Bal Divas : 25
Page 0.
@ M.S.Media.
©️®️Shakti's Project.
Yatra Visheshank.
In Association with.
A & M Media.
Pratham Media.
Times Media.
Cover Page.
*
आवरण :पृष्ठ.
*
सम्पादकीय : पृष्ठ : २.
सम्पादकीय शक्ति लिंक : पृष्ठ : २ / ०.
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति :पृष्ठ : ३.
तारे जमीन पर : गद्य संग्रह : शक्ति : सम्पादकीय : प्रस्तुति. पृष्ठ :४.
विशेषांक : आलेख : धारावाहिक आलेख : पृष्ठ : ५.
ये मेरा गीत : जीवन संगीत : कल भी कोई दोहराएगा : पृष्ठ : ६.
बाल दिवस : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
बाल दिवस : कला दीर्घा : पृष्ठ : ९.
समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
शक्ति : आदित्य देव : फोटो दीर्घा : पृष्ठ : १२.
चलते चलते : शुभकामनाएं : दिल जो न कह सका : पृष्ठ : १३.
आपने कहा : मुझे भी कुछ कहना है : पृष्ठ : १४.
*
⭐
एम. एस. मीडिया.महाशक्ति.प्रस्तुति.
⭐
पत्रिका / अनुभाग. ब्लॉग मैगज़ीन पेज.
के निर्माण सहयोग के लिए.
'तुम्हारे लिए. '
-------------
हार्दिक आभार प्रदर्शन : पृष्ठ : ०.
---------------
⭐
शक्ति.डॉ भावना स्मिता.वनिता.
संयोजिका / मीडिया हाउस,हम मीडिया परिवार.
की तरफ़ से
आपके लिए धन्यवाद ज्ञापन.
⭐
पत्रिका के निर्माण / संरक्षण के लिए.
*
हार्दिक आभार.
*
बिहार शरीफ.समर्थित.
*
*
महाशक्ति. नैना देवी डेस्क.
नैनीताल. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना :जुलाई.दिवस :४.
महाशक्ति. नैना देवी डेस्क.
नैनीताल. प्रादुर्भाव वर्ष :१९७६.
संस्थापना वर्ष : १९९८.महीना :जुलाई.दिवस :४.
*
सम्पादित.
शक्ति * नैना @ डॉ.सुनीता प्रिया.
*
शक्ति * नैना @ डॉ.सुनीता प्रिया.
*
*
दिल ढूंढता है
*
कल गर्मियों में जिस धूप से बचते थे
आज वही सर्दियों में धूप ढूंढते है
*
जीत जायेंगे हम तू अगर संग है
*
पराजित व विजित व्यक्ति का अनुभव
एवं स्वयं की व्यवहारिकता बुद्धि जीवन
में कभी हारने नहीं देंगी
जीत जायेंगे हम तू अगर संग है
*
पराजित व विजित व्यक्ति का अनुभव
एवं स्वयं की व्यवहारिकता बुद्धि जीवन
में कभी हारने नहीं देंगी
*
समय और शिक्षा
*
समय और शिक्षा का निरंतर सही उपयोग
ही व्यक्ति को सफलता के मार्ग की ओर ले जाता है
*
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्.
*
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्,न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् ।
प्रियं च नानृतम् ब्रूयात् , एष धर्मः सनातन: ॥
भावार्थ
सत्य बोलना चाहिये, प्रिय बोलना चाहिये, सत्य किन्तु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये ।
प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये ; यही सनातन धर्म है ॥
प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये ; यही सनातन धर्म है ॥
*
जीने का अर्थ.
*
जिंदगी ऐसे जियो जैसे हर पल आख़िरी हो...
लेकिन जितनी जिओ सार्थक, परमार्थ और आर्य जगत के निर्माण लिए जिओ
*
*
जिंदगी ऐसे जियो जैसे हर पल आख़िरी हो...
लेकिन जितनी जिओ सार्थक, परमार्थ और आर्य जगत के निर्माण लिए जिओ
*
कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन.
*
आ अब लौट चले
हो सके तो एक क्षण के लिए बचपन को जी ले
*
जियो और जीने दो.
*
समस्या तो आनी जानी ' रोज ' है
मत सोचें कि जिंदगी एक ' बोझ ' है
इसमें हँस कर जो समाधान ढूंढ ले
तो उसके लिए ' मौज ' है
*
काश अगर हम ' बच्चे ' होते
*
काश हम बच्चों की तरह ' निर्दोष ' होते
हर ' दुःख ',' अपमान ' से बेगाने होते
*
महालक्ष्मी डेस्क : कोलकोता.
