए लगभग ४१२ किमी दूर है, जबकि मनाली कुंजुम दर्रे मौसमी होते हुए लगभग २०२ किमी दूर है।
हमलोग नाश्ता करके काजा की ओर निकल पड़े और शाम होने से पहले काबा में एक तिब्बती परिवार के यहाँ होमस्टे लिया। काज़ा अपने रंगीन त्योहारों और प्राचीन साक्या तांग्युद मठ के खंडहरों के लिए जाना जाता है, जो काज़ा से १४ किलोमीटर या ८.७ मील दूर कोमिक गांव के पास स्थित है।
विश्व के सबसे ऊँचे गाँव कामिक व ऑफिस हिक्किम हमलोगों को काजा में दो दिन रुकना था पर ठंड इतनी ज्यादा थी, माइनस ११ डिग्री, या फिर इससे अधिक ऊँचाई के कारण ऑक्सीजन कम होने की वजह से हमलोग अगले दिन सुबह ब्रेकफास्ट किया, थोडा लोकल काजा मार्केट घूमें और स्पीति घाटी से निकल गये।
ऊँचे गाँव कामिक : फिर वहीं से विश्व के सबसे ऊँचे गाँव कामिक और ऊँची मानेस्टरी धनकड और लाग्चा गाँव घूमे जहाँ विश्व का सबसे ऊँचा पोस्ट ऑफिस हिक्किम भी देखने को मिला।
ऊँचे गाँव कामिक हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्थित दुनिया के सबसे ऊँचे गाँवों में से एक है, जो समुद्र तल से ऊंचाई : समुद्र तल से लगभग ४५८७ मीटर की ऊँचाई पर है और मोटर योग्य सड़क से जुड़ा है, प्राकृतिक सौंदर्य बरबस ही हमें खींचती है। पर्यटकों के लिए बर्फ से ढकी चोटियाँ, बंजर परिदृश्य और जीवाश्मों से भरी पहाड़ियाँ इसे एक शानदार दिलकश नज़ारा देती हैं।
ऊँचाई की बात करें तो यह दुनिया के सबसे ऊँचे मोटर-योग्य गाँवों में से एक है, जो इसे रोमांचक बनाता है। हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में स्थित है, जो अपनी शांत सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है। जैसी ऊंचाई अधिक है श्वास लेने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए इस भौगोलिक स्थिति का ख्याल रखें।
जनसंख्या के सन्दर्भ में यह एक छोटा सा गाँव है जहाँ बहुत कम घर और परिवार रहते हैं, और यहाँ की पहाड़ी जीवनशैली बेहद सरल है।
तांग्युड मठ : यहाँ १४ वीं सदी का तांग्युड बौद्ध मठ है, जो भारत के सबसे ऊँचे मठों में से एक है और आध्यात्मिकता का केंद्र है। जहाँ तांग्युड मठ और अद्वितीय हिमालयी प्राकृतिक सुंदरता देखने को मिलती है,और यह साहसिक यात्राओं के लिए एक लोकप्रिय स्थान है।
भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में स्पीति घाटी के हिक्किम से दो किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित कोमिक गाँव में स्थित तंग्युद मठ भी लिखा जाता है। एक गहरी घाटी के किनारे पर एक किलेबंद महल की तरह बना है। इसकी विशाल तिरछी मिट्टी की दीवारें और ऊर्ध्वाधर लाल गेरू और सफेद धारियों वाले प्राचीर इसे वास्तविक ऊंचाई से कहीं अधिक ऊंचा दिखाते हैं।
चिचम ब्रिज : हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में चिचम और किब्बर गाँवों को जोड़ने वाला एशिया का सबसे ऊँचा सस्पेंशन ब्रिज है, जो करीब ४१५० मीटर की ऊंचाई पर एक गहरी खाई पर बना है और २०१७ में बनकर तैयार हुआ, जिससे पहले ग्रामीणों को खतरनाक रोपवे का इस्तेमाल करना पड़ता था, अब यात्रा आसान हो गई है.
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गतांक से आगे : २
लाहौल स्पिती घाटी की ओर.हिक्किम
की मोनेस्ट्री :: यात्रा संस्मरण : हिमाचल.
डॉ.भावना.