*
टाइम्स मीडिया एडवरटाइजिंग : शक्ति.
*
शक्ति महालक्ष्मी
*
कोलकोता डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष. १९७९.
संस्थापना वर्ष : १९९९.महीना : जून. दिवस :२.
सम्पादित.
शक्ति. नैना @ डॉ.सुनीता सीमा प्रिया.
*
शून्य से शिखर
*
शून्य से शिखर तक पहुंचने
में भी देरी होती है इसलिए संयम रखें
धैर्य सर्वत्र साधनम्
*
धैर्य हरेक कार्य व मनुष्य के लिए
परम आवश्यक है
*
प्रथम मिडिया शक्ति.प्रस्तुति :
--------
शक्ति. महासरस्वती : दर्शन पृष्ठ : १ / ३.
--------
बुद्धि रूपेण संस्थिता नमस्तस्य.
*
शक्ति महासरस्वती.
*
*
नर्मदा डेस्क. जब्बलपुर
प्रादुर्भाव वर्ष : १९८२.
संस्थापना वर्ष : १९८९. महीना:सितम्बर. दिवस : ९.
*
संपादन
शक्ति.नैना @ प्रिया. श्रद्धा अनीता
*
अति सर्वत्र वर्जयेत
*
हद से अधिक दूसरों पर निर्भरता
जरूरत से ज्यादा आलस्य मनुष्य को अपाहिज़ बना देता है
*
ईश्वर रिश्ता मानव
*
ईश्वर रिश्ते बनाता है और मानव अपनी समझ सहन शक्ति ,
उन रिश्तों को सहेजता और संवारता है
*
---------
सम्पादकीय शक्ति समूह : पृष्ठ : २
---------
*
प्रधान सम्पादिका.
नवशक्ति डेस्क.
शिमला
*
शक्ति शालिनी रेनु नीलम अनुभूति
*
शक्ति. कार्यकारी सम्पादिका.
⭐
⭐
शक्ति. डॉ.सुनीता शक्ति*प्रिया.
नैना देवी.नैनीताल डेस्क.
प्रादुर्भाव वर्ष : १९७०..
फोटो सम्पादिका
शक्ति.नैना डॉ.अनु रितु मीना.
नैनीताल डेस्क.
*
शक्ति नैना डॉ. अनु रितु मीना
नैनीताल डेस्क
ममता हॉस्पिटल बिहार शरीफ:शक्ति.डॉ.ममता.आर्य. डॉ.सुनील कुमार : समर्थित
-------
आकाश दीप : पद्य संग्रह : सम्पादकीय : प्रस्तुति :पृष्ठ : ३.
---------
संपादन
शक्ति
⭐
*
शक्ति शालिनी मानसी रेनु अनुभूति
*
बाल कविता
*
फूल : लघु फिल्म
सम्पादिका.महाशक्ति
*
लघु कविता
बचपन.
*
था चांदी सा पलंग मेरा, खिलौना मोतियां उसकी,
वो ऊंचे पेड़ पर चढ़कर, लेना आम की चुस्की .
अखाड़ा कूदना, साथियों संग चल रही कुश्ती,
वो ट्यूबवेल पर नहाना, और अम्मा-बाप की घुड़की .
चवन्नी हांथ में लेकर, भरी बाजार इठलाना,
वो नन्हे पाव से, इस धरा को नापने का दम .
मां की लोरिया सुनकर, सपन की गोद सो जाना,
सुबह उठकर, कटोरा दूध का फिर हांथ में होना .
जरा सा अड़ गया जो, अम्मा का पुचकारना हमको,
अखर जाता है अब भी, किसी का दुत्कारना उनको.
यही बचपन था हमारा, तुम्हें क्या यार बतलाऊं,
चलो फिर से, उसी दुनिया की सैर कर आऊं .
*
*
१९ नवंबर अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर सभी पुरुषों को
समर्पित मेरी एक भावपूर्ण कविता
*
भाविकाएँ
*
पुरुषत्व
कहीं पत्नी जान न ले उसे...
ऊपर से सख्त दिखने वाला पुरुष
अपने पुरुषत्व के अहम तले
ही दबा होता है तभी तो... अपनी संवेदनाएं
व्यक्त करने से कतराता है..
वो डरता है
अपनी पत्नी से कहने में..
कि उसे खलती है उसकी खामोशी,
उसकी चुप्पी उसका दिल दहलाती है
उसका ना होना कील सा चुभता है ...
घर लौटने पर
दरवाजे पर लगा ताला देख
उसकी खुशियों पर भी
ताला लग जाता है
घर में घुसने पर उसके ना होने पर
वह सूनापन महसूसता है ....
कहीं पत्नी जान न ले उसे...
उसके भीतर के मर्म को पहचान न ले..
कि वह भी उसकी तरह ही महसूस कर रहा है
हां, यह सच है
पुरुष टूटकर महसूसता है
स्त्री के से जज्बात,
उसकी सी सरलता,
वही सहजता,नाजुकता और
उसका-सा कोमल सहज स्नेह
उसे भाती है
स्त्री की भोली चितवन...
पर उसके माथे जो उसने
पुरुषत्व का लेबल लगा रखा है
उस लेबल को ठेस लगती है
बस सब कुछ झूठे,
खोखले दम्भ में छुप जाता है...
और नज़र आती है
उसकी कठोरता
*
*
शक्ति रेनू शब्द मुखर
कवयित्री लेखिका
प्रधान सम्पादिका
*
--------
तारे जमीन पर : बच्चें मन के सच्चे : शक्ति : आलेख : २ / १
-----------
तारे जमीन पर
*
संपादन
शक्ति
शक्ति शालिनी मानसी रेनु अनुभूति
----------
*
कांच की चूड़ियां : लघु बाल कथा : शक्ति रेनू
*
सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति
शक्ति आलेख : ०
*
एक कल्पना और जिंदगी का एक सच भी :
विक्रम और बेताल : की कहानी सुनोगे
---------
शक्ति.डॉ.सुनीता मधुप प्रिया.
*
दृश्यम : विक्रम और बेताल : साभार.
*
मेरे पास आओं , मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनो। बच्चों आज मैं तुम्हें एक कहानी सुनाऊंगा। वेताल की कहानी सुनोगे। इसमें निहित सन्देश को भी समझोगे।
बेताल कल मेरे सपने में आया : कल सपने में बेताल आया था। बेताल एक भूत है ,मृत शरीर है। विक्रम के कंधे पर चढ़ा हुआ फिर से कहानी कहता हुआ और परम प्रतापी न्याय प्रिय राजा से कहानी के अंत में वही चिर प्रतीक्षित हल मिश्रित न्याय की मांग करता हुआ। कहानी बेताल की : विक्रम और बेताल की कहानियाँ एक राजा विक्रम और एक भूत बेताल के बारे में हैं, जो एक श्रृंखला के रूप में सुनाई जाती हैं। इसमें बेताल, राजा को एक कहानी सुनाता है और कहानी के अंत में एक पहेली या प्रश्न पूछता है।
यदि राजा सही उत्तर देता है, तो बेताल अपने वृक्ष पर वापस लौट जाता है।
यदि राजा चुप रहता है, तो वह कहानी जारी रखता है। यदि राजा उत्तर देने से इंकार कर देता है, तो उसकी जान चली जाएगी।
बेताल की कहानियों में नैतिकता और न्याय पर आधारित पहेलियाँ होती हैं, जो राजा को इन पहेलियों को सुलझाने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करने के लिए प्रेरित करती हैं।
उसकी बाध्यता थी सर्वप्रथम वह न्याय करते हुए अपनी स्वयं की भी रक्षा करें।
कभी दूरदर्शन का प्रसिद्ध टी वी धारावाहिक : १९८५ का कभी दूरदर्शन में प्रसिद्ध रामायण धारावाहिक फिल्म निर्माता रामानंद सागर की ही निर्मित विक्रम और बेताल एक अन्य धारावाहिक भी आती थी जिसे मैं देखता था।
साल १९८५ का किस्सा है ,उस ज़माने में जब मेरे घर टी वी आई थी। कृषि दर्शन, हम लोग जैसे प्रोग्राम भी हम पूरी तन्मयता से देखते थे।
अघोरी के निशाने पर एक बेवस भ्रमित बेताल : एक बेवस भूत की कहानी जिसे अघोरी साधु अपने वश में करके न्याय प्रिय राजा विक्रमादित्य की बलि देना चाहता था। राजा विक्रमादित्य की लोकप्रियता और उसकी न्यायप्रियता उसे शूल की भांति चुभती थी। वह बेताल को ढाल बना कर अपना हित सिद्ध करना चाहता था। उस समय की एक मेरी पसंदीदा भारतीय टेलीविजन श्रृंखला थी विक्रम और बेताल, जिसे मैंने पूरी दिलचस्पी से देखी । कभी सोचता हूँ तो विक्रम और बेताल जैसी घटनाएं कदाचित अन्य के साथ मेरे साथ भी हालिया घटित हुई है। स्वयं के जीवन में न्याय अन्याय , घात प्रतिघात , पाप पुण्य , प्रेम, विश्वासघात, रहस्य, ज्ञान और के घटना क्रम चक्र इस तरह चले की विक्रम और बेताल की , बेताल पच्चीसी कहानियाँ