कल्पना कीजिये जब मैदानी इलाकों में ८ या ९ डिग्री या मध्य रात्रि तापमान ६ डिग्री पहुँचता है तो समस्त जीवन ही जैसे अस्त व्यस्त हो जाता है। वैसी जिंदगी की कल्पना हमने महसूस की थी।
हिक्किम देश का सबसे ऊंचा पोस्ट ऑफिस : हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी के नाम एक और नया इतिहास जुड़ गया है. विश्व के सबसे ऊंचे वाहन योग्य गांव हिक्किम में देश का पहला लेटर बॉक्स जैसा पोस्ट ऑफिस निर्मित किया गया है। जनजातीय जिला लाहुल स्पीति के नाम एक और तमगा जुड़ गया है।
स्पीति घाटी के हिक्किम गांव में विश्व का सबसे ऊंचा और देश का पहला लैटर बाक्स आकार का डाकघर आरंभ हो गया है जो समुद्रतल से १४,५६७ फीट पर स्थित है। बनाए गए इस डाकघर को देखने में पर्यटक भी उत्सुकता दिखा रहे हैं। पहले लेह के चोगलमसार में ११ ,००० फीट पर सबसे ऊंचा डाकघर था उसकी जगह हिक्किम देश का सबसे ऊंचा पोस्ट ऑफिस ने ले ली हैं । हिक्किम विश्व का सबसे ऊंचा वाहन योग्य सड़क से जुड़ा गांव भी है।
की मोनेस्ट्री : हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्पीति घाटी से १२ किलोमीटर दूर है, १३५०० फीट की ऊंचाई ‘की मोनेस्ट्री’ नाम का एक मठ है. लगभग १००० साल पुराना है। ये प्राचीन मठ न सिर्फ इतिहास में १७ वीं शताब्दी के मध्य में, पाँचवें दलाई लामा के शासनकाल के दौरान , मंगोलों द्वारा की मोनेस्ट्री को बड़े पैमाने पर लूटा और क्षतिग्रस्त किया गया, और यह गेलुग्पाओं का गढ़ बन गया। फिर भी आज वर्तमान में पर्यटकों का स्वागत करता है।
मठ की दीवारें चित्रों और भित्तिचित्रों से ढकी हुई हैं, जो १४ वीं शताब्दी की मठ वास्तुकला का एक उदाहरण है, जिसका विकास चीनी प्रभाव के परिणामस्वरूप हुआ। क्ये मठ में बुद्ध प्रतिमाओं सहित प्राचीन भित्ति चित्रों और पुस्तकों का संग्रह है ।
इसमें तीन मंजिलें हैं, पहली मंजिल मुख्य रूप से भूमिगत है और भंडारण के लिए उपयोग की जाती है। एक कमरा, जिसे तंग्युर कहा जाता है , भित्ति चित्रों से खूबसूरती से सजाया गया है। भूतल पर खूबसूरती से सजा हुआ सभा भवन और कई भिक्षुओं के लिए कोठरियाँ हैं।
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गतांक से आगे : ३
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नारकंडा शिमला : शुरुआती स्कीइंग स्थलों में से एक
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: यात्रा संस्मरण : हिमाचल.
शक्ति. डॉ.भावना.
नारकंडा शिमला के पास हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो देवदार के घने जंगलों, सेब के बगीचों और हिमालय के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है; यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य और भारत के शुरुआती स्कीइंग स्थलों में से एक होने के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है, खासकर अपनी ऊंची चोटी हाटू पीक और आसपास की शांत घाटियों के लिए।
नारकंडा का बाज़ार उतना ही है जितनी की एक सड़क। इस बाज़ार में छोटी-छोटी दुकानें हैं जिनमें छोले-पूरी से लेकर कीटनाशक दवाइयां मिलती हैं।
मुख्य विशेषताएँ : यह स्थान: शिमला से लगभग ६० किमी दूर, समुद्र तल से २७०८ मीटर की ऊंचाई पर स्थित। प्राकृतिक सुंदरता में यहाँ देवदार के जंगल, चीड़ के पेड़, और चेरी व सेब के बगीचे पाए जाते हैं ।
ऐतिहासिक महत्व: भारत के शुरुआती स्कीइंग स्थलों में से एक है।
प्रमुख आकर्षण : दर्शनीय
हाटू पीक : नारकंडा की सबसे ऊंची चोटी, जो १२,००० फीट की ऊंचाई से शानदार नज़ारे पेश करती है।
नारकंडा की सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक है हाटू शिखर। इस जगह पर हाटू माता का मंदिर है। इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी हाटू माता की भक्त थीं और उन्होंने ही इस मंदिर को बनवाया था। यहां पर आप हिमालय की सभी दिशाओं का दर्शन कर सकते हैं। यह नारकंडा से ६ कि.मी. दूर है। इसके साथ ही इस जगह पर आप स्कीइंग का भी आनंद ले सकते हैं।
भीम का चूल्हा : हाटू शिखर के पास में ही भीम का चूल्हा भी है जो कि हाटू मंदिर से ५०० मीटर आगे है। इनके बारे में कहा जाता है कि पांडवों को जब अज्ञातवास मिला था तो वह चलते-चलते इसी जगह पर रूके थे और खाना भी यहीं बनाया था।
ठाणेधार : सेब के बागानों के लिए प्रसिद्ध।
कोटगढ़ घाटी : बर्फ और पहाड़ों के बीच की शांत सुंदरता के लिए जानी जाती है।
रोमांचक गतिविधियाँ में आप स्कीइंग (सर्दियों में), ट्रैकिंग, और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं ।
बताते चले दिए गए उपनाम में इसे ' फलों का कटोरा ' भी कहा जाता है।