फिर से याद आ गई।
अघोरी दुष्ट तांत्रिक : अघोरी दुष्ट तांत्रिक, तंत्र मन्त्र से प्रभावित जन , अभिशप्त शव की बलि, न्याय और बचन से बंधे राजा विक्रमादित्य, बेताल का कंधे पर सवार होना , बेताल के द्वारा पच्चीस कहानियाँ सुनाना,विक्रम को न्याय करने की विवशता , षड्यंत्र का खुलासा , बेताल की मुक्ति और अघोरी दुष्ट तांत्रिक का अंत।
विक्रम और बेताल की कहानियाँ रहस्य, ज्ञान और विश्वासघात पर पुण्य की विजय के तत्वों को एक साथ बुनती हुई सामने आती हैं, जिसे हर सही कोइ न कोई अपनी जिंदगी में घटित होते हुए महसूस करता है।
यह १९८५ में डीडी नेशनल पर प्रसारित हुई थी और हिट हुई थी जिसका पुनः प्रसारण १९८८ में हुआ था। इस प्रकार, विक्रम और बेताल की कहानियाँ रहस्य, ज्ञान और विश्वासघात पर पुण्य की विजय के तत्वों को एक साथ बुनती हुई सामने आती हैं।
न्यायप्रिय विक्रमादित्य कौन : प्रचलित मान्यता के अनुसार, उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के बाद ईशा के ५७ साल पूर्व हमारे राष्ट्रीय विक्रम संवत की स्थापना की थी। यह हमारी अस्मिता और स्वाधीनता के अनुरक्षण तथा शत्रुओं पर विजय का प्रतीक भी है।
तो कभी कभी गुप्त साम्राज्य के प्रतापी सम्राट समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य अवधि ३८० - ४१५ की भी कल्पना की जाती है जो बड़ा वीर पराक्रमी और न्याय प्रिय शासक था,जिसने शकों को पराजित भी किया था। न्याय के लिए प्रसिद्द रहें उज्जैन के नरेश विक्रमादित्य हो सकते हैं .....लेकिन उन्होंने विक्रम संवत का प्रारंभ किया हो संदिग्ध हो सकता है।विक्रम और बेताल की कहानियाँ उनसे प्रभावित हो कर उनके दरवारी कवियों द्वारा रचित की गई हो ,समझा जा सकता है। .....
गतांक से आगे : १ : विक्रम और बेताल :
निहित सन्देश इस कहानी में :
*
कहानी देखिए भी : समझिए भी : वेताल, राजा विक्रमादित्य को उस तांत्रिक के बुरे इरादों के बारे में बताता है जिसने राजा विक्रम से वेताल को बलि के लिए लाने को कहा था। अंततः विक्रम उस तांत्रिक को मारकर वेताल को मुक्त करा लेता है। विक्रम तब वेताल को अपना मंत्री बनने का प्रस्ताव देता है, जिसे वेताल स्वीकार कर लेता है।
जब श्मशान की चिता दिखाई दी, तो बेताल ने विक्रम से कहा, ' विक्रम, यह योगी बहुत चालाक है। यह तुम्हें मारने की योजना बना रहा है। मैं इसकी योजना जानता हूँ। यह तुम्हें साष्टांग प्रणाम करने के लिए कहेगा, और जब तुम उसे साष्टांग प्रणाम करोगे, तो वह तलवार से तुम्हारी गर्दन काट देगा। इसलिए सावधान रहो।
विक्रम यह सुनकर आश्चर्यचकित हो गया। हालाँकि उसके मन में यह संदेह था, लेकिन अब वह अधिक सावधान था। विक्रम वैताल को कंधे पर उठाकर योगी के पास आया।
वैताल को देखकर योगी बहुत प्रसन्न हुआ,उसने कहा," वाह राजा विक्रम,आप सचमुच साहसी हैं। अब आप पूरी पृथ्वी पर निर्विघ्न शासन करेंगे।"
योगी ने वैताल के शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके अग्नि में आहुति दी, कुछ तांत्रिक क्रियाएँ कीं, और अंत में पूर्णाहुति दी।
विक्रम यह सब बड़े ध्यान से देख रहा था। वह बिल्कुल सीधा खड़ा था। सब कुछ समाप्त करने के बाद योगी ने कहा, " राजा विक्रम, अब आप मुझे साष्टांग प्रणाम करके पुण्य कमाएँ। "
विक्रम तो बस इसी क्षण की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्हें वैताल का आदेश याद आया कि " जैसे ही तुम उनके सामने झुकोगे, वे तुम्हारी गर्दन काट देंगे।"
अतः उन्होंने कहा," मैं राजा हूँ, मैं किसी के सामने नहीं झुकता।" यह सुनकर योगी आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने कहा, " ठीक है, तो मैं आपके सामने झुकता हूँ।"
जैसे ही वे राजा के सामने झुके,राजा ने अपनी तलवार से उनकी गर्दन काट दी। योगी मर गया।
तभी उस निर्जन वन में एक ज़ोरदार हँसी गूँजी। वह हँसी उस वैताल की थी। विक्रम वैताल को देखकर दंग रह गए, उन्होंने कहा - " वैताल तुम ? तुम मर गए थे ?"
वैताल बोला , " हाँ, मैं ही हूँ। इस योगी की बलि देकर तुमने मुझे जीवन दिया है। अगर तुमने इसे नहीं मारा होता, तो मैं दोबारा जन्म नहीं ले पाता।
निहित सन्देश इस कहानी में : विक्रमादित्य न्याय और साहस के लिए प्रसिद्ध थे। बेताल के पीछे बेताल की बलि के लिए अघोरी पड़ा था। उसकी शत्रुता विक्रमादित्य से भी थी बेताल के जरिए वह विक्रमादित्य का भी अहित करना चाहता था।
दूसरी तरफ़ बेताल पच्चीसी के पिटारे से एक एक कहानी कह कर अघोरी से होने वाले आसन्न खतरों के बारे में सन्देश भी देता रहा। अंत में उसने उस अघोरी का षड्यंत्र भी बतला दिया।
विक्रमादित्य ने ,सहिष्णुता , बुद्धि विवेक , न्याय और साहस का प्रयोग करते हुए उस अघोरी का वध किया और वेताल को मुक्ति दिलाई। इसलिए संकट में कभी भी धैर्य न खोए
सज्जा : शक्ति मंजिता सीमा स्वाति अनुभूति
बाल दिवस : शक्ति सम्पादकीय आलेख
शक्ति. प्रिया रेनू डॉ.सुनीता अनुभूति
जयपुर डेस्क.
*
चाचा के प्रेम से बनी उनकी जयंती : बाल दिवस : नेहरू जी को बच्चें प्रिय थे। या कह सकते है बच्चों को नेहरू जी प्रिय थे। इसलिए नेहरू की जयंती को बाल दिवस भारत का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है जो हर वर्ष १४ नवंबर को पूरे देश में बड़े उत्साह और आनंद के साथ मनाया जाता है।
यह दिन हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की जयंती को समर्पित है। नेहरू जी बच्चों से अत्यधिक प्रेम करते थे और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हमेशा प्रयासरत रहते थे। बच्चे उन्हें स्नेहपूर्वक चाचा नेहरू कहकर पुकारते थे।
बाल दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य समाज में बच्चों के अधिकारों, उनकी शिक्षा और उनके समग्र विकास के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन स्कूलों और अन्य शैक्षिक संस्थानों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएँ और रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनसे बच्चों में आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ता है। बाल दिवस केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि बच्चों को प्रेम, सुरक्षा और समान अवसर देना हम सभी की जिम्मेदारी है। वे नौनिहाल हमारे देश के भविष्य है।
यह दिन हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की जयंती को समर्पित है। नेहरू जी बच्चों से अत्यधिक प्रेम करते थे और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हमेशा प्रयासरत रहते थे। बच्चे उन्हें स्नेहपूर्वक चाचा नेहरू कहकर पुकारते थे।