संक्षेप में, नारकंडा शिमला के पास एक शांत और प्राकृतिक रूप से समृद्ध स्थान है जो साहसिक गतिविधियों और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने के लिए सैलानियों के लिए एक आदर्श स्थान है।
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गतांक से आगे : ४
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चैल : हिमाचल का खूबसूरत हिल स्टेशन
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चायल हिमाचल प्रदेश का बहुत प्रसिद्ध स्थान है। चायल पैलेस अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है,ब्रिटिश राज के दौरान पटियाला के महाराजा द्वारा ग्रीष्मकालीन वापसी के रूप में महल का निर्माण किया गया था। चायल सोलन के साथ - साथ शिमला जिला मुख्यालय के साथ जुड़ा हुआ है।
फिल्म थ्री इडियट्स देखी होगी। इसमें नायक खोजने उसके मित्र निकलते है। और उसके घर चैल जा पहुंचते है। एक खूबसूरत हिल स्टेशन है चैल। चैल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित एक शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो शिमला से लगभग ४९ किमी और कंडाघाट से ३८ किमी दूर है।
समुद्र तल से अधिक ऊँचाई पर स्थित यह स्थान अपने देवदार के जंगलों, शानदार नजारों और विश्व के सबसे ऊंचे क्रिकेट मैदान के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह ने अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में करवाया था।
दूरी : यह शिमला के शोर-शराबे से दूर है, इसलिए शांति चाहने वालों के लिए एक बेहतरीन जगह है।
गतिविधियां: यहाँ ट्रेकिंग, कैंपिंग और प्रकृति के बीच घूमने का आनंद लिया जा सकता है।
चायल जाने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर तक है। आप सड़क मार्ग से कंडाघाट या शिमला के रास्ते आसानी से पहुँच सकते हैं।
चायल के मुख्य आकर्षण : चायल पैलेस : १८९१ में निर्मित यह महल अब एक हेरिटेज होटल है, जो अपनी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
चायल क्रिकेट ग्राउंड : यह दुनिया का सबसे ऊँचा क्रिकेट मैदान है, जो चायल का सबसे बड़ा आकर्षण है।
काली टिब्बा मंदिर : यह काली माता का मंदिर एक पहाड़ी पर है,जहाँ से हिमालय का सुंदर दृश्य दिखता है।
चायल वन्यजीव अभयारण्य : यहाँ विभिन्न प्रकार के जानवर और पक्षी पाए जाते हैं।
गुरुद्वारा साहिब : यह एक शांत जगह है जो वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है।
चायल की खास बातें : मौसम : यहाँ का मौसम हमेशा सुहावना रहता है। गर्मियों में यहाँ बहुत आरामदायक मौसम होता है।
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क्रमशः जारी
पृष्ठ संपादन : शक्ति मानसी स्मिता नीलम वनिता
पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा प्रेरणा फ़रहीन
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क्रमशः जारी
पृष्ठ संपादन : शक्ति मानसी स्मिता नीलम वनिता
पृष्ठ सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा प्रेरणा फ़रहीन
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| * बैंक ऑफ़ इण्डिया : शाखा प्रबंधक : आर्य लक्की : रिश्तों की जमापूंजी : शक्ति समर्थित |
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करोगे याद तो हर बात याद आएगी : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन
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शक्ति. प्रिया शालिनी डॉ.अनु रितु.
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करोगे याद तो हर बात याद आएगी : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
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संपादन
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शक्ति प्रिया शालिनी डॉ.अनु रितु.
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| * आर्य डॉ. दीनानाथ वर्मा : फिजिसियन : दृष्टि क्लिनिक : बिहार शरीफ : समर्थित *
--------- समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११. ---------- संपादन शक्ति हिमानी फरहीन स्मिता बीना जोशी. * विवेकानंद को अपने भीतर थोड़ा सा आत्मसात कर लें * १२ जनवरी : राष्ट्रीय युवा दिवस विवेकानंद जयंती : धारावाहिक : १ * * महाशक्ति मीडिया : लघु वृत्त चित्र फिल्म : ४.४० सेकेण्ड आवाज : निर्माण : संपादन : डॉ.मधुप * राष्ट्रीय युवा दिवस : विवेकानंद जयंती : धारावाहिक : २. * * शॉर्ट रील : शक्ति : दीप्ती बोरा : नैनीताल * * |
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करोगे याद तो हर बात याद आएगी : शुभकामनाएं : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १३.