बाल दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य समाज में बच्चों के अधिकारों, उनकी शिक्षा और उनके समग्र विकास के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन स्कूलों और अन्य शैक्षिक संस्थानों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएँ और रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनसे बच्चों में आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ता है। बाल दिवस केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि बच्चों को प्रेम, सुरक्षा और समान अवसर देना हम सभी की जिम्मेदारी है। वे नौनिहाल हमारे देश के भविष्य है।
बचपन की मुख्य विशेषताओं में शारीरिक विकास तेजी से विकास, मांसपेशियों और हड्डियों का निर्माण , के साथ साथ मानसिक विकास सोच, स्मृति और भाषा कौशल में सुधार,भावनात्मक विकास भावनाओं को समझना और नियंत्रित करना, और सामाजिक विकास साथियों के साथ घुलना-मिलना और सामाजिक नियमों को सीखना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की प्रबल इच्छा होती है और वे खेलने में बहुत रुचि लेते हैं। हमें भी सीखने की प्रवृति का त्याग कभी नहीं करना चाहिए।
झगड़ा जिस के साथ करें अगले ही पल फिर बात करें :
फोटो : शैली कृष्णा : मुंबई |
बचपन हर गम से बेगाना होता है : बचपन आज भी जिंदादिली से जीने की राह बताता है। आप सभी को हम सभी की ओर से बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ! बच्चें आप सभी दिल के उतने ही करीब होते हैं जितना कोई अपना किसी के लिए होता है। इन सालों में मैंने सिर्फ नहीं पढ़ा ही , बल्कि आपके साथ सीखा,हँसा और हर पल आपको बढ़ते हुए देखा है।
शिशुओं का विहार सब के लिए एक घर उपवन की तरह है, और आप सभी राष्ट्र आँगन के वो अनमोल फूल हो,जिनकी खुशबू से ये आँगन,समाज और राष्ट्र महकता है।
सन्देश : दिल से निर्दोष बनें जटिल नहीं : बाल दिवस पर अपनी तरफ से बस एक संदेश देना चाहती हूँ अपने सपनों को ऊंचा उड़ान दो, कभी हार मत मानो और हमेशा अपने हृदय में मानवीय संवेदनाओं को सजीव रखो। किताबें,पाठ्यक्रम, सब जरूरी हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है एक अच्छा इंसान बनना,जो अपनी संस्कृति,अपने परिवार और अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्यशील हो।
आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए हमारी अनगिनत शुभकामनाएं और अपना अपार स्नेह। हमेशा याद रखो, हम सभी अपने बचपन पर गर्व करती हैं और हमेशा गर्व करती रहेंगी आपके साथ हैं । हँसते रहें , मुस्कुराते रहें बाल दिवस की अनंत शिव शक्ति हार्दिक शुभकामना
*
संपादन :शक्ति मंजिता स्मिता वनिता नीलम
संपादन :शक्ति मंजिता स्मिता वनिता नीलम
सज्जा : शक्ति माधवी सीमा वाणीअनिता
बाल दिवस : शक्ति आलेख : पृष्ठ : २ / २
आज शिक्षक बने बच्चे, बच्चों के संग
बच्चों की तरह ! ’ : जयपुर : बाल दिवस समारोह
शक्ति रेनू शब्द मुखर
' क्लास में शांति बनाए रखें ! ' सब कुछ हंसी-ठिठोली में ढल गया।
टीचर्स के इस रूप ने बच्चों के दिल छू लिए। पूरा प्रांगण हंसी, तालियों और आत्मीयता से गूंज उठा। यह अनुभव सिर्फ मनोरंजन नहीं था, बल्कि शिक्षक और छात्र के बीच मानवीय जुड़ाव की खूबसूरत मिसाल भी बना।
ऐसे आयोजन हमें यह याद दिलाते हैं कि शिक्षा सिर्फ पुस्तकों तक सीमित नहीं, वह प्रेम, आनंद और आपसी समझ का नाम भी है। बच्चों को मुस्कुराना सिखाना, खुद मुस्कुराकर ही संभव है।
बच्चों की हंसी में ही ईश्वर बसता है, और शिक्षक का आनंद तब पूर्ण होता है, जब वह स्वयं बच्चे बन जाए।
संपादन :शक्ति मंजिता स्मिता वनिता नीलम
सज्जा : शक्ति माधवी सीमा वाणीअनिता
*
शक्ति.तनु.आर्य.रजत निदेशक : स्वर्णिका ज्वेलर्स : सोहसराय : बिहार शरीफ समर्थित.
*
----------
ये मेरा गीत जीवन संगीत : बच्चे मन के सच्चे : पृष्ठ : पृष्ठ : ६.
------------
नैनीताल की पृष्ठ भूमि में निर्मित फिल्म
मेरी पसंद
शक्ति प्रिया सुनीता अनु भारती
*
फिल्म : कोई मिल गया.२००३.
गाना : जादू जादू अब करना निभाने का वादा
सितारे : ऋतिक रोशन.प्रीती जिंटा.
गीत : इब्राहिम अश्क. संगीत : राजेश रोशन. गायक : उदित नारायण.अलका याग्निक.
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं
⭐
फिल्म : दो कलियाँ. १९६८
गाना : बच्चें मन के सच्चे.
गीत : संगीत : रवि. गायिका : लता
सितारे : विश्वजीत. माला सिन्हा. नीतू सिंह.
गाना सुनने व देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक को दवाएं.
*
----------
बाल दिवस : बच्चे मन के सच्चे : फ़िल्मी कोलाज : पृष्ठ : ७.
-----------
संपादन
शक्ति : शालिनी रेनू नीलम अनुभूति
*
![]() |
| जादू जादू : आज धरती से गगन हो रहा मिलन जादू : शक्ति प्रिया डॉ सुनीता मीना अनुभूति |
![]() |
गाड़ी को देख कितनी है नेक जीना सीखा रही है चलती ही जा रही है : शक्ति प्रिया रेनू सीमा अनुभूति |
![]() |
| * Shakti Dr Rashmi Arya Dr.Amardeep Narayan Bihar Sharif Supporting |
⭐
----------
समाचार : चित्र : विशेष : दृश्य माध्यम : न्यूज़ शॉर्ट रील : पृष्ठ : ११.
-----------
शक्ति प्रिया तनु सीमा अनुभूति
*
कार्टून : कोना : मधुप
*

कार्टून : कोना : मधुप
*
दैनिक समाचार : शिक्षण का गिरता स्तर.
*
*
आपसे डायरिया...पायरिया का स्पेलिंग ही पूछे न सर.... ! हमें कूट काहे रहें हैं.........।
*
रोज पता नहीं कहाँ कहाँ से इनसाइक्लोपीडिया
से सवाल ख़ोज ख़ोज कर पूछता रहता है..
तू अपना ज्ञान बढ़ाता है कि
हमारा टेस्ट लेता है, रे.. !
शिक्षण विधि : प्रयोगात्मक
भारत को जानो : बच्चों
नैनीताल की ख़ोज : लघु फिल्म : शक्ति दीप्ती
आज के ही दिन : १८ नवम्बर १८४१
पी बैरन
बाल मेला ; बाल दिवस : बचपन
न्यूज़ क्लिप : शक्ति प्रिया प्रेरणा डॉ. सुनीता मधुप
*
*
फोर स्क्वायर होटल : रांची : मार्स मिडिया ऐड : नई दिल्ली.समर्थित

----------
बाल दिवस : कला दीर्घा : पृष्ठ : ९.
----------
संपादन.
शक्ति मंजिता सोनी स्वाति शबनम
![]() |
| नन्ही शक्ति की कलाकृति : बुराई पर अच्छाई की विजय : कालिका : चयन शक्ति प्रिया फ़रहीन प्रेरणा |
![]() |
आते जाते लहरों की तरह साहिल पर आके लौट मत जाना : कला कृति : शक्ति नन्ही : डी ए वी *
रिश्तों की जमापूंजी ; बैंक ऑफ़ इंडिया : आर्य लक्की : प्रंबधक : समर्थित.
--------- फोटो दीर्घा : बच्चे मन के सच्चे : बाल दिवस : पृष्ठ : १२ -------- संपादन शक्ति डॉ.अनु रितु सीमा मीना |
*
![]() | ||
चाचा नेहरू के आर्दशों पर चलने का प्रयास :फोटो : मीडिया.शक्ति प्रिया डॉ.सुनीता सीमा
|
*
MS Media Powered
*
*
English Section.
*
⭐
*
Contents Page : English.
Cover Page : 0.
Contents Page : 1.
Shakti Editorial Page : 2.
Shakti Vibes English Page : 3
Shakti Editorial Writeups : 4.
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
Shakti Photo Gallery : English : Page : 6.
Shakti : Kriti Art Link : English : Page : 7
Days Special : English : Page : 8.
You Said It : Page : 9
*
Shakti.Pooja. Arya.Dr.Rajeev Ranjan. Child Specialist.Biharsharif. supporting
*
---------
Shakti Editorial : English Page : 2.