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करोगे याद तो हर बात याद आएगी : पृष्ठ : १३. / १
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संपादन
शक्ति रितु मीना रेनू शबनम.
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प्रेम : प्रकृति : पहाड़ : पुनर्जन्म
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एक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी हैं
मृगनयनी : अजी हमसे रूठ कर कहाँ जाइगा
जहाँ जाइगा हमें पाइएगा
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फिल्म : आरोप : विनोद खन्ना : सायरा बानू :
तराने : दिल के : नैनों में दर्पण है दर्पण में कोई
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प्रेम : प्रकृति : पहाड़ : पुनर्जन्म
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कोई ढूंढने भी आए तो हमें न ढूंढ पाए :शिमला
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तराने : फिल्म : दाग : राजेश शर्मिला राखी.
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प्रस्तुति : शक्ति प्रिया. रेखा : अल्मोड़ा.
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लिखा है तेरी आँखों में किसका अफ़साना
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: शुभकामनाएं : पृष्ठ : १३. / २
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संपादन
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शक्ति
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अवतरण दिवस : जन्म दिवस
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डॉ.सुनीता मधुप
शक्ति सम्पादिका : रुक्मिणी डेस्क
कार्यकारी सम्पादिका
निदेशिका : महाशक्ति मीडिया
को उनके अवतरण दिवस पर
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शक्ति प्रिया डॉ.अनु शलिनी रेनू सीमा रितु मीना नीलम अनुभूति सहित
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' हम ' एकीकृत देव शक्ति ' मीडिया ' परिवार की तरफ़ से
ढ़ेर सारी अनंत ' प्यार भरी ' शिव शक्ति ' शुभकामनाएं '
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मेरी पसंद
डॉ. भावना माधवी संगीता फरहीन मंजू अनीता अल्पना स्मिता वनिता
सप्रेम एक गीत तराने दिल से
जन्म दिन के लिए
गाना : एक दूसरे से करते है प्यार हम
फिल्म : हम. १९९१.
सितारे : अमिताभ बच्चन. रजनी कांत. गोविंदा.
किमी काटकर.दीपा शाही.शिल्पा.
गीत : आनंद बख़्शी.संगीत : लक्ष्मी कांत प्यारेलाल. गायक : सुरेश बाडेकर अलका उदित.
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
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Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting
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Shakti Vibes English Page : 3
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Editor
Shakti Chunni Priya Seema Tanu Sarvadhikari.
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Life itself is an Exam.
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Goal without Plan.
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Simply wanting is not enough here
a goal without plan is just a wish dear
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The Sun is always behind you.
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The Sun may not shine always at you
or may hide from you
but know it is just there behind the doubts
And it goes down but it comes back
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Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
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Editor
Shakti Shalini Seema Farheen Smita Ritu.
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Shaktis Editors Experiencing Kakolat: collage : Shakti Shalini Farheen Smita Ritu * --------- Short Reel : News : Special : English : Page : 5. ---------- Editor Prof.Dr.Bhwana Sunita* Preeti *Vanita * -------- Day Special. page : 5/ 2 --------- * -------- Day Special. page : 5/ 2 --------- *Indians observing Netajee Subhas Chandra Bose Jayanti on 23rd of January. * ------- * ------- Day Special 5/2 -----------* Exclusively Birthday Wishes on 13 th of January * Dr.Madhup Raman. a Devotee of Lord Krishna. * Shakti & Joint Media Literary Coordinator A& M Media Advertising Pratham Media Advertising MS* Media Times Media Advertising * for your regular efforts we Shaktis : Dr.Anu Seema Tanu Nilam Sangita on behalf of entire Shakti Editorial Team wishing you a very hearty, happy and healthy birth day then year. * Let the Lost ' Shaktis ' be Unified this year with the cool ,calm and divine images * Atma Deepo Bhava * Our wishes and thought developed a Rising Sun Design : Shakti Manjita Seema Smita Ranjit. * * --------- Day Special : Gratitude : You Said it : Page : 9. ---------- |



























































































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