-----------
Editor.
Shakti Priya Seema Tanu Anubhuti
*
---------
Shakti Vibes : English Page : 3
-----------
Editor.
Shakti Priya Seema Java Tanu Sarvadhikari
*
Silent Worker.
*
*
Great things take time
*
Every Challenge is an opportunity to you dear
to grow a head positively
*
Be the best
*
Be the best you can be
Keep Going Ahead
*
Don't stop going a head until you remain very
proud of yourself
*
Silence : Success
*
Work hard in Silence let your Success make
your Noise.
*
photo : Shakti Sunita.
*
Improve not to Prove
*
Take time to improve yourself
Take time to improve yourself
but don't waste time to prove
*
Opportunities
*
Opportunities don't happen in fact you create them
with your positive effort
*
Let them beloved ones smile
*
Let you be the cause make beloved ones smile
for ever , you will be the happiest one in this world.
----------
Short Reel : News : Special : English : Page : 5.
----------
Editor
Shakti :Priya Madhvee Seema Tanu.
Indian Constitution Day.
with a decorative
*
*
Cartoon.
*
News : Increasing an indiscipline
act among the students
*
Guru Ji : Such a wicked and punishable
boy he has been
*
*
Student : Guru Ji ! Your style and face has been trending for me
Have been right follower of you since beginning
Student : Guru Ji ! Your style and face has been trending for me
Have been right follower of you since beginning
*
Editor.
Shakti Madhvee Shahnaj Suruchi
*
: Bal Mela : Fair Festival : English : News : 5
*
Remembering Chacha Nehru
*
Shakti : Shivani' Speech Visual
*
His Birthday being celebrated around 1964.
*
Having a fun in the Bal Fair Festivall
Remembering the days of Childhood
*
Shakti Priya Dr Sunita Madhup Anubhuti
*
News Visual : Clipping : 1. Shakti Shalini Prerna Manju
CR / Nalanda. I remember my school days while I was a student waited for 14 th of November. As in our school the entire day stood for the complete relaxation,cultural activities and entertainment.
Bal Divas falls annually on November 14 is very famous for the birthday celebration of the first and foremost Prime Minister of India, Pandit Jawahar Lal Nehru,our beloved chacha.
The Bal Divas Celebration reminds society of its duty to protect the happiness, education, and health of children. Schools all over India wear a festive look with cultural programs, fair festivals ,games, and activities which are both entertaining as well as instructive.
Continuing the same tradition on the occasion of Children’s Day, SP Arya DAV Public School with its enthusiastic teaching staff organizes a Bal Mela on 15 th of November 2025 Saturday at 11 a.m to 2 pm. Under the co curricular activity where the Students and kids show their creativity, imagination, and sense of style in the Fair Festival with the caring guidelines of the teaching staff and other members.
Really it reminds us that how much Chacha Nehru has been so caring for the kids and the children.
For gracing the festive occasion of fun and food Shakti Anjali , ARO,cum Principal with other principals Manoj Dubey, Govind Jee Tiwari, Piyal and Sanjay were available there.
The host principal Anshima Singh places her thankfulness for their benign presence in this Bal Mela.
News Clipping Editing : Shakti Dr.Bhwana Anshima Madhvee Sangita
Decorative : Shakti. Shalini Seema Alpana Farheen
*
--------
Shakti Photo Gallery : Bal Divas English : Page : 6.
---------
Editor
Shakti Manjita Seema Anubhuti Farheen
*
![]() |
Davian Children remembering their beloved chacha Nehru : Photo Collage : Shakti Priya Dr.Sunita Seema Anshima. -------- Child : Art Gallery : English : Page : 7. ---------- Editor Manjita Soni Swati Farheen. |
![]() |
| Memories of Bal Divas :Title Collage Art Work : Shakti Vidisha Nivedita Anjael Simran |
You Said It : Page : 9.
Editor
Shakti Priya Madhup Renu Anubhuti.
*
He Man : Dharmendra.
1935 - 2025.
*
who was completely attached with the soil of his village culture.
*






























































Very nice
ReplyDeleteThis new page created by the team is really appreciable. All the contents are rewind the time of early India.
ReplyDeleteThis page is very creative and beautiful ❤️ .
ReplyDeleteI visited this page and I liked it so much, beautiful work
ReplyDelete